शाह ने कांग्रेस से कहा- जम्मू कश्मीर के इतिहास का मुद्दा न उठाएं, बहुत जवाब देना पड़ जाएगा

भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर में छह महीने के लिए राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के सरकार के फैसले पर कांग्रेस की तरफ से उठाए गए सवालों को लेकर उनकी कड़ी खिंचाई की।

अमित शाह ने कांग्रेस पर यह हमला उस वक्त बोला जब जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन को लेकर लोकसभा में प्रस्तावना पर बहस चल रही थी। इसके साथ ही, अमित शाह ने जम्मू कश्मीर आरक्षण (संशोधन) बिल को सदन में पेश किया। दोनों ही प्रस्ताव गृह मंत्री के तौर पर अमित शाह की तरफ से पहली बार दोपहर बाद लोकसभा में रखा गया।

जम्मू कश्मीर की स्थिति के लिए एनडीए को कसूवार न ठहराने के लिए वकालत करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा- “क्यों जमात-ए-इस्लामी पर पहले प्रतिबंध नहीं लगाया गया? आप किसको खुश करना चाहते थे?”

राष्ट्रपति शासन बढ़ाने को लेकर कांग्रेस का हमला

राष्ट्रपति शासन की अवधि को बढ़ाने के प्रस्ताव और जम्मू-कश्मीर आरक्षण (संशोधन) विधेयक-2019 पर लोकसभा में चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के मनीष तिवारी ने कहा कि इस ‘संवेदनशील राज्य में निर्वाचित सरकार का नहीं होना देशहित में नहीं है। उन्होंने सरकार से पूछा कि जब राज्य में लोकसभा चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से हो सकते हैं तो विधानसभा चुनाव क्यों नहीं करवाए जा सकते?

यह आरोप लगाया कि केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद से राज्य के लोगों में खुद को अलग-थलग महसूस करने का भाव बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस इसका पूरा समर्थन करती है कि सरकार आतंकवाद और आतंकवादियों के खिलाफ सख्ती दिखाए, लेकिन साथ ही राज्य के लोगों को साथ लेने की कोशिश करे। तिवारी ने सरकार से सवाल किया कि जब हाल में राज्य में लोकसभा शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव करवाये गये तो फिर वहां विधानसभा चुनाव क्यों नहीं करवाये जा सकते?

उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों और घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि राज्य में फिलहाल जो स्थिति है उसकी बुनियादी उस वक्त पड़ी जब 2015 में वैचारिक रूप से भाजपा और पीडीपी के बेमेल गठबंधन की सरकार बनी।

तिवारी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर एक संवेदनशील राज्य है और ऐसे में यहां निर्वाचित सरकार का नहीं होना देशहित में नहीं है।
केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह ने चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए आरोप लगाया कि जम्मू कश्मीर में आतंकवाद जारी रहने के पीछे ऐसे लोगों का निहित स्वार्थ है जो कम वोट प्रतिशत से लाभान्वित होते हैं और वंशवादी शासन बनाये रखना चाहते हैं ।

सिंह ने कहा कि जम्मू कश्मीर में चुनाव कब हो, इसका फैसला चुनाव आयोग करता है । हम 365 दिन और 24 घंटे चुनाव के लिये तैयार रहने वाली पार्टी हैं और हमेशा चुनाव के लिये तैयार रहते हैं।

उन्होंने कहा कि जो लोग हमारे ऊपर चुनाव नहीं कराने के बारे में आरोप लगा रहे हैं, वे ऐसे लोग हैं जिन्होंने पंचायत चुनाव में हिस्सा नहीं लिया लेकिन कम वोट पड़ने की संभावना को देखते हुए बाद में लोकसभा चुनाव में हिस्सा लिया। सिंह ने कहा कि ऐसे लोगों एवं दलों को अब संविधान के अनुच्छेद 35ए को लेकर कश्मीर की जनता को जवाब देना होगा ।

केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि जम्मू कश्मीर की समस्या नेहरू काल की श्रृंखलाबद्ध भूल के कारण उत्पन्न हुई । आजादी के बाद जैसे अन्य रियासतों से जुड़े विषयों से निपटा गया, उस तरह से जम्मू कश्मीर से निपटा गया होता, तब यह समस्या उत्पन्न नहीं होती।

जितेन्द्र सिंह ने कहा कि राज्य में आरक्षण की बात आई तो पूर्व की सरकार ने अपनी सुविधा के हिसाब से संविधान का उपयोग किया । उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर एकमात्र ऐसा प्रदेश है जहां विधानसभा की अवधि छह साल है । हम मांग करेंगे कि इसे भी वापस लिया जाए ।

भाजपा सांसद पूनम महाजन ने सवाल किया कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जम्मू-कश्मीर का विषय लेकर संयुक्त राष्ट्र क्यों गए थे?

उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार में जम्मू-कश्मीर के युवा देश के साथ जुड़े हैं और कांग्रेस के इस दावे में कोई दम नहीं है कि राज्य के लोग अलग-थलग महसूस कर रहे हैं।

पूनम ने सवाल किया कि लंबे समय तक कश्मीर में जाने के लिए परमिट क्यों लेना पड़ता था? दो झंडा और दो निशान (राजकीय चिह्न) की बात क्यों हुई? श्यामा प्रसाद मुखर्जी को बलिदान क्यों देना पड़ा? कश्मीरी पंडितों को घाटी से विस्थापित क्यों होना पड़ा? लोगों को पहले लाल चौक पर तिरंगा फहराने से क्यों रोका जाता था?

भाजपा सदस्य ने कहा कि मोदी सरकार ने आतंकवादियों के खिलाफ सख्ती दिखाई और ‘इंसानियत, जम्हूरियत और कश्मीरियत की भावना के साथ राज्य के लोगों को दिल से अपने साथ जोड़ा है।

तृणमूल कांग्रेस की प्रतिमा मंडल ने भी सवाल किया कि आखिर लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव क्यों नहीं कराए गए? नेशनल कांफ्रेस के हसनैन मसूदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के साथ लंबे समय से नाइंसाफी होती आ रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *