कमलनाथ सरकार की सकारात्मक पहल


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भूपेन्द्र विकल
भोपाल।भाजपा के 15 साल के शासन के खिलाफ ‘वक्त है बदलाव का’ नारा देकर सत्ता में आई कमलनाथ सरकार में प्रशासनिक सुधारों को लेकर तेजी से काम चल रहा है। मध्य प्रदेश के प्रशासक मुखिया मुख्य सचिव सुधि रंजन मोहंती के नेतृत्व में लगातार इस बात को लेकर मंथन और चिंतन चल रहा है कि किस तरह से सरकार के कामों को तेज गति के साथ जनता तक पहुंचा कर उन्हें उनका फायदा दिया जा सके।

दरअसल, मुख्यमंत्री कमलनाथ के निर्देशों के अनुरूप मुख्य सचिव मोहंती ने सभी जिला कलेक्टरो को निर्देश दिए हैं कि जनहित से संबंधित जाकर कामों को जिला स्तर पर ही निराकरण किया जाए यानी अब लोगों को काम निपटाने के लिए भोपाल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। कलेक्टर को दिए गए इन निर्देशों का असर साफ तौर पर सीएम हेल्पलाइन और जन समस्या निवारण जैसी हेल्पलाइनो मे होने वाली शिकायतो की संख्या में आई भारी कमी से साफ तौर पर दिखता है।

मुख्य सचिव ने साफ कर दिया है कि यदि किसी भी स्तर पर कोई भी गड़बड़ी पाई गई तो संबंधित कलेक्टर सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे। वल्लभ भवन में भी होने वाली बैठकों में अब अधिकारी महसूस करने लगे हैं कि अब केवल कोरे प्रेजेंटेशन और आंकड़ों की बाजीगरी के बजाय हकीकत ही पेश करनी होगी क्योंकि खुद मुख्यमंत्री कमलनाथ और मुख्य सचिव मोहंती बहुत बारीकी के साथ हर विभाग की समीक्षा करते हैं और विभाग की एक समानांतर समीक्षा उनके पास पहले से मौजूद रहती है।

.पिछले दिनों हुई समीक्षा बैठकों में यह बात साफ तौर पर सामने आई। इसके साथ ही कैबिनेट की बैठकों में आने वाले अनावश्यक मुद्दों को भी संबंधित विभाग के स्तर पर ही निपटाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि कैबिनेट के सामने केवल नीतिगत निर्णय पेश हो सकें। सरकार की वचन पत्र को तेजी के साथ पूरी तरह से लागू करने की दिशा में प्रशासन का ही रवैया सचमुच एक सकारात्मक पहल है।
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र‍ियल लाइफ में कैसे प‍िता हैं सनी देओल, बेटे करण ने खोला राज

बॉलीवुड एक्शन हीरो सनी देओल ने इंडस्ट्री में एक सफल पहचान बनाई, गुरदासपुर से लोकसभा चुनाव जीतकर वो सांसद बन गए हैं. इसी के साथ उनकी राजनीत‍िक पारी की शुरुआत हो गई है. लेकिन पर्सनल लाइफ में सनी देओल कैसे प‍िता है ये राज पहली बार उनके बेटे करण देओल ने खोला. करण का अपने दादा धर्मेंद्र और पापा सनी देओल दोनों संग र‍िश्ता बेहद खास है. हालांकि करण कभी इस बारे में चर्चा नहीं करते लेकिन एक इंटरवयू में उन्होंने पापा सनी देओल संग अपने खास र‍िश्ते के बारे में बताया. 

करण देओल ने डीएनए से खास बातचीत में बताया, ‘बहुत से लोग अपने सुपरहीरो को अपने मॉडल में सर्च करते हैं. लेक‍िन मेरे ल‍िए मेरे पापा ही सबकुछ हैं. मैंने उन्हें ज‍िंदगी के कई उतार-चढ़ाव में देखा है, उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी. हर बार पूरी ताकत से लड़ते रहे.’ 

करण ने बताया, ‘पापा ने हमेशा मोट‍िवेट किया है कि हारो मत, फाइट करो करण ने बताया कि जब भी मुझे लगता है लाइफ में कुछ ठीक नहीं हो रहा है. सब वैसा नहीं जा रहा है जैसा होना चाह‍िए तो मैं उन मुश्किल भरे द‍िनों को याद करता हूं. 

करण ने कहा, ‘जब मैं बच्चा था, चीजें उतने बेहतर ढ़ग से नहीं समझ सकता था. उस वक्त मेरी आंखों में आंसू होने पर पापा मेरे पास आते मुझे फाइट करने को कहते. उन्होंने स‍िखाया कभी पीछे मत देखो. ये मत सोचो कि क्या हो रहा है. बस अपना बेस्ट दो. करण ने कहा, मेरे पापा ही मेरे सुपरहीरो हैं. 

करण देओल अपने दादा धर्मेंद्र के बेहद करीब हैं. सोशल मीड‍िया पर दादा धर्मेंद्र और पापा सनी देओल संग स्पेशल बॉन्ड को द‍िखाती कई तस्वीरें करण ने शेयर की हैं. 

करण जल्द बॉलीवुड में कदम रखने जा रहे हैं. देखना ये होगा कि देओल पर‍िवार के सुपरस्टार्स धर्मेंद्र, सनी देओल और बॉबी देओल के बाद फैंस का इस नए सदस्य के लिए कैसा र‍िस्पांस होता है. 

राज्यसभा चुनाव की 6 अधिसूचना से कांग्रेस को टेंशन, गुजरात में बिगड़ सकता है खेल

नई दिल्ली 
चुनाव आयोग ने राज्यसभा की खाली हुई 6 सीटों पर 5 जुलाई को चुनाव कराने की घोषणा की है। शनिवार को इसके लिए अधिसूचना जारी हुई, लेकिन इसके साथ ही इसमें पेंच फंस गया है। आयोग ने भले चुनाव की डेट एक ही रखी है, लेकिन हर सीट के चुनाव के लिए अधिसूचना अलग से जारी हुई। इसका सीधा असर गुजरात की दो सीटों पर चुनाव पर पड़ेगा, जिससे कांग्रेस को नुकसान होगा। नोटिफिकेशन पर कांग्रेस ने आपत्ति जताई है और वह सोमवार को सुप्रीम कोर्ट भी जा सकती है। बता दें कि गुजरात में अमित शाहऔर स्मृति ईरानी के लोकसभा में निर्वाचित होने पर दोनों की राज्यसभा सीट खाली हुई है

किस आधार पर अलग-अलग अधिसूचना 
अमित शाह को लोकसभा चुनाव जीतने का प्रमाणपत्र 23 मई को ही मिल गया था, जबकि स्मृति इरानी को 24 मई को मिला। इससे दोनों के चुनाव में एक दिन का अंतर हो गया। इसी आधार पर आयोग ने राज्य की दोनों सीटों को अलग-अलग माना है, लेकिन चुनाव एक ही दिन होंगे। ऐसा होने से अब दोनों सीटों पर बीजेपी को जीत मिल जाएगी क्योंकि वहां प्रथम वरीयता वोट नए सिरे से तय होंगे। अगर एक साथ चुनाव होते तो कांग्रेस को एक सीट मिल जाती। 

कांग्रेस को क्या नुकसान 
गुजरात की दोनों सीटों पर अगर एक साथ एक ही बैलट पेपर पर चुनाव हुए तो कांग्रेस को उसपर जीत मिल सकती है। वहीं विधायकों की संख्या के हिसाब से अगर चुनाव अलग-अलग बैलट पर होंगे तो जीत बीजेपी की होगी। संख्या बल के हिसाब से गुजरात में राज्य सभा का चुनाव जीतने के लिए उम्मीदवार को 61 वोट चाहिए। एक ही बैलट पर चुनाव से उम्मीदवार एक ही वोट डाल पाएगा। इस स्थिति में कांग्रेस एक सीट आसानी से निकाल लेती क्योंकि उसके पास 71 विधायक हैं। लेकिन चुनाव आयोग की नोटिफिकेशन के मुताबिक, विधायक अलग-अलग वोट करेंगे। ऐसे में उन्हें दो बार वोट करने का मौका मिलेगा। इस तरह बीजेपी के विधायक जिनकी संख्या 100 से ज्यादा है वे दो बार वोट करके दोनों उम्मीदवारों को जितवा सकते हैं। 

बीजेपी एस. जयशंकर को राज्यसभा भेजेगी 
चुनाव आयोग के कार्यक्रम से विवाद भी शुरू हो गया है। कांग्रेस ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की धमकी दी है। सूत्रों के अनुसार इस मामले में पार्टी सोमवार को कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। कांग्रेस गुजरात से पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को दोबारा राज्यसभा भेजना चाहती थी। उनका टर्म समाप्त हो गया है, लेकिन जिस तरह से कार्यक्रम तय हुए हैं, उस हिसाब से कांग्रेस के लिए स्थिति कठिन हो गई है। वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि पूर्व में भी ऐसे मामले आए हैं, जब इस तरह से चुनाव हुए हैं। गुजरात की दो सीटों में से एक सीट पर बीजेपी विदेश मंत्री एस. जयशंकर को राज्यसभा भेजेगी। 

जिन 6 सीटों पर चुनाव होंगे, उनमें गुजरात की दो सीटों के अलावा बाकी चार सीट में एक बिहार से है, जहां से रामविलास पासवान को मौका मिल सकता है। बाकी तीन सीट ओडिशा की है। 

ग्वालियर / स्मार्ट सिटी: इंदाैर के लिए एसी स्लीपर बस शुरू, ट्रेन के मुकाबले सस्ती और दो घंटे कम लेगी

ग्वालियर. स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन ने नौ महीने बाद पहली बार लंबी छलांग लगाते हुए इंदाैर शहर के लिए बस सेवा शुरू कर दी है। ग्वालियर-इंदाैर के बीच दाे एसी स्लीपर काेच बसें शुरू की गईं हैं। एक जाएगी और दूसरी आएगी। रात साढ़े नौ बजे रवाना होने वाली 32 बर्थ वाली यह बस सुबह साढ़े आठ बजे इंदौर पहुंचेगी। शनिवार को बस की सभी बर्थ फुल हो गईं। दरअसल, यह बस 11 घंटे में इंदौर पहुंचाएगी। जबकि इंटरसिटी एक्सप्रेस 13 घंटे लेती है।

बस का किराया 650 रुपए है। वहीं ट्रेन में एसी थर्ड का किराया 850 रुपए है। कार्पोरेशन ने सिंतबर 2019 में पहली बस सेवा ग्वालियर से शिवपुरी के बीच शुरू की थी। इसके बाद ग्वालियर-गुना, ग्वालियर-दतिया के बीच बसें चलाई गईं। अब कार्पोरेशन का फोकस सिटी बसें बढ़ाने पर रहेगा।

इंदाैर के लिए राेजाना एक ट्रेन, 15 स्लीपर बसें

ग्वालियर से इंदाैर के यात्रा का सुगम साधन इंदाैर इंटरसिटी एक्सप्रेस के अलावा वे 15 स्लीपर काेच बसें हैं, जाे वीडियाेकाेच बस स्टैंड एवं अन्य जगहाें से यात्री बैठाती हैं। लेकिन स्मार्ट सिटी की बस सेवा से यात्रियाें काे ज्यादा सहूलियत हाेगी। क्याेंकि यह बस रात 9.30 बजे चलकर 8.30 बजे इंदाैर पहुंचाएगी। जबकि ट्रेन शाम 7.30 बजे रवाना हाेकर 8.30 बजे इंदाैर पहुंचती है। इस तरह बस से इंदाैर जाने पर आपके 2 घंटे बचेंगे।

टाइम टेबल और किराया

ग्वालियर से इंदौर: रात 9:30 बजे डीबी मॉल के पास स्थित बस स्टैंड से रवाना होगी। यह बस सुबह 8.30 बजे इंदाैर पहुंचेगी।इंदाैर से ग्वालियर: रात 9:30 बजे रवाना हाेकर सुबह 8:30 बजे ग्वालियर आएगी।किराया: ग्वालियर से इंदौर जाने वाली स्लीपर कोच बस का किराया दो कैटेगरी में लिया जा रहा है। बस के अंदर दो बर्थ एकसाथ जुड़ी रहती हैं।उसकी एक बर्थ का किराया 650 रुपए है। जबकि दूसरी तरफ की सिंगल बर्थ का किराया 750 रुपए तय किया गया है।

सहयोग नहीं मिलने से ऑपरेटर खफा, बसें सरेंडर करने की चेतावनी दी
एक तरफ इंदौर की बस सेवा शुरू कर दी गई है। वहीं दूसरी तरफ बस ऑपरेटर सावंत सिंह स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन से नाराज है। ग्वालियर-शिवपुरी और ग्वालियर-गुना बस सेवा में आए दिन विवाद की स्थिति होने का स्थाई निराकरण नहीं होने से ऑपरेटर बसें सरेंडर करने की तैयारी में हैं। सावंत का कहना है कि हमारी सुनवाई नहीं हो रही है। इस कारण नुकसान हो रहा है। ऐसे में बसें चलाना मुश्किल है, इसलिए मैं अब बसों को सरेंडर करने की तैयारी कर रहा हूं।

उज्जैन से भी ग्वालियर के लिए बस सेवा शुरू, साढ़े दस घंटे में आएगी
उज्जैन नगर निगम ने उज्जैन से ग्वालियर के बीच एसी बस सेवा की शुरूआत की है। यह बस उज्जैन से 8:30 बजे चलकर अगले दिन सुबह 7 बजे ग्वालियर आ रही है। यहां से रात्रि 8:30 बजे चलकर सुबह 7 बजे उज्जैन पहुंच रही है। गौरतलब है कि महाकालेश्वर महादेव के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में अंचल से यात्री उज्जैन जाते हैं।

इंदाैर के लिए दो बसें शुरू अब सिटी सेवा पर जोर
हमने ग्वालियर-इंदौर के बीच दो बसें चला दी हैं। दोनों स्लीपर कोच बसें एसी हैं। इसके बाद अब सिटी बस सेवा पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा, जिससे शहरवासियों को फायदा मिले। -महीप तेजस्वी, सीईओ स्मार्ट सिटी कार्पोरेशन

चंबल के बीहड़ में गुलजार है संसद भवन की प्राचीन प्रतिकृति वाला मंदिर

मध्यप्रदेश के भिंड मुरैना क्षेत्र में चंबल घाटी के बीहड़, भले ही डाकुओं की शरणस्थली के रूप में कुख्यात हैं, लेकिन इसी बीहड़ पट्टी के एक गुमनाम इलाके में गुलजार है संसद भवन की प्रतिकृति। जी हां, हम बात कर रहे हैं, सियासी कोलाहल से दूर, चंबल घाटी के वीराने में मौजूद ‘चौंसठ योगिनी मंदिर की। हकीकत में तो यह शिवालय है, लेकिन भारतीय लोकतंत्र के मंदिर अर्थात दिल्ली स्थित संसद भवन की इमारत इसी मंदिर की हूबहू प्रतिकृति है।

लोकतंत्र के महापर्व के रूप में चल रहे आमचुनाव में शरीक होने वाले इस क्षेत्र के तमाम उम्मीदवार संसद भवन पहुंचने की हसरत पूरी करने के लिये इस मंदिर की दहलीज पर भी मत्था टेकने आते हैं। मुरैना से भाजपा उम्मीदवार और केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर सहित तमाम अन्य नेता इस फेहरिस्त में शामिल हैं।
तोमर कहते हैं कि मुरैना के मितावली गांव में स्थित चौंसठ योगिनी मंदिर ही नहीं बल्कि यहां आसपास के इलाके में मौजूद ऐतिहासिक महत्व के अन्य विरासत स्थल, अभी भी दुनिया की नजरों से ओझल हैं। इन्हें विश्व पटल पर लाने के लिये इस इलाके को यूनेस्को विश्व विरासत सूची में लाने की योजना प्रस्तावित है। उन्होंने बताया कि पुरातत्व विभाग के भोपाल और दिल्ली क्षेत्र के पूर्व प्रमुख के. के. मोहम्मद की देखरेख में इन मंदिरों का 2005 में जीर्णोद्धार किया गया था। इस हकीकत को भी वह स्वीकार करते हैं कि मोहम्मद के सेवानिवृत्त होने के बाद यह काम अंजाम तक नहीं पहुंच पाया है।
मोहम्मद ने समाचार एजेंसी भाषा को बताया कि चंबल घाटी के दुर्गम इलाके में महज पांच किलोमीटर के दायरे में मौजूद दो गांव, मितावली और पढ़ावली में एक हजार साल पुराने ऐतिहासिक महत्व के विरासत स्थल मौजूद हैं। किसी जमाने में विदेशी आतताईयों के विध्वंस की मार इन विरासत स्थलों ने झेली। फिर जमींदोज होती ये इमारतें चंबल के दुर्दांत डाकुओं की पनाहगाह होने के कारण सहेजी नहीं जा सकीं और अब, अवैध खनन के बारूदी धमाके इनकी दरकती दीवारों को हिला रहे हैं।
मोहम्मद ने बताया कि करीब सात सौ साल पहले, 1323 ई. में जब राजा देवपाल ने तंत्र साधना के शिक्षा केन्द्र के रूप में चौंसठ योगिनी मंदिर का निर्माण कराया होगा, तब दूर दूर तक किसी के जेहन में यह बात नहीं रही होगी कि 20वीं सदी में ब्रिटिश वास्तुकार एडवर्ड लुटियन, इस मंदिर के वास्तुशिल्प को भारत के लोकतंत्र के मंदिर में हूबहू उकेरेंगे। ऊबड़ खाबड़ रास्तों से यहां आने वाले सैलानियों को मितावली पहुंचते ही लगभग 200 फुट ऊंची पहाड़ी पर निर्मित यह मंदिर, दूर से संसद भवन की याद दिला देता है।

देश के वरिष्ठ पुरातत्ववेत्ता मोहम्मद ने बताया कि इस बारे में इतिहासकारों में दो मत हैं कि संसद भवन, इस मंदिर की प्रतिकृति है। एक वर्ग मानता है कि रायसीना हिल पर निर्मित भारतीय सत्ता के केन्द्र के रूप में संसद भवन, राष्ट्रपति भवन और नॉर्थ ब्लॉक, साउथ ब्लॉक का वास्तुशिल्प यूरोप की रोमन वास्तुकला से प्रभावित है। जबकि दूसरा वर्ग मानता है कि इंपीरियल दिल्ली (नयी दिल्ली) के शिल्पकार एडवर्ड लुटियन और हर्बर्ट बेकर की जोड़ी ने इसके डिजाइन में भारतीय और पश्चिमी वास्तुकला के मिश्रण की साफ झलक पेश की है।
मोहम्मद का दावा है कि संसद भवन का डिजाइन चौंसठ योगिनी मंदिर से प्रभावित है। संसद भवन की दीवारों पर अंकित वैदिक मंत्र इस बात के प्रमाण हैं कि इसके वास्तुशिल्प में ब्रिटिश वास्तुकारों ने भारतीय भवन निर्माण कला का पूरा ध्यान रखा। मोहम्मद ने बताया कि मुरैना के चंबल क्षेत्र में छठी शताब्दी से 15 वीं शताब्दी तक गुर्जर प्रतिहार वंश के तमाम महत्वपूर्ण ऐतिहासिक विरासत स्थल मौजूद हैं। इन्हें सहेजने का काम 2004 तक चला। इसके बाद उन्होंने मितावली, पढ़ावली और बटेसर को जोड़कर विश्व विरासत क्षेत्र (वर्ल्ड हेरिटेज जोन) बनाने की योजना को आगे बढ़ाया था।

ऐतिहासिक स्थलों के पुनरुद्धार और चंबल के डकैतों का पुनर्वास करते हुये इस क्षेत्र को वैश्विक पर्यटन मानचित्र में शुमार करने वाली इस योजना को अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा के सहयोग से शुरु किया गया। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में सबसे प्राचीन स्थल बटेसर है, जहां छह से नौवीं शताब्दी के बीच लगभग 200 मंदिरों का भव्य परिसर उत्खनन में मिलने के बाद, 2004 तक 80 मंदिरों का जीर्णोद्धार किया गया। इसके पास ही मौजूद गढ़ी पढ़ावली गांव में 10वीं शताब्दी के शिव मंदिर मिले। इनमें सिर्फ एक मंदिर का जीर्णोद्धार हो सका। मंदिर में मौजूद सैकड़ों कामुक भित्ति चित्रों के कारण इस मंदिर को ‘मिनी खजुराहो भी कहते हैं ।

पढ़ावली के पास गुर्जर शासक देवपाल द्वारा निर्मित चौंसठ योगिनी मंदिर वस्तुत: तंत्र विद्या का शिक्षा केन्द्र था। इस वृत्ताकार इमारत में शिव जी के 64 मंदिर मौजूद हैं। इनमें तंत्र शास्त्र की 64 योगिनियों के साथ शिव की प्रतिमायें मौजूद हैं। अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुराग गुर्जर ने बताया कि पूरे क्षेत्र को विश्व विरासत क्षेत्र के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना को प्रधानमंत्री कार्यालय से संस्कृति मंत्रालय को भेजा जा चुका है। अभी तक यह मंत्रालय के पास विचाराधीन है। और खामियों से रूबरू कराते हैं।

मायूसी भरे अंदाज में जसवंत कहते हैं कि दुर्दांत डाकू निर्भय गूजर, मलखान सिंह, पुतली बाई और सुल्ताना डाकू तो अब नहीं रहे, लेकिन इस युग के खनन माफिया इस विरासत के लिये नये खतरे के रूप में उभरे हैं। जसवंत सिंह को 19 साल से मोहम्मद की योजना के परवान चढ़ने का इंतजार है।

भोपाल पहुंचे मिर्ची बाबा आज लेंगे जल समाधि भारी पुलिस बल तैनात


भोपाल।बाबा बैराग्यानंद उर्फ मिर्ची बाबा आज दो बजे जल समाधि लेने वाले है। इसके लिए वे भोपाल पहुंच चुके है। हालांकि कलेक्टर ने उन्हें अनुमति नही दी है बावजूद इसके बाबा बैराग्यानंद ने आज कटोरा तालाब में दोपहर 2 बजे जल समाधि लेने का फैसला किया है। जल समाधि लेने से पहले बाबा बैराग्यानंद भोजपुर मंदिर में भोलेनाथ के दर्शन करेंगे। भोपाल पहुंचने के बाद बाबा की सुरक्षा बढ़ा दी गई है, हालांकि भारत-पाक मैच के चलते वैस ही एमपी अलर्ट पर है।

वही मीडिया से चर्चा के दौरान बाबा बैराग्यानंद ने कहा कि मैं समाधि लूंगा… समाधि लूंगा…आज दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर भोपाल के तालाब में समाधि लूंगा। आज कलेक्टर से मिलूंगा पहले पूछुंगा उन्होंने मुझे  समाधि लेने की अनुमति क्यो नही दी, उसके बाद में जल समाधि लूंगा।इस दौरान बाबा ने आरोप भी लगाए कि उन्हें फोन पर  धमकी दी जा रही है। मेरे पास प्रमाण है, मैं जिंदा रहा तो इसकी शिकायत करूँगा।
बाबा ने कहा कि उनका समाधि लेना तो उसी दिन तय हो गया जब दिग्विजय सिंह जैसा हिंदू हार जाता है। मैं अपने संकल्प पर दृण निश्चय हूं और मैं समाधि लूंगा।मैंने जो दिग्विजय सिंह के लिए जो संकल्प लिया है, उस पर कायम हूं। मैं जल समाधि लेने के लिए भोपाल आया हूं। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से अनुमति न मिलने को लेकर आज वो कलेक्टर से मिलेंगे।अगर फिर भी अनुमति नहीं तो भी मैं जल समाधि लूंगा।
इससे पहले वैराग्यानंद बाबा के वकील सैयद माजिद अली की तरफ से शनिवार को भोपाल कलेक्टर को एक आवेदन देकर बताया गया है कि बाबा रविवार सुबह विमान से राजा भोज एयरपोर्ट पहुंचेंगे। इसके बाद दर्शन करने के लिए भोजपुर जाएंगे, जहां वे शिव मंदिर मे पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद दोपहर 12 बजे भोपाल कलेक्टर से मिलकर समाधि का निर्णय लेंगे।कलेक्टर को दिए आवेदन में लिखा गया है कि ‘स्वामीजी के साथ कोई अप्रिय घटना न घट जाए इसके लिए विमान तल से भोजपुर और भोजपुर से कलेक्टर कार्यालय तक सुरक्षा के इंतजाम किए जाएं’।

ये है पूरा मामला

बता दे कि महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्यानंद वही मिर्ची बाबा हैं, जिन्होंने दिग्विजय सिंह की जीत के लिए  साढ़े 5 क्विंटल लाल मिर्च का यज्ञ किया था और  कहा था कि अगर दिग्विजय सिंह नहीं जीते तो वह यज्ञ कुण्ड में जीवित समाधि ले लेंगे, लेकिन दिग्विजय बीजेपी की साध्वी प्रज्ञा से तीन लाख से ज्यादा वोटों से हार गए। वही नतीजों के बाद से ही बाबा अंडर ग्राउंड हो गए है।किसी को उनके बारे मे कोई खबर नही थी। सोशल मीडिया पर भी बाबा ट्रेंड करने लगे है और लोगों ने उन्हें खोजना शुरु कर दिया। खास बात तो ये थी कि कुछ यूजर्स ने तो पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज को ही उनका पता करने को कह दिया था।हालांकि रमजान के महिने में  उन्हें यूपी में एक रोजा इफ्तार पार्टी में देखा गया था।इसके बाद कुछ लोगो ने बाबा का ढूंढकर लाने वाले को एक लाख रुपए देने का ऐलान भी किया गया था। बाबा का एक आडियो भी वायरल हुआ था जिसमें बाबा ने उनकी जलसमाधी का सवाल पूछने पर युवक को डांट दिया था।  हालांकि बाद में महामंडलेश्‍वर वैराज्ञानंद गिरी उर्फ मिर्ची बाबा पर निरंजनी अखाड़े ने कार्रवाई करते हुए उनसे अखाड़े के महामंडलेश्वर की पदवी को छीन कर हुए बाहर का रास्ता दिखा दिया था। लेकिन इन सब सुर्खियों के बीच अब बाबा वापस लौट आए है और अपना वादा पूरा करने का ऐलान किया है।

स्थानीय शिकारियों इस तरह मदद की लापता विमान एएन 32 का मलवा तलाशने में

अरुणाचल प्रदेश के मेचुका पहाड़‍ियों के पास उड़ते समय जब तीन जून को भारतीय वायुसेना का मालवाहक विमान एएन-32 रेडॉर से लापता हुआ तो सुरक्षा बलों को अहसास हो गया था कि उन्‍हें अब विकट स्थिति का सामना करना होगा। विमान की ढूंढने का काम, कुछ इस तरह से था जैसे भूसे के ढेर से सुई को तलाश करना। यही नहीं उन्‍हें यह भी पता था कि केवल तकनीक के जरिए बचाव अभियान या विमान को तलाश करना संभव नहीं होगा। वायुसेना ने विमान की तलाश के लिए अपने अत्‍याधुनिक निगरानी विमान लगाए लेकिन सफलता अंतत: स्‍थानीय शिकारियों के हाथ लगी। 

विमान लापता होने के एक दिन बाद कायिंग गांव के टी यूबी ने उसे तलाश करने का ऑफर दिया। टी यूबी को स्‍थानीय लोग टार्जन के नाम से बुलाते हैं। यूबी जब 40 के दशक में थे तब उन्‍होंने शिकार और मछली पकड़ने के परंपरागत तरीके को अपनाया था। वह बयोर पर्वत श्रेणी के इंच-इंच से वाकिफ हैं। इसी वजह से उन्‍हें ग्रामीण टार्जन के नाम से बुलाते हैं। 

सियांग जिले के कायिंग सर्कल के अतिरिक्‍त सहायक आयुक्‍त पुमेक रोन्‍या ने कहा, ‘हमने यूबी को 15 किलो चावल और अन्‍य जरूरी सामान दिए। वह उसी दिन पैदल ही विमान की तलाश के लिए निकल पड़े।’ मेचुका घाटी की ऊबड़ खाबड़ पहाड़‍ियों को देखकर ज्‍यादातर लोगों का उत्‍साह ठंडा पड़ जाएगा लेकिन अदि समुदाय से ताल्‍लुक रखने वाले यूबी आगे बढ़ते रहे। बता दें कि अदि समुदाय के लोग अरुणाचल के छह पहाड़ी जिलों में रहते हैं। 

तलाशी अभियान में सात जून को सफलता मिली 

स्‍थानीय शिकारियों और पुलिस तथा आर्मी के लोगों की दो टीमें यूबी के बैकअप के लिए भेजी गईं। तलाशी अभियान में सात जून को सफलता मिली जिससे पता चला कि सेना और वायुसेना की टीम सही दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि यूबी के बारे में कोई पता नहीं चला। हालांकि प्रशासन को पूरा भरोसा था कि पैदल चल रहे शिकारी वापस आएंगे। 

रोन्‍या ने कहा, ‘ग्रामीण पयून, तद्यूत तसुंग सात जून को कायिंग आए और बताया कि उन्‍होंने विमान को टूटिंग-लोयेर रेंज की ओर जाते देखा था। पयून को कायिंग पैदल आना पड़ा जिसमें एक दिन लग गए। उनके आने का और कोई रास्‍ता नहीं था। फिर भी वे आए।’ उन्‍होंने बताया कि इस सूचना ने तलाशी अभियान को नई दिशा दी। हम इससे पहले विमान की तलाश सियोम के दाहिने किनारे पर कर रहे थे लेकिन विमान का मलबा बाएं किनारे पर पयूम में था।’ 

पयूम से गसेंग तक पहुंचने में पैदल दो दिन लग गए 
इस सूचना के बाद दो स्‍थानीय पर्वतारोही टाका तमूत और किशोन टेकसेंग को तलाशी अभियान में लगाया गया। उन्‍हें पर्वतारोहियों की एक टीम दी गई ताकि बाएं किनारे पर तलाशी अभियान को तेज किया जा सके। स्‍थानीय टीम लगातार आर्मी और और एयरफोर्स को सूचना दे रही थी। तमूत और टेकसेंग ने गांववालों से बात की तो पता चला कि विमान गसेंग गांव की ओर गया था। पयूम से गसेंग तक पहुंचने में पैदल दो दिन लग गए और वे लोग 9 जून को गसेंग पहुंचे। 

रोन्‍या ने बताया कि तमूत और टेकसेंग ने परी अदि पहाड़ के पास विमान के मलबे को देखा और वहां तक चढ़ाई शुरू की। वायुसेना के एक चॉपर ने पर्वतारोहियों को वहां तक पहुंचाया। उन्‍होंने कहा कि विमान का मलबा लिपो से 16 किमी उत्‍तर में मिला जो मेचुका से 70 किमी दूर है। इसी दिशा में स्‍थानीय लोग भी इशारा कर रहे थे। 

स्मैक कारोबारियों पर SP का शिकंजा: आज फिर 90 हजार की स्मैक के साथ 5 आरोपी दबौचे |


शिवपुरी। पूरे जिले में पुलिस अधीक्षक राजेश सिंह चंदेल के आदेशानुसार मादक पदार्थो का अवैध रूप से व्यापार करने वाले व्यक्तियों के विरूद्ध कार्यवाही लगातार की जा रही है। जिसके तहत आज थाना प्रभारी करैरा राकेश शर्मा को मुखबिर सूचना प्राप्त हुई कि एक कार ओमनी मे कुछ व्यक्ति मादक पदार्थ लेकर करैरा तरफ से झांसी की ओर जा रहे है ।

सूचना पर वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी करैरा पुलिस टीम के साथ मुखबिर द्वारा बताये स्थान पर पहुंचे वाहन चैकिंग शुरु की गई । कुछ देर बाद करैरा तरफ से एक ओमनी कार आति दिखी जिसे रोकर पूछ ताछ की गई जिसमे संतुष्टी पूर्ण जबाब न मिलने पर पांचो व्यक्तियो की तलाशी ली गई तो सफेद पाउडर स्मैक बरामद हुआ ।

नाम पता पूछने पर अपने नाम दीपक वंसकार निवासी करैरा, रोहित यादव निवासी दतिया, उमेश त्रिपाठी निवासी करैरा, राकेश योगी निवासी करैरा, सद्दाम उर्फ पप्पू निवासी करैरा होना बताया जिनके कब्जे से लगभग 9.85 ग्राम स्मैक कीमती 90 हजार रु. की जप्ती कर आरोपियों के विरूद्ध एन. डी. पी. एस. एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विधिवत गिरफ्तार किया गया ।

राम मंदिर पर फिर गरमाई सियासत, आज अपने 18 सांसदों के साथ अयोध्या जाएंगे उद्धव ठाकरे

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे रविवार को अपने 18 सांसदों के साथ अयोध्या जा रहे हैं. उनके इस कदम को राम मंदिर निर्माण के लिए मोदी सरकार पर सियासी दबाव माना जा रहा है. वहीं, साधु-संत राम मंदिर निर्माण की मांग को तेज कर दिया है.

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर एक बार फिर से सियासत तेज हो गई है. शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अपने 18 सांसदों के साथ आज रविवार को अयोध्या पहुंच रहे हैं. उनका यह कदम राम मंदिर निर्माण के लिए मोदी सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने के रूप में देखा जा रहा है.

लोकसभा चुनाव से पहले भी उद्धव ठाकरे ने अपने परिवार के साथ अयोध्या का दौरा किया था और राम मंदिर निर्माण को लेकर मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा किया था. अब लोकसभा चुनाव के बाद साधु-संतों के जयकारे के बीच उद्धव ठाकरे खुद भी 16 जून को अपने 18 सांसदों के साथ अयोध्या पहुंच रहे हैं.

जब लोकसभा चुनाव से पहले उद्धव ठाकरे पहली बार अयोध्या पहुंचे थे, तब कहा था कि राम हमारे लिए राजनीति का विषय नहीं हैं. शिवसेना राम के नाम पर कभी वोट नहीं मांगेगी. लोकसभा चुनाव के बाद हम फिर अयोध्या आएंगे. वैसे देखा जाए, तो उद्धव ठाकरे की सियासी विरासत ही अयोध्या से जुड़ी है. हालांकि ये बात अलग है कि उनको इसे अयोध्या यात्रा के साथ संभालने का ख्याल तीन दशक बाद आया.

वहीं, मोदी सरकार और योगी सरकार पर साधु-संत लगातार दबाव बना रहे हैं. इनका कहना है कि मोदी सरकार एक बार फिर से राम मंदिर निर्माण का वादा करके सत्ता में बहुमत से आ गई है. अब केंद्र में मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश में योगी सरकार है, तो राम मंदिर निर्माण में देरी किस बात की? साधु-संत लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार से राम मंदिर बनाने के लिए अध्यादेश तक लाने की मांग कर चुके हैं.

संत समाज के साथ शिवसेना जैसे सियासी सहयोगी दल भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं. ऐसे में अब मंदिर निर्माण के लिए इससे बेहतर सियासी हालात और क्या होंगे? वैसे भी राम मंदिर मुद्दे के सहारे ही बीजेपी ने अपना अलग सियासी वजूद बनाया है. फिलहाल राम मंदिर निर्माण का मामला सुप्रीम कोर्ट में है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद कह चुके हैं कि कोर्ट का फैसला आने के बाद ही सरकार इस मसले पर कोई कदम उठाएगी.

क्या है पूरा मामला?

राम मंदिर मामले को साल 1950 में गोपाल सिंह विशारद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल किया था. इसके जरिए उन्होंने विवादित स्थल पर हिंदू रीति रिवाज से पूजा करने की इजाजत मांगी. इसके बाद साल 1959 में निर्मोही अखाड़ा ने विवादित भूमि पर अपने नियंत्रण की मांग की. निर्मोही अखाड़ा की तरह मुस्लिम सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने भी कोर्ट में विवादित भूमि पर अपना दावा ठोक दिया.

इसके बाद साल 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांट दिया और रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा व सुन्नी वक्फ बोर्ड के बीच को सौंप भी दिया. अब इसी टाइटिल सूट पर आम सहमति के लिए सुप्रीम कोर्ट ने तीन सदस्यों का पैनल बनाया है, जिसे नई समय सीमा के तहत 15 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल करनी है.

यह पैनल इस बात की तस्दीक करेगा कि क्या विवाद से जुड़े पक्षों के बीच आम सहमति बन सकती है. अगर हां, तो इसका फार्मूला क्या होगा? इस तीन सदस्यीय पैनल में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति फकीर मोहम्मद इब्राहिम कलिफुल्ला, आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ वकील श्रीराम पंचु शामिल हैं. इस पैनल की रिपोर्ट के सामने आने के बाद ही पता चल पाएगा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का रास्ता आखिर कैसे बनेगा?