पीएम मोदी के आरोपों पर अहमद पटेल ने कहा, ‘चौकीदार ने बिना सबूत गलत जगह हाथ डाला’

नई दिल्ली: कांग्रेस से सीनियर नेता अहमद पटेल ने पीएम मोदी के आरोपों पलटवार करते हुए कहा है कि चौकीदार और उनके शागिर्दों ने बिना सूबत के गलत जगह पर हाथ डाला है, जनता इन्हें सबक सिखाकर रहेगी। अहमद पटेल ने ट्वीट कर रहा है कि नोटबंदी और राफेल के दलाल अब बच नहीं पाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि आपने यह कहावत सुनी ही होगी कि एक चोर को हर कोई चोर ही नजर आता है। 
इससे पहले आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देहरादून की सभा में अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में गिरफ्तार बिचौलिया मिशेल का जिक्र किया और इसी घोटाले से जुड़ी चार्जशीट में एपी और एफएएम का भी जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा, ‘हेलिकॉप्टर के दलालों ने जिन लोगों को घूस देने की बात कही है.. उनमें से एक एपी है और दूसरा एफएएम है। इसी चार्जशीट में कहा गया है.. एपी का मतलब है अहमद पटेल और एफएएम का मतलब है फैमिली।

पीएम मोदी ने लोगों से पूछा, ‘अब आप बताइये अहमद पटेल किस फैमिली के निकट हैं? हेलिकॉप्टर की दलाली किसने खाई?’प्रधानमंत्री के भाषण के बाद अहमद पटेल ने ट्वीट किया और कहा कि चौकीदार और उनके शागिर्दों ने गलत जगह हाथ डाला है। 

राहुल गांधी की PM मोदी को लेकर ‘बदजुबानी’, आडवाणी के बारे में की आपत्तिजनक टिप्पणी

चंद्रपुर (महाराष्ट्र): कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ बदजुबानी कर दी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी का अपमान किया है और अपने गुरु का अपमान करना हिंदू संस्कृति नहीं है। आडवाणी के प्रति किए गए व्यवहार के बाद बृहस्पतिवार को आए उनके (आडवाणी के) ब्लॉग को लेकर राहुल ने मोदी पर यह तंज कसा है। दरअसल, आडवाणी ने अपने ब्लॉग में कहा है कि भाजपा ने अपने राजनीतिक विरोधियों को कभी राष्ट्र विरोधी नहीं माना। राहुल ने कहा, ‘‘भाजपा हिंदुत्व की बात करती है। हिंदुत्व में गुरु सर्वोच्च होता है। वह गुरु शिष्य परंपरा की बात करती है। मोदी के गुरु कौन हैं? आडवाणी हैं। मोदी ने आडवाणी को बाहर का रास्ता दिखा दिया (जूता मारके स्टेज से उतारा)।’’
राहुल ने कहा, ‘पीएम मोदी हिंदू धर्म की बात करते हैं, लेकिन हिंदू धर्म में सबसे जरूरी होता है गुरु और पीएम मोदी अपने गुरु आडवाणी के सामने हाथ तक नहीं जोड़ते, स्टेज से उठाकर फेंक दिया गुरु को, …. मारकर स्टेज से उतारा है आडवाणी जी को और फिर हिंदू धर्म की बात करते हैं।’ राहुल ने इसके बाद सवाल किया कि हिंदू धर्म में कहां लिखा है कि लोगों को मारना चाहिए और हिंसा करनी चाहिए।

कांग्रेस अध्यक्ष की यह परोक्ष टिप्पणी आडवाणी को गुजरात में गांधीनगर सीट से भाजपा द्वारा उम्मीदवार नहीं बनाए जाने पर है। वहां से खुद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह चुनाव लड़ रहे हैं। राहुल ने कहा, ‘‘2019 का चुनाव विचारधाराओं की लड़ाई है और कांग्रेस की विचारधारा भाईचारा, प्रेम और सौहार्द्र मोदी के नफरत, क्रोध और विभाजनकारी विचारधारा पर जीत हासिल करेगी।’’ उन्होंने यह भी कहा कि वह कांग्रेस के घोषणापत्र में किए गए वादा ‘न्यूनतम आय योजना’ की आलोचना से परेशान नहीं हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आई तो गरीब परिवारों को न्यूनतम आय के तौर पर हर साल 72,000 रुपये दिया जाएगा, जिससे करीब 25 करोड़ लोगों को फायदा होगा। इस कदम को उन्होंने गरीबी पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ बताया है। उन्होंने कहा, ‘‘सभी पक्षकारों से विचार विमर्श के बाद घोषणापत्र तैयार किया गया है। न्याय योजना को लागू करने के लिए मध्यम वर्ग पर आयकर नहीं लगाया जाएगा और आयकर को नहीं बढ़ाया जाएगा। अगर उनकी पार्टी सत्ता में आयी तो इस योजना में हर साल गरीब लोगों के बैंक खातों में 72,000 रुपये जमा कराए जाएंगे।’’

उन्होंने प्रधानमंत्री पर हर व्यक्ति के बैंक खाते में 15 लाख रूपये जमा करने का झूठा वादा करने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘15 लाख रूपये बैंक खाते में नहीं दिए जा सकते क्योंकि अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी। लेकिन ‘न्याय’ लागू किया जा सकता है। ’’ उन्होंने कहा कि यदि कुछ अमीर लोगों के बैंक रिण माफ किए जा सकते हैं तो किसानों और जरूरतमंद लोगों के कर्ज क्यों नहीं माफ किए जा सकते? राफेल सौदे को लेकर उद्योगपति अनिल अंबानी पर निशाना साधते हुए राहुल ने कहा, ‘‘कागज का जहाज भी नहीं बना सकने वाले व्यक्ति ने सबसे बड़ा रक्षा अनुबंध हासिल कर लिया और उसकी जेब में सीधे 30,000 करोड़ रूपये जा रहे हैं। मनरेगा का पूरा बजट एक ही व्यक्ति को दे दिया गया।’’

FY18 में जुड़े 1.07 करोड़ नए करदाता, ITR फाइलिंग छोड़ने वालों की संख्‍या घटकर रही 25.22 लाख

नई दिल्‍ली। आयकर विभाग ने कहा है कि 2017-18 में उसने 1.07 करोड़ नए करदाता जोड़े हैं, जबकि ड्रोप्ड फाइलर्स (पहले आईटीआर फाइल करने और बाद में छोड़ देने वालों) की संख्या घटकर 25.22 लाख रह गई। यह नोटबंदी के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है। 
एक बयान में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने कहा कि वित्त वर्ष 2017-18 में 6.87 करोड़ आयकर रिटर्न (आईटीआर) फाइल किए गए, जबकि वित्‍त वर्ष 2016-17 में 5.48 करोड़ आईटीआर फाइल किए गए थे यानी इस मोर्चे पर 25 प्रतिशत वृद्धि हुई। 

इसी के साथ 2017-18 में आईटीआर दाखिल करने वाले नए करदाताओं की संख्या बढ़कर 1.07 करोड़ हो गई, जबकि 2016-17 में 86.16 लाख नए करदाता जुड़े थे। सीबीडीटी ने कहा कि नोटबंदी ने कर आधार और प्रत्यक्ष कर संग्रहण के दायरे के विस्तार पर असाधारण रूप से सकारात्मक असर डाला।  

ड्रोप्ड फाइलर ऐसे करदाता होते हैं जो पहले तो आईटीआर फाइल करने वालों में शामिल होते हैं लेकिन किन्हीं तीन लगातार वित्त वर्ष में आईटीआर फाइल नहीं करते। ऐसे लोगों की संख्या 2016-17 में 28.34 लाख थी, जो घटकर 2017-18 में 25.22 लाख रह गई। सीबीडीटी ने कहा कि 2016-17 की तुलना में 2017-18 में विशुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रहण 18 प्रतिशत बढ़कर 10.03 लाख करोड़ हो गया। 

चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा के बाद सुमित्रा महाजन बोलीं- मैंने BJP को “चिंतामुक्त” कर दिया

इंदौर: मध्यप्रदेश के इंदौर क्षेत्र से भाजपा का उम्मीदवार बदले जाने की अटकलों के बीच लोकसभा अध्यक्ष एवं स्थानीय सांसद सुमित्रा महाजन ने शुक्रवार को ऐलान किया कि वह लोकसभा चुनाव नहीं लड़ेंगी, जिसके बाद सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। पिछले 30 सालों में भाजपा के लिए लगातार आठ बार इंदौर सीट जीतने वाली महाजन ने इस क्षेत्र के टिकट को लेकर पार्टी के “अनिर्णय” पर अप्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि उन्होंने खुद ही अपनी दावेदारी वापस लेकर भाजपा संगठन को “चिंतामुक्त” कर दिया है।

लोकसभा अध्यक्ष ने यहां प्रेस बयान जारी कर इंदौर से चुनावी दावेदारी छोड़ने की घोषणा की। इसके बाद महाजन ने यहां संवाददाताओं से कहा, “मैंने बहुत सोच-समझ कर यह घोषणा की है, क्योंकि मुझे कई दिन से महसूस हो रहा था कि भाजपा का केंद्रीय संगठन इंदौर लोकसभा क्षेत्र के चुनावी टिकट पर संभवतः किसी संकोच में फैसला नहीं ले पा रहा है। ऐसा भी हो सकता है कि वे (भाजपा के शीर्ष नेता) यह सोचकर चिंतित हो रहे हों कि इंदौर के चुनावी टिकट के बारे में पार्टी के फैसले के बारे में ताई (महाजन का लोकप्रिय नाम) को कैसे बताया जाए और यह निर्णय सुनकर मुझे कैसा लगेगा? लिहाजा मैंने पार्टी को चिंतामुक्त कर दिया है।” महाजन ने कहा, “मैंने अपनी तरफ से कह दिया है कि मैं इंदौर से लोकसभा चुनाव नहीं लडूंगी। लिहाजा पार्टी को इस सीट से उम्मीदवार की घोषणा में अब कोई संकोच नहीं करना चाहिए।”
भाजपा की वरिष्ठतम नेताओं में शुमार महाजन ने बताया कि उन्होंने इंदौर से लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने के अपने फैसले के बारे में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को भी पत्र भेज दिया है। महाजन वर्ष 1989 से इंदौर सीट से लगातार चुनाव जीत रही हैं और इस बार भी उन्हें इसी क्षेत्र से टिकट का शीर्ष दावेदार माना जा रहा था। लेकिन, इंदौर सीट से भाजपा उम्मीदवार की घोषणा में देरी के चलते अटकलों के सियासी गलियारों में यह सवाल जोर पकड़ रहा था कि क्या लालकृष्ण आडवाणी (91) और मुरली मनोहर जोशी (85) सरीखे वरिष्ठतम भाजपा नेताओं की तरह महाजन को भी इस बार चुनावी समर से विश्राम दिया जाएगा?

इसी महीने की 12 तारीख को 76 साल की होने जा रहीं महाजन ने कहा, “मैं यहां-वहां से 75 साल की कैटेगरी (75 साल से ज्यादा उम्र के भाजपा नेताओं को चुनाव नहीं लड़ाने की चर्चा) के बारे में भी सुन रही थी। अब तो मैं इस कैटेगरी में भी आ गई हूं।”

उन्होंने कहा हमारी पार्टी के केंद्रीय संगठन में जितने भी लोग हैं, वे नए साल में (इंदौर के चुनावी टिकट के बारे में) अच्छा निर्णय ले सकते हैं।” बहरहाल, सियासी आलोचक महाजन की चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा के बारे में यह भी कह रहे हैं कि उन्होंने इंदौर से अपनी उम्मीदवारी के पक्ष में भाजपा संगठन पर निर्णायक दबाव बनाने के लिये बड़ा दांव चला है। इस बारे में सवाल किए जाने पर महाजन ने जवाब दिया, “आलोचकों का मुंह कोई बंद कर सकता है क्या? आलोचकों का काम ही आलोचना करना है।”

जब उनसे पूछा गया कि अगर भाजपा अब भी उन्हें इंदौर से चुनावी टिकट देने का फैसला करती है, तो क्या वह अपने चुनाव नहीं लड़ने के फैसले पर दोबारा विचार करेंगी, तो उन्होंने सीधा उत्तर देने से बचते हुए कहा, “वह हम बाद में देखेंगे। अभी तो मैंने पार्टी को अपना निर्णय बता दिया है।” महाजन ने भाजपा संगठन से यह मांग भी की कि इंदौर लोकसभा क्षेत्र में 19 मई को होने वाले मतदान के मद्देनजर पार्टी के उम्मीदवार की घोषणा में अब और देरी नहीं की जाए। उन्होंने कहा, “मैं चाहती हूं कि इंदौर के चुनावी टिकट को लेकर भाजपा का केंद्रीय संगठन जल्द फैसला करे, क्योंकि चुनाव प्रचार के लिए दिन लगातार कम होते जा रहे हैं।”

वर्ष 1982 में इंदौर नगर निगम के चुनावों में पार्षद पद की उम्मीदवारी से अपने चुनावी करियर की कामयाब शुरुआत करने वाली महाजन ने कहा, “भाजपा ने मुझे बहुत कुछ दिया है। लेकिन अब मैंने पार्टी को (इंदौर के चुनावी टिकट को लेकर) चिंतामुक्त कर दिया है। मैं आज भी पार्टी की कार्यकर्ता हूं। हम सब मिलकर जी-जान से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे।”

मुख्यमंत्री कमलनाथ के ओएसडी प्रवीण कक्कड़ के घर इनकम टैक्स का छापा


दिल्ली से आए 15 आयकर अफसरों ने कक्कड़ के इंदौर स्थित आवास की तलाशी लीभोपाल में भी कमलनाथ के कुछ करीबियों के ठिकानों पर छापेमारी चल रही
भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रातुल पुरी, निजी सचिव और पूर्व पुलिस अधिकारी प्रवीण कक्कड़ और सलाहकार राजेंद्र कुमार मिगलानी के ठिकानों पर आयकर विभाग ने रविवार तड़के छापा मारा। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली, भोपाल, इंदौर और गोवा स्थित 50 ठिकानों पर मारे गए इस छापे में अब तक नौ करोड़ रुपये जब्त किए गए हैं।इस कार्रवाई में कमलनाथ के भांजे रातुल पुरी, अमिरा और मोजर बीयर कंपनी भी शामिल हैं।आयकर विभाग की टीम ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के ओएसडी प्रवीण कक्कड़ के घर छापा मारा। देर रात 3 बजे दिल्ली से आए 15 से अधिक अधिकारियों की टीम स्कीम नंबर 74 स्थित निवास पर पहुंची। इसके साथ ही विजय नगर स्थित शोरूम, बीएमसी हाइट्स स्थित ऑफिस, शालीमार टाउनशिप और जलसा गार्डन, भोपाल स्थित घर श्यामला हिल्स, प्लेटिनम प्लाजा कॉलोनी सहित अन्य स्थानों पर भी जांच की जा रही है।
बताया जा रहा है कि सर्विस के दौरान ही कई जांच चल रही थी। कार्रवाई में उनके घर से 9 करोड़ रुपये नकद राशि मिलने की बात सामने आ रही है।
मुख्यमंत्री के करीबी है: प्रवीण जब पुलिस अधिकारी थे तभी उनके खिलाफ कई मामले सामने आए थे। प्रवीण कक्कड़ सीएम कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और कांतिलाल भूरिया के काफी करीबी माने जाते हैं। जब आयकर विभाग की टीम देर रात पहुंची तो कक्कड़ के परिवार के लोग घबरा गए थे। जब उन्हें पुख्ता हो गया कि ये सभी आयकर के अधिकारी हैं तो उन्होंने जांच में सहयोग किया।

कौन हैं कक्कड़: प्रवीण कक्कड़ पूर्व पुलिस अधिकारी हैं। उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया था। 2004 में नौकरी छोड़कर वे कांग्रेस नेता कांतिलाल भूरिया के ओएसडी बने। दिसंबर 2018 में कमलनाथ के ओएसडी बन गए। बताया जा रहा है कि नौकरी में रहते हुए उनके खिलाफ कई मामले सामने आए, जिनकी जांच चल रही है।

सीआरपीएफ की ली मदद, एमपी की इनकम टैक्स को नहीं खबर: बताया जा रहा है कि इनपुट के बाद मारे गए छापे की जानकारी मध्य प्रदेश के भी आयकर के अधिकारियों को नहीं थी। दिल्ली की टीम ने प्रदेश पुलिस की मदद की जगह पहली बार सीआरपीएफ को अपने साथ लिया।

प्रतीक जोशी अश्विन शर्मा के यहां भी छापे:भोपाल में प्लेटीनम प्लाजा की छठी मंजिल पर प्रतीक जोशी और अश्विन शर्मा का निवास है। दोनों ही प्रवीण कक्कड़ के बेहद करीबी माने जाते हैं। यहीं पर दोनों के अॉफिस भी हैं। प्रवीण कक्कड़ जब भी भोपल में रहते इन प्रतीक जोशी अश्विन शर्मा से मिलने आते थे।


पोहरी जनपद में भ्रष्टाचार चरम पर आखिरकार क्यों नहीं होती कार्यवाही ❓

ग्राम पंचायतों के विकास की राशि का जमकर हो रहा बंदरबाट

फर्जी व घटिया काम दिखाकर डकारे करोड़ो रूपये

पोहरी-पोहरी जनपद की दर्जनों ऐसी पंचायतें हैं जिनकी भ्रष्टाचार की जानकारी जनपद सीईओ से लेकर जिला पंचायत सीईओ तक है बावजूद वरिष्ठ अधिकारी आखिरकार इन भ्रष्ट पंचायतों पर जांच कर उचित कार्रवाई करने से क्यों परहेज करते दिखाई देते हैं। अगर कोई इन भ्रष्ट पंचायतों की शिकायत किसी हितग्राही, या समाजसेवी या पत्रकारों द्वारा जनपद सीईओ से की जाती है तो जनपद सीईओ द्वारा सिर्फ और सिर्फ कार्यवाही के नाम का झूठा आश्वासन देकर चलता कर दिया जाता है ।जनपद सी ई ओ द्वारा सरपंच सचिव के साथ मिलकर सरकार को जमकर चपत लगाई जा रही है । भष्ट्राचार की इस कहानी की शिकायत जब वरिष्ठ अधिकारियों से की जाती है तो वे भी गांधी जी के आगे नतमस्तक हो जाते है ।

शिकायत के नाम पर खूब होती है वसूली

अगर किसी पंचायत की शिकायत जनपद सीईओ से करोगे तो आप कार्रवाई की उम्मीद ना करते हुए जिस पंचायत की शिकायत की है उस पर सुविधा शुल्क और दबाव बढ़ा दिया जाता है ऐसी कई पंचायत हैं जैसे कि चकराना, झलवासा, भौराना, अहीर मारोरा आदि ऐसी कई पंचायत हैं जो भ्रष्टाचार में अपना प्रथम स्थान बनाए हुए है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार संबंधित पंचायत पर जांच के नाम पर सुविधा शुल्क और बढ़ा दिया जाता है।
झिरी रोड से लेकर आगे तक डाले जाने वाली सड़क में भी घटिया किस्म का मटेरियल इस्तेमाल किया जा रहा है एवं नियमों को ताक पर रखकर गिट्टी- मुरम रोड बनाने में उपयोग की जा रही है।
पोहरी के बैराड़ क्षेत्र में आने वाली एक ऐसी पंचायत भी है जहां जनपद सीईओ द्वारा सहायक सचिव की नियुक्ति फर्जी तरीके से कर दी गई है सूत्रों की माने तो जनपद सीईओ का खासम खास सहायक सचिव है और जनपद सीईओ की मेहरबानी के कारण ही नियम विरुद्ध पंचायत में अपनी सेवाएं दे रहा।
अब आगे देखना होगा कि नियम विरुद्ध हो रहा है पंचायतों में काम और नियम विरुद्ध हुई नियुक्ति के संबंध में क्या कुछ कार्यवाही करने की दम भर पाते हैं वरिष्ठ अधिकारी या फिर हमेशा की तरह कागजी घोड़े दौड़ाकर हमेशा की तरह किया जाने वाला काम फिर से दोहराया जाएगा………