थाईलैंड: गुफा में फंसे 12 फुटबॉल खिलाड़ी और कोच जिंदा मिले

खिलाड़ियों की उम्र 11 से 16 वर्ष के बीच है (getty)
उत्तरी थाईलैंड के माई साई जिले में एक गुफा में फंसे फुटबॉल टीम के 12 खिलाड़ी और कोच नौ दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार जिंदा मिल गए. सोमवार को उन्हें ढूंढ़ लिया गया.

टीम के 12 खिलाड़ी और कोच बाढ़ के पानी के कारण इस गुफा में फंस गए थे. ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने चियांग राय प्रांत के राज्यपाल नारोंगसाक ओसोट्टानाकोर्न के हवाले से बाताया कि खिलाड़ी और कोच जिंदा हैं, लेकिन उन्हें उनकी स्थिति के बारे में जानकारी नहीं है.

खिलाड़ियों का प्राथमिक उपचार जारी

राज्यपाल ने कहा, ‘मैं आपको आश्वासन देता हूं कि हमने उनकी खोज कर ली है. चिकित्सक अभी उनकी जांच कर रहे हैं. वह उनका इलाज करेंगे.’ फुटबॉल टीम अपने कोच के साथ 23 जून को गायब हुई थी.

खिलाड़ियों की उम्र 11 से 16 वर्ष के बीच है. वे सभी युवा फुटबॉल टीम के सदस्य हैं और अपने 25 साल कोच के साथ इस गुफा में गए थे. बताया जाता है गुफा के अंदर जाने वाला रास्ता बारिश के कारण बंद हो गया था और पानी के जमा होने से वे बाहर नहीं निकल पाए थे.

इन खिलाड़ियों के परिजनों से लेकर थाईलैंड और दुनियाभर के लोग उन्हें लेकर चिंतित थे. खिलाड़ियों के परिजन गुफा के बाहर तक पहुंच गए थे और उनके सकुशल बाहर निकलने की दुआ कर रहे थे. राहत और बचावकर्मियों को बारिश के कारण बचाव कार्य में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा.

RRB Recruitment 2018: 89 हजार पदों पर होगी भर्ती, अगस्त-सितंबर में होगा एग्जाम

RRB Recruitment 2018: 89 हजार पदों पर होगी भर्ती, अगस्त-सितंबर में होगा एग्जाम
RRB Recruitment 2018: लेवल-2 के पदों में लोको पायलट, सहायक स्टेशन मास्टर की लिखित परीक्षा के अलावा मनौवैज्ञानिक परीक्षा ली जाएगी. जबकि लेवल-1 के पदों में गैंगमैन, ट्रैकमैन, प्वांइटमैन आदि की लिखित परीक्षा होने के बाद संबंधित जोन में शारीरिक टेस्ट लिया जाएगा

आरआरबी ने भारतीय रेलवे में अब तक की सबसे बड़ी भर्ती निकाली है. इसके तहत असिस्टेंट लोको पायलट, टेक्निशियन और लेवल-1 पदों के लिए आवेदन मंगाए गए हैं. नौकरियों की सूचना भारतीय रेलवे, भारत सरकार की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं. इन पदों पर अगस्त-सितंबर 2018 में कम्प्यूटर आधारित परीक्षा ली जाएगी.आरआरबी के नोटिफिकेशन के मुताबिक, असिस्टेंट लोको पायलट (नोटिस संख्या सीईएन 01/2018) और टेक्नशियन पोस्ट (नोटिस संख्या सीईएन 01/2018) के आवेदनों को जांचने का काम अंतिम चरण में है.

भर्तियों की घोषणा तब की गई है जब 29 जून को दिल्ली में रेल भवन के सामने ‘रोजगार मांगे इंडिया’ नामक समूह के कार्यकर्ताओं ने एक विरोध प्रदर्शन कर परीक्षा की तारीखों का ऐलान करने की मांग की थी. इनका कहना था कि इस साल फरवरी में भर्तियों की घोषणा की गई लेकिन अब तक इसकी तारीखों के बारे में कुछ नहीं कहा गया है. शुरू में परीक्षा अप्रैल महीने में लेने की बात कही गई थी लेकिन इसे भी टाल दिया गया.

विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं की शिकायत थी कि 2.37 करोड़ लोगों से आवेदन लिए जाने के बावजूद रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड ने परीक्षा की तारीखों के बारे में कोई सूचना नहीं दी.बोर्ड ने फरवरी में ग्रुप डी के 62000 पद और असिस्टेंट लोको पायलट और टेक्नीशियन के 26000 पदों के लिए भर्तियां निकाली थी. इन भर्तियों के लिए 2 करोड़ 37 लाख आवेदन आए हैं. अब रेलवे इन आवेदनों को जांचने में लगा है.लेवल-2 के पदों में लोको पायलट, सहायक स्टेशन मास्टर की लिखित परीक्षा के अलावा मनौवैज्ञानिक परीक्षा ली जाएगी. जबकि लेवल-1 के पदों में गैंगमैन, ट्रैकमैन, प्वांइटमैन आदि की लिखित परीक्षा होने के बाद संबंधित जोन में शारीरिक टेस्ट लिया जाएगा. अधिकारी ने बताया कि लेवल-1 की देशभर में एक दिन ही परीक्षा कराई जाएगी. इसी प्रकार दूसरे चरण में लेवल-2 की देशभर में एक दिन ही परीक्षा आयोजित होगी.

शिवपुरी नगरपालिका और दोशियन कंपनी की मिलीभगत?

शिवपुरी:-बदनाम दोशियान ने अन्य फर्म के नाम से डाला टेंडर।??
अध्यक्ष, सीएमओ और बाबू पर सेटिंग का आरोप, तीन दिन से जमे हुए हैं अहमदाबाद में
शिवपुरी। सिंध जलावर्धन योजना के क्रियान्वयन में बदनाम हो चुकी दोशियान से त्रस्त होकर ही नई पाइप लाइन डालने हेतु नगरीय प्रशासन विभाग ने पुन: टेंडर आमंत्रित किए हैं। नगर पालिका ने सतनबाडा़ फिल्टर प्लांट से शहर तक एवं डूब क्षेत्र में पाइप लाइन बदलने तथा शहर में 8 किमी वितरण लाइन डालने हेतु लगभग 12 करोड़ के टेंडर बुलाए हैं। जिसमें पीछे के रास्ते से नगर पालिका के भ्रष्टाचार में डूबे पदाधिकारियों और अधिकारियों ने दोशियान को ही एक बार फिर से काम देने की तैयारी कर ली है। सूत्र बताते हैं कि टेंडर प्राप्त करने के लिए दोशियान ने एक अन्य कम्पनी के नाम से टेंडर डाला है और इस मिली भगत में नगर पालिका की भ्रष्ट लोबी शामिल हैं। सूत्रों की माने तो नगर पालिका अध्यक्ष, सीएमओ और एक बाबू तथा अध्यक्ष का निकटस्थ रिश्तेदार पिछले तीन दिनों से दोशियान के मुख्यालय अहमदाबाद में जमे हुए हैं। जहां टेंडर लेने के लिए पुन: ताना बाना बुना जा रहा है।
सिंध जलावर्धन योजना का कार्य वर्ष 2009 में प्रारंभ हुआ और इसका टेंडर दोशियान के पक्ष में स्वीकृत हुआ। टेंडर की शर्ताे के अनुसार दोशियान को वर्ष 2011 में अर्थात दो साल में शिवपुरी शहर में सिंध पेयजल की सप्लाई करनी थी। लेकिन दोशियान वर्ष 2018 तक भी अपने काम को पूर्ण नहीं कर पाई। जनवरी 2018 में दोशियान ने ग्वालियर वायपास पर पानी लाने का दाबा किया और इसके बाद स्थानीय विधायक और प्रदेश सरकार की मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने शहर में जलाभिषेक यात्रा भी निकाली जिसका पूरे नगरवासियों ने दिल खोलकर स्वागत किया। लेकिन इसके बाद से लगातार पाइप लाइन में लीकेज हो रहे है और सिंध का पानी शहर में नहीं आ पा रहा। यदि एक दिन सप्लाई भी होती है तो लीकेज के कारण तीन दिन तक सप्लाई बंद रहती है। इस कारण दोशियान से निराश होकर नगरीय प्रशासन विभाग ने नई पाइप लाइन डालने के लिए टेंडर आमंत्रित किए है। क्योंकि यह तय हो गया था कि पुरानी घटिया पाइप लाइन के कारण सिंध का पानी शहर में नहीं आ सकता है। पाइप लाइन में लगातार लीकेज के कारण शिवपुरीवासी जल संकट से इस गर्मी में काफी परेशान रहे। इस कारण नगर पालिका ने शिवपुरीवासियों को राहत दिलाने के लिए नई पाइप लाइन डालने के लिए टेंडर आमंत्रित किए जिसमें बताया जाता है कि सबसे कम दर 13 करोड़ रूपए ओमशांति कंस्ट्रक्शन फर्म ने डाली है। खासबात यह है कि सिंध जलावर्धन योजना का जो काम दोशियान कम्पनी कर रही है उसका प्रोजेक्ट मैनेजर महेश मिश्रा है और प्रो. रक्षित दोषी है। जबकि ओमशांति कंस्ट्रक्शन का महेश मिश्रा है, जोकि वर्तमान में दोशियान कम्पनी का प्रोजेक्ट मैनेजर है। इससे प्रथम दृष्टि में जाहिर हो रहा है कि दोशियान कम्पनी ही जिसके कर्मो ने शिवपुरीवासियों को परेशान कर रखा है, उसे ही टेंडर देने की तैयारी की जा रही है। नगर पालिका अध्यक्ष, सीएमओ और बाबू दोशियान के मुख्यालय अहमदाबाद गए हुए हैं। बताया जाता है कि वह दोशियान कम्पनी की बैंक गारंटी को तुड़वाने के लिए गए है। लेकिन नगर पालिका सूत्रों का कथन है कि अनुबंध की जो शर्ते है वह दोशियान के पक्ष में हैं और बैंक गारंटी टूटना संभव नजर नहीं आ रहा।

अनुबंध में हो पारदर्शिता
पूर्व की भांति नगर पालिका द्वारा सिंध जलावर्धन योजना की लाईन बिछाने के लिए जो टेंडर लगाए गए हैं उनके अनुबंध मेें पारदर्शिता होना चाहिए। क्योंकि पूर्व में गोपनीय तरीके से अनुबंध होने के कारण उसका खामियाजा शिवपुरी की जनता पिछले 11 वर्ष से भुगत रही है। ऐसा कौन सा अनुबंध था कि पूरी नगर पालिका को शिवपुरी से चलकर अहमदाबाद तक पहुंचना पड़ा।
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कहीं कोई सौदा तो नहीं
सूत्रों की माने तो अभी हाल ही में लगभग 12 करोड़ के सिंध जलावर्धन योजना के पाईप बिछाने के लिए नए टेंडर लगाए गए हैं। जिसमें अहमदाबाद की दो कम्पनियों ने टेंडर डाले है जिनमें ओमशांति कम्पनी द्वारा 13 करोड़ की रेट डाली गई है। वहीं एक दूसरी कम्पनी ने 14 करोड़ रूपए की रेट डाली गई है। सूत्रों द्वारा बताया तो यहां तक जाता है कि दोशियान कम्पनी के मालिक द्वारा किसी अपनी ही दूसरी फर्म को ओमशांति के नाम से टेंडर डलाए गए हैं, जो पूरा काम पुन: लेना चाहते है। और इसी तारतम्य में बीते रोज नगर पालिका के अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि इसी बात की चर्चा को लेकर अहमदाबाद गए हुए हैं।
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लाईन बिछाने के लिए तकनीकी लोगों के बनाई जाना चाहिए टीम
नगर पालिका में सिंध जलावर्धन योजना की लाईन को बिछाने के लिए पुन: टेंडर लगा दिए गए हैं। लेकिन पाइप लाइन को बिछाने का काम किसी भी कम्पनी को मिले लेकिन उससे पूर्व एक तकनीकी लोगों की एक टीम बनाकर पूरी लाइन का निरीक्षण कराकर ही बिछवाई जाए। जिससे पूर्व की भांति परेशानियों का सामना न करना पड़े।?

दिल्ली बुराड़ी 11 लोगों की मौत पर उठते कई सवाल

दिल्ली: 11 पाइप और 11 सवालों में उलझा 11 मौतों का रहस्य
11 पाइप में से सात पाइप झुके हुए है, जबकि चार पाइप सीधे हैं. अब ये बड़ा सवाल है कि आखिर इन 11 पाइप का मतलब क्या है? ये पाइप वहां क
दिल्ली: 11 पाइप और 11 सवालों में उलझा 11 मौतों का रहस्य

नई दिल्ली: दिल्ली के बुराड़ी में 11 मौतों का रहस्य लगातार गहराता जा रहा है. बरामद हुए 11 शवों ने पूरे देश को हैरानी में डाल दिया है. इस 11 मौतों के पीछे अंधविश्वास का एंगल सामने आ रहा है. पहले जो रजिस्टर बरामद हुआ, उसमें लिखा गया था कि स्टूल का इस्तेमाल करेंगे, आंखें बंद करेंगे और हांथ बांध लेंगे तो आपको मोक्ष की प्राप्ति होगी. अब घर की बाहरी दीवार पर लगे 11 पाइपों ने इस मामले को और उलझा दिया है.

ये 11 पाइप खड़े कर रहे हैं कई सवाल

दरअसल जिस घर से 11 शव मिले हैं, उस घर में 11 पाइप भी लगे हुए मिले हैं. उसे लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं? ये 11 पाइप घर की बाहरी दीवार पर दूसरे घर की ओर लगे हुए हैं. इन 11 पाइप में से सात पाइप झुके हुए है, जबकि चार पाइप सीधे हैं. अब ये बड़ा सवाल है कि आखिर इन 11 पाइप का मतलब क्या है? ये पाइप वहां क्यों लगाए गए हैं? जबकि इन पाइप से पानी भी नहीं निकलता है और दीवार पर भी पानी का कोई निशान नहीं है. एक दीवार पर 11 पाइप लगाना कोई सामान्य बात नहीं है.

इन 11 सवालों से गहराया रहस्य

पहला सवाल- सबकी आंखों पर पट्टी थी, लेकिन दो पर पट्टी क्यों नहीं थी?

दूसरा सवाल- घर के दरवाजे खुले थे, क्या घर में कोई बाहर से आया था?

तीसरा सवाल- अगर सामूहिक खुदकुशी हुई तो कोई सुसाइड नोट क्यों नहीं लिखा?

चौथा सवाल- जो दो रजिस्टर बरामद हुई हैं उनमें लिखी हैंडराइटिंग किसकी है?

पांचवा सवाल- मोक्ष का क्या मामला है? क्या परिवार अंधविश्वास की चपेट में था?

छठा सवाल- इतनी हत्याएं हुईं तो घर का कुत्ता क्यों नहीं भौंका?

सातवा सवाल- कुत्ते के पट्टे पर किसकी उंगलियों के निशान हैं?

आठवां सवाल- क्या परिवार किसी बाबा या तांत्रिक से संपर्क में था?

नौंवा सवाल- घर में शादी-सगाई का माहौल था तो अनहोनी कैसे हुई?

दसवां सवाल- खुदकुशी हुई तो क्यों? हत्या हुई तो हत्यारा कौन?

ग्यारहवां सवाल- ये सामूहिक आत्महत्या है या सामूहिक हत्या?

भाटिया परिवार के बारे में जानिए-

ये परिवार चितौड़गढ़ के सावा का रहने वाला था. ये लोग राजपूत समाज के थे, लेकिन इन्होंने अपने नाम में भाटिया उपनाम जोड़ लिया था. भाटिया परिवार की बुराड़ी में ही दो दुकानें हैं. परिवार का झुकाव आध्यात्म की ओर था. कहा ये भी जा रहा है कि परिवार की किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी. 17 जून को ही नारायण देवी की नातिन प्रियंका की सगाई हुई थी. दोनों का शव 11 शवों में शामिल है.

उम्र से लेकर नाम तक, यहां देखिए परिवार का ‘फैमिली ट्री’

खरई चैक पोस्ट पर अवैध वसूली का सिलसिला बदस्तूर जारी

*भारत सरकार द्वारा बंद किये नाको पर हो रही अवैध वसूली*

*नवागत एस पी से की जायेगी गुंडागर्दी की शिकायत*

शिवपुरी – खरई बैरियर पर अवैध बसूली का सिलसिला बदस्तूर जारी है यह देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि यह बैरियर परिवहन विभाग ने प्राईवेट रूप से ठेके पर दे दिया है। जिसके चलते खरई में एकीकृत जाँच चैकी को पिछले लंबे समय से गुण्डा तत्वों ने अघोषित रूप से कब्जा रखा है बताया जाता है यहां अवैध वसूली के लिए रखे प्राईवेट गुडो द्वारा कार्यवाही का झूटा डर दिखाकर कागजो को जप्त करने कि धमकी देकर अवैध वसूली कि जा रहा है। इससे न केवल राजस्व को हानी पहुंच रही थी बल्कि बैरियर पर लूटपाट का माहौल निर्मित कर रखा था। खरई चैक पोस्ट पर बाहारी गुंडो द्वारा परिवहन विभाग के अधिकारी कोटानाका चैक पोस्ट पर हाईवे नंबर 27 पर चलने वाले वाहनो से खुलेआम अवैध वसूली करवा रहे है। जिससे हर माह सांठगांठ करने वाले जिम्मेदार अधिकारीयो को हर माह लाखो की काली कमाई हो रही है। यह बता दें कि इस गोरखधंधे में आरटीओ, वाणिज्यकर, मण्डी और वन विभाग के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत जगजाहीर है। जो प्राईवेट गुंडो कि मदद से खुलेआम अधिकारियो के संरक्षण में सरगने के रूप में चैक पोस्क पर कब्जा जमाकर अवैध वसूली का खेल रहे है। सुत्रो से मिली जानकारी के अनुसार आरटीओ चैक पोस्ट से होने वाही काली कमाई का बटौना जिले से लेकर संभाग तक वितरण किया जा रहा है। जिससे सरकार को हर माह लाखो कि राजस्व हानी हो रही है। आगे कि कहानी जानने के लिए जब हमारे संबाददाता ने कि तो उसमे चैकाने वाले तथ्य सामने आए। भारत सरकार द्वारा जीएसटी लागू होने के बाद सरकार ने देश भर में संचालित वाणिज्य कर बैरियर अन्य परिवहनो को बंद कर दिया गया। ऐसे में बंद पड़े आरटीओ बैरियरो पर किसके ईशारे पर अवैध वसूली कि बात सामने आना परिवहन विभाग पर बदनुमा दाग के समान है।

*हमेशा विवादो में रहा है चैक पोस्ट -*

खरई वैरियर पर होने वाली अवैध वसूली का काला खेल हमेशा से विवादित रहा है। अवैध वसूली के कारण एक युवक ने कुंए में गिरकर अपनी जान गवांई थी जिसमें खरई बैरियर के पूर्व प्रभारी शशि भारद्वाज पर आत्महत्या उत्प्रेरण का मामला भी दर्ज हो चुका है। इसके बाद खरई बैरियर पूर्व प्रभारी शशि भरद्वाज ने अपने पूत्र से चैक पोस्ट पर प्राईवेट प्रभारी बना रखा था जिसपर उनके पत्र से चैक पोस्ट से लाखो के बारे न्यारे किये थे जिसपर विवाद होने के बाद एक बार फिर शशि भरद्वाज कार्यवाही कि जद में आ गए और उनहे प्रभार से हटा दिया गया। इसी दौरान खरई बैरियर पर रिश्वत के 3600 रूपए नही देने पर एक ट्रक को 17 घंटे से खडा कर दबंई से उसके कागजात छीन लिये गए। वह मामला भी मीडिया में आने के बाद तूल पकड़ गया।
*इस पूरे खेल में स्थानीय गुण्डों और परिवहन कि भूमिका संदिग्ध -*

विदित हो कि इस एकीकृत जाँच चैकी से होकर अंतर्राज्जीय वाहन गुजरते हैं यह मार्ग राजस्थान को जाता है। इस पर से गुजरने वाले वाहनों की चैकिंग फॉरेस्ट, परिवहन, मण्डी और वाणिज्यकर विभाग के द्वारा की जाती है। लोड चैकिंग भी यहीं होती है मगर इन वाहनों से सुविधा शुल्क लेकर वाहनों को एकीकृत सीमा जाँच चैकी पर केन्द्रीय मार्ग से निकाला जाकर इस तमाम जाँच से परे कर दिया जाता है। सूत्रों की मानें तो इस सेन्ट्रल मार्ग से निकासी के एवज में ओवरलोड ट्रक, ट्रॉला से 20 से 25 हजार रुपए प्रति वाहन वसूले जाते हैं। इस कारोबार को राजस्थान और म.प्र. के माफिया तत्वों से मिलकर शिवपुरी के कुछ स्थानीय गुण्डे संचालित करा रहे थे।

*एसपी पांडे ने टोल नाके पर चल रहे गुण्डाराज को कर चुके है धराशायी -*

जिले में खरई पड़ोरा पर स्थित एकीकृत सीमा जाँच चैकी पर लंबे समय से चले आ रहे अंतर्राज्जीय गुण्डाराज को नेस्तनाबूद करने की दिशा में पूर्व एसपी सुनील पाण्डे ने कड़े कदम उठाते हुए कार्यवाही की जद में लिया गया था। इस पूरे गोरखधंधे की कार्यवाही एसपी सुनील कुमार पांडे ने सुत्रो से मिल रही लगातार खबरो के आधार पर एसडीओपी सुजीत भदौरिया को इस पूरे घटनाक्रम के बारे में बताते हुए कार्यवाही के निर्देश दिए थे जिसपर कार्यवाही करते हुए एसडीओपी सुजीत सिंह भदौरिया ने गुण्डाराज के नैटवर्क को धवस्त करने में बड़ी सफलता हासिल की थी।

फर्जी मजदूरों के नाम पर मनरेगा घपला,रातों रात जेसीबी से खोदे ताल.

जनपद अधिकारियों को मामले की जानकारी होते हुए नहीं हुई कार्यवाही

करैरा ब्रेकिंग न्यूज

करैरा/करैरा अनुविभाग के आदर्श गाँव सिरसौद में मनरेगा की खेत तालाब योजना में भारी अनियमितताएं देखी जा रहीं है। हजारों मजदूरों की संख्या मस्टर रोल में दर्शाकर लाखों रूपये अबैध कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है। जो लोग कभी मनरेगा में मजदूरी करने नहीं गये उनके नाम की हाँजिरी भर कर पैसा निकालने के कार्य को अंजाम दिया जा रहा है। चार-चार सप्ताहों के मजदूरो की हाजिरी एक दिन में एक साथ लगाकर खानापूर्ती की जा रही है। अधिकतर काम पंचायत कर्ता धर्ता अपने नाम से कार्य योजनाएं निकाल कर स्वयं लाभ ले रहे और आम लोग जनहितकारी योजनाओं से बंचित है। खेत तालाब योजना के अन्तर्गत सरपंच ने करीबी नत्थू लोधी, व ग्रामीण वेयर फुट इंजीनियर ने अपने पिता रामाधार चौबे और उप सरपंच सुन्दर भान गौतम द्वारा स्वयं के नाम पर खेत तालाब स्वीकृत कराकर मनरेगा के तालाब मजदूरों की जगह रातों रात जे सी बी मशीन से खुदवा कर अपनी जेब भरने के कार्य को अंजाम दिया जा रहा है। कुछ अन्य खेत तालाब देखें जाये तो वो गाँव के दबंग नेताओं और पंचायत मेम्बर्स के नाम स्वीकृत कर मशीनों के कार्य किया जा रहा है। इस मामले में जनपद पदाधिकारियों को जानकारी होने के बाबजूद भी कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। यदि इन फर्जी मजदूरों को वास्तविक स्थिति में देखा जाये कई अपने व्यापारिक कार्यों में व्यस्त है। इस प्रकार एक व्यक्ति दो दो जगह कैसे कार्य कर सकता है।
जबकि मनरेगा योजना ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित की गई है। परन्तु नियमों को ताक पर रखकर खेत तालाब का निर्माण दिन में न करते हुए हुए रातों रात मशीनों के माध्यम से किया जा रहा है। यदि इस मामले में जाँच की जाये तो दूध का दूध और पानी का पानी सामने आ सकता है। इस प्रकार केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री के गाँव में जिम्मेदारो द्वारा जनता का पैसा अपनी जेब में डाला जा रहा है। प्रधान मंत्री मोदी और सी एम शिवराज सिंह को ग़रीबों की चिंता है पर आदर्श गाँव सिरसौद मे कागजों मे ही विकास सीमित है।

पिछोर के मनपुरा में नेत्र अस्पताल में नहीं होता मरीजों का इलाज.

पिछोर.मनपुरा नेत्र अस्पताल में मरीजों का नहीं होता इलाज नहीं मरीजों की कोई सुनबाई मरीज इधर उधर भटकते रहते है कोई उन की सुध नहीं लेता आखिरकार मरीज हताश और परेशान होकर अस्पताल से बिना इलाज कराये पिछोर के लिए इलाज कराने के जाने को मजबूर है क्यों की मनपुरा नेत्र अस्पताल में कोई धनी ढोरी ही नहीं होता है इस लिए मरिजों को पिछोर के लिए। भागना पड़ता है । कोछ लोगों से बात की तो बताया कि यहाँ ज्यादा तर ताला ही पड़ा रहता है
जिन लोगों से बात की मिश्रीलाल, रामदेवी और पंचम सिहं इन का कहना है की यहाँ आँखों की कोई जाँच नहीं होती है । और नहीं कोई अधिकारी या प्रसासन का इस और कोई ध्याान है।?