370 के विरोध को सही ठहराने के लिए JDU ने ली ‘जॉर्ज की आत्मा’ की आड़

,अनुच्छेद 370 के फैसले पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने यू-टर्न ले लिया है. जेडीयू के संगठन महासचिव आरसीपी सिंह ने कहा कि स्वर्गीय जॉर्ज फर्नांडिस की आत्मा को ठेस न पहुंचे, इसलिए जेडीयू ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का संसद में विरोध किया था.

स्वर्गीय जार्ज फर्नाडिस की आत्मा को ठेस न पहुंचे इसलिए जेडीयू ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का संसद में विरोध किया. पार्टी का अब कहना है कि संसद के दोनों सदनों से पास इस कानून का हम सम्मान करते हैं.

पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि अनुच्छेद 370 पर हमारा स्टैंड 1996 से ही है और ये बीजेपी को भी पता है. चूंकि हम ने आश्वस्त किया था इसलिए हमने विरोध किया,  लेकिन अब कानून बनने के बाद हम इसका सम्मान करते हैं.

आरसीपी सिंह ने कहा कि बीजेपी और जेडीयू के बीच कोई विवाद नहीं है. हम मिलकर 2020 का विधानसभा चुनाव लडेंगे. आजतक से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 का फैसला जनहित में है.

बता दें कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा अनुच्छेद 370 को रद्द किए जाने की घोषणा और राज्य को दो हिस्सों में बांटने और जम्मू कश्मीर-लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के संकल्प लाए जाने के बाद जेडीयू के वरिष्ठ नेता के.सी. त्यागी ने कहा था कि पार्टी अनुच्छेद 370 रद्द किए जाने का विरोध करती है.

बुरहानपुर-जैनाबाद पुल डूबा, खतरे के निशान से ऊपर बह रही ताप्ती

बुरहानपुर। मध्य प्रदेश के कई जिलों में आसमान से आफत की बारिश बरस रही है। भारी बारिश के चलते कई इलाकों में नदी-नाले उफान पर आ गए हैं। बुरहानपुर जिले में भी रातभर से भारी बारिश जारी है। बारिश के चलते ताप्ती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। फिलहाल ताप्ती नदी खतरे के निशान से डेढ़ मीटर ऊपर बह रही है। इसके चलते हाल ही में बुरहानपुर से जैनाबाद के बीच बनाया गया नया पुल डूब गया है। पुल के ऊपर से ताप्ती नदी का पानी बह रहा है। इसके चलते पुल से यातायात बंद कर दिया गया है। प्रशासन ने निचली बस्तियों में अलर्ट जारी किया है। स्कूलों में छुट्टियां कर दी गई हैं। मौसम विभाग ने आज मध्य प्रदेश में भारी बारिश की आशंका जताई है। ऐसे में अगर आज भी बारिश होती है तो यहां हालात बिगड़ सकते हैं।

रातभर से बारिश जारी, ताप्ती व अन्य नदियां उफनी

जिले में रातभर में करीब दो इंच बारिश हुई है। ताप्ती नदी का जलस्तर 223.800 मीटर पर पहुंच गया है। ताप्ती नदी के विभिन्न घाट डूब गए है। निचली बस्तियों में अलर्ट जारी कर बाढ़ के बढ़ते पानी पर निगरानी रखी जा रही है। राजघाट पर पुलिस ने लोगों की इंट्री बंद कर दी है। लगातार हो रही बारिश के चलते शहर की सड़कों पर भी पानी भर गया है। ऐसे में लोगों को अपने काम पर जाने में भी परेशानी हो रही है।

बढ़ते जल स्तर से कई घाटों से संपर्क टूटा, गंगा में उठ रही लहरों से सहमे वाराणसी के लोग

वाराणसी, । काशी के साथ ही बलिया, गाजीपुर, प्रयागराज व मीरजापुर में भी गंगा का जल स्तर तेजी से बढ़ रहा है। वाराणसी में गंगा एक ही दिन में 30 सेमी बढ़ गईं। इसके कारण घाटों पर आने वाले लोगों एवं नाविकों के लिए चेतावनी जारी की गई है। वहीं बुधवार को ऊपर तक उठने वाली लहरों को देखकर लोग सहमे हुए थे। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंगा का जल स्तर 63.14 मीटर दर्ज किया गया। बढ़ते जल स्तर के कारण कई घाटों का आपस में संपर्क टूट गया है। इससे पर्यटकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। यहां पर गंगा चेतावनी बिंदू से मात्र 7.12 मीटर ही दूर रह गई हैं।

गंगा के जलस्तर में बढ़ाव के कारण कई घाटों पर गंगा आरती का स्थल भी बदल गया है। पिछले चार दिनों दिनों में यहां पर गंगा करीब 2.2 मीटर तक बढ़ गई हैं। मालूम हो कि पिछले दिनों देश के कई स्थानों पर झमाझम बारिश हुई। इसके कारण गंगा का जल स्तर बढ़ते गया। हालांकि चार अगस्त से यह क्रम बदल गया है। मंगलवार को जहां गंगा का जल स्तर 62.84 मीटर पर था वहीं अगले दिन यह आंकड़ा 63 पार कर गया। इसके अलावा टोंस, सोन सहित अन्य कई नदियां भी बढ़ाव पर चल रही है। हालांकि गोमती एवं छोटी सरयू नदी स्थिर है।

काशी में गंगा का जल स्‍तर

63.14

मीटर पर पहुंचा वाराणसी में गंगा का जल स्तर

70.26

मीटर है वाराणसी में गंगा का चेतावनी बिंदु

71.26

मीटर है वाराणसी में गंगा के खतरे का निशान

73.90

मीटर था 9-9-1978 में सबसे अधिक जल स्तर

चार दिनों में गंगा की चाल

तारीख        जल स्तर

चार अगस्त   60.94

पांच अगस्त  62.20

छह अगस्त   62.84

सात अगस्त   63.14

एक समूह ने रोकी ट्रेन, दूसरे ने किया पथराव और तीसरे ने यात्रियों को लूटा

रायपुर, । त्रिवेंद्रम से चलकर छत्तीसगढ़ के कोरबा जाने वाली कोचीन एक्सप्रेस को मंगलवार की रात एक समूह ने रोका, दूसरे ने पथराव किया और तीसरे ने यात्रियों को लूटा। लुटेरों ने पहले चेन पुलिंग की। इसके बाद उसके दूसरे समूह ने पथराव किया। ट्रेन में सवार यात्री दहशत में आ गए तब तीसरे समूह ने लूटपाट शुरू की।

कई यात्रियों से लूटपाट की खबर है, लेकिन एक महिला का मंगलसूत्र लूटे जाने की सूचना ट्रेन के रायपुर पहुंचने पर GRP को दी। पथराव में छह यात्रियों को चोट आई हैं।

कोचीन एक्सप्रेस बीती रात 9.55 को राजनांदगांव से रवाना हुई और 10.15 के करीब मुढ़ीपार और रसमड़ा के बीच पहुंची थी तभी लुटेरों ने सुनसान इलाका देखकर जोरातराई गेट के पास चेन पुलिंग कर दी। इसके साथ ही कोच एस 06, एस 07, एस 08 और एस 09 पर पथराव कर दिया।

पत्थर लगने से कोरबा निवासी जीवन लाल अग्रवाल को चोट आई है। रायपुर पुरानी बस्ती निवासी माया साहू नागपुर से दुर्ग आ रही थी। लुटेरों ने खिड़की के अंदर से हाथ डालकर उनके गले से मंगलसूत्र लूट लिया। लूट के दौरान महिला के गले और कान में चोट आई।

उन्होंने रायपुर GRP में रिपोर्ट दर्ज कराई है। GRP और पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस उस इलाके के मोबाइल टावर फोन लोकेशन के साथ राजनांदगांव तथा गोंदिया तक सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। रायपुर GRP ने जीरो में अपराध दर्ज कर केस राजनांदगांव भेज दिया है।

संसद में स्पीकर तीन बार क्यों बोलते हैं ‘The ayes have it’, जानें क्या है इसका इतिहास

संसद के सदन (लोकसभा और राज्यसभा) में किसी भी विधेयक के प्रस्ताव को पारित करने के लिए अक्सर स्पीकर तीन बार ‘The ayes have it’ कहते हैं। क्या आपको मालूम है कि स्पीकर सदन में तीन बार ‘The ayes have it’ क्यों बोलते हैं। राज्यसभा में धारा 370 बिल पास होने के बाद ट्विटर पर लोगों ने ‘The ayes have it’ का मतलब पूछा।

दरअसल, स्पीकर ‘The ayes have it’ किसी भी विधेयक के प्रस्ताव को ‘स्वीकृति’ देने के लिए तीन बार इस्तेमाल करता है। इसका मतलब हुआ कि किसी भी प्रस्तावित विधेयक को सदन से मंजूरी मिल गई। संसद के सदन में दो शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है AYES और NOES। AYES का मतलब हां/YES और NOES का मतलब नहीं/NO। 

सदन की कार्यवाही के नियम

सदन की कार्यवाही का अपना इतिहास रहा है, जो एक पारंपरिक तरीके से संचालित किया जाता है। सदन की कार्यवाही नियम कानून के तहत चलता है।जिसके तहत कार्यवाही संचालित होती है। भारत के संविधान का बड़ा हिस्सा ब्रिटेन के संविधान से लिया गया है। ब्रिटेन की संसद में भी बिना स्पीकर के इजाजत के नहीं बोल सकते हैं। ठीक इसी प्रकार भारत के सदन में भी स्पीकर के इजाजत बिना किसी को बोलने की इजाजत नहीं होती है।  

जानिए कैसे होता है मतदान और मत विभाजन

संसद के सदन (लोकसभा और राज्यसभा) में किसी भी विधेयक के प्रस्ताव को मतदान और मत-विभाजन की प्रक्रिया के तहत पारित किया जाता है। यह मतदान ध्वनिमत, मत विभाजन, पर्चियों के जरिए किया जाता है। 

ध्‍वनि‍मत- यह कि‍सी सदस्‍य द्वारा कि‍ए गए प्रस्ताव पर स्पीकर द्वारा रखे गए प्रश्‍न पर नि‍र्णय लेने की एक सरल प्रक्रिया है। ध्वनिमत के तहत के स्पीकर सभा में मौजूद सदस्यों के सामने प्रश्न का निर्धारण ‘हां’ या ‘नहीं’ में रखता है। अगर ध्वनि हां की तरफ ज्यादा है तो स्पीकर उसके पक्ष में जाता है।

पर्चियों के जरिए मत विभाजन- इसमें पर्चियों से वोटिंग कराई जाती है। सभा में मौजूद सदस्यों के पर्चियां बांटी जाती है। जिसमें प्रस्ताव को पारित करने के लिए हां या नहीं का विकल्प चुनना होता है।  

सुषमा को याद कर इवांका ट्रंप बोलीं- महिलाओं की चैंपियन को हमने खो दिया

पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी और उनकी वरिष्ठ सलाहकार इवांका ट्रंप ने शोक जताया है. इवांका ने कहा, ‘भारत ने एक समर्पित और लोकसेवक नेता को खो दिया है. सुषमा स्वराज भारत और दुनिया भर में महिलाओं के लिए एक चैंपियन थीं. उनसे परिचित होना एक सम्मान की बात थी.’

गौरतलब है कि मंगलवार देर रात पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था. सुषमा स्वराज को बुधवार को अंतिम विदाई दी गई और उन्हें दुनिया भर के नेताओं ने श्रद्धांजलि दी.

सुषमा स्वराज के निधन पर अमेरिका के विदेश मंत्री ने भी दुख व्यक्त किया है. अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने ट्वीट किया, ‘अपनी मित्र और भारत की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन की खबर से दुखी हूं. उनके परिवार और भारत की जनता के प्रति मेरी संवेदना है.’

इसके अवाला नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास ने पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन पर शोक जताते हुए कहा कि वह भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भागीदार थीं. उन्हें देश और विदेश दोनों जगहों पर भारतीय लोगों की एक अच्छी प्रतिनिधि के रूप में सम्मान मिला. विदेश मंत्री के रूप में वह अमेरिका-भारत द्विपक्षीय संबंध को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भागीदार रही हैं.

CWC: कश्मीर पर 45 मिनट तक बोलते रहे आजाद, जानिए बैठक की 10 बड़ी बातें

बैकफुट पर नजर आए सरकार के कदम का समर्थन करने वाले
नेताज्योतिरादित्य सिंधिया और अन्य को संतुष्ट करने के लिए जोड़ा पैराग्राफ

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त करने वाले मोदी सरकार के विधेयक से असमंजस में पड़ी कांग्रेस की CWC की मंगलवार को बैठक हुई. बैठक में भी नेताओं में इस मुद्दे पर मतैक्य नजर नहीं आया. गुलाम नबी आजाद काफी समय तक कश्मीर पर बोलते रहे.   

दूसरी तरफ मोदी सरकार के इस फैसले का समर्थन करने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत अन्य नेता बैकफुट पर नजर आए. पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने अनुच्छेद 370 हटाने के तरीके का विरोध किया. साथ ही 370 पर सीधे बोलने से बचे. यह भी नजर आया कि राज्यसभा में सीधा विरोध करने के बाद पार्टी ने पहले लोकसभा में लाइन बदली और फिर CWC में भी यह देखने को मिला.

केंद्र सरकार के फैसले का समर्थन करने वाले सिंधिया और अन्य नेताओं को संतुष्ट करने के लिए प्रस्ताव में एक पैराग्राफ जोड़ा गया. इसके बाद ही यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास हुआ.

बैठक की 10 बड़ी बातें-

  • CWC बैठक में गुलाम नबी आजाद ने 45 मिनट कश्मीर पर बोला.
  • जितिन प्रसाद ने कहा कि देश का माहौल इस मुद्दे पर बीजेपी के पक्ष में है. जितिन के निशाने पर आजाद थे, जिसकी वजह से जितिन बोले कि कुछ लोगों के पक्ष को कश्मीर में समर्थन मिल रहा है. इस पर चिदंबरम ने कहा कि आप केरल और तमिलनाडु के बारे में ऐसा नहीं कह सकते. जवाब में जितिन ने कहा कि मैं उत्तर प्रदेश से आता हूं, वहां यही भावना है.

केंद्र के फैसले के पक्ष में ट्वीट करने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया अकेले पड़ गए. उन्होंने कहा कि पब्लिक सेंटीमेंट जो कह रहा है, वही मैंने ट्वीट किया. हालांकि सरकार के तरीके से असहमत हूं. सिंधिया की बात को गांधी परिवार समेत किसी से कोई समर्थन नहीं मिला.

  • दीपेंद्र हुडा भी अपने ट्वीट का बचाव करते दिखे. हुडा ने सफाई दी कि पुलवामा के बाद भी मैंने यही कहा था और फिर ताज़ा ट्वीट किया, लेकिन सरकार का तरीका सही नहीं ये भी लिखा.
  • आरपीएन सिंह ने कहा- आप कश्मीर पर तकनीकी रूप से सही हो सकते हैं, लेकिन जनता के बीच क्या लेकर आए? क्या जवाब दें? तकनीकी पहलू नहीं सियासी पहलू सामने आएं, जिन्हें लेकर हम जनता के बीच जाएं.
  • राहुल गांधी ने सबकी सुनने के बाद कहा कि हम सच के साथ हैं, लेकिन सिर्फ पब्लिक सेंटीमेंट ही पैमाना नहीं हो सकता.
  • चिदंबरम ने कहा कि अगर कल जनभावना के अनुरूप तमिलनाडु में हिंदी अनिवार्य कर दें तो? क्या ऐसा कर सकते हैं? क्या पुराने वादे भूल सकते हैं?
  • प्रियंका ने भी राहुल की हां में हां मिलाई और कहा कि सरकार ने इस मसले पर लोकतंत्र का मजाक बनाया. इस मुद्दे पर सोनिया, राहुल, प्रियंका एकजुट नजर आए.
  • CWC के प्रस्ताव में POK पर अलग से पैराग्राफ जोड़ा गया. यह सिंधिया, कुलदीप विश्नोई, दीपेंद्र हुड्डा, आरपीएन सिंह और जितिन प्रसाद की बातों के कारण हुआ. प्रस्ताव में साफ किया गया कि कश्मीर ही नहीं, PoK भी हमारा है. यह द्विपक्षीय मसला है और इस पर किसी तीसरे की मध्यस्थता मंजूर नहीं है.
  • आखिर में नेहरू, पटेल, अम्बेडकर ने 370 क्यों लागू किया? इस पर भी चर्चा हुई, लेकिन 370 हटाने के मसले पर खामोशी अख्तियार कर सरकार के तरीके से असहमति जताते हुए प्रस्ताव पारित किया गया.

कश्मीर पर आखिर सुशील मोदी ने नीतीश कुमार को सलाह दे डाली

पटना: पिछले दो दिनों से बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को आर्टिकल 370 के मुद्दे पर विरोधियों से ज़्यादा अपने सहयोगियों और समर्थकों से सलाह और नसीहत मिल रही हैं. हर मुद्दे पर राजद को कोसने वाले नीतीश कुमार मंत्रिमंडल के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने भी इस मुद्दे पर नीतीश कुमार को कुछ सलाह दी है. हालांकि सुशील मोदी ने अपने ट्वीट में नीतीश कुमार या उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड का नाम तो नहीं लिया, लेकिन कहा है कि संविधान की धारा 370 के सारे आपत्तिजनक प्रावधान समाप्त करने और दो केंद्र शासित प्रदेशों के गठन पर संसद की मुहर के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जब इसे लागू करने वाली अधिसूचना भी जारी कर दी, तब नई संवैधानिक और राजनीतिक सच्चाई स्वीकार करते हुए सभी दलों को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के विकास के लिए काम करना चाहिए.

निश्चित रूप से सुशील मोदी ने जिस प्रकार राजनीतिक सच्चाई स्वीकार करने की बात कही है, उनका इशारा नीतीश कुमार की तरफ़ है. उनकी पार्टी ने राज्यसभा और लोकसभा में इस मुद्दे पर भाषण में अपना विरोध ज़ाहिर कर सदन का बहिष्कार किया. मोदी ने कहा कि आज जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की ताबूत में आखिरी कीलें ठोंकी जा रही हैं और लद्दाख नई भू-राजनीतिक पहचान के साथ उभर रहा है.

घाटी की ताजा तस्वीर: कटीली तारबंदी, चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मी और अजीब सा सन्नाटा

श्रीनगर: श्रीनगर में आधिकारिक तौर पर कर्फ्यू की घोषणा नहीं है लेकिन हालात कर्फ्यू के समान हैं. शहर में सन्नाटा छाया है,कटीले तारों से जगह जगह बाड़बंदी है, चप्पे-चप्पे पर तैनात पुलिस और सेना के जवान बहुत जरूरत पड़ने पर ही लोगों को निकलने दे रहे हैं और वह भी गहन तलाशी के बाद. केन्द्र सरकार ने जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया है और राज्य को दो केन्द्र शासित प्रदेश के रूप में बांटने की घोषणा की है. इस बात को दो दिन बीत चुके हैं। यहां की जनता घरों के अंदर है,किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए अधिकारियों ने संचार के सभी साधन बंद कर दिए हैं. कर्फ्यू जैसे इन हालात में लोग असमंजस में हैं तो कुछ खौफजदा भी हैं. 

अधिकारियों ने बताया कि शहर के बाहरी इलाके नूरबाग में कुछ युवा इकट्ठा हो गए थे जिन्हें सीआरपीएफ के जवानों ने खदेड़ दिया. जवानों से बचने के चक्कर में एक युवक झेलम नदी में कूद गया और डूब गया. उन्होंने बताया कि क्षेत्र में प्रदर्शन हुआ, भीड़ को तितर बितर करने के लिए लाठिंया चलाईं गईं जिसमें छह लोग घायल हो गए. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने स्थिति की समीक्षा की. एक वीडियो सामने आया है जिसमें वह शोपियां में कुछ लोगों के साथ खाना खाते दिखाई दे रहे हैं,. शहर में केवल उन्हें ही निकलने दिया जा रहा है जिन्हें बेहद जरूरी काम है, वह भी जगह जगह गहन तलाशी के बाद. 

शहर में सार्वजनिक यातायात बंद होने के कारण लोग हवाई अड्डे तक पहुंचने के लिए लिफ्ट लेते दिखाई दिए. गुडगांव में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करने वाले आदिल डार अपने माता-पिता से मिलने यहां आए थे और अब वह वापस दिल्ली लौट रहें हैं. यातायात का कोई साधन नहीं होने के कारण उन्हें श्रीनगर हवाई अड्डे तक 14 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा। एक अधिकारी ने बताया कि शहर में धारा 144 लागू है। सभी शिक्षण संस्थान हैं. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती सहित बड़ी संख्या में नेता हिरासत में हैं.