CBI के वकील ने कोर्ट को बताया- सवालों पर कानून की किताब पढ़ने लगते हैं चिदंबरम

आईएनएक्स मीडिया मामले (INX Media Case) में सोमवार को राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक ऐसा वाक्या भी आया जब सीबीआई (CBI) ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम (P Chidambaram) की शिकायत दर्ज करवाई. सीबीआई के वकील ने कोर्ट को बताया कि चिदंबरम एजेंसी का वक्त बर्बाद कर रहे हैं और पूछताछ के दौरान वे कानून की किताब खोलकर बैठ जाते हैं और घंटों पढ़ने के बाद किसी एक सवाल का जवाब देते हैं. ऐसा करने से पूछताछ पूरी नहीं हो पा रही है और वे सीबीआई का समय लगातार खराब करते जा रहे हैं.

और खोल लेते हैं किताब

न्यूज चैनल की एक रिपोर्ट के अनुसार सीबीआई के वकील तुषार मेहता ने बताया कि जब भी सीबीआई के अधिकारी निवेश संवर्धन बोर्ड की ओर से दी जाने वाली क्लीयरेंस के बारे में चिदंबरम से पूछताछ करते हैं तो वे इसकी जानकारी कानून पढ़कर देने की बात कहते हैं और फिर किताब खोल कर एक घंटे तक बैठ जाते हैं. इसके बाद वह नियमों का अध्ययन करते हैं और फिर किसी एक सवाल का जवाब देते हैं. मेहता ने कहा कि ऐसा कर के चिदंबरम लगातार सीबीआई का समय बर्बाद कर रहे हैं.
अब कराया जाएगा चिदंबरम का दूसरे आरोपियों से सामना

अदालत में CBI ने दलील दी थी कि चिदंबरम का सामना अभी इस केस के दूसरे आरोपियों से कराया जाना है. लिहाजा उन्हें 5 दिनों की रिमांड दी जाए. इस मामले में कोर्ट ने रिमांड चार दिन के लिए बढ़ा दी है. पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम को 30 अगस्त को कोर्ट में पेश किया जाना है. पीठ धन शोधन से संबंधित प्रवर्तन निदेशालय के मामले में अग्रिम जमानत रद्द करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के 20 अगस्त के फैसले के खिलाफ चिदंबरम की अपील पर सुनवाई कर रही है. इस अपील पर प्रवर्तन निदेशालय की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता कल बहस करेंगे.

48 घंटे में एक बार कराया जाएगा मेडिकल टेस्ट

इस मामले की सुनवाई के दौरान कुछ नाटकीय स्थिति भी पैदा हुईं. सुबह पीठ के बैठते ही चिदंबरम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्ब्ल ने शिकायत की कि पूर्व केंद्रीय मंत्री को सीबीआई की हिरासत में देने के निचली अदालत के 22 अगस्त के आदेश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका न्यायालय के निर्देश के बावजूद सोमवार को सूचीबद्ध नहीं हुई है. पीठ ने तीसरी अपील सूचीबद्ध करने के बारे में कोई भी आदेश दिये बगैर सिब्बल से कहा कि प्रधान न्यायाधीश से आदेश मिलने के बाद ही शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री इसे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेगी. पीठ ने कहा, ‘‘रजिस्ट्री को कुछ दिक्कत है और उसे प्रधान न्यायाधीश से आदेश प्राप्त करना होगा.’’ इसके साथ ही पीठ ने कहा, ‘‘प्रधान न्यायाधीश से आदेश प्राप्त करके इसे उचित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए.’’

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