पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र का निधन, लंबे समय से थे बीमार

नई दिल्ली। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र का निधन हो गया है। 82 साल के मिश्र लंबे समय से बीमार थे और दिल्ली में उनका इलाज चल रहा था। सोमवार को उन्होंने अंतिम सांस ली। जगन्नाथ मिश्र तीन बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे।

एक प्रोफेसर से राजनेता बने मिश्र का जन्म सुपौल के बलुआ बाजार में 1937 में हुआ था। बडे भाई ललित नारायण मिश्र के राजनीति में होने के कारण जगन्नाथ मिश्र की भी इसमें शुरू से ही रुचि थी। हालांकि, उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक प्रोफेसर के रूप में की थी और बाद में राजनीति में आ गए।

डॉ. मिश्र 1975 में पहली बार मुख्यमंत्री बने। दूसरी बार उन्हें 1980 में कमान सौंपी गई और आखिरी बार 1989 से 1990 तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे। वह 90 के दशक के बीच केंद्रीय कैबिनेट मंत्री भी रहे।

उनका मशहूर चारा घोटाले में भी नाम था और 30 सितंबर 2013 को रांची में एक विशेष केंद्रीय जांच ब्यूरो ने चारा घोटाले में 44 अन्य लोगों के साथ उन्हें दोषी ठहराया। उन्हें चार साल की कारावास और 200,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया था।

शेहला रशीद के खिलाफ दर्ज हुई आपराधिक शिकायत, गिरफ्तारी की मांग

सुप्रीम कोर्ट के वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने शेहला रशीद के खिलाफ आपराधिक शिकायत दायर कराई है. इस शिकायत में कथित तौर पर भारतीय सेना और भारत सरकार के खिलाफ फर्जी खबर फैलाने के आरोप में शेहला की गिरफ्तारी की मांग की गई है.

दरअसल, केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर से संविधान के अनुच्छेद 370 को हटा दिया है. यह अनुच्छेद जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देता था. वहीं जम्मू कश्मीर को दो हिस्सों में भी बांटा गया है. इसमें जम्मू कश्मीर और लद्दाख दो नए केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए हैं. जिसके बाद कई लोग इसके विरोध में भी आ गए हैं.

शेहला रशीद भी इसका विरोध कर रही हैं. जानकारी के मुताबिक शेहला रशीद दिल्ली में हैं और सरकार के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की बात भी कह चुकी हैं.

जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट की नेता शेहला रशीद ने एक ट्वीट में लिखा था, ‘मेरी मां ने कई कठिनाइयों का सामना करते हुए डीसी ऑफिस से मुझे कॉल किया. वह फोन पर रो रही थीं और पूछ रही थीं कि मैं कहां हूं. अगर मुझे गिरफ्तार किया गया है तो क्या मैं ठीक हूं. सात दिन के बाद उनसे बात की. मुझे उम्मीद है कि ईद पर परिवारों को अलग करने का परिणाम बीजेपी को भुगतना होगा.’

मध्यप्रदेश / एमपी का ‘उसेन बोल्ट’ ट्रायल में आखिरी नंबर पर रहा, अब एक महीने बाद फिर होगा टेस्ट

भोपाल। 100 मीटर की दौड़ 11 सेकेंड पूरी करने का वीडियो वायरल होने के बाद रातोंरात स्टार बना शिवपुरी का रामेश्वर गुर्जर भोपाल के टीटी नगर स्टेडियम में हुई ट्रायल में फेल हो गया। छह धावकों के साथ दौड़ा रामेश्वर आखिरी नंबर पर रहा। उसने ये दौड़ 12.90 सेकंड में पूरी की। रामेश्वर के साथ दौड़े आयुष तिवारी पहले स्थान पर रहे।ट्रायल में फेल होने के बाद रामेश्वर ने कहा कि पहली बार ट्रैक पर जूते पहन के दौड़ा इसलिए पीछे रह गया। मेरी कमर और पीठ में भी दर्द है। लेकिन एक महीने बाद में उम्मीद पर खरा उतरुगा

वीडियो के वायरल होते ही मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इसे शेयर करते हुए केंद्रीय खेलमंत्री किरेन रिजिजू को टैग कर दिया। इसके बाद किरण रिजिजू ने रामेश्वर को दिल्ली भेजने कहा। लेकिन इससे पहले ही प्रदेश के खेल मंत्री जीतू पटवारी ने रामेश्वर को भोपाल बुला लिया ओर मीडिया के सामने पेश कर दिया। क्या रामेश्वर वाकई 11 सेकंड में दौड़ पूरी कर सकते हैं? यह देखने के लिए शनिवार को टीटी नगर स्टेडियम में उन्हें दौड़ने के लिए कहा गया। लेकिन, रामेश्वर ने कहा कि वे काफी थके हुए हैं। उन्हें थोड़ा आराम चाहिए। फिर तय हुआ कि उन्हें सोमवार को मध्यप्रदेश अकादमी के अन्य धावकों के साथ दौड़ाया जाएगा।

स्टेडियम में लगी लोगों की भीड़:सोमवार सुबह से ही टीटी नगर स्टेडियम में एमपी के ‘उसेन बोल्ट’ को देखने लोगों की भीड़ लग गई। खेल मंत्री जीतू पटवारी खुद स्टेडियम पहुंच गए। रामेश्वर को प्रदेश के अन्य छह धावकों के साथ दौड़ाया गया। रामेश्वर सात एथलीट में आखिरी स्थान पर आया। 100 मीटर की रेस पूरी करने में 12.88सेकेंड का समय लिया। रामेश्वर की ट्रायल के बाद खेल मंत्री जीतू पटवारी ने कहा कि वह पहली बार इस तरह के माहौल में दौड़ा है। भले ही वो ट्रायल में आखिरी स्थान पर रहा हो, लेकिन हम उसे मध्य प्रदेश एथलेटिक्स एकेडमी में अगले एक महीने तक ट्रेनिंग देंगे। इसके बाद फिर से उसका ट्रायल लिया जाएगा।

खेल मंत्री ने कहा दिया जाएगा ओपन फोरम

रामेश्वर के ट्रायल के बाद खेल मंत्री जीतू पटवारी ने कहा कि प्रदेश में संभावित खिलाड़ियों को ‘ओपन फोरम’ दिया जाएगा, ताकि दूरदराज के हिस्सों के खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा समाज के सामने लाने के लिए मंच उपलब्ध हो सके। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों समेत दूरदराज के क्षेत्रों में कई खेल प्रतिभाएं हो सकती हैं। सरकार ऐसे खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देने के लिए ओपन फोरम देगी, ताकि अच्छी प्रतिभाएं ट्रायल दे सकें।

कश्मीर पर PAK राजदूत के बयान पर भड़कीं अफगान राजदूत, यूं दिया जवाब

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पाकिस्तान बुरी तरह तिलमिला गया है. कुछ दिनों पहले अमेरिका में पाकिस्तानी राजदूत ने एक बयान दिया था, जिसमें उन्होंने कश्मीर के तनाव को अफगानिस्तान की शांति प्रक्रिया से जोड़ दिया था. उनके इस बयान पर अमेरिका में अफगानिस्तान की राजदूत भड़क उठीं. उन्होंने पाक राजदूत के बयान की निंदा करते हुए इसे लापरवाह, अनुचित और गैर-जिम्मेदाराना बताया है. पाकिस्तानी राजदूत ने बयान में कहा था कि कश्मीर में मौजूदा तनाव के कारण अफगानिस्तान में शांति की प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है.

अफगानिस्तान एम्बेसी की तरफ से जारी बयान में कहा गया, ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ अफगानिस्तान अमेरिका में पाकिस्तानी राजदूत असद माजिद खान के बयान की कड़ी निंदा करता है कि कश्मीर में चल रहे तनाव के कारण अफगानिस्तान की शांति प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है.’ बयान में आगे कहा गया, ‘ऐसी कोई भी टिप्पणी जो भी कश्मीर के तनाव को अफगानिस्तान की शांति प्रक्रिया से जोड़ती है वह गैर-जिम्मेदाराना है.’

उन्होंने कहा कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मामला है. रहमानी ने कहा कि अफगानिस्तान को लगता है कि पाकिस्तान जानबूझकर उनके देश को कश्मीर मुद्दे से जोड़ने की कोशिश कर रहा है और यह अफगानिस्तान में हिंसा को लंबा करने का प्रयास है.

उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान का यह बेहूदा तर्क है ताकि उसे तालिबान के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेने का बहाना मिल जाए.’ रहमानी ने आगे कहा कि पाकिस्तान को अफगानिस्तान से कोई खतरा नहीं है. ऐसी कोई वजह नहीं, जिससे यह साबित हो कि पाकिस्तान को पश्चिमी सीमा पर भारी तादाद में सेना तैनात करने की जरूरत है. गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी सरकार के जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने के फैसले पर पाकिस्तान बौखला गया है. पाकिस्तान ने इस मामले को यूएनएससी में भी उठाने की कोशिश की, जहां उसे मुंह की खानी पड़ी थी.

बेहद खराब थी अमिताभ की हालत, इन छह लोगों के चलते करना पड़ा था KBC

महानायक अमिताभ बच्चन को “कौन बनेगा करोड़पति” के लिये राजी करना बहुत मुश्किल था और केबीसी की टीम को अमिताभ को बाकायदा लंदन ले जाकर समझाना पड़ा था कि यह किस तरह का धारावाहिक होगा. अमिताभ ने पहली बार संपर्क किए जाने के तीन महीने बाद धारावाहिक की मेजबानी के लिये हामी भरी थी.

एक नयी पुस्तक “द मेकिंग ऑफ स्टार इंडिया: द अमेजिंग स्टोरी ऑफ रूपर्ट मर्डोक्स इंडिया एडवेंचर” में इस घटना का जिक्र है.

टीवी चैनल ‘स्टार’ की टीम जब साल 2000 की शुरुआत में धारावाहिक पर काम कर रही थी तो उसने इसकी मेजबानी के लिये अमिताभ से संपर्क किया, लेकिन अमिताभ असमंजस में दिखाई दिये.

एक के बाद एक फ्लॉप हो रही थी फिल्में

वह धारावाहिक की मेजबानी के लिये एकमात्र पसंद थे. उस समय अमिताभ 57 वर्ष के थे और उनकी ज्यादातर फिल्में अच्छा नहीं कर रही थीं, इसके बावजूद उनका नाम लगभग हर भारतीय की जुबान पर था.

कौन थे वे छह लोग

अमिताभ को मनाने की प्रक्रिया में समीर नायर, सिद्धार्थ बासु, अमिताभ के एजेंट सुनील दोषी, दीपक सहगल, रवि मेनन (प्रोग्रामिंग टीम के सदस्य) और सुमंत्रा दत्ता उन्हें यह समझाने लंदन ले गए कि धारावाहिक किस तरह का होगा.

पुस्तक के अनुसार अमिताभ ने लंदन में पूरा एक दिन केबीसी की यूके संस्करण “हू वॉन्ट्स टू बी ए मिलेनियर” के सेट एल्स्ट्री स्टूडियोज में बिताया. उस कार्यक्रम के मेजबान क्रिस टेरंट थे.
अमिताभ ने धारावाहिक को समझकर केबीसी पर विचार किया और तीन महीने तक जद्दोजहद के बाद केबीसी की मेजबानी करने के लिये हामी भरी.

इस पुस्तक में भारतीय मीडिया और मनोरंजन उद्योग को आकार देने वाली कंपनी स्टार की कहानी बयां की गई है. पुस्तक लिखी है वनीता कोहली-खांडेकर ने और इसे पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया ने प्रकाशित किया है.

फिर शुरू होने वाला केबीसी

केबीसी की अगला सीजन आगामी कुछ महीनों में प्रसारित होने वाला है. सभी प्रतिभागियों को लेकर फॉर्म भरने की प्र‌क्रिया पूरी हो गई है. अब उनमें से अंतिम प्रतियोगियों का चयन किया जाएगा. इसके बाद शो की शूटिंग शुरू की जाएगी.

राजस्थान: कांग्रेस की राज्यसभा सीट बढ़ी, मनमोहन निर्विरोध चुने गए

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह राजस्थान से राज्यसभा सदस्य बने हैं. रविवार शाम चुनाव प्रक्रिया खत्म होने के बाद मनमोहन सिंह को कांग्रेस के टिकट पर राजस्थान से राज्यसभा का सदस्य चुन लिया गया है.

मनमोहन सिंह को 19 अगस्त यानी सोमवार को जयपुर में राज्यसभा सदस्य का प्रमाण पत्र दिया जाएगा. बता दें कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य मदन लाल सैनी के आकस्मिक निधन की वजह से यह सीट खाली हुई थी.

गौरतलब है कि मनमोहन सिंह निर्विरोध चुने गए हैं. राजस्थान से बीजेपी ने या फिर किसी निर्दलीय ने मनमोहन सिंह के खिलाफ पर्चा नहीं भरा था. बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को राज्यसभा की सदस्यता के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था.

नामांकन करने पहुंचे मनमोहन सिंह (86) के साथ राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अविनाश पांडे भी मौजूद थे. मनमोहन सिंह लगभग तीन दशकों से असम से कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य रहे हैं. उनका कार्यकाल 14 जून को समाप्त हो चुका है. मनमोहन सिंह 3 अप्रैल, 2024 तक राज्यसभा सदस्य रहेंगे.

कुछ बड़ा देने वाले हैं पीएम नरेंद्र मोदी ताकि चमके देश की इकॉनमी

नई दिल्ली 
आर्थिक सुस्ती के इस दौर में इकॉनमी को पटरी पर लाने के लिए मोदी सरकार जल्द बड़े और चौंकाने वाले फैसले लेने वाली है। टैक्स में राहत और नौकरी बचाने वाले इन फैसलों की शुरुआत सोमवार से हो सकती है। यूं तो संकट से जूझ रही इंडस्ट्री को पैकेज का संकेत पहले ही मिल चुका है, लेकिन सरकार इतने पर ही नहीं रुकेगी।पीएमओ सूत्रों के अनुसार, फैसले इस मकसद से लिए जाएंगे कि 5 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी बनाने के लक्ष्य में आगे भी बाधा न आने पाए। पूरे संकेत हैं कि इंडस्ट्री में छाए चिंता के बादल हटाने की दिशा में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीहस्तक्षेप करेंगे। वह देश और विदेशी निवेशकों में भरोसा जगाने के लिए उनसे सीधा संवाद भी कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, राहत पैकेज के तुरंत बाद कुछ अहम फैसले लेने की तैयारी है। उनमें सरकारी खर्च में कटौती भी शामिल है। 

अनूठा पैकेज देने की तैयारी 
सबसे पहले मंत्रियों और अधिकारियों की गैर-जरूरी सुविधाओं और इनके रोजमर्रा के खर्च में कटौती होगी। सरकार ने साफ किया कि कल्याणकारी योजनाओं के लिए फंड की कमी बिल्कुल नहीं होने दी जाएगी। सूत्रों के अनुसार अन्य उपायों में सबसे बड़ा फैसला टैक्स सुधारों का होगा, जो गेमचेंजर साबित होगा। नौकरी बचाने के लिए सरकार इंडस्ट्री को अब तक का सबसे अनूठा पैकेज देने की तैयारी में है। 

टैक्स रिफॉर्म 
आम आदमी के साथ इंडस्ट्री को भी टैक्स में राहत देने पर विचार। 

बचेंगी जॉब 
उद्योगों को अलग से पैकेज देकर जॉब बचाने की तैयारी। 

देश से रूबरू 
देश के साथ विदेशी निवेशकों से कर सकते हैं संवाद। 

खर्च में कटौती 
75,000 करोड़ बचाएंगे 2 साल में सरकारी खर्च में कटौती से। 

इंडस्ट्री का ख्याल 
इंडस्ट्री को जिन बजट प्रावधानों पर ऐतराज है, वे हटाए जा सकते हैं। 

पड़ोसी के बच्चे ने घर के आगे फेंका बिस्कुट का रैपर तो शख्स ने उसके पिता की कर दी हत्या

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के गांधी नगर इलाके में पड़ोसी के बच्चे का बिस्कुट का रैपर फेंकना पड़ोसी को इतना नागवार गुजरा कि उसने बच्चे के पिता की कैंची और चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी.  मृतक सज्जू के परिजनों के मुताबिक सज्जू के 7 साल के बेटे ने शनिवार को दिन में बिस्कुट खाकर उसका रैपर पड़ोसी आसिफ अली के घर के आगे फेंक दिया. इस बात पर आसिफ अली व उसके परिवार वालों ने बच्चे को डांट दिया. उस समय सज्जू अपने काम पर गया हुआ था. जब रात में सज्जू अपने काम से लौटा और उसे लड़ाई का पता चला तो आसिफ और उसके परिवार वाले उसे भी भला बुरा कहने लगे. इसी बीच  मामला कहासुनी से इतना बढ़ गया कि आसिफ ने सज्जू को कैंची और चाकू से कई वार करके मौत के घाट उतार दिया. 

सज्जू और उसका परिवार पिछले कई सालों से यहां रह रहा था. पीड़ित परिवार का आरोप है कि पड़ोसी से हुए झगड़े की सूचना पुलिस को पहले दी गयी लेकिन पुलिस नहीं पहुंची. फिलहाल पुलिस ने आसिफ के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है. मामले की जांच की जा रही है.

शिवराज सिंह चौहान बोले, नेहरू की ‘गलत’ नीतियों के चलते गोवा की आजादी में हुई देरी

पणजी: भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान ने यहां रविवार को कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की ‘गलत’ नीतियों ने न केवल दीर्घकालिक जम्मू एवं कश्मीर समस्या पैदा की, बल्कि पुर्तगाली दासता से गोवा की आजादी में भी देरी हुई. भाजपा के भारत-व्यापी सदस्यता अभियान के क्रम में गोवा पहुंचे मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने से जम्मू एवं कश्मीर से आतंकवाद और गरीबी, दोनों का उन्मूलन हो जाएगा. शिवराज ने राज्य भाजपा मुख्यालय में मीडिया से कहा,”कांग्रेस और नेहरू के नेतृत्व के कारण पुर्तगाली कई वर्षो तक गोवा पर शासन करते रहे.” उन्होंने कहा, “ऐसे हालात गलत प्राथमिकताओं के कारण पैदा हुए. मैं मानता हूं कि जिस तरीके से गोवा की प्रगति हुई, जम्मू एवं कश्मीर का भी विकास होगा. आतंकवाद के साथ गरीबी का उन्मूलन हो जाएगा”  
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शिवराज ने भारत का अहित करने वाली नीतियां लागू किए जाने के लिए जम्मू एवं कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला के प्रति नेहरू के ‘अनुराग’ को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा, “मुझे नेहरू के दृष्टिकोण पर कभी-कभी आश्चर्य होता है. जब पकिस्तानी कबायलियों ने भारत पर हमला किया और भारतीय बलों ने बहादुरी से पाकिस्तानी बलों को खदेड़ दिया, तब एकतरफा युद्धविराम की घोषणा की गई. इस मसले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाया गया.” शिवराज ने कहा, “एकतरफा युद्धविराम के कारण पीओके बना। नेहरू कुछ समय इंतजार करते तो समूचा कश्मीर भारत के साथ होता. यह नेहरू की ऐतिहासिक विफलता थी.”