आबकारी ओर ठेकेदारो की मिलीभगत से आधीरात को भी चमचमाती रहती है शराब की दुकानें

शिवपुरी। आबकारी विभाग इन दिनों पूरी तरह से शराब ठेकेदारों पर मेहरबान नजर आ रहा है। वजह साफ है कि देशी और विदेशी शराब की दुकानें आबकारी नियमों को पूरी तरह से धता बताकर संचालित हो रही है। शराब की ये सभी दुकानें निर्धारित समय के अनुरूप न तो खुल रही है और न ही बंद हो रही है। सुबह छह बजे से खुलने वाली यह शराब की दुकानें आधी रात 12 बजे तक खुली रहती हंै। यह हाल अकेले शिवपुरी शहर का ही नहीं बल्कि पूरे जिले का है, जहां देहात और कस्बों में भी देशी और विदेशी शराब की दुकानें देर रात तक आसानी से खुली देखी जा सकती हैं। इस मामले में आबकारी विभाग पूरी तरह से हाथ पर हाथ रखे बैठा हुआ है उसके द्वारा देर रात गुलजार होने वाली शराब की दुकानों को निर्धारित समय पर बंद कराने के लिए किसी भी प्रकार की कार्रवाई देखने को नहीं मिल रही है।

शिवपुरी शहर में देशी और विदेशी लगभग एक दर्जन शराब की दुकानें की है। नियमों के लिहाज से इन दुकानों को सुबह आठ बजे खुलकर रात दस बजे बंद होना चाहिए, लेकिन शासन के इस नियम का पालन किसी भी शराब की दुकानों पर नहीं किया जा रहा है। देशी शराब की कुछ दुकानें तो ऐसी हैं कि जो कि सुबह छह बजे से ही खुल जाती हैं और उन पर देर रात बंद होने के बाद भी पिछले दरबाजे से शराब की बिक्री होती रहती है। शहर में माधवचौक, झांसी तिराहा, अस्पताल चौक और बस स्टेण्ड के पास चार अंग्रेजी शराब की दुकानें है। इन दुकानों को रात 11 बजे के बाद भी आसानी से खुला हुआ देखा सकता है। अंग्रेजी शराब की यह चारों दुकानें गहन और पॉश आबादी वाले इलाके में संचालित हैं और इनके देर रात तक खुले रहने से आसपास का माहौल भी खराब होता है। क्योंकि देर रात शराब की दुकानों पर आने वाले लोग अत्यधिक शराब के नशे में धुत्त होते हंै और वो उत्पात मचाते रहते हैं। देर रात तक रौनक बिखेरनी वाली इन शराब की दुकानों से अपराधिक घटनाओं को भी बल मिल रहा है।

सामने से गेट बंद कर पीछे के रास्ते से हो रही बिक्री

शहर के दूरस्थ और देहाती माने जाने वाले इलाके फतेहपुर, मनियर, करौंदी और बड़ौदी आदि क्षेत्रों में संचालित देशी शराब की दुकानों का भी और भी बुरा हाल है। देशी शराब की कुछ दुकानें तो ऐसी हैं जिनके शटर अल सुबह छह बजे ही खुल जाती हैं और उन पर बकायदा बिक्री भी शुरू हो जाती है। वजह साफ है शराब के शौकीन लोगों का सुबह छह बजने से पहले ही दुकानों के आस-पास मंडराना। यह दुकानें रात के 12 बजे तक खुली रहती हैं और इन दुकानों पर अपराधिक तत्व के लोग गाली-गलोंच कर उत्पात मचाते रहते हैं। दुरुस्त और पिछड़े इलाकों में देर रात तक आबाद रहने वाली शराब दुकानों पर अक्सर लड़ाई-झगड़े और मारपीट की घटनाएं भी होती रहती है। खासबात यह है कि फतेहपुर, मनियर, लुधावली और बड़ौदी जैसे पिछड़े क्षेत्रों में रात 12 बजे के करीब शराब की दुकानें बंद तो कर दी जाती है, लेकिन इसके बाद भी बंद दरबाजे से शराब की बिक्री होती रहती है, क्योंकि इन दुकानों पर ऐसे ग्राहक भी फिक्स है। शहर में संचालित देशी-विदेशी शराब की दुकानें निर्धारित समय पर ही खुले और बंद हो, इस बात के प्रयास अभी तक आबकारी विभाग द्वारा नहीं किए गए हैं।

आबकारी से आर्थिक संबंध दे रहे मनमानी को बढ़ावा

सूत्र इसकी वजह बताते हैं आबकारी विभाग और शराब ठेकेदारों के बीच मजबूत आर्थिक संबंध है और इसी के चलते विभाग ने शराब ठेकेदारों को मनमान ढंग से दुकानें संचालित करने की छूट दे रखी है। आबकारी विभाग के साथ-साथ पुलिस और प्रशासन द्वारा भी कभी इस बात के प्रयास नहीं किए जिससे शराब की दुकानें नियमानुसार ओपन और क्लोज हो सके। देर रात तक शराब की दुकानें आबाद रहने से आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा भी मिल रहा है। ऐसा इसलिए कि देर रात तक शराब की दुकानों पर आने वाले लोगों में ज्यादातर लोग झगड़ालू और आपराधिक प्रवृत्ति के होते हैं। शराब के नशे में जब कोई बड़ी घटना हो जाती है, तब बात फिर पुलिस तक पहुंचती है। सूत्र बताते हैं कि शराब ठेकेदारों की पुलिस से भी सांठगांठ होने की वजह से वह नियमों के विपरीत चलने वाली शराब की दुकानों की ओर आंख बंद किए हुए है।

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