केपी सिंह उच्च राजनीतिक साजिश के शिकार

(करुणेश शर्मा )

शिवपुरी 6 बार के विधायक के पी सिंह मध्यप्रदेश में लोकप्रिय कांग्रेसी नेता के रूप में जाने जाते हैं 25 वर्षों में उनके राजनीतिक कैरियर का ग्राफ बड़ी ही तेजी से सिर्फ बड़ा है ग्रामीण पंचायत राजनीति से अपना राजनीतिक कैरियर शुरू करने वाले के पी सिंह आज कांग्रेस के वरिष्ठ प्रतिष्ठित नेताओं में गिने जाते हैं .कांग्रेस जब विपक्ष में थी ,उस समय के पी सिंह को विपक्ष का नेता बनाने पर हाईकमान विचार कर रही थी .हाईकमान राहुल गांधी ने लगातार पांच बार जीत हासिल करने वाले के पी सिंह को दिल्ली बुलाकर सम्मानित किया एवं के पी सिंह से राजनीतिक चर्चा की यानी कैरियर का ग्राफ लगातार बढ़ रहा था.
भारतीय जनता पार्टी की तत्कालीन सरकार के विरुद्ध के पी सिंह ने पिछोर व शिवपुरी से प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर भारतीय जनता पार्टी की सरकार के विरोध में शंखनाद किया था किंतु इस विरोधी शंखनाद की मुहिम को शिवपुरी जिले तक ही सीमित कर दिया गया यह समझ से परे है ,कुछ राजनीतिक शक्तियों ने इस आंदोलन को प्रदेश व्यापी बने ही नहीं दिया इसे सिर्फ पिछोर बस शिवपुरी तक ही सीमित कर दिया गया कि पी सिंह के राजनीतिक सलाहकारों ने इस ओर ज्यादा ध्यान नहीं दिया ना ही के पी सिंह ने इस और आगे बढ़ने का विशेष प्रयास किया यही वह समय था ,जब के पी सिंह प्रदेश की कांग्रेस की राजनीति में प्रदेश स्तर पर प्रसिद्ध हो सकते थे किंतु उन्होंने बड़े नेताओं का सम्मान कर आंदोलन को सिर्फ पिछोर बस शिवपुरी तक सीमित कर दिया.
इस धरना आंदोलन के बाद भारतीय जनता पार्टी के विरोधियों की साजिश की शुरुआत हुई .गौर करिए वह समय जब भारतीय जनता पार्टी के सरकार के विरुद्ध के पी सिंह ने मोर्चा खोला था. पिछोर की जनता की समस्याओं को सुलझाने में केपी सिंह आंदोलन के बाद व्यस्त हो गए तब से अब तक के पी सिंह के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी के विरोधी
मोर्चा खोले हुए थे .लोकसभा चुनाव में भी ज्योतिरादित्य सिंधिया को पिछोर विधानसभा से अच्छे मतों से विजई दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की जब कांग्रेस सरकार का गठन हुआ तो के पी सिंह को मंत्री पद नहीं दिया गया जब से जबकि उनसे जूनियर व्यक्तियों को मंत्री पद से नवाजा गया एक व्यक्ति जिसे कांग्रेस हाईकमान विपक्ष का पद विपक्ष के नेता का पद सौंपना चाहती थी उस नेता को मंत्री जैसा छोटा पद भी नहीं दिया गया क्या यह राजनीतिक साजिश का परिणाम नहीं है
संकोची स्वभाव के केपी सिंह उच्च राजनीतिक नेताओं की साजिश को समझ नहीं पाए और अपने कर्तव्य में जनता की सेवा में लगे रहे आज भी वह प्रेस को कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं किंतु जनता जनार्दन कांग्रेस हाईकमान के इस फैसले से दुखी है .वह के पी सिंह को मंत्री के रूप में देख कर अपनी सेवा करवाना चाहती है.
क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को पहल इस दिशा में करनी होगी दिग्विजय सिंह को साथ लेकर राहुल गांधी कमलनाथ से ज्योतिरादित्य सिंधिया जी को बात करनी चाहिए और क्षेत्र के लिए कम से कम एक नेता के पी सिंह को मंत्री पद दिलवाने की सिफारिश करना चाहिए दिग्विजय सिंह व ज्योतिरादित्य सिंधिया मिलकर राहुल गांधी व कमलनाथ को कन्वेंस कर सकते हैं उम्मीद करते हैं कि इस दिशा में ज्योतिरादित्य सिंधिया अवश्य करेंगे जनता जनार्दन इसी आशा से ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर देख रही है.
सूत्रों के हवाले से खबर है कि अभी 5 विधायकों को अतिशीघ्र मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है

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