कश्मीर में फिर से पत्थरबाजी अनंतनाग में प्रदर्शनकारियों की पत्थरबाजी में ट्रक ड्रायवर की मौत

अनंतनाग। जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में रविवार शाम प्रदर्शनकारियों की पत्थरबाजी की वजह से एक ट्रक ड्रायवर की मौत हो गई है। मृतक ड्रायवर की पहचान नूर मोहम्मद के तौर पर हुई है। नूर मोहम्मद जब घर लौट रहा था तो प्रदर्शनकारियों ने उसके ट्रक को आर्मी ट्रक समझकर पत्थरबाजी शुरू कर दी। पत्थरबाजी के दौरान एक पत्थर नूर के सिर पर आकर लग गया, जिसकी वजह से वह गंभीर रुप से घायल हो गया। बाद में उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर्स ने उसे मृत घोषित कर दिया।
सामने आ रही जानकारी के मुताबिक नूर मोहम्मद जब घर के लिए वापस लौट रहा था तो 25 अगस्त को रात लगभग 8 बजे बिजबेहरा इलाके में उसके ट्रक पर पत्थर फेंके जाना शुरू हुए थे।पुलिस के मुताबिक पत्थरबाजों ने पिछले दिनों स्थानीय लोगों पर भी पत्थर फेंक दिए थे। इसके चलते एक 11 साल की लड़की श्रीनगर के डाउन टाउन में घायल हो गई थी।

पत्थरबाजी करने वाले स्थानीय लोगों की पुलिस ने पहचान कर ली है। इसके साथ ही कुछ लोगों को इस मामले में पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया है।

बता दें कि जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने और उसे अलग केंद्र शासित राज्य बनाए जाने के विरोध में घाटी का ही एक वर्ग वहां के हालात को लगातार बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है।

अव्यवस्था ने ली 57 शेर और बाघों की जान, अकेली बची शेरनी गुजार रही अंतिम दिन

जयपुर, । सर्कस की क्रूरता से आजाद कर जयपुर के नाहरगढ़ रेस्क्यू सेंटर लाए गए 58 शेर और बाघ गुमनामी में ही इस दुनिया से विदा हो गए। व्याप्त अव्यवस्थाओं के बीच इन शेरों और बाघों में से अब एक अकेली शेरनी ‘बेगम’ ही बची है। वह जिंदगी के 25 साल पूरे कर चुकी है। अब वह भी यहां अपने अंतिम दिन गुजार रही है।

दुनिया की नजर से दूर नजरबंदी में नाहरगढ़ रेस्क्यू सेंटर में रखे गए इन शेरों और बाघों को किन हालात में रखा गया, कभी कोई नहीं जान पाया। सर्कस में शेरों और बाघों के प्रदर्शन पर जब पाबंदी लगी तो इनको आजाद कराया गया था।

तब यह उम्मीद की गई थी कि इन जानवरों को सर्कस के रिंग मास्टर की क्रूरता से दूर एक बेहतर जिंदगी मिल पाएगी, इसलिए नाहरगढ़ में 2002 में रेस्क्यू सेंटर बनाया गया था। यहां 2002 से लेकर 2010 तक बाघों और शेरों के आने का सिलसिला जारी रहा। तब यहां लाए गए कुल वन्य जीवों की संख्या 58 थी। शेर और बाघ के अलावा इनमें एक बेहद दुर्लभ टाइगोन (टाइगर और लॉयन की शंकर प्रजाति) भी था।

नहीं कराया गया प्रजनन
इन बेजुबानों को यहां शिफ्ट तो कर दिया गया, लेकिन यहां आकर भी इन्हें आजाद जिंदगी नहीं मिल पाई। इनके मिक्स ब्रीड होने की वजह से यहां इनका प्रजनन नहीं कराया गया। इसका नतीजा यह रहा कि यहां ज्यादातर शेरनी व बाघिनों की बच्चेदानी में संक्रमण हो गया और उन्हें अपनी जिंदगी गंवानी पड़ी। वहीं प्रजनन न होने के तनाव से बहुत से जानवर यहां कैंसर होने के चलते मारे गए।

सार्वजननिक नहीं की गई जानवरों मौत की जानकारी
2016 तक यहां शेरों व बाघों की मौत की जानकारी सार्वजनिक की जाती थी, लेकिन उसके बाद यह सिलसिला भी खत्म हो गया। यहां ज्यादातर शेर और बाघ की मौत का कारण कैंसर रहा। वन्यजीव प्रेमी लगातार यहां के बाघों और शेरों की मौत के कारणों पर सवाल उठाते रहे, लेकिन उन्हें कभी कोई जवाब नहीं मिला। 2012 में इस मामले में राजस्थान हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर जवाब तलब किया, तब यहां शेर और बाघों की मौत की वजह उनकी उम्र बताई गई थी।

डीएनए टेस्ट में ज्यादातर मिक्स ब्रीड के निकले
नाहरगढ़ रेस्क्यू सेंटर में इन जीवों को खाना, मेडिकल सुविधा और रहने की जगह तो मिली, लेकिन इनका अंत बेहद दुखद रहा। रेस्क्यू सेंटर में लाए गए इन जीवों को रिंग मास्टर के हंटर से तो निजात मिल गई, लेकिन जो जिदंगी उन्हें मिली उसे जिदंगी नहीं सजा कहा जा सकता है।

मौत के कारणों की होगी जांच : विश्नोई
प्रदेश के वन मंत्री सुखराम विश्नोई का कहना है कि इस रेस्क्यू सेंटर के हालात को सुधारने के लिए अधिकारियों से चर्चा की जाएगी। अब तक जानवरों की किन परिस्थितियों में मौत हुई, इसकी रिपोर्ट मांगी जाएगी। उधर, वन विभाग के सूत्रों के अनुसार प्रबंधकीय लापरवाही के कारण बाघों और शेरों की मौत हो हुई है।

नक्सलियों पर नकेल की तैयारी, प्रभावित राज्यों के CM संग अमित शाह कर रहे बैठक

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की नजर अब नक्सलियों के खात्मे पर है. नक्सल समस्या को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर रहे हैं. यह बैठक सोमवार यानी 26 अगस्त की सुबह 11 बजे से चल रही है. इस बैठक में गृह मंत्री शाह के साथ नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्री मौजूद हैं. बता दें कि गृह मंत्री अमित शाह पहली बार नक्सल समस्या को लेकर बैठक कर रहे हैं.

बैठक में उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों को बुलाया गया है. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी सोमवार की सुबह ही दिल्ली पहुंच गए थे. जबकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार से दूरी बरकरार रखी और बैठक में नहीं पहुंचीं.

सूत्रों के मुताबिक बैठक दो सत्रों में होगी. एक सत्र में नक्सल समस्या पर चर्चा होगी. नक्सलियों के नए ठिकाने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के ट्राई जंक्शन पर अलग से चर्चा होगी. लंच के बाद दूसरे सत्र में गृह मंत्री अमित शाह नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे. माना जा रहा है कि देश के कुछ हिस्सों में जहां नक्सली गतिविधियां ज्यादा हैं, वहां के लिए बड़ी रणनीति तैयार की जाएगी.

गौरतलब है कि नक्सली हमलों में आए दिन पुलिस और सुरक्षाबलों के जवानों की जान जाती है. गृह मंत्रालय की इस बैठक में नक्सली घटनाओं को रोकने का खाका तैयार किया जाएगा.

अरुण जेटली का विकल्प तलाशना मुश्किल, निधन से बीेजेपी को हुए 5 बड़े नुकसान

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के दिग्गज नेता अरुण जेटली का निधन पार्टी के लिए बड़ा नुकसान है. जेटली को पार्टी का संकटमोचक भी कहा जाता था. उन्होंने कई बार अपनी यह जिम्मेदारी बखूबी निभाई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर उन्हें दिग्गज राजनीतिक बताते हुए कहा कि वह एक मुखर नेता थे,जो बौद्धिक और कानूनी क्षेत्र में दक्षता रखते थे. वहीं  पार्टी अध्यक्ष और गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि अरुण जेटली के निधन से हुए नुकसान की भरपाई जल्दी नहीं हो सकती. अमित शाह ने अरुण जेटली के निधन को व्यक्तिगत नुकसान भी बताया.

जेटली के निधन को बीजेपी के कई नेता पार्टी ही नहीं अपनी निजी क्षति के तौर पर बताते हैं. वजह कि जेटली संकट के समय नेताओं की व्यक्तिगत तौर पर भी मदद करने में आगे थे. अपने राजनीतिक करियर के दौरान अरुण जेटली बीजेपी में कई भूमिकाओं में रहे. वह पदों तक सीमित रहने की बजाए हर तरह की जिम्मेदारियां आगे बढ़कर निभाते रहे. कहा जा रहा है कि बीजेपी के लिए अरुण जेटली का विकल्प ढूंढना नामुमकिन तो नहीं मगर मुश्किल जरूर है.

कौन सेट करेगा जेटली की तरह पार्टी का नैरेटिव

अरुण जेटली ने हमेशा बीजेपी का नैरेटिव सेट किया. खुद बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी इस बात को मानते हैं.  नितिन गडकरी का कहना है कि अरुण जेटली ने बौद्धिकों के बीच बीजेपी का नैरेटिव सेट करने में अहम भूमिका निभाई. चुनावों के दौरान मीडिया की स्ट्रेटजी क्या होगी, यह जेटली बखूबी तय करते थे. यही नहीं, पार्टी की हर मीटिंग से पहले जितनी तैयारी अरुण जेटली करके आते थे, उतना शायद ही दूसरा नेता. अरुण जेटली जो बोलते थे, उससे पार्टी की लाइन तय होती थी.

सच्चे संकट मोचक

बीजेपी की बात हो या फिर पार्टी नेताओं की, जब भी संकट आया, उसे दूर करने के लिए अरुण जेटली सामने खड़े हो जाते थे.  चाहे पार्टी के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी को जैन हावाला कांड से उबारने का मामला हो या फिर गोधरा दंगों और इशरत जहां-सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर के कानूनी पचड़े से मोदी-शाह को बाहर निकालने का. हर जगह अरुण जेटली ने अहम भूमिका निभाई. यही नहीं जब बीजेपी सरकार नीतिगत मुद्दों और सरकारी फैसलों पर घिरी तब अरुण जेटली ने जमकर बचाव किया. नोटबंदी, जीएसटी, राफेल आदि मुद्दों पर जेटली ने ब्लॉग लिखने से लेकर तमाम प्रेस कांफ्रेंस कर फैसलों का बचाव किया.

कानूनी और आर्थिक परामर्शदाता

अरुण जेटली सुप्रीम कोर्ट के दिग्गज वकील होने के नेता कानून के ज्ञाता रहे. मोदी सरकार की ओर से तैयार हर तरह के बिल की ड्राफ्टिंग में अरुण जेटली की भूमिका रहती थी. पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन निधन पर जारी बयान में कह चुकी हैं कि कानूनी मसलों  पर पार्टी जेटली से ही राय लेकर आगे बढ़ती थी. यही नहीं कानून के साथ आर्थिक मामलों में भी उनका समान अधिकार था. यही वजह है कि पीएम मोदी ने पहले कार्यकाल में उन्हें वित्तमंत्री बनाया. दूसरे कार्यकाल में भी वह वित्त मंत्री बनते. मगर स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने 2019 के चुनाव से पहले ही राजनीति और सरकार से खुद को दूर रखने का फैसला कर लिया था. सूत्र बताते हैं कि योग्यता को देखते हुए पार्टी ने उन्हें बिना पोर्टफोलियो के भी मंत्री बनने का ऑफर दिया था. मगर जेटली को पद का लोभ नहीं रहा.

बीजेपी और दूसरे दलों के बीच बने रहे सेतु

बीजेपी और सहयोगी दलों के बीच अरसे से अरुण जेटली सेतु बने रहे. वाजपेयी-आडवाणी के दौर में बने एनडीए के प्रमुख शिल्पकारों में से एक माने जाते थे. 2019 के लोकसभा चुनाव में जब बिहार में नीतीश की जदयू, राम विलास पासवान की लोजपा और बीजेपी में सीटों का पेच फंसा तो अरुण जेटली ने ही इसे सुलझाया. खुद राम विलास पासवान कह चुके हैं कि उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से कहा था कि यह काम अरुण जेटली को सौंप दीजिए, वह बखूबी करेंगे.

कभी 90 के दशक में बीजपी राजनीतिक तौर पर अछूत पार्टी मानी जाती थी. वजह कि कांग्रेस की तुलना में बीजेपी से दूसरे राजनीतिक दल दूरियां बनाकर चलते थे. मगर वाजपेयी ने एनडीए की छतरी तले कई दलों को साथ लाकर इस धारणा को तोड़ दिया. बीजेपी को स्वीकार्यता दिलाई. बताया जाता है कि तब अरुण जेटली एनडीए के शिल्पकारों में से एक रहे. अपने उदारवादी चेहरे और जेपी आंदोलन से जुड़ाव होने की वजह से दूसरे दलों के नेताओं से अच्छे संबंधों के चलते वह एनडीए के गठन में अहम भूमिका निभाने में सफल रहे. कई बार अहम मुद्दों पर विपक्ष से भी समन्वय बनाने में अरुण जेटली बीजेपी की मदद करते रहे.

-कुशल रणनीतिकार, चुनाव मैनेजर

यह अलग बात है कि अरुण जेटली हमेशा राज्यसभा के जरिए संसद जाते रहे. जिंदगी में पहली बार 2014 में अमृतसर से लोकसभा चुनाव लड़े भी तो हार गए. फिर भी वह बीजेपी के लिए कुशल चुनावी रणनीतिकार रहे. हर चुनाव में बीजेपी का मेनिफेस्टो तैयार करने में अहम भूमिका निभाते रहे. 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रचार कैंपेन की उन्होंने कमान संभाली. उन्होंने ही 2014 में यह तय किया था कि चुनावी पोस्टरों में बीजेपी नहीं मोदी सरकार का नारा दिया जाएगा. हर पोस्टर में सिर्फ और सिर्फ मोदी छाए रहेंगे. क्योंकि बीजेपी की ओर से कराए गए आंतरिक सर्वे में जनता के बीच मोदी की अपार लोकप्रियता का पता चला था. उस वक्त जेटली ने चर्चित बयान देते हुए कहा था कि इस बार प्रधानमंत्री का चेहरा संसदीय बोर्ड नहीं देश की जनता तय करेगी. 2002 और 2008 में गुजरात और कर्नाटक राज्य का प्रभारी रहते हुए उन्होंने बीजेपी को सफलता दिलाई थी.

अब दुश्मनों की खैर नहीं, राफेल के बाद 114 लड़ाकू विमान और खरीदने की तैयारी में वायुसेना

नई दिल्ली, । अपनी ताकत में और इजाफा करने के अभियान में जुटी भारतीय वायुसेना नए लड़ाकू विमानों के लिए सभी संभावनाएं तलाश रही है। इसी कड़ी में 114 लड़ाकू विमानों की खरीद प्रक्रिया शुरू हुई है और वायुसेना को उम्मीद है कि नए लड़ाकू विमान उसे जल्द मिल जाएंगे। राफेल फाइटर जेट की तरह इस सौदे में देरी नहीं होगी, जिसमें लगभग दस साल से ज्यादा का वक्त लग गया है।

वायुसेना के लिए 114 लड़ाकू विमानों के लगभग 15 अरब डॉलर (लगभग एक लाख पांच हजार करोड़ रुपये) के सौदे को हासिल करने की दौड़ में बोइंग, लॉकहीड मार्टिन, यूरोफाइटर, रसियन यूनाइडेट एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन और साब जैसी कंपनियां जुटी हैं। यही कंपनियां पहले मीडियम मल्टी रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एमएमआरसीए) की बोली में शामिल हुई थीं।

सौदे को हासिल करने के लिए कंपनियों ने कई आकर्षक प्रस्ताव भी रखे हैं। अमेरिकी कंपनी बोइंग ने तो एफ-16 विमानों का निर्माण भारत में ही करने का प्रस्ताव किया है। भारत और फ्रांस के बीच 36 से ज्यादा राफेल विमानों की आपूर्ति को लेकर भी बातचीत चल रही है। इनके अलावा और भी कई विकल्प सामने आए हैं।

लड़ाकू विमानों की सप्लाई में देरी से भारतीय वायुसेना की युद्ध तैयारियों पर बहुत असर पड़ा है। वायुसेना की पुराने हो चुके मिग-21 लड़ाकू विमानों को धीरे-धीरे हटाने की योजना है, लेकिन विभिन्न कारणों से नए विमानों के मिलने में देरी की वजह से यह योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। फ्रांसीसी विमान कंपनी दासौ से लगभग 10 साल पहले राफेल लड़ाकू विमानों के लिए सौदा हुआ था, अब जाकर अगले महीने पहला विमान मिलने वाला है। सभी 36 विमान मिलने में अभी भी चार साल का वक्त लग जाएगा। रूस से भी नए सुखोई-30 एमकेआइ विमान खरीदे जा रहे हैं।

तेजस’ में वो बात नहीं
वायुसेना जल्द से जल्द हल्के लड़ाकू विमानों (एलसीए) के शक्तिशाली वर्जन को हासिल करना चाहती है, लेकिन उसे 2025 से पहले ऐसे विमान मिलने की उम्मीद नहीं है। स्वदेशी लड़ाकू विमान ‘तेजस’ में अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों जैसी बात नहीं है। हाल यह है कि हिंदुस्तान एयरोनॉक्सि लिमिटेड ने चार दशक पहले तेजस का निर्माण किया था, लेकिन अभी तक वह वायुसेना में अपनी जगह नहीं बना पाया।

वायुसेना के पूर्व अधिकारी चाहते हैं कि ताकत को बढ़ाने के लिए विदेशी कंपनियों से लड़ाकू विमानों की खरीद के साथ ही देश में नए प्रोडक्शन लाइन खोलने के साथ-साथ निजी क्षेत्र को भी इसमें हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। बता दें कि वायुसेना अध्यक्ष एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ ने दिल्ली में हाल ही में एक कार्यक्रम में कहा था कि लोग 40 साल पुरानी कार नहीं चलाते हम 44 साल पुराने विमान उड़ा रहे हैं।

सिंधु की जीत पर स्टार्स की बधाई और अमिताभ बच्चन ने लिखा स्पेशल नोट, याद किए पुराने दिन

,भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में पहली बार गोल्ड जीतकर एक नया इतिहास रच दिया। स्विट्जरलैंड के बसेल में खेले गए महिला एकल के फाइनल मुकाबले में सिंधु ने मात्र 38 मिनट में पूर्व वर्ल्ड चैंपियन नोजोमी ओकुहारा का हरा दिया। 24 साल की उम्र में सिंधु ने अपना पांचवां वर्ल्ड चैंपियनशिप का मेडल जीता। सिंधु की इस जीत से पूरे देश में जश्न का माहौल है। बॉलीवुड स्टार्स ने इस ऐतिहासिक जीत पर सिंधु को बधाई दी है।

स्व‍िटजरलैंड में रविवार को BWF बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप 2019 के फाइनल में ऐतिहासिक जीत दर्ज करनेवाली पीवी सिंधु को देश के कोने-कोने से बधाइयां मिल रही हैं. सिंधु की जीत पर अमिताभ ने भी बधाई देते हुए एक स्पेशल मैसेज शेयर किया है.

अमिताभ ने लिखा, “पीवी सिंधु…वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियन…भारत के लिए सच में अद्भुत गर्व का पल है….KBC में आपके साथ कुछ वक्त बिताने से बहुत सम्मानित हूं…. आपने संभाला और हार नहीं मानी! ये है जज्बा भारत का और आपके जैसे चैंपियंस का.”
बताते चलें कि कौन बनेगा करोड़पति (KBC) के सीजन-9 में पीवी सिंधु शामिल हुई थीं. उनके साथ बिताए कुछ वक्त का जिक्र अमिताभ ने अपने मैसेज में किया है. अमिताभ के अलावा बॉलीवुड स्टार्स शाहरुख खान, अनुपम खेर, तापसी पन्नू, कपिल शर्मा, मानुषी छिल्लर समेत कई सारे सेलेब्स ने भी सोशल मीडिया पर सिंधु को जीत की बधाई दी है.

बॉलीवुड किंग शाहरुख खान ने पीवी सिंधु को बधाई देते हुए लिखा- ‘BWF वर्ल्ड चैम्पियनशिप में गोल्ड जीतने के लिए पीवी सिंधु को बधाई. आपने अपनी दुर्लभ प्रतिभा से पूरे देश का नाम गर्व से ऊंचा किया है. ऐसे ही इतिहास रचते रहिए.”

तापसी पन्नू ने लिखा- “लेडीज और जेंटलमैन, आइए स्वागत करते हैं नई वर्ल्ड चैम्पियन पीवी सिंधु का. आखिरकार हमें गोल्ड मिला गया.”

बता दें कि पीवी सिंधु बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्पियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय शटलर बन गई हैं. उन्होंने जापान की नोजोमी ओकुहारा को हराकर खिताब जीता है. उनकी इस जीत को पूरे देश में सेलिब्रेट किया जा रहा है.

सूचना के अधिकार को ले सुप़ीम कोर्ट का केंद़ व राज्यों को नोटिस

अब तक केवल दिल्ली और महाराष्ट्र में आरटीआई दाखिल करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल है. आरटीआई के प्रावधानों को मजबूत करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है.

सूचना का अधिकार (आरटीआई) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है. अपने नोटिस में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों से आरटीआई दाखिल करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने की अपील की है. अब तक केवल दिल्ली और महाराष्ट्र में आरटीआई दाखिल करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल है. सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है कि पोर्टल से आरटीआई के प्रावधानों को मजबूत करने की जरूरत है.

दो साल पहले केजरीवाल सरकार ने दिल्ली सचिवालय में ई-आरटीआई पोर्टल की शुरुआत की थी. आम नागरिक को ऑनलाइन सूचना देने के मकसद से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वेब पोर्टल लांच किया था. दिल्ली सरकार ने दावा किया कि ई-आरटीआई पोर्टल को शुरू करने वाली वह देश की दूसरी सरकार है. वेब पोर्टल के जरिए जरूरी कागजात भी अटैच किए जा सकते हैं.

भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों के कारण केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड के 22 सीनियर अधिकारियों को जबरन रिटायर कर दिया गया है.

नरेंद्र मोदी सरकार 2.0 में सरकारी विभागों की सफाई यानी भ्रष्‍टाचार और अन्य मामलों के आरोपी अफसरों को निकालने का सिलसिला जारी है. इसी कड़ी में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के 20 से अधिक सीनियर अधिकारियों को जबरन रिटायर (Compulsory Retirement)  कर दिया है.

न्‍यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक CBIC ने 22 वरिष्ठ अधिकारियों को जबरन रिटायर किया है. जिन 22 अधिकारियों को रिटायर किया गया है वो सभी सुपरिटेंडेंट और एओ रैंक के थे. ये फैसला फंडामेंटल रूल 56 (J) के तहत लिया गया है.

पहले भी सरकार ले चुकी है फैसला

यह पहली बार नहीं है जब केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड में वरिष्ठ अधिकारियों को जबरन रिटायर किया गया है. इससे पहले बीते जून महीने में 15 अधिकारियों की छुट्टी की गई थी. ये अधिकारी CBIC के प्रधान आयुक्त, आयुक्त, और उपायुक्त रैंक के थे. इनमें से ज्यादातर के ख‍िलाफ भ्रष्टाचार, घूसखोरी के आरोप हैं. वहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभालते ही टैक्स विभाग के 12 वरिष्ठ अफसरों को जबरन रिटायर कर दिया था. यानी अब तक कुल 49 अधिकारियों को जबरन रिटायर किया गया है.

क्या है फंडामेंटल रूल 56?

दरअसल, फंडामेंटल रूल 56 का इस्तेमाल ऐसे अधिकारियों पर किया जा सकता है जो 50 से 55 साल की उम्र के हों और 30 साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं. सरकार के पास यह अधिकार है कि वह ऐसे अधिकारियों को अनिर्वाय रिटायरमेंट दे सकती है. ऐसा करने के पीछे सरकार का मकसद नॉन-परफॉर्मिंग सरकारी सेवक को रिटायर करना होता है. ऐसे में सरकार यह फैसला लेती है कि कौन से अधिकारी काम के नहीं हैं. यह नियम बहुत पहले से ही प्रभावी है.

आईपीएस अधिकारी सौम्या मिश्रा ने महिला को मारी किक, हुआ गर्भपात

जब किसी महिला के साथ शोषण या अपराध होता है तो वह न्याय की मांग करते हुए पुलिस के पास जाती है क्योंकि उन्हें उम्मीद होती है कि पुलिस उनका दर्द दूर कर देगी। शायद इसी कारण पुलिस विभाग में  महिलाओं की भर्ती की जाती हैं लेकिन जब वह पुलिस आपका साथ न देकर आपके साथ बुरा व्यवहार करें तो कैसा लगेगा। हाल ही में ओडिशा के हेमगीर पुलिस स्टेशन में ऐसी ही घटना हुई जिसमें एक महिला को एक महिला पुलिस अधिकार के कारण न केवल तकलीफ सहनी पड़ी बल्कि अपना अजन्मा बच्चा भी खोना पड़ा। आईपीएस पुलिस सौम्या मिश्रा ने एक गर्भवती महिला को लात मारी जिसके कारण उसका गर्भपात हो गया। इसके तहत उस पर केस दर्ज कर लिया गया हैं। बताते है आपको क्या था पूरा मामला…

जानिए क्या था पूरा मामला 

जानकारी के मुताबिक 3 जुलाई को एसयूवी की चपेट में आने के कारण 19 साल के युवक की मौत हो गई थी। ऐसे में कनिका गांव के लोगो ने उसका विरोध करते हुए पुलिस बीट हाउस को घेर कर एसयूवी चलाने वाले व्यक्ति की पकड़ की मांग की। गुस्साय हुए लोगों ने वहां पर पत्थरबाजी की जिससे की कुछ कांस्टेबल जख्मी हो गए। 

उसके बाद पुलिस वालो ने विरोध  करने वाले 14 लोगों का पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था जिसमें पीड़िता कनिका के पति उत्तम भी शामिल थे। जब पुलिस उत्तम को गिरफ्तार न कर सकी तो वह उसे ढूंढते हुए उनके घर पर पहुंची यहां पर उन्होंने प्रिया के साथ मारपीट की। 

प्रिया ने सुंदरगढ़ में एक सब डिविजनल ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में मामला दर्ज करवाते हुए कहा कि जब पुलिस उनके पति को ढूंढने आई तो मिश्रा ने उनके पेट पर लात मारी जिस कारण उनका गर्भपात हो गया। इतना ही मामला दर्ज करवाने के बाद एसपी व अन्य पुलिस अधिकार उसके फ्लाई ऐश ईंट कारखाने में चले गए। वहां पर पांच वाहनों और एक ईंट बनाने वाली मशीन को क्षतिग्रस्त कर दिया, जिसकी कीमत 4 लाख रुपये थी।

इस धारा के तहत दर्ज किया केस 

हेमगीर पुलिस स्टेशन की इंस्पेक्टर श्रद्धाजंलि सुबुद्धि ने अनुसार मिश्रा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। जिसकी जांच डिप्टी एसपी ज्योत्स्नामय को सौंपी गई है। शिकायत के आधार पर, एसपी को 341 (गलत संयम), 506 (आपराधिक धमकी), 457 (अत्याचार या घर तोड़ने की सजा सहित कई आरोपों के साथ जेल में रखा गया है। ), 294 (किसी भी सार्वजनिक स्थान पर अश्लील कृत्य जो दूसरों को परेशान करता है), 342, 427, 313 (महिला की सहमति के बिना गर्भपात का कारण), 166 (लोक सेवक अवज्ञा कानून), आईपीसी का 503 और 504 भी लगाई गई है।