पश्चिम बंगाल से यूपी में हो रही जाली नोटों की सप्लाई, युवक की गिरफ्तारी से हुआ बड़ा खुलासा

फिरोजाबाद 
युवक के पास से बरामद जाली नोट 
फिरोजाबाद की थाना रामगढ़ पुलिस ने जाली करेंसी के साथ एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी युवक पश्चिम बंगाल से जाली नोट लाकर यहां पर खपा रहा था। पुलिस ने उसके पास से 39800 की नकली करेंसी, एटीम व आधार कार्ड बरामद किए हैं।

थाना रामगढ़ पुलिस को आसपास के क्षेत्र में जाली नोट प्रचलन में आने की सूचनाएं मिल रहीं थी। इसकी जानकारी एसएसपी सचिंद्र पटेल को भी दी गई। एसएसपी के निर्देश पर एसपी सिटी राजेश कुमार सिंह ने जाली नोट का कारोबार करने वालों की धरपकड़ के लिए छानबीन शुरू की।
गुरुवार को पुलिस ने सैलई के समीप सब्जी मंडी के सामने खड़े एक युवक टोका। इस पर युवक मौके से भाग खड़ा हुआ। पुलिस ने पीछा कर युवक को नए बाईपास स्थित पेट्रोल पंप के पास से पकड़ लिया। युवक ने अपना नाम सुखवीर उर्फ सोनवीर पुत्र रमेश चंद्र निवासी जगजीवन नगर, थाना रामगढ़ बताया। 
दो हजार और पांच सौ के जाली नोट मिले
लाल शर्ट पहने खड़ा आरोपी युवक 
तलाशी के दौरान सुखवीर के पास 39800 रुपये की जाली करेंसी मिली है। इनमें दो-दो हजार के नौ, पांच सौ के 42, सौ रुपये का एक, पचास रुपये के 14 जाली नोट हैं। साथ ही बैंक का एटीएम, पैनकार्ड एवं सुखवीर के नाम से आधार कार्ड मिला है।  

पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि वो पश्चिम बंगाल के मालदा निवासी टिंकू उर्फ टन मुहम्मद से आधी कीमत पर जाली करेंसी लेकर आता है। इस करेंसी को वो भीड़भाड़ वाले इलाकों और दुकानों पर पूरी कीमत पर चला देता था।   
जाली करेंसी के संबंध में खुफिया विभाग के साथ-साथ आईबी, स्पेशल ब्रांच और एसटीएफ भी आरोपी से पूछताछ की जा रही है। पकड़े गए आरोपी का नेटवर्क खंगाला जा रहा है।  
पहले भी हो चुका है गिरफ्तार
जाली नोटों के साथ पकड़े सुखवीर के विरुद्ध थाना सूरजपुर गौतमबुद्धनगर, थाना चौबिया इटावा और फिरोजाबाद के थाना दक्षिण और रामगढ़ में पांच मामले दर्ज हैं। 
एसएसपी सचिंद्र पटेल ने बताया कि सुखवीर पहले भी जाली करेंसी के साथ पकड़ा जा चुका है। सुखवीर पर अब गैंगस्टर एक्ट और रासुका की कार्रवाई भी की जाएगी। वर्ष 2015 में सुखवीर जाली करेंसी के साथ रामगढ़ क्षेत्र में ही पकड़ा गया था।

आगरा से श्रीकांत मिश्रा
द न्यूज़ लाइट ,संवाददाता

दिग्विजय का दावा, कांग्रेस ला रही 132 सीटें

उधर, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने दावा किया कि कांग्रेस मध्य प्रदेश में 132 से अधिक सीट जीतकर अपनी सरकार बनाएगी। राज्य में 230 विधानसभा सीटें हैं। बुधवार को हुए मतदान में 75 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था।

मतों की गिनती 11 दिसंबर को होगी। राज्य में 1993 से 2003 तक 10 साल मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह से जब कहा गया कि कांग्रेस की 132 सीटें आ रही हैं तो उन्होंने कहा, प्रदेश में हम 132 से अधिक सीटों पर विजय हासिल कर सरकार बनाएंगे। बता दें कि प्रदेश में भाजपा पिछले 15 साल से सत्तारूढ़ है।

सिंह ने कहा, वर्ष 2013 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में प्रदेश में लगभग तीन फीसदी फर्जी मतदाता थे। इस बार विधानसभा चुनाव से पहले हमने मतदाता सूची से इनकी लगभग छंटनी करवा दी। उन्होंने कहा कि इस बार हुए चुनाव में जीत के लिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अपना दिल, दिमाग, शरीर और आत्मा सब कुछ लगा दिया, कोई कसर नहीं छोड़ी।

मध्यप्रदेश: भाजपा के दिग्गज बाबूलाल गौर ने कहा, बन रही है कांग्रेस की सरकार

भोपाल
पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर ने कहा है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बन रही है। गौर ने यह टिप्पणी कांग्रेस नेता और दिग्विजय मंत्रिमंडल में सदस्य रहे आरिफ अकील से मुलाकात के दौरान की। अकील बृहस्पतिवार को गौर से मुलाकात करने उनके बंगले पहुंचे थे। दोनों ने मीडिया के सामने ही कुछ समय चर्चा की। गौर ने अकील से कहा कि कांग्रेस की सरकार बन रही है और आप मंत्री बन रहे हो। उल्लेखनीय है कि लगातार दस विधानसभा चुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाने वाले गौर का इस बार पार्टी ने टिकट काटकर उनकी बहू कृष्णा गौर को उम्मीदवार बनाया है।

योगी के बयान के बाद आगरा में लगे ‘दलित देवता हनुमान’ के जयकारे, ठोंका मंदिरों पर दावा.  

आगरा
मंदिर में हनुमान चलीसा का पाठ करते दलित समाज के लोग 
भगवान शिव और श्रीराम के बाद अब हनुमान के नाम पर सियासत शुरू हो गई है। राजस्थान में चुनावी सभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिए गए बयान पर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया की है। 
गुरुवार को कांग्रेस नेता अमित सिंह के नेतृत्व में दलित समाज के लोगों ने जनेऊ धारण कर लंगड़े की चौकी स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ किया। उन्होंने कहा कि अब देश भर के हनुमान मंदिरों की व्यवस्था दलित समाज करेगा। वहां के महंत भी दलित समाज से संबंधित लोग होंगे।

कांग्रेस कार्यकर्ता दोपहर करीब दो बजे प्राचीन हनुमान मंदिर में पहुंचे। वहां उन्होंने जनेऊ धारण किया और हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए ‘दलित देवता हनुमान की जय’ के नारे लगाए। यह कार्यक्रम करीब आधे घंटे तक चला। कार्यक्रम में महिलाएं भी शामिल रहीं।
योगी के बयान पर तंज
कार्यक्रम के विषय में कांग्रेस नेता अमित सिंह से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हमें नहीं पता था कि हनुमान जी दलित जाति से संबंध रखते हैं। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाषण में हनुमानजी की जाति के बारे में बताया है। तब हमें पता चला है कि दलितों के भगवान अलग हैं और उनके देश भर में मंदिर भी हैं।
लिहाजा अब देश भर के हनुमान मंदिरों की व्यवस्था, पूजा पाठ का काम दलितों के हाथ में दिया जाना चाहिए। जब उनसे पूछा गया कि देवी देवताओं की जाति नहीं होती है तो अमित सिंह ने कहा कि हमने कब कहा इनकी जाति होती है? 
यह तो प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा है। वे तो योगी हैं। जब योगी जी कह रहे हैं तो सही होगा कि देवताओं की भी जाति होती है और हनुमान जी वनवासी, दलित जाति से संबंधित हैं। उन्होंने कहा कि अब हनुमान मंदिरों की व्यवस्था धोबी, कठेरिया, कोली, खटीक, वाल्मीकि समाज के लोग देखेंगे।
अनोखे विरोध प्रदर्शन में राजकुमार वाल्मीकि, तुलसी वाल्मीकि, अरुण वाल्मीकि, कपिल वाल्मीकि, अमित वाल्मीकि, नंद लाल भारती, पप्पू वाल्मीकि, सोमेश वाल्मीकि, महेश जाटव, सतेंद्र कैम, तुलसी वाल्मीकि, प्रदीप पिप्पल, किशन लाल आदि मौजूद रहे।
आगरा से श्रीकांत मिश्रा
द न्यूज़ लाइट ,संवाददाता

दुपट्टे से गला घोंटकर महिला की हत्या, चारागाह में फेंका शव

मैनपुरी 
मैनपुरी जिले में एक महिला की गला घोंटकर हत्या कर दी गई। इसके बाद उसका शव चारागाह में फेंक दिया गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने छानबीन की। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। अभी महिला की शिनाख्त नहीं पाई है। 
घटना थाना किशनी क्षेत्र के गांव हरचन्दपुर की है। ग्रामीणों ने शुक्रवार को गांव के बाहर चारागाह में एक महिला का शव पड़ा देखा। इसकी खबर लगते ही गांव में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही मौके पर थाना पुलिस पहुंच गई।
पुलिस ने घटनास्थल पर गहनता से छानबीन की। इसके बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। महिला के गले में दुपट्टा बंधा मिला है। माना जा रहा है कि इसी दुपट्टे से महिला का गला घोंट गया है।

महिला की अभी तक शिनाख्त नहीं हो पाई है। पुलिस इसके प्रयास कर रही है। वहीं ग्रामीण दुष्कर्म के बाद महिला की हत्या किए जाने की आशंका जता रहे हैं। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही स्थिति साफ होगी। 
आगरा से श्रीकांत मिश्रा
द न्यूज़ लाइट ,संवाददाता

कोलारस विधानसभा का एक दरोगा जिले की सारी भारतीय जनता पार्टी पर भारी

करुणेश शर्मा:
कोलारस विधानसभा क्षेत्र में एक गांव है इंदार जहां के दरोगा गोयल साहब जिले की भारतीय जनता पार्टी पर भारी चुनाव के दौरान पड़ते दिखाई दिए. इन दरोगा महाशय ने कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार महेंद्र यादव का साथ दिया ऐसा आरोप भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार वीरेंद्र रघुवंशी ने लगाया है वीरेंद्र रघुवंशी ने दरोगा पर यह आरोप चुनाव के दौरान लगाया जब मतदान चल रहा था मतदान 25% हो चुका था वीरेंद्र रघुवंशी के अनुसार कांग्रेस के उम्मीदवार थाने से कुछ ही मीटर की दूरी पर पैसा व शराब बांट रहे थे. व कांग्रेस के उम्मीदवार के समर्थकों ने भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट भी की आरोप लगाने पर किसी नौकर के ऊपर मामूली सी धाराएं लगाई गई ऐसा आरोप वीरेंद्र रघुवंशी ने लगाया है.वीरेंद्र ने चुनाव आयुक्त भारत व मुख्य चुनाव अधिकारी भोपाल कलेक्टर शिवपुरी एसपी शिवपुरी पर शिकायत भी की है,जिसकी अभी तक कोई कार्रवाई प्रशासन के द्वारा नहीं की गई है भाजपा उम्मीदवार वीरेंद्र रघुवंशी ने चुनाव आयोग से उक्त दरोगा को बर्खास्त करने की मांग की है. इस प्रकार जिले की पूरी भारतीय जनता पार्टी पर एक दरोगा हावी होता दिखाई दिया जबकि वीरेंद्र रघुवंशी भारतीय जनता पार्टी से उम्मीदवार है जिनकी केंद्र में अभी सरकार है. वह प्रदेश में भी सरकार थी इस प्रकार एक दरोगा के कारण उन्होंने चुनाव में काफी गड़बड़ियों की आशंका जाहिर की है.

उत्तराखंड से आ रही सेहत की सुगंध, ये दालें खाएं और बीमारियों को दूर भगाएं

देहरादून

उत्तराखंड की संस्कृति और परंपराएं आपको अच्छी लगती हैं? यहां का खान-पान और खासकर दालें भी आपको पसंद होंगी। यहां के खान-पान में विविधता का समावेश है। पौष्टिक तत्वों से भरपूर उत्तराखंडी खान-पान में विशेष तौर पर मोटी दालों को विशेष स्थान मिला हुआ है। यहां पैदा होने वाली दालें राजमा, गहथ (कुलथ), उड़द, तोर, लोबिया, काले भट, नौरंगी (रयांस), सफेद छेमी आदि औषधीय गुणों से भरपूर हैं और इन्हें मौसम के हिसाब से उपयोग में लाया जाता है।

ऑर्गेनिक हैं ये दालें, अब मिल रहा बाजार
खास बात यह कि उत्तराखंडी दालें जैविक होने के साथ ही स्वास्थ्य के लिहाज से भी बेहद लाभदायी हैं। इनकी खेती गढ़वाल-कुमाऊं के पर्वतीय इलाकों में की जाती है। हालांकि अब कई संस्थाओं और संगठनों के माध्यम से इन्हें बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। जिससे काश्तकारों को इनका अच्छा मूल्य मिल सके और लोग पारंपरिक खेती के प्रति भी आकर्षित हों।

औषधीय गुणों से भरपूर हैं पहाड़ी दालें

पोषण से लबरेज है गहथ
हल्के भूरे रंग की गहथ पहाड़ की औषधीय गुण वाली प्रमुख दाल है। अन्य दालों के मुकाबले इसमें रेशा आधिक रहता है इसलिए यह पचने में भी आसान रहती है। जाड़े में लोग इसकी गथ्वाणी खाते हैं, जिससे ठंड पास नहीं फटकती। इसके साथ ही इससे डुबके, फांणु, पटुंगी, भरवा परांठे, खिचड़ी आदि स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं। यह गुर्दे की पथरी से लड़ने में बेहद कारगर होती है। इसकी कीमत 140 रुपये प्रति किग्रा है। कहा ये भी जाता है कि जब पुराने जमाने में जब डायनामाइट का चलन पहाड़ों में ज्यादा नहीं हुआ था तब लोग इसका उपयोग खेतों के पत्थर तोड़ने में करते थे। रात-रात पत्थर के नीचे आग जलाकर रखते थे और सुबह-सुबह गरम पत्थर पर गथ्वाणी डालते थे तो वह दरक जाता था। ऊबड़-खाबड़ और पथरीली जमीन में गहथ की खेती अच्छी होती है। बाजार में यह बासमती के बराबर दामों में बिकती है।

तूर का सूप पीने से सर्दी होती है दूर
हरे और भूरे रंग वाली तोर या तुअर अरहर की एक प्रजाति है, जो मैदानी अरहर से बिल्कुल अलग है। पहाड़ी तोर का दाना छोटा होता है, जिसका शोरबा या सूप बनाकर पीने से सर्दी दूर होती है। यह 240 रुपये प्रति किग्रा की कीमत में बाजार में बिक रही है।

नौरंगी दालें भी आकर्षण का केंद्र
विभिन्न आकर्षक नौ रंगों में उगने वाली नौरंगी की दालें बेहद सुपाच्य होती है। इसे रैस, रयांस, तित्रया, झिलंगा भी कहते हैं। यह 100 रुपये प्रति किग्रा की कीमत में बाजार में उपलब्ध हैं। इसका स्वाद लाजवाब होता है। जो इसे एकबार खा लेता है कभी भूल नहीं पाता।

भट (सोयाबीन) की छह प्रजातियों का लाजवाब स्वाद
उत्तराखंड में काले, भूरे और सफेद रंग के भट की छह प्रजातियां मिलती हैं। काले भट में भरपूर मात्रा में प्रोटीन और ओमेगा-3 पाया जाता है। इससे बनने वाली चुड़कानी व डुबके बेहद स्वादिष्ट होते हैं। भट की कीमत 100 रुपये प्रति किग्रा है।

उड़द के पकौड़े और चैंसू हैं मशहूर
पहाड़ी उड़द के पकौड़े और चैसूं का जायका बेहद लजीज होता है। बासमती और रानी पोखरी इसकी लोकप्रिय प्रजातियां हैं। यह 100 रुपये प्रति किग्रा के हिसाब से बाजार में बिक रही है।

मुनस्यारी का राजमा देश की सर्वोत्तम किस्म
उत्तराखंड में राजमा को छेमी के नाम से जाना जाता है। हर्षिल, चकराता, जोशीमठ और मुन्स्यारी में होने वाली राजमा पूरे देश में सर्वोत्तम किस्म की मानी जाती है। पहाड़ की राजमा आसानी से पकने वाली और स्वाद में उत्तम होती है। इसकी तासीर गर्म होती है। इसकी कीमत 190 रुपये प्रति किग्रा से 220 रुपये प्रति किग्रा है।

एंटी आक्सीडेंट है लोबिया
लोबिया या सुंठा की दाल आमतौर पर रोजाना घरों में बनाई जाती है। हल्के पीले और सफेद रंग की लोबिया में अन्य दालों के मुकाबले फाइबर की मात्रा अधिक होती है। लोबिया में एंटी आक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में पाया जाता हैं। यह शरीर में लगने वाली बीमारियों से बचाता हैं। यह 100 रुपये प्रति किग्रा की कीमत में बाजार में बिक रही है।

दालों में पौषणमान प्रति ग्राम


ये आंकड़े बीज बचाओ आंदोलन के सूत्रधार विजय जड़धारी की पुस्तक उत्तरखंड में पौष्टिक खानपान की संस्कृति से लिए गए हैं।

लोगों में बढ़ रही जागरुकता
पहाड़ी उत्पादों के विक्रेता संजय कोठियाल ने बताया कि काफी लोग अब पारंपरिक अनाजों के प्रति जागरुक हो रहे हैं। इनकी खरीददारी को लेकर भी तेजी से ग्राफ बढ़ा है।

इम्युनिटी बढ़ाती हैं ये दालें
वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. नवीन जोशी बताते हैं कि पहाड़ी दालें सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हैं। हाई प्रोटीन वैल्यू होने के साथ ही यह रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाती हैं। काले भट में प्रोटीन की प्रचूर मात्रा होती है। वहीं गहथ की दाल की तासीर गर्म होती है, जो गुर्दे की पथरी में बेहद फायदेमंद होती है। इसका सूप बुखार और निमोनिया आदि में लाभदायक है।

उत्पादन को बढ़ावा देने की है जरूरत
उत्तराखंड में कृषि के क्षेत्र में काम कर रही संस्था हिमालयन एक्शन रिसर्च सेंटर (हार्क) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी महेंद्र सिंह कुंवर ने बताया कि पहाड़ में खेती उत्पादन कम हो रहा है। इसकी कई वजहें हैं। सरकार और यहां के स्थानीय लोगों को मिलकर इसके उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए काम करने की जरूरत है। मार्केट में इनकी मांग अधिक है, लेकिन उस अनुसार इनका उत्पादन काफी कम है। उन्होंने बताया कि संस्था द्वारा प्रदेश के चमोली, उत्तरकाशी, देहरादून, बागेश्वर आदि जिलों में पहाड़ी अनाजों की खेती और उत्पादों को बनाने का काम किया जा रहा है। संस्था के अंतर्गत 38 संगठन काम कर रहे हैं और करीब 45,000 लोग इस रोजगार जुड़े हुए हैं।

11 जिलों में पिछली बार से 3% ज्यादा वोटिंग हुई, यहां की 47 में से 37 सीटें भाजपा के पास

भोपाल. मध्यप्रदेश की 230 विधानसभा सीटों पर बुधवार को करीब 75% वोटिंग हुई। राज्य में 61 साल में रिकॉर्ड मतदान हुआ। यह 2013 के चुनाव परिणाम से (72.18%) से 2.82 फीसदी ज्यादा है। राज्य के 11 जिले ऐसे हैं, जहां पिछली बार के मुकाबले तीन फीसदी से ज्यादा वोटिंग हुई। इन 11 जिलों में कुल 47 सीटें हैं। इनमें से भाजपा के पास पिछली बार 37 और कांग्रेस के पास 9 सीटें थीं। 

ज्यादा वोटिंग वाले 11 जिलों में से 6 जिले मालवा-निमाड़ के हैं। इनमें इंदौर, रतलाम, धार, झाबुआ, आलीराजपुर और नीमच शामिल है। इन जिलों में 29 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से 25 सीटों पर पिछली बार भाजपा जीती थी और कांग्रेस के पास महज 3 सीटें थीं। राज्य में 2016 में किसान आंदोलन का सबसे ज्यादा असर भी मालवा-निमाड़ में ही था। ज्यादा वोटिंग वाले जिलों में ग्वालियर और श्योपुर जैसे जिले भी हैं, जहां हाल ही में हुए सपाक्स और दलित आंदोलन का काफी असर रहा था। 

कांग्रेस 132 सीटें जीतेगी- दिग्विजय
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने गुरुवार को कहा कि पार्टी मध्य प्रदेश की 230 सीटों में से 132 सीटें जीतेगी। हम 15 साल बाद भाजपा के हाथों से सत्ता छीन लेंगे।

चार जिलों में पिछली बार से कम वोटिंग

कम वोटिंग वाले जिलों में से एक जबलपुर है। यहां की 8 सीटों पर पिछली बार 69.39% और इस बार 68% वोटिंग हुई। जिले की 8 में 6 सीटें पिछली बार भाजपा के पास थीं। दो सीटें कांग्रेस ने जीती थीं। इसी तरह होशंगाबाद में भी 1.5% कम मतदान हुआ। यहां चार सीटें हैं। चारों पिछली बार भाजपा के पास थीं। देवास में भी करीब दो फीसदी कम मतदान हुआ। यहां की पांचों सीटें भाजपा के पास थीं। उज्जैन जिले में 7 विधानसभा सीटें हैं। यहां तीन फीसदी कम मतदान हुआ। यहां की सातों सीटों पर भाजपा जीती थी। कम वोटिंग वाले इन चार जिलों में 24 सीटें हैं। इनमें से भाजपा ने पिछली बार 22 सीटें जीती थीं।

जब भी 4 फीसदी से ज्यादा वोटिंग हुई, तब क्या हुआ? 
1990 : स्व. सुंदरलाल पटवा के नेतृत्व में भाजपा मैदान में उतरी और 4.36 फीसदी वोट बढ़ गए। तत्कालीन कांग्रेस की सरकार उखड़ गई।
1993 : पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस ने ताकत झोंकी तो 6.03 प्रतिशत मतदान बढ़ा। तब भाजपा की पटवा सरकार पलट गई।
1998 : वोटिंग प्रतिशत 60.22 रहा था जो 1993 के बराबर ही था। कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। तब दिग्विजय सिंह की सरकार दोबारा बनी।
2003 : उमा के नेतृत्व में भाजपा सामने आई और दिग्विजय सिंह की 10 साल की सरकार सत्ता से बाहर हो गई। तब भी 7.03% वोट बढ़े थे।

किस जिले में कितनी हुई वोटिंग?

जिलेसीटें2013 में वोटिंग2018 में वोटिंग2013 में भाजपाकांग्रेसश्योपुर274.43%78%11मुरैना665. 13%65%40भिंड560.12%63%32ग्वालियर660.93%64%42दतिया369.33%72%30शिवपुरी572.85%72%23गुना473.56%75%22अशोक नगर374.59 %75%12सागर870.62%71%71टीकमगढ़571.65%72%32छतरपुर665.57%66%51दमोह470.99%71%31पन्ना368.35%72%21सतना769.46%72%24रीवा863.47 %66%52सीधी466.30%68%22सिंगरौली365.79%66%21शहडोल374.23%74%21अनूपपुर371.02%74%12उमरिया274.46%77%20कटनी472.73%72%31जबलपुर869.39 %68%62डिंडौरी278.05%78%11मंडला375.47%77%21बालाघाट679.98%79%33सिवनी479.33%80%12नरसिंहपुर479.52%77%40छिंदवाड़ा781.09 %81 %43बैतूल575.43%78%50हरदा276.69 %78%11होशंगाबाद478.62%77%40रायसेन471.50%75%40विदिशा573.07%74%50भोपाल763.89%65%61सीहोर480.19%80%21राजगढ़579.51%82%41शाजापुर381.14%82%30देवास576.74%75%50खंडवा472%75%40बुरहानपुर275.65%76%20खरगोन677.15%77%33बड़वानी474.48%75%22आलीराजपुर255.77%63%20झाबुआ369.04%72%20धार771. 95%75%52इंदौर970.61%75%81उज्जैन774.93%72%70रतलाम577.98%82%50मंदसौर479.78%81%31नीमच378.04%82%30आगर279.73 %81%2

मध्यप्रदेश चुनाव: ये बंपर वोटिंग भाजपा को बनाए रखने के लिए है या कांग्रेस को लाने के लिए?

में संपन्न चुनावों में लोगों ने बढ़-चढ़कर मतदान किया। इस बार हुई बंपर वोटिंग ने पिछले विधानसभा चुनाव का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया। बुलेट और बैलेट की जंग में बैलेट की जीत हुई और बालाघाट के नक्सल प्रभावी क्षेत्रों बैहर में 78.05%, लांजी में 79.07%, परसाड़ा में  80.05% मतदान हुआ। मतदान प्रतिशत में अमूमन ऐसी ही बढ़ोतरी ज्यादातर सीटों पर देखी गई। इस बढ़े मतदान प्रतिशत का फायदा किसे मिलेगा- भाजपा को या फिर कांग्रेस को?

इस बार 2.48% ज्यादा हुआ मतदान

2008 में 69.28 फीसदी वोटिंग हुए थी। 2013 विधानसभा चुनावों में इस वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई और यह 72.13% हो गई। 2.85 फीसदी अधिक मतदान होने से भाजपा की सीटों की संख्या 143 से बढ़कर 165 हो गई। यानी भाजपा को अधिक मतदान का फायदा हुआ और सीटों में 22 का इजाफा हुआ।

इस बार के मतदान ने पिछली बार का रिकॉर्ड तोड़ा है। मतदान प्रतिशत 74.61% बताया जा रहा है। मतदान के दौरान 1764 ईवीएम और 2126 वीवीपैट मशीनें बदलनी पड़ी मगर लोगों में उत्साह में कमी नहीं आई। 250 मतदान केंद्रों पर शाम 6 बजे के बाद भी वोटिंग जारी रही लिहाजा मतदान प्रतिशत में दो फीसदी तक का इजाफा और हो सकता है। 70% से ज्यादा वोटिंग अब तक राज्य में सिर्फ 2 बार 2013 और 2018 में हुई है। 

मतदान प्रतिशत 4% से ज्यादा बढ़ने पर बदल जाती है सत्ता

पिछले 33 साल के चुनावी आंकड़े बताते हैं कि जब कभी मतदान प्रतिशत 4% से ज्यादा बढ़ा है, सत्ताधारी पार्टी बदल गई है। 1990 में मतदान प्रतिशत में लगभग साढ़े चार फीसदी की बढ़ोतरी हुई तब प्रदेश में भाजपा ने कांग्रेस से सत्ता छीनी थी। तीन साल बाद हुए चुनाव में मतदान प्रतिशत करीब साढ़े 6 प्रतिशत बढ़ा तो एक बार फिर सत्ता परिवर्तन हुआ,सत्ता की चाभी कांग्रेस के हाथ आ गई। इसी तरह 2003 में 1998 के मुकाबले 7 प्रतिशत ज्यादा वोट गिरे। इस बार प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी। उमा भारती ने दिग्विजय सरकार का तख्ता पलट किया था।

2008 और 2013 में मतदान प्रतिशत बढ़ा तो सही लेकिन सिर्फ दो फीसदी से ज्यादा। ऐसे में भाजपा सत्ता में बरकरार रही। तो इस बार 11 दिसंबर को देखना दिलचस्प होगा कि मतदान प्रतिशत में ये बदलाव किस ओर जाता है।