सुप़ीम कोर्ट ने आज अगर फैंसला केजरीवाल के पक्ष में दिया तो.

सुप्रीम कोर्ट आज दिल्ली को लेकर ऐतिहासिक फैसला सुनाने वाला है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल के बीच अधिकारों की लड़ाई चल रही है. अगर आज सुप्रीम कोर्ट का फैसला अरविंद केजरीवाल के पक्ष में आता है तो केजरीवाल को वो तीन बड़े अधिकार मिल जाएंगे, जिसके लिए वे काफी समय से मांग करते आ रहे हैं.

पहला अधिकार- सलाह मानने के लिए बाध्य होंगे LG

अभी तक अरविंद केजरीवाल कोई भी फैसला खुद नहीं ले सकते हैं. उन्हें अपने हर फैसले के बाद उसके लिए उपराज्यपाल की मंजूरी लेनी होती है. अगर आज सुप्रीम कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला दिया तो केजरीवाल स्वयं फैसले लेने में सक्षम होंगे. उप राज्यपाल के पास उन्हें फाइल भेजने की जरूरत नहीं होगी.

दरअसल संविधान के आर्टिकल 239A के तहत केंद्र शासित दिल्ली में विधानसभा, मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल की व्यवस्था की गई है. इसी आर्टिकल में 239AA (4) के तहत व्यवस्था दी गई है कि उपराज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर काम करेंगे. लेकिन संविधान में कहीं भी इसकी व्याख्या नहीं की गई है कि उप राज्यपाल सीएम के फैसले को मानने के लिए बाध्य हैं या नहीं. पूरा पेंच यहीं फंसा है. इसके उलट अन्य राज्यों में राज्यपाल सीएम के फैसलों को मानने के लिए बाध्य होते हैं.

दूसरा अधिकार- ट्रांसफर-पोस्टिंग कर सकेंगे केजरीवाल

मौजूदा वक्त में अरविंद केजरीवाल दिल्ली में किसी भी कर्मचारी की ट्रांसफर-पोस्टिंग नहीं कर सकते. केंद्र सरकार दिल्ली में कर्मचारियों के स्थानांतरण के फैसले पर अपना हक जताती है. केजरीवाल इसका शुरू से विरोध कर रहे हैं. केजरीवाल दुहाई देते रहे हैं कि दिल्ली में चुनी हुई सरकार की कोई नहीं सुनता. उनका कहना है कि दिल्ली के अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक उनकी बात नहीं मानते. इसके चलते उन्होंने एलजी हाउस में 9 दिन तक धरना भी दिया था. अगर आज सुप्रीम कोर्ट का फैसला केजरीवाल के हक में आता है तो दिल्ली के अधिकारियों-कर्मचारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग का अधिकार भी केजरीवाल को मिल जाएगा.

तीसरा अधिकार- ACB दिल्ली सरकार के अधीन आएगी

भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को लेकर ही आम आदमी पार्टी अस्तित्व में आई. अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में सरकार बनाने के बाद सबसे जोर-शोर से जो काम किया, उसमें भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई रही है. केजरीवाल ने सरकार बनाते ही फौरन एंटी करप्शन ब्रांच का गठन किया. ब्रांच ने ताबड़तोड़ कई छापे भी मारे. लेकिन यहां फिर से उपराज्यपाल का दखल हुआ. तत्कालीन उपराज्यपाल नजीब जंग ने जून 2015 में ACB में अपनी पसंद का अधिकारी बैठा दिया, जिसका केजरीवाल सरकार ने जमकर विरोध किया. यहीं से उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री में ‘ठन’ गई. इस घटना के बाद से केजरीवाल उपराज्यपाल के विरोध में और मुखर हो गए. अगर आज केजरीवाल के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आता है तो ACB में केजरीवाल फिर से अपनी पसंद का अधिकारी नियुक्त कर सकेंगे और भ्रष्टाचार विरोधी अपनी मुहिम को और तेज कर सकेंगे.

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