कांग़ेस मध्यप्रदेश के प्रभारी दीपक बावरिया ने भी इस्तीफ़ा दिया, अब तक 120

 भोपाल। सीएम कमलनाथ के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद अब प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया ने भी इस्तीफा दे दिया है। लोकसभा चुनाव में बुरी तरह से हार के बाद उन्होंने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।

दीपक बावरिया ने कहा है कि हमें हार की सामूहिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए, सिर्फ राहुल गांधी ही क्यों इस्तीफा देंगे। बावरिया राहुल गांधी के काफी करीबी माने जाते हैं। 2017 में उन्हें मध्यप्रदेश का प्रभारी बनाया गया था। लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस में इस्तीफे का दौर शुरु हो गया है। इसके पहले राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने भी सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।

राहुल के सम्मान में अब तक 120 इस्तीफे

हाल ही में राहुल गांधी ने कहा था कि वह इस्तीफा देने का अपना निर्णय वापस नहीं लेंगे क्योंकि किसी मुख्यमंत्री, महासचिव या प्रदेश अध्यक्षों ने हार की जिम्मेदारी लेकर इस्तीफा नहीं दिया। राहुल गांधी का इतना कहना था कि कांग्रेस में इस्तीफों की झड़ी लगती दिखाई दे रही है। शुक्रवार को कई प्रदेशों के अध्यक्षों समेत 120 पदाधिकारियों ने इस्तीफा दिया है। इस्तीफा देने वाले बड़े नेताओं में दिल्ली कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजेश लिलोठिया भी शामिल हैं। इसके अलावा हरियाणा प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष सुमित्रा चौहान, तेलंगाना कांग्रेस उपाध्यक्ष पूनम प्रभाकर और एमपी प्रभारी और महासचिव दीपक बावरिया ने भी इस्तीफा दिया है। गुरुवार रात को कांग्रेस के लॉ, आरटीआई और एचआर डिपार्टमेंट के चेयरमैन विवेक तंखा ने अपने पद से इस्तीफा देकर कहा था कि अन्य नेताओं को भी इस्तीफा देना चाहिए ताकि राहुल गांधी निर्णय ले सकें।

राहुल के बयान के बाद क्या बदल जाएंगे एमपी और राजस्थान के सीएम?

लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिए हुए एक महीना हो रहा है, लेकिन कांग्रेस के दिग्गजों ने हार की जिम्मेदारी लेते हुए अपने इस्तीफे की पेशकश नहीं की. यही वजह है कि राहुल गांधी ने बुधवार को यूथ कांग्रेस के नेताओं से मुलाकात के दौरान कहा कि उन्हें इस बात का दुख है कि उनके पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिए जाने के बाद भी कांग्रेस शासित राज्यों के कुछ मुख्यमंत्रियों, महासचिवों, प्रभारियों और वरिष्ठ नेताओं को अपनी जवाबदेही का अहसास नहीं हुआ.

दरअसल राहुल गांधी की यह टिप्पणी इस मायने में काफी अहम है कि 25 मई को हुई कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में उन्होंने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ को लेकर विशेष रूप से नाराजगी जाहिर की थी. इन दोनों राज्यों में कांग्रेस का पूरी तरह से सफाया हो गया था.

राहुल गांधी का दर्द छलकने के बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों पर दबाव बढ़ गया है. इसी का नतीजा था कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गुरुवार को कहा, ‘राहुल गांधी सही है. मैं नहीं जानता कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है. लेकिन मैंने पहले इस्तीफे की पेशकश की थी. हां, मैं हार का जिम्मेदार हूं. मुझे दूसरे नेताओं के बारे में पता नहीं है.’

मौजूदा समय में राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार है. इसके अलावा केंद्र शासित राज्य पुडुचेरी में कांग्रेस सरकार है और कर्नाटक में जेडीएस के साथ मिलकर सत्ता में भागीदार है. इस बार लोकसभा चुनाव में पंजाब और पुडुचेरी छोड़कर बाकी राज्यों में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है.

राजस्थान में कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला और मध्य प्रदेश में महज एक ही सीट पर जीत मिली है. छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को महज 2 सीटें मिली है. जबकि इन तीनों राज्यों में कांग्रेस दिसंबर, 2018 में बीजेपी के मात देकर सत्ता में आई थी. वहीं, कर्नाटक में कांग्रेस को महज एक सीट मिली है. ग्रेस इन राज्यों में बीजेपी से मुकाबला नहीं कर सकी और करारी हार का उसे सामना करना पड़ा.

ऐसे में सवाल उठता है कि राहुल की टिप्पणी सामने आने के बाद क्या कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्री हार की जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा देंगे. खासकर मध्य प्रदेश के कमलनाथ और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, क्योंकि राहुल ने 25 मई की कांग्रेस कार्यसमिति बैठक में इन्हीं दोनों नेताओं को लेकर गुस्से का इजहार किया था.

राहुल ने कहा था कि कांग्रेस ने उन राज्यों में भी बहुत खराब प्रदर्शन किया है, जहां उनकी सरकार थी. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ ने अपने बेटों को टिकट देने पर जोर दिया. इसका नतीजा था कि दोनों नेता पूरे प्रदेश में चुनाव प्रचार के बजाय अपने-अपने बेटे को जिताने पर ज्यादा जोर दिया और पार्टी को प्रदेश में हार का मुंह देखना पड़ा. ऐसे में कांग्रेस की हार के लिए कांग्रेस अध्यक्ष के साथ-साथ मुख्यमंत्रियों की भी जवाबदेही बनती है. राहुल के बयान के बाद क्या मध्य प्रदेश और राजस्थान में मुख्यमंत्री के चेहरे बदल जाएंगे?

सांसद नुसरत जहां के सिंदूर लगाने और मंगलसूत्र पहनने पर क्या बोले देवबंद के उलेमा

देवबंद: हाल ही में शादी के बंधन में बंधी अभिनेत्री और सांसद नुसरत जहां जब संसद पहुंचीं तो चर्चा में आ गईं. दरअसल उन्होंने हिंदू रीति-रिवाज से ऋंगार किया था. उनकी शादी बिजनेसमैन निखिल जैन के साथ हुई है. उनके साड़ी पहनने, सिंदूर लगाने और मंगलसूत्र पहनने पर जहां सोशल मीडिया पर कुछ लोग खुश दिखे तो कुछ लोग इस बात से नाराज भी दिखे.
अब देवबंदी उलेमा मुफ्ती असद कासमी, मोहतमिम मदरसा जामिया शेख-उल-हिंद ने कहा,”नुसरत जहां जो बंगाल से अभी अभी लोकसभा सांसद बनी हैं. उनके बारे में पता चला कि मीडिया के माध्यम से कि जब वो लोकसभा पहुंची तो उन्होंने सिंदूर भी लगाया था और मंगलसूत्र भी पहना था. तहकीकात से पता चला कि उन्होंने जैन धर्म में शादी की है. इस्लाम ये कहता है कि मुसलमान सिर्फ मुसलमान से शादी कर सकता है किसी और से नहीं.”
उन्होने कहा,”नुरसत फिल्मों में काम करती हैं, एक्टर जो होते हैं दीन उनके लिए अहमियत नहीं रखता, उन्हें जो करना होता है वह करते हैं. तो इस विषय में कोई बात करना ही बेकार है. जो शरीयत का हुकुम था वह मैंने मीडिया तक पहुंचाया है.”
बंगाली अभिनेत्री और नवनिर्वाचित सांसद नुसरत जहां ने व्यवसायी निखिल जैन के साथ तुर्की के बोडरम में शादी की थी. निखिल की टेक्सटाइल चेन के साथ काम करने के दौरान 29 वर्षीय अभिनेत्री की उनसे मुलाकात हुई थी.

तृणमूल कांग्रेस सांसद नुसरत जहां रूही व मिमी चक्रवर्ती ने मंगलवार को 17वीं लोकसभा के सदस्य के तौर पर बांग्ला में शपथ ली. दोनों पहले शपथ नहीं ले सकी थीं. नुसरत जहां ने हाल ही में व्यापारी निखिल जैन से तुर्की में शादी रचाई और मिमी इस शादी समारोह में गई थीं.
नुसरत संसद में सफेद व बैंगनी रंग की साड़ी में आई थीं. उनके हाथों में मेहंदी लगी थी. मिमी भी पारंपरिक भारतीय पोशाक में थीं. शपथ लेने के बाद नुसरत जहां ने कहा कि उनकी प्राथमिकता में कई चीजें हैं और वह संसद में अपने मतदाताओं के मुद्दों को उठाएंगी.

नुसरत जहां पश्चिम बंगाल के बशीरहाट से व मिमी चक्रवर्ती जादवपुर से निर्वाचित हुई हैं. दोनों ने बांग्ला में शपथ ली और शपथ के बाद ‘वंदे मातरम’, ‘जय हिंद’ व ‘जय बांग्ला’ का नारा लगाया.

सीएम योगी की सख्ती के बाद दागी व अक्षम अफसरों को सेवा से बाहर करने का फरमान जारी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद दागी व अक्षम कर्मियों को सेवा से बाहर करने की कार्रवाई तेजी से पूरा करने का शासनादेश जारी कर दिया गया है। मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय ने शासन के अधिकारियों को 50 वर्ष की उम्र पार करने वाले अधिकारियों की स्क्रीनिंग कर अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिए जाने संबंधी कार्रवाई 30 जून तक पूरा करने और तीन जुलाई तक शासन को रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

मुख्य सचिव ने कहा है कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए 50 वर्ष की आयु के निर्धारण के लिए कट ऑफ डेट 31 मार्च 2019 होगी। यानी ऐसे सरकारी सेवक जिनकी आयु 31 मार्च 2019 को 50 वर्ष या इससे अधिक होगी, उनकी स्क्रीनिंग की जा सकेगी। यह स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी पिछली स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में किसी कार्मिक को आगे सेवा में बनाए रखने का निर्णय ले लिया गया है तो सामान्यतया उसके मामले को अब संपन्न होने वाली स्क्रीनिंग कमेटी के सामने नहीं रखा जाएगा। हालांकि यदि ऐसे किसी कर्मी के बारे में कोई महत्वपूर्ण तथ्य नियुक्ति प्राधिकारी के संज्ञान में आता है तो वे किसी भी समय जनहित में उस सरकारी सेवक को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का निर्णय कर सकते हैं या मामला स्क्रीनिंग कमेटी के समक्ष रख सकते हैं। 

मुख्य सचिव ने सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों व सचिवों को निर्देशित किया है कि वे अपने नियंत्रण वाले सभी अधिष्ठानों में अनिवार्य सेवानिवृत्त किए गए कर्मियों की सूचना अपने हस्ताक्षर से कार्मिक अनुभाग-1 को उपलब्ध कराएं।

ट्रंप से मिले मोदी, क्या तोड़ पाएंगे अमेरिकन प्रोटेक्शनिज्म का चक्रव्यूह?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जापान में शुक्रवार को मुलाकात हुई. इस मुलाकात पर दुनियाभर की निगाहें लगी हुई थीं. हालांकि दोनों नेताओं के बीच खुशनुमा माहौल में मुलाकात हुई. पहले भारत, जापान और अमेरिका के बीच त्रिपक्षीय वार्ता हुई, जिसमें पीएम मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जापान के पीएम शिंजो आबे शामिल रहे. इस दौरान ट्रंप ने पीएम मोदी और जापानी पीएम आबे को चुनाव में जीत की बधाई दी. इसके बाद भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई. इस दौरान दोनों देशों के नेताओं ने कई अहम मुद्दों पर चर्चा की.

इस बैठक में राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा, ‘हम लोग काफी अच्छे दोस्त बन गए हैं. इससे पहले अमेरिका और भारत में कभी इतनी नजदीकी नहीं हुई. मैं ये बात पूरे भरोसे से कह सकता हूं कि हम लोग कई क्षेत्रों में खासकर सैन्य क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे. आज हम लोग कारोबार के मुद्दे पर भी बात कर रहे हैं.’  ट्रंप ने कहा, ‘पीएम मोदी आपने लोगों को साथ लाने का बड़ा काम किया है. मुझे याद है कि जब आप पहली बार चुनाव जीतकर सत्ता में आए थे, तब कई धड़े थे और वे आपस में लड़ते थे. अब वे एकजुट हो गए हैं. यह आपकी क्षमता का सबसे बड़ा सम्मान है.’

चुनौतियां बरकरार

पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की यह मुलाकात उस समय हुई है, जब दोनों देशों के बीच अपने-अपने हितों को लेकर टकराव चल रहा है. जापान में पीएम मोदी से मुलाकात से पहले ट्रंप ने ट्वीट करके भी साफ किया था कि वो भारत के अमेरिकी सामानों पर टैरिफ लगाने के फैसले को स्वीकार नहीं करेंगे, लेकिन भारत के इरादे भी बुलंद हैं. भारत ने उसी दौरान यहां आए अमेरिकी विदेश सचिव से साफ कह दिया था कि भारत अपने हित में फैसले लेगा न कि अमेरिका के कहने से. अब देखना है कि जीत के बाद आत्मविश्वास से लबरेज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के चक्रव्यूह को कैसे तोड़ते हैं?

हाल ही में अमेरिका ने भारत को मिले जेनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंस (जीएसपी) दर्जे को खत्म करने की धमकी दी, तो भारत ने भी अमेरिकी सामानों पर ज्यादा टैरिफ लगाने की तैयारी कर ली. अब अमेरिका को भारत के ज्यादा टैरिफ लगाने के फैसले से ऐतराज है. जीएसपी का दर्जा मिलने से भारत को अमेरिका में अपने सामानों पर मामूली टैक्ट देना पड़ता है. इसके हटने से भारतीय सामानों पर ज्यादा टैक्स लगेगा.

पीएम मोदी से मुलाकात से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्वीट किया, ‘मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले पर बात करने का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं कि भारत ने वर्षों से अमेरिका के खिलाफ बहुत ज्यादा टैरिफ लगाया है. अब हाल ही टैरिफ में और इजाफा किया है. यह स्वीकार नहीं है और भारत को टैरिफ को वापस लेना ही पड़ेगा.’ यहां पर विवाद मेड इन इंडिया और मेड इन अमेरिका के बीच है.

इसके अलावा अमेरिका यह भी चाहता है कि भारत अपने सबसे भरोसेमंद दोस्त रूस से रक्षा उपकरण न खरीदे, बल्कि उससे (अमेरिका) खरीदे. ऐसा न  करने पर अमेरिका भारत पर Countering American Adversaries Through Sanctions Act (CAATSA) के तहत प्रतिबंध लगाने की धमकी भी दे चुका है. हालांकि भारत अमेरिका के दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है. भारत ने रूस से एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने का करार किया है. रूस हमेशा से भी भारत का भरोसेमंद दोस्त और रक्षा उपकरणों का सप्लायर रहा है.

इतना ही नहीं, अमेरिका का यह भी कहना है कि ईरान से भारत तेल न खरीदे, लेकिन भारत के लिए ऐसा करना मुश्किल काम है. इसकी वजह यह है कि भारत सबसे ज्यादा तेल ईरान से ही खरीदता है.  भारत चाहता है कि अमेरिका उसको  ईरान से तेल खरीदने की छूट दे. इससे पहले एक बार ट्रंप प्रशासन इस मुद्दे पर झुक चुका है और भारत को ईरान से तेल खरीदने की छूट दे चुका है, लेकिन एक बार फिर से उसका मिजाज बदल रहा है.

अब पीएम मोदी के सामने इन तमाम मुद्दों पर अमेरिका को साधना चुनौतीपूर्ण है. वैसे मोदी सरकार को उम्मीद है कि वह अमेरिका के साथ रिश्तों को मजबूत बनाने और इन मुद्दों को सुलझाने में सफल होगी. हालांकि यह तो वक्त ही बताएगा कि पीएम मोदी अमेरिकन प्रोटेक्शनिज्म के चक्रव्यूह को तोड़ने में कितना सफल हो पाते हैं?

इससे पहले विदेश मंत्री जयशंकर प्रसाद अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो से मुलाकात में साफ कह चुके हैं कि भारत अपने हितों का भी ख्याल रखेगा और अमेरिका के साथ मिलकर काम करेगा. इसके अतिरिक्त अमेरिका लगातार H-1 वीज़ा के नियमों में बदलाव कर रहा है, जिससे भारतीय प्रभावित हो रहे हैं. ऐसे में भारत की यह भी मांग है कि अमेरिका इसमें भारत की जरूरतों का ख्याल रखे और उनको पूरा करे.

अपर मुख्य सचिव से लेकर सचिव स्तर तक के IAS अफसरों को जिलों का प्रभार

मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव से लेकर सचिव स्तर तक के आईएएस अधिकारियों को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारी सौंप दी है। भोपाल के प्रभारी सचिव मनोज श्रीवास्तव, इंदौर की गौरी सिंह, ग्वालियर के डाॅ. राजेश राजौरा और जबलपुर के प्रभारी सचिव आईसीपी केशरी होंगे। मुख्य सचिव एसआर मोहंती ने इसके आदेश बुधवार को जारी कर दिए।  इन अधिकारियों को अब प्रभार वाले जिले में नियमित भ्रमण करना होगा। कम से कम दो माह में एक बार तो जाना ही पड़ेगा।

प्रभारी सचिवों की सूची  नाम पद व प्रभार वाला जिला

मनोज श्रीवास्तव एसीएस भोपालगौरीसिंह एसीएस इंदौरआईसीपी केशरी एसीएस जबलपुरवीरा राणा एसीएस राजगढ़मोहम्मद सुलेमान पीएस होशंगाबादजेएन कंसोटिया पीएस विदिशाविनोद कुमार पीएस टीकमगढ़डॉ. राजेश राजौरा पीएस ग्वालियरएसएन मिश्रा पीएस रीवाअश्विनी कुमार राय पीएस मंदसौरमलय श्रीवास्तव पीएस बैतूलअजीत केसरी पीएस उज्जैनपंकज राग पीएस बड़वानीअशोक शाह पीएस शहडोलमनोज गोविल पीएस छिंदवाड़ाअशोक वर्णवाल पीएस सागरप्रमोद अग्रवाल पीएस मुरैनामनु श्रीवास्तव पीएस शाजापुरपंकज अग्रवाल पीएस खरगौनकेसी गुप्ता पीएस श्योपुरनीलम शमीराव पीएस शिवपुरीसंजय दुबे पीएस भिंडनीरज मंडलोई पीएस देवासअनुपम राजन पीएस गुनाअनिरुद्ध मुखर्जी पीएस रतलामरमेश एस थेटे सचिव निवाड़ीसंजय कुमार शुक्ला पीएस नीमचरश्मि अरुण शमी पीएस सीहोरहरिरंजन राव पीएस खंडवामनीष रस्तोगी पीएस रायसेनदीपाली रस्तोगी पीएस झाबुआडॉ. पल्लवी जैन गोविल पीएस सतनाशिवशेखर शुक्ला पीएस अनूपपुरनीतेश कुमार व्यास आयुक्त सिंगरौलीउमाकांत उमराव सचिव उमरियासी खोंगवार देशमुख आयुक्त नरसिंहपुरफैज अहमद किदवई एमडी दमोहराघवेंद्र कुमार सिंह आयुक्त मंडलासुखवीर सिंह सचिव पन्नागुलशन बामरा सचिव धारमुकेश चंद गुप्ता आयुक्त डिंडोरीविवेक पोरवाल एमडी बालाघाटकवींद्र कियावत संचालक कटनीएमके अग्रवाल आयुक्त अलीराजपुरजयश्री कियावत आयुक्त दतियाएमबी ओझा आयुक्त आगरमालवाएम सेलवेंद्रन सचिव हरदाचंद्रशेखर बोरकर सचिव सिवनीराजीव चंद्र दुबे सचिव अशोक नगरनरेश पाल सचिव सीधीनिशांत बरवड़े आयुक्त छतरपुरज्ञानेश्वर बी पाटिल सचिव बुरहानपुर

मरने के बाद भिखारी के बैग से मिले 3.22 लाख रुपये

आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में एक भिखारी के मरने के बाद उसके बैग से 3.22 लाख रुपये निकले। स्थानीय लोगों का कहना है कि वह दुकानदारों को चिल्लर दिया करता था।

विजयवाड़ा 
अनंतपुर जिले के गुंटकल में मस्तान वली दरगाह के बाहर पुलिसवालों को जो मिला, उसे देखकर उनके होश उड़ गए। यहां लोगों ने पुलिस को सूचना दी कि एक भिखारी की नींद में ही मौत हो गई है। पुलिस ने वहां पूछकर उसकी पहचान जानने के लिए उसके सामान को खंगाला तो उसमें से ढेर सारा चिल्लर और नोट निकले। बाद में जब इन रुपयों की गिनती की गई तो पता चला कि वह भिखारी अपने पीछे 3,22,676 रुपये छोड़ गया था। 

पुलिस ने भिखारी की पहचान बाशा के रूप में की है। वह पिछले 12 साल से दरगाह के बाहर भीख मांग रहा है। पुलिस ने बताया कि उन्हें एक शख्स ने फोन करके बताया कि एक बुजुर्ग भिखारी की दरगाह परिसर के बाहर मौत हो गई। सर्कल इंस्पेक्टर अनिल कुमार और सब-इंस्पेक्टर रामकृष्ण रेड्डी ने कहा कि उन्होंने पहले किसी पहचान पत्र के लिए बाशा का कपड़े का बैग खंगाला। 

बैग से निकले 3.22 लाख रुपये 
उन्हें बैग में पहचान पत्र तो नहीं मिला लेकिन सालों से जमा किए नोट और चिल्लर मिला। पुलिस ने उसके शव को अस्पताल पहुंचा दिया। बाद में बैग के पैसों की गिनती की गई। गिनती में बैग से 3,22,676 रुपये मिले। बाशा ने ये पैसे न कहीं लगाए और न इनका इस्तेमाल किया। स्थानीय लोग कहते हैं कि बाशा दुकानदारों के लिए चिल्लर एजेंट था। उसके पास 500 के नोट के लिए भी छुट्टा होता था। बदले में वह 5 या 1 रुपये ज्यादा लेता था। 

आकाश विजयवर्गीय मामले में अमित शाह ने मांगी रिपोर्ट, पिटाई का शिकार अधिकारी ICU में भर्ती

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस मामले में अमित शाह ने पूरे घटनाक्रम की सिलसिलेवार रिपोर्ट मांगी है..

इंदौर में एक जर्जर घर को गिराने गए नगर निगम के कर्मचारियों से मारपीट करने वाले बीजेपी विधायक आकाश विजयवर्गीय के मामले में केंद्रीय गृह मंत्री और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने रिपोर्ट मांगी है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस मामले में अमित शाह ने पूरे घटनाक्रम की सिलसिलेवार रिपोर्ट मांगी है.

दूसरी तरफ शुक्रवार को इंदौर के कई हिस्सों में आकाश के समर्थन वाले पोस्टर लगाए गए थे. मीडिया में खबर आने के बाद नगर निगम ने कार्रवाई करते हुए उन पोस्टरों को हटा दिया.
आकाश ने जिस अधिकारी को पीटा, वह आईसीयू में भर्ती
इस बीच यह भी खबर आ रही है कि निगम निगम के जिस अधिकारी को आकाश विजयवर्गीय ने क्रिकेट बैट से सरेआम पीटा था, उनकी तबियत बिगड़ गई है. इसके बाद उन्हें एक निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है. पलासिया क्षेत्र स्थित इस निजी अस्पताल के एक डॉक्टर ने शुक्रवार को इस बात की पुष्टि की. उन्होंने बताया कि नगर निगम के भवन निरीक्षक धीरेंद्र सिंह बायस (46) को गुरुवार देर शाम उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) की शिकायत पर आईसीयू में भर्ती किया गया. डॉक्टर ने बताया कि मरीज की हालत स्थिर बनी हुई है.
निगम अधिकारी की कर दी थी पिटाई
दरअसल बुधवार को इंदौर के गंजी कंपाउंड क्षेत्र में एक जर्जर भवन ढहाने की मुहिम के दौरान हुए विवाद में बीजेपी विधायक आकाश ने नगर निगम के भवन निरीक्षक को क्रिकेट बैट से पीट दिया था. आकाश इस मामले में गिरफ्तारी के बाद न्यायिक हिरासत के तहत स्थानीय जेल में बंद हैं. 26 जून को हुई इस घटना में गिरफ्तार आकाश विजयवर्गीय को 7 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. पिछले दो दिन में यहां की अलग-अलग अदालतें उनकी दो जमानत अर्जियां खारिज कर चुकी हैं.

कमलनाथ सरकार का नया प्रयोग, जिलों में आइएएस को सौंपी कमान, करेंगे यह काम.

होशंगाबाद में मोहम्मद, बैतूल में मलय और हरदा में सेलवेन्द्रन होंगे प्रभारी सचिव, किसी भी आपात स्थिति में रहेगा जिले के फैसले लेने का अधिकार

होशंगाबाद। कमलनाथ सरकार ने प्रभारी मंत्री की तर्ज पर जिले में सीनियर आइएएस अफसरों को जिला सचिव नियुक्त किया है। प्रभारी सचिव अपने जिले में शासन की चलाई जाने वाली योजनाओं की कलेक्टर के ऊपर भी मॉनिटरिंग कर सकेंगे। इसमें भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसरों को प्रभारी सचिव नियुक्त किया गया है। सरकार के कामों में तेजी लाने के लिए यह कवायद की गई है। जिले की प्रशासनिक समन्वय, योजना समीक्षा व फैसलों की कमान इनके हाथ में रहेगी। किसी भी आपात स्थिति में इन सचिवों को अपने जिले के फैसले करने के अधिकार होंगे।

संभाग में यह होंगे प्रभारी सचिव
– होशंगाबाद के लिए 1988 बैच के आइएएस अफसर मोहम्मद सुलेमान को नियुक्त किया गया है। अभी उनके पास आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के प्रमुख सचिव की जिम्मेदारी है।
– बैतूल के लिए 1990 बैच के मलय श्रीवास्तव को प्रभारी सचिव बनाया गया है। वो अभी लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव के तौर पर काम कर रहे हैं।
– हरदा के लिए 202 बैच के आइएएस अफसर एम सेलवेन्द्रन को प्रमुख सचिव बनाया गया है। उन पर अभी सचिव मध्यप्रदेश शासन की जिम्मेदारी है। वो अभी राजस्व विभाग एवं आयुक्त भू-अभिलेखा सहित अन्य महत्वपूर्ण कार्य को देख रहे हैं।

प्रभारी सचिवों के अधिकार व कार्यक्षेत्र
प्रभारी सचिवों को जिले में नियमित भ्रमण करना होगा। कम से कम दो माह में एक बार यह भ्रमण करना जरूरी रहेगा। राज्य सरकार ने प्रभारी सचिव की समीक्षा के विषय भी तय किए हैं। जिसमें किसान कर्ज माफी, फसल की खरीदी और उसके भुगतान, नगरीय व ग्रामीण इलाकों में पेयजल की स्थिति, खाद-बीज की उपलब्धता, वनाधिकार पट्टों, तेंदूपत्ता संग्रहण, स्कूल शिक्षा विभाग से जुड़े साइकिल वितरण व रिक्त पदों की समीक्षा, आंगनबाड़ी, शासन की बड़ी योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, पोषण आहार, चिकित्सा में डॉक्टरों की उपस्थिति व उपलब्धता, सड़क निर्माण, मनरेगा, गौशाला, शौचालयों के कामों, जिला सरकार और खनिज नीति के क्रियान्वयन की समीक्षा कर सकेंगे।