इंडस्ट्री में 50 साल पूरे होते ही अमिताभ ने खोला बड़ा राज, कैसे मिला था ‘बच्चन’ सरनेम?

महानायक अमिताभ बच्चन सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं। उनके द्वारा किए गए ट्वीट और ब्लॉग में लिखा गया एक-एक शब्द चर्चा में आ जाता है। अमिताभ को फिल्म इंडस्ट्री में 50 साल हो गए हैं। हाल ही में बिग बी ने ब्लॉग में निजी जिंदगी से जुड़ा बड़ा खुलासा किया है। अमिताभ बच्चन ने बताया कि कैसे उनके नाम के आगे बच्चन शब्द जुड़ा। अमिताभ बच्चन का यह ब्लॉग खूब पढ़ा जा रहा है। 

बिग बी ने बताया ‘उनके पिता जाति प्रथा के घोर विरोधी थे। बाबूजी का जन्म कायस्थ परिवार में हुआ था और श्रीवास्तव सरनेम था। वह जाति प्रथा के खिलाफ थे इसलिए उन्होंने अपने उपनाम बच्चन रख लिखा। मेरे पिता का उपनाम इस तरह बच्चन हो गया। मेरा जन्म हुआ और स्कूल में दाखिल कराने के समय फॉर्म में लिखने के लिए मेरा सरनेम पूछा गया तो माता-पिता ने आपस में बात की और फैसला लिया की हमारे परिवार का उपनाम बच्चन ही होगा।’ 

अमिताभ बच्चन ने ब्लॉग में लिखा- ‘यह हमारे साथ कायम और आगे भी रहेगा। मुझे बच्चन सरनेम के ऊपर गर्व है।’ बॉलीवुड में सिर्फ अमिताभ बच्चन ही नहीं बल्कि रोशन खानदान भी अपने असली सरनेम से नहीं जाता जाता। एक वेबसाइट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ऋतिक रोशन का असली नाम ऋतिक नागरथ है। ऋतिक के दादा यानी कि राकेश रोशन के पिता म्यूजीशियन थे। वह अपने पहले नाम रोशन से फेमस थे। 50 और 60 के दशक में उन्होंने कई फिल्मों में संगीत दिया। 

राकेश और राजेश ने अपने नाम के साथ पिता का पहला नाम लगाया और ऋतिक ने भी अपने नाम के साथ दादा का सरनेम। इस तरह से ऋतिक के नाम के साथ रोशन जुड़ा। अपने इस ब्लॉग से पहले अमिताभ बच्चन का एक ट्वीट खूब वायरल हुआ था। इस ट्वीट में बिग बी ने आपदा राहत टीम को जमकर बधाई दी थी। दरअसल, महाराष्ट्र के ठाणे जिले में वंगानी के पास फंसी महालक्ष्मी एक्सप्रेस के यात्रियों को बचाने के राहत अभियान चलाया गया था।

इस बचाव अभियान के लिए नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF), भारतीय रेलवे, भारतीय वायुसेना और राज्य प्रशासन ने मिलकर राहत कार्य किया। राहत बचाव दल ने ट्रेन में फंसे 700 लोगों को बचाया। जिसकी तारीफ किए बिना अमिताभ बच्चन भी नहीं रह पाए। अमिताभ ने ट्वीट किया कि ‘एनडीआरएफ की टीम को बधाई। उन्होंने महालक्ष्मी एक्सप्रेस से 700 यात्रियों को सफलतापूर्वक बचाया है। शाबाश एनडीआरएफ, नौसेना, भारतीय वायुसेना, रेलवे और राज्य प्रशासन, आपने बहुत अच्छा कार्य किया है। यह एक साहसी और सफल अभियान है। गर्व से भर गया हूं। जय हिंद।’ 

धड़ल्‍ले से पास कराए जा रहे बिल विधेयकों को लेकर विपक्ष ने जताई आपत्‍ति

नई दिल्‍ली, । लोकसभा में गुरुवार को नए बिल की पूर्व सूचना को लेकर विपक्ष के सदस्यों ने आपत्‍ति जताई है। कांग्रेस, डीएमके और एआईटीसी ने धड़ल्ले से बिल पास कराने को लेकर ऐतराज जताया। इसपर लोकसभा अध्‍यक्ष ओम बिड़ला ने कहा, ‘मेरा कार्यालय सांसदों को आने वाले विधेयकों को लेकर पूर्व सूचना कम से कम एक दिन पहले देने की व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। कार्य मंत्रणा समिति में सदस्यों से मैं इस संबंध में सदस्यों से चर्चा भी करूंगा।’ दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी ने अपने राज्‍यसभा सांसदों को तीन लाइन की व्‍हिप जारी की है। कांग्रेस ने अपने सांसदों को 1 से 7 अगस्‍त तक सदन में सुबह 11 बजे से लेकर कार्यवाही स्‍थगित होने तक उपस्‍थित रहने का आदेश दिया है। इसके अलावा विभिन्‍न मुद्दों को उठाते हुए राजद, भाजपा, व टीएमसी के सांसदों ने राज्‍यसभा में जीरो आवर नोटिस दिया है।

राष्‍ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने यूनिवर्सिटी में जारी एडमिशन की प्रक्रिया के दौरान सामाजिक न्‍याय के सिद्धांतों को दरकिनार करने का मुद्दा, भाजपा सांसद जीवीएल नरसिम्‍हा राव ने आंध्र प्रदेश के रामायापटनम में बंदरगाह के निर्माण का मुद्दा, भाजपा के ही सांसद हरनाथ सिंह यादव ने यूपीएससी परीक्षा में हिंदी व अन्‍य भाषाओं के कथित अपमान का मामला उठाया है। वहीं तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुखेंदु शेखर राय ने एंटरप्रेन्‍योर की मदद के लिए अनुकूल माहौल के निर्माण का मामला उठाते हुए जीरो आवर नोटिस दिया है।

मोदी 1 लाख जुर्माना लगाते तो जीत लेते मुस्लिमों का भरोसा- दिग्विजय सिंह

मोदी सरकार की ओर से संसद के दोनों सदनों से तीन तलाक बिल पास कराए जाने पर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने बिल में कुछ संशोधनों को शामिल किए जाने की जरूरत बताते हुए कहा है कि अगर ये प्रावधान शामिल होते तो मुस्लिमों का भरोसा पीएम मोदी जीतने में सफल हो जाते.

दिग्विजय सिंह ने बुधवार को ट्वीट कर कहा, ‘यदि मोदी सरकार आरोपी को जेल भेजने के बजाय कम से कम 1 लाख का जुर्माना और 1०००० प्रति माह पत्नि अलाउंस का संशोधन स्वीकार कर लेती तो पूरा विवाद ही समाप्त हो जाता. मोदी जी की मंशा अनुसार उन्हें मुसलमानों का विश्वास भी मिल जाता जो वे चाहते भी हैं. इसके अलावा दिग्विजय सिंह ने वर्ष 2018 में राज्यसभा में तीन तलाक पर बहस के दौरान अपने बोलने का वीडियो भी शेयर किया है.

बता दें कि राज्यसभा में बहुमत न होने के बावजूद मोदी सरकार तीन तलाक बिल पास कराने में सफल रही. बिल के पक्ष में 99 वोट पड़े जबकि विरोध में सिर्फ 84. इससे पहले विपक्ष ने बिल को सेलेक्ट कमिटी को भेजने का प्रस्ताव रखा था लेकिन प्रस्ताव के पक्ष में विपक्ष सिर्फ 84 वोट ही जुटा पाए, जबकि विरोध में 100 वोट पड़े. विपक्ष में सेंधमारी के दम पर बीजेपी यह अहम बिल विरोध के बावजूद पास कराने में सफल रही.

यदि मोदी सरकार आरोपी पर मेरा जेल भेजने के बजाय कम से कम ₹१ लाख का जुर्माना और ₹१००००/- प्रति माह पत्नि को अलाउंस का संशोधन स्वीकार कर लेती तो पूरा विवाद ही समाप्त हो जाता। मोदी जी की मंशा अनुसार उन्हें मुसलमानों का विश्वास भी मिल जाता जो वे चाहते भी हैं।

पिछली सरकार में दो बार लोकसभा से पास कराने के बावजूद मोदी सरकार तीन तलाक बिल राज्यसभा से पास नहीं करा सकी थी. तीन तलाक बिल पास होने को मोदी सरकार की बड़ी जीत के तौर पर देखा जा रहा है. चौंकाने वाली बात रही कि बिल पर मत विभाजन के दौरान उन आधे दर्जन दलों के दो दर्जन सदस्य गैर हाजिर रहे, जो इस बिल के प्रावधानों की आलोचना कर रहे थे.

मप्र / पिता ने समझाया तो दो सगी बहनों ने जहर खाकर दी जान

भोपाल .बैरसिया की शीतल नगर कॉलोनी में बीएससी की पढ़ाई करने वाली दो सगी बहनों ने बुधवार को जहर खाकर जान दे दी। दोनों एक निजी स्कूल में पढ़ाने भी जाती थीं। मंगलवार को स्कूल जाने का कहकर घर से निकलीं, लेकिन अपने दोस्तों के साथ घूमने चली गईं। ये बात परिवार को पता चली तो दोनों को समझाया। बैरसिया पुलिस का अंदाजा है कि संभवत: इसी बात से आहत होकर दोनों ने ये कदम उठाया होगा। पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला है। इसमें अपनी मर्जी से जान देने का जिक्र करते हुए छात्राओं ने लिखा है कि हमारे दोस्तों का कोई कसूर नहीं। वहीं, भाई ने दो युवकों द्वारा परेशान किए जाने का आरोप लगाया है।
पुलिस के मुताबिक शीतल नगर कॉलोनी, बैरसिया निवासी किशोरी लाल बैरागी ट्रक ड्राइवर हैं। वे यहां पत्नी, दो बेटों रोहित, विकास और दो बेटियों निधि (21), अनुष्का (17) के साथ रहते हैं। निधि बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा है, जबकि अनुष्का ने इसी साल बीएससी में दाखिला लिया है। ग्रेजुएशन के साथ-साथ दोनों बहनें पास के एक निजी स्कूल में पढ़ाने भी जाती थीं। टीआई एसएन पांडे ने बताया कि मंगलवार को दोनों बहनें स्कूल जाने का कहकर घर से निकली थीं। स्कूल न पहुंचकर दोनों अपने दोस्तों के साथ घूमने चली गईं। शाम को देर से घर पहुंचीं तो परिवार ने ऐसा न करने की सलाह देते हुए डांटा। खाने के बाद सभी सो गए। बुधवार सुबह दोनों ने सभी के साथ नाश्ता किया फिर पहली मंजिल पर बने कमरे में चली गईं।

परिजन बोले : उल्टी करने की आवाज सुनकर पता चली जहर खाने की बात :सुबह करीब साढ़े 11 बजे परिजनों ने उल्टी करने की आवाज सुनी। उनके कमरे में गए तो निधि बेसुध हालत में थी और अनुष्का उल्टी कर रही थी। दोनों को लेकर पहले बैरसिया अस्पताल पहुंचे, जहां निधि की मौत हो चुकी थी। अनुष्का को लेकर भोपाल आए, यहां कुछ देर चले इलाज के बाद उसने भी दम तोड़ दिया। अस्पताल से मिली सूचना के बाद बैरसिया पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला है। इसमें लिखा है कि हम अपनी जिंदगी से तंग आ गए हैं, मर्जी से जान दे रहे हैं। इसमें किसी का कोई कसूर नहीं। हमारे दोस्तों का भी कोई कसूर नहीं है। वहीं, दो जवान बेटियों को खोने के बाद से परिवार सदमे में है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वे कहते हैं कि दोनों बेटियां पढ़ने में काफी होशियार थीं। उन्हें नहीं पता था कि इस समझाइश पर वे इतना बुरा मान लेंगी और जिंदगी को खत्म करने जैसा कड़ा कदम उठा लेंगी। गुरुवार को दोनों का अंतिम संस्कार किया जाएगा।

बहन को परेशान करते थे दो युवक :मृतका के भाई विकास ने पुलिस को दिए बयान में दो युवकों पर गंभीर आरोप लगाया है। उसने बताया कि बैरसिया निवासी आशीष और रोहित नामक युवक दोनों बहनों को आए दिन परेशान करते रहते थे। वे कभी पीछा करते थे तो कभी एसएमएस करते थे। पुलिस ने इस बिंदु को भी अपनी जांच में ले लिया है। पुलिस जल्द ही इन युवकों से पूछताछ करेगी।

राम माधव ने अनुच्छेद 35A पर कहा- मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर के हित में आवश्यक कदम उठाएगी

जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संवैधानिक प्रावधान को वापस लेने की केंद्र की किसी भी योजना से जुड़े सवाल का सीधा उत्तर देने से बचते हुए भारतीय जनता पार्टी के महासचिव राम माधव ने बुधवार को कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार राज्य के हित में उचित समय आने पर आवश्यक कदम उठाएगी.

भारतीय जनता पार्टी के महासचिव राम माधव ने जम्मू-कश्मीर में संवाददाताओं को बताया, ‘‘इस पर (संविधान के अनुच्छेद 35 ए को निरस्त करने के बारे में) भाजपा का रुख बेहद स्पष्ट है और (इस मामले में) पार्टी कोई निर्णय नहीं करने जा रही है. यह निर्णय प्रधानमंत्री और उनकी सरकार करेगी. लेकिन मैं आपको आश्वस्त कर सकता हूं कि जो भी निर्णय वे करेंगे वह राज्य के हित में होगा .’’

भारतीय जनता पार्टी के महासचिव राम माधव ने आरोप लगाया कि प्रदेश के राजनीतिक दल अपनी राजनैतिक जमीन बचाने के लिए केंद्रीय सशस्त्र अर्धसैनिक बलों के आने-जाने को अन्य मुद्दों से जोड़ कर कश्मीर में डर का माहौल पैदा कर रहे हैं. उन्होंने कहा है कि संविधान का अनुच्छेद 35 ए राज्य को प्रदेश के स्थायी निवासियों को परिभाषित करने की शक्ति प्रदान करता है.

‘राजनीतिक हितों के लिए बनाया जा रहा है भय का माहौल’

भारतीय जनता पार्टी के महासचिव राम माधव ने कहा, ‘‘स्थानीय राजनीतिक दलों के नेता अपने राजनीतिक हितों के लिए भय का माहौल पैदा कर रहे हैं. सुरक्षा की दृष्टि से कश्मीर में बलों का आना जाना लगा हुआ है और यह एक निरंतर प्रक्रिया है. अतिरिक्त बल अमरनाथ यात्रा और चुनावों के लिए लगाए गए हैं क्योंकि यहां पंचायत के लिये प्रखंड स्तर पर चुनाव होने जा रहे हैं. लेकिन, व्यक्तिगत हितों के लिए बलों के आने-जाने को अन्य मुद्दों के साथ जोड़ा जा रहा है 

क्या है आर्टिकल 35A

35A भारतीय संविधान का वह अनुच्छेद है जो जम्मू-कश्मीर विधानसभा को लेकर प्रावधान करता है. यह राज्य को यह तय करने की शक्ति देता है कि जम्मू का स्थायी नागरिक कौन है?

ये कानून जम्मू-कश्मीर में ऐसे लोगों को कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने या उसका मालिक बनने से रोकता है जो वहां के स्थायी नागरिक नहीं हैं.

आर्टिकल 35A जम्मू-कश्मीर के अस्थायी नागरिकों को वहां सरकारी नौकरियों और सरकारी सहायता से भी वंचित करता है.

अनुच्छेद 35A के मुताबिक अगर जम्मू-कश्मीर की कोई लड़की राज्य के बाहर के किसी लड़के से शादी कर लेती है तो उसके जम्मू की प्रॉपर्टी से जुड़े सारे अधिकार खत्म हो जाते हैं. साथ ही जम्मू-कश्मीर की प्रॉपर्टी से जुड़े उसके बच्चों के अधिकार भी खत्म हो जाते हैं.

मप्र / सागर में पिता ने पहले शूटर से कराई बेटी की हत्या, फिर खुद को मार ली गोली

सागर। सागर के चर्चित सीमेंट व्यापारी ब्रजेश उर्फ अजय चौरसिया सुसाइड और उनकी 16 साल की बेटी महिमा की गोली मारकर हत्या के सनसनीखेज मामले में पुलिस अधीक्षक अमित सांघी ने खुलासा कर दिया है। पुलिस ने जो कहानी बताई है, उसमें कई पेंच है।

पुलिस के अनुसार ब्रजेश ने बिहार के मास्टर माइंड रंजन राय से हथियार लेने के बाद उसी के साथ मिलकर अपने किसी दुश्मन को मारने की प्लानिंग और रिहर्सल की थी, लेकिन 16 जुलाई को ब्रजेश कार से अपनी पत्नी और बेटी को बेहोशी की हालत में पथरिया जाट रोड पर ले गया था। यहां उसने रंजन को बुलाकर इन दोनों को गोली मारने को कहा। रंजन को यह पता नहीं था कि 90 हजार में उसने जिन लोगों की जान लेने की सुपारी ली है वे ब्रजेश की पत्नी व बेटी हैं।

रंजन ने लड़की को कार के बाहर से गोली मारी तभी उस रोड पर ट्रैफिक बढ़ गया। जिससे वह महिला पर फायर किए बिना ही लौट गया। कुछ देर बाद ब्रजेश ने कार में आकर खुद को गोली मारकर जान दे दी। अब सवाल उठ रहे हैं कि ब्रजेश अपनी पत्नी-बेटी को आखिर इस तरह से क्यों मरवाना चाहता था? आरोपी के साथ पूरी प्लानिंग के दौरान ब्रजेश ने यह क्यों छिपाया कि वह किसे मारने की सुपारी दे रहा है? छोटी बेटी को घर पर क्यों छोड़ा, चाहता तो उसी भी जबरदस्ती अपने साथ ले आता?

मृतक ने सुसाइड नोट में पत्नी व उसके बीमा क्लेम की राशि से बैंक का कर्ज चुकाने का जिक्र किया, लेकिन इस बात पर किसी को भरोसा नहीं हो रहा। वहीं ब्रजेश ने जिस पिस्टल से सुसाइड किया था वह तो पुलिस को मिल गई, लेकिन जिससे बेटी का मर्डर हुआ वह पिस्टल और मृतक का मोबाइल ये दोनों अभी भी गायब हैं। इस केस में अभी और खुलासे बाकी है।

आरोपी के बयान पर आधारित पुलिस की कहानी

पुलिस का कहना कि इस घटनाक्रम में दो पिस्टल उपयोग किए गए। जिनमें से उन्हें वह पिस्टल मिल गई है, जिससे रंजन ने महिमा कि हत्या की थी। जबकि दूसरी पिस्टल गायब है।जैसा कि पुलिस का मानना है कि इसी पिस्टल से ब्रजेश ने सुसाइड कर लिया। लेकिन अगर ब्रजेश के सिर से निकली गोली और इस जब्त पिस्टल की बैलेस्टिक रिपोर्ट अलग-अलग आती है तो फिर कहानी में पेंच आ जाएगा।रंजन ने पुलिस ये नहीं उगलवा पाई है कि ब्रजेश ने पत्नी-बेटी की मौत का षड्यंत्र क्यों रचा था। हालांकि पुलिस का कहना है कि खुद रंजन को भी आखिरी वक्त तक नहीं मालूम था कि ब्रजेश, उससे अपनी ही बेटी-पत्नी को मरवाना चाह रहा है। इसलिए उसकी इस मसले पर कोई चर्चा ही नहीं हो पाई।रंजन के बयानों पर आधारित पुलिस की कहानी पर भरोसा कर भी लें तो ब्रजेश अपनी उस बेटी को क्यों मरवाना चाहेगा, जिसका कोई बीमा नहीं था। पत्नी का भी बीमा भी ज्यादा राशि का नहीं था, हालांकि उसने उसे भी नहीं मारा।पुलिस अब तक ये भी मालूम नहीं कर पाई है कि ब्रजेश व उसके परिजनों की बीमा पॉलिसी साधारण थी या टर्म प्लान पर आधारित थीं।पुलिस को रंजन और ब्रजेश के बीच में हुई बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग तो मिल गई है लेकिन उन्हें सूदखोरों की धमकी भरे काॅल्स की रिकॉर्डिंग का कोई डाटा नहीं मिला है।

भारत में इस कारण 90% लोग होते हैं लंग कैंसर का शिकार, ये हैं इसके लक्षण

फेफड़ों के कैंसर (लंग कैंसर) की वजह से भारत में हर साल हजारों लोगों की मौत होती है. इंसानों की जिंदगी को निगलने वाले लंग कैंसर के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 1 अगस्त को ‘वर्ल्ड लंग कैंसर डे’ सेलिब्रेट किया जाता है. फेफड़ों में होने वाले इस कैंसर के शुरुआती चरणों की पहचान करना मुश्किल है, लेकिन अगर आप इसके लक्षणों को भांप लें तो इस खतरे को टाला जा सकता है.

लंग कैंसर की चपेट में भारत

फेफड़ों का कैंसर दुनियाभर में सामने आने वाला सबसे आम कैंसर है. कैंसर अगेंस्ट इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल लंग कैंसर के करीब 67 हजार नए मामले सामने आते हैं, जिनमें 48 हजार से ज्यादा पुरुष और 19 हजार से ज्यादा महिलाएं शामिल होती हैं.

हर साल होती हैं इतनी मौत

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि भारत में हर साल फेफड़ों के कैंसर की वजह से मरने वालों की संख्या 63 हजार से भी ज्यादा है. स्तन, गर्भाशय ग्रीवा और मौखिक गुहा कैंसर के बाद फेफड़ों का कैंसर चौथे स्थान पर आता है.

किस कारण से हो रहा फेफड़ों का कैंसर?

कैंसर की घटना के संदर्भ में भारत में लगभग 90 फीसदी फेफड़े के कैंसर के मामले सिगरेट, बीड़ी या हुक्का से जुड़े हैं. अन्य 10 फीसदी लोगों में इस रोग का प्रमुख कारण पर्यावरण में कैंसरकारी तत्वों की मौजूदगी है. फेफड़ों के कैंसर के लिए धूम्रपान सबसे बड़ा कारक है. वहीं दूसरी ओर व्यावसायिक कैंसर भी इसका एक कारण है. जब कोई व्यक्ति कार्यस्थल पर कैंसर पैदा करने वाले पदार्थ के संपर्क में आता है तो उसे व्यावसायिक कैंसर कहते हैं.

क्या होते हैं लक्षण?

फेफड़ों के कैंसर होने कई लक्षण होते हैं. इसमें लंबे समय तक लगातार खांसी आना. खांसी के साथ खून आना. जल्दी सांस फूलना या घबराहट होना भूख न लगना और जल्दी थकावट हो जाना. हर वक्त कमजोरी महसूस करना. बार-बार संक्रमण का होना. इसके अलावा हड्डियों में दर्द और चेहरे, हाथ या गर्दन में सूजन भी इसके सामान्य लक्षण हैं.

मुहर / राष्ट्रपति ने तीन तलाक बिल को मंजूरी दी, एनडीए-2 के पहले संसदीय सत्र में अब तक 10 विधेयक पास

नई दिल्ली. गाम्बिया दौरे से लौटने के बाद राष्ट्रपति रामनाथकोविंद नेगुरुवार को तीन तलाक (मुस्लिम महिला-विवाह अधिकार संरक्षण) बिल पर हस्ताक्षर कर दिए। वहीं,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार-2 के पहले संसदीय सत्र में अब तक 10 विधेयक पास हो गए। 17वीं लोकसभा और राज्यसभा में पास होने के बाद यह सभी विधेयककोविंद के पास भेजे गए हैं। तीन तलाक बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है। बाकी 9 विधेयक भीराष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानून बन जाएंगे।

तीन तलाक कानून के तहत अबतीन तलाक देने के दोषी पुरुष को 3 साल की सजा सुनाई जा सकेगी। पीड़ित महिलाएं अपने और नाबालिग बच्चों के लिए गुजारे-भत्ते की मांग कर सकेंगी।

मंगलवार को राज्यसभा में पास हुआ था
इन सभी 10 विधेयकों में तीन तलाक बिल यानीमुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षणविधेयक 2019 खास रहा। तीन तलाक बिल मंगलवार को राज्यसभा में पास हो गया था। राज्यसभा में वोटिंग के दौरान बिल के पक्ष में 99 और विरोध में 84 वोट पड़े। बिल 25 जुलाई को लोकसभा से पास हो चुका था।

10 विधेयक, जो दोनों सदनों में पास हुए

मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक 2019भारतीय चिकित्सा परिषद (संशोधन) विधेयक, 2019कंपनी (संशोधन) विधेयक, 2019अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध विधेयक, 2019जम्मू और कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयकआधार और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2019नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता केंद्र बिल, 2019होम्योपेथी केंद्र परिषद (संशोधन) विधेयक, 2019विशेष आर्थिक क्षेत्र (संशोधन) विधेयक, 2019केंद्रीय शैक्षिक संस्थान (शिक्षकों के संवर्ग में आरक्षण) विधेयक, 2019

सोनभद्र-उन्नाव नहीं आजम खान पर एकजुट हो रही है सपा

उन्नाव रेप पीड़िता के एक्सीडेंट मामले में समाजवादी पार्टी उग्र प्रदर्शन और मुआवजे तक ही सिमट गई है. वहीं, सोनभद्र मामले में वह सियासी माइलेज लेने में पीछे छूट गई थी. उत्तर प्रदेश में अपनी साख बचाने के साथ योगी सरकार को घेरने के लिए उसके पास सोनभद्र-उन्नाव जैसे मौके थे, लेकिन पार्टी उन मौकों को भुना नहीं पाई. अब समाजवादी पार्टी ने वरिष्ठ नेता आजम खान के लिए अपनी लड़ाई शुरू कर दी है.

उधर, उन्नाव रेप पीड़िता जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रही है,  लेकिन उसे इंसाफ मिलता नहीं दिख रहा. क्योंकि इस मामले का कथित आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर पार्टी में बना हुआ है. वहीं, विपक्ष का दबाव भी अब तक बेअसर रहा है. हालांकि, सपा प्रमुख अखिलेश यादव पीड़िता से मिलने लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे थे. उन्होंने पीड़िता के परिवार को 10 लाख रु. और घायल वकील के परिवार को 5 लाख रु. की आर्थिक सहायता मुहैया कराई. लेकिन पार्टी अब जौहर यूनिवर्सिटी मामले में फंसे आजम खान के लिए लड़ाई शुरू कर चुकी है. 

वहीं, समाजवादी पार्टी सांसद आजम खान की मुश्किलें लगातार बढ़ती ही जा रही हैं. हाल ही में आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम खान को हिरासत में लिया गया था, हालांकि उन्हें जमानत मिल गई. अब अब्दुल्ला आजम खान जौहर यूनिवर्सिटी के गेट पर मौन धरने पर बैठ गए हैं. उनके समर्थन में पार्टी भी उतर चुकी है.

मंगलवार को रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में पुलिस ने छापा मारा था. यहां से ऐसी कई किताबें बरामद की गई थीं, जो मदरसा आलिया से चोरी हुई थीं. इन किताबों का जौहर यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी के रजिस्टर और रिकॉर्ड में कहीं भी ब्योरा दर्ज नहीं है. वहीं, आजम खान पर पहले से ही अजीमनगर थाने में जमीन हड़पने को लेकर कुल 27 मुकदमे दर्ज हैं.