जब MP के सीएम कमलनाथ वोट डालने पहुंचे मतदान केंद्र, बत्ती हो गई गुल- जानिये फिर क्या हुआ

छिंदवाड़ा: मध्य प्रदेश में सोमवार को पहले चरण का मतदान हुआ. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamal Nath) के लिए उस समय असहज स्थिति बन गई जब वह अपने परिवार सहित मतदान केंद्र पहुंचे, लेकिन वहां बिजली चली गई. इसके चलते उन्हें वहां मौजूद मीडियाकर्मियों के कैमरों की रोशनी में मताधिकार का इस्तेमाल करना पड़ा. इससे नाराज होकर कमलनाथ (Kamal Nath) ने मतदान करने के बाद मीडिया को बताया कि वह इस मामले की जांच कराएंगे कि ऐसा क्यों हुआ.

कमलनाथ सुबह अपनी पत्नी अलका नाथ, बेटे नकुलनाथ और पुत्रवधु प्रिया नाथ के साथ सौंसर विधानसभा सीट के शिकारपुर मतदान केंद्र पर मतदान करने गए थे. तभी वहां बिजली चली गई और उन्हें मीडियाकर्मियों के कैमरों की फ्लैशलाइट में मतदान करना पड़ा. मतदान केंद्र की बिजली लगभग 20-25 मिनट तक गुल रही. चुनाव पर्यवेक्षक नरेंद्र सिंह सिसोदिया ने बिजली जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि कमलनाथ परिवार सहित जब मतदान के लिए केंद्र पहुंचे थे तब कुछ देर के लिए बिजली गई थी.

छिंदवाड़ा लोकसभा सीट पर कमलनाथ के बेटे नकुल नाथ कांग्रेस प्रत्याशी हैं, जबकि छिंदवाड़ा विधानसभा सीट पर कमलनाथ कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर उपचुनाव लड़ रहे हैं. प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद नियमानुसार उन्हें छह माह के अंदर विधानसभा का सदस्य निर्वाचित होना है. उनके लिए उनके समर्थक दीपक सक्सेना ने इस्तीफा देकर छिंदवाड़ा विधानसभा सीट खाली की थी. इसके तहत चुनाव आयोग को यहां उपचुनाव कराना पड़ रहा है. 
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प्रदेश में चुनाव के दौरान हो रही अघोषित बिजली कटौती एक राजनीतिक मुद्दा बन गया है. नवंबर 2018 से प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद से बारम्बार अघोषित बिजली कटौती हो रही है. कांग्रेस नेताओं का मानना है कि बिजली कंपनी के कुछ कर्मचारियों ने जानबूझकर कांग्रेस के खिलाफ किसी षडयंत्र के तहत ऐसा किया है. सरकार ने शक के दायरे में आने के बाद ऐसे 500 कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की है.

टाटा ग़ुप ने दिया चुनाव में 600 करोड़ चंदा

कारोबारी ग्रुप में शुमार टाटा ग्रुप ने अपने चुनावी ट्रस्ट के माध्यम से विभिन्न राजनैतिक पार्टियों को मौजूदा लोकसभा चुनावों के लिए करीब 500-600 करोड़ रुपए का चंदा दिया है। उल्लेखनीय है कि साल 2014 के लोकसभा चुनावों में टाटा ग्रुप ने अपने चुनावी ट्रस्ट के माध्यम से विभिन्न राजनैतिक पार्टियों को करीब 25 करोड़ रुपए का कर्ज दिया था। इस तरह मौजूदा लोकसभा चुनावों में टाटा ग्रुप ने चुनावी चंदे में 20 गुना की भारी भरकम बढ़ोत्तरी की है। बता दें कि टाटा ग्रुप अपने ट्रस्ट ‘प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट’ के माध्यम से राजनैतिक पार्टियों को चंदे देता है।
मौजूदा लोकसभा चुनाव में जो आंकड़े सामने आए हैं, उसके तहत टाटा ग्रुप ने सबसे ज्यादा चंदा सत्ताधारी भाजपा को दिया है। बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, टाटा ग्रुप द्वारा दिए गए कुल चंदे में से 300-350 करोड़ रुपए का सबसे बड़ा हिस्सा अकेले भाजपा को मिला है। वहीं 50 करोड़ रुपए कांग्रेस के हिस्से में आए हैं। बाकी बचे हिस्से में टीएमसी, कम्यूनिस्ट पार्टी समेत अन्य पार्टियों को चंदा मिला है। टाटा ग्रुप की सॉफ्टवेयर कंपनी टीसीएस ने इस चंदे में सबसे ज्यादा 220 करोड़ रुपए दिए हैं।

चौथे चरण की वोटिंग के साथ पूरा हुआ 70% वोटरों का महापर्व

नई दिल्ली 
लोकसभा चुनाव 2019 के लिए अब तक हुए चार चरण के मतदान में लगभग 70% मतदाताओं ने अपनी पसंद ईवीएम में दर्ज करा दी है लेकिन बीजेपी के लिए असली लड़ाई अब शुरू होगी क्योंकि बाकी तीन चरणों में जिन 282 लोकसभा सीटों के लिए मतदान होने वाले हैं, उनमें से 116 सीटें 2014 के जनरल इलेक्शंस में सत्ताधारी दल की झोली में गिरी थीं। मतदान के चौथे चरण में सोमवार को नौ राज्यों में 72 सीटों पर वोटिंग हुई, जहां से कुल 961 उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतरे थे और इस दौर के मतदान वाली ज्यादातर अहम सीटें मध्य प्रदेश राजस्थान और झारखंड की थीं। इस फेज में महाराष्ट्र और उड़ीसा में भी मतदान हुआ। 

चौथे चरण के मतदान के साथ 543 लोकसभा सीटों में से 373 सीटों के लिए वोटिंग पूरी हो गई। सोमवार को जिन 72 सीटों के लिए वोटिंग हुई, उसमें 45 सीटों पर बीजेपी, 9 पर उसकी सहयोगी शिवसेना और 2 पर एलजेपी का कब्जा है। चुनाव आयोग की तरफ से शाम पांच बजे तक के मतदान के आंकड़े बताते हैं कि नौ राज्यों में मतदान प्रतिशत 50.6% रहा है। संभावना जताई जा रही थी कि चौथे फेज के ट्रेंड पहले जैसे रह सकते हैं। हालांकि मतदान प्रतिशत कम होने बीजेपी की फिक्र बढ़ गई है क्योंकि पार्टी को डर है कि यह सोचकर उसके वोटर सुस्ती दिखा सकते हैं कि प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी फिर से पीएम पक्का बनेंगे। मोदी ने वाराणसी में पार्टी सपोर्टर्स से कहा था कि वे इस मोर्चे पर आश्वस्त होकर बैठ न जाएं। 

बीजेपी की कड़ी चुनावी परीक्षा तो मध्य प्रदेश और राजस्थान में होने वाली है, जहां हाल में हुए विधानसभा चुनाव में उसे कांग्रेस से मात खानी पड़ी थी। सोमवार को दोनों राज्यों की जिन 19 सीटों पर वोटिंग हुई, उसमें से 6 सीटें मध्य प्रदेश और 13 राजस्थान की थीं। बीरभूम, नादिया और आसनसोल में हिंसा की खबरों के बीच वेस्ट बंगाल में पांच बजे शाम तक का मतदान प्रतिशत 66% रहा था। बीरभूम निर्वाचन क्षेत्र के दुबराजपुर में मतदान केंद्र पर हंगामे को शांत करने के लिए सुरक्षा बल के जवानों को एक राउंड फायर करना पड़ा। आसनसोल में बीजेपी सांसद बाबुल सुप्रियो की कार पर हमला हुआ और बीरभूम के टीएमसी जिला अध्यक्ष अनुब्रत मंडल के नाम नजरबंदी का आदेश जारी हुआ। 

महाराष्ट्र में मतदान के आंकड़े 2014 के मुकाबले थोड़े कम रहे हैं। सबसे कम मतदान मुंबई में हुआ। रईसों का ठिकाना मानी जाने वाली मुंबई साउथ में दोपहर 3 बजे तक वोटर टर्नआउट सिर्फ 38.76% रहा था। दूसरी तरफ आदिवासी बहुल नंदुरबार में सबसे ज्यादा 51.96% मतदान हुआ। जम्मू कश्मीर में अनंतनाग लोकसभा सीट के चार सेगमेंट में सबसे कम 10.2 प्रतिशत मतदान हुआ। हालांकि वहां से किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं मिली है। यूपी और बिहार में शाम पांच बजे तक 45% मतदान होने की खबर थी, जबकि मध्य प्रदेश, उड़ीसा, झारखंड और राजस्थान में मतदान का आंकड़ा 54 से 57 प्रतिशत रहा। 

काशी का मुकालबा दिलचस्प हुआ तेजबहादुर और अतीक अहमद से

उत्तर प्रदेश की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट वाराणसी पर इस बार मतदान आखिरी चरण में 19 मई को होने हैं, लेकिन सियासी पारा अभी से आसमान पर है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ इस बार बीएसएफ से बर्खास्त जवान तेज बहादुर यादव और बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद ताल ठोक रहे हैं. दोनों के मैदान में उतरने से काशी का रण दिलचस्प हो गया है.

समाजवादी पार्टी ने ऐन वक्त पर बर्खास्त बीएसएफ जवान तेज बहादुर यादव को टिकट देकर ‘असली’ और ‘नकली’ चौकीदार की लड़ाई छेड़ दी है तो दूसरी तरफ बाहुबली अतीक अहमद के निर्दलीय मैदान में उतरने से मुस्लिम वोटों के बंटवारे की भी आशंका जताई जा रही है. सपा का प्रत्याशी बदलने के साथ ही स्थानीय स्तर पर चुनावी लड़ाई देश के चौकीदार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीएसएफ से बर्खास्त सीमा प्रहरी तेज बहादुर यादव के बीच होने की चर्चा भी शुरू हो गई है.

उधर बाहुबली नेता अतीक अहमद के चुनाव मैदान में उतरने से विपक्षी पार्टियों का समीकरण भी बिगड़ता दिख रहा है. जानकारों की मानें तो अतीक के चलते मुस्लिम मतों का बिखराव हो सकता है. अगर ऐसा हुआ तो इसका फायदा बीजेपी और नुकसान विपक्षी दलों को उठाना पड़ेगा. दरअसल 2014 में आम आदमी पार्टी के अरविन्द केजरीवाल को 209238 मत मिले थे, इनमें मुस्लिम मतदाता भी शामिल हैं. सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस इसी वोट को अपने पाले में करने की जुगत में है. लेकिन अतीक के मैदान में उतरने से इन वोटों में सेंधमारी का अंदेशा जताया जा रहा है. यह स्थिति बीजेपी के लिए अनुकूल होगी, जबकि गठबंधन और कांग्रेस को नई रणनीति बनानी होगी.

वरिष्ठ पत्रकार और राजनैतिक विश्लेषक रतनमणि लाल कहते हैं कि वैसे तो पीएम मोदी को वाराणसी से हराना मुश्किल है, लेकिन विपक्ष की कोशिश यही है कि वह चुनौती देता हुआ दिखे. यह संदेश न जाए कि उनके पास कोई प्रत्याशी नहीं है और मोदी को वॉक ओवर मिल गया. अच्छा होता अगर कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशी को समर्थन देती. लेकिन ऐसा नहीं हुआ लिहाजा सपा बीजेपी के राष्ट्रवाद को चुनौती देने के लिए एक जवान को मैदान में उतारा है. ताकि यह संदेश जाए कि लड़ाई असली चौकीदार बनाम नकली चौकीदार है.

भारतीय कॉरपोरेट जगत अब गठबंधन सरकार की भी चर्चा करने लगा है

भारतीय कॉरपोरेट जगत अब गठबंधन सरकार की भी चर्चा करने लगा है. कॉरपोरेट जगत की कुछ प्रमुख हस्तियों का मानना है कि गठबंधन की सरकारों का अर्थव्यवस्था के लिए बुरा होने वाली धारणा गलत है. अपने मताधिका़र का इस्तेमाल करने के बाद कई उद्योगपतियों ने कहा कि गठबंधन सरकार अर्थव्यवस्था के लिए बुरी नहीं होती. ऐसा लगता है कि कॉरपोरेट जगत हर हालात के लिए अपने को तैयार कर रहा है.

डरने की जरूरत नहीं

सोमवार को दक्षिण मुंबई के एक मतदान केंद्र पर वोट देने के बाद महिंद्रा समूह के चेयरमैन आनन्द महिंद्रा की राय से यह संकेत मिल रहा है कि गठबंधन की सरकारों से डरने की कोई जरूरत नहीं. उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘हम सभी में प्रगति एवं वृद्धि का कीड़ा समा गया है. अगर गठबंधन की सरकार आती है तो वह भी इन्हीं रास्तों पर चलेगी और वह हम लोगों के लिए लाभदायक है.’

आनन्द महिंद्रा ने कहा कि लोकसभा चुनावों के बाद केंद्र की सत्ता में चाहे जो भी आए, भले ही वह गठबंधन सरकार ही क्यों न हो, उसे विकास के लिए काम करना चाहिए. महिंद्रा ने यह बातें मुंबई दक्षिण संसदीय क्षेत्र के मालाबार हिल में एक बूथ पर अपना वोट देने के बाद कहीं.

जेएसडब्ल्यू का नेतृत्व कर रहे सज्जन जिंदल की राय भी कुछ ऐसी ही दिखी. उन्होंने मतदान करने के बाद कहा, ‘केंद्र में गठबंधन सरकारें रह चुकी हैं और उन्होंने सुशासन दिया है. इसमें कोई दिक्कत नहीं है. मेरी राय में हमारा लोकतंत्र बहुत परिपक्व है और हम गठबंधन सरकारों का सुशासन देख चुके हैं. इसलिए मैं चिंतित नहीं हूं. जिंदल ने कहा कि औद्योगिक वृद्धि, नौकरी और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर काम करने की जरूरत है. उन्होंने केंद्र में स्थिर सरकार की जरूरत पर बल दिया जो सतत विकास सुनिश्चित कर सके.

गोदरेज समूह के चेयरमैन आदि गोदरेज ने कहा, ‘कोई गठबंधन अगर मजबूती से जुड़ा हुआ है तो हम अच्छा कर सकते हैं.’ गौरतलब है कि भारत के सबसे धनी व्यक्ति एवं रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और सबसे धनी बैंकर उदय कोटक ने मुंबई दक्षिण से कांग्रेस के उम्मीदवार मिलिंद देवड़ा का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया है.

एचडीएफसी के दीपक पारेख ने कहा कि मतदान के दौरान स्थानीय मुद्दे छाये रहे. उन्होंने कहा कि वह केंद्र में एक स्थिर सरकार चाहते हैं. आम चुनावों के चौथे चरण में कॉरपोरेट जगत के जिन दिग्गजों में मतदान किया, उनमें भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गर्वनर शक्तिकांत दास, रिलायंस एडीएजी के प्रमुख अनिल अंबानी, गोदरेज समूह के चेयरमैन आदि गोदरेज, टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन, एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख और इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी केकी मिस्त्री, जेएसडब्ल्यू समूह के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक सज्जन जिंदल, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष चौहान और जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल शामिल हैं.

कई जानकारों को लगता है कि इन चुनावों के बाद खंडित नतीजे आ सकते हैं, इसके बावजूद भारतीय कारोबारी जगत के लोगों को उम्मीद है कि सुधार जारी रहेंगे और सरकार उपभोग बढ़ाने के लिए अपना व्यय बढ़ाएगी, ताकि पूंजी निर्माण और घरेलू मांग में भी वृद्धि हो.

लोकसभा चुनावों के पहले तीन चरणों में 302 संसदीय क्षेत्रों के लिए मतदान संपन्न हुआ और चौथे चरण में सोमवार को 72 सीटों के लिए मतदान हुआ जिसमें 961 उम्मीदवारों का भाग्य दांव पर है. भारतीय अर्थव्यवस्था में फिलहाल वृद्धि दर की गति धीमी है और उद्योग जगत को नई सरकार का बेसब्री से इंतजार है, जो जून में सत्ता संभालेगी और उम्मीद है कि सुधारों पर मजबूत निर्णय लेगी.

(एजेंसियों के इनपुट पर आधारित)

पहली बार भारतीय सेना ने हिम मानव येती की मौजूदगी को लेकर सबूत पेश किया है

पहली बार भारतीय सेना ने हिम मानव येती की मौजूदगी को लेकर सबूत पेश किया है। सेना ने येती के पैरों के निशान वाली तीन तस्वीरें शेयर की हैं।…

नई दिल्ली, एएनआइ। लंबे समय से हिम मानव की मौजूदगी को लकेर तरह-तरह के कयाश लगाए जाते रहे हैं। कई बार लोगों द्वारा दूनियाभर में हिम मानव ‘येती’ को देखे जाने की घटनाएं सामने आती रही है। ये मान्यता सदियों से चली आ रही है कि हिम मानव हिमालय में बनी गुफाओं में आज भी रहते हैं, हालांकि आभी तक इसकी मौजूदगी को लेकर कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया था। पहली बार भारतीय सेना ने हिम मानव ‘येती’ की मौजूदगी को लकेर बड़ा दावा किया है।
भारतीय सेना ने पहली बार हिम मानव की मौजूदगी को लेकर सबूत पेश किया है। दरअसल, सेना को हिमालय में हिम मानव ‘येती’ के पैरों निशान मिले हैं, जिसे उन्होंने ट्वीटर पर शेयर किया है। तस्वीरों में बर्फ पर पैरों के बड़े-बड़े निशान दिखाई दे रहे हैं। माना जा रहा है कि ये निशान हिम मानव ‘येती’ के पैरों के ही हैं। भारतीय सेना ने कुल तीन तस्वीरें शेयर की है।
सेना ने ट्वीट में कहा, ‘ पहली बार भारतीय सेना माउटाइरिंग एक्सपेडिशन टीम ने 09 अप्रैल, 2019 को मकालू बेस कैंप के करीब 32×15 इंच वाले ‘यति’ के रहस्यमयी पैरों के निशान देखे हैं। इस मायावी हिममानव को इससे पहले केवल मकालू-बरुन नेशनल पार्क में ही देखा गया है।
बता दें कि हिम मानव येती हिमालय में रहने वाला सबसे रहस्यमयी प्राणी है। येती को ज्यादतार नेपाल और तिब्बत के हिमालय क्षेत्र में देखे जाने की घटना सामने आती रही है, हालांकि इन दावों को लेकर वैज्ञानिक एकमत नहीं हैं।

पोस्ट ऑफिस में खुलवाएं बेटी के लिए ये खाता, बना सकेंगे 40 लाख रुपए का फंड


पोस्ट ऑफिस में जाकर अपनी 10 या उससे कम उम्र की बेटी का खुलवाएं ये खाता, कभी नहीं होगी उसे पैसों की दिक्कत.

बेटी के भविष्य को लेकर हर माता-पिता चिंता में रहते हैं. बेटियों को अच्छी शिक्षा और कई फैसिलिटीज मिले इस बात का ख्याल सरकार भी रखती है. सरकार बेटियों के लिए कई तरह की योजनाएं चलाती है, जिसके बारे में काफी कम लोग जानते हैं. सरकार की बेटियों के लिए खास योजना में सबसे चर्चित सुकन्या समृद्धि योजना है. इस योजना के अंतर्गत अगर आपकी बेटी 10 या उससे कम उम्र की है तो आप पोस्ट ऑफिस में जाकर उसके नाम से खाता खुलवा सकते हैं. यह खाता आपको उस वक्त फाइनेंसियल सपोर्ट देगा, जब आपकी बेटी 21 वर्ष की होगी. आगे जानें कैसे खोल सकेंगे अकाउंट..

इस पैसे को आप उसकी आगे की पढ़ाई या अन्य किसी दूसरे जरूरी काम पर खर्च कर सकेंगे. आप चाहें तो अपनी बेटी के भविष्य के लिए आगे फिक्स भी कर सकते हैं.

कैसे खुलवायें खाता
सुकन्या योजना लेने के लिए आप अपने नजदीकी पोस्ट ऑफ‍िस जाएं और वहां से सुकन्या समृद्धि योजना का फॉर्म प्राप्त करें. अगर समय नहीं है, तो आप इंटरनेट से इंडिया पोस्ट की वेबसाइट से भी इस फॉर्म को डाउनलोड कर सकते हैं. बेटी की फोटोग्राफ लगाकर व फॉर्म भर कर उसे पोस्ट ऑफ‍िस में जमा कर दीजिये.

नौकरी ही नहीं अपना बेटा भी खो चुके हैं वाराणसी से चुनाव लड़ने वाले तेज बहादुर!


तेज बहादुर को आदेश न मानने, ड्यूटी के दौरान दो फोन रखने और सेना की वर्दी में अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालने का दोषी पाया गया था.
सपा-बसपा महागठबंधन ने बीएसएफ के बर्खास्त सिपाही तेज बहादुर यादव को वाराणसी लोकसभा से अपना उम्मीदवार बनाया है. बेशक महागठबंधन के इस फैसले ने वाराणसी के चुनाव को रोचक बना दिया हो, लेकिन उनकी जिंदगी भी कम उठापटक वाली नहीं रही है. ये बीएसएफ के वही सिपाही हैं जिन्हें वर्दी पहनकर सोशल मीडिया पर आने के चलते बर्खास्त कर दिया गया था.
तेज बहादुर ने बीएसएफ में खाने की गुणवत्ता को लेकर एक वीडियो बनाया था. वीडियो सोशल मीडिया खूब वायरल हुआ था. हालांकि नियमों का उल्लघंन करने के चलते तेज बहादुर को बाद में बर्खास्त भी कर दिया गया था. 2017 तेज बहादुर को बीएसएफ की सेवा से मुक्त कर दिया गया था. तेज बहादुर को आदेश न मानने, ड्यूटी के दौरान दो फोन रखने और सेना की वर्दी में अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालने का दोषी पाया गया था.
इसके खिलाफ तेज बहादुर ने कानूनी लड़ाई भी लड़ी थी. उनका मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा था. मोदी सरकार के मंत्रियों को इस बारे में जवाब भी देना पड़ा था. लेकिन अभी तेज बहादुर ये लड़ाई लड़ ही रहे थे कि जनवरी 2018 में उनके 22 साल के बेटे रोहित की मौत हो गई. संदिग्ध हालत में रोहित का शव घर के एक कमरे में बंद मिला था.
रोहित के शरीर पर गोली का निशान था. रोहित के घर वालों ने इसके पीछे साजिश की आशंका जताई थी. सेना से रिटायर्ड और तेज बहादुर के करीबी रहे सूबेदार रिटायर्ड संजय कुंतल बताते हैं, “पिछले दो साल में तेज बहादुर ने बहुत परेशानियां देखी हैं. नौकरी जाने के बाद तेज बहादुर सिस्टम के खिलाफ लड़ता रहा. अभी वो सिस्टम से जूझ ही रहा था कि उसको सबसे बड़ा सदमा अपने बेटे का लगा था. बावजूद इसके तेज कभी हारा नहीं. यही वजह है कि आज वो चुनाव मैदान में है.”

आसानसोल: पोलिंग बूथ में हिंसा पर EC सख्त, केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो पर FIR का आदेश


आसानसोल में चुनावी हिंसा पर EC की बड़ी कार्रवाई
बीजेपी प्रत्याशी बाबुल सुप्रियो ने की बूथ में घुसने की कोशिश
चुनाव आयोग ने कहा- दर्ज करो FIR
नई दिल्ली। वोटिंग के दौरान एकबार फिर पश्चिम बंगाल से हिंसा की सबसे अधिक खबर आई है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री और आसनसोल से बीजेपी प्रत्याशी बाबुल सुप्रियो ( Babul Supriyo ) चुनाव आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है। आयोग ने बूथ में जबरन घुसने की कोशिश और हिंसा के आरोप में सुप्रियो पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला
सोमवार की सुबह जब बाबुल बाराबनी क्षेत्र के एक पोलिंग बूथ पर तैनात सुरक्षाबलों और ( Election Commission ) अधिकारियों की मना करने के बाद भी घूसने की कोशिश कर रहे थे। सुप्रियो ने मीडिया से कहा, ‘वे मुझे रोकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इस तरह से वे मुझे रोक नहीं पाएंगे। मैं यह सुनिश्चित करने गया था कि बीजेपी के एजेंट को अंदर प्रवेश की अनुमति है या नहीं। उन लोगों ने मेरी कार पर हमला किया और खुद यह भी कह रहे हैं कि मैं गुंडागंर्दी का सहारा ले रहा हूं। यह मुझे एक जगह पर बांधने के लिए ऐसा किया गया, लेकिन मैं आगे बढ़ूंगा।’ इसी दौरान किसी ने उनकी कार के पिछले शीशे पर हमला कर उसे चकनाचूर कर दिया गया।
आसनसोल में सुप्रियो Vs मुनमुन
यह हमला तब हुआ जब लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में पश्चिम बंगाल के आठ निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हो रहा है। आसनसोल संसदीय क्षेत्र से मौजूदा सांसद बाबुल सुप्रियो का मुकाबला तृणमूल कांग्रेस ( TMC ) की उम्मीदवार अभिनेत्री मुनमुन सेन ( Moon Moon Sen ) से है। वहीं, दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बाबुल सुप्रियो और उनके आदमियों ने उनसे हाथापाई की। चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक इस सम्बंध में विस्तृत ब्यौरा मांगा गया है।