भारत पर ‘अफगानी अटैक’ की साजिश रच रही ISI, बकरीद पर भी अलर्ट

खुफिया एजेंसियों ने देश में आतंकी हमले की चेतावनी दी है. सूत्रों के मुताबिक आईबी ने 15 अगस्त से पहले आतंकी हमले का अलर्ट जारी किया है. खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के निर्देश पर लश्कर और जैश के आतंकी बड़े हमले की साजिश में जुटे हैं.

सूत्रों के मुताबिक हमले को अंजाम देने के लिए अफगानिस्तान के नागरिकों का इस्तेमाल किया जा सकता है. एक दूसरे इंटेलिजेंस इनपुट के मुताबिक आतंकी संगठन ISIS के भारत में मौजूद समर्थकों के जरिये बड़े पैमाने पर हमले की साजिश रच रहा है. सूत्रों के मुताबिक बकरीद की नमाज के दौरान हमले हो सकते हैं साथ ही 15 अगस्त से पहले आतंकियों के निशाने पर बड़े सरकारी प्रतिष्ठान हैं. इसके के अलावा ट्रांसपोर्ट नेटवर्क जैसे रेलवे, बस, मेट्रो और एयरपोर्ट भी आतंकियों के निशाने पर है.

जम्मू और कश्मीर पर केंद्र सरकार के फैसले के बाद पीओके में करीब दर्जन भर आतंकी शिविर सक्रिय हो गए हैं. IANS के मुताबिक, इस्लामाबाद ने पीओके और जम्मू-कश्मीर से लगती सीमा पर दर्जन भर आतंकी शिविर सक्रिय कर दिए हैं.

जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद से आतंकी शिविरों में पिछले हफ्ते काफी ज्यादा गतिविधियां देखी गई थीं. शीर्ष खुफिया सूत्रों ने कहा कि नियंत्रण रेखा (एलओसी) से लगे पीओके क्षेत्र के कोटली, रावलकोट, बाघ और मुजफ्फराबाद में आतंकी शिविर प्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तानी सेना के सहयोग से दोबारा सक्रिय हो गए हैं जिसे देखते हुए भारतीय सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने दो दिन पहले संसद के संयुक्त सत्र में बयान दिया था कि भारत में अब अगर पुलवामा जैसा हमला होता है तो इसके लिए इस्लामाबाद जिम्मेदार नहीं होगा. इमरान खान के बयान में प्रत्यक्ष तौर पर जैश-ए-मोहम्मद, और लश्कर-ए-तैयबा और ISI के हैंडलर्स को प्रशिक्षण शिविर और लॉन्च पैड दोबारा सक्रिय करने के लिए खुली छूट दी गई है.

IANS की मानें तो खुफिया रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ है कि जेईएम, एलईटी और तालिबान के लगभग 150 सदस्य कथित तौर पर कोटली के निकट फागूश और कुंड शिविरों तथा मुजफ्फराबाद क्षेत्र में शवाई नल्लाह और अब्दुल्लाह बिन मसूद शिविरों में इकट्ठे हुए हैं. जेईएम प्रमुख मौलाना मसूद अजहर का भाई इब्राहिम अतहर भी पीओके क्षेत्र में देखा गया है.

रक्षा मंत्रालय में उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा कि इस समय घाटी में मौजूद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोवाल ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की. बैठक में इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) के निदेशक अरविंद कुमार, जम्मू और कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दिलबाग सिंह और सेना के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे. एनएसए ने जम्मू और कश्मीर पर सरकार के साहसिक निर्णयों के बाद सुरक्षा रणनीति तथा सीमा पार से आतंकी खतरों पर चर्चा की.

मैन vs वाइल्ड में नजर आएंगे पीएम मोदी, ये हैं एपिसोड देखने के बड़े कारण

दुनिया के सबसे फेमस शो मैन vs वाइल्ड में देश के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नजर वाले हैं. बेयर ग्रिल्स के इस एडवेंचर शो में पीएम मोदी पर्यावरण की रक्षा के उद्देश्य से आ रहे हैं. मोदी पहले भारतीय व्यक्ति हैं, जो बेयर ग्रिल्स के इस शो में दिखाई देंगे. ऐसे में दर्शकों के पास ये खास एपिसोड देखने के कई कारण हैं. अगर आप अभी भी इस एपिसोड को देखने के लिए मन नहीं बना पाए हैं, तो आइये हम आपको बताते हैं आपको मोदी एपिसोड क्यों देखना चाहिए.बेयर ग्रिल्स का शो मैन vs वाइल्ड दुनिया का सबसे फेमस एडवेंचर शो है. ये शो अमेरिका और यूके के साथ-साथ भारत और अन्य देशों में भी लोकप्रिय है. मैन vs वाइल्ड को दुनिया के 180 दशकों में देखा जाता है. इतने बड़े प्लेटफार्म पर पीएम मोदी का आना बहुत बड़ी बात है. इतना ही नहीं पीएम मोदी मैन vs वाइल्ड शो में आने वाले पहले भारतीय होंगे. ऐसे में उन्हें देखना तो बनता है.

शो के प्रोमो और पोस्टर्स से साफ है कि प्रधानमंत्री मोदी कुछ धुआंदार एडवेंचर करने वाले हैं. मोदी जिस जंगल में जा रहे हैं वहां अकेले रहना बहुत खतरे की बात है. ऐसे में वे बेयर ग्रिल्स के साथ अपनी जान बचाने और गुजारे के लिए कैसे मुश्किलों को सामना करने वाले हैं, ये देखना दिलचस्प होगा.

पीएम मोदी के इस शो पर जाने का मकसद बहुत बड़ा है. मोदी इस शो के जरिए जानवरों के संरक्षण के बारे में जागरूकता फैलाने का काम करेंगे. इसके साथ ही वे इस काम में भारत के योगदान के बारे  में भी बातें करते नजर आएंगे. ये वो समय है, जब भारत में कई जानवर खतरे में हैं. ऐसे में लोगों में जागरूकता फैलाने का जिम्मा खुद पीएम मोदी ने लिया है.

जब भी कोई सेलिब्रिटी किसी पॉपुलर शो पर आता है, उससे उम्मीद की जाती है कि वो अपनी जिंदगी के बारे में खुलासे करे. पीएम मोदी मैन vs वाइल्ड के अपने एपिसोड में अपनी जिंदगी से जुड़े दिलचस्प किस्से सुनाने वाले हैं. मोदी अपनी परवरिश और अपनी जिंदगी के बारे में बताते नजर आएंगे. दर्शकों के लिए यही मौका है उनके बारे में अनजनी बातें जानने का.क्योंकि मैन vs वाइल्ड एक एडवेंचर शो है तो ऐसे में देखना होगा कि बेयर ग्रिल्स पीएम मोदी को कौन-सी ऐसी टेक्नीक सिखाते हैं, जिससे वे अपनी जान बचाएंगे. इसके अलावा हमें देखने को मिलगा कि मोदी जी बेयर को क्या सिखाते हैं.

कुल-मिलाकर ये एपिसोड बहुत दिलचस्प होने वाला है. ऐसे में इसे छोड़ना आपके लिए शायद गलत चॉइस होगी. बता दें कि मैन vs वाइल्ड का मोदी एपिसोड 12 अगस्त को डिस्कवरी चैनल पर दिखाया आएगा.

IAS अफसर दुर्गा शक्ति नागपाल का खुलासा, रेत माफिया से लड़ने के लिए आमिर खान की फिल्म से मिली प्रेरणा

नई दिल्ली: साल 2009 बैच की आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने यूपी में यमुना नदी की तलहटी में चलने वाले रेत खनन को रोकने का साहस दिखाया था. उनका यह साहस आज भी लोगों के लिए मिसाल बन चुका है. हालांकि,दुर्गा शक्ति नागपाल (Durga Shakti Nagpal) को ऐसा करने के लिए एक फिल्म से प्रेरणा मिली थी, वह फिल्म कोई और नहीं बल्कि बॉलीवुड एक्टर आमिर खान की ‘दंगल’ थी. इस फिल्म को देखने के बाद हीदुर्गा शक्ति नागपाल  ने अपने जीवन को अत्यंत क्षमता के साथ जीने की कोशिश की. 

इस बारे में विस्तार से बताते हुए दुर्गा शक्ति नागपाल ने कहा, “हम सभी जानते हैं कि दंगल पहलवान महावीर सिंह फोगाट के वास्तविक जीवन पर आधारित है. वह काफी अच्छे पहलवान थे, लेकिन वह देश के लिए स्वर्ण पदक नहीं जीत पाए. उनके पास कोई बेटा भी नहीं था, जो उनके सपने को पूरा कर सके. फिर एक दिन, उनके पड़ोसियों ने बताया कि महावीर सिंह की बेटियों ने उनके बेटे को पीट-पीट कर लाल कर दिया है. यह सुनने के बाद ही महावीर सिंह को कुछ करने का सुनहरा अवसर मिला. आज हमारे देश के पास सर्वश्रेष्ठ महिला पहलवान हैं. मैं जो कहना चाह रही हूं वह यह है कि अगर हम सभी को मात्र एक जीवन मिलता है, तो क्यों न इसे अत्यंत क्षमता के साथ जिया जाए.”

बता दें कि दुर्गाशक्ति नागपउत्तर प्रदेश कैडर में भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी हैं. वह भारत के केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री के ओएसडी के रूप में तैनात हैं. दुर्गा शक्ति नागपाल ने निरंतर लड़ाई लड़ते हुए भ्रष्टाचार और अवैध रेत खनन के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किये. 

72 दिन की ऊहापोह, कांग्रेस के पास सोनिया गांधी के अलावा नहीं था कोई विकल्प?

सोनिया गांधी को कांग्रेस नेताओं ने एक बार फिर से पार्टी की बागडोर सौंप दी है. 72 दिन यानी करीब ढाई महीने की ऊहापोह की स्थिति के बाद सोनिया गांधी को फिर से कांग्रेस का सिरमौर बनाया गया है. दरअसल, राहुल गांधी ने 2019 के चुनावों की हार की जिम्मेदारी लेते हुए पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद से राहुल गांधी के मान मनौव्वल का दौर चल रहा था और नए अध्यक्ष की खोजबीन भी अंदरखाने जारी रही.

इसके लिए शनिवार को कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक बुलाई गई थी. कार्यसमिति के 5 ग्रुप बनाकर सभी राज्यों के नेताओं से राय मांगी गई. सभी ने एक स्वर में राहुल गांधी को अध्यक्ष बने रहने की राय सामने रख दी. शनिवार शाम को दोबारा बुलाई गई CWC की  बैठक में रिपोर्ट पढ़ी गई. इसमें साफ कहा गया था कि राहुल गांधी के बिना कांग्रेस नहीं चल सकती. लिहाजा राहुल गांधी से अध्यक्ष बनने की अपील की गई. लेकिन उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया.

इसके बाद कांग्रेस कार्यसमिति के सामने सवाल था कि अगला कौन? क्योंकि राहुल ने साफ कर दिया था कि अगला अध्यक्ष गैर-गांधी परिवार का हो, लेकिन ये भी सच्चाई सबके सामने थी कि किसी और नाम का सवाल ही नहीं उठता है. दिनभर की रायशुमारी में भी इक्का दुक्का लोगों ने ही गांधी परिवार से अध्यक्ष न होने की सूरत में किसी और का नाम दिया था.

इसी बीच, पी. चिदंबरम ने सोनिया गांधी को अंतरिम अध्यक्ष बनाये जाने का प्रस्ताव रख दिया, जिस पर सोनिया ने ‘NO’ कह दिया. बैठक में मौजूद प्रियंका गांधी ने भी इस पर ऐतराज जता दिया. हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर सोनिया तैयार हैं तो कोई क्या कह सकता है? तभी एके अंटोनी उठते हुए बोले कि ऐसा नहीं हो सकता.

इस पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उन्हें बैठने के लिए कहते हुए कहा कि ऐसा क्यों नहीं हो सकता? ऐसा होना ही चाहिए. जब राहुल गांधी CWC का फैसला मानने को तैयार नही हैं तो मैडम को आगे आना ही चाहिए. वहीं मौजूद अम्बिका सोनी, आशा कुमारी और कुमारी शैलजा ने कहा कि गांधी परिवार के बिना पार्टी नहीं चल सकती और सोनिया गांधी से राहुल को मनाने के लिए कहा. लेकिन सोनिया गांधी ने साफ कर दिया कि राहुल के फैसले पर वो क्या कह सकती हैं?

बस यहीं पर तीनों नेताओं ने सोनिया से साफ-साफ कह दिया कि इस सूरत में उन्हें पार्टी संभालनी ही पड़ेगी. इस बात को पूरे CWC सदस्यों के दोहराने पर आखिरकार सोनिया को मानना पड़ा. मुकुल वासनिक को अध्यक्ष बनाना तय था, लेकिन सोनिया गांधी को बोला गया कि राहुल गांधी नहीं समझ रहे, अगर कोई और अध्यक्ष बना तो विरोधी गांधी परिवार का पपेट कहेंगे. इसके बाद ही ना ना करते करते सोनिया गांधी मान गईं.

मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार का प्लान, बसाएगी वैदिक शहर, इंस्टिट्यूट ऑफ टेंपल मैनेजमेंट खोलने की भी योजना

मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार एक वैदिक शहर बसाने और इंस्टिट्यूट ऑफ टेंपल मैनेजमेंट खोलने पर विचार कर रही है। वैदिक शहर की योजना को ज्यादा तरजीह दी जा रही है, जिसकी प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की जा रही है। वहीं, राज्य में इंस्टिट्यूट ऑफ टेंपल मैनेजमेंट खोलने का प्रस्ताव फाइनेंस डिपार्टमेंट के पास लंबित है। अडिशनल चीफ सेक्रेटरी (अध्यात्म विभाग) मनोजर श्रीवास्तव ने द संडे एक्सप्रेस को यह जानकारी दी।

अफसर ने बताया कि सरकार विभिन्न धार्मिक समूहों को म्यूजियम बनाने के लिए भूमि उपलब्ध कराएगी। ये म्यूजियम अपने अपने धर्म की विस्तार से जानकारी देंगे। उदाहरण के तौर पर जैन धर्म का म्यूजियम इसके इतिहास, साहित्य, धार्मिक मूल्यों, तीर्थस्थलों आदि की जानकारी देगा। श्रीवास्तव के मुताबिक, सरकार फिलहाल ये म्यूजियम बनाने या चलाने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में धार्मिक संगठनों से उम्मीद है कि जमीन उपलब्ध कराए जाने के बाद वे खुद इसका ख्याल रखें।

राज्य में मंदिरों की बड़ी तादाद के मद्देनजर इंस्टिट्यूट ऑफ टेंपल मैनेजमेंट बनाने की योजना है। हालांकि, अधिकतर पुजारियों के पास इसको चलाने की योग्यता नहीं है। प्रस्तावित संस्थान में पुजारियों को मंदिर चलाने और धार्मिक रीति रिवाजों की मुफ्त में ट्रेनिंग दी जाएगी। यह इंस्टिट्यूट भोपाल में होगा और करीब 50 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

यह इंस्टिट्यूट मंदिरों खास तौर पर पुरातन मंदिरों के जीर्णोदार का काम भी देखेगा। फिलहाल पीडब्ल्यूडी विभाग यह जिम्मेदारी संभालता है। कांग्रेस का आरोप है कि राज्य में शासन करने वाली पिछली बीजेपी सरकार ने धार्मिक मामलों पर लोगों को सिर्फ लुभावने सपने ही दिखाए हैं।

बता दें कि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने कई वादे किए थे, जिसमें राम पथ गमन का निर्माण भी शामिल था। जिस रास्ते से भगवान राम वनवास के लिए गए थे, उसे धार्मिक टूरिज्म को बढ़ावा देने के नजरिए से विकसित करने की घोषणा की गई। कुछ दूसरे ऐलान भी किए गए थे। हालांकि, बीजेपी प्रवक्ता राहुल कोठारी का आरोप है कि कमलनाथ की सरकार इस कवायद के जरिए उस पुजारियों का डेटा इकट्ठा कर रही है जो मंदिरों के मैनेजमेंट से जुड़े हैं।

बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि अधिकतर पुजारी विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों से जुड़े हैं। इनको ट्रेनिंग देने की आड़ में कांग्रेस सरकार उन्हें पक्ष बदलने का लालच देगी। बीजेपी प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि जो सरकार के सामने नहीं झुकेंगे, उन पुजारियों को फर्जी मामलों में फंसाया जाएगा।