भारत को चाहकर भी नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा पाक, सारे हथियार होंगे नाकाम

भारत सरकार ने जब से जम्मू-कश्मीर से जुड़े अनुच्छेद-370 खत्म किया है, तब से पाकिस्तान किसी भी तरह से भारत को नुकसान पहुंचाने की कोशिशें कर रहा है. कूटनीतिक मोर्चे पर बुरी तरह फेल हुए पाकिस्तान ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार और कूटनीतिक रिश्तों को खत्म करने का ऐलान कर दिया. 

पाक के इस कदम से भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है बल्कि इससे गंभीर संकट से जूझ रही पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था जरूर बैठ सकती है. इसके पीछे वजह साफ है- पाकिस्तान भारत के व्यापारिक साझेदारों की सूची में बहुत ही नीचे आता है.

पाकिस्तान व्यापारिक नजरिए से भारत के लिए कितनी अहमियत रखता है, इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि भारत के व्यापारिक साझेदार देशों की सूची में पाकिस्तान का नंबर 28वें नंबर पर आता है.

2018-19 में भारत-पाक का कुल व्यापार भारत के कुल व्यापार का मुश्किल से 0.1 फीसदी था. 2018-19 में भारत ने पाकिस्तान को 2.06 अरब का निर्यात किया जबकि आयात केवल 0.49 अरब डॉलर का ही किया. भारत पाकिस्तान से खनिज, फल, नमक, सल्फर, चूना पत्थर, लेदर जैसी वस्तुएं मंगाता है और पाकिस्तान को केमिकल्स, प्लास्टिक, पेंट और मशीनरी बेचता है.

अमेरिका और चीन के साथ भारत के व्यापार की तुलना करें तो पाकिस्तान कहीं नहीं ठहरता है. भारत ने 2018-19 में सबसे ज्यादा व्यापार यूएस के साथ (87.96 अरब डॉलर) किया जबकि पड़ोसी देश चीन के साथ 87.07 अरब डॉलर का व्यापार हुआ. भारत अपने आयात और निर्यात दोनों के लिए इन दोनों देशों पर ही निर्भर है. 2018-19 में भारत ने यूएस को 52.41 अरब डॉलर का निर्यात किया और 35.55 अरब डॉलर का सामान आयात किया. भारत का चीन के साथ व्यापार संतुलन बहुत बड़ा है. भारत ने इसी अवधि के दौरान चीन को सिर्फ 16.75 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया जबकि 70.32 अरब डॉलर का भारी-भरकम आयात किया.

यूएस और चीन के अलावा, भारत के कुल व्यापार में यूएई, सऊदी अरब, हॉन्ग कॉन्ग, सिंगापुर, इराक, जर्मनी, दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया जैसे देशों की हिस्सेदारी 49.62 फीसदी (निर्यात में 45.47 फीसदी और आयात में 52.29 फीसदी) है.

भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बावजूद, पिछले चार वर्षों में भारत की निर्यात दर में बढ़ोतरी हुई है. वित्तीय वर्ष 2017 में आयात में 3.05 फीसदी (0.45 अरब डॉलर) की बढ़ोतरी, 2018 में 7.5 फीसदी (0.49 अरब डॉलर) और 2019 में 1.29 फीसदी (0.495 अरब डॉलर) की बढ़ोतरी हुई है.

2018-19 में भारत ने कुल 330 अरब डॉलर का निर्यात किया जिसमें से पाकिस्तान की हिस्सेदारी सिर्फ 0.6 फीसदी है. 2018-19 में भारत ने 514.08 अरब डॉलर का आयात किया जिसमें से पाकिस्तान का योगदान 0.1 फीसदी रहा. इन आंकड़ों में पिछले चार वर्षों में बहुत ही मामूली फर्क आया है.

पाकिस्तान का भारत के साथ व्यापार पर प्रतिबंध लगाने का फैसला ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था खुद ही चीन, सऊदी अरब, यूएई और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष जैसी वित्तीय संस्थाओं की मदद के भरोसे चल रही है. पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने 2018 में सरकारी आवास की भैंसे बेचकर और लग्जरी कारें नीलाम कर पैसे जुटाने की कोशिश की थी. भारत के साथ व्यापारिक रिश्ते खत्म कर पाकिस्तान ने खुद अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है.

सत्ता में आते ही इमरान खान ने सरकारी धन को बचाने के लिए अपने पूर्ववर्ती नवाज शरीफ की 8 भैंसे बेचने का कदम उठाया था. 

पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में सिर्फ 7.76 अरब डॉलर बचे हैं जो बांग्लादेश के 32 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार से भी बहुत ज्यादा नीचे है. पाकिस्तान की जीडीपी भी गिरावट की भविष्यवाणी की गई है. उसकी जीडीपी 4 फीसदी रहने का अनुमान है. पाकिस्तान में जून 2019 में महंगाई दर भी 8.8 फीसदी के रिकॉर्ड स्तर पर रही.

निवेश के माहौल पर स्टैंडर्ड ऐंड पुअर ने इस साल पाकिस्तान की क्रेडिट रेटिंग गिराते हुए बी कर दी है जो इन्वेस्टमेंट ग्रेड AAA से भी 6 पायदान नीचे आता है. इसका मतलब ये है कि पाकिस्तान के लिए विदेशी बॉन्ड मार्केट में पूंजी जुटाना भी मुश्किल हो जाएगा.

कूटनीतिक और व्यापारिक रिश्तों में कमी लाने के पाकिस्तान के फैसले से भारत पर कोई असर नहीं पड़ा है.  रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलवामा हमले के बाद से भारत पाकिस्तान के साथ व्यापार निलंबन की स्थिति को बनाए रखेगा. भारत ने पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा भी छीन लिया था और आयात ड्यूटी 200 फीसदी बढ़ा दी थी.

ग्वालियर में दौड़ेंगी 40 इलेक्ट्रिक बसें, मंजूरी मिली

ग्वालियर। शहर की सडको पर जल्द ही बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक बसें उपलब्ध होगी। ग्वालियर स्मार्ट सिटी डवलपमेंट कार्पोरेशन द्वारा केंद्र सरकार को 40 इलेक्ट्रिक बसो का प्रस्ताव बनाकर भेजा गया था जिसे मंजूरी मिल गई है। 

भारी उद्योग एवं लोक उद्यम मंत्रालय द्वारा 64 शहरों के लिए 5595 बसों की स्वीकृति प्रदान की गई है। यह निर्णय जन परिवहन के स्वच्छ विकल्प उपलब्ध कराने हेतु फेम इंडिया स्कीम के दूसरे चरण के अंतर्गत किया गया है। भारी उद्योग विभाग द्वारा स्मार्ट सिटी में चयनित शहरों, ऐसे शहर जिनकी जनसंख्या 10 लाख से अधिक हो, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों से परिचालन लागत पर बस चलाने के प्रस्ताव आमंत्रित किए गये थे। इसके जवाब में 26 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से 86 प्रस्ताव आये जिसमेंं 14988 बसों की माँग प्राप्त हुई। इन प्रस्तावों के मूल्याँकन के पश्चात् 64 शहरों के लिए 5095 बसों की, 400 बसें इंटर सिटी के लिये तथा दिल्ली मेट्रो की शटल सर्विस के लिए 100 इलेक्ट्रिक बसों की स्वीकृति दी गई। इसी के तहत ग्वालियर स्मार्ट सिटी द्वारा 40 इलेक्ट्रिक बसों के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है।  

इस योजना के तहत चयनित शहर अब समयबद्ध प्रणाली अपनाते हुए इन बसों का क्रय करेंगे। गौरतलब है कि फेम इंडिया स्कीम के द्वितीय चरण में निर्धारित लोकल व तकनीकी मापदंडों की पूर्ति होने पर ही ये शहर फंडिंग के लिए पात्र होंगे। इस योजना के प्रथम चरण में मध्यप्रदेश से इंदौर का प्रस्ताव का केवल चयन हुआ था। जबकि दूसरी बार मांगे गये प्रस्ताव में ग्वालियर के प्रस्ताव को भी स्वीकृति मिल गई है। ग्वालियर के इस योजना के चयन के बाद स्मार्ट सिटी सीईओ महीप तेजस्वी नें जानकारी देते हुये बताया कि शहर को एक स्वच्छ जन परिवहन उपलब्ध कराने में ये बसें अहम भूमिका निभाएँगी। साथ ही शहर में लास्ट माइल कनेक्टिविटी सुनिश्चित कर जन साधारण को लाभान्वित करेंगी। इसे योजना के तहत चलने वाली सभी बसें 32 सीटर होगी और बसो को चार्ज करने के लिये चार्जिंग स्टेशन भी बनाया जायेगा। 

मप्र / मूसलाधार बारिश से रायसेन का भोपाल से सड़क संपर्क टूटा; आज खोले जा सकते हैं बरगी डैम के गेट

भोपाल/रायसेन. पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में जारी मूसलाधार बारिश के चलते ज्यादातर जिलों में नदी-नाले उफान पर हैं। लगातार बारिश के चलते जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। रायसेन में हालात खराब हो गए हैं। यहां कई इलाकों में लोगों के घरों में पानी घुस गया है।

रायसेन में मूसलाधार बारिश से हर तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है। रायसेन का भोपाल से सड़क संपर्क टूट गया है। यहां रीछन नदी के उफान पर आ जाने से दरगाह रपटा चढ़ गया है। वहीं भोपाल-रायसेन बायपास की एक पुलिया धंसक जाने की वजह से पूरी तरह रायसेन का भोपाल से सड़क संपर्क टूटा हुआ है। इसके अलावा पगनेश्वर गांव में बेतवा नदी के उफान आ जाने की वजह से रायसेन का विदिशा और सांची से सड़क संपर्क टूट गया है।

24 घंटे में भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटे के दौरान जबलपुर समेत आस-पास के जिलों में भारी बारिश की संभावना व्यक्त की है। विभाग के मुताबिक राजस्थान से लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा से लेकर बंगाल की खाड़ी से उपजे कम दबाव की वजह से यह बारिश हो रही है। शनिवार तक अच्छी बारिश होने की संभावना है।

बरगी बांध का जलस्तर 420 मीटर पहुंचा
मंडला, डिंडौरी में हुई जोरदार बारिश के कारण बरगी बांध का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। गुरुवार की शाम तक जलस्तर 420.15 मीटर तक पहुंच गया था। बांध का अधिकतम जलस्तर 422 मीटर है। आज बारिश हुई तो बरगी डैम के गेट आज खोले जाएंगे। इसी तरह अन्य जलाशयों में भी जलस्तर बढ़ गया है। परियट और खंदारी जलाशय भी अधिकतम जलस्तर की तरफ पहुंच चुके हैं।

कालोनियों में भराया पानी
कम दबाव का क्षेत्र बनने से शहर में लगातार बारिश का क्रम जारी है। गुरुवार को दिन में 2 मिमी बारिश के बाद शाम को फिर बारिश का दौर शुरू हो गया। इस सीजन में अब तक बारिश का आंकड़ा 26 इंच पहुंच चुका है। इसके पहले बुधवार की रात तक हुई तेज बारिश ने ही शहर को आफत में डाल दिया। दर्जनों कॉलोनियों, रहवासी क्षेत्रों में जलभराव हो गया था, जो दूसरे दिन की सुबह तक लोगों को परेशान करता रहा। शहर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी नर्मदा व सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ गया है।

वैनगंगा नदी का जलस्तर बढ़ा

इधर, महाकौशल में भी भारी बारिश से हालात बिगड़े हुए हैं। बारिश के चलते नर्मदा के अलावा बालाघाट में वैनगंगा नदी का जलस्तर बढ़ गया है। आगे हालात और बिगड़ सकते हैं। क्योंकि मौसम विभाग ने आज भी मध्य प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

बालाघाट में भारी बारिश

बालाघाट जिले में पिछले 24 घंटों में 35 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। जबकि पिछले 48 घंटों में 99 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। जिले की नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। इस वजह से नदियों किनारे बसे गांवों में अलर्ट घोषित कर दिया गया है। नदियों के किनारे बसे 135 गांव खतरे के निशान पर हैं। नदियों के मुहाने बसे गावों में प्रशासन को भी अलर्ट किया गया है। जिले की वैनगंगा, बाघ, बंजर, देव, जमुनिया, टांडा,नदी समेत बरसाती नालों का जलस्तर बढ़ गया है।

तो क्या नकली है बेयर ग्रिल्स का शो मैन vs वाइल्ड?

टीवी के सबसे फेमस सर्वाइवल शो मैन vs वाइल्ड का कम से कम एक एपिसोड तो सभी ने देखा है. इस शो को टीवी पर शुरू हुए कई साल हो गए हैं और बेयर ग्रिल्स अमेरिका और यूके के साथ-साथ भारत में भी एक जाना पहचाना नाम बन गए हैं. हम सभी ने बेयर ग्रिल्स को अपने इस शो पर बड़े-बड़े खतरों से लड़ते और जंगलों और पहाड़ों में खो जाने पर जान बचाने के अलग-अलग तरीके सिखाते देखा है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये सारी बातें झूठ हुई तो?

ऐसा एक-दो बार नहीं बल्कि कई बार हुआ है कि बेयर ग्रिल्स के शो मैन vs वाइल्ड को झूठा और नकली बताया गया हो. इस शो के बारे में कई बार बात हो चुकी है और आलोचकों ने इस पर कई सवाल उठाए हैं. इतना ही नहीं कई क्रू मेंबर और अन्य लोगों ने शो के नकली होने की बात से पर्दा भी हटाया है. तो क्या हैं वो बातें जो बताती हैं कि मैन vs वाइल्ड नकली है? आइए करते हैं इस पर बात:

सबसे पहली बात जो आपको जान लेनी चाहिए वो ये है कि बेयर ग्रिल्स कोई सर्वाइवल एक्सपर्ट नहीं हैं. इस शो के साल 2006 में शुरू होने पहले बेयर यूके मिलिट्री के 21वें SAS डिवीजन का हिस्सा थे. हां उन्होंने कम उम्र में कुछ अद्भुत एडवेंचर जैसे 23 साल की उम्र में माउंट एवेरेस्ट चढ़ना और जमीन से 25,000 फुट ऊपर एक हॉट-एयर बलून में डिनर पार्टी होस्ट करने जैसी चीजें जरूर की थीं. भले ही ये दोनों बातें तारीफ करने लायक हैं लेकिन ये सर्वाइवल एक्सपर्ट की श्रेणी में नहीं आती हैं.

बेयर ग्रिल्स पर शो के दौरान इल्जाम लगे हैं कि वे असल में एडवेंचर के दौरान जगलों और पहाड़ों में रहते ही नहीं है. एक सर्वाइवल एक्सपर्ट के मुताबिक, बेयर ग्रिल्स सिएरा नेवाडा के पहाड़ों में शूटिंग के दौरान रात बिताने के लिए एक लोकल लॉज में रुके थे. इतना ही नहीं एक बार सुनसान आइलैंड पर फंसे दिखाए गए बेयर ग्रिल्स असल में हवाई के द्वीपसमूह पर थे और उन्होंने एक लोकल होटल में रातें बिताई थीं.

इसके अलावा बेयर ग्रिल्स के इस शो के बारे में ये भी कहा गया है कि जो सर्वाइवल टेक्निक्स बेयर ग्रिल्स सिखाते हैं, वो आपको फायदे की जगह नुकसान कर सकते हैं. इसके अलावा उनके बताए बहुत से उपाय नकली होते हैं. एक एपिसोड में बेयर ने बताया था कि कैसे हाथी के गोबर से पानी निकालकर पिया जा सकता है. अन्य सर्वाइवल शो सर्वाइवरमैन के इंस्ट्रक्टर लेस स्ट्रॉयड ने रेड्डिट पर बताया कि ऐसा करना मुमकिन नहीं है.

इसके अलावा बेयर ग्रिल्स का उछल-कूदकर पहाड़ों से उतरना और हर मौके पर अपने शरीर को गीला कर लेना बचने के लिए बिल्कुल सही तरीके नहीं हैं. एक्सपर्ट्स की माने तो पहाड़ों पर उछल-कूद करके उतरने के बजाए आराम से उतरना चाहिए. अगर आपके पैर में किसी भी प्रकार की चोट लगी तो आप कभी भी अपनी सिचुएशन से बाहर नहीं निकल पाएंगे. इसके अलावा शरीर को जल्दी से गीला करना एकदम खराब आइडिया है. शरीर के गीले होने पर आपको हाइपोथर्मिआ की शिकायत हो सकती है.

मैन vs वाइल्ड और बेयर ग्रिल्स के बारे में ये कहा गया है कि उनके बहुत से सीन नकली होते हैं. इसके अलावा सर्वाइवल के लिए कई कामों में बेयर ग्रिल्स का क्रू उनकी मदद करता है. जैसे एक एपिसोड में बेयर ग्रिल द्वारा पकड़ा गया जंगली घोड़ा, असल में पालतू था. इसके अलावा एक एपिसोड में बेयर को गर्म लावा को पार करते दिखाया गया था, जो कि असल में गर्म कोयला और स्मोक मशीन से बनाया गया था. साथ ही एक एपिसोड में बेयर ग्रिल्स को पानी में ले जाने के लिए लकड़ी की राफ्ट बनाते दिखाया गया था, जिसे बनाने के लिए असल में एक्सपर्ट्स और क्रू के लोगों ने उनकी मदद की थी. ऐसा भी कई बार हुआ है जब क्रू के लोगों ने बेयर को जरूरत का सामना और औजार दिए हों.

शो के कुछ सीन्स के नकली होने की बात को बेयर ग्रिल और डिस्कवरी चैनल ने माना भी था. बेयर ने बीबीसी से बातचीत करते हुए माफी मांगी थी और कहा था कि अगर इस सीरीज में कुछ भी मिसलीडिंग लगा तो उन्हें इस बात का खेद है. इसके अलावा डिस्कवरी चैनल ने माना था कि शो में कुछ चीजें नेचुरल नहीं थीं और वे अगली बार से इसे बेहतर बनाने की कोशिश करेंगे.

बाढ़ से बेहाल केरल, वायनाड में भूस्खलन में फंसे 100 लोगों को वायुसेना ने बचाया


केरल में भारी बारिश का कहर जारी है. एर्नाकुलम, त्रिशूर, पठानमथिट्टा, मलप्पुरम जिलों में बीती रात जोरदार बारिश हुई. इस कारण कई घरों में पानी भर गया. मलप्पुरम और कोझीकोड को जोड़ने वाली प्रमुख सड़कें जल भराव के कारण बंद हैं. केरल में बाढ़ से अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है. गुरुवार को बारिश से संबंधित अलग-अलग हादसों में 6 लोगों की मौत हो गई. आज सुबह 8 लोगों की मौत की पुष्टि की गई. वहीं वायनाड में भूस्खलन हुआ है.

अब तक 60 लोगों को नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स(NDRF) ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया है. अब तक करीब 100 से ज्यादा लोगों को बचा लिया गया है. इस ऑपरेशन को खत्म करने में 10 से 12 घंटे लग सकते हैं. भूस्खलन करीब 2 किमी तक हुआ है. इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीएम मोदी से बात की है. उन्होंने पीएम मोदी से सहयोग की अपील की है.

बाढ़ प्रभावित कई लोगों को रातोंरात सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. इस बीच कोच्चि हवाई अड्डे पर 11 अगस्त 3 बजे तक सभी विमानों का परिचालन रोक दिया गया है.

मौसम विभाग ने केरल के इडुक्की, मलप्पुरम, कोझिकोड के में बारिश का रेड अलर्ट, जबकि त्रिशूर, पलक्कड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड में बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है.

केरल के तट से सटे इलाकों में पश्चिम दिशा की ओर से 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान जताया है. इस कारण मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है.

केरल स्टेटट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी(केडीएसएमए) के मुताबिक केरल के बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 22,165 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है. पूरे राज्य में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 315 कैंप स्थापित किए गए हैं.

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने गुरुवार रात को कहा था कि सरकार बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए हर संभव कोशिश कर रही है. वायनाड में भीषण बाढ़ की त्रासदी देखने को मिल रही है.

रात में भारी बारिश और अंधेरे के चलते बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मदद पहुंचाने में दिक्कत आ रही है. मलप्पुरम और इडुक्की इलाकों में भारी बारिश हो रही है. सरकार लोगों तक खाद्य पदार्थ पहुंचाने की हर भरसक कोशिश की जा रही है. कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो अपना घर छोड़कर बाहर नहीं आना 

71 साल पुराना आरके स्टूडियो जमींदोज, सेलेब्स ने यूं किया रिएक्ट

मुंबई के चेंबूर स्थित 71 साल पुराना आरके स्टूडियो अब बस कागजों पर रह गया है. गुरुवार यानी 8 अगस्त 2019 को स्टूडियो को जमींदोज कर दिया गया. अब रियल स्टेट के दिग्गज गोदरेज प्रॉपर्टीज ने इस एरिया को अपने नाम कर लिया है. स्टूडियो की स्थापना 1948 में एक्टर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर राज कपूर ने किया था.

आरके स्टूडियो को बेचने की योजना बहुत पहले से थी. दरअसल, पिछले साल अगस्त में कपूर खानदान ने आरके स्टूडियो को बेचने के प्लान का खुलासा किया था. उन्होंने बताया था कि 2.2 एकड़ में फैले इस प्रॉपर्टी की मेंटेनेंस कॉस्ट बहुत ज्यादा है. यही वजह है कि उन्होंने स्टूडियो को बेचने का फैसला किया. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक 2017 में जब स्टूडियो में आग लग गई थी, तभी कपूर फैमिली ने इसे बेचने का निर्णय लिया था.

अब इस स्टूडियो को गोदरेज प्रॉपर्टीज लिमिटेड ने खरीद लिया है. खबर है कि इसे जल्द ही मल्टी-पर्पज प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. इस आइकॉनिक स्टूडियो के खत्म हो जाने की खबर पर कई बॉलीवुड सेलिब्रिटीज ने अपना रिएक्शन दिया है.

एक्ट्रेस ऋचा चड्ढा ने ट्वीट करते हुए लिखा, “मेरा इस स्टूडियो से कोई व्यक्तिगत जुड़ाव नहीं है लेकिन इस बात से मेरा दिल टूट गया है. आइ‍कॉनिक स्टूडियो! आशा करती हूं कि सरकार इसके संरक्षण के लिए कोई कदम उठाए, आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे बचाएं…इस स्टूडियो में बनाई गई फिल्मों का हिंदी सिनेमा में बहुत योगदान है.”

डायरेक्टर निखिल आडवाणी ने लिखा, “1948 में स्थापित, यह स्टूडियो मूवी लेजेंड का हेडक्वार्टर रहा. राज कपूर फिल्म प्रोडक्शन कंपनी, आरके फिल्म्स और बहुत सारी ब्लॉकबस्टर फिल्में यहीं शूट की गई थी, खासकर 1970 और 80 के दशक में.”

आरके स्टूडियो के नाम कई हिट फिल्में दर्ज हैं. यहां मेरा नाम जोकर, सत्यम शिवम सुंदरम, श्री 420 सहित कई फिल्में बनाई गई थीं. इन फिल्मों का निर्माण एक्टर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर राज कपूर के आरके फिल्म्स बैनर के तहत की गई थी.

बता दें कि स्टूडियों में कई हिट फिल्में शूट की गई थी. आग, बरसात, आवारा, बूट पॉलिश, जागते रहो, श्री 420, जिस देश में गंगा बहती है, मेरा नाम जोकर, बॉबी, सत्यम शिवम सुंदरम, प्रेम रोग, राम तेरी गंगा मैली, कल आज और कल सहित ढेर सारी फिल्मों को आरके स्टूडियो में बनाया गया था.

शुभमन गिल का कैरेबियाई धरती पर धमाका, तोड़ा गौतम गंभीर का रिकॉर्ड

भारत के उदीयमान बल्लेबाज शुभमन गिल ने कैरेबियाई धरती पर इतिहास रच दिया है. गुरुवार को उन्होंने त्रिनिदाद के ब्रायन लारा स्टेडियम में वेस्टइंडीज-ए के खिलाफ तीसरे अनऑफिशियल टेस्ट मैच में दोहरा शतक जड़ दिया. इसके साथ ही वह भारतीय प्रतिनिधि टीम की ओर से खेलते हुए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में दोहरा शतक जमाने वाले सबसे कम उम्र के बल्लेबाज बन गए.

शुभमन गिल ने 19 साल 334 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की. इससे पहले यह रिकॉर्ड गौतम गंभीर के नाम था, जिन्होंने 2002 में 20 साल 124 दिन की उम्र में जिम्बाब्वे के खिलाफ बोर्ड अध्यक्ष एकादश की टीम के लिए दोहरा शतक बनाया था.

गिल ने 248 गेंदों में नाबाद 204 रन बनाए, जिसमें उनके 19 चौके और दो छक्के शामिल रहे. इस शानदार पारी के दौरान उनका स्ट्राइक रेट 82.25 का रहा. शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों की नाकामी के बाद गिल ने मोर्चा संभाला था. उन्होंने कप्तान हनुमा विहारी के साथ पांचवें विकेट के लिए 315 रनों की नाबाद साझेदारी की. गौरतलब है कि गिल ने पहली पारी में पहली ही गेंद पर अपना विकेट गंवाया था.

विहारी ने 221 गेंदों पर नाबाद 118 रन बनाए, जिसमें उनके 10 चौके के अलावा एक छक्का भी शामिल है. इस विशाल साझेदारी की बदौलत भारत-ए ने अपनी दूसरी पारी 365/4 के स्कोर पर घोषित कर दी और वेस्टइंडीज-ए को 373 रनों का लक्ष्य दिया. तीसरे दिन का खेल खत्म होने तक मेजबान टीम बिना किसी नुकसान के 37 रन बना चुकी थी. अब तीसरे टेस्ट के चौथे दिन जाहमर हैमिल्टन की अगुवाई वाली टीम को मैच जीतने के लिए और 336 रन बनाने होंगे.

76 भारतीय और 41 पाकिस्तानी नागरिकों को लेकर दिल्ली पहुंची समझौता एक्सप्रेस

समझौता एक्सप्रेस 76 भारतीय और 41 पाकिस्तानी नागरिकों को लेकर दिल्ली पहुंच गई है. गुरुवार को पाकिस्तान की ओर से समझौता एक्सप्रेस रद्द कर दिया गया था और ट्रेन को अटारी रेलवे स्टेशन पर छोड़कर पाकिस्तानी ड्राइवर और गाइड अपने वतन वापस लौट गए थे. इसके बाद देर रात 1.30 बजे भारतीय ड्राइवर और गाइड ट्रेन को अटारी रेलवे स्टेशन से लेकर रवाना हुए थे. सुबह-सुबह समझौता एक्सप्रेस पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पहुंच गई है.

अनुच्छेद 370 पर नीतीश कुमार फंस गए हैं?

पिछले दिनों में भारत की संसद ने दो महत्वपूर्ण बिल पास किए. एक मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2019 (ट्रिपल तलाक बिल) और दूसरा जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019.

राम मंदिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में रोज़ाना सुनवाई के फ़ैसले के बाद चौक-चौराहों से लेकर सोशल मीडिया पर यह सुगबुगाहट आम है कि केंद्र सरकार की अगली तैयारी अब राम मंदिर बनाने की है.

ये तीनों वो मसले हैं जिनके इर्द-गिर्द बीते कई दशकों से भारत की राजनीति घूम रही है. और जब-जब भारत की राजनीति में हलचल तेज़ होती हैं, बिहार की भूमिका अहम हो जाती है.

मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम की बात की जाए तो मोदी सरकार को संसद के दोनों सदनों में दोनों बिलों (ट्रिपल तलाक़ और अनुच्छेद 370 का ख़ात्मा) को पास कराने में कोई ख़ास मुश्किल पेश नहीं आई.

वोटिंग में दो-तिहाई बहुमत आसानी से मिल ही गया, कई विपक्षी नेताओं ने भी अपनी पार्टी लाइन से अलग जाकर अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटाने के फ़ैसले पर सरकार का समर्थन किया.

लेकिन बिहार इस बार भी अहम रहा. क्योंकि बिहार की दोनों बड़ी क्षेत्रीय पार्टियों राजद और जदयू ने दोनों बिलों पर विरोध जताया.

यह विरोध अहम इसलिए भी है क्योंकि जदयू केंद्र और बिहार में भाजपा की सहयोगी पार्टी है. मगर संसद में जेडीयू ने विरोधस्वरूप दोनों सदनों से वोटिंग के दौरान वॉकआउट कर दिया.

हाथ मिलाने से पहले नीतीश की शर्त क्या थी?

इन तीनों मुद्दों का नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जदयू के भाजपा से गठबंधन के समय से ही ऐतिहासिक जुड़ाव है. क्योंकि पहली बार 1996 में जब नीतीश कुमार (तत्कालीन समता पार्टी) ने भाजपा से हाथ मिलाया था तभी यह स्पष्ट कर दिया था कि वो सरकार का साथ हर मुद्दे पर देंगे सिवाय इन तीन मुद्दों के – यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड, आर्टिकल 370 और राम मंदिर निर्माण.

नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जदयू ने हमेशा इन मुद्दों पर अपनी अलग राय रखी है. जब-जब उनसे इस बारे में सवाल किया गया है तब-तब उन्होंने अपना स्टैंड साफ़ किया है.

हाल ही में लोकसभा चुनाव के दौरान 21 मई को नीतीश कुमार जब पत्रकारों से बात कर रहे थे ये सवाल आया कि भाजपा का सहयोगी होने के बाद भी अनुच्छेद 370 पर उनके विरोधी रवैये से विरोधाभास जैसी स्थिति बन गई है.

तब नीतीश ने कहा था, “इसमें कोई विरोधाभास नहीं है. हमने पहले भी बता दिया था कि धारा 370 हटाने की बात नहीं होनी चाहिए. कॉमन सिविल कोड को (ट्रिपल तलाक़) को थोपने की बात नहीं होनी चाहिए. अयोध्या मसले का हल आपसी सहमति और कोर्ट के फ़ैसले के आधार पर होना चाहिए. और ये बात हमनें तब ही साफ़ कर दी थीं जब पहली बार 1996 में हम एनडीए में शामिल हुए थे. अपने स्टैंड पर हम आज भी क़ायम हैं.”

नीतीश ने अपना स्टैंड फिर क्लियर किया

ट्रिपल तलाक़ और अनुच्छेद 370 हटाने के बिल का विरोध कर नीतीश कुमार और उनकी पार्टी ने अपना स्टैंड एक बार फिर साफ़ कर दिया है.

इस बार के विरोध को बिहार में अगले साल होने वाले वाले विधानसभा चुनाव से जोड़कर देखा जाने लगा है. क्योंकि इसके पहले भी कई मौक़ों पर बीजेपी और जेडीयू के बीच संबंधों में खटास की बात सामने आ चुकी है. फिर चाहे वह गिरिराज सिंह के बयान (ट्वीट) को लेकर हो या फिर विशेष राज्य के दर्जे वाले मुद्दे पर.

ये क़यास भी लगाए जा रहे हैं कि नीतीश कुमार इन मुद्दों पर बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़ सकते हैं. विधानसभा चुनाव भाजपा से अलग होकर लड़ने का इससे बेहतर मौक़ा उनके लिए नहीं हो सकता है.

ऐसा करने पर उनके पास गिनाने के लिए अलग होने की सैद्धांतिक वजहें होंगी. ऐसे ही सिद्धांतों की राजनीति की बात करते हुए उन्होंने पहले भी अपने पाले कई बार बदले हैं.

2013 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित हो जाने पर उन्होंने बीजेपी से नाता तोड़ लिया. 2014 का लोकसभा चुनाव अकेले लड़े. प्रदर्शन निराशाजनक रहा.

फिर 2015 में लालू यादव की पार्टी राजद के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा. शानदार जीत मिली. मगर दो साल भी सरकार नहीं चली कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर राजद से रिश्ता तोड़कर दोबारा बीजेपी से मिल गए.

नरेंद्र मोदी के वर्तमान मंत्रिमंडल में आनुपातिक प्रतिनिधित्व की बात करते हुए जब नीतीश कुमार ने सांकेतिक प्रतिनिधित्व से इनकार कर दिया था और अपने किसी भी सांसद को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होने दिया था. तभी से यह कहा जाने लगा था कि नीतीश कुमार ये सब विधानसभा चुनाव को लेकर कर रहे हैं.

कहने वाले यह भी कहते हैं कि नीतीश कुमार को पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान ही पता चल गया था कि नई सरकार ट्रिपल तलाक़, अनुच्छेद 370 और राम मंदिर को लेकर बड़े क़दम उठाएगी.

तो क्या अब एनडीए से नाता तोड़ेंगे नीतीश?

ऐसे में उनके पास कहने के लिए होगा कि इन सबमें वो सरकार का हिस्सा नहीं थे. और मौक़ा देखकर वे अलग रुख़ अख्तियार कर लेंगे.

सदन में तो उन्होंने अपना विरोध जता दिया. अब क्या नीतीश कुमार भाजपा से अलग होने का औपचारिक ऐलान भी कर देंगे? क्या बिहार में चल रही गठबंधन सरकार भी टूटेगी?

जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार बीबीसी से बातचीत में कहते हैं, “बतौर पार्टी हम हमेशा से ही इन मुद्दों पर अलग राय रखते थे. हमारी राय आज भी क़ायम है. मगर जहां तक सरकार की बात है तो सरकार केवल दो-तीन मुद्दों पर ही नहीं चलती है. कई मुद्दे होते हैं. और उन मुद्दों पर हम साथ मिलकर काम कर रहे हैं.”

ट्रिपल तलाक़ और अनुच्छेद 370 पर जदयू के विरोध के बाद जब स्थानीय मीडिया में एनडीए में फूट की चर्चा होने लगी तो पार्टी के क़द्दावर नेता आरसीपी सिंह ने प्रेस वार्ता कर कहा, “अनुच्छेद 370 को हटाकर भारत की संसद द्वारा विधायी प्रक्रिया के तहत क़ानून बनाया गया है. अब क़ानून बन गया है इसलिए इसका पालन करना ही होगा.”

दिखावे का विरोध?

एक तरफ़ सदन से वॉक आउट करके भाजपा से विरोध जताना, दूसरी तरफ़ बिहार में सरकार चलाना जारी रखना और फिर दबी ज़ुबान से समर्थन भी कर देना. क्या नीतीश कुमार मुस्लिम वोटरों को साधने के लिए दिखावे का विरोध कर रहे हैं? उनके विपक्षी अब यही आरोप लगा रहे हैं.

इन आरोपों पर जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार कहते हैं, “इसमें दिखावा क्या है? संसद में इन मुद्दों के ख़िलाफ़ हमारे वोट कर देने से भी तो कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. इससे बेहतर हमने फ़ैसला लिया कि उस प्रक्रिया का हिस्सा भी नहीं बनेंगे और हमारा विरोध तो हमेशा से है ही.”

भाजपा से अलग होकर चुनाव लड़ने की बात पर नीरज सीधे मना कर देते हैं. कहते हैं,” कुछ लोगों को लगता है, और लग क्या रहा है! इस बात के लिए स्वागत किया जा रहा है कि हम फिर से भ्रष्टाचारियों के साथ मिल जाएं. पर ऐसा क़त्तई नहीं होने वाला है. हम भ्रष्टाचार के मुद्दे पर ज़ीरो टॉलेरेंस की नीति के तहत भाजपा के साथ मिलकर सरकार चला रहे हैं.”

लेकिन इस बीच 370 पर नीतीश का विरोध भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए आग में घी का काम कर चुका है.

कुछ दक्षिणपंथी सोशल मीडिया समूहों और भाजपा के ज़मीनी कार्यकर्ताओं के बीच कहा जाने लगा है कि, “देश के मुद्दे पर नीतीश कुमार का विरोध बताता है कि वे भी बाक़ी विपक्षी नेताओं की तरह देशद्रोही हैं.”

सुषमा स्वराज के निधन के मौक़े पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में भाजपा दफ्तर के पास जुटे कुछ कार्यकर्ताओं ने नाम न छापने की शर्त पर एक स्वर में कहा कि “देखिएगा अब मोदी सरकार राम मंदिर भी बनवाकर ही रहेगी. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू ही हो गई है. और तब हम लोग ख़ुद नीतीश कुमार को अलग कर देंगे. अकेले जीतकर सरकार बनाएंगे. अभी उनको जितना विरोध करना है, कर लें.”

नीतीश के पास विकल्प क्या हैं?

आखिर नीतीश कुमार अब क्या करेंगे? क्या अपनी तमाम असहमतियों के बावजूद भी भाजपा के साथ बने रहेंगे और मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ेंगे?

वरिष्ठ पत्रकार मणिकांत ठाकुर कहते हैं, “और बाक़ी उनके पास कोई उपाय ही क्या है. वे फंस गए हैं. उनके नेता जिस तरह से बयान दे रहे हैं साफ़ है कि वे अपने स्टैंड पर क़ायम नहीं रह सके. ये मौक़ा तो था उनके लिए. मगर बीजेपी के द्वारा ऐसी परिस्थितियां और माहौल बना दी गई हैं कि वे चाहकर भी अलग होने का ख़तरा नहीं उठाएंगे. अभी तो राम मंदिर का मुद्दा बाक़ी है. और बीजेपी को केंद्र में तो फ़िलहाल उनकी ज़रूरत भी नहीं है. परिस्थितियां ऐसी हो जाएंगी कि बीजेपी को बिहार में भी जदयू की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.”