मध्यप्रदेश प्रदेश में नई दवा पॉलिसी लागू।अकारण ही एंटीबायोटिक नही लिख पाएंगे डॉक्टर।

भोपाल।एंटीबायोटिक दवाइयों का इन दिनों धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है, जबकि विशेषज्ञों की माने तो 90 प्रतिशत बीमारियों में इसकी जरूरत नहीं होती। इसके बावजूद भी सर्दी, जुकाम, खांसी, दस्त और बुखार जैसी बीमारियों में डॉक्टर 15-15 दिन तक के एंटीबायोटिक डोज लिख देते हैं। जिसका सीधा असर मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ता है।
अब इस लापरवाही पर लगाम कसने के लिए भारत सरकार और डब्ल्यूएचओ ने मिलकर एंटीबायोटिक पॉलिसी बनाई है, जिसे प्रदेश के कई अस्पतालों में लागू भी कर दिया गया है। गाइड लाइन में किन बीमारियों में एंटीबायोटिक जरूरी है और किन बीमारियों में नहीं यह बात निर्धारित की गई है।
डॉक्टरों को दिया जा रहा प्रशिक्षण :एंटीबायोटिक पॉलिसी लागू करने के साथ अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स भोपाल ने डॉक्टरों को प्रशिक्षण देने का जिम्मा उठाया है। जिसके चलते भोपाल एम्स में प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में काम कर रहे डॉक्टरों को ट्रेनिंग देने की कवायद चल रही है। जिसमें एंटीबायोटिक कब, कितना और कितने अंतराल में दिया जाए, यह बताया जा है। वहीं अगले चरण में मेडिकल ऑफिसर्स को भी यह ट्रेनिंग दी जाएगी।

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