विभागों के बंटवारे में चली कमलनाथ की मर्जी,

मध्यप्रदेश में मंत्रियों के विभाग बंटवारें को लेकर चल रहा सस्पेंस खत्म हो गया है। चार दिनों तक चला यह दौर ठीक वैसा ही रहा जैसा मुख्यमंत्री उम्मीदवार को चुनने का था। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने पास तकनीकी शिक्षा, जनसंपर्क, रोजगार और उद्योग जैसे पास आठ विभाग रखे है। इसके अलावा गृह विभाग  बाला बच्चन को और वित्त मंत्रालय का जिम्मा तरुण भनोट को दिया गया है। 

गृह और वित्त विभाग को लेकर था पेंच

विभाग बंटवारे में देरी की वजह वित्त और गृह विभाग के जिम्मे को लेकर थी। सिंधिया जहां गृह और परिवहन विभाग तुलसी सिलावट को दिलवाना चाहते थे वहीं मुख्यमंत्री कमलनाथ की पसंद राजपुर विधायक बाला बच्चन थे। अनुभव और वरिष्टता का हवाला देकर दिग्विजय सिंह डॉ. गोविंद सिंह को गृह विभाग दिलाने पर अड़े थे। इसके अलावा दिग्विजय अपने बेटे जयवर्धन सिंह को वित्त विभाग देने की वकालत कर रहे थे। 

मामला दिल्ली दरबार तक पहुंचा और आलाकमान ने मुख्यमंत्री की पसंद पर मुहर लगाई। कमलनाथ ने दिग्विजय के करीबी प्रियव्रत सिंह को ऊर्जा और उनके बेटे जयवर्धन को बेटे को नगरीय विकास का जिम्मा सौंपा है। इसके अलावा ज्योतिरादित्य सिंधिया की पसंद तुलसी सिलावट को लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय का जिम्मा देकर संतुलन बिठाने की कोशिश की गई है। 

लोकसभा चुनाव से पहले नाथ ने बनाया प्लान

दिल्ली की मदद से कमलानथ से सभी ने सभी दिग्गजों को साधने की कोशिश की है। कमलनाथ ने पीसी शर्मा को अपने पास रखकर विधि और विधायी कार्य विभाग सौंपा है।  उम्मीद जताई जा रही कि शर्मा को आगे बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। करीब पांच घंटे चली बैठक के बाद विभागों का बंटवारा हो सका।  किसानो से जुड़े किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग सचित सुभाष याद को सौंपा गया है।  सचिन रन यादव के भाई है। 

पूरी लिस्ट पर नजर डाले तो एक बात साफ नजर आती है कि विभाग बंटवारे में कमलनाथ की मर्जी सर्वोपरि रही है। कमलनाथ के समर्थक माने जाने वाले निर्दलीय विधायक प्रदीप जायसवाल को खनिज संसाधन विभाग मिला है। 

कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने-अपने समर्थकों को महत्वपूर्ण मंत्रालय देने पर अड़े थे। विभागों को लेकर फंसा यह पेंच दिल्ली दरबार के दखल के बाद सुलझा। शुक्रवार को घंटों तक गृह, वित्त, नगरीय प्रशासन आदि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों पर सबसे ज्यादा माथापच्ची हुई। सूत्रों के मुताबिक कमलनाथ से बात करने के बाद सूची को अंतिम रूप दिया गया। 

अनुभवी कमलनाथ को अनुभव पसंद है 

विभागों के बंटवारे में अनुभव को तरजीह दी गई है। दिग्विजय सरकार में मंत्री रह चके ब्रजेंद्र सिंह राठौर को वाणिज्यिक कर जैसा महत्वप्पोरन मंत्रालय सौंपा गया है। वहीं एमबीबीएस डॉक्टर विजय लक्ष्मी साधौ को मेडिकल एजूकेशन और सज्जन सिंह वर्मा को लोक निर्माण विभाग दिया है। इसके अलावा दिग्विजय सिंह की पसंद डॉ. गोविंद सिंह को उनका पसंदीदा सहकारिता विभाग मिला है। 

युवा जोश को महत्वपूर्ण जिम्मा 

कमलनाथ ने अपने मंत्रिमडल के युवा मंत्रियों पर भी भरपूर भरोसा दिखाया है।  पिछली सरकारो में जयंत मलैया के पास रहा वित्त विभाग तरुण भनोट को सौंपा है। इसी तरह पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर जिस नगरीय विकास विभाग को संभाल चुके हैं वह काम दिग्विजय के लाल जयवर्द्धन सिंह को मिला है। 

महाकौशल को मिली मायूसी 

विभागों के बंटवारे में महाकौशल को मायूसी ही हाथ लगी। लखन घनघोरिया को मिले सामाजिक न्याय और ओमकार सिंह मरकाम को जनजातीय मामलों के मंत्रालय और निर्दलीय विधायक प्रदीप जायसवाल को खनिज साधन विभाग दिया गया है। जनता से सीधा सरोकार रखने वाले अहम मंत्रालय के मामले में महाकौशल पिछड़ गया।

विभागों के बंटवारे में चला राहुल का राज 

जहां एक ओर दिग्विजय अपने बेटे जयवर्धन के लिए वित्त विभाग चाहते थे वहीं दुसरे नेताओं को इसपर आपत्ति थी। आपत्ति की वजह जयवर्धन का अनुभव हीं होना था। उनके मुताबिक परदे के पीछे से दिग्विजय ही विभाग में हस्तक्षेप करते। राहुल गांधी के निर्देश पर अहमद पटेल ने इस विवाद को बातचीत से सुलझाया और तब जाकर जयवर्द्धन को नगरीय विकास और आवास विभाग देने पर सहमति बनी। यह विभाग पहले तरुण भनोट को दिए जाने की खबर थी।

दिग्गजों के खेमे : किसके पास क्या 

कमलनाथ 

वित्तगृहउद्योगतकनीकी शिक्षापीडब्ल्यूडीजनसंपर्कखनिज, पीएचई व जल संसाधन। 

दिग्विजय 

नगरीय विकाससहकारितापंचायत एवं ग्रामीण विकासऊर्जा व चिकित्सा शिक्षाएनवीडीए व वाणिज्यिक कर। 

सिंधिया 

परिवहनराजस्वस्वास्थ्य एवं परिवार कल्याणश्रमखाद्य एवं नागरिक आपूर्तिमहिलाबाल विकास, स्कूल शिक्षा व वन।

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