लोकसभा में सीटें आवंटित : स्मृति ईरानी पहली पंक्ति में, राहुल गांधी दूसरी पंक्ति में बैठेंगे

नई दिल्ली: लोकसभा में सीटों का आवंटन कर दिया गया है. यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ डीएमके के टीआर बालू को पहली पंक्ति में स्थान दिया गया है.राहुल गांधी इस बार भी दूसरी पंक्ति में ही बैठेंगे. उन्हें हराने वालीं बीजेपी सांसद व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को पहली पंक्ति में जगह मिली है. लोकसभा में सीटों के बंटवारे में समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह को भी पहली पंक्ति में स्थान मिला है. पहली पंक्ति में पहली सीट पीएम मोदी की होगी. उनके बाद राजनाथ सिंह, अमित शाह व नितिन गडकरी की सीटें तय की गई हैं. पीएम नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल के सदस्य में पहली बार निर्वाचित अमित शाह, रविशंकर प्रसाद और स्मृति ईरानी को अगली कतार में बैठने का स्थान मिला है.  

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को सीटों का आवंटन किया. लोकसभा में विपक्ष के नेताओं में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ टीआर बालू और सपा नेता मुलायम सिंह यादव की सीट पहली पंक्ति में होगी. आगे की कतार में केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा, नरेन्द्र सिंह तोमर, अर्जुन मुंडा और अरविंद सावंत को भी सीटें मिली हैं. विपक्षी दलों में अगली कतार में सदन में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी को भी स्थान दिया गया है.

इसी माह के पहले हफ्ते में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को लोकसभा में पहली पंक्ति में स्थान मिलने के कयास लगाए गए थे लेकिन यह तभी जाहिर हो गया था कि उनको पूर्ववत दूसरी पंक्ति में ही बैठना होगा. सरकार ने उसी वक्त साफ कर दिया था कि पहली पंक्ति में कांग्रेस को सिर्फ दो जगह दी जाएंगी.

सरकार ने राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष न होने के कारण पहली पंक्ति में सीट न देने का हवाला दिया था. बता दें कि संख्या बल से तय होता है कि किस पार्टी को पहली पंक्ति में कितनी सीटें मिलेंगी.
हालांकि बाद में कांग्रेस ने कहा था कि राहुल गांधी के लिए संसद में पहली पंक्ति की सीट नहीं मांगी गई. लोकसभा में पार्टी के नेता अधीर रंजन चौधरी ने ट्वीट कर कहा, ‘न तो राहुल जी और न ही कांग्रेस ने संसद में पहली पंक्ति की सीट के लिए कोई मांग की है. हमने उनके लिए सीट संख्या 466 का प्रस्ताव दिया है.’

गनर लेकर साथ नहीं चल रहे आजम खान, पुलिस ने घर के बाहर चिपकाया नोटिस

समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान की सुरक्षा को लेकर रामपुर पुलिस सतर्क हो गई है. आजम खान के घर के बाहर सतर्कता पोस्टर चिपकाया गया है. पुलिस के मुताबिक, आजम खान और उनके विधायक बेटे अब्दुल्ला आजम को गनर मिले हैं, लेकिन जानबूझकर दोनों नेता अपने साथ गनर को लेकर नहीं चलते हैं.

पुलिस ने आजम और उनके बेटे को गनर साथ लेकर चलने का निर्देश दिया है. पुलिस के मुताबिक आजम खान के साथ दो सुरक्षाकर्मी और उनके बेटे के साथ एक सुरक्षाकर्मी रहता है.
रामपुर में भू-माफिया घोषित आजम खान पर शिकंजा कसता ही जा रहा है. कुछ दिन पहले उनकी जौहर यूनिवर्सिटी के गेट को तोड़ने के आदेश दिए गए थे. अब आजम का हमसफर रिसॉर्ट भी प्रशासन के निशाने पर है. आजम खान पर पहले से ही अजीमनगर थाने में जमीन हड़पने को लेकर कुल 27 मुकदमे दर्ज हैं.

गुरुवार को बेटे अब्दुल्ला को हिरासत में लिया गया था

समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद आजम खां के बेटे और सपा विधायक अब्दुल्ला आजम को पुलिस ने गुरुवार को फिर हिरासत में लिया गया था. उन पर धारा 144 का उल्लंघन कर जुलूस निकालने का आरोप लगा था.

जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह ने बताया कि गुरुवार को रामपुर में धारा 144 लागू था. लेकिन आजम खान के बेटे विधायक अब्दुल्ला ने उसका उल्लंघन किया. अब्दुल्ला 150 से 200 लोगों को साथ लेकर जा रहे थे. जबकि पुलिस ने उनको समझाया था कि यहां धारा 144 लागू है. उनके न रुकने पर पुलिस ने कार्रवाई की.

अब्दुल्ला को इससे पहले, बुधवार को गिरफ्तार किया गया था. यहां के जौहर यूनिवर्सिटी में तलाशी अभियान चला रही पुलिस ने शांति भंग करने के आरोप में अब्दुल्ला को छह घंटे पुलिस लाइन में रखने के बाद शाम को निजी मुचलके पर छोड़ दिया था.

एनडीटीवी के रवीश कुमार को मिला 2019 का ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार

नई दिल्ली: पत्रकारिता जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके एनडीटीवी इंडिया के मैनेजिंग एडिटर  रवीश कुमार  को एक बार फिर सम्मानित किया गया है. इस बार उन्हें वर्ष 2019 के ‘रैमॉन मैगसेसे’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया. एनडीटीवी के रवीश कुमार को ये सम्मान हिंदी टीवी पत्रकारिता में उनके योगदान के लिए मिला है. ‘रैमॉन मैगसेसे’ को एशिया का नोबेल पुरस्कार भी कहा जाता है. बता दें कि रैमॉन मैगसेसे पुरस्कार एशिया के व्यक्तियों और संस्थाओं को उनके अपने क्षेत्र में विशेष रूप से उल्लेखनीय कार्य करने के लिए प्रदान किया जाता है. यह पुरस्कार फिलीपीन्स के भूतपूर्व राष्ट्रपति रैमॉन मैगसेसे की याद में दिया जाता है.

पुरस्कार संस्था ने ट्वीट कर बताया कि रवीश कुमार को यह सम्मान “बेआवाजों की आवाज बनने के लिए दिया गया है.” रैमॉन मैगसेसे अवार्ड फाउंडेशन ने इस संबंध में कहा, “रवीश कुमार का कार्यक्रम ‘प्राइम टाइम’ ‘आम लोगों की वास्तविक, अनकही समस्याओं को उठाता है.” साथ ही प्रशस्ति पत्र में कहा गया, ‘अगर आप लोगों की अवाज बन गए हैं, तो आप पत्रकार हैं.’ रवीश कुमार ऐसे छठे पत्रकार हैं जिनको यह पुरस्कार मिला है. इससे पहले अमिताभ चौधरी (1961), बीजी वर्गीज (1975), अरुण शौरी (1982), आरके लक्ष्मण (1984), पी. साईंनाथ (2007) को यह पुरस्कार मिल चुका है.

एनडीटीवी के लिए ये एक गौरव का दिन है. रवीश कुमार ने बहुत लंबा सफर तय किया है. बहुत नीचे से उन्होंने शुरुआत की और यहां तक पहुंचे हैं. वर्ष 1996 से रवीश कुमार एनडीटीवी से जुड़े रहे हैं. शुरुआती दिनों में एनडीटीवी में आई चिट्ठियां छांटा करते थे. इसके बाद वो रिपोर्टिंग की ओर मुड़े और उनकी सजग आंख देश और समाज की विडंबनाओं को अचूक ढंग से पहचानती रही. उनका कार्यक्रम ‘रवीश की रिपोर्ट’ बेहद चर्चित हुआ और हिंदुस्तान के आम लोगों का कार्यक्रम बन गया.

बाद में एंकरिंग करते हुए उन्होंने टीवी पत्रकारिता की जैसे एक नई परिभाषा रची. इस देश में जिसे भी लगता है कि उसकी आवाज कोई नहीं सुनता है, उसे रवीश कुमार से उम्मीद होती है. टीवी पत्रकारिता के इस शोर-शराबे भरे दौर में उन्होंने सरोकार वाली पत्रकारिता का परचम लहराए रखा है. सत्ता के खिलाफ बेखौफ पत्रकारिता करते रहे. आज उनकी पत्रकारिता को एक और बड़ी मान्यता मिली है.

रवीश कुमार के अलावा वर्ष 2019 रैमॉन मैगसेसे अवार्ड के चार अन्य विजेताओं में म्यांमार से को स्वे विन, थाईलैंड से अंगखाना नीलापजीत, फिलीपींस से रेमुंडो पुजांते कैयाब और दक्षिण कोरिया से किम जोंग हैं.

शरणार्थी बच्चों के हिरासत केंद्र के लिए ट्रंप ने ओबामा को ठहराया जिम्मेदार, कही ये बड़ी बात

वाशिंगटन, एएनआइ। अमेरिका में शरणार्थियों का मामला बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। शरणार्थियों के खिलाफ अपनी सख्त नीति को लेकर विपक्षी डेमोक्रेट नेताओं के निशाने पर आए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इस समस्या के लिए पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा जिम्मेदार हैं।

ट्रंप ने बुधवार को ट्वीट किया, ‘ओबामा प्रशासन ने 2014 में बच्चों के लिए हिरासत केंद्र बनाए थे। बच्चों को मां-बाप से अलग रखने की नीति की शुरुआत उन्होंने ही की थी। हालात सुधरते नहीं देख मैंने इसे खत्म कर दिया।’

बता दें कि भारी विरोध के कारण ही राष्ट्रपति ट्रंप ने शरणार्थी बच्चों को उनके मां-बाप से अलग रखने का अपना आदेश वापस लिया था।

अगले साल होने वाले चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी हासिल करने की होड़ में शामिल सीनेटर कमला हैरिस ने हाल में फ्लोरिडा के एक बाल शरणार्थी हिरासत केंद्र का दौरा किया था। एक अन्य डेमोक्रेट सीनेटर माइकल बेनेट ने भी इस मुद्दे पर ट्रंप प्रशासन को घेरते हुए कहा था कि बच्चों को स्कूल में होना चाहिए ना कि किसी हिरासत केंद्र में।

गौरतलब है कि कोर्ट में दाखिल एक दस्तावेज में अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन ने आरोप लगाया है कि ट्रंप प्रशासन ने 900 से ज्यादा बच्चों को उनके परिवारों से अलग कर दिया।

जल्द ही कांग्रेस को मिल सकता है नया अध्यक्ष, सामने आई ये खबर

नई दिल्ली : लोकसभा चुनाव 2019 में करारी हार के बाद से ही कांग्रेस के अंदर उठा-पटक का दौर जारी है. कांग्रेस अभी तक अगले अध्यक्ष का नाम तय नहीं कर पाई है. इस बीच राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया, मिलिंद देवड़ा, हरीश रावत जैसे अन्य नेताओं ने भी अपना पद छोड़ दिया है. ऐसे में पार्टी के अंदर एक अनिश्चितता का माहौल बन गया है. इस बीच खबर है कि कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक संसद के मौजूदा सत्र के बाद होगी. हालांकि अभी तारीख तय नहीं हो पाई है. कहा जा रहा है कि इस बैठक में कांग्रेस के नए अध्यक्ष को लेकर चर्चा और किसी निर्णय पर पहुंचा जा सकता है. जानकारी के मुताबिक राहुल गांधी भी इस बैठक में शामिल होंगे.  

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘कांग्रेस कार्य समिति का एजेंडा क्या होगा, मैं नहीं बता सकता क्योंकि अभी एजेंडा तय नहीं हुआ है. कार्य समिति की बैठक इस संसद सत्र के बाद होगी. जब भी कोई तारीख तय होगी, आपको सूचित किया जाएगा.’ दरअसल, संसद का मौजूदा सत्र सात अगस्त को खत्म हो रहा है. सूत्रों का कहना है कि अगले कुछ दिनों के भीतर सीडब्ल्यूसी की बैठक की तारीख के बारे में फैसला हो सकता है. माना जा रहा है कि सीडब्ल्यूसी की बैठक में कांग्रेस के नए अध्यक्ष को लेकर कोई फैसला हो सकता है. कांग्रेस नेता पीएल पूनिया ने कहा कि महासचिवों-प्रभारियों की बैठक के दौरान संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने यह प्रस्ताव दिया कि संसद सत्र के बाद कार्य समिति की बैठक बुलाई जाएगी

मुलायम सिंह का बड़ा सवाल, संसद सत्र बढ़ाने को बताया साजिश

नई दिल्ली, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मुलायम सिंह यादव ने संसद के मौजूदा सत्र की अवधि बढ़ाने को लेकर गुरुवार को लोकसभा में सवाल खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें सरकार की साजिश है। हालांकि, सरकार ने आरोप को खारिज करते हुए साफ किया कि तमाम विधायी कार्य होने के कारण सत्र को बढ़ाया गया।

लोकसभा में दिवालिया कानून के संशोधन पर चर्चा के दौरान यादव ने सत्र की अवधि बढ़ाए जाने को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, ‘लोकसभा देश की विधानसभाओं के लिए आदर्श होती है, लेकिन सदन में बहुत सारे सदस्य मौजूद नहीं हैं.. लोग शादी तक में नहीं जा पा रहे हैं.. सदन के संचालन के पीछे सरकार की साजिश है। जनता का पैसा बर्बाद किया जा रहा है..कोई वाजिब कारण हो तो मुझे बताएं।’ कांग्रेस नेताओं और बगल में बैठे तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने यादव की बातों का समर्थन किया।

संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि सदन में पर्याप्त संख्या में सदस्य मौजूद हैं। उन्होंने कहा, ‘मुलायम सिंह यादव वरिष्ठ सदस्य हैं, लेकिन हम उनसे सहमत नहीं हैं। कई महत्वपूर्ण विधायी कार्य हैं, जिनसे आम जनता को फायदा होगा.. विपक्ष भी मांग करता रहा है कि संसद में कामकाज साल में कम से कम 100 दिन होने चाहिए।’

17वीं लोकसभा का पहला सत्र नए सदस्यों के शपथग्रहण के साथ 17 जून को शुरू हुआ था। इसे 26 जुलाई को समाप्त होना था, लेकिन इसकी अवधि सात अगस्त तक बढ़ा दी गई है।

मप्र / निकाले गए पांच हजार संविदाकर्मियों को फिर नौकरी देगी सरकार; मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन

भोपाल। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा है कि निकाले गए सभी संविदाकर्मियों को फिर से वापस लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने संविदाकर्मियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक में यह बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए जल्द नियम बनाए जाएंगे और जरूरत पड़ी तो कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा। ऐसे कर्मचारियों की संख्या करीब 5 हजार है। प्रदेश में कुल संविदाकर्मियों की संख्या 72 हजार के करीब है।

मंत्रालय में मुख्यमंत्री के साथ हुई संविदाकर्मियों के प्रतिनिधिमंडल की बैठक में महिला बाल विकास, स्वास्थ्य विभाग के अलावा कई अन्य विभाग के अफसर मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने सभी संविदाकर्मियों को नियमित करने के साथ ही सेवा में नहीं रहने के दौरान का 90 फीसदी वेतन देने के निर्देश दिए हैं। संविदाकर्मियों का नियमित पदों में मर्जर के भी निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा किसी भी संविदाकर्मी को अब निकाला नहीं जाएगा। संबंधित प्रोजेक्ट खत्म होने की सूरत में दूसरे प्रोजेक्ट में इनकी सेवाएं ली जाएंगी।

मध्यप्रदेश / जुलाई का कोटा पूरा पर बड़े डैम खाली, ओंकारेश्वर, मोहनपुरा, बाणगंगा डैम लबालब होने में 3 से 7 फीट पानी की जरूरत

भोपाल.प्रदेश में सीजन की अब तक की सामान्य बारिश का कोटा 443.9 मिमी है, लेकिन जुलाई का यह कोटा अगस्त के पहले दिन ही पूरा हो चुका है। अब तक 441.6 मिमी पानी बरस चुका है और निमाड़, नर्मदापुरम समेत कुछेक संभागों में नदी-नाले उफान पर हैं। इतनी बारिश के बावजूद एक अगस्त तक प्रदेश के ज्यादातर बड़े बांध फुल टैंक नहीं हो पाए हैं।

राज्य में छोटे-बड़े 220 डैम हैं। इनमें से कई को गेट खुलने का इंतजार है। कुछ डैम ऐसे भी हैं जिनमें कुल क्षमता का 10% से भी कम पानी है, जबकि कुछेक 7 से 10 फीट तक खाली पड़े हुए हैं। अब तक पूर्वी मप्र में सामान्य से 17% कम और पश्चिमी मप्र में सामान्य से 16% अधिक बारिश हुई है। इस समय प्रदेश में बारिश के लिए अनुकूल सिस्टम सक्रिय है। ऐसे में अक्टूबर तक सीजन पूरा होने तक इनके लबालब होने की संभावना है।

दो साल बाद अगस्त के पहले दिन भीगा शहर :

बीते दो साल से राजधानी में अगस्त का पहला हफ्त सूखा बीत रहा था, लेकिन इस बार हफ्ते के पहले दिन ही पूरा शहर भीग गया। वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक एके शुक्ला के मुताबिक गुरुवार को सुबह से रात 8:30 बजे तक यहां 28.2 मिलीमीटर (1.11 इंच) बारिश हुई। इस बार परिस्थितियां बिल्कुल अलग हैं, इसलिए मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस पूरे महीने 200 मिमी (7.87 इंच) तक बारिश हो सकती है।

डैम इसलिए खाली रह गए :

नीमच, खंडवा, सीहोर समेत 9 जिलों में अब तक सामान्य से 21 से 61% तक ज्यादा बारिश हो चुकी है, जबकि सीधी, छिंदवाड़ा, बालाघास, पन्ना समेत 11 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। ग्वालियर, चंबल में भी लगभग यही स्थिति है, इसलिए ज्यादातर डैम अभी भी खाली पड़े हैं।

राज्यसभा से UAPA बिल पास, अब कोई व्यक्ति भी घोषित हो सकेगा आतंकी

राज्यसभा से UAPA बिल वोटिंग के बाद पास हो गया है. बिल के पक्ष में 147 और विपक्ष में 42 वोट पड़े. बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने का प्रस्ताव पहले ही गिर चुका था. लोकसभा से इस बिल को मंजूरी दी जा चुकी है अब कानून में संशोधन करने का रास्ता साफ हो गया है. इस बिल में संगठन के अलावा किसी व्यक्ति को भी आतंकी घोषित करने का प्रावधान शामिल किया गया हैUAPA बिल पर फाइनल वोटिंग

राज्यसभा से UAPA बिल पर अब अंतिम वोटिंग हो रही है. बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने का प्रस्ताव गिर चुका है. अब बिल को पारित करने के लिए फाइलन वोटिंग हो रही है. यह वोटिंग प्रक्रिया भी पर्चियों के जरिए होगी क्योंकि सदस्यों को भी सीट संख्या नहीं दी गई है.

सेलेक्ट कमेटी में भेजने का प्रस्ताव गिरा

राज्यसभा में विपक्षी दलों की ओर से UAPA बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने का प्रस्ताव गिर गया है. प्रस्ताव के पक्ष में 85 और विपक्ष में 104 वोट पड़े हैं. अब बाकी संशोधन प्रस्तावों पर सदन का मत लिया जा रहा है.

संशोधन प्रस्ताव पर वोटिंग

राज्यसभा में UAPA संशोधन बिल को सेलेक्ट कमेटी में भेजने के संशोधन प्रस्ताव पर सदन में वोटिंग कराई जा रही है. विभिन्न दलों के सांसदों ने इसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने का प्रस्ताव दिया है. सदन में पर्चियों के जरिए वोटिंग होगी और सदस्य हां या न की पर्ची से प्रस्ताव पर अपना मत जाहिर करेंगे. 

राज्यों के अधिकार नहीं ले रहे: अमित शाह

अमित शाह ने UAPA बिल पर कहा कि राज्य के DG के अधिकार नहीं छीने जा रहे हैं और जब NIA जांच शुरू करेगी तो राज्य पुलिस को जानकारी दी जाएगी. एनआईए की जांच के दौरान राज्य पुलिस से संपत्ति जब्त करने की इजाजत लेना ठीक नहीं है क्योंकि जांच की बारीक जानकारी तो NIA के पास ही है. गृह मंत्री के जवाब के बाद चिदंबरम ने कहा कि हम सभी प्रावधानों के खिलाफ नहीं है सिर्फ 2 पर हमारी आपत्ति है. उन्होंने कहा कि पहला आप किसी स्टेज पर किसी को आतंकी घोषित करेंगे, यह बताएं. अमित शाह ने कहा कि हालात काफी जटिल हैं और इस पर सब कुछ साफ नहीं किया जा सकता. सघन पूछताछ और सबूत जुटाने के बाद ही ऐसा किया जाएगा. लेकिन अगर कोई विदेश में है और हमारे साथ बातचीत नहीं कर रहा है तो उसे किया जाएगा. 

हमने कांग्रेस के कानून और संशोधनों का साथ दिया: शाह

गृह मंत्री ने राज्यसभा में कहा कि किसी व्यक्तियों को आतंकी घोषित करने के कुछ बिन्दु तय किए गए हैं, उन्हीं के मुताबिक काम होगा. उन्होंने कहा कि आतंकी अगर 2 कदम बढ़ते हैं तो हमारी एजेंसियों को 4 कदम आगे बढ़ना होगा. शाह ने कहा कि कानून और इसके सभी संशोधन कांग्रेस के समय में आया और तब लंबे-लंबे भाषण इनके लोगों ने दिए हैं. हमारी पार्टी ने हर संशोधन का समर्थन किया था और भी कर रहे हैं. आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता वह किसी व्यक्ति या सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि इंसानियत के खिलाफ है. अमित शाह ने कहा कि हम कानून को कमजोर कतई नहीं कर रहे हैं. राज्य पुलिस में IO ही जांच करता है लेकिन NIA की प्रबंधन शक्ति होती है और सभी मामलों की जांच ऊपरी स्तर तक की जाती है. राज्य पुलिस और NIA के काम करने के नियम और मानक अलग हैं. 

कुछ नहीं करोग, तो कुछ नहीं होगा: गृह मंत्री

अमित शाह ने राज्यसभा में कहा कि अगर यासीन भटकल को पहले ही आतंकी घोषित कर दिया होता तो कई लोगों की जान बच जाती लेकिन हमने सिर्फ उसके संगठन को बैन किया था. उन्होंने कहा कि आतंकी बताए गए व्यक्ति के पास अपील का पूरा अधिकार होगा, यह अंतिम ठप्पा नहीं है और चार चरणों में उसकी जांच होगी, किसी के मानव अधिकारों का हनन नहीं किया जाएगा. अमित शाह ने कहा कि दिग्विजय सिंहजी अगर आप कुछ नहीं करोगे तो कुछ नहीं होगा. इस पर दिग्विजय सिंह ने जवाब देना चाह लेकिन सभापति की ओर से इजाजत नहीं दी गई. 
धर्म को निशाना बनाने के लिए बेकसूरों को पकड़ा: शाह

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा दिग्विजय सिंह का गुस्सा जायज है वह अभी-अभी चुनाव हारकर आए हैं. उन्होंने कहा कि NIA के 3 केसों पर सजा न होने पर दिग्विजय सिंह को आपत्ति है, इन मामलों में इसलिए सजा नहीं हुई कोई यह केस ही राजनीतिक बदले की भावना से लगाए गए थे, जिसमें निर्दोष लोगों को फंसाया गया था. समझौती एक्सप्रेस धमाकों में असली दोषियों को छोड़ा और बेकसूर लोगों को पकड़ा गया. उनके खिलाफ कोई सबूत NIA नहीं दे पाई और तब भी कांग्रेस के ही सरकार थी. इन मामलों में आतंकवाद को धर्म से जोड़ा गया और राजनीतिक एजेंडा साधा गया. मक्का मस्जिद धमाकों में भी चार्जशीट कांग्रेस के वक्त ही हुई थी. 

कांग्रेस का कानून के दुरुपयोगा का इतिहास: अमित शाह

अमित शाह ने कि जब तक व्यक्ति को आतंकी घोषित नहीं करते इनके काम पर आतंकी गतिविधियों पर लगाम नहीं लगाई जा सकते. उन्होंने कहा कि अमेरिका, पाकिस्तान, चीन, इजरायल में व्यक्ति को आतंकी घोषित करने का कानून पहले से ही, हम तो कानून लाने में लेट हो गए. कांग्रेस के लोग कानून के दुरुपयोग की बात न करें क्योंकि उनका इतिहास तो काफी लंबा है और इस पर 7 तारीख तक बोल सकता हूं. आपातकाल की याद नहीं दिलाना चाहता जब लोगों के सारे अधिकार छीन लिए गए थे. तब देश पर नहीं प्रधानमंत्री की कुर्सी पर खतरा था.  

UAPA बिल पर गृह मंत्री का जवाब

राज्यसभा में UAPA बिल पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब देने शुरू कर दिया है. उन्होंने कहा कि आंतकवाद के खिलाफ इस बिल पर सदन के अंदर एकमत होना चाहिए था तो देश में अच्छा संदेश जाता. उन्होंने कहा कि NIA ने ज्यादा मामले में सजा दिलाई है और यह दर करीब 91 फीसदी है जो कि दुनिया की किसी भी एजेंसी से ज्यादा है. अमित शाह ने कहा कि किसी भी केस में चार्जशीट दाखिल न करने की वजह से कोई दोष मुक्त नहीं हुआ है. मंत्री ने कहा कि NIA के पास काफी जटिल मामले आते हैं. उन्होंने कहा कि संस्था व्यक्ति से ही बनती है और इसी वजह से अब व्यक्ति को भी आतंकी घोषित किया जाए ताकि वह व्यक्ति किसी और नाम से दूसरी संस्था न बना पाए.

हाफिज और नवलखा बराबर नहीं: चिदंबरम

कांग्रेस सांसद पी चिदंबरम ने कहा कि आप सबसे पहले किसी आतंकी बताने जा रहे हैं, चिदंबरम को भी बता सकते हैं. उन्होंने कहा कि हाफिज सईद से गौतम नवलखा की तुलना न करें. देशद्रोह और UAPA अलग हैं. चिदंरमन ने कहा कि कई एक्टिविस्ट को गिरफ्तार किया गया है क्योंकि यह लोग गरीब और दलितों के लिए लड़ रहे थे, जबकि पुलिस इन्हें हिंसा फैलाने का दोषी मानती है और उनके खिलाफ केस कर दिया गया. उन्होंने कहा कि देश देख रहा है कि आप सबसे पहले किसे आतंकी बताने जा रहे हैं. अगर आपने किसी ऐसे व्यक्ति को आतंकी बता दिया जिसे सिर्फ सरकार मानती है तो उस दिन कोई चैन से सो नहीं पाएगा. 

किसी के जीने का अधिकार नहीं छीन सकते: चिदंबरम

चिदंबरम ने बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि यह प्रावधान असंवैधानिक है और अगर आप इसे अभी वापस नहीं लेंगे तो कुछ दूर पर खड़ी एक इमारत में इसे चुनौती मिलेगी और तब आपको इसे हटाना पड़ेगा. सरकार को स्वीकार करना चाहिए कि यह प्रावधान संविधान के खिलाफ है और वापस लेना चाहिए. कम से कम इसके लिए लीगन एक्सपर्ट की राय ले लीजिए या फिर इसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेज दीजिए. हम जानकर कोई गलती नहीं कर सकते, आज इसे यहां पास कर भी देंगे तो कुछ किलोमीटर की दूरी पर जाकर यह रुक जाएगा. उन्होंने कहा कि यह आप किसी व्यक्ति से उसके जीने की आजादी छीन रहे है जिसे देश की कोई भी अदालत स्वीकर नहीं करेगी.

सरकार के मानने भर से कोई भी आतंकी होगा: चिदंबरम

चिदंबरम ने कहा कि इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य NIA को मजबूत करना है और हम इस बिल के खिलाफ हैं. आतंकवाद से लड़ाई और UAPA कानून पर कांग्रेस की कोई आपत्ति नहीं है. हम उस ताकत के खिलाफ हैं जिसके जरिए सरकार को किसी भी व्यक्ति को आतंकी घोषित करने का आधिकार मिल जाएगा. उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार मानती है कि कोई व्यक्ति आतंकवाद में लिप्त है तो वह आतंकी हो जाएगा, कोई FIR, कोई चार्जशीट, कोई सजा की जरूरत नहीं है. किसी संगठन और किसी व्यक्ति को आतंकी घोषित करने में अंतर है. पहले भी कई संगठनों को आतंकी घोषित किया गया है लेकिन उससे किसी व्यक्ति या परिवार पर असर नहीं पड़ा लेकिन जब आप किसी व्यक्ति को आतंकी बता देंगे तो काफी मुश्किलें होंगी. उन्होंने सरकार से कहा कि इससे बड़ा खतरा पैदा होगा और इसे बिल से हटा लीजिए.

आतंकवाद के खिलाफ कानून हम ही लाए: चिदंबरम

राज्यसभा में बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद पी चिदंबरम ने कहा कि यह कानून पहले भी 6 बार संशोधित किया जा चुका है. उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा संशोधन 2008 और 2013 में किया गया था और तब मेरी ओर से भी एक संशोधन था. चिदंबरम ने कहा कि यूपीए सरकार ने कानून बनाया और समय-समय पर इसे संशोधित भी किया. कोई यूपीए पर आतंकवाद के खिलाफ नरम रहने की बात नहीं कर सकता क्योंकि हमने इसके खिलाफ कठोर कदम उठाए हैं और हम ही आतंकवाद के खिलाफ कानून बनाने वाले थे. इस संशोधन से पहले भी व्यक्ति को सजा देने का प्रावधान कानून में था, उसे ठीक से पढ़िए. संगठन के साथ सदस्य को भी सजा देने का प्रावधान बिल में पहले से ही तो आप संशोधन क्यों लेकर आ रहे हैं.

आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने कहा कि ऐसे कानूनों के दुरुपयोग का इतिहास बहुत लंबा है और टाडा-पोटा कानून इसकी मिसाल है. उन्होंने कहा कि इन कानूनों में कई मामले आए लेकिन सजा बहुत ही कम लोगों को हो पाई. कई लोगों को सालों जेल में बंद रखने के बाद कोर्ट से बेकसूर बरी किया जाता है. संजय ने कहा कि असम में तो 12 साल के एक बच्चे पर टाडा के तहत मुकदमा लगाया गया था कुछ मामलों में तो सरकारी पेड़ काटने तक पर ऐसा केस दर्ज हुआ है. यह कानून संघीय ढांचे के खिलाफ है क्योंकि आप राज्य सरकार को बताए बगैर किसी को भी उठा सकते हैं.

बिल के साथ

टीडीपी ने UAPA बिल का समर्थन किया है. साथ ही बसपा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि हम बिल का समर्थन करते हैं लेकिन सरकार को चाहिए कि वह इस बिल का दुरुपयोग ने होने दे. सीपीआई के बिनोय विश्वम ने अपनी पार्टी की ओर से बिल का विरोध किया है और कहा कि इसके जरिए मुस्लिमों को निशाना बनाया जाएगा.