मंदसौर गोलीकांड की जांच फिर होगी होगी मीसा बंदियों की पेंशन पर रोक लगाई

एक दिन पहले मंत्रालय में वंदेमातरम् गायन की अनिवार्यता पर रोक लगाने के बाद प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने बुधवार को दो सियासी दांव चले। पहला 6 जून 2017 को हुए मंदसौर गोलीकांड की नए सिरे से जांच होगी। इसमें छह किसानों की मौत हुई थी। दूसरा, प्रदेश के 2600 मीसाबंदियों को हर माह मिलने वाली 25 हजार रु. की पेंशन (सम्मान निधि) बंद की जाएगी। इसके निर्देश मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दे दिए हैं। सरकार का कहना है कि पेंशन प्रक्रिया दोबारा बनाई जाएगी। जबकि सामान्य प्रशासन विभाग मप्र लोकतंत्र सेनानी सम्मान अधिनियम 2018 को रद्द करने के लिए नया बिल ‘मप्र लोकतंत्र सेनानी सम्मान (निरसन) विधेयक-2019’ लाने की तैयारी कर रहा 

विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रभांशु कमल बुधवार को इसी मसले की मशक्कत में लगे रहे। साथ ही मुख्यमंत्री कार्यालय और मुख्यमंत्री को भी जानकारी दी गई। इधर, कांग्रेस सरकार के इस फैसले के बाद भाजपा हमलावर हो गई। भाजपा के वरिष्ठ नेता व मप्र लोकतंत्र सेनानी संघ के अध्यक्ष तपन भौमिक ने कहा कि इमरजेंसी का विरोध करने पर 19 माह जेल रहे। कई तो अभी बिस्तर पर हैं। एक पर भी कोई मुकदमा नहीं चला। फिर ऐसे लोगों की सम्मान निधि बंद करना बदले की भावना से किया गया निर्णय है। 

दूसरी ओर मंदसौर गोलीकांड को लेकर गृहमंत्री बाला बच्चन ने विभाग का चार्ज लेने के बाद मीडिया से बात करे हुए कहा कि मंदसौर में हुए गोलीकांड की फिर जांच कराएगी। 

बजट से ज्यादा खर्च : सामान्य प्रशासन विभाग के उप सचिव धरणेंद्र कुमार जैन के आदेश में लिखा है कि बजट प्रावधान से ज्यादा व्यय होने पर लोक लेखा समिति के सामने विभाग को स्थिति स्पष्ट करने में कठिनाई आती है। इसीलिए प्रक्रिया ठीक व पारदर्शी की जा रही है। लोकतंत्र सैनिकों का भौतिक सत्यापन भी होगा। 

  • 2012 से 2018 के बीच बढ़ी संख्या 

तत्कालीन शिवराज सरकार के कार्यकाल में 2012 से 2018 के बीच मीसा बंदियों की संख्या काफी बढ़ी। इस दौरान पहले से सम्मान निधि ले रहे एक मीसाबंदी के प्रमाणित करने पर दूसरे व्यक्ति को भी यह राशि मिलने लगी। यह व्यवस्था सितंबर 2018 तक चली। इससे पहले जेल अधीक्षक के सर्टिफिकेट से ही मीसाबंदी निधि मिलती थी। भाजपा सरकार में पास हुए विधेयक में यह प्रावधान किया गया कि मीसाबंदी का निधन होने पर उनकी प|ी को 12500 रुपए मिलेंगे। 

  • महिला पुलिस दर्ज करेगी महिलाओं की रिपोर्ट 

गृहमंत्री बाला बच्चन ने कहा कि ऐसी व्यवस्था की जाएगी जिसके तहत महिला फरियादी की एफआईआर महिला पुलिस ही दर्ज करेगी। महिला सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा माफिया राज खत्म करेंगे चाहे वह कोई भी हो। जो पुलिस कर्मचारी गलत ढंग से काम करेगा उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 

आपातकाल के दौरान जेल गए लोगों को कहते हैं मीसाबंदी 

मीसा (मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट) के नाम से इस विवादित कानून को 1971 में इंदिरा गांधी सरकार ने पास करवाया था। इसके बाद सरकार के पास असीमित अधिकार आ गए। पुलिस या सरकारी एजेंसियां कितने भी समय के लिए किसी को भी गिरफ्तार कर सकती थीं, किसी की भी तलाशी बिना वारंट ली जा सकती थी। सरकार के लिए फोन टैपिंग भी इसके जरिए लीगल बन चुकी थी। अापातकाल के दौरान 1975 से 1977 के बीच इसमें कई बदलाव भी किए गए। आपातकाल के दौरान भी इसका जबरदस्त दुरुपयोग किया गया। कांग्रेस और इंदिरा गांधी के विरोधियों को बिना किसी चार्ज के इस कानून के जरिए महीनों जेल में रखा गया। अटल बिहारी वाजपेई, लालकृष्ण आडवानी, चंद्रशेखर, शरद यादव और लालू प्रसाद यादव इसी कानून के तहत जेल में रहे थे। 1977 में जनता पार्टी के सत्ता में आते ही उन्होंने इस कानून को रद्द कर दिया। इस कानून में आपातकाल के दौर में बंद लोगों को मीसाबंदी कहा गया। मध्य प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में इन्हें स्वतंत्रता सेनानियों की तरह पेंशन भी दी जाती है। 

10 साल में 6 हजार से बढ़कर 25 हजार हो गई पेंशन 

मंत्री बोले- गुंडे-बदमाश भी ले रहे थे पैसा 

विधि मंत्री पीसी शर्मा ने यह कहकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी कि मीसाबंदी (इमरजेंसी में गिरफ्तार किए गए लोग) के नाम पर कुछ गुंडे-बदमाशों को भी पैसा मिल रहा था। अगर मीसाबंदी पेंशन के हकदार हैं तो कांग्रेस के लोग भी 15 साल के भाजपा शासन में कई बार जेल गए। उन्हें भी पेंशन मिलनी चाहिए। विभाग के अाधिकारिक सूत्रों का कहना है कि मीसाबंदियों की सम्मान निधि जून 2008 में प्रारंभ की गई थी। तब से लेकर अब तक यह लगातार जारी है। सम्मान निधि की शुरुआत 6 हजार रुपए से हुई थी जो तीन बार बढ़कर 25 हजार रुपए तक पहुंच गई। विभाग का कहना है कि प्रदेश में मीसाबंदियों की संख्या 2600 है। इस हिसाब से सरकार के खजाने पर प्रतिमाह करीब 6.5 करोड़ रुपए का भार आता है। 

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