नामांकन भरने से पहले सोनिया ने किया पूजा पाठ राहुल-प्रियंका भी रहे मौजूद

रायबरेली. यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी गुरुवार को रायबरेली लोकसभा सीट से 5वीं बार नामांकन दाखिल करेंगी। इससे पहले उन्होंने पूजा और हवन किया। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौजूद थे। सोनिया इस सीट पर 2004 से प्रतिनिधित्व करती आ रहीं हैं। इस बार उनका मुकाबला कभी कांग्रेस में रहे दिनेश प्रताप सिंह से है। दिनेश को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया है।
रायबरेली में सोनिया रोड शो के बाद कलेक्ट्रेट में नामांकन दाखिल करेंगी। दोपहर बाद वे भुएमऊ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ बैठक भी करेंगी।
रायबरेली सीट पर सपा-बसपा गठबंधन ने उम्मीदवार नहीं उतारा है। इस सीट पर 5वें चरण में 6 मई को मतदान होगा। सोनिया ने साल 2004, 2006 के उपचुनाव, 2009 और 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की। साल 1957 के बाद कांग्रेस ने इस सीट पर उपचुनाव सहित 19 बार जीत दर्ज की है।

इस सीट से तीन बार हारा गांधी परिवार का उम्मीदवार
इस सीट से कांग्रेस को 1977, 1996 और 1998 में हार का सामना करना पड़ा। आपातकाल के बाद 1977 में भारतीय लोक दल के राज नारायण ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को हराया था। जबकि, 1996 एवं 1998 में भाजपा उम्मीदवार अशोक कुमार सिंह ने इस सीट पर जीत दर्ज की।

इजराइल/ आम चुनाव: 97% वोटों की गिनती पूरी, मोदी ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू को बधाई दी

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को जीत की बधाई दी। मोदी ने ट्वीट किया, ”मेरे मित्र बीबी, बधाई। आप भारत के महान मित्र हैं। मैं आपके साथ पुनः काम करने के लिए उत्सुक हूं। मेरी इच्छा है कि हमारी द्विपक्षीय साझेदारी एक नए पड़ाव पर पहुंचे।” 2017 में प्रधानमंत्री मोदी इजराइल जाने वाले पहले प्रधानमंत्री थे। नेतन्याहू ने मोदी को एयरपोर्ट पर रिसीव किया था।

9 अप्रैल को इजराइल में वोट डाले गए

इजराइल में 97% वोटों की गिनती हो चुकी है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और बेनी गेंट्ज की ब्लू एंड व्हाइट पार्टी ने नेसेट (संसद) में 35-35 सीटें जीत ली हैं। दोनों पार्टियां दक्षिणपंथी हैं। नेतन्याहू को 26.28% और ब्लू एंड व्हाइट पार्टी को 25.97% वोट मिले। 9 अप्रैल को इजराइल में वोट डाले गए थे।

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर हुआ भीषण हादसा, 8 लोगों की मौत

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर गुरुवार सुबह हुए भीषण हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई है. एक्सप्रेस वे पर खड़े एक ट्रक में अर्टिगा कार घुसने से यह हादसा. हादसे में 6 लोगों की मौके पर मौत हो गई जबकि 2 लोगों ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. थाना फतेहाबाद क्षेत्र में यह भीषण हादसा हुआ. सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. घटना के बाद मृतकों के परिवार में कोहराम मचा हुआ है.

जानकारी के मुताबिक, आगरा के फतेहाबाद क्षेत्र में एक्सप्रेसवे आज सुबह तेज रफ्तार एर्टिगा कार आगे चल रहे ट्रक में जा घुसी. इस हादसे में कार सवार सभी आठ लोगों की मौके पर ही मौत हो गई. मृतकों में सात युवक जौनपुर और एक आजमगढ़ का रहने वाले है. सभी आगरा के डॉ भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी कैंपस में शिक्षक के लिए इंटरव्यू देने आ रहे थे. घटना के बाद कार के परखच्चे उड़ गए.

बताया जाता है कि एर्टिगा कार लखनऊ की ओर से आ रही थी. तेज रफ्तार होने के कारण अर्टिगा कार आगे चल रहे ट्रक से टकराई गई. टक्कर के बाद ट्रक और कार के टायर फट गए और एर्टिगा कार ट्रक के नीचे घुस गई. राहगीरों ने हादसे की सूचना थाना पुलिस को दी. मौके पर पहुंची पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. घटना के बाद मृतकों के परिवार में कोहराम मचा हुआ है.

        आगरा से श्रीकांत मिश्रा 
द न्यूज़ लाइट ,संवाददाता

छह अरब से ज्यादा के मालिक हैं मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे नकुलनाथ , छिंदवाड़ा से लड़ रहे हैं चुनाव

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार मुख्यमंत्री कमलनाथ के पुत्र नकुलनाथ के पास छह अरब रुपये से अधिक की चल-अचल संपत्ति है. जबकि उनकी पत्नी प्रिया की संपत्ति दो करोड़ रुपये से अधिक है.नकुलनाथ की तरफ से मंगलवार को नामांकन के दौरान पेश किए गए हलफनामे के अनुसार, उनके पास कुल 615,93,17,714 रुपये की चल-अचल संपत्ति है. वहीं पत्नी प्रिया नाथ के नाम पर 2,30,31,907 रुपये मूल्य की चल-अचल संपत्ति है. हलफनामे के अनुसार, हालांकि वित्त वर्ष 2017-18 में प्रिया की आय पति नकुलनाथ से अधिक रही है. आयकर रिटर्न में नकुलनाथ की आय 2,76,81,446 रुपये दिखाई गई है, जबकि उनकी पत्नी प्रिया की आय 4,18,21,829 रुपये है.नकुलनाथ ने हलफनामे में बताया है कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है. साथ ही उन्हें किसी मामले में कोई सजा भी नहीं हुई है.

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आखिर नकुलनाथ ने पहन लिया कुर्ता-पायजामा
कमलनाथ के 17 दिसंबर, 2018 को मुख्यमंत्री बनने के बाद से इस बात के कयास थे कि छिंदवाड़ा संसदीय सीट से नकुलनाथ ही चुनाव लड़ेंगे. पूर्व विधायक दीपक सक्सेना ने तो मंच से नकुलनाथ की उम्मीदवारी तक घोषित कर दी थी. तब नकुलनाथ ने कहा था, “दीपक भाई और गंगा भाई ने प्रत्याशी के रूप में मेरा नाम घोषित कर दिया है. लेकिन जिस रोज मुझे जींस और शर्ट में नहीं देखना, कुर्ता-पाजामा में देखना उस दिन समझ लेना मैं आपका प्रत्याशी हूं.”

नकुलनाथ मंगलवार को अपने पिता मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ लगभग उन्हीं जैसे पहनावे यानी कुर्ता-पाजामा में और गले में कांग्रेस के झंडे के रंग और पंजे के प्रतीक वाला पट्टा डाले नजर आए। सोमवार रात तक नकुलनाथ जींस और शर्ट में ही रहे. मगर मंगलवार को नामांकन भरने से पहले उनका पहनावा बदल गया.

कमलनाथ नौ बार से छिंदवाड़ा संसदीय सीट से सांसद रहे हैं. उनका परिवार लगभग चार दशक से इस संसदीय क्षेत्र में सक्रिय है. अब कमलनाथ ने मुख्यमंत्री बनने के बाद अपना क्षेत्र बेटे के सुपुर्द कर दिया है. उन्होंने कहा था, “मुझ पर प्रदेश की जिम्मेदारी है, छिंदवाड़ा की जिम्मेदारी अपने बेटे नकुलनाथ को दे रहा हूं. इनको पकड़कर रखिएगा, काम न करें तो इनके कपड़े फाड़िएगा”

निजामाबाद में 26 हजार ईवीएम से हो रहा मतदान, गिनेस वर्ल्ड रेकॉर्ड में हो सकता है शामिल

निजामाबाद 
लोकसभा चुनाव के पहले चरण में 91 सीटों पर मतदान जारी है। इसमें सभी की निगाहें तेलंगाना की निजामाबाद सीट पर टिकी हुई हैं। इस सीट पर दिलचस्प मुकाबला हो रहा है। एक तरफ सत्तारूढ़ टीआरएस के मुखिया चंद्रशेखर राव की बेटी के कविता हैं तो दूसरी तरफ उनके खिलाफ 178 किसान चुनाव लड़ रहे हैं। इस सीट पर कुल 185 प्रत्याशी अपनी किस्मत पर दांव आजमा रहे हैं। प्रत्याशियों की संख्या को देखते हुए चुनाव आयोग ने यहां वोटिंग के लिए 26 हजार ईवीएम मंगवाई हैं जो जल्द ही गिनेस वर्ल्ड रेकॉर्ड में शामिल हो सकता है। 

तेलंगाना के मुख्य चुनाव आयुक्त रजत कुमार ने बताया, ‘हमने गिनेस वर्ल्ड रेकॉर्ड के प्रतिनिधियों को लिखा है कि हमने निजामाबाद के किसी भी चुनाव में सबसे अधिक संख्या में ईवीएम लगाई हैं। गिनेस की टीम जल्द ही निजामाबाद का दौरा कर सकती है।’ सर्वाधिक ईवीएम के अलावा इस संसदीय क्षेत्र ने दूसरा रेकॉर्ड भी बनाया है। साधारण तौर पर एक कंट्रोल यूनिट से 4 बैलेटिंग यूनिट जुड़ी होती हैं लेकिन निजामाबाद में 12 बैलेटिंग यूनिट प्रत्येक कंट्रोलिंग यूनिट से जोड़ी गई हैं। 

हर बूथ पर 12 ईवीएम 
इस प्रकार प्रत्येक पोलिंग बूथ में एक कंट्रोल यूनिट, 12 बैलेट यूनिट और एक वीवीपैट मशीन लगाई गई हैं। यह सभी मिलकर ईवीएम बनाते हैं। सूत्रों के अनुसार, गिनेस टीम गुरुवार को ही निजामाबाद का दौरा करने वाली है और बाद में सभी ईवीएम को चुनाव परिणाम के बाद भी स्ट्रॉन्ग रूम में छह महीनों के लिए स्टोर किया जाएगा। 

मतदान पर 35 करोड़ रुपये खर्च 

इस बार निजामाबाद लोकसभा सीट से 178 किसान सहित 185 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। इसकी वजह से यहां हो रहे मतदान पर 35 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं जोकि औसत खर्च से 15 करोड़ रुपये ज्यादा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी रजत कुमार ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि निजामाबाद क्षेत्र में 7 विधानसभा क्षेत्र हैं और प्रत्येक पर औसत खर्च तीन करोड़ रुपये है यानी कुल मिलाकर 21 करोड़ रुपये आना चाहिए। हालांकि निजामाबाद से खड़े उम्मीदवारों को देखा जाए तो यहां अतिरिक्त 15 करोड़ रुपये की जरूरत है। 

कविता के खिलाफ 178 किसान उतरे मैदान पर 
तेलंगाना में सत्तारूढ़ टीआरएस के खिलाफ किसानों में रोष है। इसी के चलते यहां से टीआरएस उम्मीदवार के कविता के खिलाफ 178 किसानों ने नामांकन दाखिल किया था। ये किसान अपनी उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय करने में नाकाम रहने पर राज्य में सत्तारूढ़ दल टीआरएस के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। किसानों द्वारा हल्दी और लाल ज्वार के लिए एमएसपी और यहां एक हल्दी बोर्ड का गठन किए जाने की मांग करने को लेकर निजामाबाद सुर्खियों में रहा है। माना जा रहा है कि बड़ी तादाद में किसानों के चुनाव लड़ने से सत्तारूढ़ दल का वोट बैंक प्रभावित होने वाला है। 

तेलंगाना की 17 सीटों पर हो रहा है चुनाव 
कई किसान मंडल परिषद क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्र (एमपीटीसी) और जिला परिषद क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव भी लड़ेंगे। निजामाबाद में टीआरएस राज्य सभा सदस्य डी श्रीनिवास के बेटे डी अरविंद बीजेपी के उम्मीदवार हैं। कांग्रेस ने एआईसीसी सचिव मधु यक्षी गौड़ को अपना उम्मीदवार बनाया है। तेलंगाना में लोकसभा की कुल 17 सीटें हैं और सभी पर गुरुवार को मतदान जारी है। 

बिहार/ मोदी ने कहा- आपने 70 साल लाल बत्ती का रौब देखा, इसे हटाकर हमने गरीबों के घर सफेद बत्ती दी

भागलपुर.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार कोबिहार में भागलपुर मेंचुनावी सभा की। उन्होंने कहा कि70 साल तक आपने लाल बत्ती के रौब को बढ़ते देखा, लेकिन गरीब के घर बत्ती जले, इसकी चिंता नहीं की गई। आपके इस चौकीदार ने लाल बत्ती हटाई और गरीबों के घर सफेद बत्ती जलाई। मोदी की इस सभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी और लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान भी मौजूद रहे।

‘गांव-गांव तक सड़कें पहुंचाईं’

मोदी ने कहा, “नेताओं को अपने आंगन तक चकाचक सड़क पहुंचाते तो आपने बहुत देखा, बिहार के गांव-गांव तक सड़कें पहुंचाने का बीड़ा इस चौकीदार और उसके साथियों ने उठाया है। बड़े-बड़े फार्म हाउस वाले, महल जैसे बंगले बनाने वाले, नामी-बेनामी संपत्ति खड़े करने वाले भी आपने बहुत देखे। उनसे अलग आपके इस चौकीदार ने आपके चूल्हे-चौके का ध्यान रखा है। 70 साल तक आपने लाल बत्ती के रौब को बढ़ते देखा लेकिन गरीब के घर बत्ती जले, इसकी चिंता नहीं की गई। आपके इस चौकीदार ने लाल बत्ती हटाई और गरीबों के घर सफेद बत्ती जलाई है।”
पाक के हुक्मरानों के चेहरे पर अब डर दिखता है’
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “शांति की बात वही कर सकता है जिसकी भुजाओं में दम होता है। 2014 से पहले पाकिस्तान का रवैया क्या था। आतंकवादी भी पाक भेजता था और धमकियां भी पाक ही देता था। कांग्रेस की सरकार सिर्फ कागजी कार्रवाई में ही उलझ कर रह जाती थी। आज पाक की स्थिति देखिए। वहां के हुक्मरान हों या आतंक के आका, डर उनके चेहरे पर दिख रहा है। आज वे दुनिया में जाकर अपने डर का रोना रो रहे हैं। लेकिन दुनिया में आज कोई पाकिस्तान को घास डालने वाला नहीं बचा।”

पीएम बनने के बाद दूसरी बार भागलपुर आए मोदी

प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी दूसरी बार भागलपुर आए।इससे पहले वे 2015 में भागलपुर आए थे। तब राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले थे। पीएम इन वेटिंग रहते 2014 में उन्होंने सैंडिस कंपाउंड में सभा को संबोधित किया था।

भोपाल/ बैंक मैनेजर के पांच ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा, करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज मिले

भोपाल.राजधानी के ई-3 अरेरा कॉलोनी स्थित नुपुर कुंज बैंक मैनेजर के घर सहित पांच ठिकानों पर लोकायुक्त की टीम ने बुधवार सुबह छापा मारा है। कॉपरेटिव बैंक का मैनेजर एससी सिटोके सिवनी मालवा में पदस्थ है। भोपाल, सिवनी मालवा, हरदा, टिमरनी और बैंक में लोकायुक्त ने एक साथ ये कार्रवाई की है।
लोकायुक्त टीम के एक अधिकारी ने बताया कि उन्हें बैंक मैनेजर के यहां आय से अधिक संपत्ति की जानकारी मिली थी, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। घर से करोड़ों रुपए की बेनामी संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं। घर पर बेटे के अलावा कोई अन्य सदस्य नहीं मिला।बेटे से पूछताछ की जा रही है। वहीं, अन्य दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है, कार्रवाई पूरी होने के बाद ही खुलासा किया जा सकेगा।

राफेल डील पर मोदी सरकार को ‘क्लीन चिट’ नहीं, चुनाव से पहले राहुल को मिला दम

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का मोदी सरकार के खिलाफ जो सबसे बड़ा मुद्दा (राफेल डील) चुनाव आते-आते फीका पड़ता दिखाई दे रहा था, उसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश से एक बार फिर ताकत मिल गई है. वो भी ऐसे वक्त जब लोकसभा चुनाव 2019 के लिए पहले चरण के मतदान में महज चंद घंटे बचे हैं. ऐसे में सवाल ये है कि मोदी सरकार व भारतीय जनता पार्टी सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश के आधार पर इस केस में क्लीन चिट मिलने का जो दावा कर रही थी, क्या वो फिलहाल गलत साबित हो गया है और राहुल गांधी के आरोपों को चुनाव से ठीक पहले नई ताकत मिल गई है?

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने राफेल डील केस से जुड़ी पुनर्विचार याचिका पर जैसे ही सुनवाई का निर्णय लिया, इसके तुरंत बाद मोदी सरकार को क्लीन चिट के दावे पर सवाल उठने लगे. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा, ‘मोदी जी हर जगह कह रहे थे कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट से राफेल में क्लीन चिट मिली है. आज के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से साबित हो गया कि मोदी जी ने राफेल में चोरी की है.’

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी लंबे समय से मोदी सरकार पर राफेल डील में चोरी का ही आरोप लगा रहे हैं. यहां तक कि वह चुनावी रैलियों में भी पीएम नरेंद्र मोदी के लिए ‘चौकीदार चोर है’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं. हालांकि, राहुल गांधी के आरोपों को 14 दिसंबर 2018 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बड़ा झटका लगा था, जिसमें कोर्ट ने राफेल लड़ाकू विमान की खरीद प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गलती दिखाई नहीं देने की टिप्पणी की थी.
कोर्ट के इसी आदेश को नरेंद्र मोदी खुद व पूरी बीजेपी और एनडीए के दूसरे सहयोगी राफेल डील में सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट मिलने का दावा कर रहे थे. लेकिन याचिकाकर्ताओं ने पुनर्विचार याचिका दायर कर कुछ अहम दस्तावेज सबूत के तौर पर कोर्ट के सामने रखे थे. इन दस्तावेजों पर केंद्र ने कोर्ट में कहा था कि याचिकाकर्ताओं (प्रशांत भूषण, अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा) ने विशेष दस्तावेज गैरकानूनी तरीके से हासिल किए और कोर्ट के पुराने निर्णय को चुनौती देने के लिए इसका प्रयोग किया गया. इस पर कोर्ट ने कहा कि हम केन्द्र द्वारा समीक्षा याचिका की स्वीकार्यता पर उठाई प्रारंभिक आपत्ति को खारिज करते हैं.

यह कहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुनर्विचार याचिकाओं पर गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया जाएगा और सुनवाई के लिए तारीख तय की जाएगी. यानी अब राफेल डील में सुप्रीम कोर्ट फिर सुनवाई करेगा, जिसे कांग्रेस सत्य की जीत बता रही है और उसने फिर से मोदी सरकार पर चोरी के आरोपों को मजबूती से उठाना शुरू कर दिया है.

गुना शिवपुरी लोकसभा सीट महाराज की विरासत खतरे में

एक तरफ मध्यप्रदेश में सिंधिया के चेहरे के दाम पर कांग्रेस सरकार बनाने में कामयाब रही।गुना सीट से देरी क्षेत्र में जनता के बीच चर्चा का विषय बन गया है
वहीं दूसरी ओर प्रत्याशी चयन में पसीने छूट रहे हैं । मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस को नहीं फायर ब्रांड और युवा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया को टारगेट किया था, इतना ही नहीं बाकायदा पार्टी ने सिंधिया को सामन्तवाद बताकर “माफ करो महाराज” कहकर प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में हाहाकार मचा रखी थी नतीजन ज्योतिरादित्य सिंधिया की लोकप्रियता बढ़ती गई और सूबे में जोड़ तोड़ कर कांग्रेस की सरकार बन गई ।
लेकिन सरकार बनाने के बाद भी मध्यप्रदेश के दिग्गज नेता वर्तमान सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी सीट को ही फाइनल नही कर सके। गुना या किसी और सीट से चुनाव लड़ेंगे, गुना सीट से भाजपा एव कांग्रेस दोनो ने अपने उम्मीदबार घोषित नही किए है सांसद सिंधिया इस सीट से भाजपा से भयभीत नजर आ रहे है
भाजपा ने भी अपनी रणनीति बनाकर सिंधिया को घिरने की तैयारी कर ली है
क्योंकि भाजपा गुना लोकसभा सीट पर सिंधिया को घेरने के लिए दिग्गज नेता को उतार सकती है
इस लिए कांग्रेस गुना सीट पर फैसला लेने में देरी सबसे बड़ा कारण हो सकता है
उधर बसपा प्रत्याशी ने अपने तूफानी जनसंपर्क से संसदीय क्षेत्र की गली गली नाप ली है । बसपा प्रत्याशी को भरपूर समर्थन भी मिल रहा है, लोकेंद्र सिंह नुक्कड़ सभाओं और जन चौपालों के माध्यम से लोगों को सामन्तवाद के खिलाफ लड़ने के लिए जागरूक कर रहे । सोशल मीडिया पर लोकेंद्र सिंह की आईटी सेल की काफी शक्रिय है, “माफ करो महाराज,वक़्त है बदलाव का” के माध्यम से सिंधिया पर तंज कसा जा रहा है । यही नहीं गुना संसदीय क्षेत्र की दुर्दशा को लोकेंद्र सिंह जनता को तुलनात्मक रूप से मतदाता को दिखाने की कोशिश कर रहे हैं तभी कि भाजपा प्रत्याशी घोषित होने के पूर्व ही सिंधिया को गुना पर गौर करना पड़ रहा है और उनका दर्द जुंबा पर आ रहा है कि इतना काम करने के बाद मैं शिवपुरी से हार क्यूँ जाता हूँ ।