PM Modi के इस फैसले से 10 गुना ज्यादा कटेगा चालान, कार के मालिक पर चलेगा क्रिमिनल केस

नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की सरकार सड़क हादसों को रोकने के लिए जल्द नया बिल ला सकती है, जहां  ट्रैफिक नियमों को तोड़ने पर 10 गुना ज्यादा चालान कटेगा। दरअसल रिपोर्ट्स के मुताबिक सड़क परिवहन और हाइवे मंत्रालय की तरफ से Motor Vehicles के अमेंडेंट बिल को जल्द राज्यसभा में पेश किया जा सकता है। अगर यह बिल पास हो जाता है तो चालान के सभी नियम बदल जाएंगे। नय बिल में जिन बातों पर जोर दिया गया है उनमें पहले के मुकाबले 10 गुना ज्यादा जुर्माना, पीड़ितों को ज्यादा मुआवजा और चुनिंदा मामलों में कार के मालिक के खिलाफ क्रिमिनल केस शामिल हैं। तो जानते हैं कि पीएम मोदी (PM Narendra Modi) की अगुवाई वाली Modi 2.0 में सड़क नियमों को लेकर क्या बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं,

दरअसल Motor Vehicles Act, 1988 के अमेंड बिल को सरकार जल्द राज्यसभा में पेश कर सकती है। यह बिल पहले ही लोकसभा में पास हो चुका है। हालांकि, इसे राज्यसभा में पास कराने को लेकर सरकार के सामने कई चुनौतियां हैं, जिनमें सबसे बड़ी चुनौती बिल को बहुमत से पास कराने की है।

ET Auto की रिपोर्ट के मुताबिक लोकसभा में पास हुआ बिल ही राज्यसभा में लाया जाएगा, जहां लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के लिए आधार (Aadhaar) को अनिवार्य किया जा सकता है। इसके अलावा रिपोर्स्स के मुताबिक इस बिल में पर्यावरण के साथ यातायात वाहनों की ऑटोमेटेड फिटनेस टेस्टिंग को लेकर भी बदलाव देखने को मिल सकते हैं। ET Auto की रिपोर्ट के मुताबिक अगर यह बिल पास होता है, तो फाइन की सीमा 1 लाख रुपये तक जा सकती है, जिसे राज्य सरकारों की तरफ से 10 गुना तक बढ़ाया जा सकता है।

मप्र / प्रॉपर्टी गाइडलाइन दर 20% घटाई, रजिस्ट्री शुल्क 2.2% बढ़ा

भोपाल .रियल एस्टेट को मंदी से उबारने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में सरकार ने प्रदेश में प्रॉपर्टी की कलेक्टर गाइडलाइन (बाजार दर) 20 फीसदी घटा दी है।

प्रदेश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब कलेक्टर गाइडलाइन घटाई गई हो। इसके साथ ही सरकार ने रजिस्ट्री शुल्क 2.2 प्रतिशत बढ़ा दिया। पहले यह शुल्क 7.3 फीसदी था, जो अब 9.5 फीसदी होगा। जबकि इस पर नगरीय क्षेत्र में पहले की तरह ही 3 फीसदी अतिरिक्त शुल्क लगता रहेगा। सरकार का तर्क है कि इससे जनता की जेब पर भार नहीं बढ़ेगा। बल्कि प्रॉपर्टी खरीदने-बेचने वालों को फायदा होगा।

रजिस्ट्री बढ़ेगी, जिससे खजाने में ज्यादा रेवेन्यू आएगा :कैबिनेट ने नई कलेक्टर गाइड लाइन को मंजूरी देते हुए महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए भी फैसला लिया। अब पुत्री और पत्नी को प्रापर्टी में सह भागीदार बनाए जाने पर स्टाम्प शुल्क 1000 रुपए और पंजीयन फीस 100 रुपए देना होगा। वाणिज्यिककर विभाग के प्रमुख सचिव मनु श्रीवास्तव का कहना है कि कलेक्टर गाइडलाइन समेत अन्य फैसलों को एक सप्ताह के भीतर लागू कर दिया जाएगा।

गाइड लाइन से ज्यादा कीमत होने पर जमा करना होगा शुल्क

– अचल संपत्ति के हस्तांतरण में यदि गाइड लाइन से अधिक मूल्य है तो अंतर के मूल्य पर 2.1 फीसदी शुल्क देय होगा। नगरीय क्षेत्र में यह 3 फीसदी अतिरिक्त शुल्क देय होगा। यदि गाइड लाइन के अनुसार कीमत 30 लाख है और अचल संपत्ति बेची गई 34 लाख रुपए में तो इस पर अंतर के 4 लाख रुपए का 8400 रुपए शुल्क देना होगा।
– पारिवारिक विभाजन में स्टाम्प शुल्क की वर्तमान दर 2.5 को घटाकर 0.5 प्रतिशत कर दिया गया है। ताकि परिवार में आंतरिक बंटवारों को सुगम बनाया जा सके।
– परिवार के मध्य चल संपत्ति की कीमत पर अभी 2.5 स्टाम्प शुल्क तथा पंजीयन शुल्क 0.8 फीसदी है। इन्हे घटाकर 500 रुपए अधिकतम सीमा के साथ 1 प्रतिशत तथा 100 रुपए की अधिकतम सीमा के साथ 0.8 फीसदी किया गया है।
– नगरीय निकाय क्षेत्र में कृषि भूमि के मामले में एक हजार वर्गमीटर तक प्लाट के मान से तथा बाकी भूमि कृषि अनुसार मूल्यांकन के प्रावधान में बदलाव किया गया है। अब 400 वर्गमीटर तक प्लाट के मान से, अगले 300 वर्गमीटर के लिए प्लाट के 80 फीसदी तथा अगले 300 वर्गमीटर के लिए 60 प्रतिशत अनुसार मूल्यांकन का प्रावधान रखा गया है, तथा बाकी भूमि पूर्व की तरह कृषि दरों पर मूल्यांकित की जाएगी।
– पुराने बने मकानों के मामले में नई व्यवस्था के अनुसार दस से बीस फीसदी पुराने मकान के लिए 10 प्रतिशत इसके आगे प्रत्येक 5 वर्ष के लिए 5 प्रतिशत, अधिकतम 50 फीसदी रहते हुए मूल्य में छूट दी जाएगी। जबकि पूर्व में यह छूट 20 से 50 साल पुराने मकानों के लिए 10 प्रतिशत तथा पचास साल से पुराने मकानों के लिए 20 प्रतिशत थी।

किसे-क्या फायदा?
सरकार को : रजिस्ट्री की सालाना ग्रोथ 25 से 30 फीसदी बढ़ने का अनुमान। इससे एक हजार करोड़ रु. अतिरिक्त रेवेन्यू बनेगा।
रियल एस्टेट : प्रॉपर्टी न केवल बिकेंगी, बल्कि लोग उसका पंजीयन भी कराएंगे। चैन रजिस्ट्री में भी लोग रुचि दिखाएंगे।

तमिलनाडु के बाद मप्र बना दूसरा राज्य :तीन साल पहले तमिलनाडु सरकार ने कलेक्टर गाइडलाइन कम करने का पहला प्रयोग किया था। तब 30 फीसदी तक दर को कम किया गया तो रजिस्ट्री में 31 फीसदी की ग्रोथ मिली। मप्र दूसरा राज्य है, जिसने यह प्रयोग किया है।

कैबिनेट के अन्य महत्वपूर्ण निर्णयकृषक हित में निर्णय
– शून्य प्रतिशत ब्याज पर लिए गए अल्पकालीन फसल ऋण की अदायगी की तारीख 28 मार्च से बढ़ाकर 15 जून कर दी गई है।
– राज्य/जिला सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों के शेष कर्मचारियों के संविलियन की तारीख 31 दिसंबर कर दी गई है। पहले यह अवधि 31 मार्च 2019 थी।
– ड्रग रेग्यूलेटरी सिस्टम को सुदृढ़ बनाने के लिए इंदौर, जबलपुर एवं ग्वालियर में खाद्य एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं का निर्माण किया जाएगा।
– हर साल 3 दिसंबर को अधिवक्ता दिवस मनाए जाने का फैसला। इस दिन गैस कांड की बरसी की तारीख होने से इसमें परिवर्तन किया जा सकता है।
– छिंदवाड़ा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस के लिए 1184.85 करोड़ की स्वीकृति। पहले चरण में 620 बिस्तर का अस्पताल भवन, 293 बिस्तरीय सुपर स्पेशियालिटी ब्लॉक, 200 बिस्तरीय कार्डियक सेंटर बनाया जाएगा।
– महाविद्यालयीन छात्रावास योजना में 15 नवीन महाविद्यालयीन छात्रावास खोले जाने के लिए 917.52 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई।

महिलाओं को पारिवारिक संपत्ति में हिस्सेदार बनाने पर सिर्फ 1100 रु. फीस, पारिवारिक विभाजन में स्टाम्प शुल्क की दर भी घटी

गाइडलाइन कम होने के फायदे
शहरी इलाके में रजिस्ट्री शुल्क

कलेक्टर गाइडलाइन 30 लाख रु. के हिसाब सेपुरानी दर 10.3 फीसदी – 3 लाख 9 हजार रुपएकलेक्टर गाइडलाइन 20 फीसदी कम होने यानी 24 लाख रुपए के हिसाब सेनई दर 12.5 फीसदी – 3 लाख रुपएग्रामीण इलाके में रजिस्ट्री शुल्ककलेक्टर गाइडलाइन 30 लाख रुपए के हिसाब सेपुरानी दर 7.3 फीसदी – 2 लाख 19 हजार रुपएकलेक्टर गाइडलाइन 20 फीसदी कम होने यानी 24 लाख रुपए के हिसाब सेनई दर 9.5 फीसदी – 2 लाख 28 हजार रुपए

तीन तरीके… जिनसे हम प्रॉपर्टी की बाजार दर कम होने के फैसले को आसानी से समझ सकते हैं..

1 कलेक्टर गाइडलाइन के हिसाब से यदि किसी प्रॉपर्टी की कीमत 30 लाख रुपए है। बेचने वाला इस प्रॉपर्टी पर खरीदार से 20 लाख ही लेता है। साफ है कि खरीदार को 10 लाख रुपए का फायदा हुआ, लेकिन प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री उसे 30 लाख रुपए पर ही करनी होगी। कलेक्टर गाइडलाइन 20 फीसदी कम होने से 30 लाख की प्रॉपर्टी कलेक्टर गाइडलाइन के हिसाब 24 लाख रुपए आंकी जाएगी और रजिस्ट्री भी इसी दर पर होगी।

2 बाजार दर-सेल वैल्यू के बीच के अंतर की राशि पर प्रॉपर्टी बेचने वाले को (दो साल के भीतर प्रॉपर्टी की बिक्री पर) शाॅर्ट टर्म कैपिटल गैन की उस समय की दर यानी इंडेक्स के आधार पर टैक्स लगेगा। लांग टर्म (प्रॉपर्टी दो साल बाद बेचने पर) कैपिटल गैन टैक्स 20% देना पड़ता है। अब बाजार दर और सेल वैल्यू के बीच की राशि भी कम होगी, फायदा विक्रेता को होगा। यानी 30 लाख की प्रॉपर्टी 20 लाख में बेचने पर अंतर की राशि 10 लाख पर विक्रेता को कैपिटल गैन टैक्स देना होगा। गाइडलाइन कम होने पर उसे 24 लाख के हिसाब से 4 लाख पर ही टैक्स देना पड़ेगा।

3 क्रेता या खरीदार ने बाजार दर से कम में जो प्रॉपर्टी खरीदी है, उसमें हुए लाभ पर आयकर विभाग अन्य सोर्स से हुई आय मानकर 30% टैक्स वसूलता है। गाइडलाइन कम होने से क्रेता को यह टैक्स भी कम देना पड़ेगा। उदाहरण के लिए बाजार दर के हिसाब से 30 लाख की प्रॉपर्टी को 20 लाख में खरीदने पर जो 10 लाख रु. का फायदा क्रेता को हाेता है, उस पर आयकर विभाग 30% टैक्स वसूलता है। गाइडलाइन कम होने पर उसे 24 लाख रुपए के हिसाब से अब 4 लाख रु. पर ही टैक्स देना होगा।-

सिर्फ पत्नी और बेटी को सह स्वामी बनाने पर छूट :सिर्फ पत्नी और बेटी को ही पारिवारिक संपत्ति में सह स्वामी बनाने पर स्टाम्प शुल्क 1000 रुपए तथा फीस 100 रुपए देनी होगी। यानी सिर्फ 1100 रुपए खर्च होेंगे। इसी संपत्ति में पुत्र को हिस्सेदार बनाया जाता है तो जमीन की कीमत का 1.8 फीसदी शुल्क जमा करना होगा। यदि 30 लाख की प्रापर्टी है तो उस पर लगभग 32,400 रुपए शुल्क जमा करना होगा।

कैबिनेट में सिंधिया समर्थक मंत्रियों के लिए सीएम से तकरार तकरार

भोपाल .कैबिनेट की बैठक में बुधवार को आयु सीमा और तबादलों के मुद्दे पर पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर और कमलनाथ समर्थक सुखदेव पांसे आपस में उलझ गए। दोनों के बीच तीखी तकरार हुई। दरअसल तोमर जब अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए तो पांसे ने बीच में टोकते हुए कहा कि पहले मैं अपनी बात रखूंगा।

इस पर तोमर बिफर गए और पांसे से उलझ गए। बात इतनी बढ़ी कि तोमर ने मुख्यमंत्री कमलनाथ से कह दिया- सीएम साहब, अब एेसा नहीं चलेगा। आपको हमारी भी सुनना पड़ेगी। मुख्यमंत्री ने दोनों मंत्रियों को फटकारते हुए बैठने को कहा। उन्होंने बाकी मंत्रियों से भी कहा कि बारी-बारी से अपनी बात कहिए। कैबिनेट में जब तोमर भड़के तो उनके समर्थन में सिंधिया कैंप के अन्य मंत्री इमरती देवी, महेंद्र सिंह सिसौदिया भी आ गए। ये सभी अपने विभागों के अफसरों के अड़ियल रवैये से नाराज हैं। कैबिनेट में करीब सवा घंटे तक इन्हीं मुद्दों पर माहौल गरम रहा। शेष|पेज 9 पर

इस खींचतान को दो दिन पहले हुई सिंधिया समर्थक मंत्रियों की डिनर डिप्लोमेसी से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें मंत्रियों ने नाराजगी जाहिर की थी कि सरकार में उनकी बात नहीं सुनी जा रही।

शिक्षकों के तबादले : स्कूल शिक्षा मंत्री प्रभुराम चौधरी ने शिक्षकों के ऑनलाइन तबादलों पर आपत्ति जताई। कहा- तबादले आॅफलाइन हों। उनके पास मंत्रियों, विधायकों, कार्यकर्ताओं और प्रदेश भर के शिक्षकों के आवेदन आ रहे हैं। उन पर सुनवाई नहीं हो पा रही है। जल संसाधन मंत्री हुकुम सिंह कराड़ा ने तो कह डाला कि स्कूल शिक्षा क्या सभी विभागों में आॅफ लाइन ट्रांसफर किए जाएं। इस पर विभाग के अफसरों ने बताया कि हर एक शिक्षक शहर में ट्रांसफर चाहता है, गांवों में कोई नहीं जाना चाहता। इसलिए ऑनलाइन व्यवस्था ही जारी रखी जाए।

मप्र / भोपाल में युवक गुहार लगाता रहा, सीने में दर्द हो रहा है फिर भी पुलिस पीटती रही… आखिर निकल गई जान


भोपाल. बैरागढ़ पुलिस की कस्टडी में मंगलवार देर रात प्रॉपर्टी डीलर शिवम मिश्रा की मौत हो गई। शिवम अपने दोस्त गोविंद पोरिल के साथ खाना खाने ढाबे पर जा रहे थे। लालघाटी से आगे बीआरटी कॉरिडोर में उनकी एसयूवी रेलिंग से टकरा गई। पुलिस दोनों को थाने ले आई। वहां उन्हें इतना पीटा कि शिवम की जान चली गई। बैरागढ़ टीअाई समेत पांच पुलिसकर्मियों को संस्पेंड किया गया है।

पुलिस बताने को तैयार नहीं थी कि शिवम को कहा ले गए..गोविंद ने बताया कि मैं और शिवम ढाबे पर खाना खाने जा रहे थे। लालघाटी से आगे बीआरटी कॉरिडोर में एसयूवी रेलिंग से टकरा गई। पुलिसवाले हमें जबरन चौकी ले गए। यहां खूब पीटा। फिर बैरागढ़ थाने ले आए। यहां फिर पिटाई शुरू कर दी। शिवम बोलता रहा कि सीने में दर्द हो रहा है। किसी ने नहीं सुनी।

चेयरमैन प्री मानसून की पहली तेज बारिश 19 घंटे में गिरा 26.8 मिलीमीटर पानी

ग्वालियर
प्री- मानसून में बुधवार को पहली बार तेज बारिश हुई। इसके चलते शहर में सुबह 4 बजे से लेकर रात 11.30 बजे तक (19 घंटे में) 26.8 मिमी बारिश दर्ज की गई। दिन का पारा सामान्य से 15.6 डिग्री नीचे आकर 25.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जो शिमला के बराबर है। इन दिनों सामान्य तापमान 41 डिग्री रहता है। मौसम विभाग के मुताबिक ग्वालियर में 11 साल बाद 19 जून सबसे ठंडा दिन रहा। 

बुधवार तड़के 4 बजे से बारिश का सिलसिला शुरू हुआ जो रुक-रुक कर देर रात चलता रहा। इस दौरान 26.8 मिमी बारिश दर्ज की गई। इसे मिलाकर जून में प्री-मानसून की अब तक कुल 35.8 मिमी बारिश हो चुकी है। जबकि 2018 में इस दौरान 40.6 मिमी बारिश हुई थी। यह बारिश भी सिर्फ एक ही दिन 9 जून को ही हुई थी। 

11 साल बाद जून सबसे ठंडा, 9.8o लुढ़का पारा 

स्थान : जयेंद्रगंज राजीव प्लाजा के सामने, समय : रात 10.08 बजे। 

उत्तरी मप्र के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बनने से अंचल में हुई बारिश 

मौसम विज्ञानी उमाशंकर चौकसे के मुताबिक वायु चक्रवात के असर से मौसम में बदलाव आया। वायु चक्रवात गुजरात से दक्षिण राजस्थान की तरफ मुड़ गया है। इससे उत्तरी मप्र के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना है। अंचल की तरफ पर्याप्त नमी आ रही है। इसी के चलते बारिश हुई है। 

आज भी गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना 

मौसम विज्ञानी डीपी दुबे के अनुसार ग्वालियर-कोटा व जयपुर के ऊपर चक्रवात बना हुआ है। जिससे गुरुवार को भी ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। 

राजस्थान : बस छह फीट पानी में फंसी, 4 घंटे में सभी 40 यात्रियों को बचाया 

राजस्थान के चित्ताैड़गढ़ में पांच घंटे में ही 8 इंच पानी बरस गया। इससे रेलवे पुलिया के नीचे रात ढाई बजे इंदौर से जोधपुर जा रही ट्रैवल्स बस 6 फीट पानी में फंस गई। इसमें 40 यात्री थे। आपदा टीम की मदद से 4 घंटे में सभी को बचा लिया। 

अशोक गेहलोत हो सकते हैं कांग़ेस के नये अध्यक्ष अटकलें

पिछले काफी समय से कांग्रेस के अध्यक्ष पद को लेकर लगाए जा रहे कयास पर अब विराम लगने के संकेत मिल रहे हैं. खबर है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत को राहुल गांधी की जगह पर पार्टी के नए अध्यक्ष की कमान सौंपी जा सकती है. कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक पार्टी ने अशोक गहलोत के नाम पर मोहर लगा दी है और अब बस औपचारिक ऐलान किया जाना ही बाकी है. हालांकि अभी तक ये साफ नहीं हो सका है कि अशोक गहलोत अकेले कांग्रेस अध्यक्ष होंगे या उनकी मदद के लिए कई कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाए जाएंगे. कांग्रेस की ओर से अशोक गहलोत के नाम की चर्चा के बाद अब ये भी साफ हो गया है कि कांग्रेस का नया अध्यक्ष गांधी परिवार से नहीं होगा.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस बहुत जल्द अध्यक्ष पद के नाम का ऐलान कर सकती है. कांग्रेस ने अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत के नाम पर हामी भर दी है. गहलोत ने बुधवार को राहुल गांधी को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनसे पार्टी प्रमुख बने रहने का आग्रह भी किया था, लेकिन राहुल गांधी अब पार्टी के अध्यक्ष पद पर बने नहीं रहना चाहते हैं. राहुल गांधी ने पहले ही साफ कर दिया था कि उनकी जगह पर प्रियंका गांधी के नाम पर भी विचार नहीं किया जाएगा.

गौरतलब है कि मोदी सरकार हमेशा से कांग्रेस को वंशवाद के मुद्दे पर घेरा है और चुनावों में इसका फायदा भी उसे मिलता रहा है. ऐसे में राहुल गांधी चाहते हैं कि इस बार पार्टी का अध्यक्ष गैर गांधी परिवार का नेता हो, जिससे यह मुद्दो हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा.

एक-डेढ़ साल तक अध्यक्ष पद से दूर रहेंगे राहुल

सूत्रों के मुताबिक, राहुल अगले एक से डेढ़ साल तक कांग्रेस अध्यक्ष पद से दूर रहेंगे, बताया जा रहा कि कांग्रेस के बड़े नेताओं ने ही ये बीच का रास्ता राहुल गांधी के लिए निकाला है. इस दौरान राहुल गांधी बिना किसी पद के देशभर में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे. वहीं, नए कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव को लेकर जल्द ही कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक जल्द बुलाई जा सकती है.

अगले एक साल तक क्या करेंगे राहुल गांधी

राहुल के जिद के आगे झुके कांग्रेस नेताओं ने ये बीच का रास्ता निकाला है, जिसमें राहुल गांधी की बात भी रह जाए और कांग्रेस का अध्यक्ष पद भी खाली न रहे. राहुल बिना किसी जवाबदेही के देशभर में घूमकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मिलकर संवाद कर सकते हैं. वह बिना पद के मोदी सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ खुल कर आलोचना कर पायेंगे. पद नहीं रहने पर सत्ता पक्ष के निशाने पर कांग्रेस अध्यक्ष होंगे न कि राहुल गांधी. इस प्रयोग के साथ राहुल गांधी उन राज्यों के ज्यादा समय दे सकेंगे जहां कांग्रेस जमीन पर खत्म हो चुकी है.

सिंधिया को गांव से मिले कम वोट तो मंत्री कर रहे हैं परेशान

किसानों का कहना है कि स्थानीय विधायक व श्रम मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया की वजह से उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है.

मध्य प्रदेश के बमोरी विधानसभा क्षेत्र के किसानों ने कमलनाथ सरकार के मंत्री पर गंभार आरोप लगाए हैं. किसानों का कहना है कि स्थानीय विधायक व श्रम मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया की वजह से उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है. आरोप है कि लोकसभा चुनाव में गुना से कांग्रेस प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया को गांव से कम वोट मिले थे जिसके बाद गांव के लोगों को परेशान किया जा रहा है.

दरअसल, बल्लापुर गांव के अन्नदाता अपनी जमीन के सीमांकन को लेकर भटक रहे हैं. किसानों का आरोप है की उनकी ज़मीन का सीमांकन जानबूझकर नहीं किया जा रहा है. जबकि किसानों के द्वारा सीमांकन की फीस पूर्व में जमा कराई जा चुकी है.

तहसीलदार और पटवारी को लौटाया-

किसानों के अनुसार गांव में सीमांकन के लिए तहसीलदार और पटवारी आए थे. लेकिन, राजस्व अमले को स्थानीय विधायक व श्रम मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया ने अमले को उलटे पांव वापस लौटने का आदेश दे दिया. जिसके बाद अधिकारी सीमाकंन किए बगैर लौट गए. अब वे कार्यालय-कार्यालय भटक रहे हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है.

वोट नहीं तो योजनाओं का लाभ नहीं-

ग्रामीणों का कहना है कि उनके साथ दोहरा व्यवहार किया जा रहा है. गांव वालों पर आरोप लगाए जा रहे हैं की उन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया को वोट नहीं दिया. “वोट नहीं तो योजनाओं का लाभ नहीं” की तर्ज़ पर उन्हें परेशान किया जा रहा है. पहले ही किसान क़र्ज़ माफ़ी की योजना का लाभ अन्नदाता को नहीं मिल पाया है, ऐसे में किसानों को सरकारी योजनाओं से बंचित किया जा रहा है.

सिंधिया की हार से नाराज हैं मंत्री-

किसानों ने कमलनाथ कैबिनेट के मंत्री महेंद्र सिसोदिया पर सीधे आरोप लगाते हुए कहा है कि उनकी वजह से ही गांव को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित किया जा रहा है. लोकसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया हार गए हैं, जिससे मंत्री जी नाराज हैं. इसलिए अब गांव के लोगों को परेशान किया जा रहा है.

कलेक्टर से की शिकायत-

किसानों ने मामले की शिकायत कलेक्टर भास्कर लाक्षाकार से भी की है. जिसके बाद कलेक्टर ने खुद गांव पहुंचकर वस्तुस्थिति से अवगत होने की बात कही है.

2030 तक पेयजल हो जाएगा समाप्त: रिपोर्ट नीति आयोग

नीति आयोग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि साल 2030 तक भारत की 40 प्रतिशत आबादी के पास पेयजल की कोई सुविधा नहीं होगी.

नीति आयोग ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि अगर हम जल संरक्षण नहीं करते हैं तो साल 2030 तक पेयजल नहीं बचेगा. दूसरे शब्दों में कहें तो अगर आज बचत शुरू नहीं की तो 2030 तक पीने के पानी की एक-एक बूंद के लिए लोग तरस जाएंगे. साथ ही रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद सहित 21 भारतीय शहर 2020 तक भूजल से बाहर निकल जाएंगे, जिससे लगभग 100 मिलियन लोग प्रभावित होंगे.

40% आबादी को नहीं मिलेगा पीने का पानी 

आयोग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि साल 2030 तक भारत की 40 प्रतिशत आबादी के पास पेयजल की कोई सुविधा नहीं होगी. ऐसे में यह रिपोर्ट सरकार और आम जनता के लिए चिंता की बात बन गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि चेन्नई में तीन नदियां, चार जल निकाय, पांच आर्द्रभूमि और छह जंगल पूरी तरह से सूख चुके हैं. बता दें कि चेन्नई में किसी भी अन्य मेट्रो शहरों की तुलना में बेहतर जल संसाधन और बारिश होती है, तब वहां का यह हाल है.

2030 तक पेयजल समाप्त हो जाएगा

ध्यान देने वाली बात यह है कि यदि साल 2030 तक पेयजल समाप्त हो जाएगा तो हम अपने बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के लिए क्या छोड़ेंगे? क्योंकि प्यास को सिर्फ पानी ही बुझा सकता है. चाहे धनी आदमी हो या फिर गरीब सबकी प्यास पैसों से नहीं बल्कि पानी से ही बुझती है.

पानी की करें बचत 

राष्ट्रीय जल अकादमी के पूर्व निदेशक मनोहर खुशलानी ने कहा है कि यह सरकार और देश के लोगों की सामूहिक जिम्मेदारी है कि वे पानी की बचत करें और भूजल स्तर बढ़ाने में योगदान दें. बता दें कि खुशलानी वर्तमान में इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी दिल्ली में प्रोफेसर हैं. उन्होंने ‘इरीगेशन प्रैक्टिस एंड डिजाइंड इन फाइव वाल्यूम’ नामक किताब भी लिखी है.

वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का करें उपयोग

बताते चलें कि पेजल संचय करना बहुत मुश्किल और महंगा नहीं है. बहुत ही सरल तरीके से वर्षा जल को संचित किया जा सकता है. कोई इसे आसानी से समूह हाउसिंग सोसाइटी या व्यक्तिगत रूप से कर सकता है. इसके लिए हमें जिम्मेदार बनाना होगा. साथ ही वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का उपयोग भी करना होगा. यदि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी छोड़ना चाहते हैं तो उसकी बर्बादी को रोकना होगा.

चुनाव खत्म होते ही बिजली विभाग ने शुरु किया उपभोक्ताओं को लूटना, कमलनाथ सरकार के वादे हवा हुये.

जागरूक उपभोक्ता बोले आमजन को जानने का है अधिकार की हर माह कितने यूनिट का थमाया जा रहा है बिल

शिवपुरी बिजली बिलों को लेकर उपभोक्ता पहले से ही परेशान हैं। बिजली कंपनी आए दिन उपभोक्ताओं को मनमाने बिल थमा रही है। कई तरह के चार्ज बिल में जोड़ तो दिए जाते हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि आखिर यह पैसा किस चीज का उपभोक्ता के बिल में जोड़ा जा रहा है। बिजली कंपनी का यह कारनामा सालों से चल रहा है। जिससे केवल घरेलू उपभोक्ता ही परेशान हैं। इसकी वजह यह है कि ऊर्जा प्रभार, नियत प्रभार और विद्युत शुल्क के नाम पर उपभोक्ताओं से जो राशि वसूली जा रही है। उसके संबंध में उपभोक्ता तक को मालूम नहीं है कि यूनिट चार्ज के अलावा किस बात के लिए इतनी मोटी रकम वसूली जा रही है जिससे उपभोक्ताओं को हर माह हजारों का चूना लग रहा है। मोटे मोटे बिलों के बोझ से दबे हुए उपभोक्ता अपना बिल लेकर बिजली कंपनी के कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं हैं।

हर माह वसूली जा रही 10 फीसदी से अधिक राशि

शहर के जागरूक उपभोक्ता शैलेन्द्र तायल ने जब पड़ताल की तो पता चला कि बिजली कंपनी हर माह उपभोक्ताओं से ठगी करने में जुटी है। उपभोक्ता शैलेन्द्र ने बताया कि हर माह बिल में 40 से 50 रुपए उपभोक्ता से ज्यादा लिए जा रहे हैं। उनका कहना है कि कितनी यूनिट पर कितनी रेट लगाई है इसे बिल में स्पष्ट किया जाए साथ ही नियत प्रभार कितना जोड़ा है इसे स्पष्ट करें और विद्युत शुल्क पर कितनी प्रतिशत राशि जोड़ी गई है। इसका भी बिल में उल्लेख किया जाना चाहिए। जबकि बिल में किसी तरह का कोई उल्लेख नहीं किया जा रहा है।