UP: शाहजहांपुर में दो टेंपो के ऊपर पलटा ट्रक, 16 की मौत, कई घायल

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में आज मंगलवार को बड़ा सड़क हादसा हो गया. दो टेंपो के ऊपर ट्रक के पलट जाने से हादसे की चपेट में आए 16 लोगों की मौत हो गई जबकि कई घायल बताए जा रहे हैं. घटनास्थल पर पुलिस प्रशासन के आला अधिकारी पहुंच गए हैं. बचाव और राहत कार्य शुरू हो गया है.

शाहजहांपुर के रोजा के जमूका तिराहे पर मंगलवार को यह हादसा हुआ. इस सड़क हादसे पर दुख जताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घायलों को तुरंत राहत पहुंचाने का निर्देश दिया. साथ ही सीएम योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के प्रति शोक-संवेदना व्यक्त की है और जिला प्रशासन को उचित सहायता राशि प्रदान करने के निर्देश दिए हैं.

उत्तर प्रदेश में सड़क हादसे कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं. आए दिन यहां पर सड़क हादसे होते ही रहते हैं. ज्यादातर बड़े सड़क हादसों के लिए बेकाबू ट्रक जिम्मेदार होते हैं. 12 अगस्त को बदायूं के आलापुर इलाके में ट्रक पलटने से भीषण सड़क हादसा हो गया जिसमें कम से कम 7 लोगों की मौत हो गई थी.

इसी तरह 28 जुलाई को उन्नाव रेप केस की पीड़िता और उसके वकील भी सड़क हादसे का शिकार हो गए. हालांकि हादसे में साजिश की आशंका को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केस को यूपी से ट्रांसफर करते हुए दिल्ली भेज दिया था.

इस हादसे में घायल हुए उन्नाव रेप केस की पीड़िता और उनके वकील की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है. दोनों को एयरलिफ्ट करके दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) लाया गया, जहां इलाज चल रहा है. हादसे में रेप पीड़िता की मौसी और चाची की मौत हो गई थी.

नौसेना प्रमुख ने कहा- 2012-13 में रक्षा बजट में नौसेना का आवंटन 18 फीसदी था, अब रह गया केवल 13 फीसदी, हमारी क्षमता पर पड़ रहा फर्क

नई दिल्ली: नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह (Karambir Singh) ने देश के समक्ष समुद्री चुनौतियों का उल्लेख करते हुए सोमवार को कहा कि नौसेना को अपनी क्षमता निर्माण के लिए एक सुनिश्चित बजटीय समर्थन की आवश्यकता है. उन्होंने कहा, ‘2012-13 में रक्षा बजट में नौसेना का आवंटन 18 प्रतिशत था, जो अब घटकर 13 प्रतिशत हो गया है.’ इससे भविष्य की योजना और क्षमता विकास प्रभावित हो रहा है.’ नौसेना प्रमुख ने रक्षा कूटनीति कोष स्थापित करने का भी आह्वान किया. उन्होंने कहा, ‘इस तरह से हमें 2024 तक पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने जा रहे देश को आश्वस्त करने में मुश्किल हो रही है और समुद्री मोर्चे पर प्रोत्साहन की जरूरत है.’

हिंद महासागर-बदलता आयाम-भारत के लिए समुद्री सुरक्षा से जुड़े विषय पर एडमिरल सिंह ने अपनी राय व्यक्त की. पूर्व सेना प्रमुख दिवंगत जनरल बी सी जोशी की याद में व्याख्यान का आयोजन किया गया था. उन्होंने कहा, ‘‘नौसेना की चुनौतियों में क्षमता निर्माण के लिए एक दीर्घकालिक बजटीय समर्थन की जरूरत शामिल है. यदि आप एक जहाज का निर्माण करना चाहते हैं, तो इसमें कुछ साल लगेंगे और इसके लिए हमें बजटीय सहायता का आश्वासन दिया जाना चाहिए.’

पत्रकारों के साथ एक संक्षिप्त बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या किसी परियोजना को कम आवंटन के कारण रोका गया, इस पर उन्होंने कहा, बजटीय आबंटन की वजह से हमें अपनी खरीद योजना में थोड़ा सुधार करना पड़ा है. हां, इसने हमें कुछ हद तक सीमित कर दिया है.

RRB Group D: आईआईटी बॉम्बे का स्टूडेंट बना ट्रैकमैन, जानिए क्यों चुनी रेलवे ग्रुप डी की नौकरी

नई दिल्ली: RRB Group D: सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) की अहमियत का अंदाजा तो आप इस बात से लगा सकते हैं कि एक आईआईटी (IIT) से पढ़े छात्र ने रेलवे ग्रुप डी (RRB Group D) की नौकरी ज्‍वॉइन की है. बिहार के श्रवण कुमार (Shrawan Kumar) ने बहु राष्ट्रीय कंपनियों में नौकरी करने की जगह रेलवे में नौकरी करने का फैसला किया. श्रवण ने साल 2010 में आईआईटी बॉम्बे (IIT Bombay) के मेट्रोलॉजी एंड मैटेरियल साइंस ब्रांच में इंटीग्रेटेड डुअल डिग्री कोर्स में एडमिशन लिया था. साल 2015 में उन्हें बीटेक और एमटेक की डिग्री दी गई. पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने रेलवे ग्रुप डी परीक्षा की तैयारी कर उसे क्रैक किया. अब वह धनबाद रेलवे स्टेशन पर ट्रैकमैन का काम देख रहे हैं, उनकी पोस्‍टिंग 30 जुलाई को धनबाद रेल मंडल में की गई हैं.

लेकिन आखिर आईआईटी बॉम्बे से पढ़े श्रवण कुमार ने बहु राष्ट्रीय कंपनियों में नौकरी की जगह रेलवे ग्रुप डी के पद पर नौकरी करने की क्यों सोची? इसके पीछे श्रवण का कहना है कि सरकारी नौकरी में जॉब सिक्योरिटी होती है. मेरे कई दोस्त प्राइवेट सेक्टर में हैं, लेकिन वह सरकारी नौकरी ही करना चाहते थे.

श्रवण कहते हैं मुझे पूरी उम्मीद है कि मैं भविष्य में एक दिन बड़ा अधिकारी बनूंगा. फिलहाल श्रवण रेलवे की ओर से मिली जिम्मेदारी का वहन कर रहे हैं. बता दें कि श्रवण के बड़े भाई रंजीत कुमार पटना में पीडब्ल्यूडी में नौकरी करते हैं.

UP: अलीगढ़ में बिजली के तारों में उलझकर प्राइवेट प्लेन क्रैश, पायलट सुरक्षित

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में चार्टर कंपनी का प्राइवेट प्लेन क्रैश हो गया है. मंगलवार को धनीपुर हवाई पट्टी पर हुए इस हादसे में सभी 6 यात्री सुरक्षित हैं. बताया जा रहा है कि लैंडिंग के दौरान बिजली के तारों में उलझकर विमान जमीन पर गिर गया. यह विमान अलीगढ़ मेंटेनेंस के लिए आया था.

पुलिस ने बताया कि निजी एविएशन कंपनी के प्लेनों की मरम्मत के लिए इंजीनियर की टीम आज दिल्ली से प्लैन के जरिए अलीगढ़ आ रही थे. प्लैन जैसे ही अलीगढ़ के धनीपुर हवाई पट्टी पर लैंडिंग कर रही थी, उसी समय वह बिजली के तारों में उलझ गई. प्लेन में चार इंजीनियरों के साथ दो पायलट थे. सभी सुरक्षित हैं.

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आज सुबह प्लैन लैंडिंग के दौरान 33 हजार वोल्टेज की तार की चपेट में आ गया. इसके बाद प्लेन में आग लग गई. किसी तरह प्लेन में सवार यात्रियों ने कूदकर जान बचाई. प्लेन में दो पायलट समेत 6 लोग सवार थे. विमान सवारों की मदद के लिए स्थानीय लोग भी पहुंचे, लेकिन पुलिस ने लोगों को वहां से हटा दिया.

प्राइवेट प्लेन में सवार यात्रियों को मामूली चोट आई है. उन्हें अस्पताल भेज दिया गया है. इसके साथ ही दमकल विभाग ने प्लेन में लगी आग को बुझा लिया गया है.

जनवरी में क्रैश हुआ लड़ाकू विमान

इससे पहले साल की शुरुआत में 28 जनवरी की दोपहर उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में वायुसेना का लड़ाकू विमान जगुआर क्रैश हो गया. उड़ान भरने के कुछ देर बाद ही यह विमान क्रैश हो गया था. हालांकि पायलट को इस हादसे में कोई नुकसान नहीं पहुंचा, लेकिन विमान कुशीनगर के ग्रामीण हिस्से में खेतों में जाकर गिरा.

गोरखपुर एयरबेस से इस जगुआर ने उड़ान भरी थी, लेकिन कुशीनगर में प्लेन क्रैश हो गया. हालांकि क्रैश होने से पहले ही पायलट ने सूझ-बूझ से अपनी जान बचा ली. क्रैश होने से ठीक पहले पायलट विमान से बाहर निकलने में कामयाब रहा.

इसी तरह पिछले साल अक्टूबर में बागपत में भारतीय वायुसेना का एक विमान क्रैश हो गया. विमान में दो पायलट सवार थे और दोनों ही सुरक्षित बच गए. प्लेन कैश होने से पहले ही दोनों पायलेट ने पैराशूट खोल दिया दिया था. वायुसेना के इस विमान ने गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस से उड़ान भरी थी, लेकिन बागपत के पास पहुंचते ही विमान में कुछ तकनीकी खराबी आ गई और विमान क्रैश हो गया. विमान बागपत के रंछाड गांव के खेत में जाकर गिरा.

भ्रूण लिंग परीक्षण मामले में ग्वालियर के तीन डॉक्टरों को तीन-तीन साल की सजा

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर के तीन डॉक्टरों डॉ. संध्या तिवारी, डॉ. सुषमा त्रिवेदी और डॉ. एसके श्रीवास्तव (होम्योपैथी) को भ्रूण लिंग परीक्षण करने के मामले में कोर्ट ने तीन-तीन साल की सजा सुनाई है। इन पर तीन-तीन हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

कोर्ट ने डॉ. श्रीवास्तव व डॉ. तिवारी पर बिना अनुमति क्लीनिक संचालित करने पर पांच-पांच हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया। सजा सुनाने के बाद सभी डॉक्टर जमानत पर रिहा हो गए। 10 साल पहले दिल्ली की संस्था ने इन तीनों डॉक्टरों का स्टिंग ऑपरेशन किया था।

बेटी बचाओ समिति खडखडी, दिल्ली के दो सदस्य 4 मई 2009 को ग्वालियर में भ्रूण लिंग परीक्षण के लिए चार अलग-अलग स्थानों पर डॉक्टरों से संपर्क किया। डॉ. संध्या तिवारी, डॉ. सुषमा त्रिवेदी और डॉ. एसके श्रीवास्तव भ्रूण का लिंग परीक्षण करने को तैयार हो गए।

सदस्यों ने डॉक्टरों का स्टिंग कर लिया। सीडी के साथ तत्कालीन कलेक्टर को शिकायत की। स्टिंग ऑपरेशन में भ्रूण परीक्षण की पुष्टि होने के बाद कलेक्टर ने सीएमएचओ को जांच के आदेश दिए और कोर्ट में तीनों डॉक्टरों के खिलाफ परिवाद दायर किया। 10 साल से मामला कोर्ट में लंबित था। सोमवार को मामले की ट्रायल पूरी हो गई।

कोर्ट ने कहा- अपनी शिक्षा का गलत उपयोग किया है, इसलिए ज्यादा सजा मिलनी चाहिए

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्राची पटेल की कोर्ट ने पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत तीनों डॉक्टरों को दोषी पाया। इसके बाद डॉक्टरों ने तर्क दिया कि यह पहला अपराध है। इसलिए कम से कम दंड दिया जाए। जुर्माना लगाकर छोड़ दिया जाए।

एडीपीओ रीतेश गोयल ने तर्क दिया कि देश में कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए कड़े कानून बनाए गए हैं। बावजूद इसके ये कानून का उल्लंघन किया है। अगर इनके प्रति नरम रुख अपनाया जाता है तो समाज में गलत संदेश जाएगा। कोर्ट ने तीनों को सजा देते हुए कहा कि डॉक्टर सुशिक्षित होते हुए भी अपनी शिक्षा का गलत काम प्रयोग कर रहे थे। इसलिए इन्हें अधिक से अधिक दंड दिया जाना चाहिए।

प्रैक्टिस भी नहीं कर पाएंगे

सजा के बाद उनसे प्रैक्टिस करने का अधिकार छिन गया है और वह इलाज नहीं कर सकते। अपर सत्र न्यायालय में अपील लंबित रहेगी। तब तक जमानत पर रहेंगे।

दिवंगत अरुण जेटली के घर पहुंच भावुक हुए PM मोदी, परिवार से की मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों के दौरे से लौटने के बाद भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व वित्त मंत्री दिवंगत अरुण जेटली के घर पहुंचे हैं. मंगलवार सुबह प्रधानमंत्री दिल्ली की कैलाश कालोनी स्थित आवास पर पहुंचे और अरुण जेटली के परिवार से मुलाकात की. पीएम मोदी ने यहां अरुण जेटली की पत्नी, बेटी और बेटे से मुलाकात की और सांत्वना प्रकट की. इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह भी उनके साथ मौजूद रहे.

बता दें कि अरुण जेटली का लंबी बीमारी के बाद 23 अगस्त को दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया था. जब उनका निधन हुआ तो प्रधानमंत्री मोदी देश से बाहर थे, उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से अरुण जेटली के परिवार से बात की थी.

पीएम मोदी सोमवार देर रात को ही तीन देशों के दौरे से वापस दिल्ली लौटे हैं और अब आज सुबह वह अरुण जेटली के परिवार से मिलने पहुंचे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पहले गृह मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष अमित शाह भी अरुण जेटली के घर पहुंचे और उन्होंने परिवार के लोगों से मुलाकात की. इससे पहले अमित शाह ने अरुण जेटली को उनके घर, भाजपा मुख्यालय और निगमबोध घाट पर भी श्रद्धांजलि दी थी. 
इससे पहले पीएम मोदी ने अरुण जेटली की पत्नी संगीता और उनके बेटे रोशन से बात की और संवेदना जाहिर की थी. जेटली के परिवार ने पीएम से अपील की थी कि उन्हें अपना विदेश दौरा रद्द नहीं करना चाहिए. यही कारण रहा कि प्रधानमंत्री तुरंत विदेश से वापस नहीं आए.

‘…मेरा दोस्त चला गया’

UAE के बाद जब प्रधानमंत्री बहरीन पहुंचे तो उन्होंने अरुण जेटली को याद करते हुए कहा कि ‘सपनों को सजाना और सपनों को निभाना ऐसा लंबा सफर जिस दोस्त के साथ पूरा किया, वो दोस्त अरुण जेटली ने आज ही अपना देह छोड़ दिया.’ भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मंच पर भावुक हुए और अपने दोस्त को याद किया.

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली का लंबी बीमारी के बाद शनिवार को दिल्ली के एम्स में 67 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था. अरुण जेटली की अस्थियों को सोमवार को हरिद्वार में गंगा में विसर्जित किया गया.

कांग्रेस नेता कुलदीप बिश्नोई का होटल सीज, 150 करोड़ की बेनामी संपत्ति पर एक्शन

आयकर विभाग ने गुरुग्राम स्थित 150 करोड़ रुपए के होटल को बेनामी संपत्ति के तहत जब्त कर लिया है. जांच में पता चला कि यह बेनामी संपत्ति हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के बेटे और कांग्रेस नेता कुलदीप बिश्नोई और चंदर मोहन की है.

आयकर विभाग ने यह कार्रवाई बेनामी संपत्ति लेनदेन अधिनियम, 1988 की धारा 24 (3) के तहत की है. आयकर विभाग की बेनामी निषेध इकाई (BPU) ने यह कार्रवाई की है.

आयकर विभाग द्वारा जब्त की गई संपत्ति का स्वामित्व ब्राइट स्टार होटल प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर है, जिसमें 34% शेयर अन्य कंपनी के नाम है जो ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड (BVI) में रजिस्टर्ड है. यह कंपनी संयुक्त अरब अमीरात से संचालित होती है.

आयकर विभाग ने यह कार्रवाई जुलाई 2019 में कंपनी से जुड़ी जांच में सबूत के आधार पर की है. इस जांच में आयकर विभाग को कई ऐसे सबूत हाथ लगे थे जिससे कंपनी के स्वामित्व पर शक हुआ था. ब्रिस्टल होटल के स्वामित्व को लेकर आयकर विभाग ने अनियमितता पाई थी. इसके बाद कार्रवाई करते हुए बेनामी संपत्ति को जब्त कर लिया.

बताया जाता है कि ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड के कथित बेनामी शेयरधारक बिश्नोई परिवार के बेहद करीबी हैं. इस संपत्ति के बारे में फैसले लेने का मालिकाना हक बिश्नोई परिवार के पास ही है. ब्राइट स्टार होटल प्राइवेट लिमिटेड में शेयरों के अधिग्रहण के लिए भुगतान का अंतिम निर्णय भी बिश्नोई परिवार द्वारा ही किया गया था और वे भारत और विदेशों में स्थित अपने सहयोगियों के माध्यम से इन पर नियंत्रण रखते थे.
जुलाई में IT ने की थी छापेमारी-

आयकर विभाग के अधिकारियों ने जुलाई में टैक्स चोरी से जुड़े मामले में बिश्नोई के हरियाणा के हिसार, मंडी आदमपुर और गुरुग्राम समेत कुल 13 स्थानों पर 23 जुलाई को छापेमारी की थी. जिसमें कई बेनामी संपत्तियों सहित करोड़ों रुपये के लेनदेन, चल-अचल संपत्तियों से संबंधित डील के बारे में जानकारी और सबूत मिले थे. आयकर विभाग को यूएई और पनामा में कुलदीप बिश्नोई की कंपनी के शेयर की जानकारी और दस्तावेज मिले थे.

छापेमारी के दौरान आयकर अधिकारियों ने कहा था कि वित्तीय लेनदेन के साथ दस्तावेज और बैंक खाता नंबर और कई संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं. इसके अलावा सर्च ऑपरेशन में अधिकारियों ने बिश्नोई के कंप्यूटर और लैपटॉप को भी जब्त किया था.

कांग्रेस से विधायक हैं कुलदीप बिश्नोई-

हरियाणा के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे भजन लाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई विधायक हैं, जबकि उनकी पत्नी रेणुका बिश्नोई भी राज्य विधानसभा में हांसी सीट का प्रतिनिधित्व करती हैं. दोनों पति-पत्नी ने 2014 के विधानसभा चुनाव में हरियाणा जनहित कांग्रेस के उम्मीदवारों के रूप में जीत हासिल की थी. बाद में 2016 में पार्टी का कांग्रेस में विलय हो गया था. उनके बेटे भव्य बिश्नोई ने हाल ही में कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर हिसार संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था.

अपराध / पति को छोड़कर प्रेमी के साथ ग्वालियर आई महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत

ग्वालियर। पति को छोड़कर अपने प्रेमी के साथ ग्वालियर आई महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उसकी लाश उस कमरे में मिली, जिसे पांच दिन पहले दोनों ने खुद को पति-पत्नी बताकर किराए पर लिया था। महिला के साथ जो युवक आया था, वह भाग गया है।

मकान मालिक को जब कमरे में शव फांसी के फंदे पर लटका मिला तब उन्होंने युवक को बताया। इसके बाद से युवक का फोन भी बंद आ रहा है। घटना थाटीपुर इलाके की है। थाटीपुर थाना पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम हाउस में रखवाकर मायका और ससुराल पक्ष को सूचना दे दी है। सोमवार को परिजनों के आने के बाद पोस्टमार्टम होगा। पुलिस हत्या और आत्महत्या के एंगल पर जांच कर रही है।

थाटीपुर स्थित विवेक नगर के रहने वाले हरेंद्र भदौरिया का चार मंजिला मकान है। इसमें तीन किराएदार रहते हैं। चौथी मंजिल पर कमरा खाली था। पांच दिन पहले सोनू तोमर निवासी भिंड उनके घर आया। उसके साथ महिला थी, जिसका नाम उसने आरती तोमर बताया। उसने कहा कि वह पति-पत्नी हैं, इसलिए किराए पर कमरा चाहिए। हरेंद्र ने उन्हें चौथी मंजिल पर कमरा किराए पर दे दिया। किराएदार से संबंधित जानकारी देने के लिए उसे फॉर्म हरेंद्र ने दिया और इनकी आईडी मांगी। सोनू ने अपनी आईडी दे दी। शनिवार दोपहर में वह हरेंद्र से यह बोलकर गया कि वह कुछ दस्तावेज लेने के लिए भिंड जा रहा है।

रविवार दोपहर में हरेंद्र ने सोनू के मोबाइल पर कॉल किया। सोनू से कहा कि उन्हें फॉर्म जमा करना है, इसलिए वह दस्तावेज दे दे। सोनू ने कहा कि वह ऊपर कमरे में जाकर आरती से ले लें। इसके बाद हरेंद्र ऊपर गए तो दरवाजा बंद था। दरवाजा खटखटाया तो काफी देर तक नहीं खुला। इसके बाद खिड़की से झांका तो आरती फांसी के फंदे पर लटकी थी। इसके बाद उन्होंने अन्य परिजन और पड़ोसियों को बताया। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर पुलिस आ गई।

पुलिस ने सोनू को कॉल लगाया तो उसने नहीं उठाया। फिर अपना मोबाइल भी बंद कर लिया। पुलिस ने दरवाजा तोड़ा और शव को नीचे उतरवाया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। कमरे की तलाशी लेने पर आईडी मिली, जिसमें महिला का नाम आरती तिवारी लिखा था। पड़ताल में सामने आया कि महिला के पति का नाम नवीन तिवारी है। वह एक साल से नवीन से अलग रह रही है।

बिस्तर पर मिलीं तीन आईडी, एक में इंदौर का पता
बिस्तर पर महिला की 3 आईडी मिलीं। आधार कार्ड में महिला का नाम आरती तिवारी निवासी हीरानगर, इंदौर लिखा था। हीरानगर पुलिस से संपर्क किया तो इसकी पहचान नहीं हो सकी। फिर एक आईडी पर नाम आरती शर्मा लिखा था। एक ईमेल आईडी का प्रिंट मिला, जिसमें आरती पुरोहित लिखा था। तब मकान मालिक ने बताया कि सोनू ने उसे बताया था कि इटावा के इकदिल में नवीन तिवारी के यहां उसकी ससुराल है। इस पर पुलिस ने वहां संपर्क किया। तब जाकर नवीन से बात हुई फिर खुलासा हुआ कि नवीन उसका ससुर नहीं बल्कि पति है।

मोदी और शाह को याद रखना चाहिए, वे भी एक दिन ‘पूर्व’ होंगे: कांग्रेस

दिल्ली 
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सुरक्षा से एसपीजी हटाए जाने पर कांग्रेस पार्टी ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार के फैसले पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को याद रखना चाहिए कि वे भी एक दिन ‘पूर्व’ होंगे। पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने ट्वीट कर इस मामले पर नाराजगी जताई है। वहीं, लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि सुरक्षा कवर चुनिंदा तरीके से नहीं हटाना चाहिए।सिंघवी ने कहा, ‘पूर्व प्रधानमंत्री का सुरक्षा कवर हटाने का आदेश देने वाले मौजूदा प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को यह याद रखना चाहिए कि वे भी एक दिन पूर्व होंगे। कर्म आपको देख रहा है।’ लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी सरकार पर निशाना साधा। 

चौधरी ने कहा, ‘मेरा मानना है कि सुरक्षा कवर चुनिंदा ढंग से नहीं हटाया जाना चाहिए। सुरक्षा कवर सिर्फ इस वजह से नहीं हटाया जाना चाहिए कि मनमोहन सिंह कांग्रेस की सरकार में प्रधानमंत्री थे।’ उन्होंने कहा कि 10 वर्षों के शासनकाल के दौरान यूपीए सरकार में सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों को एसपीजी सुरक्षा कवर मिला। 

चौधरी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद सिंह ने कभी सुरक्षा कवर नहीं मांगा और भविष्य में मांगेंगे भी नहीं। यह सरकार का फैसला था।’ गौरतलब है कि सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को दी जा रही एसपीजी सुरक्षा वापस ले ली है। सिंह को ‘जेड प्लस’ सुरक्षा मिलती रहेगी। अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि 2004 से 2014 तक देश के प्रधानमंत्री रहे सिंह से एसपीजी सुरक्षा वापस लेने का फैसला विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों द्वारा समीक्षा किए जाने के बाद किया गया है। ‘जेड प्लस’ सुरक्षा केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) द्वारा दिए जाने वाले उच्चतम सुरक्षा कवर में से एक है।