कांग्रेस बोली- चिदंबरम के बहाने असल मुद्दों से ध्यान भटका रही मोदी सरकार

पूर्व वित्त और गृह मंत्री पी चिदंबरम की गिरफ्तारी पर कांग्रेस ने गुरुवार को मोदी सरकार को जमकर घेरा और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पर हुई कार्रवाई को दिनदहाड़े लोकतंत्र की हत्या करार दिया. केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि चिदंबरम की गिरफ्तारी से दिनदहाड़े लोकतंत्र की हत्या की जा रही है. उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है. बेटी की हत्या के एक आरोपी के बयान के आधार पर केस बनाया गया.

कांग्रेस की ओर से रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि पिछले 2 दिन से भारत इस बात का गवाह बना कि किस तरह से दिनदहाड़े लोकतंत्र की हत्या की गई और सरकार ने सीबीआई और ईडी का इस्तेमाल करते हुए राजनीतिक बदला लेने की कोशिश की. चिदंबरम के खिलाफ जिस तरह की कार्रवाई की गई वो राजनीतिक बदले को दिखाता है.

हम चिदंबरम के साथ खड़ेः रणदीप

कांग्रेस नेता रणदीप ने चिदंबरम के साथ खड़े होने की बात करते हुए कहा कि हम चिदंबरम के साथ खड़े हैं. चिदंबरम पर हो रही कार्रवाई राजनीति प्रतिशोध के अलावा कुछ और नहीं है. हम देख रहे हैं कि देश की अर्थव्यवस्था चौंकाने वाली हो गई है. इंडस्ट्रीज बंद हो रहे हैं और लोगों की नौकरियां जा रही हैं. लोगों का इन मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है.

उन्होंने आगे कहा कि मोदी सरकार असल मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए चिदंबरम के खिलाफ कार्रवाई कर रही है. जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है. बेटी की हत्या की आरोपी को सरकारी गवाह बनाकर केस बनाया गया.

रणदीप सिंह सुरजेवाला ने पी चिदंबरम का बचाव करते हुए कहा कि वह देश के सम्मानित अर्थशास्त्री और राजनीतिज्ञ हैं. सुप्रीम कोर्ट में वकील रहे हैं. उन्होंने जांच के दौरान कुछ भी नहीं छुपाया. बीजेपी सरकार की ओर से दुश्मनी का माहौल बनाया जा रहा है. उन्होंने आगे कहा कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने के कोई सबूत नहीं हैं. जिन लोगों पर अपराध करने के आरोप लगे हैं वो सुरक्षा के साये में स्वतंत्र घूम रहे हैं. जिस शख्स ने 40 साल देश की सेवा की आज उसे कानून से भागने वाला साबित करने की कोशिश की जा रही है.

उन्होंने आगे कहा कि कार्ति चिदंबरम के घर पर 4 बार छापा मारा गया और उन्हें जेल भी ले जाया गया. अब वह जमानत पर बाहर हैं. कार्ति ने जांच एजेसिंयों के साथ 20 बार सहयोग किया और जब भी समन मिला वो पेश भी हुए.

ग्वालियर / जन्माष्टमी पर 50 करोड़ रुपए के जेवरातों से सजेंगे राधा-कृष्ण, साल में एक दिन आता है ये मौका

ग्वालियर.यहां फूलबाग गोपाल मंदिर में कल जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान राधाकृष्ण का श्रृंगार करीब 50 करोड़ रुपए के जेवरातों से होगा। सिंधिया राजवंश के ये प्राचीन जेवरात मध्यभारत की सरकार के समय गोपाल मंदिर को सौंप दिएगए थे। इन बेशकीमती जेवरातों में हीरे और पन्ना जड़ितहैं। राधाकृष्ण के इस प्रकार के श्रृंगार को देखते हुए जन्माष्टमी पर नगर निगम आयुक्त संदीप माकिन और पुलिस प्रशासन ने मंदिर में व्यवस्थाएं चाक चौबंद करने के निर्देश दिएहैं।
गोपाल मंदिर में स्थापित भगवान राधाकृष्ण की प्रतिमा को इन जेवरात से सुसज्जित करने की परंपरा आजादी के पूर्व से है। उस समय सिंधिया राजपरिवार के लोग व रियासत के मंत्री, दरबारी व आम लोग जन्माष्टमी पर दर्शन को आते थे। उस समय भगवान राधाकृष्ण को इन जेवरातों से सजाया जाता था। आजादी के बाद मध्यभारत की सरकार बनने के बाद गोपाल मंदिर, उससे जुड़ी संपत्ति जिला प्रशासन व निगम प्रशासन के अधीन हो गई है।

नगर निगम ने इन जेवरातों को बैंक लॉकर में रखवा दिया। वर्षों तक ये लॉकरों में रखे रहे। इसके बाद साल 2007 में डॉ. पवन शर्मा ने निगमायुक्त की कमान संभाली। उन्होंने निगम की संपत्तियों की पड़ताल कराई, उसमें इन जेवरातों की जानकारी मिली। उसके बाद तत्कालीन महापौर विवेक शेजवलकर और निगमायुक्त ने गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी के दिन भगवान राधाकृष्ण की प्रतिमाओं को इन जेवरातों से श्रृंगार कराने की परंपरा शुरू कराई। उसके बाद से तत्कालीन आयुक्त इस परंपरा का पालन कर रहे हैं।

इन जेवरातों में हीरे-जवाहरात से जड़ा स्वर्ण मुकुट, पन्ना और सोने का सात लड़ी का हार, 249 शुद्ध मोती की माला, हीरे जडे कंगन, हीरे व सोने की बांसुरी, प्रतिमा का विशालकाय चांदी का छत्र, 50 किलो चांदी के बर्तन, भगवान श्रीकृष्ण व राधा के झुमके, सोने की नथ, कंठी, चूडियां, कड़े समेत अन्य बहुत सा सामान शामिल है।

जेवरातों की बाजार दर काफी ज्यादा होने के कारण जन्माष्टमी के दिन यहां 200 से अधिक जवान तैनात किएजाएंगे। पूरा गोपाल मंदिर पुलिस छावनी में तब्दील होगा। इस बार भी भगवान राधाकृष्ण के दर्शन हेतु डेढ़ से दो लाख भक्तों के आने की संभावना है।

रेत मंडी में यातायात पुलिस की कार्यवाही, अवैध रेत से भरे 10 डम्फर जब्त |

शिवपुरी। शिवुपरी की रेत मंण्डी में यातायात प्रभारी रणवीर सिंह यादव ने अवैध रेत से भरे 10 डम्फर जब्त करने की कार्यवाही की हैं। बताया जा रहा हैं कि इन सभी डम्फरो को कार्रवाही हैतु यातायात थाने ले जाया जा रहा हैं। खबर लिखे जाने तक एसडीओपी भी मौके पर पहुंचे गए थे।

जानकारी के अनुसार एसपी शिवपुरी राजेश सिंह को लगातार सूचना मिल रही थी कि रेत मंडी में प्रतिदिन अवैध रेत से भरे डम्फर बिकने पहुंचते हैं। ऐसे डम्फरो पर कार्यवाही के लिए यातायात प्रभारी रणवीर सिंह को निर्देशित किया। आज सुबह 7 बजे यातायात प्रभारी रणवीर सिंह अपने दलबल के साथ पहुंचे,और मौके पर खडे डम्फरो से रायल्टी मांगी तो वह दिखा नही पाए।

रेत मंडी में खडे 10 डम्फरो को जब्त करने की कार्यवही की गई। एसडीओपी शिवपुरी शिवसिंह भदौरिया ने कहा कि इन सभी अवैध रेत से भरे डम्फरो को जांच की जद में लिया गया हैं। इन डम्फरो को जब्त कर यातायात थाने में ले जाया जाऐगा। जब्ती की कार्यवाही कर आगें की कार्यवाही के लिए मायनिंग विभाग को भेजा जाऐगा। यह रेत मंडी में सभंत:सबसे बडी कार्रवाही हैं।

PAK से तनाव के बीच बढ़ेगी भारत की सैन्‍य शक्ति, इस दिन देश को मिलेगा पहला राफेल लड़ाकू विमान

नई दिल्ली : कश्‍मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्‍तान के बीच तनाव के बीच भारत की सैन्‍य शक्ति में इजाफा होने जा रहा है. दरअसल, भारत को फ्रांस से अपना पहला राफेल लड़ाकू विमान मिलने जा रहा है. यह भारत को मिलने वाला पहलाराफेल लड़ाकू विमान होगा. खुद रक्षा मंत्री रामनाथ सिंह और वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ इसे लेने के लिए फ्रांस जाने वाले हैं.

जानकारी के अनुसार, 20 सितंबर को राजनाथ सिंह और बीएस धनोआ की मौजूदगी में राफेल जेट विमान भारतीय वायुसेना को सौंपा दिया जाएगा. भारतीय वायुसेना के मुताबिक, फ्रांस के अधिकारी वहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वायुसेना चीफ बीएस धनोआ और कई रक्षा अधिकारियों की मौजूदगी में राफेल विमान को भारत को देंगे. 

दरअसल, सितंबर 2016 में भारत और फ्रांस के बीच 36 राफेल विमान खरीदने को लेकर डील हुई थी. इन विमानों की कीमत 7.87 बिलियन यूरो तय की गई थी.

उल्‍लेखनीय है कि भारतीय वायुसेना राफेल जेट विमान को उड़ाने के लिए 24 पायलटों इसके लिए ट्रेनिंग देगा. इसके बाद राफेल विमान पहली बार देश की सुरक्षा के लिए उड़ाने को तैयार होंगे. सभी पायलट तीन बैचों में ट्रेनिंग लेंगे. बताया जा रहा है कि भारतीय वायुसेना राफेल विमान की एक-एक टुकड़ी को हरियाणा के अंबाला और पश्चिम बंगाल के हाशिमारा में अपने एयरबेस पर बनाने जा रही है.

दिल्ली: तुगलकाबाद हिंसा में चंद्रशेखर समेत 91 गिरफ्तार, पैरामिलिट्री फोर्स तैनात

दिल्ली के तुगलकाबाद में बुधवार रात हुई हिंसा में अबतक 91 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. इसमें भीम आर्मी चीफ चन्द्रशेखर आजाद उर्फ रावण भी शामिल हैं. गुरुवार सुबह पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया. दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ पैरामिलिट्री फोर्स को भी तैनात किया गया.

तुगलकाबाद हिंसा के दौरान बुधवार रात 15 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए थे और दर्जनों गाड़ियों में तोड़-फोड़ की गई थी. पुलिस ने गिरफ्तार सभी 91 आरोपियों पर दंगा फैलाना, सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला दर्ज किया है. सभी आरोपियों को आज साकेत कोर्ट में पेश किया गया जाएगा.

क्या है पूरा मामला

तुगलकाबाद इलाके में रविदास मंदिर तोड़े जाने के खिलाफ बुधवार शाम दलित समाज के लोगों ने रामलीला मैदान में विशाल प्रदर्शन किया. इस आंदोलन में दलित समुदाय के नेता और भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर मौजूद थे. इस मौके पर दिल्ली सरकार के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम भी मौजूद थे. इस विरोध प्रदर्शन में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से दलित समुदाय के सैकड़ों लोग भी शामिल हुए.

इसके बाद कई घंटे तक जमकर बवाल हुआ. रामलीला मैदान में रैली के बाद हजारों की संख्या में दलित समुदाय के लोग तुगलकाबाद पहुंचे और पत्थरबाजी शुरू कर दी. हिंसा के दौरान 15 पुलिसकर्मी समेत दर्जनभर लोग जख्मी हो गए. जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने लाठियां भांजी और कई राउंड हवाई फायरिंग की.

इलाके में अर्धसैनिक बलों को भी तैनात कर दिया गया है. भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर को गिरफ्तार कर लिया गया. गोविंदपुरी थाने में केस दर्ज किया गया है. कई और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है.

कश्मीर पर पाकिस्तान चाहकर भी नहीं खेल सकता अपना आखिरी दांव

मोदी सरकार के जम्मू-कश्मीर के विशेषाधिकारों से जुड़े अनुच्छेद 370 में बदलाव के फैसले के बाद से ही पाकिस्तान अपना हर दांव आजमा रहा है. भारत के साथ कूटनीतिक संबंधों में कमी और व्यापारिक संबंध खत्म करने के आत्मघाती फैसले के बाद पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी मुद्दा उठाने की कोशिश की पर नाकाम रहा. तुर्की और चीन के अलावा, कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को किसी भी देश का समर्थन नहीं मिला. ऐसे में पाकिस्तान के पास एक ही विकल्प बचता है कि वह हर बार की तरह जिहादी हथियार का इस्तेमाल करे.

सोमवार को पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक एक टीवी शो के दौरान खुले आम कश्मीर मुद्दे पर आतंकवाद का समर्थन करते नजर आए. पाकिस्तान के पूर्व राजदूत अशरफ जहांगीर काजी और अब्दुल बासित ने पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर के टीवी शो में कहा कि कश्मीर के लिए सशस्त्र संघर्ष वैध है. यहां तक कि उन्होंने पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहयोग देने की भी अपील की.

काजी ने कहा, “भारत एक ताकतवर देश हैं और केवल कूटनीति से पाकिस्तान को अपेक्षित नतीजे नहीं मिलने वाले हैं. जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए यह वैध है कि वे सशस्त्र प्रतिरोध करें या हाथ में बंदूक उठाएं. अगर वे अपने इस वैध जिहाद के लिए दूसरे देशों से मदद मांगते हैं तो उसमें भी कुछ गलत नहीं होगा.

भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त रह चुके अब्दुल बासित ने भी इसका समर्थन करते हुए कहा, जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर कूटनीति की एक सीमा है. अगर कश्मीरी अपनी जान गंवा रहे हैं तो एक स्थिति आएगी जब हमें अहम कार्रवाई करनी होगी. अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत भी दूसरे देशों की जिम्मेदारी है कि वे कश्मीरियों के संघर्ष में उनकी मदद करें.

पश्चिमी देशों के विश्लेषकों का कहना है कि भारत के अनुच्छेद-370 पर फैसले के बाद से पाकिस्तान जिहादी ढांचे को ध्वस्त करने के अपने पहले गंभीर प्रयास को रोक सकता है. हालांकि, इस्लामाबाद ऐसा कोई कदम उठाता है तो इससे उसके लिए ही मुश्किलें बढ़ जाएंगी.

पिछले दिनों जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से कश्मीर में जिहाद के विकल्प का इस्तेमाल करने के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इससे फायदे से ज्यादा नुकसान ही होगा. इमरान खान ने कहा कि जिहाद जमीनी स्तर पर कोई विकल्प नहीं है. इमरान ने यह भी आरोप लगाया था कि भारत दुनिया का ध्यान खींचने के लिए पुलवामा हमले के बाद की तरह किसी फर्जी ऑपरेशन को भी अंजाम दे सकता है.

हालांकि, इमरान खान की सरकार के ऊपर घरेलू दबाव है और विपक्षी दल कश्मीर पर कदम उठाने की मांग कर रहे हैं. पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल कमर बाजवा ने भी अपने बयान में कहा कि सेना कश्मीरियों के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं हालांकि, वह साफ-साफ नहीं बता सके कि वह क्या करने की स्थिति में हैं. दूसरी तरफ, कई नेता-राजदूत लगातार जिहाद की रट लगा रहे हैं.

पाकिस्तान की सेना ने 1990 में कश्मीर में छद्मयुद्ध छेड़ने के लिए जिहादी संगठनों को तैयार किया. अमेरिका व अन्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दबाव के बावजूद पाकिस्तान इन आतंकी समूहों के खिलाफ कार्रवाई का केवल दिखावा करता रहा और उन्हें खुले आम अपनी जमीन पर फलने-फूलने दिया. स्थानीय और विदेशी अधिकारियों के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान ने मजबूरी में आतंकी संगठनों की संपत्ति जब्त करने, कुछ ट्रेनिंग कैंपों और उनके कुछ प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार कर खुद को आर्थिक प्रतिबंधों से बचाने की कोशिश की है.

कुछ विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान फिलहाल कश्मीर पर आतंकी समूहों को आगे करने का जोखिम नहीं लेगा. खासकर, जब इसी साल पुलवामा हमले के बाद बालाकोट में भारतीय वायुसेना ने आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई कर संदेश दे दिया कि वह ऐसे बड़े कदम उठा सकता है. पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व का एक धड़ा भी यह बात मानता है कि जिहाद की वजह से उन पर सीमा-पार आतंकवाद फैलाने का ठप्पा लगा है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर पर उनकी स्थिति कमजोर हुई है. अगर पाकिस्तान जिहादी संगठनों को नहीं रोक पाता है तो इससे उसके लिए ही मुश्किलें बढ़ेंगी क्योंकि इससे वैश्विक मंचों पर पहले ही आतंकवाद को लेकर छवि बेहद खराब है.

अक्टूबर महीने में, अंतरराष्ट्रीय संस्था फाइनेंशियल ऐक्शन टास्क फोर्स यह फैसला करेगी कि पाकिस्तान को आतंकी संगठनों की फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग रोकने में नाकाम रहने पर उत्तर कोरिया और ईरान के साथ ब्लैकलिस्ट में डाला जाए या नहीं. अगर अंतरराष्ट्रीय संस्था पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट में डालती है तो उसकी पहले से ही बदहाल अर्थव्यवस्था वैश्विक वित्तीय व्यवस्था से बिल्कुल कट जाएगी. इसके अलावा, पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मई में स्वीकृत हुए 6 अरब डॉलर के रेस्क्यू पैकेज पर भी खतरा मंडराएगा. यही नहीं, पाकिस्तान की अर्थव्यव्यवस्था की क्रेडिट खराब होने से निवेश भी गिर जाएगा.

इस्लामाबाद आधारित विश्लेषक शहरयार फजली ने कहा कि पाकिस्तान इस उम्मीद में है कि अफगानिस्तान शांति वार्ता में अमेरिका की मदद के बदले वॉशिंगटन उसे ब्लैकलिस्ट होने से बचाने में मदद करेगा. 

ट्रंप ने कहा- अफगानिस्तान के बगल में है भारत, ISIS से लड़ना ही पड़ेगा

अफगानिस्तान से अपनी फौज वापस बुलाना चाहता है अमेरिकाअफगानिस्तान में बढ़ रहा ISIS का प्रभावट्रंप ने कहा, भारत को आतंक के खिलाफ लड़नी ही होगी जंग

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा कि भारत को अफगानिस्तान में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ ‘लड़ाई’ में उतरना चाहिए. व्हाउट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अफगानिस्तान में आतंकी संगठनों से लड़ाई में भारत समेत रूस, तुर्की, इराक और पाकिस्तान को अपनी भूमिका अदा करने की जरूरत है.

ट्रंप ने शिकायती लहजे में कहा कि 7000 मील दूरी से अमेरिका अफगानिस्तान में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन कर रहा है जबकि बाकी देश बिल्कुल भी सहयोग नहीं दे रहे हैं.

अफगानिस्तान में आतंकी संगठन आईएसआईएस की बढ़ती सक्रियता के सवाल पर ट्रंप ने कहा, भारत वहां मौजूद है लेकिन वे नहीं लड़ रहे हैं, हम लड़ रहे हैं. पाकिस्तान भी ठीक दरवाजे पर है. वे लड़ तो रहे हैं लेकिन वे बहुत ही कम कोशिशें कर रहे हैं. जहां कहीं भी आईएसआईएस की मौजूदगी है, किसी ना किसी वक्त उन देशों को उनसे लड़ना ही होगा. इसके बाद ट्रंप ने उन देशों का नाम भी गिनाया जिसमें रूस, तुर्की, इराक, अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत का जिक्र आया.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यह ठीक नहीं है.

अफगानिस्तान में भारत की भूमिका को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की रणनीति में यह बड़ा बदलाव है. ट्रंप की खुद की दक्षिण एशिया की रणनीति में भारत की भूमिका अफगानिस्तान में रचनात्मक और विकास कार्यों में तय की गई थी. अफगानिस्तान में भारत विकास कार्यों में लगातार अपना योगदान दे भी रहा है. भारत से ना तो आतंकवाद निरोधी अभियानों में हिस्सा लेने के लिए कभी कहा गया और ना ही भारत खुद सैन्य ऑपरेशनों में शामिल होना चाहता है. ऐसे में भारत से ट्रंप की ये नई उम्मीदें चौंकाने वाली हैं.
इराक और सीरिया में लगभग अपनी जमीन खो चुके आतंकी संगठन आईएसआईएस अब अफगानिस्तान में अपनी पकड़ मजबूत करने में लगा हुआ है. अफगानिस्तान में कुछ दिन पहले ही एक आत्मघाती हमले में 63 लोगों की मौत हो गई है.

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अफगानिस्तान में दशकों चले युद्ध से अब अमेरिका को बाहर निकालना चाहते हैं. अमेरिकी फौज सितंबर 2001 से ही अफगानिस्तान में मौजूद रही है और अब करीब 18 साल बीत जाने के बाद अमेरिका दूसरे देशों से योगदान देने की अपील कर रहा है.

ट्रंप ने इसके एक दिन पहले ही संकेत दिया था कि वह अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज की पूरी तरह से वापसी नहीं कराएंगे लेकिन वे वहां पर ‘किसी’ की मौजूदगी चाहता है ताकि तालिबान फिर से अफगानिस्तान पर अपना नियंत्रण ना कर सके.

J-K: नजरबंद नेताओं पर चेतन भगत ने ऐसा क्या ट्वीट किया, जो भड़कीं गौहर खान

जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद हालात धीरे धीरे सामान्य हो रहे हैं. मोदी सरकार के ऐतिहासिक फैसले पर सोशल मीडिया पर सेलेब्स अपनी राय रख रहे हैं. अब कश्मीर के मद्दे पर मशूहर लेखक चेतन भगत और एक्ट्रेस गौहर खान के बीच ट्विटर वॉर छिड़ गई है. चेतन भगत ने अपने ट्वीट में J&K नेताओं को नजरबंद करने के फैसले का सपोर्ट किया है. जिस पर गौहर खान भड़की हैं.

चेतन भगत ने ट्वीट कर लिखा- ”गणित की समस्या. अगर कुछ लोग (हिरासत में हैं)= शांति, अगर कुछ लोग (हिरासत में नहीं हैं)= पत्थरबाजी, अशांति और भी बहुत कुछ, ये आपको कुछ लोगों के बारे में क्या बताता है?”

चेतन भगत के ट्वीट का जवाब देते हुए गौहर खान ने लिखा- ”आपके विचार. उफ्फ. आपकी अजीबोगरीब मैथ प्रॉब्लम में कुछ लोगों के बारे में मुझे नहीं पता. लेकिन कम से कम अब बहुत सारे लोग ये जान जाएंगे कि आप असल में क्या हैं.”
.चेतन भगत ने इसके बाद जम्मू-कश्मीर पर कई सारे ट्वीट किए, जिसमें उन्होंने J&K के आर्थिक हालात बेहतर होने और रोजगार बढ़ने की बात कही. चेतन भगत ने ये भी लिखा है J&K में इंटरनेट सुविधा को बंद करना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन ये सब अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए किया गया है. एक टवीट में चेतन भगत ने लिखा- ”अगर तुम्हें सच में जम्मू-कश्मीर की चिंता है, तो जब भी तुम कहते हो कश्मीर के लोग कृपया जम्मू के लोग और लद्दाख के लोग कहें.”

वहीं गौहर खान की बात करें तो इससे पहले भी गौहर कश्मीरियों की चिंता में ट्वीट कर चुकी हैं. 12 अगस्त को ईद के मौके पर गौहर ने कहा था कि वे इस ईद पर खुश नहीं हैं. उन्होंने ट्वीट में लिखा- ”जब कोई अपने करीबियों से एक हफ्ते से ज्यादा समय से बात नहीं कर पा रहा हो तो वो ही इसका दर्द समझ सकता है. शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक बेचैनी! मैं इस ईद पर दुखी हूं. बहुत बहुत दुखी. हर रोते हुए दिल के लिए. बिल्कुल मेरी तरह. मैं कश्मीर में अपने प्रियजनों के लिए नहीं बल्कि सभी के लिए प्रार्थना करती हूं.”

कश्मीर से ध्यान बंटाने की PAK की साजिश, सरक्रीक इलाके में कमांडो की तैनाती

कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद से पाकिस्तान बौखलाया और डरा हुआ है. कश्मीर से ध्यान बंटाने के लिए पाकिस्तान ने अब नई साजिश रची है. सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने गुजरात के सरक्रीक इलाके के सामने एसएसजी कमांडो को तैनात किया है. पाकिस्तान ने इकबाल-बाजवा पोस्ट पर अपने कमांडो को तैनात किया है.

सूत्रों के मुताबिक आशंका जताई जा रही है कि पाकिस्तान अपने कमांडो का इस्तेमाल वहां तैनात भारतीय सुरक्षा बलों के खिलाफ ऑपरेशन करने के लिए कर सकता है.

सूत्रों के मुताबिक एसएसजी कमांडो भारतीय सेना के खिलाफ बॉर्डर एक्शन टीम की मदद के कार्रवाई करेंगे. पाकिस्तान लंबे समय से जम्मू-कश्मीर और एलओसी इलके में भारतीय सेना के खिलाफ कार्रवाई करता रहा है.

जम्मू और कश्मीर की तरह ही भारत और पाकिस्तान के बीच सरक्रीक विवाद लंबे समय से रहा है. सरक्रीक विवाद 1960 के दशक में शुरू हुआ था. सर क्रीक विवाद दरअसल 60 किलोमीटर लंबी दलदली ज़मीन का विवाद है जो भारतीय राज्य गुजरात और पाकिस्तान के राज्य सिंध के बीच स्थित है.

सरक्रीक पानी के कटाव के कारण बना है और यहां ज्वार भाटे के कारण यह तय नहीं होता कि कितने हिस्से में पानी रहेगा और कितने में नहीं.

आजादी के बाद जब दोनों देशों के बीच बंटवारा हुआ तो पाकिस्‍तान ने सर क्रीक खाड़ी पर अपना मालिकाना हक जता दिया. इस पर भारत ने एक प्रस्‍ताव तैयार किया था जिसमें समुद्र में कच्‍छ के एक सिरे से दूसरे सिरे तक सीधी रेखा खींची और कहा कि इसे ही सीमारेखा मान लेनी चाहिए. यह प्रस्‍ताव पाकिस्‍तान ने ठुकरा दिया, क्‍योंकि इसमें 90 फीसदी हिस्‍सा भारत को मिल रहा था.