जानें कौन हैं ISRO के जनक डॉ साराभाई, जिन्होंने डॉ कलाम को बनाया मिसाइल मैन

नई दिल्‍ली । भारत आज अंतरिक्ष मिशन में पूरी दुनिया को राह दिखा रहा है। 22 जुलाई को भारत ने चंद्रयान-2 लॉच कर अंतरिक्ष में एक नई छलांग लगाई है। क्या आपको पता है, भारत को अंतरिक्ष के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले और आज की बुलंदियों की बुनियाद रखने वाले डॉ विक्रम साराभाई कौन हैं?

डॉ विक्रम साराभाई को देश के महान वैज्ञानिक और अंतरिक्ष कार्यक्रमों के जनक के तौर पर जाना जाता है। उन्होंने ही भारत रत्न से सम्मानित पूर्व राष्ट्रपति व प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को मिसाइल मैन बनाया था। उनकी आज 100वीं जंयती है। डॉ विक्रम साराभाई ने कैंब्रिज विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अहमदाबाद में ही फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी (पीआरएल) की स्थापना की थी। उस समय उनकी उम्र महज 28 साल थी। पीआरएल की सफल स्थापना के बाद डॉ साराभाई ने कई संस्थानों की स्थापना में अपना महत्वपूर्ण सहयोग दिया।

डॉ साराभाई का कहना था कि यदि हम राष्ट्र के निर्माण में अर्थपूर्ण योगदान देते हैं तो एडवांस तकनीक का विकास कर हम समाज की परेशानियों का समाधान भी निकाल सकते हैं। उनका पूरा नाम डॉ विक्रम अंबालाल साराभाई था। उनका जन्म आज ही के दिन, 12 अगस्त 1919 को गुजरात के अहमदाबाद में हुआ था। तकनीकी समाधानों के अलावा इनका और इनके परिवार का आजादी की लड़ाई में भी भरपूर योगदान रहा।

डॉ. साराभाई ने माता-पिता की प्रेरणा से बचपन में ही यह निश्चय कर लिया कि उन्हें जीवन विज्ञान के माध्यम से देश और मानवता की सेवा में लगाना है। स्नातक की शिक्षा के लिए वे कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय चले गए और 1939 में ‘नेशनल साइन्स ऑफ ट्रिपोस’ की उपाधि ली। द्वितीय विश्व युद्ध छिड़ने पर वे भारत लौट आए और बंगलुरु में प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर वेंकटरामन के निर्देशन में प्रकाश संबंधी शोध किया। इसकी चर्चा सब ओर होने पर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय ने उन्हें डीएससी की उपाधि से सम्मानित किया। अब उनके शोध पत्र विश्वविख्यात शोध पत्रिकाओं में छपने लगे।

इसरो जैसी विश्‍वस्‍तरीय संस्‍था बनाई
भारत के आजाद होने के बाद उन्होंने 1947 में फिजिकल रिसर्च लैबरेटरी (पीआरएल) की स्थापना की। पीआरएल की शुरुआत उनके घर से हुई। शाहीबाग अहमदाबाद स्थित उनके बंगले के एक कमरे को ऑफिस में बदला गया जहां भारत के स्पेस प्रोग्राम पर काम शुरू हुआ। 1952 में उनके संरक्षक डॉ.सीवी रमन ने पीआरएल के नए कैंपस की बुनियाद रखी। उनकी कोशिशों का ही नतीजा रहा कि हमारे देश के पास आज इसरो (ISRO) जैसी विश्व स्तरीय संस्था है।

उन्होंने कर्णावती (अमदाबाद) के डाइकेनाल और त्रिवेन्द्रम स्थित अनुसन्धान केन्द्रों में काम किया। उनका विवाह प्रख्यात नृत्यांगना मृणालिनी देवी से हुआ। उनके घर के लोग गांधीजी के पक्के अनुयायी थे। उनके घर के लोग उनकी शादी में भी शामिल नहीं हो पाए थे, क्योंकि उस समय वे लोग गांधीजी के नेतृत्व में भारत छोड़ो आंदोलन में व्यस्त थे। उनकी बहन मृदुला साराभाई ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई। डॉ. साराभाई की विशेष रुचि अंतरिक्ष कार्यक्रमों में थी।

वे चाहते थे कि भारत भी अपने उपग्रह अंतरिक्ष में भेज सके। इसके लिए उन्होंने त्रिवेन्द्रम के पास थुम्बा और श्री हरिकोटा में राकेट प्रक्षेपण केन्द्र स्थापित किए। होमी भाभा की मदद से तिरुवनंतपुरम में देश का पहला रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन बनाया गया।

अब्‍दुल कलाम जैसी प्रतिभा को निखारा
डॉ. साराभाई ने न सिर्फ डॉ.अब्दुल कलाम का इंटरव्यू लिया, बल्कि उनके करियर के शुरुआती चरण में उनकी प्रतिभाओं को निखारने में अहम भूमिका निभाई। डॉ.कलाम ने खुद कहा था कि वह तो उस फील्ड में नवागंतुक थे। डॉ.साराभाई ने ही उनमें खूब दिलचस्पी ली और उनकी प्रतिभा को निखारा। डॉ. अब्दुल कलाम को मिसाइल मैन बनाने वाले डॉ साराभाई ही थे।

डॉ. कलाम ने कहा था, ‘डॉ. विक्रम साराभाई ने मुझे इसलिए नहीं चुना था क्योंकि मैं काफी योग्य था बल्कि मैं काफी मेहनती था। उन्होंने मुझे आगे बढ़ने के लिए पूरी जिम्मेदारी दी। उन्होंने न सिर्फ उस समय मुझे चुना जब मैं योग्यता के मामले में काफी नीचे था, बल्कि आगे बढ़ने और सफल होने में भी पूरी मदद की। अगर मैं नाकाम होता तो वह मेरे साथ खड़े होते।’

IIM और फिजिक्स रिसर्च लेबोरेट्री बनाने में की मदद
डॉ. साराभाई भारत के ग्राम्य जीवन को विकसित देखना चाहते थे। ‘नेहरू विकास संस्थान’ के माध्यम से उन्होंने गुजरात की उन्नति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह देश-विदेश की अनेक विज्ञान और शोध सम्बन्धी संस्थाओं के अध्यक्ष और सदस्य थे। अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त करने के बाद भी वे गुजरात विश्वविद्यालय में भौतिकी के शोध छात्रों को सदा सहयोग करते रहे। उन्होंने अहमदाबाद में IIM और फिजिक्स रिसर्च लेबोरेट्री बनाने में मदद की। उन्हें भारत सरकार ने 1966 में पद्मभूषण और 1972 में पद्मविभूषण से नवाजा।

डॉ. साराभाई 20 दिसंबर, 1971 को अपने साथियों के साथ थुम्बा गये थे। वहाँ से एक राकेट का प्रक्षेपण होना था। दिन भर वहाँ की तैयारियां देखकर वे अपने होटल में लौट आए पर उसी रात में अचानक उनका देहांत हो गया। हालांकि 52 साल की उम्र में उनके निधन के बाद देश के पहले सेटेलाइट आर्यभट्ट को लॉन्च किया गया, लेकिन उसकी बुनियाद डॉ. साराभाई तैयार कर गए थे।

उन्होंने पहले ही भारत के पहले सेटेलाइट के निर्माण के मकसद से मशीनीकरण शुरू कर दिया था। कॉस्मिक किरणों और ऊपरी वायुमंडल की विशेषताओं से संबंधित उनका शोध कार्य आज भी अहमियत रखता है। उनकी प्रेरणा से देश के पहले सेटेलाइट आर्यभट्ट को 19 अप्रैल, 1975 को लॉन्च किया गया।

बाढ़ की विभीषिका के बीच जवान को सैल्यूट कर बोली बच्ची, ‘आप बहुत अच्छा काम करते हो’, वायरल हो रहा VIDEO

नई दिल्ली: भारी बारिश और बाढ़ ने महाराष्ट्र के बड़े हिस्से को तबाह कर दिया है. अब तक वहां 30 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. महाराष्ट्र में पिछले एक हफ्ते से कोल्हापुर, सांगली, सतारा, ठाणे, पुणे, नासिक, पालघर, रत्नागिरि, रायगढ़ और सिंधुदुर्ग जिले वर्षा से बेहाल हैं. एक अधिकारी ने कहा, ‘इन दस जिलों में NDRF ने 29 टीमें, राज्य आपदा मोचन बल ने तीन, तटरक्षक बल ने 16, नौसेना ने 41, सेना ने 10 टीमें तैनात की हैं. इन सबके बीच बाढ़ से प्रभावित गांवबाग से एक बच्ची और सेना के जवान का दिल को छू लेने वाला VIDEO सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है. 

बाढ़ की विभीषिका के बीच सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यहा वीडियो महाराष्ट्र के सांगली के गांवबाग का है. वीडियो में एक बच्ची सेना के जवान को सैल्यूट करते दिख रही है. बच्ची के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही है. बच्ची उस जवान के पास आती है और उसे सैल्यूट करते हुए कहती है कि, ‘आप बहुत अच्छा काम करते हो.’ इसके बाद वह जवान बच्ची से हाथ मिलाता है.

गुजरात में ‘हनुमान’ बना सिपाही
इससे पहले गुजरात पुलिस के एक सिपाही का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जो बाढ़ में फंसी दो बच्चियों को अपने कंधे पर बैठाकर उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जा रहा है. ये वीडियो अहमदाबाद से 200 किलोमीटर दूर मोरबी इलाके का है, जहां इन दिनों बाढ़ से हालात खराब हैं. यहां बचाव कार्य के दौरान दो बच्चियों को सुरक्षित जगह पहुंचाने के लिए कांस्टेबल पृथ्वीराज सिंह जडेजा ने उन्हें कंधे पर बैठाया और पानी के तेज बहाव के बीच करीब 1.5 किलोमीटर तक का सफर तय किया.

धारा 370 हटाने पर PM मोदी बोले- कश्मीर आंतरिक मसला, सोच-समझकर लिया है फैसला

जम्मू-कश्मीर को लेकर केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लिया है. जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने की मांग काफी लंबे समय से उठती आई थी, लेकिन ये मसला हर बार टलता ही रहा. नरेंद्र मोदी की सरकार ने इस फैसले को लिया, जिसे मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का अबतक का सबसे बड़ा फैसला माना जा रहा है. इस फैसले पर प्रधानमंत्री का कहना है कि ये निर्णय उन्होंने काफी सोच-समझ कर लिया है. और आगे सरकार का कश्मीर को लेकर बड़ा प्लान भी है, ताकि घाटी में विकास को आगे बढ़ाया जा सके.

एक अंग्रेज़ी अखबार को इंटरव्यू देते हुए प्रधानमंत्री ने कश्मीर के मसले पर बात की. उन्होंने कहा कि कश्मीर को लेकर हमारी सरकार ने जो फैसला लिया है, वह पूरी तरह से घरेलू मामला है. हमने इस निर्णय को काफी सोच-समझ कर लिया है, हमें पूरा भरोसा है कि इससे घाटी के लोगों को काफी फायदा होगा.

प्रधानमंत्री ने अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में घाटी में निवेश की बात की थी और ‘नया कश्मीर’ का जिक्र किया था. इस पर उन्होंने कहा कि मेरी अपील के बाद देश के कई बड़े उद्योगपतियों ने जम्मू-कश्मीर में निवेश करने को लेकर इच्छा भी जताई है.

पीएम मोदी ने कहा कि आज के समय में खुले वातावरण में आगे बढ़ना जरूरी है, ताकि युवाओं को नए अवसर मिल सकें. उन्होंने कहा कि धारा 370 को लेकर हमने जो फैसला लिया है, उससे कश्मीर के लोगों का भला होने वाला है. इस फैसले से क्षेत्रीय इलाके में कई अवसर पैदा होंगे.

प्रधानमंत्री ने घाटी में निवेश को लेकर कहा कि धारा 370 हटने के बाद घाटी में टूरिज्म, कृषि क्षेत्र, IT और हेल्थकेयर समेत अन्य क्षेत्रों में फायदा पहुंचेगा. इससे कश्मीर के प्रोडेक्ट, लोगों को फायदा पहुंचेगा और उन्हें बड़ा मंच मिलेगा.

पीएम मोदी ने इस दौरान केंद्र के नए प्लान की भी बात की. उन्होंने कहा कि IIT, IIM, AIIMS के जरिए ना सिर्फ युवाओं को शिक्षा के अवसर मिलेंगे तो वहीं घाटी में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे. उन्होंने बताया कि इसके साथ ही हम रेलवे, एयरपोर्ट समेत अन्य कनेक्टविटी को बढ़ावा दिया जाएगा.

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर को लेकर जो फैसला लिया है, उसपर ना सिर्फ देश बल्कि पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है. इस इंटरव्यू से पहले अपने संबोधन में भी प्रधानमंत्री ने कड़ा और साफ संदेश दिया था कि भारत सरकार ने जो फैसला लिया है वह उनका आंतरिक मामला है.

उन्होंने साथ ही साथ पाकिस्तान पर भी सख्त लहजे में निशाना साधा था और कहा था कि पाकिस्तान लगातार कश्मीर में आतंक फैलाने की कोशिश करता आया है, लेकिन अब उसकी कोशिशों को नाकाम किया जाएगा.

रन मशीन’ कोहली का कहर, 42 शतक जड़कर तोड़ा सचिन का ये वर्ल्ड रिकॉर्ड

वेस्टइंडीज के खिलाफ पोर्ट ऑफ स्पेन में हुए दूसरे वनडे मैच में टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने धमाकेदार अंदाज में शतक जड़ दिया. विराट कोहली ने कैरेबियाई गेंदबाजों की जमकर खबर ली और अपने वनडे इंटरनेशनल करियर का 42वां शतक ठोक दिया.

यह मौजूदा वनडे सीरीज में कोहली का पहला शतक है. वेस्टइंडीज के खिलाफ विराट ने अपना शतक 112 गेंदों में पूरा किया. इस मैच में कोहली ने 120 रन बनाए. इस दौरान उन्होंने 14 चौके और एक छक्का लगाया.

विराट कोहली ने पूर्व महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के सबसे कम पारियों में 42 वनडे इंटरनेशनल शतक जड़ने के वर्ल्ड रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है.

42 वनडे इंटरनेशनल शतक के वर्ल्ड रिकॉर्ड तक पहुंचने के लिए 30 साल के कोहली ने 238 वनडे की 229 पारियां खेली हैं, जबकि भारत के पूर्व महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने अपने करियर के दौरान 406वीं वनडे इंटरनेशनल पारी में 42 शतक जड़ने का रिकॉर्ड बनाया था.

सचिन ने 2 मार्च 2008 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी में अपना 42वां वनडे इंटरनेशनल शतक ठोका था, उस समय उनकी उम्र करीब 35 साल थी.

ओवरऑल वनडे इंटरनेशनल की बात करें तो विराट कोहली दुनिया में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाजों की फेहरिस्त में दूसरे नंबर पर आते हैं.

सबसे ज्यादा वनडे इंटरनेशनल शतक
49 सचिन तेंदुलकर
42 विराट कोहली
30 रिकी पोंटिंग
28 सनथ जयसूर्या
27 हाशिम अमला/रोहित शर्मा

इंटरनेशनल क्रिकेट की बात करें तो विराट कोहली दुनिया में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाजों की फेहरिस्त में तीसरे नंबर पर आते हैं. इस लिस्ट में 100 इंटरनेशनल शतकों के साथ पूर्व महान भारतीय बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर मजबूती से टॉप पर बने हुए हैं. सचिन के बाद ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग 71 इंटरनेशनल शतकों के साथ दूसरे नंबर पर आते हैं. विराट कोहली के अब इंटरनेशनल क्रिकेट में 67 शतक हो गए हैं. पोंटिंग के 71 इंटरनेशनल शतकों के रिकॉर्ड को तोड़ने से कोहली अब सिर्फ 5 शतक ही दूर हैं. 

इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक 
100 सचिन तेंदुलकर (भारत) 
71 रिकी पोंटिंग (ऑस्ट्रेलिया)
67 विराट कोहली (भारत)
63 कुमार संगकारा (श्रीलंका)
62 जैक कैलिस (साउथ अफ्रीका)

फिलहाल विराट के नाम 238 वनडे की 229 पारियों में 59.72 की औसत से 11406 रनों का रिकॉर्ड दर्ज है. जिसमें उन्होंने 42 शतक और 54 अर्धशतक लगाए हैं.  

विराट कोहली अब वनडे इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाजों की लिस्ट में आठवें नंबर पर आ गए हैं. कोहली ने अपने हमवतन और पूर्व कप्तान सौरव गांगुली के वनडे रनों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. 

वनडे इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज
18426  सचिन तेंदुलकर
14234  कुमार संगकारा
13704  रिकी पोंटिंग
13430  सनथ जयसूर्या
12650  महिला जयवर्धने
11739  इंजमाम उल हक
11579  जैक कैलिस
11365* विराट कोहली
11363  सौरव गांगुली

विराट कोहली का यह वेस्टइंडीज के खिलाफ आठवां वनडे शतक है. कोहली वनडे में वेस्टइंडीज के खिलाफ सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाज हैं. इस मामले में वह साउथ अफ्रीका के पूर्व दिग्गज हाशिम अमला और एबी डिविलियर्स से आगे हैं. 

वेस्टइंडीज के खिलाफ सबसे ज्यादा वनडे शतक
8 – विराट कोहली (34 पारी)
5 – हाशिम अमला (16 पारी)
5 – एबी डिविलियर्स (22 पारी)
5 – हर्षल गिब्स (29 पारी)

गांधी-नेहरू परिवार के कांग्रेस में 100 साल, इन 6 अध्यक्षों के हाथ 50 साल तक कमान

कांग्रेस की सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रह चुकीं सोनिया गांधी को पार्टी को संकट से निकालने के लिए एक बार फिर से जिम्मेदारी सौंपी गई है. ढाई महीनों की जद्दोजहद के बाद उन्हें अंतरिम अध्यक्ष चुन लिया गया है. इस साल कांग्रेस में नेहरू-गांधी परिवार की राजनीति के 100 साल पूरे होने जा रहे हैं. 1919 में पहली बार नेहरू परिवार से मोतीलाल नेहरू को पार्टी अध्यक्ष चुना गया था. अब तक इस परिवार से 6 पार्टी अध्यक्ष रहे, जिन्होंने करीब 50 साल तक पार्टी की कमान संभाली है.

11 बार पार्टी अध्यक्ष चुने गए पंडित नेहरू

कांग्रेस पार्टी से गांधी-नेहरू परिवार का कनेक्शन 1919 में जुड़ा गया था, जब मोतीलाल नेहरू पहली बार पार्टी अध्यक्ष चुने गए थे. मोतीलाल नेहरू 58 साल की उम्र में कांग्रेस के 36वें अध्यक्ष बने थे. इसके बाद 1929 में पंडित जवाहर लाल नेहरू 40 साल की उम्र में पार्टी के अध्यक्ष बने. वह कुल 11 बार कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष बने.

इंदिरा गांधी 3 बार चुनी गईं अध्यक्ष

जवाहर लाल नेहरू के बाद इंदिरा गांधी ने 1959 में मोर्चा संभाला. 42 साल की उम्र में वह पार्टी की 69वीं अध्यक्ष बनी थीं. इंदिरा गांधी कुल 3 बार पार्टी अध्यक्ष चुनी गई थीं. इंदिरा गांधी के समय ही पार्टी में दरार पड़ी और उन्होंने 1978 में कांग्रेस-आई बना ली. इंदिरा ने ही प्रधानमंत्री रहते हुए पार्टी अध्यक्ष की जिम्मेदारी खुद रखने का चलन शुरू किया था. 1978 से 2019 के बीच 41 साल हो गए, जिसमें 33 साल कांग्रेस की कमान गांधी-नेहरू परिवार के पास ही रही.

19 साल कांग्रेस अध्यक्ष रहीं सोनिया गांधी

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उनके बेटे राजीव गांधी ने पार्टी की कमान संभाली. वह पार्टी के 83वें अध्यक्ष थे. उनके बाद गांधी परिवार से सोनिया गांधी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई. 1998 में वह पार्टी अध्यक्ष चुनी गईं. वह कांग्रेस पार्टी की 19 साल अध्यक्ष रहीं. उनके कार्यकाल में दो बार यूपीए की सरकार भी बनी.

87वें अध्यक्ष थे राहुल गांधी

2014 में मोदी की सरकार बनने के बाद से कांग्रेस बैकफुट पर है. 2018 में पार्टी के 87वें अध्यक्ष के रूप में राहुल गांधी को चुना गया, लेकिन वो पार्टी के लिए कुछ खास नहीं कर पाए. 2019 लोकसभा चुनाव में मिली शिकस्त के बाद उन्होंने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. उनके इस्तीफे के बाद ढाई महीने तक पार्टी अध्यक्ष की तलाश में रही. वहीं, कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की ओर से राहुल गांधी को पद पर बने रहने की कवायद हुई, लेकिन राहुल गांधी पद संभालने के लिए तैयार नहीं हुए. आखिरकार 10 अगस्त को सोनिया गांधी को फिर अंतरिम अध्यक्ष चुन लिया गया. राहुल गांधी करीब 19 महीने पार्टी अध्यक्ष रहे.

कांग्रेस में अब तक 88 अध्यक्ष चुने गए

कांग्रेस का गठन 1885 में हुआ था. 134 साल पुरानी कांग्रेस पार्टी में अब तक 88 अध्यक्ष चुने गए हैं. इसके पहले अध्यक्ष वोमेश चंद्र बनर्जी थे. 1885 से 1933 तक अध्यक्ष का कार्यकाल एक साल था. 1933 के बाद लगातार दो या इससे ज्यादा साल भी अध्यक्ष रहने लगे थे.

कौन कितने साल रहा अध्यक्ष

मोतीलाल नेहरू- 2  साल

जवाहर लाल नेहरू- 13 साल

इंदिरा गांधी-8 साल

राजीव गांधी-6 साल

सोनिया गांधी-19 साल

 राहुल गांधी-19 महीने

लद्दाख के सांसद ने फिर जीता दिल, हाथ में तिरंगा लेकर लेह के बाजार में लोगों संग नाचे

नई दिल्‍ली : जम्‍मू-कश्‍मीर से मोदी सरकार द्वारा अनुच्‍छेद 370 हटाने के बाद लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया. इस पर लद्दाख के सांसद जामयांग सेरिंग नामग्‍याल ने लोकसभा में दिलचस्‍प भाषण देकर पूरे देश का दिल जीता था. अब उन्‍होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है. वीडियो में वह हाथ में तिरंगा लेकर लोगों के साथ खुशी में डांस करते दिख रहे हैं.

लद्दाख सांसद जामयांग सेरिंग नामग्‍याल की ओर से जारी किए गए इस वीडियो में दिख रहा है कि वह अनुच्‍छेद 370 हटने के बाद लेह पहुंचे हुए हैं. इस दौरान लेह-लद्दाख के लोग उनका स्‍वागत कर रहे हैं. वीडियो में दिख रहा है कि लद्दाख को जम्‍मू-कश्‍मीर से अलग करके केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने पर वह भी लोगों के साथ खुशी से फूले नही समा रहे हैं. उनके हाथ में तिरंगा है और वह लोगों के साथ संगीत की धुन पर डांस कर रहे हैं. ट्विटर पर उनका यह वीडियो भी लोग खूब पसंद कर रहे हैं.

जामयांग सेरिंग नामग्‍याल ने वीडियो को शेयर करते हुए ट्वीट किया है, ‘लद्दाख के लोग पर्यावरण का संरक्षण करने में यकीन रखते हैं. इसे देखते हुए उन्‍होंने लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने की खुशी के सेलिब्रेशन में भी पटाके ना फोड़ने की प्रतिज्ञा ली. यह वीडियो दर्शा रहा है कि किस तरह से लोग ईको फ्रेंडली सेलिब्रेशन कर रहे हैं.’

बता दें कि जामयांग ने लोकसभा में अपने 17 मिनट के भाषण में कश्मीर पर सरकार के फैसले का स्वागत किया था और कहा था कि लद्दाख के लोगों की दलील आखिरकार स्वीकार कर ली गई. उन्होंने कहा, “मोदी है, तो मुमकिन है.” जामयांग ने कहा था, “अनुच्छेद-370 के खत्म होने के बाद कश्मीर के माननीय सदस्य कह रहे थे कि हम हार जाएंगे. वैसे मैं कहूंगा कि अब दो परिवार अपनी आजीविका खो देंगे.”

उन्होंने कहा था, “कश्मीर में अब एक उज्‍जवल भविष्य होगा. लद्दाख सांसद ने कहा कि कारगिल के लोगों ने 2014 के संसदीय चुनाव में केंद्र शासित प्रदेश के लिए मतदान किया और 2019 के चुनाव में भी यह मुद्दा शीर्ष पर रहा.” उन्होंने कहा, “आप किसी भी युद्ध को याद कर लीजिए, लद्दाखियों ने हमेशा देश के प्यार के लिए अपना बलिदान दिया है.”

जज के बंगले तैनात सुरक्षा गार्ड फांसी पर झूल गया, सुसाइड नोट मिला |

GWALIOR

ग्वालियर। विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के जजेज कॉलोनी में एक जज के बंगले पर सुरक्षा के लिए तैनात जवान ने फांसी लगाकर जान दे दी। घटना का पता चलते ही पुलिस अफसर मौके पर पहुंचे और जांच के बाद मर्ग कायम कर लिया है। पुलिस को मृतक की तलाशी में एक सुसाइड नोट भी मिला है। 

विश्वविद्यालय सीएसपी मुनीष राजौरिया ने बताया कि मौ जिला भिण्ड के बारोली निवासी रायसिंह (50) पुत्र वृंदावन सिंह होमगार्ड जवान है और कुम्हरपुरा में अपने बेटे के साथ रहता था। अभी उसकी ड्यूटी जजेज कॉलोनी के 44 नंबर बंगले पर चल रही थी। रोजाना की तरह शुक्रवार की रात भी वह ड्यूटी पर आया था और देर रात उसने फांसी लगा ली। 

झूल रहा था। मामले का पता चलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच के बाद मर्ग कायम कर लिया। पुलिस को मृतक की तलाशी में एक सुसाइड नोट भी मिला है। जिसमें उसने पडोसियों द्वारा जमीन पर कब्जा करने व इसकी एपीसी हर्षाना और घर वालों को होने की लिखा है। 

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लद्दाख सीमा के पास पाकिस्तान तैनात कर रहा लड़ाकू जेट, नापाक साजिश पर सेना की कड़ी नजर

नई दिल्ली, जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370को हटाए जाने के बाद से ही भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार तनाव जारी है। तनाव के इन हालातों के बीच पाकिस्तानी सेना एक और नापाक हरकत कर रही है। पाकिस्तानी वायुसेना लद्दाख सीमा के पास अपने लड़ाकू विमान तैनात कर रही है। यह पाकिस्तानी लड़ाकू विमान भारत के केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की सीमा के पास पाकिस्तानी स्कार्दू हवाई अड्डे पर तैनात किए जा रहे हैं। इसपर भारत की लगातार नजर बनी हुई है।

सरकारी सूत्रों ने न्यूज एजेंसी एएनआइ को बताया, ‘पाकिस्तान वायुसेना के तीन सी-130 परिवहन विमानों को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख सीमा के पास पाकिस्तान के स्कार्दू हवाई अड्डे पर तैनात किया गया है। इस ख़बर के सामने आने के बाद संबंधित भारतीय एजेंसियां ​​सीमावर्ती क्षेत्रोंमें पाकिस्तानियों की आवाजाही पर कड़ी नजर रख रही हैं।’.

सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तानी बेस पहुंचाए जा रहे उपकरण, लड़ाकू विमानों की मदद के लिए सहायक उपकरण हो सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस बात की ज्यादा संभावना है कि पाकिस्तान लद्दाख सीमा से सटे स्कर्दू हवाई अड्डे पर अपने जेएएफ-17(JF-17) विमान तैनात करने वाला है।

पाकिस्तानी गतिविधि पर खास नजर
भारतीय वायुसेना और थलसेना के साथ भारतीय खुफिया एजेंसियां ​​पाकिस्तानी वायु सेना की आवाजाही पर कड़ी नजर रख रही हैं, क्योंकि वे पाकिस्तानी इलाके की लगभग पूरी लंबाई और चौड़ाई देख सकते हैं।

सूत्रों ने कहा है कि पाकिस्तान अपनी वायुसेना और आर्मी का एक युद्धाभ्यास कराने की योजना बना रही है और इस युद्धाभ्यास के दौरान वो अपने लड़ाकू विमानों को फॉरवर्ड बेस पर शिफ्ट भी कर सकती है। ऐसे में यह पाकिस्तानी साजिश की ओर इशारा कर रही है।

पाकिस्तानी जेट C-130 का इतिहास
पाकिस्तानी एयरफोर्स लंबे समय से अमेरिकी C-130 परिवहन विमान के एक पुराने मॉडल का इस्तेमाल कर रही है।पाकिस्तान के एक सैन्य शासक जनरल जिया उल हक की मौत भी सी-130 विमान हादसे में हुई थी, जब उनका सी-130 विमान अगस्त 1988 में बम विस्फोट की वजह से दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।

स्कर्दू पाकिस्तान वायु सेना का एक फॉरवर्ड बेस है और इसका उपयोग वह भारत के साथ सीमा पर अपनी सेना के अभियानों का समर्थन करने के लिए करता है। दरअसल, पाकिस्तान जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद-370 को खत्म करने और जम्मू-कश्मीर को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के भारत के फैसले से एक बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है।

अमित शाह ने कहा- मुझे उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू से एक छोटी सी शिकायत है

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि उन्हें उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू से एक छोटी सी शिकायत है कि वह (नायडू) सत्ता पक्ष के लोगों से कुछ ज्यादा सख्ती से पेश आते हैं. उपराष्ट्रपति के रूप में नायडू के दो साल के (अब तक के) कार्यकाल पर आधारित उनकी पुस्तक ‘लिस्निंग, लर्निंग एंड लीडिंग’ के विमोचन के मौके पर एक कार्यंक्रम में मौजूद शाह ने यह कहा. शाह ने कहा कि उन्हें नायडू से ‘एक छोटी सी शिकायत’ है कि वह (नायडू) सत्तापक्ष के लोगों से (राज्य सभा में) कुछ ज्यादा सख्ती से पेश आते हैं और हर मंत्री (उच्च सदन में) उनसे डरता है.

गृह मंत्री ने यह भी कहा कि उनका दृढ़ता से यह मानना था कि जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को हटाया जाना चाहिए क्योंकि इससे देश को कोई फायदा नहीं था. उन्होंने कहा, ‘मैं दृढ़ था कि अनुच्छेद 370 हटाया जाना चाहिए…अनुच्छेद 370 हटाने के बाद कश्मीर में आतंकवाद खत्म होगा और वह विकास के पथ पर अग्रसर होगा.’