कमलनाथ बना सकते हैं कुछ और विधायकों को मंत्री

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ राज्य सरकार को समर्थन दे रहे कुछ नाराज विधायकों को साधने के लिए अपनी मंत्रिपरिषद का विस्तार जल्द कर सकते हैं। यह विस्तार आगामी सात जनवरी से शुरू हो रहे राज्य विधानसभा के अधिवेशन से पहले हो सकता है।
कमलनाथ और 28 मंत्रियों ने 17 दिसम्बर को पद एवं गोपनीयता की शपथ ली थी, फिर काफी मशक्कत के बाद मंत्रियों के विभागों का बंटवारा किया गया। सूत्रों के मुताबिक राज्य सरकार को समर्थन दे रहे सपा, बसपा एवं कुछ निर्दलीय विधायकों की नाराजगी को देखते कांग्रेस उनको मनाने की तैयारी कर रही है। राज्य की 230 सदस्यीय विधानसभा का जादुई आंकड़ा 116 है।

सत्तारूढ़ कांग्रेस के पास बहुमत से दो विधायक कम हैं। सपा, बसपा और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनी है। समर्थन देने वाले दल अब सरकार में भागीदारी चाहते हैं। निर्दलीय विधायक के तौर पर मंत्रिपरिषद में सिर्फ प्रदीप जयसवाल को शामिल किया गया है। इसको देखकर सपा-बसपा ने भी सरकार पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। सूत्रों का कहना है कि विधानसभा अधिवेशन से पहले सरकार मंत्रिपरिषद का विस्तार करने जा रही है।
भारतीय संविधान के वर्ष-2003 में हुए 91वें संशोधन के मुताबिक, राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या विधानसभा सदस्यों की कुल संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। यानी, मध्य प्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की संख्या अधिकतम 33 हो सकती है। मुख्यमंत्री कमलनाथ समेत 29 मंत्री पहले ही शपथ ले चुके हैं। इस प्रकार, कमलनाथ मंत्रिपरिषद में चार मंत्री और बनाए जा सकते हैं।
उधर, मुख्य विपक्षी दल भाजपा विधानसभा अध्यक्ष के लिए उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। यदि भाजपा ने उम्मीदवार उतारा तो अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होना तय है। इसके मद्देनजर कांग्रेस फूंक-फूंक कर कदम रख रही है और सत्र शुरू होने से पहले ही व मंत्रिपरिषद विस्तार करने की तैयारी में है। कांग्रेस के 114 और भाजपा के 109 विधायक हैं।

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