जम्मू-कश्मीरः कश्मीर में आतंकी संगठनों ने अपनाया नया पैंतरा; मस्जिदों से एलान, बाहरी को न दें मकान-दुकान

श्रीनगर, । श्रीनगर, नवीन नवाज। जिहादी और अलगाववादी एजेंडे को नाकाम होते देख हताश राष्ट्र विरोधी तत्वों ने अब वादी में गैर कश्मीरी नागरिकों के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर दिया है। कई जगह मस्जिदों में किसी बाहरी व्यक्ति को मकान-दुकान किराए पर न देने का फरमान जारी किया गया है। कुछ आतंकी भी मस्जिदों में यह फरमान सुनाने पहुंचे हैं। इन फतवों से राज्य प्रशासन के लिए नई चुनौती पैदा हो गई है। वहीं, वादी में बचे हुए गैर कश्मीरी भी सहमे हुए हैं। 

एक अनुमान के अनुसार 5 अगस्त से पूर्व घाटी में देश के अन्य भागों से आए करीब साढ़े पांच लाख लोग काम कर रहे थे। इनमें से अधिकांश हलवाई, नाई, पलंबर, राज मिस्त्री, ठेलों में सब्जियां और अन्य सामान बेचने का धंधा करते थे। राज्य के पुनर्गठन के फैसले से पूर्व प्रशासन ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए इन लोगों को घाटी छोडऩे की नसीहत दी थी। इसके बाद अब वादी में एक हजार से भी कम बाहरी राज्यों के श्रमिक हैं। शेष केंद्र के कर्मचारी, सुरक्षाबल या फिर विभिन्न संस्थानों के कर्मी हैं।

आतंकियों ने दुष्प्रचार के लिए लगाए पोस्टर :

370 खत्म होने के बाद कई जगह बाहरी लोगों को कथित तौर पर धमकाने और मारपीट के मामले भी सामने आए। दुष्प्रचार किया जा रहा है कि बाहरी लोगों को बसाकर हमारी रिवायतों और मजहब को कमजोर करने की साजिश चल रही है। इसलिए कोई किसी बाहरी को मकान या दुकान किराये पर न दे, न ही किसी बाहरी को जमीन या मकान बेचेगा। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम और पुलवामा में आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन ने इस तरह के पोस्टर लगाकर जहर फैलाने की साजिश रची है।

दिखने लगा दुष्प्रचार का असर :

इस दुष्प्रचार का कई स्थानों पर असर भी दिखा। श्रीनगर के बाहरी इलाके में रहने वाले एक युवक ने कहा कि हमने किसी से मारपीट नहीं की। लेकिन हमने यहां आए श्रमिकों को जाने के लिए कहा है। हम नहीं चाहते कि यहां हम लोगों की रिवायतों और मजहब को नुकसान हो। उत्तर प्रदेश में मेरठ के रहने वाले शफीक ने कहा कि मैं यह सोचकर रुक गया था कि जल्द हालात सुधर जाएंगे। लेकिन अब दुकान पर जाने से डरता हूं। मकान मालिक ने मुझे मकान खाली करने के लिए सीधे तौर पर नहीं कहा है, लेकिन तरह-तरह की बातें सुन परेशान हूं।

ऐसे लोगों पर कार्रवाई हो :

पेशे से बिल्डर फिरोज अहमद फाफू ने कहा कि मुझे भी अपनी पहचान और संस्कृति प्यारी है लेकिन किसी को डराकर इसका संरक्षण नहीं हो सकता। ऐसे तत्व कश्मीर और कश्मीरियों को ही बदनाम कर रहे हैं। साथ ही हमारी अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचा रहे हैं। श्रमिकों के पलायन से विकास योजनाएं ठप हैं। सरकार को इनके खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।

मोहम्मद अकबर को मजाक महंगा पड़ा :

खनयार में दो दशक से हलवाई की दुकान चला रहा मोहम्मद अकबर ने केंद्र के फैसले के बाद मजाक में अपने पड़ोसी से कह दिया अब मुझे यहां से कोई नहीं निकाल सकता। बस यह बात फैली और कुछ ही देर में दुकान और मकान का मलिक आ पहुंचे। उसे 24 घंटे का समय देते हुए निकल जाने को कहा। इसके बाद उसे कश्मीर से 20 साल का नाता तोड़ बिजनौर लौटना पड़ा।

बसपोरा से इमाम को निकाला गया :

बसपोरा में एक मस्जिद में 32 साल इमाम रहे एक व्यक्ति ने कोई मजाक भी नहीं किया। लेकिन कुछ लड़के आए और उसे अपना बोरिया बिस्तर समेटने या फिर गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहने को कहा। उसने इस्लाम का वास्ता दिया, लेकिन बात नहीं बनी और उसे परिजनों संग एक ट्रक में सामान लेकर भागना पड़ा।

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