कमलनाथ सरकार ने पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण कोटे में की 13 फीसदी की बढ़ोतरी

मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण कोटे में बढ़ोतरी की है। अब ये कोटा मौजूदा 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव पारित किया गया है।

सोमवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में यह अहम प्रस्ताव पारित किया गया। कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव को विधानसभा के मानसून सत्र में पटल पर रखा जाएगा। 

बता दें कि राज्य में इससे पहले ओबीसी वर्ग के लिए 14 फीसदी का कोटा निर्धारित था। वहीं, अनुसूचित जाति और जनजातियों को 36 फीसदी आरक्षण मिल रहा था। राज्य सरकार की ओर जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में मंत्रिपरिषद ने मप्र लोकसेवा (अनुसूचित-जातियों, अनुसूचित-जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के लिये आरक्षण) संशोधन अध्यादेश-2019 का अनुसमर्थन किया है। 

मालेगांव ब्लास्ट में प्रज्ञा को कोर्ट से राहत नहीं, पेशी में छूट की याचिका खारिज

भोपाल की नवनिर्वाचित सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर को 2008 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में सोमवार को यहां की एक विशेष अदालत में पेश होने से छूट नहीं मिल पाई। प्रज्ञा इस मामले में आरोपी हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी के विशेष न्यायाधीश वी एस पडालकर ने अदालत में पेश होने से छूट के लिए दिए गए प्रज्ञा के आवेदन को ठुकरा दिया। 

आवेदन में प्रज्ञा ने कहा था कि उन्हें संसद से जुड़ी कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी हैं। लेकिन पडालकर ने उनका आवेदन अस्वीकृत करते हुए कहा कि मामले में फिलहाल जो स्थिति है उसमें उनकी उपस्थिति अनिवार्य है। अदालत ने प्रज्ञा को इस सप्ताह पेश होने का आदेश दिया। अदालत ने कहा ”छूट के लिए आवेदन में बताए गए, चुनाव प्रक्रिया पूरी करने संबंधी, नामांकन और अन्य कारणों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

अदालत के अनुसार, आरोपी (प्रज्ञा) ने अदालत में मौजूद रहने की बात कही लेकिन ऐसा करने में नाकाम रही। अदालत ने कहा कि शुरू में पेश होने से छूट दी गई थी। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपना मामला साबित करने के लिए सबूत पुख्ता करने की खातिर गवाहों को बुला रहा है। इसलिए आरोपी की मौजूदगी आवश्यक है।

साथ ही अदालत ने कहा कि अतीत के कई आदेशों में उच्चतम न्यायालय ने निचली अदालतों से ऐसे मामलों का तेजी से निपटारा करने की जरूरत पर जोर दिया है जिनमें राजनीतिक हस्तियां शामिल हैं। मालेगांव मामले में सात आरोपियों के खिलाफ मामले पर सुनवाई कर रही अदालत ने इस साल मई में, सभी को सप्ताह में कम से कम एक बार अपने समक्ष पेश होने का आदेश दिया था। 

अदालत ने कहा था कि ठोस कारण बताए जाने पर ही पेश होने से छूट दी जाएगी। दो सप्ताह पहले अदालत ने प्रज्ञा तथा दो अन्य आरोपियों… लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित और सुधाकर चतुर्वेदी को एक सप्ताह के लिए पेश होने से छूट दी थी।

पायलट को मेरे बेटे की हार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए: अशोक गहलोत

जयपुर
लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बादराजस्थान कांग्रेस में कुछ भी ठीक नहीं है। पार्टी की भीतरी लड़ाई उस समय और आगे बढ़ गई, जब अशोक गहलोत ने कहा कि पार्टी प्रदेश कमिटी के चीफ और सरकार में उनके डेप्युटीसचिन पायलट को उनके बेटे वैभव गहलोत की जोधपुर से हार की भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। हमारे सहयोगी के साथ बातचीत में सचिन पायलट ने इस पर कोई कमेंट करने से इनकार कर दिया, लेकिन गहलोत के इस बयान पर आश्चर्य जताया।

. गहलोत से पूछा गया कि क्या यह सच है कि जोधपुर से आपके बेटे का नाम पायलट ने ही सुझाया था? गहलोत ने कहा, ‘यदि पायलट ने ऐसा किया था तो यह अच्छी बात है। यह हम दोनों के बीच मतभेद की खबरों को खारिज करती है।’

इस बयान में उन्होंने कहा, ‘पायलट साहब ने यह भी कहा था कि वह बड़े अंतर से जीतेगा, क्योंकि हमारे वहां 6 विधायक हैं, और हमारा चुनाव अभियान बढ़िया था। तो मुझे लगता है कि उन्हें वैभव की हार की जिम्मेदारी तो लेनी चाहिए। जोधपुर में पार्टी की हार का पूरा पोस्टमॉर्टम होगा कि हम वह सीट क्यों नहीं जीत सके।’

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें वाकई लगता है कि पायलट को हार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए? सीएम ने कहा, ‘उन्होंने कहा कि हम जोधपुर जीत रहे थे (जोधपुर से), इसलिए उन्होंने जोधपुर से टिकट लिया। लेकिन हम सभी 25 सीट हार गए। इसलिए यदि कोई कहता है कि सीएम या पीसीसी चीफ को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। मेरा मानना है कि यह एक सामूहिक जिम्मेदारी है।’

अपने डेप्युटी के खिलाफ खुलकर पहली बार तब सामने आया, जब पायलट समर्थकों ने सार्वजनिक तौर पर यह कहना शुरू कर दिया कि राज्य में कांग्रेस की हार का कारण सीएम के काम करने का तरीका है।

इस इंटरव्यू में गहलोत ने कहा कि हर किसी को हार की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘यदि कोई जीतता है सब श्रेय मांगते हैं, लेकिन यदि कोई हारता तो कोई जिम्मेदारी नहीं लेता। चुनाव सामूहिक नेतृत्व में पूरे हुए हैं।’

केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने वैभव गहलोत को करीब 4 लाख वोटों के अंतर से हराया है। यहां तक कि गहलोत की विधानसभा सीट सारदापुरा से भी वैभव 19000 वोटों से पीछे रहे। जबकि गहलोत 1998 से वहां से जीतते आ रहे हैं।

गहलोत का इस सीट से हारना इसलिए भी चौंकाने वाला है, क्योंकि गहलोत वहां से 5 बार चुनकर संसद पहुंच चुके हैं।

सपा-बसपा में दरार, माया बोलीं- पत्नी डिंपल तक को नहीं जीता सके अखिलेश

लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी और समाजावादी पार्टी का गठबंधन सफल न हो पाने के बाद मायावती ने एक बैठक की. इस बैठक में उन्होंने इस आशय के संकेत दिए कि आगामी उप चुनाव उनकी पार्टी अकेले लड़ेगी. एक रिपोर्ट के अनुसार मायावती ने बैठक में कहा कि ‘समाजवादी पार्टी के मुखिया अपनी पत्नी डिंपल यादव की जीत तक सुनिश्चित नहीं कर सके.’

23 मई को संपन्न हुए चुनाव में अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव, उत्तर प्रदेश की कन्नौज लोकसभा सीट से चुनाव हार गईं. वह दो बार से कन्नौज से सांसद थीं. उन्हें भारतीय जनता पार्टी के सुब्रत पाठक ने हराया.

सूत्रों के अनुसार मायावती ने लोकसभा चुनाव में गठबंधन की सहयोगी, सपा का यादव वोटबैंक बसपा के पक्ष में स्थानांतरित नहीं होने की दलील देते हुये बैठक में मौजूद पार्टी पदाधिकारियों से कहा कि अब ‘गठबंधनों’ पर निर्भर रहने के बजाय पार्टी का संगठन मजबूत कर बसपा अपने बलबूते चुनाव लड़ेगी. उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में बसपा को जिन सीटों पर कामयाबी मिली उसमें सिर्फ पार्टी के परंपरागत वोटबैंक का ही योगदान रहा.

सूत्रों के अनुसार उन्होंने गठबंधन का अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने के लिये सपा अध्यक्ष अखिलेख यादव की पारिवारिक कलह को भी प्रमुख वजह मानते हुये कहा कि इस कारण से अखिलेश के पारिवारिक सदस्य भी चुनाव नहीं जीत सके. बसपा अध्यक्ष ने यादवों के वोट सपा के पक्ष में एकजुट नहीं हो पाने को इसकी वजह बताया. गौरतलब है कि कन्नौज में अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव और दोनों चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव बदांयू से तथा अक्षय यादव फिरोजाबाद से बीजेपी उम्मीदवारों से चुनाव हार गये.

सूत्रों के मुताबिक मायावती ने दावा किया कि डिंपल को बसपा के वोट तो मिले लेकिन यादवों के वोट ट्रांसफर नहीं हुए.

बसपा के सूत्रों ने यह जानकारी दी कि मायावती ने अखिलेश यादव की सपा के साथ गठबंधन के भविष्य को लेकर सीधे कोई बातचीत नहीं की और पार्टी कार्यकर्ताओं से महज इतना कहा कि जब तक उनका पारिवारिक विवाद समाप्त नहीं हो जाता ‘देखो एवं प्रतीक्षा करो’ की नीति अपनायी जाए.  एक सूत्र ने कहा, ‘न तो उन्होंने सपा या अखिलेश की आलोचना की और न ही यह कहा कि गठबंधन खत्म हो गया.’

सलमान खुर्शीद बोले, राहुल का विकल्प ढूंढ़ना मुश्किल, कांग्रेस जोखिम नहीं ले सकती

हैदराबाद: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने सोमवार को कहा कि पार्टी अध्यक्ष पद के लिए राहुल गांधी का विकल्प ढूंढ़ना मुश्किल है और कांग्रेस उनके पदत्याग का जोखिम नहीं उठा सकती. गांधी ने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद 25 मई को पार्टी कार्यसमिति की बैठक में अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी.

यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस के लिए गांधी का पद पर बने रहना ही एक विकल्प है, पूर्व विदेश मंत्री ने कहा, “मैं यकीनन ऐसा मानता हूं.” खुर्शीद ने कहा, “मैं मानता हूं कि पार्टी ढांचे में बहुत सी चीजें हैं, हम इसे अंतर्निहित कहें या ऐतिहासिक कहें कि उनकी (राहुल) मौजूदगी अत्यंत आवश्यक है, उनका विकल्प ढूंढ़ना असंभव नहीं तो बहुत मुश्किल जरूर है.” 

कांग्रेस नेता ने कहा कि राहुल गांधी जो महसूस करते हैं, वह उसका सम्मान करते हैं. उन्होंने कहा, “मैं यही उम्मीद करता हूं कि जो चीज सभी कार्यकर्ता और अनुयायी (जो उन्हें पद पर बरकरार देखना चाहते हैं) महसूस करते हैं, वह (राहुल) उसका सम्मान करेंगे. हम मानते हैं कि उनके लिए यह बहुत ही मुश्किल, जटिल निर्णय होगा, लेकिन मैं निश्चित तौर पर अपील करूंगा कि वह पद पर बने रहें और हम अपनी समस्याओं का समाधान ढूंढ़ें.” 

20 घंटे से लापता है एयर फोर्स का विमान, अब ढूंढ़ने निकले सुखोई -30 और सी-130

एक हेलीकॉप्टर सर्च टीम ने भारतीय वायुसेना AN-32 का मलबा देखा है. लेकिन इस पर अभी वायुसेना की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई है..

भारतीय वायुसेना के लापता विमान IAF AN-32 की 20 घंटे बाद भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है. कई मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसे दावे किए जा रहे थे कि असम के जोरहाट एयरबेस से अरुणाचल प्रदेश के मेन्चुका के लिए उड़ान भरने वाले भारतीय वायुसेना के विमान IAF AN-32 का मलबा दिखा है. ऐसा बताया गया कि एक हेलीकॉप्टर सर्च टीम ने भारतीय वायुसेना AN-32 का मलबा देखा है. लेकिन इस पर अभी वायुसेना की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई है.

सुखोई निकल सर्च ऑपरेशन में

विमान में सवार 13 लोगों की भी अभी कोई जानकारी नहीं मिली है. इधर जब 20 घंटे बाद भी विमान की कोई जानकारी नहीं हाथ नहीं लगी तो भारतीय वायुसेना ने सर्च के लिएअत्याधुनिक तकनीकी से लैस अपने सुखोई विमान को सर्च के लिए उतार दिया था.

भारतीय वायु सेना ने IAF AN-32 विमान का पता लगाने के लिए एक सुखोई -30 लड़ाकू विमान के अलावा सी -130 स्पेशल ऑप्स विमानों को भेजा गया था.

कहां से गायब हुआ विमान

इस विमान में करीब 13 लोगों के मौजूद होने की जानकारी मिली थी. विमान का ग्राउंड स्टाफ से आखिरी संपर्क करीब एक बजे हुआ था. विमान ने जोरहाट से दोपहर 12:25 बजे उड़ान भरी थी.

क्या है AN-32 विमान की खासियत

AN-32 रूस में निर्मित वायुयान है और वायुसेना बड़ी संख्या में इन विमानों का इस्तेमाल करती है. यह दो इंजन वाला ट्रर्बोप्रॉप परिवहन विमान है. मेन्चुका एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड चीन की सीमा से ज्यादा दूर नहीं है. मेन्चुका एडवांस लैंडिंग ग्राउंड, जहां विमान को उतरना था, को पिछले साल 12 जुलाई को दोबारा शुरू किया गया है. 2013 से ये बंद था.

यह विमान 1984 में सोवियत रूस से खरीदा गया था. जिस समय इसे खरीदा गया था तब विमान की उम्र 25 साल थी. लेकिन समय और ज़रूरत के हिसाब से इस विमान को अपग्रेड किया जा सकता है. भारतीय वायुसेना के पास करीब 100 AN-32 विमान हैं. यह दो इंजन वाला मालवाहक विमान है जो कि पैरा जंप के काम भी आता है. इसकी अधिकतम स्पीड 530 किमी प्रति घंटा है.

19 प्रबुद्ध मुस्लिमों ने लिखा PM को पत्र, अल्पसंख्यकों के प्रति उनके नजरिये को सराहा

नई दिल्ली  कुछ लोग भले ही मोदी सरकार को अल्पसंख्यक खासकर मुस्लिम समुदाय विरोधी बताते हों, लेकिन शिक्षा, समाज व संस्कृति के क्षेत्र में काम कर रहे 19 प्रबुद्ध मुस्लिम लोगों के समूह ने मोदी को पत्र लिखकर अल्पसंख्यकों के प्रति उनके नजरिये की सराहना की है। साथ ही माह-ए- रमजान में सरकार के नए कार्यकाल की सफलता की कामना भी की है।

खास बात यह है कि इस समूह का नेतृत्व करने वाले कमाल फारुखी, उस मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य हैं, जो मोदी सरकार के तीन तलाक पर रोक के फैसले का विरोध कर रहा है। इसी तरह समूह में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव महमूद मदनी, दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष डा. जफरुल इस्लाम खान, प्रोग्रेसिव मुस्लिम सोशल सर्कल जयपुर के अध्यक्ष व पूर्व आइएएस एआर खान, हज कमेटी ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष व दिल्ली के पूर्व मुख्य आयुक्त आयकर कैसर शमीम, वल्र्ड एजुकेशनल एंड डेवलपमेंट के अध्यक्ष व अंजुम इस्लाम मुंबई के सीईओ शबी अहमद, आइआइटीयन व मऊ के मॉर्डन पब्लिक स्कूल के अध्यक्ष शाहिद अनवर, शिक्षाविद व लेखक कलीमुल हाफिज समेत कुल 19 लोग है।

पत्र में 26 मई को सेंट्रल हाल में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस भाषण का जिक्र है जिसमें उन्होंने वोट बैंक की खातिर राजनीतिक दलों द्वारा देश के अल्पसंख्यकों को छलावे में रखकर उन्हें भ्रमित और भयभीत रखने का जिक्र किया गया था। साथ ही शिक्षा व स्वास्थ्य की स्थिति पर चिंता जताते हुए मोदी ने सभी चुने हुए सांसदों से अल्पसंख्यकों का विश्वास जीतने पर जोर दिया है। पत्र में प्रधानमंत्री द्वारा शिक्षा व स्वास्थ्य, कौशल विकास और अल्पसंख्यकों पर हमला करने वालों को सजा दिलाने की मांग की गई है।

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव-2019 में अकेले भारतीय जनता पार्टी ने 542 सीट में से 303 सीटें हासिल की हैं, जबकि सहयोगी दलों के साथ 352 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है। नरेंद्र मोदी 2019 के लोकसभा चुनाव में 2014 से भी मजबूत बनकर उभरे हैं। इस चुनाव में बीजेपी को 37.4 फीसदी वोट मिले हैं, जो पिछली बार से अधिक है। यहां पर बता दें कि चुनावी पंडितों का अनुमान था कि भारतीय मुसलमान प्रधानमंत्री मोदी के पक्ष में मतदान नहीं करेंगे। भाजपा की जीत में अल्पसंख्यकों की भी भागीदारी रही है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता है। किसी भी लोकतंत्र में एक खास चीज होती है जिसे अदृश्य वोट कहा जाता है, जो कई कारणों से खुद को प्रदर्शित नहीं करता। यह बात भारतीय मुसलमानों पर भी लागू होती है। 

बताया जा रहा है कि मुस्लिम राजनीति के केंद्र रहे यूपी, पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, केरल और महाराष्ट्र में यह फैक्टर एक तरह से समाप्त हुआ है। यह बात भी सच के करीब है कि मुस्लिमों ने भी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जन तांत्रिक गठबंधन (NDA) को 2019 के लोकसभा चुनाव में वोट किया है।

मोदी सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में किया बड़ा बदलाव, हिंदी की अनिवार्यता हुई खत्म

नई दिल्ली। सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में बदलाव कर दिया है। अब हिंदी पढ़ने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है। संशोधित मसौदे में त्रिभाषा फार्मूले के तहत छात्र अब कोई भी तीन भाषा पढ़ने के लिए स्वतंत्र होंगे। हालांकि इनमें एक साहित्यिक भाषा जरूरी होगी। पुराने मसौदे में हिंदी, अंग्रेजी के साथ कोई एक स्थानीय भाषा पढ़ने का प्रावधान था।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में यह बदलाव सोमवार को गैर-हिंदी भाषी प्रदेशों, खासकर दक्षिण भारतीय राज्यों, से उठ रहे विरोध के सुर को देखते हुए किया गया है। इसकी शुरुआत तमिलनाडु से हुई थी, जहां द्रमुक सहित कई राजनीतिक दलों ने इसे लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने में जुट गए थे।

द्रमुक के अलावा कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दरमैया, राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने भी इसका विरोध करना शुरू कर दिया था। हालांकि, सरकार ने कहा था कि किसी पर कोई भाषा थोपी नहीं जाएगी। यह अभी एक शुरुआती मसौदा है। सभी पक्षों से सलाह के बाद ही कोई फैसला किया जाएगा।

संशोधित शिक्षा नीति के मसौदे में त्रिभाषा फार्मूले को लचीला कर दिया गया है। अब इनमें किसी भी भाषा का जिक्र नहीं है। छात्रों को कोई भी तीन भाषा चुनने की स्वतंत्रता दी गई है। तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत के राज्यों में पहले से दो भाषा पढ़ाई जा रही है। इनमें एक स्थानीय और दूसरी अंग्रेजी है। हालांकि संशोधित शिक्षा नीति के मसौदे में यह साफ कहा गया है कि स्कूली छात्रों को तीन भाषा पढ़नी होगी।

नई शिक्षा नीति के मसौदे को लेकर यह विवाद तब खड़ा हुआ है, जब सरकार ने इसे 31 मई को जारी कर लोगों से सुझाव मांगे। इसके तहत कोई भी व्यक्ति 30 जून तक अपने सुझाव दे सकता है। शिक्षा नीति के मसौदे को लेकर मिल रहे सुझावों पर प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ मानव संसाधन विकास मंत्रालय और नीति तैयार करने वाली कमेटी भी पैनी नजर रख रही है।

बदलाव का संगीतकार रहमान ने किया स्वागत

जाने-माने संगीतकार एआर रहमान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में बदलाव कर हिंदी की अनिवार्यता खत्म किए जाने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस बदलाव से छात्र अपनी पसंद की भाषा पढ़ने के लिए स्वतंत्र होंगे।

रहमान ने ट्वीट किया, ‘तमिलनाडु में हिंदी अनिवार्य नहीं है। मसौदा नीति को बदल दिया गया है। बेहतर समाधान।’ 

10 जून से 20 जुलाई तक जिले में चलेगा दस्तक अभियान।

शिवपुरी, शिशु एवं बाल मृत्यु दर में कमी लाने हेतु 10 जून से 20 जुलाई तक जिले में शासन की मंशानुरूप प्रथम चरण का दस्तक अभियान शुरू किया जाएगा। इस अभियान के तहत 2 लाख 49 हजार 817 बच्चों को घर-घर जाकर परीक्षण किया जाएगा। प्रभारी कलेक्टर एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री एच.पी.वर्मा की अध्यक्षता में आज दस्तक अभियान की तैयारियों के संबंध में जिला स्तरीय कार्यशाला सम्पन्न हुई। 
जिलाधीश कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ.ए.एल.शर्मा, जिले के अनुविभागीय दण्डाधिकारी शिवपुरी श्री अतेन्द्र गुर्जर, कोलारस श्री आशीष तिवारी, पोहरी श्री मुकेश सिंह, पिछोर श्री यू.एस.सिकरवार, जिला स्वास्थ्य अधिकारी श्री एन.एस.चैहान, डीपीएम डाॅ.शीतल प्रकाश सहित दस्तक अभियान हेतु नियुक्त नोडल अधिकारी एवं खण्डचिकित्सा अधिकारी आदि उपस्थित थे। 
प्रभारी कलेक्टर श्री वर्मा ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि दस्तक अभियान वर्ष में 2 बार चलने वाला अभियान है, वर्ष 2019 का यह पहला अभियान है। इस अभियान के महत्व को समझते हुए इसे सभी अधिकारी गंभीरता से लें। उन्होंने कहा कि इस अभियान के क्रियान्वयन में महिला एवं बाल विकास के मैदानी कर्मचारियों की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि इस अभियान के क्रियान्वयन हेतु 210 दलों का गठन किया गया है। श्री वर्मा ने कहा कि जिले के सभी अनुविभागीय दण्डाधिकारी, बी.एम.ओ. के समन्वय से अपने स्तर पर संबंधित अधिकारियों की बैठक आयोजित करें। इसी प्रकार जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, सरपंच एवं सचिवों की बैठक आयोजित कर दस्तक अभियान की जानकारी प्रदाय कर इस अभियान को सफल बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह करें। उन्होंने बताया कि जिला मुख्यालय पर दस्तक अभियान से संबंधित कंट्रोल रूम का भी निर्धारण किया जा रहा है। ग्राम स्तर के कर्मचारियों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा। 
कार्यशाला के शुरू में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ.ए.एल.शर्मा ने दस्तक अभियान के आयोजन एवं महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 10 जून से 20 जुलाई तक आयोजित दस्तक अभियान के तहत एएनएम आशा कार्यकर्ता एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से जीरो से 5 वर्ष तक के बच्चों का परीक्षण कर 7 विभिन्न प्रकार की गतिविधियां संचालित की जाएगी। जिसमें बीमार, नवजात बच्चों की पहचान करना, पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया की पहचान कर जांच एवं उपचार हेतु रैफर करना, कुपोषित बच्चों की पहचान करना, बच्चों में गंभीर एनिमिया होने पर इसको दूर करना, बच्चों में दस्तरोग पर नियंत्रण हेतु ओआरएस के पैकेट एवं जिंक की गोलिया, गृह भेंट के दौरान देना। 09 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को विटामिन-‘ए’ की खुराक देना। जन्मजात विकृतियों की पहचान करना। समूचित शिशु एवं बाल आहार पूर्ति हेतु समझाईस देना। टीकाकरण से छूटे बच्चों को टीकाकरण की जानकारी देना, आदि की जानकारी से अवगत कराना। इसके लिए शिशु कार्ययोजना तैयार की गई है। इसी कड़ी में आज जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
उन्होंने बताया कि इस अभियान के आयोजन करने का मुख्य उद्देश्य शिशु दर एवं बाल मृत्युदर में कमी लाना है। साथ ही संस्थागत प्रसव और प्रसव उपरांत स्तनपान को बढ़ावा देना है। दस्तक दल द्वारा भ्रमण उपरांत शाम को स्वास्थ्य ग्राम सभा का आयोजन करेंगे। जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी बुलाया जाएगा।