UN में मुंह की खाने के बावजूद PAK राष्ट्रपति ने संसद में थपथपाई सरकार की पीठ

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी पाकिस्तानी संसद (नेशनल एसेंबली) के गुरुवार को संयुक्त सत्र को संबोधित किया. इस दौरान विपक्षी दलों के विरोध से बचने के लिए पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने कश्मीर राग अलापा. हालांकि उनकी यह चाल काम नहीं आई. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के भारत सरकार के फैसले का विरोध किया. पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समेत अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जोरशोर से उठाया.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की इमरान सरकार की कोशिशों का ही नतीजा रहा कि 50 साल बाद कश्मीर मसले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चर्चा हुई. हालांकि भारत ने इसका जमकर विरोध किया. आपको बता दें कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान ने चीन को मिलाकर कश्मीर मसले को उठाने की कोशिश की थी, लेकिन उनको मुंह की खानी पड़ी थी.

जब पाकिस्तान के राष्ट्रपति संसद में इमरान खान सरकार की पीठ थपथपा रहे थे, तभी दूसरी ओर पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियां विरोध प्रदर्शन कर रही थीं. इस दौरान पाकिस्तानी राष्ट्रपति अल्वी ने आरएसएस को भी जमकर कोसा, लेकिन उनकी यह रणनीति भी विरोध प्रदर्शन को नहीं रोक पाई. उन्होंने कहा कि पंडित जवाहर लाल नेहरू और महात्मा गांधी के हिंदुस्तान को आरएसएस बदल रहा है.

कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के मसले के अलावा पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने पुलवामा आतंकी हमले और वायुसेना के पायलट अभिनंदन रिहाई का भी जिक्र किया. इससे पहले पाकिस्तान पाकिस्तान की मुख्य विपक्षी पार्टियां पीएमएल-एन और पीपीपी ने नेशनल एसेंबली के संयुक्त सत्र के दौरान सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) को घेरने की पूरी तैयारी कर ली थी.

बुधवार को पीएमएल-एन और पीपीपी के नेताओं ने कहा था कि पकिस्तान के चुनाव आयोग के दो सदस्यों की असंवैधानिक तरीके से नियुक्त के खिलाफ नेशनल एसेंबली के संयुक्त सत्र के दौरान विरोध किया जाएगा. इसके अलावा गिरफ्तार किए गए सांसदों को पेश नहीं किए जाने का भी मुद्दा उठाया जाएगा. पीपीपी के नेता सईद नवीद कमर ने कहा था कि नेशनल एसेंबली के संयुक्त सत्र का शांतिपूर्ण चलाना बड़ा मुश्किल है.

पाकिस्तान अखबार डॉन ने पीएमएल-एन की इन्फॉर्मेशन सेक्रेटरी मरियम औरंगजेब के हवाले से बताया था कि पाकिस्तान की सत्तारूढ़ सरकार ने चुनाव आयोग के सदस्यों की गैर कानूनी तरीके से नियुक्त करके विवाद को आमंत्रित किया है.

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