आदिवासी बस्ती वार्ड नंबर 13 में मिसेस वीरेंद़ रघुवंशी ने गणेश आरती में भाग लिया


शिवपुरी आदिवासी बस्ती वार्ड नंबर 13 में भाजपा विधायक वीरेंद्र रघुवंशी की पत्नी विभा रघुवंशी ने गणेश आरती में भाग लिया .इस अवसर पर काफी हरिजन आदिवासी भाई बहन भी उपस्थित थे .आरती में काफी संख्या में वार्ड वासी महिला व पुरुष एकत्रित हुए एवं आरती के पश्चात विभा रघुवंशी का आदिवासी लोगों ने स्वागत सत्कार किया. आरती के पश्चात वार्ड वासियों को मिठाई वितरण का कार्य भी विभा रघुवंशी की ओर से किया गया .इस अवसर पर पत्रकार करुणेश शर्मा विनोद विकट मनीष बंसल साबिर खान इत्यादि मीडिया कर्मी भी उपस्थित थे विभा रघुवंशी सबसे काफी आत्मीयता से मिल रही थी. इस अवसर पर वार्ड 13 की पार्षद सरोज धाकड़ भी उपस्थित थी.


(संपादक करुणेश शर्मा की कलम)

कमलनाथ के पास ही रहेगी कमान प़देश अध्यक्ष की कमान सिंधिया फिर पिछड़े

पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद  पर फिलहाल कोई नई नियुक्ति नहीं की जाएगी. मौजूदा पीसीसी चीफ कमलनाथ ही इस पद पर बने रहेंगे.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की दौड़ में पिछड़ने के बाद अब ज्योतिरादित्य सिंधिया प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की रेस से भी आउट होते दिख रहे हैं. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष  पद को लेकर मचे घमासान के बीच पार्टी ने बड़ा फैसला लिया है. पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद पर फिलहाल कोई नई नियुक्ति नहीं की जाएगी. मौजूदा पीसीसी चीफ कमलनाथ ही इस पद पर बने रहेंगे.

सूत्रों के हवाले से ख़बर मिली है कि पीसीसी चीफ को लेकर हो रही सियासत और विवाद को देखते हुए पार्टी ने ये फैसला किया है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी निकट भविष्य में मध्य प्रदेश में कोई विवाद नहीं चाहती हैं. लिहाजा पीसीसी चीफ की नियुक्ति टाल दी गई है. पार्टी हाईकमान नहीं चाहता कि मध्य प्रदेश कांग्रेस के लिए अखाड़ा बन जाए और विवाद बढ़े.

PAK की धमकी पर सेना का जवाब- 71 से भी बुरा हाल करेंगे, पीढ़ियां याद रखेंगी

पाकिस्तान की ओर मिल रही धमकियों पर सेना ने करारा जवाब दिया है. सेना की चिनार कॉर्प्स के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लन ने बुधवार को कहा कि पाकिस्तानी सेना को हर कोशिश करने दीजिए, हम उनको करारा जवाब देंगे, जिसे उनकी पीढ़ियां याद रखेंगी. हम पाकिस्तान का 1971 से भी बुरा हाल करेंगे.

बता दें कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान सहित उनके कई मंत्री परमाणु हमले की धमकी दे चुके हैं. हालांकि हाल ही में इमरान ने अपने एक लेख में  बातचीत की ओर संकेत दिया था. दरअसल, जम्मू और कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है. वह इस मामले को कई देशों के सामने उठा चुका है, लेकिन हर जगह से उसे हार ही मिली.

सेना ने गिरफ्तार किए दो आतंकी

लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लन और जम्मू-कश्मीर पुलिस के एडीजी मुनीर खान ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने बताया कि भारतीय सेना ने आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकियों को गिरफ्तार किया है. दोनों आतंकियों को 22 अगस्त की देर रात बारामूला से गिरफ्तार किया गया. प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पकड़े गए आतंकी का वीडियो भी जारी किया गया. गिरफ्तार किए गए आतंकियों के नाम खलील अहमद और मोजाम खोकर हैं.

अधिकारियों ने कहा कि घाटी में पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ की कोशिश की जा रही है. पाकिस्तान कश्मीर में अशांति फैलाना चाहता है. पाक की सेना आतंकियों की मदद कर रही है. लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लन ने कहा कि कई आतंकी घुसपैठ की कोशिश में हैं. उन्होंने कहा कि पूछताछ में लश्कर के आतंकियों ने बताया कि नियंत्रण रेखा के पार आतंकी कश्मीर में अशांति फैलाने और हमले करने की योजना बना रहे हैं.

दिग्विजय समर्थकों ने उमंग सिंघार का उनके बंगले के सामने पुतला जलाया.

दिूग्विजय सिंह जिंदाबाद और उमंग सिंगार मुर्दाबाद के लगाए नारे।ऐसे दृश्य से कांग्रेस में कलह साफ ढेकी जा रही है ।

भोपाल मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार के वन मंत्री उमंग सिंघार ने पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह पर बड़ा वयान दिया था।जिसमें  वन मंत्री ने  दिग्जिवय सिंह को ब्लैकमेलर तक कह डाला था। सिंघार के इस बयान के विरोध में कई मंत्री भी सामने आये थे और उन्होंने दिग्विजय सिंह को प्रदेश हित में काम करने वाला नेता बताया था ।

सिंघार ने प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री सिंह पर आरोपों की झड़ी लगा दी थी । उन्होंने कहा था कि “ये सरकार और मंत्रियों को ब्लैकमेल करते हैं। 10 साल बनवास काटा इन्होंने। सरकार आ गई तो मलाई काटने आ गए। आम कार्यकतार् और जनता का क्या होगा। गुजरात तक शराब की सप्लाई करने में लगे हैं, अपने लोग बिठा रखे हैं। परिवहन विभाग किस तरह चला रहे हैं, यह सबको पता है। बेटे को स्थापित कर दिया है, अब चाहते क्या हैं।”
सिंघार ने कहा था कि “राज्य में कांग्रेस सरकार जिन मुद्दों को लेकर सत्ता में आई थी, उन्हें पूरा करना हमारा लक्ष्य है। राज्य में रेत खनन और अवैध शराब के कारोबार को दिग्विजय सिंह का संरक्षण है। रेत, शराब और परिवहन का इतिहास है, सबको पता है। अगर इसकी सीबीआई जांच हो जाए तो पता चल जाएगा कि वे कहां-कहां उलझे हुए हैं

बेटे से मिलने के लिए मांगा अप्वाइंटमेंट, वायरल हो रही दिग्विजय की ये चिट्ठी

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का एक पत्र इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. दिग्विजय सिंह ने यह पत्र अपने बेटे जयवर्द्धन सिंह को लिखा है, जो मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. इस पत्र के जरिए दिग्विजय ने अपने बेटे जयवर्द्धन सिंह से मिलने का समय मांगा है.

दिग्विजय सिंह ने अपने बेटे जयवर्द्धन सिंह को लिखे गए पत्र में कहा, ‘माह जनवरी से 15 अगस्त 2019 तक स्थानांतरण सहित विविध विषयों से संबंधित आवेदन पत्र आवश्यक कार्यवाही हेतु आपकी ओर अग्रेसित किए थे. मेरे द्वारा आपको पृथक से पत्र लिखकर मेरे पत्रों पर की गई कार्यवाही अवगत कराने एवं यदि किसी प्रकरण में कार्यवाही संभव नहीं है तो उसकी जानकारी देने का अनुरोध किया गया था. ऐसे में इस संबंध में जानने के लिए मैं आपसे 31 अगस्त 2019 से पूर्व भेंट करना चाहता हूं.’ उन्होंने कहा कि इसके लिए 31 अगस्त से पहले मुलाकात के लिए समय देने का कष्ट करें.

बता दें कि दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्द्धन सिंह मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार में नगरी विकास एवं आवास विकास मंत्री हैं. पिछले हफ्ते दिग्विजय की अपने मंत्री बेटे से मुलाकात हो गई है. हालांकि दिग्विजय सिंह ने अपने बेटे से मिलने के लिए ही समय नहीं मांगा था. कमलनाथ सरकार में सभी मंत्रियों के लिए ऐसे ही पत्र लिखकर समय की मांग की थी.

मध्य प्रदेश कांग्रेस के वन मंत्री उमंग सिंघार ने दिग्विजय सिंह पर कमलनाथ सरकार को अस्थिर करने का आरोप लगाते हुए सोनिया गांधी से शिकायत भी है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक वैकल्पिक सत्ता केंद्र बनाने की फिराक में हैं.

बता दें कि दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्द्धन सिंह मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार में नगरी विकास एवं आवास विकास मंत्री हैं. पिछले हफ्ते दिग्विजय की अपने मंत्री बेटे से मुलाकात हो गई है. हालांकि दिग्विजय सिंह ने अपने बेटे से मिलने के लिए ही समय नहीं मांगा था. कमलनाथ सरकार में सभी मंत्रियों के लिए ऐसे ही पत्र लिखकर समय की मांग की थी.

मध्य प्रदेश कांग्रेस के वन मंत्री उमंग सिंघार ने दिग्विजय सिंह पर कमलनाथ सरकार को अस्थिर करने का आरोप लगाते हुए सोनिया गांधी से शिकायत भी है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में एक वैकल्पिक सत्ता केंद्र बनाने की फिराक में हैं.

सिंघार ने लिखा है, ‘काफी दुख के साथ मैं इसे आपके संज्ञान में ला रहा हूं कि दिग्विजय सिंह खुद को वैकल्पिक सत्ता केंद्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश करते हुए कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं. वे लगातार मुख्यमंत्री और उनके कैबिनेट सहयोगियों को पत्र लिख रहे हैं और उन्हें सोशल मीडिया पर जारी कर रहे हैं. ऐसा करके वे विपक्षी बीजेपी को सरकार पर हमला करने के लिए गोला-बारूद मुहैया करा रहे हैं.’  

सिंघार पत्र में आगे लिखते हैं, ‘शुक्रवार 30 अगस्त को दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश सरकार के सभी मंत्रियों को एक ऐसा ही पत्र लिखकर उनकी ओर से किए गए तबादलों और पोस्टिंग की सिफारिशों पर कार्रवाई के बारे में स्पष्टीकरण मांगा. उन्होंने सोशल मीडिया पर भी पत्र जारी किया. इसके बाद विपक्षी बीजेपी ने इस अवसर को लपक लिया और सरकार पर हमला करते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह पर्दे के पीछे से सरकार चला रहे हैं.’

पी. चिदंबरम के बाद संकट में आए कांग्रेस के एक और ‘संकटमोचक’

कांग्रेस पार्टी की मुसीबत कम होते नहीं दिख रही है. देश भर में राजनीतिक संकट के वक्त उसके दो ‘संकटमोचक’ जांच एजेंसियों के शिकंजे में आ गए हैं. आईएनएक्स मीडिया केस में पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की गिरफ्तारी के 13 दिन बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता डीके शिवकुमार को प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में गिरफ्तार कर लिया. डीके शिवकुमार दक्षिण भारत में कांग्रेस के बड़े चेहरों में से एक रहे हैं.

हाई कोर्ट ने खारिज कर दी थी याचिका

दरअसल, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने डीके शिवकुमार के खिलाफ समन जारी किया था, जिसके खिलाफ शिवकुमार ने कर्नाटक हाई कोर्ट में याचिका दी थी. 29 अगस्त  को मामले पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने डीके शिवकुमार को कोई राहत नहीं दी और ईडी की समन को खारिज करने से मना कर दिया था.

13 घंटे ईडी ने की थी पूछताछ

वरिष्ठ कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार 2 सितंबर को ईडी के सामने कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तीसरी बार पूछताछ के लिए पेश हुए थे. ईडी ने इस मामले में शुक्रवार और शनिवार को 13 घंटे से अधिक समय तक कांग्रेस नेता से पूछताछ की थी.

आय से अधिक संपत्ति का चल रहा मामला

कर्नाटक में डीके शिवकुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला चल रहा है. 2017 में आयकर विभाग ने डीके शिवकुमार के 64 ठिकानों पर छापेमारी की थी. उनके खिलाफ टैक्स चोरी की शिकायतों पर यह कार्रवाई हुई थी. उस दौरान डीके शिवकुमार और अन्य कांग्रेस नेताओं ने राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया था.

आलाकमान के करीबी माने जाते हैं शिवकुमार

सिद्धारमैया के बाद कर्नाटक कांग्रेस में बड़े चेहरे के रूप में डीके शिवकुमार का नाम आता है. वो दक्षिणी कर्नाटक में पार्टी का चेहरा हैं. कांग्रेस आलाकमान के करीबी माने जाते हैं. गुजरात राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेसी विधायकों को कर्नाटक में शिवकुमार के रिजॉर्ट में ठहराया गया था. कांग्रेस के सबसे अमीर प्रत्याशियों में उनका नाम आता है. वो करीब 850 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हैं. डीके शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं. कर्नाटक की सियासत में वोक्कालिगा समुदाय को लिंगायत के बाद दूसरा किंगमेकर माना जाता है. जेडीएस प्रमुख देवगौड़ा इसी समुदाय से आते हैं.

पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम हिरासत में

पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम INX मीडिया केस में 22 अगस्त को गिरफ्तार किए गए थे. उनकी गिरफ्तारी से पहले काफी ड्रामा चला रहा था. पी. चिदंबरम कांग्रेस के एक मंझे हुए अनुभवी नेता हैं. यह अलग बात है कि कई अवसर पर चिदंबरम के निर्णय (जनलोकपाल आंदोलन और अन्ना हजारे की गिरफ्तारी) की काफी आलोचना हुई है.

राजीव गांधी सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिली

राजीव गांधी सरकार में पी. चिदंबरम कार्मिक मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय में उप-मंत्री के तौर पर कार्य कर चुके हैं. साल 1986 में पी. चिदंबरम को लोक-शिकायत व पेंशन मंत्रालय के साथ कार्मिक मंत्रालय में भी मंत्री पद मिला. साल 1986 के अक्टूबर में पी. चिदंबरम को केन्द्रीय गृह मंत्रालय में, आंतरिक सुरक्षा मंत्री का पदभार दिया गया. साल 1991 में पी. चिदंबरम को राज्य मंत्री के पद पर वाणिज्य मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभारी बनाया गया. साल 1995 में वह दोबारा इस पद पर आसीन हुए थे.

साल 2008 में बने गृहमंत्री

साल 2004 में मनमोहन सरकार में दोबारा पी. चिदंबरम को वित्त-मंत्रालय सौंपा गया. इस पद पर वह 2008 तक रहे. साल 2008 में दिल्ली में हुए आतंकवादी धमाकों के बाद तत्कालीन गृहमंत्री शिवराज पाटिल के इस्तीफा दिए जाने के बाद पी. चिदंबरम को गृहमंत्री बनाया गया था. हालांकि अब चिदंबरम सीबीआई हिरासत में हैं.

ग्वालियर संभाग के नए कमिश्नर बीएम ओझा ने संभागायुक्त का पदभार संभाला

ग्वालियर। ग्वालियर संभाग के नए कमिश्नर बीएम ओझा ने मंगलवार को मोती महल स्थित संभागायुक्त कार्यालय पहंुच कर पदभार ग्रहण कर लिया। उन्होने यहंा निवर्तमान कमिश्नर बीएम शर्मा की जगह पदभार गृहण किया है सुबह कलेक्टर अनुराग चैधरी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने संभागायुक्त कार्यालय में उनकी आगवानी की। कमिश्नर बीएम ओझा इससे पूर्व ग्वालियर में एडीएम और निगमायुक्त की जिम्मेवारी संभाल चुके हैं पदभार गृहण करने के बाद उन्होने कहा कि शासन की योजनाओं को कैसे आम जन तक पहंुचाया जाए एवं राजस्व वसूली में तेजी लाई जाए यही उनकी पहली प्राथमिकता होगी । साथ उन्होने विकास कार्यों को तीव्र गति से पूरा करने पर भी अधिकारियों से चर्चा की।

गुना–शिवपुरी संसदीय क्षेत्र में रेल सुविधायों के विस्तार हेतु सांसद के पी यादव ने जनता से सुझाव मांगे.

शिवपुरी गुना–शिवपुरी संसदीय क्षेत्र में रेल सुविधायों के विस्तार के लिये सांसद केपी यादव ने 12 सितंबर तक क्षेत्र की जनता और प़बुद्ध नागरिकों से अपने सुझाव मांगे हैं.
के पी यादव ने अपने ट्विटर हैंडल पर एक ट्विट कर अपनी मंशा जाहिर की है.
जागरुक नागरिक अपने सुझाव उन्हें पत्र लिखकर, व्हाटएप,ईमेल के माध्यम से भेज सकते हैं.

फिर वॉर जोन बना अफगानिस्तान, अमेरिकी सैनिकों के जाने के बाद किसका होगा नियंत्रण?

18 साल से युद्ध की आग में जल रहा अफगानिस्तान31 अगस्त को अफगानिस्तान में फिर छिड़ी जंगअपनी सेना वापस बुलवा रहा है अमेरिकापिछले 18 साल से युद्ध की आग में जल रहे अफगानिस्तान की दो एकदम विपरीत तस्वीरें आज दुनिया को देखने को मिल रही हैं. एक तरफ जहां तालिबान के साथ अमेरिका शांति के लिए नौवें दौर की वार्ता कर रहा है वहीं दूसरी ओर कुंदूज-हेलमंड जैसे उत्तरी क्षेत्रों में अफगान सुरक्षाबलों और तालिबान लड़ाकों के बीच घातक संघर्ष छिड़ा हुआ है.

एक तरफ जहां अमेरिका तालिबान से जल्द से जल्द समझौता कर अपने सैनिकों को वापस ले जाने पर अड़ा है वहीं दूसरी ओर अफगानिस्तान की आधिकारिक सरकार इस वार्ता का अभी तक हिस्सा भी नहीं है. ऐसे में लोगों के मन में कई सवाल हैं कि क्या शांति वार्ता सफल होगी? और अगर शांति समझौता कर अमेरिकी सैनिक चले जाते हैं तो तालिबान की सत्ता में कितनी और कैसी हिस्सेदारी होगी. अफगानिस्तान के बाकी गुटों की इसपर क्या प्रतिक्रिया होगी. सरकार के वर्तमान सेटअप का क्या होगा. सिविल सोसाइटी और अन्य सामाजिक संगठनों के लिए तालिबान को सत्ता में स्वीकार करना क्या आसान होगा?

फिर वॉर जोन बना अफगानिस्तान

यूनाइटेड नेशन के अनुसार पिछले एक साल में अफगानिस्तान के संघर्ष में 3804 नागरिकों की जान गई. जिनमें 900 बच्चे शामिल थे. जबकि 7 हजार से अधिक लोग घायल हुए. लड़ाई थम नहीं रही बल्कि तेज ही हो रही है. अगस्त माह के आखिरी दिन और इस महीने के शुरुआती 2 दिनों में हुए हिंसक संघर्ष अफगानिस्तान के फिर से वॉर जोन बनने की कहानी कहते हैं.

31 अगस्त को अफगानिस्तान के उत्तर में स्थित कुंदूज शहर में तालिबान और सरकारी सुरक्षा बलों के बीच भीषण संघर्ष छिड़ गया.  टकराव में 36 तालिबान लड़ाके मारे गए. तीन नागरिकों की भी मौत हो गई. तालिबान लड़ाकों ने शहर के कई घरों में अपना ठिकाना बना लिया है और वे शहर के मुख्य अस्पताल में भी घुस गए हैं. वे वहीं से सरकारी बलों और आम नागरिकों पर हमले कर रहे हैं.

–    1 सितंबर को तालिबान ने अफगानिस्तान के दूसरे शहर पुली खुमारी पर हमला किया. शहर पर नियंत्रण के लिए दोनों पक्षों की ओर से गोलीबारी जारी है.

–    2 सितंबर को बागलान प्रांत में सुरक्षा बलों और तालिबानी आतंकवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में कम से कम 9 लोग मारे गए तथा 27 अन्य घायल हो गए. तालिबानी आतंकवादियों ने हुसैन खिल तथा जमान खिल इलाके में सुरक्षा बलों पर हमला किया. सेना ने उन्हें खदेड़ दिया.

किन इलाकों पर बर्चस्व के लिए जारी है जंग

अफगान लोकल मीडिया के अनुसार कुंदूज, तकहार, बदक्शन, बल्ख, फराह और हेरात में नियंत्रण के लिए तालिबान और अफगान सेनाओं में घमासान संघर्ष छिड़ा हुआ है. इस लड़ाई के कारण काबुल-बाघलान और बाघलान-कुंदूज हाईवे भी ब्लॉक है. पूरा का पूरा उत्तरी अफगानिस्तान वॉर जोन में तब्दील होता हुआ दिख रहा है.

शांति वार्ता से कितनी उम्मीदें

कतर में अमेरिका और तालिबान के बीच 9 दौर की बातचीत हो चुकी है. दोनों पक्ष जल्द ही समझौते की उम्मीद जता रहे हैं. तालिबान की शर्त है कि अमेरिकी सुरक्षा बल अफगानिस्तान से बाहर जाएं. बदले में अमेरिका तालिबान से ये गारंटी चाहता है कि उसके सैनिकों के जाने के बाद अफगानिस्तान की जमीन आईएसआईएस और अलकायदा जैसे अमेरिका विरोधी आतंकी संगठनों की अड्डा नहीं बनेगी. अमेरिका 28 सितंबर को होने वाले अफगान राष्ट्रपति चुनाव से पहले इस समझौते का ऐलान करना चाहता है.

तालिबान पर अमेरिका को कितना भरोसा?

अमेरिकी सैनिकों को अफगानिस्तान से निकालने के लिए भले ही तालिबान से ट्रंप प्रशासन वार्ता कर रहा है लेकिन शांति की दिशा में तालिबान पर उसे कितना भरोसा है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिका नाटो सैनिकों को पूरी तरह से बाहर ले जाने का इच्छुक भी नहीं है. अभी अफगानिस्तान में नाटो और सहयोगी देशों के 30 हजार से अधिक सैनिक हैं जिनमें से 14500 अमेरिकी सैनिक हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप इनमें से अधिकांश सैनिकों को वापस बुलाना चाहते हैं लेकिन 8600 सैनिकों को स्थायी तौर पर निगरानी के लिए वहां रखने की मंशा भी रखते हैं. अब देखना होगा कि तालिबान इस बात के लिए क्या राजी होगा.

तालिबान को स्वीकार कर पाएगा अफगान समाज?

अमेरिका और तालिबान को शांति वार्ता से भले ही काफी उम्मीदें हैं लेकिन अफगान समाज के सामने कई सवाल मुंह बाए खड़े हैं. तालिबान की इस शांति वार्ता की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2 सितंबर को पहली बार अमेरिकी वार्ताकार जलमय खलीलजाद ने समझौते की शर्तों से अफगान राष्ट्रपति और सीईओ को अवगत कराया.

दरअसल ये अफगान शांति वार्ता का पहला चरण है और इसके बाद दूसरा चरण शुरू होगा. जिसमें अफगान सरकार, सिविल सोसाइटीज और बाकी सामाजिक संगठनों और गुटों को शामिल होना है. अब सवाल उठता है कि तालिबान के कट्टर राज का पुराना अनुभव देखते हुए अफगान समाज शासन में तालिबान की भागीदारी को क्या सहन कर पाएगा?

एक अनुमान के मुताबिक अफगानिस्तान पर नियंत्रण के लिए 18 साल से जारी संघर्ष में विदेशी फौजों के अलावा 3,50,000 अफगान सैनिक और पुलिसकर्मी मोर्चे पर हैं. जबकि दूसरी ओर तालिबान की ओर से 40 हजार के करीब लड़ाके युद्ध में शामिल हैं. देश के 58 फीसदी हिस्से पर अफगान सुरक्षाबलों जबकि 19 फीसदी इलाके पर तालिबान का कब्जा माना जाता है. शेष 22 फीसदी इलाकों पर भी नियंत्रण के लिए संघर्ष जारी है.

अब शांति वार्ता के जरिए अगर अमेरिकी सैनिकों की वापसी का रास्ता बनता है तो उसके बाद सत्ता संघर्ष नहीं होगा इसकी गारंटी कोई नहीं दे सकता. पाकिस्तान, पाकिस्तान समर्थित तालिबान और चीन की क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाएं वहां राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ावा दे सकती हैं. ऐसे में अफगानिस्तान में भारत की ओर से चलाई जा रही विकास परियोजनाओं पर भी खतरा उत्पन्न होगा. जाहिर है विकास का काम अगर रुकता है तो अफगान समाज और लोगों की मुश्किलें बढ़ेंगी. इन सब बातों पर आने वाले वक्त में दुनिया की निगाहें होंगी.