पड़ोरा गेंहूं खरीदी केंद़ पर किसानों की नाराजी बन सकती है सिंधिया की हार का कारण

किसानों के नाम पर कलमें पढ़़ पढ़ कर शिवराज सरकार को कोसने वाले सिंधिया आज किसानों की अनदेखी कर रहे हैं. विधानसभा चुनाव में अन्नदाता के नाम की भाषणों में तहरीर पढ़ने वाले सिंधिया आज किसानों की समस्यों को लेकर अनदेखी कर रहे हैं.
इसका खामियाजा लोकसभा चुनाव में निश्चित भुगतना पड़ेगा. पड़ोरा गेंहूं खरीदी केंद़ पर रोजाना करीब 500 ट्रेक्टर गेंहूं भरकर पहुंच रहा है, लेकिन किसान को जो सुविधायें वहां मिलना चाहिये नहीं मिल रहीं हैं, 40 डिग़ी तापमान में किसान की नाराजी अव्यवस्थायों को लेकर देखने को मिल रही है मीडिया भी रात दिन लिख रहा है लेकिन श्री मानों के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही. ऐसा न हो चुनाव आते आते केवल पड़ोरा जायलो केंद़ से वापिस होकर आया किसान एक महीने में हजारों वोटों से पीछे सिंधिया को धकेल दे.
गांवों और शिवपुरी शहर की पेयजल समस्या दूसरी ऐसी समस्या है जो जनता की नाराजी का कारण बन रही है.
जो किसानोॆ के नाम पर भोपाल में सत्ता पर जाकर काबिज हो गये हैं वो शायद भूल गये हैं अगले महीने उसी जनता को फिर वोट डालना है और नतीजा क्या होगा ये आप अभी से अंदाजा लगा सकते हैं.

फूप पुलिस की बड़ी कार्यवाही,चेकिंग के दौरान पकड़े 31 लाख रुपये।




भिण्ड।आचार संहिता में चेकिंग के दौरान अबतक का सबसे बड़ा कैश फूप थाने में पकड़ा,सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार 31 लाख 93000 रु बोलेरो गाड़ी में चेकिंग के दौरान पकड़े,पुलिस पूछताछ में जुटी।इससे पूर्व भी चेकिंग के दौरान पकड़े गए थे 18 लाख रुपये।

भारत के इतिहास में पहली बार एक महिला को होगी फाँसी की सजा



यूपी के अमरोहा डिस्ट्रिक्ट का गांव – बावनखेड़ी. रात के लगभग डेढ़ दो बजे होंगे. एक लड़की ज़ोर-ज़ोर से चीखती है. उसकी चीख सुनकर आस पड़ोस वाले इकट्ठा हो जाते हैं. घर के अंदर घुसते हैं तो वहां के हालात देखकर दंग रह जाते हैं. अंदर सात लाशें पड़ी हैं. इस लड़की के परिवार के सारे सदस्य मारे गए हैं.

जीवित बची है तो ये 25 साल की लड़की, जिसका नाम शबनम है. जो मरे, वो थे – शबनम के मां-बाप. शबनम के दो भाई. शबनम की एक भाभी. शबनम की एक मौसी की बेटी. शबनम का एक भतीजा.रुकिए! दरअसल ज़िंदा बचने वालों में केवल शबनम ही नहीं थी. कोई और भी उसके परिवार में था जिसे एक खरोंच तक नहीं लगी. और वो था, उसके पेट में दो महीने का बच्चा. बहरहाल, इस घटना के चलते इतनी घुप्प रात में उस सुनसान से गांव में भी हड़कंप मच जाता है. आस-पास के गांव से भी भीड़ इकट्ठी हो जाती है.

मीडिया से लेकर पुलिस, नेता सब पहुंच जाते हैं. इकट्ठा हुए लोगों के बीच आपस में खुसुर-फुसुर होने लगती है. लेकिन इन सभी बातों में, कानाफूसियों में, अनुमान की मात्रा ज़्यादा और सच की कम, बहुत कम रहती है. क्यूंकि कोई नहीं जानता कि ये सब क्यूं हुआ. कई लोग तो अब तक ये भी सही से नहीं जान पाते कि क्या हुआ. जानते हैं तो बस इतना कि कुछ बुरा, बहुत बुरा हुआ है. ऐसा जो इस गांव को हमेशा के लिए बदल कर रख देगा.

उधर शबनम पछाड़ खाते हुए, बिलखते हुए इस रात की घटना सबको बताती है. कि कैसे लुटेरे उसके घर में घुस गए और उसके पूरे परिवार का क़त्ल कर डाला. वो बच गई क्यूंकि वो बाथरूम में थी.यूं एक तरफ पुलिस उन लुटेरों की खोजबीन में लग जाती है और दूसरी तरफ तफ्तीश और पोस्टमॉर्टम भी करवा लेती है. उस दिन के कॉल डिटेल्स भी निकाले जाते हैं. लुटेरे तो नहीं मिलते लेकिन बाकी की जांच से निकल कर आता इन कत्लों का घिनौना सच.

दरअसल पुलिस ने तफ्तीश में जाना कि वो लुटेरे नहीं थे जिन्होंने शबनम के परिवार का क़त्ल किया. क्यूंकि अव्वल तो मृतकों द्वारा खुद को बचाने की कोई कोशिश की गई हो, ऐसा किसी भी एंगल से नहीं दिखता था. साथ ही, जो क़त्ल का उद्देश्य शबनम बता रही थी – यानी लूट-पाट – ऐसा पूरे घर में कुछ भी नहीं पाया गया था. और हां, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में ये भी पता चला कि मृतकों की हत्या करने से पहले उन्हें बेहोशी की दवाई या कोई ज़हर भी दिया गया था.तो?

लेकिन दोनों के परिवारों को, ख़ास तौर पर शबनम के परिवार को ये रिश्ता कतई मंज़ूर न था. उधर शबनम को परिवार का ये रिश्ता मंज़ूर न करना मंज़ूर न था. बस फिर क्या था, जैसे वन फाइन डे होता है, वैसे ही वन बेड नाईट में शबनम ने मौका देखकर और सलीम के साथ प्लानिंग कर इन 7 लोगों की हत्याओं को अंजाम दे दिया.

पहले इन दोनों ने सबके खाने में कुछ मिलाया और उसके बाद एक धारदार कुल्हाड़ी से एक के बाद एक, पूरे परिवार की हत्या कर दी. जिस एक इंसान के साथ शबनम उस रात लगातार कॉल में थी वो दरअसल सलीम ही था. सलीम ने भी अपना जुर्म कबूल कर लिया था और वो कुल्हाड़ी, जिससे क़त्ल किया गया था, वो भी ठीक उसी जगह मिली जहां उसने बताई थी. यानी एक गंदले से तालाब के किनारे.

माखनलाल चतुर्वेदी विवि के पूर्व कुलपति कुठियाला समेत 20 लोगों पर FIR दर्ज


भोपाल //

भोपाल के माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय में अनियमितता का मामला सामने आया है। जहां पूर्व कुलपति बीके कुठियाला समेत 20 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

आपको बता दें रजिस्ट्रार ने अनियमितता को लेकर कार्रवाई की सिफारिश की थी, जिसके बाद तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट पर कार्रवाई की गई है। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति बी के कुठियाला समेत 20 प्रोफ़ेसरों और शिक्षकों के ख़िलाफ़ 420 और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किए गए हैं.

एफआईआर के मुताबिक़ पूर्व कुलपति बी के कुठियाला पर आरोप है कि उन्होंने यूजीसी के नियमों को ताक पर रखकर अपने आठ साल के (2010-18) कार्यकाल में विश्वविद्यालय में नियमों के ख़िलाफ़ नियुक्तियां की. साथ ही संघ से जुड़े संगठनों को नियमों के ख़िलाफ़ आर्थिक मदद पहुंचाई जिससे विश्वविद्यालय को आर्थिक हानि हुई. 19 शिक्षकों पर ग़लत ग़लत तरीक़े से नियुक्ति होने के मामले में कार्रवाई हुई है.

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति बी के कुठियाला समेत 20 प्रोफ़ेसरों और शिक्षकों के ख़िलाफ़ 420 और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज

इससे पहले ईओडब्ल्यू के महानिदेशक के. एन. तिवारी ने कहा था, “विश्वविद्यालय की ओर से नियुक्तियों से लेकर व अन्य मामलों की शिकायत उनके पास आई है. इस शिकायत का परीक्षण कराया जा रहा है. उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।”

बता दें कि राज्य में कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद सरकार ने विश्वविद्यालय की पूर्व की गतिविधियों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई थी. इस समिति ने बड़े खुलासे किए थे. समिति की जांच रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने ईओडब्ल्यू में शिकायत की है.

दरअसल विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार दीपेंद्र सिंह बघेल ने ईओडब्ल्यू को चिट्ठी लिखकर पूर्व कुलपति बीके कुलपति बीके कुठियाला के कार्यकाल में हुई नियुक्ती में गड़बड़ी को लेकर कुठियाला और नियम विरुद्ध तरीके से हुई भर्तियों पर एफआईआर दर्ज करने को कहा था।

माखन लाल विश्वविद्यालय के कुल 20 लोगों पर हुआ मामला दर्ज

2003 से 2018 तक की नियुक्तियों और वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर चल रही थी जाँच..
डॉक्टर ब्रज किशोर कठीयया
डॉक्टर अनुराग सिठा
डॉक्टर पी शशि कल
डॉक्टर पवित्रा श्रीवास्तव
डॉक्टर अरुण कुमार भगत
डॉक्टर रजनी नागपाल
डॉक्टर संजय द्विवेदी
डॉक्टर अनुराग बाजपेयी
डॉक्टर कंचन भाटिया
डॉक्टर मनोज कछारिया
डॉक्टर आरती सारंग
डॉक्टर रंजन सिंह
डॉक्टर सुरेन्द्र पोल
डॉक्टर सौरभ मालवीय
डॉक्टर सूर्य प्रकाश
डॉक्टर प्रदीप डहेरिया
डॉक्टर सतेंद्र डहेरिया
डॉक्टर गजेंद्र सिंह
डॉक्टर कपिल राज
डॉक्टर मोनिका वर्मा