खरई परिवहन बैरियर बना अंतर्राज्जीय लूट का अड्डा ** कभी भी हो सकता है कोई बड़ा हादसा **

– विजय चौकसे –
शिवपुरी – शिवपुरी के राजस्थान वॉर्डर पर स्थित खरई परिवहन बैरियर पर इन दिनों अराजकता का माहौल बना हुआ है और कभी भी कोई गभीर हादसा यहां घटित हो सकता है जिससे कई जानें जा सकतीं हैं पूर्व में भी इस बैरिमर पर पदस्थ अधिकारी के अबैध दबाव के कारण एक जान जा चुकी है इस बैरियर से रोजाना हजारों ट्रक गुजरते है जिन पर दबाव बनाकर मनमानी बसूली के लिये बैरियर प्रभारी ने बहां गुण्डे पाल रखे हैं बहां से गुजरने बाले ट्रक चालकों से जब भी बात की जाती है तो बह रोते नजर आते हैं और कहते हैं कि सारी कमाई तो यहां पदस्थ अधिकारी ,कर्मचारी गुन्डे खड़े करवाकर लूट लेते हैं अब बच्चों को क्या खिलायें , अब तो आत्महत्या की नौबत आ चुकी है कई बार ट्रक चालकों ने इकटठे होकर बहां बिरोध किया तो गेंगबार के हालात बन गये और बैरियर संचालक के हथियारबन्द गुण्डों के आगे ट्रक चालकों को झुकना पड़ा , ऐसे हालात अब कभी भी फिर बन सकते हैंं क्योंकि कुछ ट्रक चालक अब इन गुण्डों से निबटने के लिये पूरी तैयारी से चलने लगे हैं इस सरेआम की लूटपाट से मप्र की कांग्रेस सरकार की छवि भी शुरूआत में ही काफी खराब हो रही है हमने इस बारे में परिवहन मंत्री गोबिन्द सिंह राजपूत से बात करने की कोशिश की तो अभी उनसे सम्पर्क नहीं हो पाया तथा कल शिबपुरी के कलेक्टर , एसपी से भी इस बारे में सोशल मीडिया जर्नलिस्ट एसोसिएशन द्वारा बात की जायेगी । दूसरे राज्यों के यह ट्रक चालक अपने क्षेत्रों में कहते फिरते हैं कि विना पुलिस , प्रशासन की मिलीभगत के स्थायी रूप से गुण्डे रखकर ऐसी लूटपाट कैसे संभव है और आखिर इस बैरियर गैंग के खिलाफ कार्यवाही कौन करेगा , अगर हालात नहीं सुधरे तो हमारे सोशल मीडिया जर्नलिस्ट एसोसिएशन के भोपाल के पदाधिकारी मुख्यमंत्री कमलनाथ से इस खुली लूटपाट पर लगाम लगाने और दोषियों पर कार्यवाही करवाने के लिये मिलेंगे

अयोध्या विवाद पर बोले सीएम योगी, कोर्ट हमें सौंप दे मामला तो 24 घंटे में कर देंगे निपटारा

अयोध्या विवाद को लेकर एकबार फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि कोर्ट यदि इस मामले को हमें सौंप दे तो 24 घंटे में इसका निपटारा कर देंगे। बता दें सीएम योगी ने यह बयान एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम के दौरान दिया है।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर पर जनता के सब्र का बांध कभी भी टूट सकता है। वे बोले जनता का राम मंदिर पर धैर्य तेजी से खत्म हो रहा है। अगर सुप्रीम कोर्ट इस विवाद पर जल्द फैसला सुनाने में असमर्थ है तो कोर्ट यह मामला हमें सौंप दे, हम इस मामले को 24 घंटे में सुलझा लेगें।

चैनल के कार्यक्रम के दौरान उनसे सवाल किया गया क्या वे राम मंदिर का मुद्दा बातचीत से सुलझाएंगे या फिर किसी और तरीके से, तो इस पर वे बोले कि पहले कोर्ट को इस मुद्दे को हमें सौंपने दीजिए। वे बोले कि मैं कोर्ट से यह अपील करता हूं कि इसे जल्द से जल्द निपटा दे।

साल 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी अपने फैसले में यह माना था कि बाबरी ढांचे को हिन्दू मंदिर या स्मारक तोड़ने के बाद बनाया गया था। हाईकोर्ट के आदेश में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में भी यही बात सामने आई थी।

1 फरवरी को अंतरिम नहीं बल्कि पूर्ण बजट पेश करेगी मोदी सरकार

संविधान का मुद्दा उठाकर मोदी सरकार को घेरने वाले विपक्ष की इसी रणनीति का लाभ भाजपा नेतृत्व वाला एनडीए उठाने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने आगामी एक फरवरी को अंतरिम के बजाय पूर्ण बजट पेश करने की तैयारी कर ली है। विपक्ष की आलोचनाओं से बेपरवाह भाजपा का कहना है कि संविधान में अंतरिम बजट का कोई उल्लेख नहीं है

बता दें कि आमतौर पर अपने कार्यकाल के महज कुछ महीने शेष रहने पर पूर्ण की बजाय अंतरिम बजट पेश करने की परंपरा रही है। अगर मोदी सरकार ने पूर्ण बजट पेश किया तो यह किसी चुनावी वर्ष में पेश होने वाला पहला पूर्ण बजट होगा। लेकिन भाजपा के एक शीर्षस्थ नेता का कहना है कि आम बजट तो आम बजट होता है। संविधान में कहीं भी अंतरिम बजट का उल्लेख नहीं है। फिर जब नई सरकार को पुरानी सरकारों की घोषणाओं पर रोक लगाने का अधिकार है तो यह बहस का विषय ही नहीं होना चाहिए।

उक्त नेता ने यह भी कहा कि एक फरवरी को पेश होने वाले बजट में किस वर्ग को क्या राहत देनी है, इसका फैसला सरकार करेगी। जहां तक लंबित बिलों की बात है तो ऐसे सभी महत्वपूर्ण बिलों को संसद में पेश किया जाएगा।

चिन्ता, क्लेश, भय दूर करने वाला क्लेशहर स्तोत्र

हिन्दू धर्म में वेद, उपनिषद्, पुराण आदि ज्ञान के अथाह सागर हैं । मानव जीवन की हर समस्या का समाधान उनमें छिपा हुआ है । भगवान वेदव्यास जानते थे कि कलियुग में मानव नाना प्रकार के क्लेशों, चिन्ताओं व भयों से ग्रस्त रहेगा, इसलिए उन्होंने अपने पुराणों में मनुष्य के कल्याण के लिए विभिन्न स्तोत्रों की रचना की ।
राजा ययाति : अत्यधिक भोग से उपजा वैराग्य
श्रीमद्भागवत के नवम् स्कन्ध के अठारहवें और उन्नीसवें अध्याय में राजा ययाति का वर्णन मिलता है ।

राजा नहुष ने अपने द्वितीय पुत्र ययाति को राजा बनाया । ययाति का विवाह शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी के साथ हुआ। अपने ससुर शुक्रचार्य के शाप से वह असमय ही बूढ़े हो गए थे । ययाति ने अपनी वृद्धावस्था अपने पुत्रों को देकर उनका यौवन प्राप्त करना चाहा, परन्तु सभी पुत्रों ने मना कर दिया । उनके सबसे छोटे पुत्र पुरू ने अपना यौवन पिता को देकर उनका बुढ़ापा ले लिया ।

राजा ययाति एक सहस्र वर्ष तक भोग लिप्सा में लिप्त रहे किन्तु उन्हें तृप्ति नहीं मिली । विषय वासना से तृप्ति न मिलने पर उन्हें उनसे घृणा हो गई और उन्होंने पुरु की युवावस्था वापस लौटा कर वैराग्य धारण कर लिया। ययाति को ज्ञान प्राप्त हुआ कि—‘हमने भोग नहीं भोगे बल्कि भोगों ने हमको भोगा है, विषयों की तृष्णा जीर्ण नहीं हुई, हम ही जीर्ण हो गए ।’

राजा ययाति ने अपनी प्रजा को क्लेशों से मुक्ति दिलाने के लिए ‘क्लेशहर स्तोत्र’ की रचना की । अंत में गंभीर तपस्या से उन्होंने भगवान वासुदेव को प्राप्त कर लिया ।
क्लेशहर नामामृत स्तोत्र हिन्दी अर्थ सहित
श्रीकेशवं क्लेशहरं वरेण्यमानन्दरूपं परमाथमेव ।
नामामृतं दोषहरं तु राज्ञा आनीत मत्रैव पिबन्तु लोका: ।। १ ।।

अर्थात्—भगवान केशव सबका क्लेश हरने वाले, सबसे श्रेष्ठ, आनन्दरूप और परमार्थ-तत्त्व हैं । उनका नामरूप अमृत सब दोषों को दूर करने वाला है । राजा ययाति ने उस अमृत को यहीं लाकर सुलभ कर दिया है । संसार के लोग इच्छानुसार उसका पान करें ।

श्रीपद्मनाभं कमलेक्षणं च आधाररूपं जगतां महेशम् ।
नामामृतं दोषहरं तु राज्ञा आनीत मत्रैव पिबन्तु लोका: ।। २ ।।
अर्थात्—भगवान विष्णु की नाभि से कमल प्रकट हुआ है । उनके नेत्र कमल के समान सुन्दर हैं । वे जगत के आधारभूत और महेश्वर हैं । उनका नाम रूप अमृत सब दोषों को दूर करने वाला है । राजा ययाति ने उस अमृत को यहीं लाकर सुलभ कर दिया है । संसार के लोग इच्छानुसार उसका पान करें ।

पापापहं व्याधि विनाशरूपमानन्ददं दानवदैत्य नाशनम्।
नामामृतं दोषहरं तु राज्ञा आनीत मत्रैव पिबन्तु लोका: ।। ३ ।।

अर्थात्—भगवान विष्णु पापों का नाश करके आनन्द प्रदान करते हैं । वे दानवों और दैत्यों का संहार करने वाले हैं । उनका नाम रूप अमृत सब दोषों को दूर करने वाला है । राजा ययाति ने उस अमृत को यहीं लाकर सुलभ कर दिया है । संसार के लोग इच्छानुसार उसका पान करें ।
यज्ञांगरूपं च रथांगपाणिं पुण्याकरं सौख्यमनन्तरूपम् ।
नामामृतं दोषहरं तु राज्ञा आनीत मत्रैव पिबन्तु लोका: ।। ४ ।।

अर्थात्—यज्ञ भगवान के अंगरूप हैं, उनके हाथ में सुदर्शनचक्र शोभा पाता है । वे पुण्य की निधि और सुख रूप हैं । उनके स्वरूप का कहीं अंत नहीं है । उनका नाम रूप अमृत सब दोषों को दूर करने वाला है । राजा ययाति ने उस अमृत को यहीं लाकर सुलभ कर दिया है । संसार के लोग इच्छानुसार उसका पान करें ।
विश्वाधिवासं विमलं विरामं रामाभिधानं रमणं मुरारिम् ।
नामामृतं दोषहरं तु राज्ञा आनीत मत्रैव पिबन्तु लोका: ।। ५ ।।

अर्थात्—सम्पूर्ण विश्व उनके हृदय में निवास करता है । वे निर्मल, सबको आराम देने वाले, ‘राम’ नाम से विख्यात, सबमें रमण करने वाले तथा मुर दैत्य के शत्रु हैं । उनका नामरूप अमृत सब दोषों को दूर करने वाला है । राजा ययाति ने उस अमृत को यहीं लाकर सुलभ कर दिया है । संसार के लोग इच्छानुसार उसका पान करें ।

आदित्यरूपं तमसां विनाशं चन्द्रप्रकाशं मलपंकजानाम् ।
नामामृतं दोषहरं तु राज्ञा आनीत मत्रैव पिबन्तु लोका: ।। ६ ।।

अर्थात्—भगवान केशव आदित्य (सूर्य) स्वरूप, अंधकार के नाशक, मल रूप कमलों के लिए चांदनी रूप हैं । उनका नाम रूप अमृत सब दोषों को दूर करने वाला है । राजा ययाति ने उस अमृत को यहीं लाकर सुलभ कर दिया है । संसार के लोग इच्छानुसार उसका पान करें ।

सखड्गपाणिं मधुसूदनाख्यं तं श्रीनिवासं सगुणं सुरेशम् ।
नामामृतं दोषहरं तु राज्ञा आनीत मत्रैव पिबन्तु लोका: ।। ७ ।।

अर्थात्—जिनके हाथों में नन्दक नामक खड्ग है, जो मधुसूदन नाम से प्रसिद्ध, लक्ष्मी के निवास स्थान, सगुण और देवेश्वर हैं, उनका नाम रूप अमृत सब दोषों को दूर करने वाला है । राजा ययाति ने उस अमृत को यहीं लाकर सुलभ कर दिया है । संसार के लोग इच्छानुसार उसका पान करें ।
नामामृतं दोषहरं सुपुण्यमधीत्य यो माधवविष्णुभक्त: ।
प्रभातकाले नियतो महात्मा स याति मुक्तिं न हि कारणं च ।। ८ ।।

अर्थात्—यह नामामृत स्तोत्र दोषहारी और पुण्य देने वाला है । लक्ष्मीपति भगवान विष्णु में भक्ति रखने वाला जो पुरुष प्रतिदिन प्रात:काल नियमपूर्वक इसका पाठ करता है, वह मुक्त हो जाता है, पुन: प्रकृति के अधीन नहीं होता है ।

स्तोत्र पाठ का फल

भगवान श्रीकृष्ण के इस नाम रूपी अमृत वाले स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से मनुष्य के दोषों और क्लेशों का नाश होकर पुण्य और भक्ति की प्राप्ति होती है । निष्काम भाव से यदि इस स्तोत्र का पाठ किया जाए तो मनुष्य मोक्ष का अधिकारी होता है ।