राजनीति में सूरज की तरह है,ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम, छुटमुट बादल हैं छट जायेंगे.


हम राजनीति के पटल पर अगर निगाह डालें और ईमानदार व्यक्तित्व को खोजें तो समूचे हिंदोस्तान में राजनीति के फलक पर एक ही नाम उभरकर सामने आता है वो है ज्योतिरादित्य सिंधिया का.
जबसे राजनीति के गलियारे में सिंधिया ने कदम रखा, तबसे बेइंतहा मेहनत गुना शिवपुरी क्षेत्र के विकास और जनता के लिये की. उस समय जब केंद़ में और राज्य में विपक्षी सरकार काबिज थी. अपने आभामंडल और प़भाव के कारण कुछ न कुछ सौगात क्षेत्र में लाते रहे थे सिंधिया.
क्षेत्र की जनता के सुख दुख में भी जहां तक संभव था, हर उस परिवार की चौखट तक उन्होंने पहुंचने की कोशिश की जो उनके साथ काम करते थे.
दूसरी तरफ राहुल गांधी के साथ कंधा से कंधा मिलाकर राष्ट्रीय राजनीति और संसद में विपक्ष की भूमिका बखूबी निभाते रहे.
ओजस्वी विचार और जनसमस्याओं को लेकर संसद में दिये गये भाषण आज भी याद किये जाते हैं.
आज राहुल गांधी उनके बगैर अकेले पड़ गये हैं और मानसिक अवसाद की स्थिति में चले गये.
ज्योतिरादित्य सिंधिया को राहुलगांधी से अलग करने में गंदी राजनीति की और कुटिल लोगों की खासी भूमिका रही.
मध्यप़देश में मुख्यमंत्री पद सिंधिया को न देना उनके साथ विश्वासघात था ,गांधी परिवार और कुटिल लोगों के द्वारा सिंधिया की पीठ में छुरा घौंपा गया था.
इधर गुना शिवपुरी क्षेत्र में भी जिन लोगों को उन्होंने जमीन से आसमान तक पहुंचाया उन्हीं लोगों ने सिंधिया की पीठ में विश्वासघाती बन छुरा चला दिया.
आज क्षेत्र की जनता अपेक्षा विहीन हो गई है सिंधिया के गुना शिवपुरी क्षेत्र से राजनीति में मोहभंग होने के कारण प़शासन भयविहीन हो मनमानी कर रहा है.
आज भी ज्योतिरादित्य सिंधिया जिनका राजनीतिक कद राष्ट्रीय स्तर का है ,मध्यप़देश के संगठन में प़देश अध्यक्ष के पद के लिये भी अपमानित किया जा रहा है और कुटिल राजनीति के खिलाड़ी अपने हास्यापद बयान देने से बाज नहीं आ रहे हैं.
सिंधिया इस समय धैर्य धारण किये हुये हैं लेकिन अफसोस इसबात का है मध्यभारत में ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ लाखों की संख्या में कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले और सत्ता से फायदा लेने वाले लोग चुप हैं, इस समय जब सिंधिया अपने अस्तित्व और वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे हैं तो उनके चापलूस समर्थक केवल फेसबुक और अखबारों तक सीमित हैं. बेहतर होता कि वो सड़कों पर निकलकर धरना प़दर्शन, उपवास और अन्य तरीके से अपना विरोध प़दर्शन कर सिंधिया के साथ खड़े हो जाते. शायद बहुत से उनके समर्थक ऐसे भी हैं जो सड़कों पर थे आज करोड़ों के मालिक बने बैठे हैं. इतना जरुर तय है कि ज्योतिरादित्य उस सूरज की तरह हैं जो कुछ समय के लिये बादलों ने ढक लिया है लेकिन फिर से निकलना तय है.

सत्येंद़ सिंह रघुवंशी*
डायरेक्टर &
चीफ एडीटर द न्यूज़ लाइट
थाटीपुर मयुरनगर ग्वालियर

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