गंगा और मैली हो गई पिछले पांच साल में 3,867 करोड़ रुपये ख़र्च करने के बावजूद मोदी सरकार में और दूषित हुई गंगा: आरटीआई

द वायर को सूचना का अधिकार के तहत मिली जानकारी के मुताबिक पहले की तुलना में किसी भी जगह पर गंगा साफ नहीं हुई है, बल्कि साल 2013 के मुकाबले गंगा नदी कई सारी जगहों पर और ज्यादा दूषित हो गई हैं. जबकि 2014 से लेकर जून 2018 तक में गंगा सफाई के लिए 5,523 करोड़ रुपये जारी किए गए, जिसमें से 3,867 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं.

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अधीन आने वाली संस्था केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा आरटीआई के तहत मुहैया कराई गई सूचना के मुताबिक साल 2017 में गंगा नदी में बीओडी (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) की मात्रा बहुत ज़्यादा थी. इतना ही नहीं, नदी के पानी में डीओ (डिज़ॉल्व्ड ऑक्सीजन) की मात्रा ज़्यादातर जगहों पर लगातार घट रही है.

वैज्ञानिक मापदंडों के मुताबिक स्वच्छ नदी में बीओडी का स्तर 3 मिलीग्राम/लीटर से कम होनी चाहिए. वहीं डीओ लेवल 4 मिलीग्राम/लीटर से ज़्यादा होनी चाहिए. अगर बीओडी लेवल 3 से ज्यादा है तो इसका मतलब ये है कि वो पानी नहाने, धोने के लिए भी सही नहीं है.

बीओडी ऑक्सीजन की वह मात्रा है जो पानी में रहने वाले जीवों को तमाम गैर-जरूरी ऑर्गेनिक पदार्थों को नष्ट करने के लिए चाहिए. बीओडी जितनी ज्यादा होगी पानी का ऑक्सीजन उतनी तेजी से खत्म होगा और बाकी जीवों पर उतना ही बुरा असर पड़ेगा.

डीओ (डिज़ॉल्व्ड ऑक्सीजन) का मतलब है कि पानी में घुली हुई ऑक्सीजन की मात्रा. पानी में मिलने वाले प्रदूषण को दूर करने के लिए छोटे जीव-जंतुओं को ऑक्सीजन की ज़रूरत होती है. अगर डीओ की मात्रा ज़्यादा है तो इसका मतलब है कि पानी में प्रदूषण कम है. क्योंकि जब प्रदूषण बढ़ता है तो इसे ख़त्म करने के लिए पानी वाले ऑर्गनिज़्म को ज़्यादा ऑक्सीजन की ज़रूरत होती है, इससे डीओ की मात्रा घट जातीी है.

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) साल 1980 से भारत की नदियों के पानी की गुणवत्ता की जांच कर रहा है और इस समय ये 2,525 किलोमीटर लंबी गंगा नदी की 80 जगहों पर जांच करता है. इससे पहले सीपीसीबी 62 जगहों पर गंगा के पानी की जांच करता था.

साल 2017 की सीपीसीबी की रिपोर्ट के मुताबिक 80 में से 36 जगहों पर गंगा नदी का बीओडी लेवल 3 मिलीग्राम/लीटर से ज़्यादा था और 30 जगहों पर बीओडी लेवल 2 से 3 मिलीग्राम/लीटर के बीच में था. वहीं साल 2013 में 31 जगहों पर गंगा का बीओडी लेवल 3 से ज़्यादा था और 24 जगहों पर 2 से 3 मिलीग्राम/लीटर के बीच में था.

सीपीसीबी के मापदंडों के मुताबिक अगर पानी का बीओडी लेवल 2 मिलीग्राम/लीटर या इससे नीचे है और डीओ लेवल 6 मिलीग्राम/लीटर या इससे ज़्यादा है तो उस पानी को बगैर ट्रीटमेंट (मशीन द्वारा पानी साफ करने की प्रक्रिया) किए पीया जा सकता है.

वहीं अगर पानी का बीओडी 2 से 3 मिलीग्राम/लीटर के बीच में है तो उसका ट्रीटमेंट करना बेहद ज़रूरी है. अगर ऐसी स्थिति में बगैर ट्रीट किए पानी पीया जाता है तो कई सारी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं.

इसी तरह अगर पानी का बीओडी लेवल 3 से ज़्यादा और डीओ लेवल 5 मिलीग्राम/लीटर से कम है तो वो पानी नहाने के लिए भी सही नहीं है. इस पानी को पीने के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता. हालांकि गंगा नदी के पानी की गुणवत्ता रिपोर्ट के मुताबिक ज़्यादातर जगहों पर पानी की दशा ठीक नहीं है.

सीपीसीबी गंगोत्री, जो कि गंगा नदी का उद्गम स्थल है, से लेकर पश्चिम बंगाल तक गंगा के पानी की गुणवत्ता की जांच करता है.

गंगोत्री, रुद्रप्रयाग, देवप्रयाग और ऋषिकेश में गंगा का पानी शुद्ध है. यहां पर बीओडी लेवल 1 मिलीग्राम/लीटर है और डीओ लेवल 9 से 10 मिलीग्राम/लीटर के बीच में है. हालांकि जैसे-जैसे गंगा आगे का रास्ता तय करती हैं, वैसे-वैसे पानी में प्रदूषण की मात्रा बढ़ती जाती है.

उत्तराखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हरिद्वार में गंगा की हालत बहुत ज़्यादा ख़राब है. यहां के पानी का अधिकतम बीओडी लेवल 6.6 मिलीग्राम/लीटर है, जो कि नहाने के लिए भी सही नहीं है. इसी तरह के हालात बनारस, इलाहाबाद, कन्नौज, कानपुर, पटना, राजमहल, दक्षिणेश्वर, हावड़ा, पटना के दरभंगा घाट इत्यादी जगहों के हैं.

कई सारे जगहों पर साल 2013 के मुकाबले गंगा और ज़्यादा दूषित हुई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में जहां 2013 में गंगा नदी का अधिकतम बीओडी लेवल 5.1 पर था, वहीं साल 2017 में ये बढ़कर 6.1 मिलीग्राम/लीटर पर पहुंच गया है.

इसी तरह साल 2013 में इलाहाबाद का बीओडी लेवल 4.4 था और अब ये बढ़कर 5.7 मिलीग्राम/लीटर पर पहुंच गया है.

साल 2013 में हरिद्वार का बीओडी लेवल 7.8 था और 2017 में यह 6.6 मिलीग्राम/लीटर पर पहुंच गया. इसके अलावा उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ और बुलंदशहर के अलावा पश्चिम बंगाल में त्रिबेनी, डायमंड हार्बर और अन्य जगहों पर भी बीओडी लेवल बढ़ गया है.

साल 2014 से लेकर अब तक में गंगा सफाई के लिए 3,867 करोड़ रुपये ख़र्च किए जा चुके हैं. हालांकि सीपीसीबी की रिपोर्ट बताती है कि साल 2013 के मुक़ाबले कई सारी जगहों पर गंगा के पानी का बीओडी लेवल बढ़ गया है, यानी गंगा और ज़्यादा दूषित हुई है.

भारत सरकार ने गंगा नदी के संरक्षण के लिए मई 2015 में नमामी गंगे कार्यक्रम को मंजूरी दी थी. इसके तहत गंगा नदी की सफाई के लिए दिशानिर्देश बनाए गए थे. जैसे- नगरों से निकलने वाले सीवेज का ट्रीटमेंट, औद्योगिक प्रदूषण का उपचार, नदी के सतह की सफाई, ग्रामीण स्वच्छता, रिवरफ्रंट विकास, घाटों और श्मशान घाट का निर्माण, पेड़ लगाना और जैव विविधता संरक्षण इत्यादि शामिल हैं.

अब तक इस कार्यक्रम के तहत 22,238 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से कुल 221 परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है. इसमें से 17,485 करोड़ रुपये की लागत से 105 परियोजनाओं को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए मंज़ूरी दी गई थी, जिसमें से अभी तक 26 परियोजनाएं ही पूरी हो पाई हैं.

बाकी के 67 परियोजनाओं को रिवरफ्रंट बनाने, घाट बनाने और श्मशान घाट का निर्माण करने और नदी की सतह की सफाई के लिए आवंटित किया गया था, जिसमें से 24 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं.

हालांकि मोदी सरकार द्वारा शुरू की गईं गंगा परियोजानाएं सवालों के घेरे में हैं. दिवंगत पर्यावरणविद् जीडी अग्रवाल मोदी को लिखे अपने पत्रों में ये सवाल उठाते रहे थे कि सरकार द्वारा इन चार सालों में गंगा सफाई के लिए जिन परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है वो कॉरपोरेट सेक्टर और व्यापारिक घरानों के फायदे के लिए हैं, गंगा को अविरल बनाने के लिए नहीं.

इसके अलावा भारत की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) भी गंगा सफाई के लिए शुरू की गईंं परियोजनाओं पर सवाल उठा चुकी है.

साल 2015 में जब जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे भारत आए थे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके साथ बनारस के दशाश्वमेध घाट पर गंगा आरती की थी. (फोटो: पीआईबी)

कैग ने अपनी 2017 की रिपोर्ट में कहा था, ‘भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के साथ समझौता करने के साढ़े छह साल बाद भी स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय मिशन (एनएमसीजी) की लंबी अवधि वाली कार्य योजनाओं को पूरा नहीं किया जा सका है. राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन अथॉरिटी का गठन हुए आठ साल से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन अभी तक एनएमसीजी के पास नदी बेसिन प्रबंधन योजना नहीं है.’

गंगा नदी के पानी की गुणवत्ता का आकलन बीओडी और डीओ लेवल के अलावा उसमें मौजूद फीकल कॉलीफॉर्म और टोटल कॉलीफॉर्म बैक्टीरिया की संख्या, पानी का पीएच अंक और उसके कंडक्टिविटी के आधार पर किया जाता है.

सीपीसीबी के मुताबिक पीने वाले पानी में टोटल कॉलीफॉर्म बैक्टीरिया की संख्या प्रति 100 मिलीलीटर पानी में 50 एमपीएन (सबसे संभावित संख्या) या इससे कम और नहाने वाले पानी में 500 एमपीएन या इससे कम होनी चाहिए.

हालांकि उत्तराखंड में गंगोत्री, रुद्रप्रयाग और देवप्रयाग को छोड़कर किसी भी जगह पर गंगा नदी का पानी इस मानक पर खरा नहीं उतरता है.

हरिद्वार में ये संख्या 1600 है. वहीं उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में 48,000, वाराणसी में 70,000, कानपुर में 1,30,000, बिहार के बक्सर में 1,60,00,000, पटना में 1,60,00,000, पश्चिम बंगाल के हावड़ा में 2,40,000 हैं.

पीने वाले पानी में कॉलीफॉर्म बैक्टीरिया होने की वजह से मितली, उल्टी, बुखार और दस्त होता है.

गंगा नदी के पानी का काफी ज़्यादा हिस्सा सिंचाई के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

सीपीसीबी के मुताबिक अगर किसी पानी का पीएच 6 से 8.5 के बीच में होता है तो वो सिंचाई के लिए सही है. हालांकि साल 2017 की रिपोर्ट ये बताती है कि कई जगहों पर गंगा के पानी का पीएच 8.5 से ऊपर जा रहा है, जिसकी वजह से सिंचाई के लिए भी ख़तरा पैदा हो सकता है.

पानी या किसी अन्य विलयन (सॉल्यूशन) की अम्लता (एसिडिटी) या क्षारकता (बेसिसिटी) को पीएच में मापा जाता है.

गंगा पांच राज्यों से होकर गुज़रती हैं. इसलिए पांचों राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) द्वारा हर महीने तय मानकों पर गंगा के पानी की गुणवत्ता की जांच जाती है और उसे सीपीसीबी के पास भेजा जाता है. हर महीने के आंकड़ों का औसत मिलाकर सीपीसीबी आख़िर में एक रिपोर्ट जारी करता है.

अगर महीना-वार गंगा नदी के पानी की गुणवत्ता देखी जाती है तो इसकी तस्वीर और भयावह हो सकती है. साल के कुछ महीनों में गंगा का पानी बहुत ही ज़्यादा दूषित रहता है. गंगा में गंदगी की मुख्य वजह औद्योगिक प्रदूषण और घरेलू कचड़ा है.

शिवपुरी: घर मे सो रही बुजुर्ग महिला की हत्या, पुलिस जांच में जुटी

शिवपुरी। अभी अभी खबर शहर के कमलागंज स्थिति मामू पान बाली गली से आ रही है। जहां बीती रात्रि किसी अज्ञात आरोपी ने घर में रह रही एक अकेली महिला की गला रेत कर हत्या कर दी। इस मामले की सूचना पर फिजीकल थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच में जुट गई है।

जानकारी के अनुसार उमा पत्नि अम्रतलाल शर्मा उम्र 70 साल की अपने ही घर में गला रेंत कर हत्या कर दी। फिजीकल थाना प्रभारी अनीता मिश्रा ने बताया कि उक्त महिला अकेली अपने घर में रहती थी। कमलागंज क्षेत्र में वह एक छोटी सी गुमटी लगाकर अपना जीवन यापन करती थी। उसकी दो बेटी जौरा मुरैना में है। बीती रात्रि लगभग 12 बजे वह अपनी दुकान बंद कर घर जाते हुए कैमरें में दिखाई दे रही है।


बताया गया है कि उक्त कैमरे में महिला को लगभग 15 से 20 बच्चे घेर कर खडे है। उसमें महिला बच्चों को टॉफी देती हुई नजर आ रही है। उसके बाद सुबह पुलिस को सूचना मिली कि उक्त महिला की हत्या कर दी गई है। बताया जा रहा है कि उक्त महिला अकेली रहती थी। उसके परिवार के सदस्य पीछे बाली गली में रहते है। महिला के पास एक बडा मकान है। उक्त महिला के यहां कोई बेटा नही है।

इनका कहना है
हां रात्रि में 1 बजे के बाद महिला की हत्या की गई है। उसके सिर पर और गले पर चोट के निशान है। हमने सीसीटीव्ही फुटेज भी चैंक कराए है। जिसमें महिला रात्रि में दुकान बंद कर आती दिखाई दे रही है। अब हत्या का क्या कारण है यह तो कह नहीं सकते। हम महिला की बेटीयों के आने का इंतजार कर रहे है।

अनीता मिश्रा,टीआई,थाना प्रभारी फिजीकल।

कांगेस के कार्यकर्ताओं को तब्बजो नहीं देते दिग्गज: प़हलाद टिपनिया

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव में करारी हार से कांग्रेसउबर नहीं पा रही है. अब पार्टी के प्रत्याशियों का गुस्सा अपने ही बड़े नेताओं पर फूट रहा है. मध्य प्रदेश की देवास-शाजापुर से लोकसभा चुनाव में हारने के बाद पद्मश्री प्रहलाद टिपानिया ने अपनी ही पार्टी को कठघरे में खड़ा किया है. उन्होंने कहा है कि कांग्रेस में जातिवादी मानसिकता के लोग बड़े पदों पर बैठे हैं. जो जमीनी कार्यकर्ताओं को न मिलते और न ही उन्हें तवज्जो देते हैं. टिपानिया ने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी  का संगठन कागजों पर ही नजर आता हैय कांग्रेस का संगठन जमीनी हकीकत से बेख़बर है. पार्टी के बड़े नेता ही कांग्रेस में गुटबाजी और हार का बड़ा कारण हैं. कांग्रेस प्रत्याशी ने यह भी कहा कि पार्टी में समर्पित रूप से काम करने वाले कार्यकर्ताओं की कमी है. गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को कुल 52 सीटें आई हैं. मध्य प्रदेश में जिस कांग्रेस ने छह महीने पहले विधानसभा चुनाव जीतकर सरकार बनाई थी वह लोकसभा चुनाव में 29 सीटों में मात्र एक ही सीट जीतने में कामयाब हो पाई है. यह सीट सीएम कमलनाथ की छिंदवाड़ा है, जिसमें उनके बेटे नकुलनाथ जीते हैं. कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने यह भी कहा कि कुछ नेता तो केवल अपने बेटों का ही प्रचार करने में लगे रहे. मध्य प्रदेश में कांग्रेस की हालत इतनी खराब हो गई कि अजेय माने जाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया भी अपनी गुना की सीट नहीं बचा पाए.

इंदौर में देखने को मिला अद्भुत नजारा घायल सांप को बचाने के लिए अधिकारी ने दिखाई दिलेरी, मुंह से पानी पिलाकर बचाई जान

इंदौर  अगर बात सांप की हो तो लोग उसे देखकर भाग जाते हैं, या उसे मार डालते हैं। घायल सांप की मदद् करना तो दूर की बात है, लेकिन कुछ एसे भी लोग होते हैं, जो वन्य जीवों के प्रति काफी संवेदनशील होते हैं। इंदौर में एक अधिकारी ने घायल सांप की मदद कर एक आनोखी मिसाल पेश की है। घटना का वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

मामला मध्य प्रदेश के इंदौर शहर का है। शनिवार को झलारिया गांव के एक स्कूल में आठ फीट लंबा सांप घुस आया। सांप को देखकर लोगों ने उसे मारना शुरू कर दिया। डर के मारे लोगों ने उसके उपर कीटनाशक छिड़क दिया। स्कूल के आस-पास काफी भीड़ जमा हो गई। वहां से गुजर रहे आयकर विभाग के अधिकारी शेर सिंह ने सांप को देखा। सांप को देखते ही वो पहचान गया की ये सांप जहरीला नहीं है, बल्कि चूहे खाने वाला रैट स्नेक है। किटनाशक के कारण सांप हिल-डुल नहीं पा रहा था।

इसके बाद जो शेर सिंह ने किया उसे देखकर वहां मौजूद लोग हक्के-बक्के रह गए। शेर सिंह ने सांप के पेट से किटनाशक को निकालने का काम शुरू किया। उन्होंने एक स्ट्रो की मदद से अपने मुंह के द्वारा सांप के पेट में पानी डाला, ताकि पानी के साथ किटनाशक भी बाहर निकल जाए। एसा करने के थोड़ी देर बाद सांप हरकत करने लगा और सामान्य हो गया। बाद में शेर सिंह ने सांप को पकड़कर झाड़ियों में छोड़ दिया। 

विदेश मंत्री एस जयशंकर ट्विटर से कर रहे मदद

देश के नए विदेश मंत्री एस जयशंकर अपने मंत्रालय का कार्यभार संभालते ही एक्टिव हो गए हैं और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के नक्शे-कदम पर चल रहे हैं. दरअसल, एक महिला ने ट्विटर के जरिए मदद की गुहार लगाई तो विदेश मंत्री ने तुरंत मदद का आश्वासन दिया. बता दें कि पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ट्विटर पर काफी एक्टिव रहती थीं और मदद की गुहार लगाने पर तुरंत आश्वासन देते हुए सहायता करती थीं.

एस जयशंकर के कार्यभार संभालने के बाद शनिवार को रिंकी नाम की एक महिला ने विदेश मंत्री और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को टैग करते हुए मदद की गुहार लगाते हुए ट्वीट किया. जिसमें उसने लिखा, मेरी बेटी दो साल की है. मैं उसको वापस पाने के लिए 6 महीने से संघर्ष कर रही हूं. वह अमेरिका में है और मैं भारत में हूं, मेरी मदद करें. मैं आपके जवाब का इंतजार कर रही हूं.

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने महिला के तुरंत जवाब देते हुए लिखा, अमेरिका में हमारे राजदूत पूरी मदद करेंगे. आप सारी जानकारी उनको दें. वहीं महालक्ष्मी नाम की एस महिला ने ट्विटर के जरिए विदेश मंत्री से मदद मांगी. उसने कहा कि हम परिवार के साथ जर्मली और इटली ट्रिप पर हैं, मेरे पति और बेटे का पासपोर्ट मेरे बैग के साथ चोरी हो गया है. हमें 6 जून को भारत लौटना है.मैं कृपया मेरी मदद करें. इस ट्वीट पर भी विदेश मंत्री ने जवाब दिया.

 इसके अवाला वहीं एक अन्य महिला ने अपने पति को कुवैत से वापस बुलाने के लिए ट्वीट किया तो जयशंकर ने तुरंत जवाब देते हुए कहा कि कुवैत में हमारे राजदूत इस पर काम कर रहे हैं. उनके संपर्क में रहें. नए विदेश मंत्री एस जयशंकर पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की तरह ही मदद की गुहार को गंभीरता से लेते हुए तुरंत जवाब दे रहे हैं.

ग्वालियर एवं डबरा मंडी में होगी प्याज की खरीदी “मुख्यमंत्री प्याज कृषक प्रोत्साहन योजना, मध्यप्रदेश

सरकार ने मुख्यमंत्री कृषक प्रोत्साहन योजना में प्याज को भी शामिल किया है। इसका लाभ लेने के लिए कृषक 7 जून तक पंजीयन करा सकते हैं। फसल गिरदावरी पोर्टल पर जिले के 93 प्याज उत्पादक किसानों का रकबा लगभग 15 हेक्टेयर है। जिन किसानों ने अभी तक पंजयीन नहीं कराया है वह अपना पंजीयन करायें। जिले में प्याज खरीदी के लिए ग्वालियर एवं डबरा मंडी अधिसूचित

आवासहीनों को शासकीय भूमि का पट्टा और घर बनाने के लिये आर्थिक सहायता

हर घर में होगा नल कनेक्शन : शहरी क्षेत्रों के लिए बनेगा जल अधिकार अधिनियम 

मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ द्वारा नगरीय विकास एवं आवास विभाग की गतिविधियों की समीक्षा 

भोपाल

प्रदेश में हर व्यक्ति को समुचित मात्रा में पर्याप्त पानी उपलब्ध करवाने के लिए “जल अधिकार” अधिनियम बनाया जाएगा। साथ ही शहरी आवासहीनों को शासकीय भूमि का पट्टा तथा उस पर आवास निर्माण के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी। शहरी क्षेत्रों में हर घर में नल कनेक्शन के जरिए जल प्रदाय सुनिश्चित किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने आज मंत्रालय में नगरीय विकास विभाग की समीक्षा करते हुए यह निर्देश दिए। उन्होंने विभाग से इस संबंध में अधिनियम का प्रारूप बनाने को कहा। बैठक में नगरीय प्रशासन विकास एवं आवास मंत्री श्री जयवर्धन सिंह उपस्थित थे।

प्रमुख बिन्दु

 शहरी आवासहीनों को शासकीय भूमि का पट्टा और आवास निर्माण के लिए आर्थिक सहायता मिलेगी।

 शहरी क्षेत्र के हर घर में नल कनेक्शन होगा।

 जल अधिकार अधिनियम बनेगा।

 मिनी स्मार्ट सिटी नीति बनेगी।

 मास्टर प्लान ऐसा बने जिससे शहर के यातायात पर दबाव न पड़े।

 ठोस अपशिष्ट का निष्पादन स्थानीय स्तर पर हो। इसके लिए वैज्ञानिक पद्धति का उपयोग किया जाए।

 योजनाओं के क्रियान्वयन और मिलने वाले लाभ का आकलन हो।

 वर्षा ऋतु में व्यापक वृक्षारोपण का कार्यक्रम बनाया जाए।

 नागरिक सुविधाओं के लिए उपलब्ध राशि का अधिकतम उपयोग हो।

मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में यातायात का दबाव कम करने के लिए मास्टर प्लान बनाते समय शहरों के विस्तार की संभावना को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा जाए। उन्होंने कहा कि इसके आधार पर शहरों के चारों ओर रिंग रोड की योजना आवश्यक रूप से बनाई जाए ताकि आने वाले समय में शहरों के अंदर यातायात का दबाव न बढ़े। मुख्यमंत्री ने राज्य स्तरीय मिनी स्मार्ट सिटी नीति भी तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नीति में मिनी स्मार्ट सिटी में उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं और व्यवस्थाओं का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाये। श्री नाथ ने भोपाल और इंदौर में मेट्रोपॉलिटन एरिया विकसित करने को कहा।

मुख्यमंत्री श्री नाथ ने स्मार्ट सिटी योजनाओं में गति लाने के साथ मेट्रो रेल की योजना को भी शीघ्र ही मूर्त रूप देने के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्यमंत्री शहरी आवास एवं मुख्यमंत्री शहरी अधोसंरचना योजना को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार कर अमल में लाने को कहा। श्री नाथ ने शहरी आवासहीनों के आवास निर्माण के लिए शासन के पास उपलब्ध राशि के लिये नए वित्तीय मॉडल के मुताबिक योजना बनाने को कहा जिससे अधिक से अधिक आवासीय इकाइयाँ बन सकें और लोगों को इसका समुचित लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में पूरी हुई जल प्रदाय और सीवेज सहित अन्य परियोजनाओं की वास्तविक उपलब्धियों (आउटकम एनालिसिस) का भी आकलन करने को कहा जिससे नागरिकों को मिले लाभ की जानकारी मिल सके। श्री नाथ ने स्वच्छ भारत मिशन में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए उपलब्ध नई वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग कर स्थानीय स्तर पर ही कर कचरे का निष्पादन करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री श्री नाथ ने शहरी क्षेत्रों में पर्यावरण में व्यापक सुधार लाने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि वर्षा ऋतु में वृहद् स्तर पर पौध-रोपण का कार्यक्रम बनाया जाए। उन्होंने प्रदेश के सभी जिलों में उपलब्ध शासकीय भूमि की जानकारी एकत्र कर उनका उपयोग आवास योजनाओं के क्रियान्वयन में करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी नगरीय निकाय द्वारा योजनाएँ बनाते समय उन पर व्यय होने वाली राशि का उपयोग नवीनतम वित्तीय मॉडल के अनुसार करने को कहा जिससे उपलब्ध राशि का अधिक से अधिक उपयोग सुनिश्चित हो सके।

बैठक में मुख्य सचिव श्री एस.आर. मोहंती, प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं आवास श्री संजय दुबे, आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास श्री गुलशन बामरा उपस्थित थे।

मप्र के सरकारी अस्पतालों में पैथोलॉजी और एक्स-रे भी 9 से 4 बजे तक खुले रहेंगे |


भोपाल। प्रदेश में नागरिकों की सुविधा के लिये लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सभी चिकित्सालय में चिकित्सक सुबह 9 से शाम 4 बजे तक ओपीडी में मरीजों का उपचार करेंगे। ओपीडी में होने वाला पंजीयन शाम 3.30 बजे तक किसी भी स्थिति में बंद नहीं किया जायेगा। चिकित्सालयों में अब खून-पेशाब की जाँच एवं एक्स-रे की सुविधा के लिये पेथालॉजी लैब भी सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक खुली रहेगी।

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा आज जारी आदेश में चिकित्सालयों के समय का पुनर्निर्धारण करते हुए चिकित्सालयों में अन्य व्यवस्थाओं एवं उपचार आदि की प्रक्रिया से जुड़े मेडिकल स्टॉफ की ड्यूटी के संबंध में विस्तृत निर्देश दिये गये हैं। चिकित्सालय में सुबह 9 से शाम 4 बजे तक ओपीडी के समय में दोपहर 1.30 से 2.15 तक भोजन अवकाश रहेगा। सामान्य दिनों के साथ रविवार एवं अवकाश दिवसों में जिला एवं सिविल चिकित्सालयों में आपातकालीन ओपीडी 24 घंटे खुली रहेगी। सभी विशेषज्ञ और चिकित्सक सुबह 9 से 11 बजे तक अपने वार्डों में राउण्ड लेंगे। सप्ताह में यदि दो दिन का निरंतर शासकीय अवकाश होता है, तो उसमें से दूसरे अवकाश के दिन नियमित ओपीडी सुबह 9 से 11 बजे तक खुली रहेगी। चिकित्सालयों में निरंतर दो दिन नियमित ओपीडी बंद नहीं रहेगी।

चिकित्सालयों में अन्त: रोगी विभाग सामान्य दिनों में वार्ड एवं पलंग के प्रभारी सभी चिकित्सक एवं विशेषज्ञ अपने-अपने वार्ड का राउण्ड इस प्रकार सुनिश्चित करेंगे कि ओपीडी सेवाएँ प्रभावित नहीं हों। आपातकालीन सेवाएँ जिला एवं सिविल चिकित्सालयों में चौबीस घंटे उपलब्ध रहेंगी। इन चिकित्सालयों में सुबह 8 से दोपहर 2 बजे, दोपहर 2 से रात्रि 8 बजे और रात्रि 8 से सुबह 8 बजे की तीन शिफ्ट रहेगी। इमरजेंसी में आने वाले किसी भी रोगी को (भले ही वह छोटी बीमारी/लक्षण के उपचार के लिये आया हो) जाँच एवं उपचार करने से मना नहीं किया जायेगा।

चिकित्सालयों का जाँच (पेथालॉजी, एक्स-रे एवं बॉयोकेमिकल) विभाग भी सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक खुला रहेगा। फास्टिंग सेम्पल कलेक्शन के लिये लेब टेक्नीशियन सुबह 8 बजे से उपस्थित रहेगा। सुबह 11 बजे तक लिये गये सेम्पल की रिपोर्ट उसी दिन दोपहर एक बजे तक और पूर्वान्ह 11 से दोपहर 2 बजे के बीच लिये गये सेम्पल्स की रिपोर्ट उसी दिन दोपहर 3 से शाम 4 बजे तक दी जायेगी। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा जारी आदेश में चिकित्सकों, विशेषज्ञों की ड्यूटी के संबंध में भी स्पष्ट एवं विस्तृत निर्देश दिये गये हैं, ताकि किसी मेडिकल एवं पैरामेडिकल स्टॉफ को परिवर्तित व्यवस्था से असुविधा नहीं हो।

सरसों की फसल खरीद केंद़ों पर 6 जून तक होगी

खरीद केंद्र पर सरसों की फसल। 

अब 6 जून तक होगी खरीद 

प्रबंधक, नागरिक आपूर्ति निगम ने बताया कि समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए 6 जून तक तारीख बढ़ा दी गई है। इसकी सूचना सभी केंद्र प्रभारियों को भी दे दी गई है। जिन किसानों ने पंजीयन कराया था उन्हें पूर्व में ही मैसेज भेजे जा चुके हैं। किसान खरीद केंद्र पर संपर्क कर सरसों बेच सकेंगे।