क्या जंग लड़ने की हालत में है पाकिस्तान? दम तोड़ रही अर्थव्यवस्था

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किए जाने के मोदी सरकार के फैसले के बाद से पाकिस्तान लगातार भारत को युद्ध की धमकियां दे रहा है. पाकिस्तान ने कश्मीर मुद्दे को हर मंच से उठाने की कोशिश की पर उसे कहीं से भी समर्थन नहीं मिला. इसके बाद, पाकिस्तान ने भारत के साथ कूटनीतिक रिश्तों में कमी लाने और व्यापारिक संबंध खत्म करने का ऐलान कर दिया. 

गुरुवार को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिट इंडिया का मंत्र दे रहे थे तो दूसरी तरफ पाकिस्तान गजनवी मिसाइल का परीक्षण कर दुनिया का ध्यान खींचने की कोशिश कर रहा था. पाकिस्तान के पीएम इमरान खान खुद कई बार परमाणु युद्ध की धमकी दे चुके हैं.
मंगलवार को पाकिस्तान के विज्ञान एवं तकनीक मंत्री फवाद चौधरी ने ट्विटर पर लिखा कि इमरान खान भारत के लिए एयरस्पेस पूरी तरह से बंद करने पर विचार कर रहा है. ट्विटर पर पाकिस्तानियों ने भारतीय उत्पादों का बहिष्कार कर आर्थिक नुकसान पहुंचाने की भी अपील की. हालांकि, पाकिस्तान भारत को आर्थिक रूप से चोट पहुंचाने की धमकी ऐसे समय में दे रहा है जब उसकी अपनी अर्थव्यवस्था बेहद बुरे दौर से गुजर रही है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान कश्मीरियों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए कश्मीरी ऑवर का आयोजन करवा रहे हैं और आधे घंटे के लिए सारा कामकाज रोककर सड़कों पर उतरने की अपील कर रहे हैं जबकि देश की अर्थव्यवस्था में एक रुपए का राजस्व खोने की क्षमता नहीं बची है.

पाकिस्तानी पत्रकार गुल बुखारी ने कश्मीरी ऑवर बुलाए जाने पर तंज किया, आईएमएफ (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) बहुत खुश होगा क्योंकि मंत्री हर सप्ताह आधा घंटे के लिए सारा कामकाज रोकने का आदेश दे रहे हैं. इससे हमारी उत्पादकता बढ़ेगी, हमारा राजस्व बढ़ेगा और हम आईएमएफ का कर्ज लौटा सकेंगे.

आज के समय में किसी देश की अर्थव्यवस्था ही उसकी असली ताकत को बयां करती है. पाकिस्तान की सेना भारतीय सेना के आगे कहीं नहीं टिकती है लेकिन आर्थिक मोर्चे पर भी उसकी हालत ऐसी नहीं है कि वह जंग की धमकियां दे.

विश्व बैंक के मुताबिक, पाकिस्तान की जीडीपी (कुल सकल घरेलू उत्पाद)  2018 के अंत में 254 अरब डॉलर की थी जबकि भारत की जीडीपी 2.84 ट्रिलियन की थी. यानी भारत की कुल अर्थव्यवस्था पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की 11 गुना है. अगर 2019 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7 फीसदी भी रहे तो एक साल के भीतर इसमें 200 अरब डॉलर जुड़ जाएंगे जोकि पाकिस्तान की 2018 की कुल जीडीपी का 80 फीसदी के बराबर होगा.

पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि दर 4.3 फीसदी से आगे बढ़ रही है. पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से गर्त में जा रही है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के मुताबिक, 2019 और 2020 में पाक की वृद्धि दर 3 फीसदी से भी नीचे रहने वाली है. पाकिस्तानियों के लिए स्थिति इसलिए और खराब है कि उन्हें भीषण महंगाई का भी सामना करना पड़ रहा है. मई 2019 में पाकिस्तान में महंगाई दर 9 फीसदी के रिकॉर्ड स्तर पर थी.

पाकिस्तान की सरकार बजट घाटे की समस्या से जूझ रही है. पाकिस्तान की सरकार लगातार कर्ज ले रही है लेकिन उसके राजस्व में बढ़ोतरी नहीं आई है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान का बजट घाटा जीडीपी का 8.9 फीसदी तक पहुंच गया है जो पिछले तीन दशकों में सबसे अधिक है.

कमजोर अर्थव्यवस्था की वजह से पाकिस्तान की मुद्रा की विनिमय दर भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है. मई महीने में पाकिस्तानी रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 140 के स्तर पर था और इसी सप्ताह डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपए की कीमत 157 पहुंच गई थी.
पाकिस्तान अपने अस्तित्व को बचाने के लिए कर्ज लेने का आदी हो चुका है. मार्च 2019 में पाकिस्तान का कुल कर्ज 85 अरब डॉलर (6 लाख करोड़) से ज्यादा पहुंच चुका है. चीन से लेकर सऊदी अरब तक से पाकिस्तान ने कर्ज ले रखा है.

देशों के अलावा, पाकिस्तान ने कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का भी दरवाजा खटखटाया है. इस साल मई महीने में पाकिस्तान ने 23वीं बार आईएमएफ का दरवाजा खटखटाया था और 6 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज कड़ी शर्तों पर हासिल किया था. आईएमएफ की शर्त है कि पाकिस्तान को इस साल अपना राजस्व 40 फीसदी तक बढ़ाना होगा.

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को कहां से मिलेगी राहत
जुलाई महीने में आईएमएफ ने पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई थी. आईएमएफ ने कहा था, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गंभीर मोड़ पर है. खराब आर्थिक नीतियों, रिकॉर्ड बजट घाटा, ढीली-ढाली मुद्रा नीति, ओवरवैल्यूज एक्सचेंज रेट का बचाव, अल्प अवधि की वृद्धि दर की वजह से पाकिस्तान पर कर्ज बढ़ रहा है और विदेशी मुद्रा भंडार खाली हो रहा है.

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