मध्यप्रदेश/ सरकार ने शुरू की ग्वालियर, रीवा, छिंदवाड़ा नगर निगमों की जांच

भोपाल . छिंदवाड़ा, ग्वालियर और रीवा नगर निगम में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का पैसा एक मद से दूसरे में खर्च करने, वित्तीय प्रबंधन में गड़बड़ी और एमआईसी के फैसलों की जांच सरकार ने शुरू कर दी है।

नगर निगमों के कामकाज के परीक्षण के लिए तीन सदस्यीय अफसरों की टीम बनाई गई है। संचालनालय ने सात दिन में मैदानी निरीक्षण के बाद प्रतिवेदन देने के निर्देश टीम को दिए हैं। नगरीय विकास संचालनालय के उपसचिव राजीव निगम ने 21 दिसंबर को नगर निगमों की वर्तमान व्यवस्था के निरीक्षण और पर्यवेक्षण के आदेश जारी किए हैं।

इसके मुताबिक सरकार के संज्ञान में एेसे प्रकरण आए हैं, जिसमें नगर निगमों में योजनाओं का क्रियान्वन और संचालन सरकार के निर्देशों के अनुसार नहीं हुआ है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं में एक-दूसरे मदों में खर्च करने की स्थिति बनी है। शासन ने जांच दलों को सात दिन का समय दिया था, लेकिन अभी तक रिपोर्ट जमा नहीं हुई है।

ये है निरीक्षण टीम

ग्वालियर नगर निगम के लिए टीम : अपर आयुक्त विकास मिश्रा, अधीक्षण यंत्री सुरेश सेजकर, लेखाधिकारी प्रमोद नायक।
रीवा नगर निगम के लिए टीम : अपर संचालक पीएन पांडे, अधीक्षण यंत्री राजीव गोस्वामी, लेखाधिकारी एजे एक्का।
छिंदवाड़ा नगर निगम के लिए टीम: संयुक्त संचालक आर के कार्तिकेय, संयुक्त संचालक(वित्त) अरूण पालीवाल, कार्यपालन यंत्री आनंद सिंह।

कई नगर निगमों में हो रही है मनमानी, फिलहाल इंदौर जांच के दायरे से बाहर

प्रदेश के कई नगरीय निकायों में विकास कार्य के खर्च में मनमानी हुई है। कांग्रेस की सरकार बनने के बाद पहले इन तीन नगर निगमों का परीक्षण करवाया जा रहा है। इंदौर नगर निगम को अभी परीक्षण में शामिल नहीं किया गया है, लेकिन यहां भी पिछले साल में कई योजनाओं की राशि स्वच्छता अभियान के मद में खर्च कर दी गई है।

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