*लाभ के पदों पर विराजमान सिंधिया *समर्थक* इस्तीफे क्यों नहीं दे रहे…..?????

[संपादक करुणेश शर्मा की कलम से]***
कांग्रेस पार्टी का सारे देश में ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है कांग्रेस पार्टी आपातकाल के दौर से गुजर रही है. मोदी व अमित शाह की जोड़ी ने बीजेपी को नंबर एक पार्टी बना दिया है . देश की जनता नरेंद्र मोदी और बीजेपी के अलावा किसी को भी सत्ता में देखना नहीं चाह रही है , यह लोकसभा चुनाव में साबित हो चुका है . ऐसे कठिन समय में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में अपनी ग्लैमरस इमेज का उपयोग करके कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचा दिया, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी ईमानदार छवि ग्लैमरस नेता की इमेज व देश के बड़े नेता की तरह मेहनत ना करके, सारे मध्यप्रदेश में कार्यकर्ता की तरह से मेहनत की, ज्योतिरादित्य सिंधिया के काफी समर्थक भी विधायक बने तथा कांग्रेस को मध्य प्रदेश में सत्ता तक पहुंचाया.
किंतु जब मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री बनाने की बात सामने आई तो हाईकमान ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के स्थान पर कमलनाथ को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया, कांग्रेस हाईकमान ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को उनकी मेहनत का कोई फल ना देते हुए उन्हें एक तरफ कर दिया गया. एक तरह से यह उनके साथ नाइंसाफी हुई, जो मध्य प्रदेश की जनता को भी अच्छी नहीं लगी.
ऐसे समय में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बड़प्पन का परिचय देते हुए , खामोश रहकर कांग्रेस पार्टी के लिए कार्यकर्ता के रूप में कार्य करते हुए, लोकसभा चुनाव में अपने मेहनत का परिचय दिया ,प्रचार प्रसार किया ,किंतु मानसिक रूप से इस समय में वे काफी टूट चुके थे.
प्रदेश कांग्रेस कमेटी में चीफ को चुनने की जब बारी आई तो हाईकमान ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को पीसीसी चीफ बनाने का बिल्कुल मन बना लिया था .ज्योतिरादित्य सिंधिया का पीसीसी चीफ बनना लगभग तय था .किंतु ऐन वक्त पर मध्यप्रदेश में कांग्रेस के गुटीय मोर्चे ने खेल बिगाड़ दिया अब नए नए नाम पीसीसी चीफ के लिए सुनाई दे रहे हैं ,जो अपनी सीट भी मुश्किल से जीत पाए हैं, वह भी पीसीसी चीफ की दौड़ में अपने आपको बता रहे हैं ऐसे समय में ज्योतिरादित्य सिंधिया बिल्कुल मौन हैं. किंतु उनके समर्थक लगातार ज्योतिरादित्य सिंधिया को पीसीसी चीफ बनाने के लिए एकजुट हो रहे हैं , कई संगठन के पदाधिकारियों ने भी अपने पदों से इस्तीफा देने की घोषणा की है.
यह ज्योतिरादित्य सिंधिया का कठिन समय है उनके समर्थकों का यह दायित्व है कि वे ऐसे कठिन समय में ज्योतिरादित्य सिंधिया का साथ दें , विशेषकर वह कार्यकर्ता जो लाभ के पदों पर बैठे हुए हैं . संवैधानिक पदों पर बैठकर जो बहुत बड़े नाम बन चुके हैं. उनके त्याग पत्रों की घोषणा का जनता को बेसब्री से इंतजार है. लाभ के पदों पर बैठे हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक अगर सोनिया गांधी को अपने त्यागपत्र सौंप कर यह बात कहें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया पीसीसी चीफ नहीं तो, हम भी कांग्रेस में नहीं , ऐसा करने पर कांग्रेस की चीफ सोनिया गांधी ज्योतिरादित्य सिंधिया को पीसीसी चीफ बनाने के लिए विचार कर सकती है . जनता को भी लाभ के पदों पर बैठे ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों का त्यागपत्र का इंतजार है.***

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