धैर्यवर्धन शर्मा क्यों नहीं हो सकते गुना शिवपुरी से लोकसभा उम्मीदवार ? क्या कमी है….?

प़िंट मीडिया और सोशल मीडिया पर प़काशित हो रहीं खबरों के मुताबिक गुना शिवपुरी लोकसभा सीट पर भाजपा एक दमदार प़त्याशी की तलाश कर रही है. अभी तक हरिबल्लभ शुक्ला, नरोत्तम मिश्रा, जयभान सिंह पवैया यहां से उम्मीदवार रह चुके हैं. हम कहेंगे ये सब बाहरी थे तो सवाल यही है कि किसी क्षेत्रीय जुझारु और प़तिभावान व्यक्ति को उम्मीदवार बना भविष्य के लिये एक अच्छा नेतृत्व तैयार करने की शुरुआत क्यों नहीं की जा सकती है.
इसी कड़ी में अगर धैर्यवर्धन शर्मा के व्यक्तित्व पर नजर डाली जाये तो उनमें वो सारी खूबियां मौजूद हैं जो एक समाजसेवी और राजनेता में होना चाहिये.
संगठन के प़ति उनकी लगन, समर्पित भाव और
निरंतर कर्म करने की शैली किसी से छिपी नहीं है.
अगर केंद़ के वरिष्ठ नेता साथ दें और संगठन समर्पित भाव से काम करता है तो धैर्यवर्धन शर्मा अच्छा परिणाम देने की क्षमता रखते हैं.
ये बात किसी से छिपी नहीं है कि शर्मा बाल्यकाल से ही अपने जीवन को संगठन के लिये समर्पित कर चुके हैं तो ऐसे लोगों को जीवन के मध्यकाल में मौका जरुर मिलना चाहिये.
वैसे इसबार लोकसभा के समीकरण भाजपा के पक्ष में जा रहे हैं, विधान सभा चुनाव में यह बात सिद्ध हो चुकी है. जनता भी कुछ अलग करने के मूढ़ में है वशर्ते भाजपा ईमानदारी से चुनाव मैदान में उतरती है.
धैर्यवर्धन शर्मा को ब़ाहम्ण मतों के साथ रघुवंशी,धाकड़ जातियों का अच्छा समर्थन मिल सकता है ये जातियां बदलाव के पक्ष में दिख रही हैं.
भाजपा हमेशा यहां पर अनमने ठंग से चुनाव लड़ती रही है लेकिन इस बार समीकरण कुछ बदले हुये हैं और जनता भी दुबारा मोदी जी को प़धानमंत्री पद पर देखना चाहती है.
तो कहने लिखने का अर्थ यही है यहीं से किसी जुझारु और ईमानदार कार्यकर्ता का कद बड़ा कर निखारने की कवायद भाजपा को करना चाहिये.
इसी तारतम्य में सुरेंद़ शर्मा का नाम भी शामिल किया जा सकता है, इनमें भी वो सब खूबी हैं जो एक उम्मीदवार में होती हैं.

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