राजनीति के चक़व्यूह में फंस गये हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया.


समय का फेर कहिये या कुटिल राजनीतिज्ञों की चाल एक उर्जावान और सक्षम ,युवा उभरते नेतृत्व को आज संशय की स्थिति से गुजरना पड़ रहा है. जिन लोगों को सिंधिया ने फर्श से राजनीति के अर्श तक पहुंचाया वही आज उनकी राहों में कांटे विछा रहे हैं.
उनके गुट से जो मंत्री पद पर बैठ सुख सुविधा भोग रहे वह भी आज दोहरी चालें चल रहे हैं और पीठ पीछे राजनीति की छुरी घौंपने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं.
ये तो जग जाहिर है कि आज मध्यप़देश में जो कमलनाथ सरकार है , उसके बनाने में सिंधिया की समूची उर्जा और ताकत का स्तेमाल कर लिया गया था, मध्यप़देश की जनता ने भी सिंधिया के द्वारा किये गये वादों और इस उम्मीद में कि कल सिंधिया मुख्यमंत्री बनेंगे इस उम्मीद को लेकर अपना मत दिया था. लेकिन कुटिल राजनीति के खिलाड़ियों ने न तो सिंधिया को मुख्यमंत्री बनने दिया न किसान और जनता से किये गये वादों को पूरा किया.
वर्तमान सरकार केवल चंद नौकरशाहों और दलालों के द्वारा संचालित हो रही है. करीब 6 करोड़ जनता की ताकत दो चार दलाल किस्म के लोगों के आसपास सिमट कर रह गई है.ये बात किसी विधायक और मंत्रियों की समझ से भी बाहर है, कि आखिर इस सरकार का संचालन कौन कर रहा है, अधिकांश विधायक और मंत्री असंतुष्ट हैं.
अगर आज सरकार गिर जाये और चुनाव हों तो कांग़ेस को तीस से चालीस सीटें मिल जायें तो काफी होगा, यह सरकार जनता में अपना विश्वास खो चुकी है.
दूसरी तरफ ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी कुटिल राजनीति के कारण नीचा देखना पड़ रहा है, बारबार उनको संगठन और केंद़ीय नेताओं के द्वारा बेईज्जत किया जा रहा है.
जबकि मध्यप़देश में मुख्यमंत्री पद के असली हकदार सिंधिया थे. वर्तमान राजनीति मेंइस राष्ट्रीय कद के युवा उर्जावान नेता को प़देश अध्यक्ष जैसे पद के लिये भी कूटनीतिज्ञ और चालबाज राजनीतिज्ञों के द्वारा नीचा दिखाया.जा रहा है.
इस समय तो यही दिख रहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया अभिमन्यु की तरह कुटिल लोगों की गंदी राजनीति के कारण चक़ब्यूह में फंस गये हैं अब वह इसको कैसे भेदन करेंगे , इसका जवाब तो समय ही देगा.

सत्येंद़ सिंह रघुवंशी*
डायरेक्टर &
चीफ एडीटर द न्यूज़ लाइट
थाटीपुर मयुरनगर ग्वालियर

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