बंगाल में थम गया प्रचार, हिंसा को लेकर पहले चरण से ही ऐसे आता गया सुर्खियों में

बंगाल में चुनाव का प्रचार का शोर थम चुका है. लाउड स्पीकर बांधे जा चुके हैं और मंच उखाड़े जा चुके हैं. मतदान तक यहां न ममता बनर्जी की आवाज सुनाई देगी और नरेंद्र मोदी की लेकिन अभी तक जो हुआ है वो राजनीति की पराकाष्ठा है. नरेंद्र मोदी हों या ममता बनर्जी या फिर अमित शाह, सत्ता की ख्वाहिश में भाषा के जिस स्तर तक चले गए उसने बंगाल के चुनाव प्रचार पर प्रश्न चिह्न लगा दिया.

चुनाव तो देश के हर हिस्से में हो रहा है लेकिन राजनीति के केंद्रबिंदु में बंगाल इसलिए उभर कर आया कि यहां पक्ष-विपक्ष की ऐसी बयानबाजी हुई कि लोग दातों तले उंगली दबा लें. फिलवक्त नेताओं के पुराने बयानों पर गौर फरमाना जरूरी है, जिससे बंगाल का चुनाव ‘बारूदी’ बनता गया. बंगाल चुनाव के केंद्र में हिंसा और बयानबाजी प्रमुख हैं.

क्या कहा ममता बनर्जी ने

चुनाव प्रचार में नरेंद्र मोदी से लेकर अमित शाह और ममता बनर्जी तक के बयान तल्ख रहे. जैसा कि ममता बनर्जी ने कहा, ‘चुनाव आयोग बीजेपी का भाई है. बीजेपी के हाथों बिक चुका है….प्रधानमंत्री को उठक-बैठक करनी चाहिए….आपने कहा है टीएमसी ने किया है. शर्म नहीं आती. कान पकड़कर उठक बैठक करना चाहिए इस प्रधानमंत्री को. एक बार नहीं लाखों बार झूठ बोलने के लिए. झूठ बोलने वाला झूठा…सको एक भी वोट मत दीजिए. मेहरबान करके मेरी मां, मेरे भाईयों, मेरे पापा जी, मेरे दोस्तों, मेरे भाइयों-बहनों, नौजवान लोग मोदी को हटाओ. मोदी को देश से निकाल दो चुनाव के जरिए…दो गुंडे हैं. एक मोदी गुंडा और एक अमित शाह गुंडा. दो गुंडे, दो गुंडे और दोनों अव्वल दर्जे के गुंडे हैं.
क्या कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने

चुनाव प्रचार में नरेंद्र मोदी ने भी जुबानी हमला बोला. उन्होंने कहा, ‘पश्चिम बंगाल की जनता जब आपसे हिसाब मांगे तो आप गालियां देने पर उतर आईं. धमकियां देने लगीं. हिंसा आगजनी कराने लगीं…. टीएमसी के गुंडों की ये दादागीरी परसों रात भी देखने को मिली. मोदी हटाओ का जो राग अलाप रहे थे, वो आज बौखला गए हैं. हर दिन विरोधियों की गालियां बढ़ती जा रही हैं. बंगाल की मुख्यमंत्री मुझे प्रधानमंत्री नहीं मानती हैं. वो पाकिस्तान के पीएम को अपना प्रधानमंत्री मानती हैं. आज मैं बंगाल जा रहा हूं तो देश को बताऊंगा कि मिदनापुर में जो मेरी रैली थी तो वहां किस तरह की अराजकता फैलाई गई.

अमित शाह का बयान

बयानबाजी में अमित शाह का नाम सबसे गंभीरता से सामने आया. उन्होंने यहां तक कह दिया कि ‘जय श्री राम जय श्री राम दीदी अब जो उखाड़ना हो उखाड़ लो….लोकसभा चुनावों में धांधली की खबरें आ रही हैं लेकिन चुनाव आयोग एक मूकदर्शक बना हुआ है. चुनाव आयोग को इसमें तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए….चुनाव आयोग मूकदर्शक रहा है. देश में हर जगह ‘आपराधिक प्रवृत्ति’ के लोग चुनावों से पहले ही पकड़े जाते हैं लेकिन पश्चिम बंगाल में वे आजाद घूम रहे हैं..अभी तक किसी एक व्यक्ति की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है. बंगाल में चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर मैं सवाल उठा रहा हूं…जब तक आपराधिक रिकार्ड वाले लोगों को नहीं पकड़ा जाता, चुनाव आयोग पर सवाल उठते रहेंगे.’

बंगाल में हिंसा

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के रोडशो में मंगलवार को कथित रूप से तृणमूल कांग्रेस छात्र परिषद (टीएमसीपी) के कार्यकर्ताओं ने पत्थर फेंके. इसके बाद कॉलेज स्ट्रीट के पास हिंसा भड़क उठी, जिसमें तीन बाइकों को आग के हवाले कर दिया गया. शाह ने बाद में तृणमूल पर अपनी रैली में ईंट और पत्थर फेंकने का आरोप लगाया. टीएमसीपी कार्यकर्ता कलकत्ता विश्वविद्यालय के गेट पर काले झंडों के साथ जमा थे. जैसे ही रोडशो वहां से गुजरा, उन्होंने अमित शाह के खिलाफ नारे लगाए और काले झंडे दिखाए. आरोप है कि उन्होंने रोडशो पर ईंट और पत्थर फेंके. बीजेपी समर्थकों ने भी कथित रूप से विश्वविद्यालय छात्रों पर ईंटें फेंकी. कलकत्ता विश्वविद्यालय के अलावा विद्यासागर कॉलेज के पास भी झड़प हुई. कॉलेज के पास तीन दोपहिया गाड़ियों को फूंक दिया गया. आरोप है कि बीजेपी समर्थकों ने कॉलेज के रिसेप्शन काउंटर को तोड़ दिया और कॉलेज के छात्रों पर ईंट, पत्थर और कांच की बोतलें फेंकीं.

इससे पहले 29 अप्रैल को वीरभूम संसदीय क्षेत्र के तहत दुबराजपुर विधानसभा क्षेत्र के पोदुमा गांव स्थित मतदान केंद्र पर गांव वालों की ओर से तोड़-फोड़ करने के बाद मतदान रुक गया. अधिकारियों ने कहा कि मोबाइल फोन जमा करने को लेकर बढ़े विवाद के बाद गांव वालों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प हो गई. हालात को काबू में रखने के लिए सुरक्षाकर्मी ने हवा में गोली चलाई. हालांकि वीरभूम से तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार शताब्दी राय ने कहा कि गोली चलने से दो लोग जख्मी हो गए. उन्होंने कहा, केंद्रीय बल की गोली से एक महिला और एक युवक घायल हो गए. उनको यह (गोली चलाने का) अधिकार किसने दिया. वे मतदान केंद्रों पर जाकर लोगों को बीजेपी को वोट देने के लिए कह रहे हैं.

चुनाव आयोग की कार्रवाई

भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के विवादित अधिकारी राजीव कुमार गृह मंत्रालय में अपनी नई ड्यूटी के लिए गुरुवार को सुबह 10 बजे नहीं जा सके. कोलकाता में हिंसा फैलने के बाद चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में अपराध जांच शाखा (सीआईडी) के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) राजीव कुमार को उनके पद से हटाकर गृह मंत्रालय में तैनात होने का आदेश दिया था. कोलकाता के पूर्व पुलिस आयुक्त कुमार से इससे पहले करोड़ों रुपए के शारदा चिट फंड घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) पूछताछ कर चुका है.

चुनाव आयोग ने बुधवार को कुमार को सीआईडी में उनकी एडीजी की पोस्ट से हटाने के साथ उन्हें गुरुवार को गृह मंत्रालय में ड्यूटी करने का आदेश दिया था. ईसी ने पश्चिम बंगाल के प्रधान सचिव (गृह) अत्री भट्टाचार्य को भी ‘चुनाव प्रक्रिया में दखल देने के लिए’ तत्काल प्रभाव से हटा दिया. ईसी ने पहली बार संविधान के अनुच्छेद 324 का प्रयोग कर चुनाव प्रचार को तय समयसीमा से एक दिन पहले ही बंद करने का निर्णय लिया. इसके तहत आयोग को चुनाव कराने के लिए नियंत्रण और निर्देश देने के लिए विशेष अधिकार मिलते हैं.

ममता के साथ विपक्ष

पश्चिम बंगाल की 9 सीटों के लिए बीजेपी ने पूरी ताकत झोंक दी. ये वो सीटें हैं जो ममता के अभेद्य गढ़ के रूप में गिनी जाती हैं लेकिन बीजेपी के हमले के बीच कमोबेश सारा विपक्ष ममता के पक्ष में खड़ा दिखा. खासकर चुनाव आयोग के फैसले को लेकर तो कांग्रेस ने तीखे सवाल उठा दिए. खास बात ये है कि बंगाल में कांग्रेस भी अपने दम पर चुनाव लड़ रही है लेकिन जिस तरह चुनाव टीएमसी बनाम बीजेपी बनता गया, उसमें कांग्रेस के लिए उम्मीदों का दरवाजा बंद होता गया. बावजूद इसके दुश्मन का दुश्मन दोस्त की तर्ज पर वो ममता के साथ खड़ी दिखीं तो मायावती से अखिलेश यादव और तेजस्वी तक सबने अपना स्टैंड साफ कर दिया कि वो ममता के साथ हैं.

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