नौकरी ही नहीं अपना बेटा भी खो चुके हैं वाराणसी से चुनाव लड़ने वाले तेज बहादुर!


तेज बहादुर को आदेश न मानने, ड्यूटी के दौरान दो फोन रखने और सेना की वर्दी में अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालने का दोषी पाया गया था.
सपा-बसपा महागठबंधन ने बीएसएफ के बर्खास्त सिपाही तेज बहादुर यादव को वाराणसी लोकसभा से अपना उम्मीदवार बनाया है. बेशक महागठबंधन के इस फैसले ने वाराणसी के चुनाव को रोचक बना दिया हो, लेकिन उनकी जिंदगी भी कम उठापटक वाली नहीं रही है. ये बीएसएफ के वही सिपाही हैं जिन्हें वर्दी पहनकर सोशल मीडिया पर आने के चलते बर्खास्त कर दिया गया था.
तेज बहादुर ने बीएसएफ में खाने की गुणवत्ता को लेकर एक वीडियो बनाया था. वीडियो सोशल मीडिया खूब वायरल हुआ था. हालांकि नियमों का उल्लघंन करने के चलते तेज बहादुर को बाद में बर्खास्त भी कर दिया गया था. 2017 तेज बहादुर को बीएसएफ की सेवा से मुक्त कर दिया गया था. तेज बहादुर को आदेश न मानने, ड्यूटी के दौरान दो फोन रखने और सेना की वर्दी में अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालने का दोषी पाया गया था.
इसके खिलाफ तेज बहादुर ने कानूनी लड़ाई भी लड़ी थी. उनका मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा था. मोदी सरकार के मंत्रियों को इस बारे में जवाब भी देना पड़ा था. लेकिन अभी तेज बहादुर ये लड़ाई लड़ ही रहे थे कि जनवरी 2018 में उनके 22 साल के बेटे रोहित की मौत हो गई. संदिग्ध हालत में रोहित का शव घर के एक कमरे में बंद मिला था.
रोहित के शरीर पर गोली का निशान था. रोहित के घर वालों ने इसके पीछे साजिश की आशंका जताई थी. सेना से रिटायर्ड और तेज बहादुर के करीबी रहे सूबेदार रिटायर्ड संजय कुंतल बताते हैं, “पिछले दो साल में तेज बहादुर ने बहुत परेशानियां देखी हैं. नौकरी जाने के बाद तेज बहादुर सिस्टम के खिलाफ लड़ता रहा. अभी वो सिस्टम से जूझ ही रहा था कि उसको सबसे बड़ा सदमा अपने बेटे का लगा था. बावजूद इसके तेज कभी हारा नहीं. यही वजह है कि आज वो चुनाव मैदान में है.”

आसानसोल: पोलिंग बूथ में हिंसा पर EC सख्त, केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो पर FIR का आदेश


आसानसोल में चुनावी हिंसा पर EC की बड़ी कार्रवाई
बीजेपी प्रत्याशी बाबुल सुप्रियो ने की बूथ में घुसने की कोशिश
चुनाव आयोग ने कहा- दर्ज करो FIR
नई दिल्ली। वोटिंग के दौरान एकबार फिर पश्चिम बंगाल से हिंसा की सबसे अधिक खबर आई है। इसी बीच केंद्रीय मंत्री और आसनसोल से बीजेपी प्रत्याशी बाबुल सुप्रियो ( Babul Supriyo ) चुनाव आयोग ने बड़ी कार्रवाई की है। आयोग ने बूथ में जबरन घुसने की कोशिश और हिंसा के आरोप में सुप्रियो पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला
सोमवार की सुबह जब बाबुल बाराबनी क्षेत्र के एक पोलिंग बूथ पर तैनात सुरक्षाबलों और ( Election Commission ) अधिकारियों की मना करने के बाद भी घूसने की कोशिश कर रहे थे। सुप्रियो ने मीडिया से कहा, ‘वे मुझे रोकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इस तरह से वे मुझे रोक नहीं पाएंगे। मैं यह सुनिश्चित करने गया था कि बीजेपी के एजेंट को अंदर प्रवेश की अनुमति है या नहीं। उन लोगों ने मेरी कार पर हमला किया और खुद यह भी कह रहे हैं कि मैं गुंडागंर्दी का सहारा ले रहा हूं। यह मुझे एक जगह पर बांधने के लिए ऐसा किया गया, लेकिन मैं आगे बढ़ूंगा।’ इसी दौरान किसी ने उनकी कार के पिछले शीशे पर हमला कर उसे चकनाचूर कर दिया गया।
आसनसोल में सुप्रियो Vs मुनमुन
यह हमला तब हुआ जब लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में पश्चिम बंगाल के आठ निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान हो रहा है। आसनसोल संसदीय क्षेत्र से मौजूदा सांसद बाबुल सुप्रियो का मुकाबला तृणमूल कांग्रेस ( TMC ) की उम्मीदवार अभिनेत्री मुनमुन सेन ( Moon Moon Sen ) से है। वहीं, दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बाबुल सुप्रियो और उनके आदमियों ने उनसे हाथापाई की। चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक इस सम्बंध में विस्तृत ब्यौरा मांगा गया है।

गुना शिवपुरी लोकसभाः जनता इसबार कमल खिलाने को आतुर है.मोदी फेक्टर का असर

गुना शिवपुरी लोकसभा क्षेत्र में इसबार मोदी फेक्टर के कारण भाजपा को जनता का अच्छा सहयोग मिलने की उम्मीद दिखाई दे रही है. विपक्षी दल भाजपा के उम्मीदवार को डमी घोषित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ऐसा न हो कि विपक्षी अंधेरे में रहें और जनता तीर चला दे.
यह सच है कि इतने कम समय में उम्मीदवार हर जगह नहीं पहुंच सकता है, लेकिन मोदी ने यह करिश्मा पहले ही कर दिया हर घर के चूल्हे तक मोदी की पहुंच है आज वही पहुंच उम्मीदवार को बढ़त दिलायेगी. घर घर में मोदी गैस चूल्हे, शौचालय और गरीब तबके को दिये गये मोदी आवास आज हर ग़ामीण मतदाता की जुबान पर है फिर आगे शिवराज सिंह की नेकियां भाजपा के पक्ष में जाती दिख रहीं हैं.
विपक्षी दल भी भागदौड़ कर रहे हैं लेकिन भाषणबाजी का जनता पर असर न के बराबर दिखाई देता है. कांग़ेस के वरिष्ठ कार्यकर्ता भी उचित सम्मान न मिलने के कारण ग्वालियर से उम्मीदवार अशोक सिंह के क्षेत्र की तरफ मुड़ने लगे हैं.
नुक्कड़ों और गलियों में कहीं कहीं मतदाता यह कहता भी नजर आता कि इसबार कमल दल की कीचड़ के दल दल में विपक्ष फंसता नजर आ रहा है परिणाम कुछ भी हो सकता है.
हां जनता चाहती है कि भाजपा के कद्दावर नेता इसक्षेत्र में यदि दिल से सभायें लेने आ गये तो फिजा बदलते देर नहीं लगोगी.

मौसम बदल सकता है एक दो दिन में उत्तर भारत की तरफ एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ आ रहा है

उत्तर भारत की तरफ एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ आ रहा है। यह सिस्टम इस समय उत्तरी पाकिस्तान और इससे सटे जम्मू-कश्मीर के पास पहुँच गया है। मौसम विशेषज्ञों की मानें तो इस मौसमी सिस्टम के कारण जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के अधिकांश भागों पर कल यानि 30 अप्रैल से बारिश होने की संभावना है।

उत्तराखंड में भी यह पश्चिमी विक्षोभ बारिश दे सकता है। राज्य में 1 मई से बारिश वाले बादल आएंगे और कुछ स्थानों पर गरज के साथ बारिश की हल्की फुहारें देखने को मिलेंगी। इस दौरान जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ी हिस्सों पर हल्की बर्फ़बारी की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता।

मौसम में इस बदलाव से जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में दिन के तापमान में 3 से 4 डिग्री की गिरावट देखने को मिल सकती है। जिससे इन राज्यों में अगले कुछ दिनों के दौरान मौसम थोड़ा ठंडक भरा होने के साथ-साथ सुहावना होने की उम्मीद है।

वैष्णो देवी सहित कटरा में भी गरज के साथ बारिश होने की संभावना है। इसके बावजूद इन तीनों राज्यों में भारी बारिश या बादल फटने की घटनाएं देखने को नहीं मिलेंगी।

संभावित मौसमी हलचल को देखते हुए इस बात की आशंका है कि कुछ रास्ते अवरुद्ध हो जाएंगे, जिससे पहाड़ों की ओर जाने वाले पर्यटकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन इन मौसमी गतिविधियों के कारण भूस्खलन होने का खतरा नहीं है। ज़ाहिर है यातायात बड़े पैमाने पर प्रभावित नहीं होगा.

स्काइमेट के अनुसार, एक लम्बे अंतराल के बाद एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत के पहाड़ी हिस्सों को प्रभावित करने वाला है। इस सिस्टम का बड़ा असर उत्तर भारत के मैदानी भागों में देखने को नहीं मिलेगा। हालांकि उत्तरी पंजाब और हरियाणा में कहीं-कहीं गरज के साथ हल्की बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।

(स्काईमेट वेदर से साभार)

MP में निर्दलीय प्रत्याशी की गाड़ी में नक्सलियों ने लगाई आग, छिंदवाड़ा में पीठासीन अधिकारी की मौत


छिंदवाड़ा में एक महिला पीठासीन अधिकारी की हार्ट अटैक से मौत हो गई. अधिकारी का नाम सुनंदा कोचेकर है. यह महिला अफसर बूथ क्रमांक 218 पर तैनात थीं.

मध्य प्रदेश के बालाघाट में पूर्व विधायक और निर्दलीय प्रत्याशी किशोर समरीते के वाहन को अज्ञात नक्सलियों ने चौरिया घाट दुर्गा मंदिर के पास आग के हवाले कर दिया. घटना की पुलिस अधीक्षक ने पुष्टि की है. जानकारी मिली है कि नक्सलियों ने किशोर समरीते को डेढ़ घंटे बंधक बनाकर रखा. बाद में वह पैदल पौसेरा पहुंचे और फिर वाहन से लांजी पहुंचकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.

घटना देवरबेली चौकी के चौरिया की बताई जा रही है. समरीते ने कुछ दिन पहले सुरक्षा की मांग की थी. सरकार ने उन्हें गनमैन दिया था. बताया जा रहा है कि समरीते देर रात वाहन चालक के साथ गए थे, लेकिन इस दौरान उनके साथ सुरक्षाकर्मी नहीं थे. लांजी थाने में शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस ने हॉक फ़ोर्स को घटनास्थल के लिए रवाना किया.

पीठासीन अधिकारी की मौत
छिंदवाड़ा में एक महिला पीठासीन अधिकारी की हार्ट अटैक से मौत हो गई. अधिकारी का नाम सुनंदा कोचेकर है. ये महिला अफसर बूथ क्रमांक 218 पर तैनात थीं.

EVM में आई खराबी
जबलपुर में मॉकपोल के दौरान EVM मशीन में ख़राबी आ गई. यहां के बूथ क्रमांक 219 की EVM में ख़राबी आ गई. कांग्रेस प्रत्याशी विवेक तन्खा को इसी बूथ पर मतदान करना है. मशीन में तकनीकी खराबी के कारण बदला जा रहा है.

Lok Sabha Election 2019: नौ राज्यों के 71 सीटों पर मतदान आज, कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर


नई दिल्ली । लोकसभा चुनाव के चौथे चरण में सोमवार को नौ राज्यों के 71 संसदीय क्षेत्रों में मतदान है। भारतीय लोकतंत्र के सियासी त्योहार का यह चरण सत्तारूढ़ भाजपा और उसके सहयोगी दलों के लिए नाक का सवाल हो सकता है।

चूंकि 2014 के आम चुनाव में राजग यहां की 56 सीटों पर काबिज हुआ था। तब कांग्रेस को केवल दो सीटें और अन्य विपक्षी दलों में तृणमूल कांग्रेस को छह और बीजू जनता दल को भी छह सीटें ही मिली थीं। सोमवार को सुबह सात बजे से शाम छह बजे तक महाराष्ट्र की 17 सीटों, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की 13-13 सीटों, पश्चिम बंगाल की आठ, मध्य प्रदेश की छह, ओडिशा की छह, बिहार की पांच और झारखंड की तीन सीटों के लिए मतदान होना है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर की अनंतनाग सीट के कुछ हिस्सों में भी मतदान होगा। पिछले आम चुनाव यानी 2014 में भाजपा ने राजस्थान और मध्यप्रदेश में कुल 54 सीटों में से दो को छोड़कर सब पर भगवा रंग चढ़ा दिया था।

आस्था का केंद्र बलारी माता मंदिर के भक्तों ने दी मतदान न करने की चेतावनी।



ग्रामीणों ने दिया अल्टीमेटम
शिवपुरी। जन जन की आस्था के केंद्र बलारी माता मंदिर जाने के लिए अब वन विभाग ने ट्रेक्टर, बस, मोटरसाइकिल चालकों से वसूली शुरू कर दी है। जिससे बलारी मां के भक्तों में आक्रोश है। इससे व्यथित होकर बलारी मंदिर पर महंत प्रयाग भारती के नेतृत्व में भक्तों ने बैठक आयोजित की। जिसमें वन विभाग द्वारा की जा रही अवैध वसूली की निंदा करते हुए अल्टीमेटम दिया कि यदि मंदिर पर जाने वाले भक्तों से वसूली नहीं रूकी तो वे इस बार मतदान का बहिष्कार करेंगे और लोकसभा चुनाव में न तो कांग्रेस न भाजपा और न ही किसी अन्य दल अथवा निर्दलीय उम्मीदवार को वोट देंगे।
महंत प्रयाग भारती ने बताया कि बलारी माता का मंदिर अत्यंत प्राचीन मंदिर है और इस मंदिर पर जाने के लिए मुस्लिम शासकों और ब्रिटिश शासकों के समय भी वसूली नहीं होती थी, लेकिन अब वन विभाग वालों ने मनमानी वसूली शुरू कर दी है। ट्रेक्टर वालों से 150 रूपए, कार वालों से 100 रूपए से लेकर 50 रूपए तथा मोटरसाइकिल चालकों से 10 रूपए की वसूली की जा रही है। अर्थात मंदिर के दर्शन करना है तो आपको वन विभाग को यह चढ़ावा चढ़ाना ही होगा। भक्त विनयराज ने बताया कि क्या जमाना आ गया है कि हम अपने मंदिर भी बिना पैसे दिए नहीं जा सकते। मंदिर पर आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के सैंकड़ों लोग एकत्रित हुए और जिन्होंने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि वे वसूली न रूकने पर मतदान का बहिष्कार करेंगे।
इनका कहना है।
बिना शुल्क अदा किए किसी को नहीं जाने दिया जाएगा : उपसंचालक यादव
नेशनल पार्क के उपसंचालक बीएस यादव ने अपनी प्रतिक्रिया में बताया कि सप्तमी पर भक्तों के लिए मार्ग खुला हुआ था, लेकिन अब तो निर्धारित शुल्क अदा कर ही मंदिर पर जाया जा सकता है। रास्ता हमने बंद नहीं किया है । यह निर्देश हैं कि पार्क क्षेत्र में वाहनों के प्रवेश पर शुल्क लगेगा और इस नियम के आधार पर ही शुल्क लिया जा रहा है।

ट्रेनों में पिछले साल एक दशक की सबसे ज्यादा चोरियां, 2014 से अब तक ढाई गुना बढ़ गए अपराध

भारतीय रेलवे I: पिछले दस साल के दौरान रेल यात्रियों ने रेलगाड़ियों में चोरी के 1.71 लाख मामले दर्ज कराए है। रेल मंत्रालय के आंकड़ों में यह जानकारी मिली है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि रेलवे अपने यात्रियों के सामान की सुरक्षा करने की पुख्ता व्यवस्था नहीं कर पाया है। ये आंकड़े बताते हैं कि रेलवे के सुरक्षा प्रबंध में खामियां हैं। पिछले एक दशक में चोरी के सबसे अधिक 36,584 मामले 2018 में दर्ज हुए हैं। वहीं, 2014 से अब तक अपराध के मामले ढाई गुना बढ़ गए हैं।

पीटीआई संवाददाता की ओर से सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत मांगी गई जानकारी से यह खुलासा हुआ है। मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार 2017 में चोरी के 33,044 मामले दर्ज किये गये, वर्ष 2016 में 22,106 और 2015 में 19,215 मामले दर्ज किये गये। इसी तरह 2014 में ट्रेनों में चोरी के 14,301, वर्ष 2013 में 12,261, वर्ष 2012 में 9,292, 2011 में 9,653, 2010 में 7,549 और 2009 में 7,010 मामले दर्ज हुए। वर्ष 2009 से 2018 के दौरान ट्रेनों में चारी के मामलों में पांच गुना वृद्धि हुई है। कुल मिलाकर 2009 से 2018 के दौरान ट्रेनों में चोरी के कुल 1,71,015 मामले दर्ज किये गये। ये आंकड़े इस दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं कि रेल यात्री समय-समय पर सोशल मीडिया पर सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को लेकर चिंता जताते रहते हैं।

भारतीय रेल दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है। भारतीय रेल नेटवर्क को 16 जोन में विभाजित किया गया है। इनमें उत्तर रेलवे, उत्तर पूर्वी रेलवे या पूर्वोत्तर रेलवे, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे, पूर्व रेलवे, दक्षिण पूर्व रेलवे, दक्षिण मध्य रेलवे, दक्षिण रेलवे,  मध्य रेलवे, पश्चिम रेलवे, दक्षिण पश्चिम रेलवे, उत्तर पश्चिम रेलवे, पश्चिम मध्य रेलवे, उत्तर मध्य रेलवे, दक्षिणपूर्व मध्य रेलवे, पूर्व तटीय रेलवे और पूर्वमध्य रेलवे शामिल है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने अधिकार क्षेत्र की समस्या को देखते हुए रेल मंत्रालय को ऑनलाइन एफआईआर की सुविधा शुरू करने तथा रेल पुलिस अधिकारियों को यात्रियों के साथ मित्रवत व्यवहार करने का निर्देश दिया था।

अधिकारियों ने बताया कि रेलवे की ओर से प्रतिदिन 19,000 से अधिक ट्रेनों का परिचालन किया जाता है। रोजाना 1.3 करोड़ लोग रेल यात्रा करते हैं। रेल मंत्रालय के मुताबिक, ‘‘दैनिक आधार पर औसतन 2,500 मेल..एक्सप्रेस ट्रेनों का रेलवे सुरक्षा बल, रेलवे सुरक्षा विशेष बल की सुरक्षा में परिचालन किया जाता है। इसके अलावा करीब 2,200 ट्रेनों का सरकारी रेलवे पुलिस स्टाफ की सुरक्षा में परिचालन होता है।’’ एक अन्य सवाल के जवाब में रेल मंत्रालय ने कहा कि पिछले चार साल के दौरान रेल यात्रियों से पैसे ऐंठने अथवा छीनने के मामले में 73,837 किन्नरों को गिरफ्तार किया गया।

श्रीलंका ब्लास्टः मुख्य संदिग्ध के पिता और भाई की मौत

श्रीलंका में ईस्टर रविवार को हुए आत्मघाती धमाकों के मुख्य संदिग्ध ज़हरान हाशिम के पिता और दो भाई सुरक्षा बलों के एक ऑपरेशन में शुक्रवार को मारे गए.

पुलिस के मुताबिक ये माना जा रहा है कि हाशिम की मां भी मारी गई हैं. इन सभी की मौत उस वक़्त हुई जब सुरक्षा बलों ने हमले के संदिग्धों के ठिकानों पर छापे की कार्रवाई की. रिपोर्टों के मुताबिक हाशिम के पिता और भाई ने धमाके में खुद को उड़ा लिया.

श्रीलंका सरकार के मुताबिक हाशिम की भी कोलंबो के एक होटल में आत्मघाती हमले में मौत हो गई. ये कहा जाता है कि वो इस्लामिक ग्रुप नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) के नेता थे. इस संगठन पर अब प्रतिबंध लगा दिया गया है.

पुलिस ने कट्टनकुडी के पूर्वी इलाक़े में स्थित समूह के मुख्यालय पर छापा मारा था.

पिछले रविवार को हुए हमलों में होटल और चर्चों को निशाना बनाया गया था, जिसमें कम से कम 250 लोग मारे गए थे.
हमले के बाद एहतियात के तौर पर देशभर के सभी चर्चों में रविवार को होने वाली प्रार्थना सभाओं को रद्द कर दिया गया.

हालांकि रविवार को सेंट एंटनी चर्च के बाहर लोग प्रार्थना के लिए जुटे. ये चर्च बीते रविवार के हमले में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है.

कैसे मारे गए रिश्तेदार

श्रीलंका पुलिस के मुताबिक शुक्रवार को हाशिम के शहर कट्टनकुडी में सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की. जैसे ही पुलिस हाशिम के घर पहुंची, सुरक्षाकर्मियों पर बंदूकधारियों ने हमला कर दिया.

तीन लोगों ने खुद को बम से उड़ा लिया, जिसमें छह बच्चे और तीन औरतें मारी गईं. गोलीबारी में तीन अन्य लोगों की भी मौत हो गई.

हमलों के तार एनटीजे नाम के एक समूह से जुड़ रहे हैं.
इस समूह के बारे में पहले बहुत कम लोग जानते थे.
हालांकि एनटीजे या किसी और समूह ने अब तक इन सिलसिलेवार धमाकों की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.
फिर भी आरोप अपनी जगह हैं और एनटीजे को लेकर चर्चाएं जारी हैं.
सोमवार को श्रीलंका सरकार के प्रवक्ता ने जब पहली बार इस समूह का नाम लिया तो यह एक अनजाना नाम था.
बताया जाता है कि यह समूह श्रीलंका के कट्टरपंथी इस्लामी समूह श्रीलंका तौहीद जमात (एसएलटीजे) से अलग होकर वजूद में आया है.
एसएलटीजे भी बहुत चर्चाओं में नहीं रहा है लेकिन फिर भी उसके बारे में कुछ जानकारियां उपलब्ध हैं. एसएलटीजे के सचिव अब्दुल राज़िक को 2016 में बौद्ध लोगों के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था. बाद में उन्होंने इस पर माफ़ी भी मांगी थी.
बीते दिसंबर में मध्य श्रीलंका के मॉनेला में बौद्ध मठों पर हुई तोड़फोड़ को भी कुछ रिपोर्टों में एसएलटीजे से जोड़ा गया था. उस वक़्त मठ के बाहर लगी बुद्ध की मूर्तियों को निशाना बनाया गया था.
श्रीलंका में मुसलमान अल्पसंख्यक हैं. देश की कुल आबादी का सिर्फ़ 9.7 फीसदी ही मुसलमान हैं.