आबकारी ओर ठेकेदारो की मिलीभगत से आधीरात को भी चमचमाती रहती है शराब की दुकानें

शिवपुरी। आबकारी विभाग इन दिनों पूरी तरह से शराब ठेकेदारों पर मेहरबान नजर आ रहा है। वजह साफ है कि देशी और विदेशी शराब की दुकानें आबकारी नियमों को पूरी तरह से धता बताकर संचालित हो रही है। शराब की ये सभी दुकानें निर्धारित समय के अनुरूप न तो खुल रही है और न ही बंद हो रही है। सुबह छह बजे से खुलने वाली यह शराब की दुकानें आधी रात 12 बजे तक खुली रहती हंै। यह हाल अकेले शिवपुरी शहर का ही नहीं बल्कि पूरे जिले का है, जहां देहात और कस्बों में भी देशी और विदेशी शराब की दुकानें देर रात तक आसानी से खुली देखी जा सकती हैं। इस मामले में आबकारी विभाग पूरी तरह से हाथ पर हाथ रखे बैठा हुआ है उसके द्वारा देर रात गुलजार होने वाली शराब की दुकानों को निर्धारित समय पर बंद कराने के लिए किसी भी प्रकार की कार्रवाई देखने को नहीं मिल रही है।

शिवपुरी शहर में देशी और विदेशी लगभग एक दर्जन शराब की दुकानें की है। नियमों के लिहाज से इन दुकानों को सुबह आठ बजे खुलकर रात दस बजे बंद होना चाहिए, लेकिन शासन के इस नियम का पालन किसी भी शराब की दुकानों पर नहीं किया जा रहा है। देशी शराब की कुछ दुकानें तो ऐसी हैं कि जो कि सुबह छह बजे से ही खुल जाती हैं और उन पर देर रात बंद होने के बाद भी पिछले दरबाजे से शराब की बिक्री होती रहती है। शहर में माधवचौक, झांसी तिराहा, अस्पताल चौक और बस स्टेण्ड के पास चार अंग्रेजी शराब की दुकानें है। इन दुकानों को रात 11 बजे के बाद भी आसानी से खुला हुआ देखा सकता है। अंग्रेजी शराब की यह चारों दुकानें गहन और पॉश आबादी वाले इलाके में संचालित हैं और इनके देर रात तक खुले रहने से आसपास का माहौल भी खराब होता है। क्योंकि देर रात शराब की दुकानों पर आने वाले लोग अत्यधिक शराब के नशे में धुत्त होते हंै और वो उत्पात मचाते रहते हैं। देर रात तक रौनक बिखेरनी वाली इन शराब की दुकानों से अपराधिक घटनाओं को भी बल मिल रहा है।

सामने से गेट बंद कर पीछे के रास्ते से हो रही बिक्री

शहर के दूरस्थ और देहाती माने जाने वाले इलाके फतेहपुर, मनियर, करौंदी और बड़ौदी आदि क्षेत्रों में संचालित देशी शराब की दुकानों का भी और भी बुरा हाल है। देशी शराब की कुछ दुकानें तो ऐसी हैं जिनके शटर अल सुबह छह बजे ही खुल जाती हैं और उन पर बकायदा बिक्री भी शुरू हो जाती है। वजह साफ है शराब के शौकीन लोगों का सुबह छह बजने से पहले ही दुकानों के आस-पास मंडराना। यह दुकानें रात के 12 बजे तक खुली रहती हैं और इन दुकानों पर अपराधिक तत्व के लोग गाली-गलोंच कर उत्पात मचाते रहते हैं। दुरुस्त और पिछड़े इलाकों में देर रात तक आबाद रहने वाली शराब दुकानों पर अक्सर लड़ाई-झगड़े और मारपीट की घटनाएं भी होती रहती है। खासबात यह है कि फतेहपुर, मनियर, लुधावली और बड़ौदी जैसे पिछड़े क्षेत्रों में रात 12 बजे के करीब शराब की दुकानें बंद तो कर दी जाती है, लेकिन इसके बाद भी बंद दरबाजे से शराब की बिक्री होती रहती है, क्योंकि इन दुकानों पर ऐसे ग्राहक भी फिक्स है। शहर में संचालित देशी-विदेशी शराब की दुकानें निर्धारित समय पर ही खुले और बंद हो, इस बात के प्रयास अभी तक आबकारी विभाग द्वारा नहीं किए गए हैं।

आबकारी से आर्थिक संबंध दे रहे मनमानी को बढ़ावा

सूत्र इसकी वजह बताते हैं आबकारी विभाग और शराब ठेकेदारों के बीच मजबूत आर्थिक संबंध है और इसी के चलते विभाग ने शराब ठेकेदारों को मनमान ढंग से दुकानें संचालित करने की छूट दे रखी है। आबकारी विभाग के साथ-साथ पुलिस और प्रशासन द्वारा भी कभी इस बात के प्रयास नहीं किए जिससे शराब की दुकानें नियमानुसार ओपन और क्लोज हो सके। देर रात तक शराब की दुकानें आबाद रहने से आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा भी मिल रहा है। ऐसा इसलिए कि देर रात तक शराब की दुकानों पर आने वाले लोगों में ज्यादातर लोग झगड़ालू और आपराधिक प्रवृत्ति के होते हैं। शराब के नशे में जब कोई बड़ी घटना हो जाती है, तब बात फिर पुलिस तक पहुंचती है। सूत्र बताते हैं कि शराब ठेकेदारों की पुलिस से भी सांठगांठ होने की वजह से वह नियमों के विपरीत चलने वाली शराब की दुकानों की ओर आंख बंद किए हुए है।

बीजेपी नेता की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने कहा- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में नहीं है पारदर्शिता

किसानों के लिए कल्याणकारी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में अधिक पैसे आवंटन की सिफारिश बीजेपी नेता की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने की है. समिति ने योजना में पारदर्शिता नहीं.

नई दिल्ली: संसद की एक समिति ने सुझाव दिया है कि ज्यादा से ज्यादा किसानों को फसल बीमा योजनाओं की ओर आकर्षित करने के लिए इन योजनाओं के लिए पर्याप्त पूंजी आवंटन की जरूरत है. समिति ने साथ ही उल्लेख किया कि सरकार द्वारा चलायी जा रही दोनों फसल बीमा योजनाओं में पारदर्शिता की कमी सहित कई ‘समस्याएं’ हैं.

वरिष्ठ बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी की अगुवाई वाली संसदीय समिति ने जैविक खेती करने वाले किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कृषि बीमा योजना के पुनर्गठन की सिफारिश की है. इस योजना में बहु-फसल प्रणाली को भी शामिल किये जाने की अनुशंसा की गयी है.

प्राकल्लन समिति ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अंतर्गत जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना के प्रदर्शन पर अपनी 30वीं रपट में कहा है कि टिकाऊ कृषि से जुड़ा राष्ट्रीय मिशन टिकाऊ खेती के लिए पहल करते समय किसानों पर ध्यान देने से ‘चूक’ जाता है.

समिति ने कहा है कि अगर किसानों को खुद को स्थिरता प्रदान करने का मौका दिया जाता है तो ही कृषि एक टिकाऊ पेशे के रूप में बना रहेगा. इसके लिए जरूरी है कि किसानों को बेहतर बीज मिले. उन्हें सर्वश्रेष्ठ कृषि तकनीक की जानकारी हो और सरकार की ओर से खतरों को कवर करने के लिए समर्थन मिले.

समिति ने 2016 में शुरू की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कई तरह की समस्यायें गिनाई हैं. इसमें फसल काटने के अनुभवों में होने वाली देरी और उससे जुड़ी ऊंची लागत जैसी समस्यायें बताई गई हैं. इसके साथ ही बीमा दावों के भुगतान में देरी अथवा भुगतान नहीं होना जैसी समस्यायें भी सामने रखी गई हैं. योजना में पारदर्शिता की कमी भी बताई गई है.

एसआर मोहंती बने मुख्य सचिव, बीपी सिंह को राज्य निर्वाचन आयुक्त बनाया

भोपाल। आखिरकार एसआर मोहंती प्रदेश के नए मुख्य सचिव बन गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने उनकी नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए। इसी के साथ उनके नाम को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लग गया। वे बीपी सिंह का स्थान लेंगे। सिंह 31 दिसंबर को ही रिटायर हो रहे हैं।

कमलनाथ सरकार ने तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए एस आर मोहंती को मुख्य सचिव बना दिया। प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद से प्रशासनिक सर्जरी जारी है। कांग्रेस के सत्ता में आते ही अटकलें थी कि एस आर मोहंती प्रदेश के नए मुख्य सचिव होंगे, लेकिन इसे लेकर पिछले कई दिनों से सिर्फ चर्चाएं थी। सामान्य प्रशासन विभाग ने सोमवार को उनकी नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए। मोहंती वर्तमान में माध्यमिक शिक्षा मंडल के अध्यक्ष हैं। उनके अलावा एम. गोपाल कृष्ण रेड्डी, मनु श्रीवास्तव और मोहम्मद सुलेमान के नाम भी मुख्य सचिव के दौड़ में थे। लेकिन मोहंती के नाम पर मुहर लगी।

1982 बैच के आईएएस अफसर मोहंती वर्तमान मुख्य सचिव सिंह से वरिष्ठ हैं, लेकिन उनके खिलाफ EOW की जांच जारी होने के कारण भाजपा सरकार ने उन्हें मुख्य सचिव ना बनाते हुए बीपी सिंह को मुख्य सचिव बनाया था। हालांकि मोहंती को कुछ समय पहले ही EOW की जांच में क्लीनचिट मिल गई थी। इसके बाद से उनका मुख्य सचिव तय माना जा रहा था। इसके लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कानूनी सलाह तक ली थी। मोहंती को कांग्रेसी नेताओं के करीबी होने का फायदा मिला है। उनके मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से अच्छे संबंध हैं।

मौसम/ मप्र में ठंड से दो की मौत, राजस्थान के 11 शहरों में तापमान 5 डिग्री से नीचे

नई दिल्ली. दिल्ली-एनसीआर समेत उत्तर-पश्चिमी भारत में ठंड का प्रकोप जारी है। मध्यप्रदेश में रविवार को पचमढ़ी का तापमान माइनस 2 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। उधर, खरगोन और अशोकनगर जिले में सर्दी के कारण दो लोगों की मौत हो गई। राजस्थान के 11 शहरों में पारा 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया। राज्य में भीलवाड़ा सबसे सर्द रहा। यहां रविवार को तापमान 0.6 डिग्री दर्ज किया गया। राजधानी दिल्ली में भी पारा तीन डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। मौसम विभाग ने अगले दो से तीन दिन तेज ठंड का अनुमान जताया है। 

प्रदेश में सर्दी जानलेवा हो चुकी है। 12 से ज्यादा शहरों में पारा 4 डिग्री से नीचे रहा। पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा। यहां पारा माइनस 2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अशोकनगर जिले के ईसागढ़ ब्लॉक में एक मोर ने भी दम तोड़ दिया। भोपाल में पारा 6.8 डिग्री पर पहुंच गया। पूर्व वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक एसके नायक ने बताया कि पाकिस्तान के पास बना वेस्टर्न डिस्टरबेंस कश्मीर की ओर बढ़ा है, इसलिए तापमान में हल्का इजाफा हुआ है। हालांकि, बहुत ज्यादा बदलाव की उम्मीद नहीं है।

यह शहर रहे सबसे ज्यादा ठंडे-

शहरतापमान डिग्री सेल्सियसखजुराहो1उमरिया1दतिया2.2नौगांव2.4दमोह2.6बैतूल2.7रीवा2.8पचमढी-2

प्रदेश में बीते पांच दिन से माइनस में चल रहा पारा रविवार को चढ़ा, लेकिन शीतलहर व कोहरे से राहत नहीं मिली। सीकर के फतेहपुर में पारा 1.2 डिग्री रहा। माउंटआबू में तापमान 1.0 डिग्री और जयपुर में सीजन का सबसे कम पारा 5 डिग्री दर्ज किया गया। राजसमंद में ठंड के कारण फसल खराब होने से सदमे में आए एक किसान ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। इससे पहले ठंड लगने से दो किसानों की मौत हो गई थी। 

शहरतापमान डिग्री सेल्सियस मेंभीलवाड़ा0.6अलवर0.8माउंटआबू1.0 फतेहपुर1.2चित्तौड़गढ़2.5चूरू2.9वनस्थली3.4डबोक3.4 सीकर3.5गंगानगर4.2जयपुर5.0
हिमाचल: शिमला में बर्फबारी से हो सकता है नए साल का आगाज

शिमला मौसम केंद्र के निदेशक मनमोहन सिंह ने बताया कि एक जनवरी को राज्य के पर्यटक स्थल शिमला, कुफरी, नारकंडा, डलहौजी और मनाली में बर्फबारी हो सकती है। उन्होंने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के चलते अधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर बर्फबारी भी हो सकती है। इसके साथ ही, ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा के हिस्सों, सोलन और सिरमौर जिलों सहित कम ऊंचाई और मैदानी इलाकों में बारिश की संभावना है।

छत्तीसगढ़: प्रदेश के सभी शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे, अलर्ट जारी

प्रदेश के सभी शहरों में रविवार को न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। मौसम विभाग ने प्रशासन को तैयारी के लिए अलर्ट जारी किया है। राजधानी रायपुर में ठंड का 10 साल का रिकॉर्ड टूट गया। यहां न्यूनतम पारा 8.9 सेल्सियस दर्ज हुआ। वहीं, पहाड़ी क्षेत्र अंबिकापुर सबसे ठंडा रहा। यहां तापमान 4.40 सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मैदानी इलाकों में दुर्ग फिलहाल प्रदेश में सबसे ठंडा है, यहां पारा 5.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बिलासपुर में 7.2 डिग्री, पेंड्रा रोड में 4.5 डिग्री और जगदलपुर में 6.3 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। 

हरियाणा: गुड़गांव में पारा 0.4 डिग्री

गुड़गांव में रविवार को ठंड ने 8 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। यहां न्यूनतम तापमान 0.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने बताया कि नए साल पर प्रदेश के कुछ इलाकों में बूंदाबांदी हो सकती है। राज्य में 6 जिलों में पारा 3 डिग्री से नीचे दर्ज किया। इनमें हिसार में 1.6 डिग्री,  रेवाड़ी में 2 डिग्री, करनाल में 2 डिग्री,  पानीपत में 2.2 डिग्री, नारनौल में 2.5 डिग्री, रोहतक में 3 डिग्री और फरीदाबाद में 3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
झारखंड

सबसे ठंडा मैक्लुस्कीगंज, सीजन में पहली बार कांके का पारा शून्य

रांची समेत पूरे प्रदेश में शीतलहर चल रही है। रविवार को सबसे ठंडा मैक्लुस्कीगंज रहा। यहां न्यूनतम तापमान माइनस एक डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। एक दिन पहले यहां पर पारा माइनस 1.5 डिग्री था। सीजन में पहली बार कांके में पारा शून्य डिग्री पर पहुंच गया। पलामू में ठंड लगने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। मौसम विभाग के मुताबिक- अगले चार दिनों तक झारखंड का न्यूनतम तापमान 5 से 7 डिग्री के बीच रहने की संभावना है। रांची में 4.6 डिग्री, डालटनगंज में 4.6 डिग्री और जमशेदपुर में 6.8 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। 

10 सबसे ठंडे मैदानी क्षेत्र

स्थानतापमान (डिग्री सेल्सियस में)भीलवाड़ा, राजस्थान0.6अलवर, राजस्थान0.8खजुराहो, मप्र1.0माउंट आबू, राजस्थान1.0उमरिया, मप्र1.0चूरू, राजस्थान1.6हिसार, हरियाणा1.6मलाजखंड, मप्र2.0नौगांव, मप्र2.4अमृतसर, पंजाब2.5

जम्मू-कश्मीर में इस साल ढेर हुए 311 आतंकी, पिछले एक दशक में सबसे ज्यादा

नई दिल्ली
जम्मू और कश्मीर में इस साल यानी 2018 में सुरक्षा बलों ने 311 आतंकियों को ढेर किया। सेना की 15 कॉर्प्स कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल अनिल कुमार भट्ट ने सोमवार को यह जानकारी दी। उन्होंने सुरक्षा बलों के बीच शानदार तालमेल और ऑपरेशन की आजादी को इसका श्रेय दिया। बता दें कि यह करीब पिछले एक दशक में सूबे में मारे जाने वाले आतंकियों का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इससे पहले 2010 में 232 आतंकी मारे गए थे।
गृह मंत्रालय के आकंड़ों के मुताबिक, सूबे में इस साल आतंकी गतिविधियों में भी पिछले साल के मुकाबले बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल जहां आतंक से संबंधित 342 घटनाएं हुईं, वहीं इस साल दिसंबर के पहले हफ्ते तक 429 घटनाएं हुईं। पिछले साल जहां 40 सिविलियन मारे गए थे, वहीं इस साल 77 सिविलियन मारे गए। इस साल दिसंबर के पहले हफ्ते तक सुरक्षा बलों के 80 जवान शहीद हुए। पिछले साल भी 80 जवान शहीद हुए थे।

पाकिस्तानी आतंकियों को मिल रहा लोकल सपॉर्ट
घाटी में इस साल पाकिस्तानी आतंकियों द्वारा किए गए आतंकी हमलों में इजाफा हुआ है। पाकिस्तानी आतंकियों को घाटी में उनके लोकल काडर का साथ मिल रहा है। यह हाल तब है जब सेना ने मुठभेड़ की जगहों पर पत्थरबाजी करने वालों को सख्त चेतावनी दी थी कि उन्हें आतंकियों के ओवर-ग्राउंड सपॉर्टर के तौर पर देखा जाएगा।
पिछले साल मारे गए थे 213 आतंकी
इस साल कुल 311 आतंकी मारे गए। दिसंबर के पहले हफ्ते तक 223 आतंकी मारे गए थे यानी पिछले 3 हफ्तों में ही 88 आतंकी ढेर हुए हैं। दिसंबर के पहले हफ्ते तक मारे गए कुल आतंकियों में 93 विदेशी थे। 15 सितंबर को सूबे में स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव के ऐलान के बाद से अगले 80 दिनों में ही 81 आतंकी मारे गए। वहीं, 25 जून से लेकर 14 सितंबर के बीच 51 आतंकी ढेर किए गए।

जम्मू-कश्मीर में हिंसा

आतंकी घटनाओं का लेखा-जोखा201620172018मारे गए कुल आतंकी150213311मारे गए विदेशी आतंकी—-93सिविलियन की मौत–4077शहीद हुए जवान828080आतंकी घटनाएं322342429

(* 2018 के आंकड़ों में मारे गए आतंकियों को छोड़कर बाकी आंकड़े 8 दिसंबर 2018 तक के हैं)

एनकाउंटर की जगहों पर पत्थरबाजी
15 सितंबर से 5 दिसंबर के बीच 2 सिविलियन भी मारे गए। वहीं, इस दौरान पत्थरबाजी की घटनाओं में 170 लोग जख्मी हुए। इसी तरह, 25 जून से 14 सितंबर के बीच 8 सिविलियन मारे गए और पत्थरबाजी की वजह से 216 घायल हुए। पत्थरबाजी की ये घटनाएं ज्यादातर उन जगहों पर हुईं, जहां सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ चल रहे थे।

राज्यपाल शासन के दौरान ज्यादा मारे गए आतंकी
जम्मू-कश्मीर में 19 जून को राज्यपाल शासन लागू होने के बाद पहले के मुकाबले ज्यादा आतंकी ढेर हुए हैं। इस दौरान सुरक्षा बलों ने घाटी में कई शीर्ष आतंकी कमांडरों को भी ढेर किया। इनमें लश्कर कमांडर नवीद जट, जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर का भतीजा स्नाइपर उस्मान हैदर और हिज्बुल मुजाहिदीन कमांडर अल्ताफ अहमद डार भी शामिल हैं।

इस समय घाटी में सक्रिय हैं 250-300 आतंकी
पिछले साल के मुकाबले ज्यादा सिविलियन की मौत के साथ-साथ सुरक्षा बलों के लिए जो एक और बड़ी चिंता की बात है, वह है स्थानीय आतंकियों की भर्ती में इजाफा। हिज्बुल मुजाहिदीन और पाकिस्तानी आतंकी संगठन स्थानीय कश्मीरियों को भर्ती कर रहे हैं। एक इंटिलिजेंस अधिकारी ने इस महीने की शुरुआत में हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘हालांकि, हाल के महीनों में आतंकी संगठनों में स्थानीय युवाओं की भर्ती के मामलों में कई आई है।’ इस समय घाटी में 250 से 300 आतंकियों के सक्रिय होने का अनुमान है।

स्थानीय चुनाव में बाधा पहुंचाने के पहले से ज्यादा सक्रिय हुए आतंकी
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आतंकी घटनाओं में इजाफा की मुख्य वजह यह रही कि इस साल आतंकी पहले से ज्यादा सक्रिय थे। पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने शहरी निकाय और पंचायत चुनावों में बाधा पहुंचाने की हर मुमकिन कोशिश की। अलगाववादियों ने भी चुनाव प्रक्रिया को पटरी से उतारने के लिए बहिष्कार की अपील की और बार-बार बंद का भी आह्वान किया।

दिग्विजय सिंह ने कमलनाथ सरकार से किसानों के लिए की खास अपील

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने प्रदेश कीकांग्रेस सरकार से अपील की है. उन्होंने ट्विटर पर लिखा प्रदेश में कड़ाके की ठंड से पाला पड़ने से फ़सल को काफ़ी नुकसान हुआ है राज्य सरकार को तत्काल सर्वे करवा कर किसानों को राहत देनी चाहिए. कांग्रेस पार्टी विधायकों व मंत्री गणों को अपने क्षेत्रों में तत्काल जा कर फ़सल का जायज़ा लेना चाहिए.दरअसल, भोपाल सहित मध्य प्रदेश के कई जिलों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है. जिसके चलते फसलों को फसलों को भारी नुकसान हो रहा है. कई जिलों के किसान इस मामले में जिला कलेक्टर और अन्य अधिकारियों से मिल भी चुके हैं. कई जगहों पर किसानों के लिए अधिकारियों ने कुछ कार्य भी किए हैं. 

बता दें कि मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड पड़ रही है. शनिवार रात को पचमढ़ी का तापमान माइनस दो डिग्री रिकॉर्ड हुआ. 12 से ज्यादा शहरों में पारा 4 डिग्री से नीचे रहा। उधर, खरगोन और अशोकनगर जिले में सर्दी के कारण दो लोगों की मौत हो गई.

मध्यप्रदेश/ सरकार ने शुरू की ग्वालियर, रीवा, छिंदवाड़ा नगर निगमों की जांच

भोपाल . छिंदवाड़ा, ग्वालियर और रीवा नगर निगम में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का पैसा एक मद से दूसरे में खर्च करने, वित्तीय प्रबंधन में गड़बड़ी और एमआईसी के फैसलों की जांच सरकार ने शुरू कर दी है।

नगर निगमों के कामकाज के परीक्षण के लिए तीन सदस्यीय अफसरों की टीम बनाई गई है। संचालनालय ने सात दिन में मैदानी निरीक्षण के बाद प्रतिवेदन देने के निर्देश टीम को दिए हैं। नगरीय विकास संचालनालय के उपसचिव राजीव निगम ने 21 दिसंबर को नगर निगमों की वर्तमान व्यवस्था के निरीक्षण और पर्यवेक्षण के आदेश जारी किए हैं।

इसके मुताबिक सरकार के संज्ञान में एेसे प्रकरण आए हैं, जिसमें नगर निगमों में योजनाओं का क्रियान्वन और संचालन सरकार के निर्देशों के अनुसार नहीं हुआ है। केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं में एक-दूसरे मदों में खर्च करने की स्थिति बनी है। शासन ने जांच दलों को सात दिन का समय दिया था, लेकिन अभी तक रिपोर्ट जमा नहीं हुई है।

ये है निरीक्षण टीम

ग्वालियर नगर निगम के लिए टीम : अपर आयुक्त विकास मिश्रा, अधीक्षण यंत्री सुरेश सेजकर, लेखाधिकारी प्रमोद नायक।
रीवा नगर निगम के लिए टीम : अपर संचालक पीएन पांडे, अधीक्षण यंत्री राजीव गोस्वामी, लेखाधिकारी एजे एक्का।
छिंदवाड़ा नगर निगम के लिए टीम: संयुक्त संचालक आर के कार्तिकेय, संयुक्त संचालक(वित्त) अरूण पालीवाल, कार्यपालन यंत्री आनंद सिंह।

कई नगर निगमों में हो रही है मनमानी, फिलहाल इंदौर जांच के दायरे से बाहर

प्रदेश के कई नगरीय निकायों में विकास कार्य के खर्च में मनमानी हुई है। कांग्रेस की सरकार बनने के बाद पहले इन तीन नगर निगमों का परीक्षण करवाया जा रहा है। इंदौर नगर निगम को अभी परीक्षण में शामिल नहीं किया गया है, लेकिन यहां भी पिछले साल में कई योजनाओं की राशि स्वच्छता अभियान के मद में खर्च कर दी गई है।

कैबिनेट की बैठक आज, नए साल पर जनता और कर्मचारियों को मिल सकती है बड़ी सौगात


उत्तराखंड
प्रदेश सरकार ने साल के आखिरी दिन मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई है। उम्मीद है कि नए साल पर सरकार प्रदेश की जनता और कर्मचारियों को बड़ी सौगात दे सकती है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में सोमवार सुबह दस बजे से मुख्यमंत्री आवास पर मंत्रिमंडल की बैठक होगी।

जिसमें मंत्रिमंडल के समक्ष एक दर्जन प्रस्ताव रखे जाएंगे। इनमें आवासीय नीतियों में संशोधन का प्रस्ताव भी रखा जा सकता है। जिसमें मिश्रित श्रेणी के भवन निर्माण, अवैध निर्माण को नियमित करने के लिए वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी भी आ सकती है।

वहीं, दून में एक नए निजी विश्वविद्यालय का प्रस्ताव भी रखा जा सकता है। लंबे समय से सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप भत्तों की मांग कर रहे कर्मचारियों को भी बड़ी राहत मिल सकती है।

वित्त मंत्री प्रकाश पंत के अधीन बनी मंत्रिमंडलीय उपसमिति की भत्तों को लागू करने की सिफारिशों पर मुख्यमंत्री निर्णय ले सकते हैं। वहीं आंदोलन की चेतावनी दे रहे कर्मचारी संघों की सुनवाई भी संभव है।

2019 लोकसभा चुनाव के लिए BJP ने शुरू किया ‘मिशन 123’, पीएम मोदी करेंगे 20 राज्यों की 123 सीटों का दौरा

भारतीय जनता पार्टी (BJP) हाल में हुए विधानसभा चुनावों में तीन अहम हिन्दी प्रदेशों- राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 15 साल से चली आ रही सरकार गंवाने के सदमे से उबरने की कोशिश कर रही है। इसकी भरपाई वह नए क्षेत्रों में जीत हासिल कर करना चाहती है। इसके लिए उसने ‘मिशन 123’ (Mission 123) शुरू किया है। 

पार्टी के पदाधिकारियों ने बताया कि भाजपा ने अपने ‘मिशन 123’ को शुरू किया है। इसके तहत वह खुद के लड़े उन 123 लोकसभा सीटों को जीतने पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही है जिन्हें वह 2014 में मोदी लहर के बावजूद नहीं जीत पाई थी। पिछले साल पार्टी ने इन 123 सीटों को 25 हिस्सों में विभाजित का हर हिस्से का प्रभार एक नेता को सौंप दिया है। 

पदाधिकारियों ने बताया कि पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगले 100 दिनों तक जनसभा आयोजित कर उनका भरपूर उपयोग करना चाहती है। मोदी खुद 20 राज्यों में फैले इन 123 संसदीय सीटों का दौरा करेंगे और वहां मतदाताओं का समर्थन मांगने के साथ ही भाजपा कार्यकर्ताओं को भी ‘सक्रिय’ करेंगे। इनमें पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा शामिल हैं, जहां कुल 77 लोकसभा सीटें हैं। लेकिन भाजपा इनमें से केवल 10 ही जीत पाई थीं। 

भाजपा के एक महासचिव ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया, ‘प्रधानमंत्री मोदी अब भी लोकप्रिय नेता हैं और एकमात्र ऐसे नेता हैं जो आगे भी एक स्थायी सरकार दे सकते हैं। हम इस बात को प्रचारित करेंगे और इसका लाभ उठाएंगे।’ 

पहला वोट मोदी अभियान 12 से 

पूनम महाजन के नेतृत्व में भाजपा युवा मोर्चे को पहली बार बने मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए 14 सूत्रीय कार्यक्रम दिया गया है। 12 जनवरी से पहली बार मतदाता बने युवाओं को पहली बार अपना वोट मोदी को देने के लिए प्रेरित करने को ‘पहला वोट मोदी’ अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत 16 से 22 जनवरी तक विभिन्न शहरों में टाउन हॉल कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाएगा। 

‘नेशन विद नमो’ नेटवर्क बनेगा

मोर्चा मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनाने की चाहत रखनेवाले युवाओं के लिए 12 जनवरी से ‘नेशन विद नमो’ कार्यकर्ता नेटवर्क बनाएगा। इसके तहत युवाओं के साथ ही देश भर के उद्यमियों और किसानों को भी 2019 में मोदी का समर्थन करने के लिए समझाया जाएगा। 

एक दूसरे महासचिव ने कहा कि पार्टी ने महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और युवा  जैसे सात विशिष्ट मतदाता समूहों के बीच काम करने का टास्क नेताओं को दिया है। उन्होंने बताया कि दिसंबर और मार्च के बीच इन सभी वर्गों का सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस महासचिव के हवाले से बताया गया है कि ‘सभी मोर्चों के लिए अलग-अलग लक्ष्य रखे गए हैं।’ 

शाह संभालेंगे बूथ स्तरीय योजना

इसके साथ ही पार्टी अध्यक्ष अमित शाह हर बूथ पर एक टीम को सक्रिय करके भाजपा की बूथ-स्तरीय योजना को कारगर बनाने पर काम करेंगे, जिससे सरकार की योजनाओं से लाभान्वित 22 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंच बनाई जा सके। शाह 11 और 12 जनवरी को दिल्ली में भाजपा की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में पार्टी के लगभग 15,000 नेताओं को संबोधित करेंगे। यह पहली बार है जब पार्टी इतने बड़े पैमाने पर अपनी परिषद की बैठक आयोजित कर रही है। इसमें जिला-स्तरीय कार्यकर्ताओं को भी आमंत्रित किया गया है।

कांग्रेस पर हमले बेअसर

अशोका विश्वविद्यालय में राजनीतिक विज्ञान के सहायक प्रोफेसर और ‘त्रिवेदी सेंटर फॉर पॉलिटिकल डाटा’ के सह-निदेशक गाइल्स वर्नियर्स ने कहा कि हालिया चुनावों में मतदाताओं ने अपना विचार स्वतंत्र रूप से बनाया और कांग्रेस के खिलाफ परंपरागत भाजपाई हमलों को तवज्जो नहीं दिया। उन्होंने कहा, यह माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री उन क्षेत्रों में अधिक रैलियां करेंगे जहां भाजपा अपना प्रसार चाहती है। तथ्य यह है कि वह अपने कार्यकाल की शुरुआत से ही प्रचार पर काफी समय दे रहे हैं। अब जब अधिकांश हिंदी प्रदेश खेल बिगाड़ने के मूड में हैं, ऐसे में उन क्षेत्रों में संसाधन और समय बिताना प्रतिकूल साबित हो सकता है, जहां मामूली लाभ होने की संभावना है। 

मोदी का अभियान 

  • 24 दिसंबर को भुवनेश्वर में नए प्रौद्योगिकी संस्थान परिसर का उद्घाटन किया, खुर्दा में रैली की।
  • 25 दिसंबर को असम में उनका अगला पड़ाव था। 
  • 4 जनवरी को मोदी फिर असम के सिलचर जाएंगे।
  • 5 जनवरी को ओडिशा के मयूरभंज में एक रैली को संबोधित करेंगे। 
  • 15 जनवरी को एक और बैठक के लिए ओडिशा जाएंगे।