विराट कोहली ने तोड़ा धोनी का रेकॉर्ड, बने भारत के सबसे कामयाब टेस्ट कप्तान

जमैका 
भारतीय क्रिकेट टीम ने वेस्ट इंडीज को जमैका टेस्ट में 257 रनों से हराकर दो टेस्ट मैचों की सीरीज 2-0 से अपने नाम कर ली। भारत ने पहला टेस्ट 318 रनों से जीता था। विराट कोहली की कप्तानी में भारत की यह 28वीं टेस्ट जीत है। इसके साथ ही कोहली ने एक और रेकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। वह भारत के सबसे कामयाब टेस्ट कप्तान बन गए हैं। उन्होंनेमहेंद्र सिंह धोनी के 27 टेस्ट जीत के रेकॉर्ड को तोड़ दिया। 
भारतीय टीम ने वेस्ट इंडीज के सामने चौथी पारी में 468 रनों का लक्ष्य रखा था, लेकिन मैच के चौथे दिन दूसरे सेशन में विंडीज की टीम 210 रनों पर ऑल आउट हो गई। भारत ने अपनी पहली पारी में 416 रन बनाने के बाद वेस्ट इंडीज को 117 रनों पर ऑल आउट कर दिया था। 299 रनों की बड़ी बढ़त होने के बावजूद कोहली ने फॉलोऑन न देने का फैसला किया और दोबारा बल्लेबाजी की। अपनी दूसरी पारी में भारत ने चार विकेट पर 168 रन बनाकर पारी घोषित कर दी थी।

जीत के बाद कप्तान कोहली ने कहा कि जीत का यह रेकॉर्ड इस टीम के बिना संभव नहीं था। उन्होंने इस मौके पर गेंदबाजों की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा कि इनके बिना यह संभव नहीं था। 

कप्तानमैचजीतहारड्रॉ/टाईजीत %विराट कोहली4828101058.33महेंद्र सिंह धोनी6027181545.00सौरभ गांगुली4921131542.86मोहम्मद अजहरुद्दीन4714141929.79मंसूर अली खां पटौदी409191222.50सुनील गावसकर47983019.15राहुल द्रविड़25861132.00बिशन सिंह बेदी22611527.27सचिन तेंडुलकर25491216.00कपिल देव34472311.76

कोहली ने अपने 48वें टेस्ट मैच में यह जीत हासिल की। वहीं महेंद्र सिंह धोनी ने 60 में से 27 मैच जीते थे और सौरभ गांगुली ने 49 में से 21 मैचों में जीत हासिल की थी। मोहम्मद अजहरुद्दीन ने 14 टेस्ट मैचों में जीत हासिल की थी। कोहली की अगुआई में अब तक भारत सिर्फ 10 टेस्ट हारा है जबकि धोनी की कप्तानी में टीम को 18 मैचों में शिकस्त का सामना करना पड़ा। भारत के बाहर यह कोहली की 13वीं जीत थी। इस लिहाज से भी वह सबसे सफल भारतीय कप्तान हैं। उन्होंने सीरीज के पहले मैच में सौरभ गांगुली के 11 जीत के रेकॉर्ड को तोड़ा था। 

वनडे में धोनी सबसे आगे 
वनडे की बात करें तो धोनी सबसे सफल भारतीय कप्तान हैं। उन्होंने 200 में से 110 मैच जीते हैं। मोहम्मद अजहरुद्दीन 90 और सौरभ गांगुली ने 76 मुकाबले जीते हैं। वहीं विराट कोहली ने 80 में से 58 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मुकाबले जीते हैं। 

ज्योतिरादित्य सिंधिया केे समर्थन में समर्थक बोतल मेंं पेट्रोल ले पहुंचा



ग्वालियर  के एक समर्थक ने आत्मदाह का प्रयास किया. सिंधिया की गाड़ी के आगे समर्थक आनंद अग्रवाल बोतल में पेट्रोल लेकर खड़ा हो गया. इसके बाद खुद को जलाने की कोशिश करने लगा. गाड़ी में बैठे सिंधिया ने अंदर से ही हाथ हिलाकर उसे ऐसा करने से मना किया. इसके बाद उसके हाथ से बोतल लेकर वहां मौजूद लोग उसे गाड़ी से दूर ले गए.

पूरा मामला

दरअसल, ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर जैसे ही पहुंचे, वहां सैकड़ों की संख्या में मौजूद समर्थकों ने उनका भव्य स्वागत किया और जोर-जोर से सिंधिया जिंदाबाद के नारे लगाने लगे. इसी बीच उनका एक समर्थक पानी की बोतल में पेट्रोल लेकर उनकी गाड़ी के सामने आ गया, जिसे देख गाड़ी में बैठे हुए सिंधिया ने उसे हाथ हिलाकर मना किया. बता दें कि सिंधिया कुछ कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए ग्वालियर आए हैं. वे यहां कुछ समर्थकों से मिलने के लिए उनके घर भी जाएंगे.

सैकड़ों की संख्या में मौजूद समर्थकों ने सिंधिया का भव्य स्वागत किया

इस समय मध्य प्रदेश में सिंधिया को पीसीसी चीफ बनाने की मांग जोरों पर है. सिंधिया समर्थक सोनियां गांधी को पत्र लिखकर और होर्डिंग के जरिए अपनी बात पहुंचा रहे हैं.

पीसीसी चीफ पद के लिए दावेदारी के मुद्दे पर सिंधिया ने कहा, “मैं किसी अगर-मगर बात का जवाब नहीं देता. हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि हाईकमान जो फैसला करेगा वह मंजूर होगा. वहीं गुटबाजी पर उन्होंने बोला कि कांग्रेस एक है.

मध्य प्रदेश: कांग्रेस में अंदरूनी कलह खुल कर आई सामने, शिवराज सिंह ने कहा सीएम तो कमलनाथ लेकिन सरकार…

भोपाल: मध्य प्रदेश में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्वजिय सिंह द्वारा प्रदेश के मंत्रियों को हाल ही में पत्र लिखे जाने और इस पर राज्य के वन मंत्री एवं आदिवासी नेता उमंग सिंघार के पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को एक शिकायती पत्र लिखे जाने के बाद सत्तारूढ़ दल में अंदरूनी कलह खुल कर सामने आ गई है. वहीं, भाजपा ने आरोप लगाया कि राज्य में पर्दे के पीछे से सरकार चलाई जा रही है. राज्य में 15 बरसों तक विपक्ष में रहने के बाद महज नौ महीने पहले कांग्रेस सत्ता में लौटी है. बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दावा किया कि राज्य में अभूतपूर्व संवैधानिक संकट पैदा हो गया है क्योंकि मुख्यमंत्री तो कमलनाथ हैं लेकिन सरकार दिग्विजय सिंह चला रहे हैं. सिंघार ने सोनिया को पत्र लिख कर रविवार को आरोप लगाया कि वह (दिग्विजय) खुद को प्रदेश में ‘पावर सेंटर’ के रूप में स्थापित कर कमलनाथ सरकार को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं. 

सोनिया को उनके (सिंघार) द्वारा पत्र लिखे जाने के बारे में पूछे जाने पर सिंघार ने ‘पीटीआई-भाषा’ को सोमवार को बताया, ‘हां, मैंने सोनियाजी को पत्र लिखा है. इसमें गलत क्या है.’ सिंघार ने पार्टी अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा है, ‘…मंत्री का अपने मुख्यमंत्री के प्रति उत्तरदायित्व होता है. दिग्विजय सिंह राज्यसभा सदस्य हैं. वह पत्र लिख कर मंत्रियों से ट्रांसफर-पोस्टिंग का हिसाब ले रहे है, जो अनुचित है…’ इस बीच, मध्य प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंह वर्मा एवं जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा खुल कर दिग्विजय के समर्थन में आए और उन्हें पार्टी का वरिष्ठ नेता बताया. 

उल्लेखनीय है कि वर्मा को मुख्यमंत्री कमलनाथ का करीबी समर्थक माना जाता है, जबकि शर्मा मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय के कट्टर समर्थक हैं. वर्मा ने इंदौर में संवाददाताओं से कहा, “…दिग्विजय प्रदेश में हमारे सबसे वरिष्ठ नेता हैं। उन्हें (लम्बित कामों को लेकर) हम मंत्रियों को फोन कर सीधे आदेश देना चाहिए.’ शर्मा ने दिग्विजय का बचाव करते हुए कहा, ‘दिग्विजय सांसद होने के साथ-साथ पूर्व मुख्यमंत्री भी हैं.  इसलिए उनके द्वारा मुख्यमंत्री और मंत्रियों को पत्र लिखने में कुछ भी गलत नहीं है. लोग अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर उनके पास आते हैं और वह पत्र लिख कर लोगों की इन समस्याओं को निपटारा करने के लिए कहते हैं.’

गौरतलब है कि दिग्विजय ने प्रदेश सरकार के मंत्रियों को हाल ही में पत्र लिख कर तबादलों और अन्य कार्यो के बारे में लिखे गये उनके पत्रों पर की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी मांगी थी.  उन्होंने सभी मंत्रियों से मिलने के लिये 31 अगस्त तक समय देने का आग्रह किया था, ताकि वह जान सकें कि उनकी सिफारिशों पर क्या कार्रवाई की गई है. वह मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं.  पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य की कांग्रेस सरकार को आड़े हाथ लेते हुए ट्विटर पर लिखा, ‘मध्यप्रदेश में अभूतपूर्व संवैधानिक संकट पैदा हो गया है. मुख्यमंत्री कमलनाथ हैं, लेकिन सरकार दिग्विजय सिंह चला रहे हैं. उनकी (दिग्विजय) चिठ्ठी (मध्यप्रदेश के मंत्रियों को) जा रही है, कौन-कौन से काम हुए…बताओ. क्या मंत्री को धमकाने का अधिकार उनको है? इसलिए कांग्रेस को स्थिति स्पष्ट कर इस संकट को समाप्त करना चाहिए.’

चौहान ने कहा, ‘कांग्रेस हाईकमान को हस्तक्षेप कर यह तय करना चाहिए कि सरकार कौन चलाए. सरकार कोई और चलाए और मुख्यमंत्री पद की शपथ कोई और ले, यह होना नहीं चाहिए. पर्दे के पीछे से सरकार नहीं चलनी चाहिए. सामने से चलनी चाहिए, पारदर्शी तरीके से चलनी चाहिए.’ बीजेपी नेता ने कहा, ‘कांग्रेस को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मुख्यमंत्री पद की जिसने शपथ ली है, वही सरकार चलाए…इसलिए कांग्रेस को स्थिति स्पष्ट कर इस संकट को समाप्त करना चाहिए.’ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा, ‘बीजेपी शुरू से यह कहती रही है कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार में कहने को भले ही एक मुख्यमंत्री हो, लेकिन कई और भी मुख्यमंत्री हैं, जो पर्दे के पीछे से सरकार को चला रहे हैं. मंत्री उमंग सिंघार का स्वीकार करना बीजेपी के इस बयान को मजबूती देती है.’

दुश्मन के परखच्चे उड़ाएगा अपाचे, वायुसेना में शामिल 8 लड़ाकू हेलिकॉप्टर

भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ ‘अपाचे’
8 अपाचे लड़ाकू हेलिकॉप्टर वायुसेना के बेड़े में शामिल
वायुसेना प्रमुख की मौजूदगी में पठानकोट एयरबेस में शामिल
कुल 22 अपाचे हेलिकॉप्टर मिलेंगे भारतीय वायुसेना को

भारतीय वायुसेना अब और भी मजबूत हो गई है, हिंदुस्तान को आंख दिखाने से पहले अब दुश्मन दस बार सोचेगा. दुनिया के सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमानों में से एक अपाचे हेलिकॉप्टर अब भारतीय वायुसेना का हिस्सा है. मंगलवार सुबह वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ की मौजूदगी में पंजाब के पठानकोट एयरबेस पर 8 अपाचे हेलिकॉप्टर को शामिल कराया गया. ये वही पठानकोट एयरबेस है जहां पर 2016 में पाकिस्तान से आए आतंकियों ने हमला किया था.

एयरबेस पर वायुसेना में शामिल होने से पहले अपाचे हेलिकॉप्टर के सामने नारियल फोड़ा गया और पारंपरिक तौर पर इसका स्वागत वायुसेना के बेड़े में किया गया.

आपको बता दें कि 60 फुट ऊंचे और 50 फुट चौड़े अपाचे हेलिकॉप्टर को उड़ाने के लिए 2 पायलट होने जरूरी हैं. अपाचे हेलिकॉप्टर के बड़े विंग को चलाने के लिए 2 इंजन होते हैं, इस वजह से इसकी रफ्तार बहुत ज्यादा है.

2 सीटर इस हेलिकॉप्टर में हेलिफायर और स्ट्रिंगर मिसाइलें लगी हुई हैं. इसमें एक सेंसर भी लगा है, जिसकी वजह से ये हेलिकॉप्टर रात में भी ऑपरेशन को अंजाम दे सकता है. इस हेलिकॉप्टर की अधिकतम स्पीड 280 किलोमीटर प्रति घंटा है. अपाचे हेलिकॉप्टर का डिजाइन ऐसा है कि इसे रडार पर पकड़ना मुश्किल होता है.

गौरतलब है कि अमेरिका निर्मित ये अपाचे हेलिकॉप्टर AH-64E दुनिया का सबसे एडवांस मल्टी रोल कॉम्बेट हेलिकॉप्टर है. भारत और अमेरिका के बीच सितंबर, 2015 में एक बड़ी डील हुई थी, जिसके तहत 22 हेलिकॉप्टर भारत को मिलने वाले हैं. इससे पहले 27 जुलाई को 4 हेलिकॉप्टर मिल चुके हैं, अब आठ हेलिकॉप्टर मंगलवार को शामिल हुए.

हथियारों से लैस और तेज गति से उड़ान भरता ‘अपाचे’ हेलिकॉप्टर जमीन से होने वाले तमाम हमलों का जवाब दे सकता है. अपने मिलीमीटर वेव रडार की मदद से यह हथियारों से लैस दुश्मनों की मौजूदगी का पता लगा सकता है और उन्हें लेजर गाइडेड हेलफायर मिसाइल, हाइड्रा-70 एंटी ऑर्मर रॉकेट और 30 मिमी गन से बर्बाद कर सकता है.

यह हेलिकॉप्टर थर्मल इमेजिंग सेंसर का इस्तेमाल करके छिपे आतंकवादियों का भी पता लगा सकता है और आतंकियों से अपनी 30 mm गन या एंटी पर्सनल रॉकेट्स से निपट सकता है.

भारत को इस वक्त दो तरफ से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, एक तरफ पाकिस्तान लगातार कश्मीर को लेकर भारत को धमकी दे रहा है तो दूसरी ओर उसका चीन भी साथ दे रहा है. अब भारत इन्हीं मोर्चों के लिए हर तरह से तैयार हो रहा है, ताकि समय आने पर दुश्मन के दांत खट्टे कर सकें.

बकरी चराने वाला डॉक्टर बन कर रहा है लुधावली की जनता का इलाज.

शिवपुरी यूं तो शिवपुरी शहर में बड़े-बड़े अजूबे देखे वह सुने गए हैं अभी तक आपने झोलाछाप डॉक्टरों के बारे में सुनावा पढ़ा हुआ झोलाछाप डॉक्टर मकड़जाल की तरह शिवपुरी जिले को अपनी चपेट में लिए हुए हैं. इससे भी एक कदम आगे बढ़कर एक बकरी चराने वाला दीवान सिंह पाल लोधावली शिवपुरी में मरीजों का इलाज एलोपैथी पद्धति से कर रहा है वह मरीजों को बोतल चढाता है इंजेक्शन लगाता है वह बड़ी-बड़ी हाई पावर रेंजर की गोलियां देता है . इससे कई बार मरीज गोली खाकर आईसीयू शिवपुरी अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं. प्रशासन व सीएचएमओ के संरक्षण में यह डॉक्टर बनकर इलाज कर लाखों का स्वामी बन चुका है. इसके पास प्रशासन की कई बार शिकायतें हुई हैं किंतु ऊपरी सेटिंग से यह लुदावली वार्ड 17 शिवपुरी नगर पालिका में स्थित है वहां जनता को ऐलो पद्धति से इलाज दे रहा है. कलेक्टर महोदया क्या इस डॉक्टर से जनता को बचाने का प्रयास करेंगे.
[करुणेश शर्मा शिवपुरी की कलम से]

*लाभ के पदों पर विराजमान सिंधिया *समर्थक* इस्तीफे क्यों नहीं दे रहे…..?????

[संपादक करुणेश शर्मा की कलम से]***
कांग्रेस पार्टी का सारे देश में ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है कांग्रेस पार्टी आपातकाल के दौर से गुजर रही है. मोदी व अमित शाह की जोड़ी ने बीजेपी को नंबर एक पार्टी बना दिया है . देश की जनता नरेंद्र मोदी और बीजेपी के अलावा किसी को भी सत्ता में देखना नहीं चाह रही है , यह लोकसभा चुनाव में साबित हो चुका है . ऐसे कठिन समय में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में अपनी ग्लैमरस इमेज का उपयोग करके कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचा दिया, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी ईमानदार छवि ग्लैमरस नेता की इमेज व देश के बड़े नेता की तरह मेहनत ना करके, सारे मध्यप्रदेश में कार्यकर्ता की तरह से मेहनत की, ज्योतिरादित्य सिंधिया के काफी समर्थक भी विधायक बने तथा कांग्रेस को मध्य प्रदेश में सत्ता तक पहुंचाया.
किंतु जब मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री बनाने की बात सामने आई तो हाईकमान ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के स्थान पर कमलनाथ को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया, कांग्रेस हाईकमान ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को उनकी मेहनत का कोई फल ना देते हुए उन्हें एक तरफ कर दिया गया. एक तरह से यह उनके साथ नाइंसाफी हुई, जो मध्य प्रदेश की जनता को भी अच्छी नहीं लगी.
ऐसे समय में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बड़प्पन का परिचय देते हुए , खामोश रहकर कांग्रेस पार्टी के लिए कार्यकर्ता के रूप में कार्य करते हुए, लोकसभा चुनाव में अपने मेहनत का परिचय दिया ,प्रचार प्रसार किया ,किंतु मानसिक रूप से इस समय में वे काफी टूट चुके थे.
प्रदेश कांग्रेस कमेटी में चीफ को चुनने की जब बारी आई तो हाईकमान ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को पीसीसी चीफ बनाने का बिल्कुल मन बना लिया था .ज्योतिरादित्य सिंधिया का पीसीसी चीफ बनना लगभग तय था .किंतु ऐन वक्त पर मध्यप्रदेश में कांग्रेस के गुटीय मोर्चे ने खेल बिगाड़ दिया अब नए नए नाम पीसीसी चीफ के लिए सुनाई दे रहे हैं ,जो अपनी सीट भी मुश्किल से जीत पाए हैं, वह भी पीसीसी चीफ की दौड़ में अपने आपको बता रहे हैं ऐसे समय में ज्योतिरादित्य सिंधिया बिल्कुल मौन हैं. किंतु उनके समर्थक लगातार ज्योतिरादित्य सिंधिया को पीसीसी चीफ बनाने के लिए एकजुट हो रहे हैं , कई संगठन के पदाधिकारियों ने भी अपने पदों से इस्तीफा देने की घोषणा की है.
यह ज्योतिरादित्य सिंधिया का कठिन समय है उनके समर्थकों का यह दायित्व है कि वे ऐसे कठिन समय में ज्योतिरादित्य सिंधिया का साथ दें , विशेषकर वह कार्यकर्ता जो लाभ के पदों पर बैठे हुए हैं . संवैधानिक पदों पर बैठकर जो बहुत बड़े नाम बन चुके हैं. उनके त्याग पत्रों की घोषणा का जनता को बेसब्री से इंतजार है. लाभ के पदों पर बैठे हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक अगर सोनिया गांधी को अपने त्यागपत्र सौंप कर यह बात कहें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया पीसीसी चीफ नहीं तो, हम भी कांग्रेस में नहीं , ऐसा करने पर कांग्रेस की चीफ सोनिया गांधी ज्योतिरादित्य सिंधिया को पीसीसी चीफ बनाने के लिए विचार कर सकती है . जनता को भी लाभ के पदों पर बैठे ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों का त्यागपत्र का इंतजार है.***

वसुुंधरा राजे सिंधिया के सांसद बेटे दुष्यंत सिंह के घर में चोरी


जयपुर राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बेटे और झालावाड़ से सांसद दुष्यंत सिंह के घर से चोर एलईडी टीवी चुराकर फरार हो गए. चोरों के घर में दाखिल होने और निकलने की तस्वीरें सीसीटीवी फुटेज में कैद हो गई है.
बाउंड्री फांदकर बीजेपी सांसद दुष्यंत सिंह के घर में दाखिल हुए चोरबीजेपी के जिला अध्यक्ष संजय जैन ने पुलिस को दी चोरी की शिकायत

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बेटे और झालावाड़ से सांसद दुष्यंत सिंह के घर में चोरी होने का मामला सामने आया है. चोरों ने पहले बीजेपी सांसद दुष्यंत सिंह के घर में घुसने के लिए बाउंड्री फांदी और फिर महज 15 मिनट में सामान चुराकर फरार हो गए.

सांसद दुष्यंत सिंह का घर झालावाड़ के सिटी फोरलेन में है. घर के अंदर ही उनका कार्यालय भी है. बताया जा रहा है कि रात में चोर पीछे के खाली मकान की चहारदीवारी फांदकर सांसद दुष्यंत सिंह के घर में घुसे और ताला तोड़कर डाइनिंग हॉल में रखे सामान पर हाथ साफ कर दिया. हालांकि वहां पर कोई बड़ा सामान नहीं था. चोरों के हाथ सिर्फ एलईडी टीवी ही लगा. चोर घर में लगे इस बड़े एलईडी टीवी खोकर ले गए.

सांसद दुष्यंत सिंह के घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में चोरों के घुसने और बाहर निकलने का फुटेज कैद हो गया है. 15 मिनट के अंदर घर का ताला तोड़कर बड़ा एलईडी लेकर निकलते हुए चोर दिख रहे हैं. रात को दुष्यंत सिंह के घर पर कोई गार्ड नहीं था. सुबह जब कर्मचारी आया, तब उसने वहां चोरी की वारदात देखी. झालावाड़ में बीजेपी के जिला अध्यक्ष संजय जैन ने चोरी की वारदात की शिकायत पुलिस को दी है.

राज्य में कांग्रेस का शासन आने के बाद से सांसद दुष्यंत सिंह झालावाड़ में कम ही आते हैं. वो ज्यादातर समय दिल्ली में ही रहते हैं. पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी के आधार पर चोरों की पहचान की जा रही है. फिलहाल इस मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है.

नई रेत नीति हुई प्रदेश में लागू,ग्रामीणों को मुफ्त में रेत।


भोपाल। प्रदेश कैबिनेट से मंजूरी के छह महीने बाद आखिरकार नई रेत खनन नीति लागू हो गई है। खनिज विभाग ने नई नीति की अधिसूचना जारी कर दी है। जिसके तहत ग्रामीण खुद के भवन के निर्माण के लिए आसपास की किसी भी खदान से रेत खदान का उठाव कर सकेंगे। रेत लेने से ग्रामीणों को न तो ठेकेदार रोक पाएगा और न ही पुलिस-प्रशासन का कोई नुमाइंदा रोकेगा। रेत उठाने के लिए संबंधित ग्राम पंचायत को तत्काल अनुमति देनी होगी। अब रेत खदानों से रेत का परिवहन जीपीएस लगे वाहनों से ही हो सकेगा।

प्रदेश में रेत नीति लागू हो गई है। नई नीति के तहत ग्रामीण एक साल में 10 घन मीटर तक रेत ही मुफ्त में उठा सकेंगे। जबकि कुम्हार, किसान कुआ एवं घर बनाने के लिए मुफ्त में रेत ले सकेंगे। नीति में अवैध उत्खनन रोकने एवं नदियों के संरक्षण का भी ध्यान रखा गया है। नर्मदा नदी से मशीनों से रेत का खनन पूर्णत: बंद कर दिया है। जबकि अन्य नदियों में मशीनों से खनन सिर्फ प्रशासनिक अनुमति से ही हो सकेगा। 5 हेक्टेयर की खदानों रेत का खनन श्रमिक समितियों से होगा। 5 हेक्टेयर से बड़ी खदानों में खनन के लिए स्थानीय मजूदरों को प्राथमिकता दी जाएगी।

पुल से 200 मीटर दूरी पर होगा खनन

नई नीति के तहत नदी पर बने पुल से 200 मीटर के बाहर रेत का खनन हो सकेगा। बांध के पास भी रेत उत्खनन नहीं हो सकेगा। साथ ही हाईवे एवं रेल लाइन से 100 मीटर के बाहर, ऐतिहासिक इमारत एवं पुरातात्विक स्थानों से 200 मीटर बाहर ही रेत का उत्खनन हो सकेगा।

30 दिन में हटाना पड़ेगा भंडारण

नई खनित नीति के तहत रेत का भंडारण करने वालों को फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई है। अब रेत कारोबारी 1 लाख घन मीटर रेत का भंडारण मान्यता प्राप्त स्थान पर ही कर सकेंगे। जिसका निपटारा 30 दिन के भीतर ही करना होगा। यदि समय पर रेत का निपटारा नहीं होता है तेा फिर जिला प्रशासन रेत को राजसात कर सकेगा।

एक भी भंडारण पर नहीं की कार्रवाई

खनिज विभाग रेत माफिया पर किस तरह से हावी है, इसका अंदाजा नर्मदा किनारे के जिले, गांवों में लगे रेत के ढेर देखकर लगाया जा सकता है। कमलनाथ कैबिनेट ने छह महीने पहले रेत नीति को मंजूरी दे दी थी। जिसमें भंडारण क्षमता बढ़ाकर 1 लाख घनमीटर करने की अनुमति दी गई थी। लेकिन नीति की अधिसूचना जारी नहीं की गई। रेत कारोबारियों ने 1 लाख से ज्यादा मात्रा में रेत का भंडारण कर लिया। अब जब बारिश जाने की तैयारी में तब सरकार ने रेत नीति की अधिसूचना जारी की है। इस अवधि में रेत कारोबारियों ने रेत का भंडारण कर बड़ा मुनाफा कमाया है

एक साल में 4058 किलो सोना जब्त किया कस्टम विभाग ने

नई दिल्ली कस्टम अधिकारियों ने अप्रैल से जून की तिमाही में तस्करी का करीब 1200 किलो सोना जब्त किया है. यह पिछले साल के इसी अवधि के मुकाबले 23 फीसदी ज्यादा है.

हाल के महीनों में देश में गोल्ड की तस्करी बढ़ी है और इसको रोकने को लेकर काफी सख्त कदम भी उठाए जा रहे हैं. इन सख्त प्रयासों का ही नतीजा है कि भारतीय कस्टम अधिकारियों ने अप्रैल से जून की तिमाही में 1197.7 किग्रा तस्करी का सोना जब्त किया है. यह पिछले साल के इसी अवधि के मुकाबले 23.2 फीसदी ज्यादा है.

भारत गोल्ड का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जुलाई में पेश बजट में सोने पर आयात कर 10 से बढ़ाकर 12.5 फीसदी कर दिया है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इसकी वजह से तस्करों को अब ज्यादा फायदा हो रहा है. आयात कर में इस बढ़त की वजह से मध्य-पूर्व के देशों से भारत में तस्करी बढ़ी है. यही नहीं, इस तस्करी की वजह से विदेशी मुद्रा का अवैध लेन-देन भी बढ़ा है.

गौरतलब है कि साल 2013 में भारत सरकार ने गोल्ड पर आयात कर बढ़ाकर 10 फीसदी कर दिया था ताकि मांग पर अंकुश लग सके. देश के बढ़ते चालू खाते के घाटे की वजह से ऐसा करना जरूरी था, क्योंकि ज्यादातर सोना आयात किया जाता है. इसके बाद साल 2017 में गोल्ड पर 3 फीसदी का सेल्स टैक्स लगा दिया गया. इन सबकी वजह से तस्करों को भारत में अच्छा अवसर दिखने लगा जो टैक्स बचाने के लिए चोरी से यहां सोना लाकर बेच देते हैं.

एक साल में 4058 किलो सोना जब्त

31 मार्च को खत्म पिछले वित्त वर्ष में कस्टम अधिकारियों ने 4,058 किलो सोना जब्त किया था और उसके भी पिछले वित्त वर्ष यानी 2017-18 में 3,223.3 किग्रा सोना जब्त किया गया था. इस तरह तस्करी करने वाले करीब सोने की कीमत पर करीब 15.5 फीसदी लगने वाला टैक्स बचा लेते हैं और उनका सोना काफी सस्ता पड़ता है.