इंदौर में चमक रहा है राजगढ़ का सितारा !!

इंदौर .
मेक इन इंडिया और स्टार्टअप के जरिये भारत को आगे बढ़ाने की परिकल्पना सिर्फ बड़े शहरों तक ही सिमटकर रह गई है। उद्योग और उद्योग विभाग से जुड़े लोगों को भी सिर्फ इंदौर-भोपाल और उनके आसपास के शहर ही नजर आते हैं। यही वजह है कि शहर की प्रतिभाएं इन शहरों की तरफ पलायन कर गई। त्रिवेदी दंपति इसका बड़ा उदाहरण है जिन्होंने इंदौर जाकर सोशल मीडिया मैनेजमेंट के क्षेत्र में ऐसी पहचान बनाई कि शुक्रवार को इंदौर प्रवास के दौरान नीति अयोग के सीईओ अमिताभ कांत भी उनकी तारीफ किए बिना नहीं रह सके।
एकेवीएन द्वारा संचालित इक्यूबेशन सेंटर में छह महीने पहले मनीष त्रिवेदी अपनी पत्नी मनीषा त्रिवेदी के साथ जुड़े थे। यहां एकेवीएन एमडी कुमार पुरुषोत्तम और लाइफ एंड कॉर्पोरेट स्ट्रेटेजिस्ट एवं स्टार्टअप कंसलटेंट विकास सिंह ने उनकी प्रतिभा पहचानी। डिजिटल विंग नाम का स्टार्टअप खड़ा करने में मदद की। छह महीने की छोटी सी अवधि में डिजिटल विंग के जरिये त्रिवेदी दंपति ने अपनी काबिलियत को साबित किया। आज दोनों प्रदेश के कई बड़े राजनीतिज्ञ, डॉक्टर्स , स्कूल , कंपनीयो, फ़िल्म अभिनेताओं एवं धार्मिक संस्थाओ का सोसल मीडिया मैनेजमेंट का काम देख रहे हैं। । एप्पल के मालिक स्टीव जॉब ,फेसबुक के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग और हॉलिवुड एक्ट्रेस जुलिया रॉबर्ट जिन नीब करोली बाबा को अपना गुरु मानते हैं त्रिवेदी दंपति ने उनका सोसल मीडिया अकाउंट बनाया और उसे मेंटेन किए हुए हैं।
दोनों सोशल मीडिया कंसलटिंग के जरिये लोगों को बता भी रहे हैं कि सोशल मीडिया को कमाई का जरिया कैसे बनाएं। मनीष कहते हैं कि इसके लिए बहुत ज्यादा पढ़ा लिखा या आईटी एक्सपर्ट होना जरूरी नहीं है। साधारण समझ के साथ भी हम इस काम को कर सकते हैं। दोनों की लगन को कम्प्यूटर टेलीकॉम एसोसिएशन के प्रेसीडेंट आशीष सक्सेना भी सराह चुके हैं।
बेहद ही सीधा और सच्चा जीवन जीने वाले त्रिवेदी दंपति जितने सोशल मीडिया एक्सपर्ट हैं उतने ही सोशल भी हैं। इसीलिए जो एक बार मिलता है, जीवनभर के लिए जुड़ जाता है। त्रिवेदी वेबसाइट डेवलपर भी हैं और कम से कम लागत में वेबसाइट डेवलप करके देना ही उनका पेशन है। मनीष कहते हैं कि जैसे हमें मौका मिला वैसे, सबको मिलना चाहिए। जितनी जरूरत है उतना पैसा लगे।
राजगढ़ काम नाम भी बढ़े
मनीष ब्यावरा राजगढ़ से हैं और उनकी पत्नी मनीषा झांसी से। दोनों जब भी ब्यावरा राजगढ़ जाते हैं तो मित्र उन्हें घेर लेते हैं। किस्से कहानी सुनने के लिए नहीं। जीवन में आगे कैसे बढ़ना है यह समझने के लिए। दोनों सहजता से जो सीखा है दुसरों को सीखाते भी हैं लेकिन वक्त की कमी के चलते ज्यादा समय नहीं दे पाते। दोनों का मानना है कि मप्र में 27 इक्यूबेशन सेंटर हैं लेकिन दुर्भाग्य से एक भी राजगढ़ जिले में नहीं है। जबकि विधानसभा से लेकर लोकसभा तक में यहां का प्रतिनिधित्व है। यहां इंदौर की तरह इक्यूबेशन सेंटर खुलना चाहिए ताकि हमारे जैसे किसी भी व्यक्ति को काम की तलाश के लिए घर-परिवार न छोड़ना पड़े। वह राजगढ़ में ही वह सब करके दिखा सके जो हम इंदौर आकर कर रहे हैं। उम्मीद है जिले के जिम्मेदार जनप्रतिनिधि राजगढ़ के नौजवानों के लिए इक्यूबेशन सेंटर की व्यवस्था जल्द करवाएंगे।

एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को मंजूरी, मध्य प्रदेश बना पहला राज्य इन अहम प्रस्तावों को मिली मंजूरी

भोपाल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज कैबिनेट की महत्त्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई है| बैठक में कई महत्त्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा हुई| कैबिनेट बैठक के फैसले के बारे में सरकार के प्रवक्ता और जनसम्पर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने जानकारी दी| प्रदेश के मेडिकल जगत के लिए सरकार ने सौगात दी है| प्रदेश के तीन मेडीकल कालेजो को एमसीआई की मान्यता दी गई है| खंडवा,विदिशा,रतलाम के कॉलेजों को मान्यता दी गई है| इसी सत्र से प्रवेश दिया जाएगा|
बैठक में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट पर मुहर लगाई गई है| इस एक्ट के तहत कोर्ट में वकीलों के कामकाज में बाधा डालने उन पर अनुचित दबाव बनाने पर एक से सात साल की सजा और दस हजार रू जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा तेन्दू पत्ता की चार सौ करोङ रू राशि का वितरण जल्द करने का फैसला किया गया है| चीन के द्वारा सोयाबीन पर लगे प्रतिबंध पर भी जल्द मजबूत कदम उठाया जाएगा| प्रदेश में पुलिस आरक्षक भर्ती में युवतियों को ऊंचाई में 3 सेंटीमीटर की छूट देने का प्रस्ताव भी कैबिनेट में मंजूर किया गया है|

*अभी युवतियों के लिए न्यूनतम ऊंचाई 158 सेंटीमीटर है जिसे घटाकर* 155 सेंटीमीटर किया गया है|
इन प्रस्तावों को भी मिली मंजूरी -खंडवा जिले में सिंचाई योजना के लिए भूअर्जन एवं पुनर्वास के राशि मंजूर

*ग्वालियर मेडिकल में कैंसर के इलाज के लिए मशीन खरीदने की अनुमति
कार्यभारित स्थापना में कार्यरत एवं दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को ग्रेच्युटी मिलेगी

*सोयाबीन को लेकर मप्र का एक प्रतिनिधि मंडल चीन जायेगा, ताकि मप्र का सोयाबीन चीन निर्यात किया जा सके

*राजस्व संहिता में राहत राशि में संशोधन को मंजूरी
फसल नुकसान में रहत राशि बढ़ाई गई, केले, निम्बू सहित अन्य में
जेम से खरीदी में मप्र देश में अव्वल राज्य बना
23 जुलाई को एससी/एसटी के बच्चों का छात्रावास प्रवेश उत्सव एक साथ मनाया जाएगा

*न्यायालय के अंदर निजी सचिवों और निजी सहायको की मांग हुई पूरी
एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को मिली मंजूरी

अशोकनगर के थाना शाढौरा की गिरफ्त में अंतर्राष्ट्रीय चंदन तस्कर

●मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर चंदन के पेड़ों की तस्करी लंबे समय से जारी है, जिसकी कई शिकायतें सी.एम हेल्पलाइन से लेकर वन विभाग के दफ़्तरों मैं मौजूद है, जिसके लिए शासन एवं प्रशासन समय-समय पर चेकिंग अभियान के रूप मे धड़पकड़ करता रहता है.. परंतु कोई बड़ी उपलब्धि प्राप्त नहीं हो पाई…
● हाल ही में शाडोरा थाना प्रभारी श्री रामवीर सिंह कुशवाह एवं उनकी टीम द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हुए अंतर्राष्ट्रीय चंदन तस्करों को बड़ी मात्रा में लाखों की कीमत वाली चंदन के पेड़ एवं नकली पुलिस के साथ अवैध पिस्टल सहित धरदबोचा..
● शाडोरा थाना की एकाएक उपलब्धियों से प्रतीत होता है की मध्यप्रदेश में बढ़ते अपराधों पर किस तरह से लगाम कसने में जुटी है ..

सत्ता धारियों को नहीं टाइम घटना स्थल पहुँची डॉ. स्वेता शर्मा

सत्ता धारियों को नहीं टाइम घटना स्थल पहुँची डॉ. स्वेता शर्मा

करैरा :- सत्ता पर काबिज नेताओ को नही है टाइम घटना स्थल पर कोई नेता नही पहुचा घायलों की मदद के लिये

प्राप्त जानकारी के अनुसार सिल्लापुर आदिबासी अपने ट्रैक्टर से खुमान माई के दर्शन करने अमोला जा रहे थे
हाईबे पर ट्रेक्टर चढ़ ही रहा था तभी झाँसी की ओर से आरही तेज रफ्तार डी सी ऐम ने ट्रेक्टर को जोरदार टक्कर मारी जिससे ट्राली पलट गई और ट्राली ने नीचे लोग दब गए जिसमें 2 लोगो की मोके पर ही मौत हो गई कुछ लोग करैरा ओर कुछ लोग शिवपुरी हॉस्पिटल भेजे गए

ताज्जुब की बात ये है कि इतना बड़ा हादसा हो गया पर कोई नेता का कोई बयान नही आया ना मोके पर कोई आया ना हॉस्पिटल मैं।

डॉ. स्वेता शर्मा (महिला आयोग ब्लॉक संगनी एबं उपभोक्ता अधिकार संगठन जिला अध्यक्ष) घटना स्थल पर पहुची जहाँ एस पी शिवपुरी ओर एस डी ओ पी करैरा मय दल बल के मोके पर मौजूद थे
डॉ. स्वेता शर्मा ने मोके जायजा लिया और सीधे करैरा हॉस्पिटल घायलों से मिलने पहुची घायलों को उचित इलाज का भरोसा दिलाया ओर हिम्मत बंधाई

MP: कमलनाथ BSP के साथ गठबंधन के हिमायती, चौहान के नेतृत्व में BJP को फिर जादू का भरोसा

मध्य प्रदेश कांग्रेस के मुखिया कमल नाथ पार्टी आला कमान से कह चुके हैं कि मायावती की बहुजन समाज पार्टी से गठबंधन आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपीसे मुकाबले में मददगार होगा। 2008 और 2013 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को बीएसपी को मिले वोट मिला दिए जाएं तो यह बीजेपी के वोटशेयर के करीब है। 

कांग्रेस को उम्मीद है कि 15 सालों का सत्ताविरोधी रुझान और इस बार पार्टी की एकजुटता बाकी कसर पूरा कर देगी। मध्य प्रदेश में यह भी हो सकता है कि बीएसपी, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस एक होकर लड़ें। इस तरह का परिदृश्य पहले ही यूपी में दिख चुका है और काम कर चुका है। समाजवादी पार्टी विपक्ष को ताकत दे सकती है क्योंकि मध्य प्रदेश में ठीकठाक यादव आबादी है। 

बीएसपी ने अपनी बदौलत 2008 और 2013 के चुनावों में क्रमशः 9 प्रतिशत वोटशेयर के साथ 7 सीटों और 6 प्रतिशत वोटशेयर के साथ 4 सीटों पर जीत दर्ज की थी। जहां बीजेपी का मुख्य फोकस अन्य पिछड़े वर्ग पर है, वहीं कांग्रेस का लक्ष्य दलितों और दूसरी जातियों का दिल जीतना है। 
2002 के बाद से बीजेपी के सभी मुख्यमंत्री पिछड़े वर्ग से रहे हैं। उमा भारती का ताल्लुक जहां लोध समुदाय से है, वहीं उनके बाद सीएम बनने वाले बाबू लाल गौर यादव समुदाय से हैं। बीजेपी ने 2017 के सिंहस्थ कुंभ के दौरान दलित संतों तक पहुंचकर इस समुदाय से नजदीकी बढ़ाई है। कांग्रेस अगर बीएसपी से गठबंधन करती है तो बहुत संभव है कि बीजेपी के हाथ से दलित वोट छिटक जाएं। 

अग्रिम मोर्चे पर दिग्विजय नहीं 

मध्य प्रदेश के 3 कांग्रेसी दिग्गजों- दिग्विजय सिंह, कमल नाथ औ ज्योतिरादित्य सिंधिया- में से बीजेपी को सबसे ज्यादा परेशानी दिग्विजय सिंह से रही है जो सूबे में भगवा लहर से पहले 10 सालों तक मुख्यमंत्री रहे हैं। उनकी टिप्पणियों पर हमेशा बीजेपी की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलती हैं। हाल ही में राज्यभर में पदयात्रा करने वाले दिग्विजय सिंह कांग्रेस के इकलौते ऐसे नेता हैं जिनका पूरे राज्य में प्रभाव है। हालांकि जिस तरह कांग्रेस दिग्विजय सिंह को पृष्ठभूमि में रख रही है, उसे देखते हुए बीजेपी राहत की सांस ले सकती है। कांग्रेस की चुनाव सामग्रियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है और बताया जा रहा है कि उन पर दिग्विजय सिंह का कोई जिक्र नहीं है। 

चुनौतियों के बाद भी शिवराज सबसे कद्दावर 
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व बहुत पसंद नहीं करता, इसके बाद भी वह सूबे में मजबूत बने हुए हैं। बीजेपी का कोई भी दूसरा राज्य-स्तर का नेता उनके लिए चुनौती के तौर पर नहीं उभरा है। 

नरेंद्र सिंह तोमर सबसे ज्यादा स्वीकृति वाला चेहरा हो सकते हैं लेकिन उनकी जाति इस राह में बाधा है। तोमर ठाकुर जाति से आते हैं जबकि बीजेपी मध्य प्रदेश में पिछड़ा कार्ड खेलती आई है। इसका मतलब है कि तोमर को केंद्रीय मंत्री के तौर पर ही संतोष करना पड़ेगा। बीजेपी के मौजूदा राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय पश्चिम बंगाल में व्यस्त हैं। 
विजयवर्गीय ने मंदसौर में ट्रैक्टर रैली की थी लेकिन शीर्ष नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया कि अगर बीजेपी फिर जीतती है तो चौहान ही मुख्यमंत्री होंगे। हालांकि, रविवार से चौहान ने वोटरों तक पहुंचने के लिए जन आशीर्वाद यात्रा शुरू की है, जिसे खुद बीजेपी मुखिया अमित शाह ने रवाना किया। 

बीजेपी के लिए आरएसएस एक बड़ा प्लस पॉइंट 
आरएसएस की हमेशा से ही पूरे मध्य प्रदेश में मजबूत उपस्थिति रही है और इसने बीजेपी को चुनाव जीतने में मदद की है। पार्टी द्वारा लिए गए सभी बड़े और महत्वपूर्ण फैसलों पर भी संघ की छाप होती है। इससे अच्छी तरह वाकिफ शिवराज सिंह चौहान ने हमेशा संघ नेताओं से अच्छे रिश्ते बनाकर रखे हैं। तोमर के बाद चौहान ही संघ के बड़े नेताओं के पसंदीदा हैं। यही एक बड़ी वजह है कि कई बीजेपी नेताओं ने अक्सर चौहान को सीएम पद से हटाने की प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष मांग की है लेकिन वह अपने पद पर बने रहे। 

किसानों की दुर्गति ने व्यापम मुद्दे को ढका 
व्यापम मुद्दे पर चौहान सरकार कड़ी आलोचनाओं का सामना कर रही थी। हालांकि किसानों की दुर्गति और बेरोजगारी का मुद्दा जनाक्रोश की मुख्य वजह बनकर उभरी है और व्यापम के भ्रष्टाचार का मुद्दा अब पृष्ठभूमि में जा चुका है। 

मध्य प्रदेश कांग्रेस के लिए सिरदर्द बने ‘पोस्टर’, सिंधिया-कमलनाथ में छिड़ी सियासी जंग?

भोपाल 
मध्य प्रदेश में अगले चार महीनों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। अभी चुनाव की तारीखों का ऐलान हुआ भी नहीं है और कांग्रेस से मुख्यमंत्री पद के दावेदारों को लेकर अटकलें शुरू हो गईं। अब कुछ ऑनलाइन पोस्टर्स भी यही इशारा कर रहे हैं। चुनाव से पहले जारी हुए पोस्टर्स में कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और सीनियर नेता कमलनाथ को सीएम पद के उम्मीदवार के तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ दिखाया गया है। 

ये पोस्टर्स ऐसे वक्त में सामने आए हैं, जब कांग्रेस राज्य में पार्टी की एकजुटता साबित करने की कोशिश में लगी है। सिंधिया और कमलनाथ खुद भी यह संदेश देने की कोशिश में रहते हैं कि पार्टी के सभी धड़े एक हैं। ऐसे में ये पोस्टर्स सोशल मीडिया के सहारे पार्टी की कोशिशों पर पानी फेर सकते हैं। हालांकि, पार्टी ने ऐसे पोस्टर जारी करने का शक भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर जताया है। 

राहुल संग दिखे सिंधिया-कमलनाथ ‘एमपी युवा कांग्रेस विचार मोर्चा’ नाम के फेसबुक पेज #KamalnathNextMPCM हैशटैग के साथ नारा दिया गया है- ‘राहुल भइया के संदेश, कमलनाथ संभालो प्रदेश’। सिंधिया का पोस्टर कहां से शुरू हुआ इस बात का पता नहीं चल सका है। हालांकि, ‘श्रीमंत सिंधिया फैन क्लब’ नाम के फेसबुक पेज का जिक्र है। सिंधिया के पोस्टर पर लिखा है- ‘देश में चलेगी विकास की
आंधी, प्रदेश में सिंधिया, केंद्र में राहुल गांधी।’

बीजेपी पर आरोप 

कांग्रेस के राज्य प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ के बीच सोशल मीडिया पर किसी पोस्टर वॉर से इनकार किया है। उन्होंने कहा, ‘किसने कहा कि ये लोग (पोस्टर बनाने वाले) कांग्रेस समर्थक हैं। ये भारतीय जनता पार्टी के लोग हो सकते हैं जो लोगों और पार्टी काडर के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।’ 

NEET: एक या दो विषय में 0 नंबर, फिर भी MBBS में ऐडमिशन

दिल्ली 
देश के एजुकेशन सिस्टम से किस तरह का खिलवाड़ किया जा रहा है, इसका एक उदाहरण साल 2017 में एमबीबीएस में हुए ऐडमिशन हैं। बड़ी संख्या में ऐसे छात्रों को भी एमबीबीएस कोर्स में ऐडमिशन मिल गया है जिनके NEET (नीट) में एक या दो या फिर दोनों विषयों में जीरो या सिंगल डिजिट नंबर है। मेडिकल कोर्सों में आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षा NEET में कम से कम 400 छात्रों को फिजिक्स और केमिस्ट्री में सिंगल डिजिट में नंबर मिले और 110 छात्रों को जीरो नंबर। फिर भी इन सभी छात्रों को एमबीबीएस कोर्स में दाखिला मिल गया। 

ज्यादातर छात्रों को दाखिला प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में मिला है। इससे यह सवाल उठता है कि जीरो नंबर मिलने के बाद भी अगर इन छात्रों को ऐडमिशन मिल सकता है तो फिर टेस्ट की क्या जरूरत रह जाती है। हमारे सहयोगी अखबार टीओआई ने उन 1,990 छात्रों के मार्क्स का विश्लेषण किया जिनका 2017 में ऐडमिशन हुआ और उनके मार्क्स 150 से भी कम है। 530 ऐसे स्टूडेंट्स सामने आए जिनको फीजिक्स, केमिस्ट्री या दोनों में जीरो या सिंगल डिजिट में नंबर मिले। 

शुरू में कॉमन एंट्रेंस एग्जामिनेशन के लिए जारी किए गए नोटिफिकेशन में हर विषय में कम से कम 50 फीसदी नंबर लाना अनिवार्य किया गया था। बाद में आए नोटिफिकेशन में पर्सेंटाइल सिस्टम को अपनाया गया और हर विषय में अनिवार्य नंबर की बाध्यता खत्म हो गई। इसका असर यह हुआ कि कई कॉलेजों में जीरो या सिंगल डिजिट नंबर लाने वाले छात्रों को भी ऐडमिशन मिल गया। 

पैसे के बल पर ऐडमिशन
एमबीबीएस कोर्स में 150 या उससे थोड़ा ज्यादा मार्क्स लाकर ऐडमिशन पाने वाले छात्रों के कई उदाहरण हैं। 2017 में 60,000 सीटों के लिए 6.5 लाख से ज्यादा छात्रों ने क्वॉलिफाई किया। इनमें से 5,30,507 छात्रों को प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में दाखिला मिला है। उनलोगों ने औसत ट्युइशन फीस के तौर पर 17 लाख रुपये प्रति वर्ष का भुगतान किया है। इसमें हॉस्टल, मेस, लाइब्रेरी और अन्य खर्च शामिल नहीं है। इससे पता चलता है कि कैसे पैसे के बल पर नीट में कम नंबर आने के बाद भी छात्रों को मेडिकल कॉलेजों में दाखिला मिला है। इनमें से आधे से ज्यादा छात्र डीम्ड यूनिवर्सिटी में हैं और इन डीम्ड यूनिवर्सिटियों को अपना खुद का एमबीबीएस एग्जाम आयोजित करने का अधिकार है। अगर ये छात्र एग्जाम क्लियर कर लेते हैं तो वे डॉक्टर के तौर पर खुद का रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे और प्रैक्टिस भी कर सकेंगे। 

नीट का पहली बार प्रस्ताव
दिसंबर 2010 में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के गजट नोटिफिकेशन में नीट का प्रस्ताव रखा गया था जिसका समर्थन सरकार द्वारा नियुक्त बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने भी किया था। नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया था कि एमबीबीएस कोर्स में दाखिले की योग्यता के लिए नीट के प्रत्येक पेपर में छात्रों को कम से कम 50 फीसदी मार्क्स (आरक्षित श्रेणियों की स्थिति में 40 फीसदी) लाना होगा। लेकिन बाद में फरवरी 2012 में एमसीआई के नोटिफिकेशन में योग्यता मापदंड को बदलकर न सिर्फ 50 फीसदी और 40 फीसदी से 50 और 40 पर्सेंटाइल कर दिया गया बल्कि प्रत्येक पेपर में न्यूनतम मार्क्स हासिल करने की अनिवार्यता को भी खत्म कर दिया गया। 2016 में जब सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले वाले आदेश को पलट दिया और नीट को लागू होने के रास्ते को आसान बनाया तो एमसीआई का बाद वाला नोटिफिकेशन प्रभावी हो गया। 

क्या है पर्सेंटाइल? 
पर्सेंट और पर्सेंटाइल दो अलग-अलग चीजे हैं। पर्सेंट किसी छात्र द्वारा प्राप्त किए गए अंक को बताता है जबकि पर्सेंटाइल यह बताता है कि किसी छात्र से कम नंबर प्राप्त करने वाले छात्रों की संख्या कितनी है। जैसे अगर किसी छात्र का पर्सेंटाइल 60 है तो इसका मतलब यह हुआ कि 60 फीसदी छात्र उस छात्र से नीचे हैं और बाकी 40 उससे ऊपर। 
पर्सेंट कैसे निकाला जाता है: प्राप्तांक/कुल अंक*100 
पर्सेंटाइल निकालने का तरीका: नीचे के छात्रों की संख्या/छात्रों की कुल संख्या*100 

जानिए ये गुप्त तरीका जिससे मोटी नही होती ये विदेशी लड़कियां

वर्तमान समय में हर व्यक्ति के लिए मोटापा एक बहुत भयंकर समस्या बन गया है. लगभग 10 में से 6 व्यक्ति मोटापे की समस्या से परेशान रहते हैं. खास कर लड्किया इस समस्या का अधिक सामना करती है.

आज हम आपको इस लेख के मधाम से मोटापा कम करने के नुस्खे बताएँगे. यह नुस्खे जापान में बहुत ही प्रचलित है, जिस वजह से वह की लड्किया मोटी नहीं होती है. यदि आप भी मोटापे की समस्या से परेशान हैं, तो यह उपाय आपके लिए बहुत ही फ़ायदेमंद होगा.

जापान की लड़कियां शुरू से ही हरी सब्जियों का सेवन ज्यादा करती है, हरी साग सब्जी खाने की उन्हे बचपन से ही इसकी हिदायत उन्हें दी जाती है, क्योंकि हरी साग सब्जियों में विटामिन, मिनरल्स की प्रचुर मात्रा पाया जाता है, इन सब्जियों मे फैट की मात्रा बिलकुल ना के बराबर होती है.

जापान की लड़कियो के घर मे खाना गर्म पानी से बनाया जाता है, ओर तेल मसाले का उपयोग बहुत कम किया जाता है. यही वजह है की उनके शरीर में अनावश्यक चर्बी जमा नहीं होती है, और वह पतली, सुंदर और जवा दिखती हैं.

वह की लड़कियां दूध और दूध से बनी सभी चीजों के सेवन से परहेज करती है, दूध शरीर में फैट की मात्रा को बढ़ाता है. वह मछली का सेवन बहुत ज्यादा करते हैं, इतना ही नहीं सुबह चाय, कॉफी पीने से भी परहेज करते है.

इस वजह से उनके चेहरे का आकर्षक हमेशा बरकरार रहता है, और वह खूबसूरत ओर सदा जवान दिखती है.

यदि आप भी खूबसूरत ओर सदा जवान दिखना चाहती है तो जापानी लड़कियो की तरह अपना डेली रूटीन अवश्य करे.

फ्रांस की वर्ल्ड कप जीत के रंग में भंग डाला,हिंसक भीड़ ने

फ्रांस में जीत का जश्न
फ्रांस की विश्व कप जीत का लाखों प्रशंसकों ने जहां सड़क पर उतरकर जश्न मनाया, वहीं चैम्प्स एलिसीस एवेन्यू में दर्जनों युवाओं ने एक लोकप्रिय स्टोर की खिड़कियां तोड़ डालीं और लूटपाट की.
रविवार को स्की मास्क पहने लगभग 30 लोग पब्लिसिस ड्रग्सस्टोर में घुस गए और बाद में वाइन और शैम्पेन की बोतलें लेकर भाग गए. इस दौरान कुछ लोगों ने हंसते हुए मोबाइल पर अपना वीडियो भी बनाया.
फाइनल मैच में फ्रांस को मिली विवादास्पद पेनल्टी पर उठे सवाल
कुछ लोगों ने पुलिस बल पर बोतलें और कुर्सियां भी फेंकीं, जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया. फ्रांस की टीम की जर्सी पहनकर आंख में आंसू भरे एक व्यक्ति ने कहा, ‘यह जश्न मनाने का तरीका नहीं है.’

इस जाने माने स्थल से जब लाखों प्रशंसक लौट गए, तो पुलिस ने बाकी लोगों को हटाने के लिए पानी की बौछार का इस्तेमाल किया. अधिकारियों ने साथ ही बताया कि फ्रांस के दक्षिणी शहर लियोन में पुलिस और लगभग 100 युवाओं के बीच झड़प हुई, जब खुले में मैच की स्क्रीनिंग के दौरान युवा पुलिस के वाहन के ऊपर चढ़ गए.
पुलिस ने युवओं को भगाने के लिए आंसू गैस का सहारा लिया, लेकिन उन्होंने पुलिसकर्मियों पर चीजें फेंकनी शुरू कर दीं और कचरा पेटियों में आग लगा दी. इसके बाद इस जगह पर भगदड़ मच गई. पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि मार्सिले में 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है जहां झड़प में दो सुरक्षाकर्मी घायल हो गए.
पूर्वी शहर नैंसी के फ्रोआर्ड इलाके में एक तीन साल का लड़का और छह साल की दो लड़कियां गंभीर रूप से घायल हो गए जब एक मोटरसाइकिल ने जश्न के दौरान उन्हें टक्कर मार दी. अधिकारियों ने बताया कि मोटरसाइकिल सवार घटनास्थल से फरार हो गया.
पुलिस ने बताया कि दक्षिण पूर्वी शहर एनेसी में 50 साल के व्यक्ति की गर्दन टूटने से मौत हो गई. मैच खत्म होते ही जश्न मनाने के लिए यह व्यक्ति कम पानी वाली नहर में कूद गया था. उत्तरी फ्रांस के छोटे से कस्बे सेंट फेलिक्स में मैच खत्म होने के बाद जश्न के दौरान एक व्यक्ति की कार पेड़ से टकरा गई और उसकी मौत हो गई.
2015 से कई आतंकी हमलों के बाद फ्रांस को हाई अलर्ट पर रखा गया है और पिछले साल नए आतंकवाद रोधी कानून के तहत पुलिस को अतिरिक्त अधिकार दिए गए हैं.