अधिसूचना / सभी को एकसमान वेतन का नियम लागू, सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन

नई दिल्ली। देश के सभी लोगों को एकसमान वेतन देने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्र सरकार ने वेतन संहिता 2019 को अधिसूचित कर दिया है। इसके राष्ट्रीय स्तर पर लागू होने के बाद देश के करीब 50 करोड़ लोगों को फायदा होगा।

8 अगस्त को राष्ट्रपति ने दे दी थी मंजूरी

श्रम कानूनों में सुधार के उद्देश्य से लाई गई वेतन संहिता 2019 को लोकसभा ने 30 जुलाई और राज्यसभा ने 2 अगस्त को पारित कर दिया था। इसके बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया था। राष्ट्रपति ने इसे 8 अगस्त 2019 को अपनी मंजूरी दे दी थी। इसके बाद ही इसके लागू होने के लिए सरकारी नोटिफिकेशन का इंतजार किया जा रहा था। अब सरकार ने इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस वेतन संहिता को सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक सुरक्षा एवं कल्याण और औद्योगिक संबंध पर आधारित चार संहिताओं से तैयार किया गया है। यह चारों संहिताएं 44 पुराने श्रम कानूनों की जगह लेंगी। यह विधेयक मजदूरी भुगतान अधिनियम 1936, न्यूनतम मजदूरी कानून 1948 , बोनस भुगतान कानून 1965 और समान पारिश्रमिक अधिनियम 1976 की जगह लेगा।

50 करोड़ लोगों को होगा फायदा

इस वेतन संहिता के लागू होने के बाद नियोक्ता, श्रमिक संगठनों एवं राज्य सरकारों की त्रिपक्षीय समिति का गठन किया जाएगा जो श्रमिकों के लिए वेतन की नई दरें तय करेगी। त्रिपक्षीय व्यवस्था में जो भी वेतन तय होगा, उसको अधिसूचित कर दिया जाएगा। वेतन संहिता लागू होने से देश के करीब 50 करोड़ श्रमिकों को इसका फायदा मिलेगा। यह संहिता सभी कर्मचारियों और कामगारों के लिए वेतन के समयबद्ध भुगतान के साथ ही न्यूनतम वेतन सुनिश्चित करती है। कृषि मजदूर, पेंटर, रेस्टोरेंट और ढाबों पर काम करने वाले लोग, चौकीदार आदि असंगठित क्षेत्र के कामगार जो अभी तक न्यूनतम वेतन की सीमा से बाहर थे, उन्हें न्यूनतम वेतन कानून बनने के बाद कानूनी सुरक्षा हासिल होगी। विधेयक में सुनिश्चित किया गया है कि मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को अगले महीने की 7 तारीख तक वेतन मिलेगा, वहीं जो लोग साप्ताहिक आधार पर काम कर रहे हैं उन्हें हफ्ते के आखिरी दिन और दैनिक कामगारों को उसी दिन पारिश्रमिक मिलना सुनिश्चित होगा।

नियोक्ताओं पर लगेगा जुर्माना

इस विधेयक में न्यूनतम मजदूरी से कम वेतन देने पर नियोक्ताओं पर जुर्माने का भी प्रावधान है। यदि कोई नियोक्ता तय मजदूरी से कम का भुगतान करता है तो उस पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगेगा। यदि वह पांच साल के दौरान दोबारा ऐसा करता है तो उसे 3 माह तक का कारावास और 1 लाख रुपए तक जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है।

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