सिंधिया की उर्जा ला सकती है बदलाव

मध्यप़देश में इसी साल नबंबर में विधान सभा चुनाव होने हैं. शिवराज सरकार को बदलने के लिये जनता में सुगबुगाहट है ,लेकिन विपक्ष में बैठी कांग़ेस का शीर्ष नेतृत्व सो रहा. यही वो राज्य हैं जो आगे चलकर केंद़ की ताकत बनेंगे.
अगर कांग़ेस को विजय प़ाप्त करनी है तो इसबार किसी युवा चेहरे को आगे लाना होगा. बगैर चेहरे के कुछ नहीं होने वाला, राहुल गांधी को इसके लिये ठोस निर्णय लेना होगा.
मध्यप़देश में वर्तमान में दो चेहरे कांग़ेस में कर्मठता के साथ जान फूंक रहे हैं, एक ज्योतिरादित्य सिंधिया और दूसरे अरुण यादव जनता भी चाहती है इनमें से किसी एक को राहुल गांधी चेहरा बनाकर आने वाले विधान सभा चुनाव में फतह प़ाप्त करें.
ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी समूची उर्जा के साथ पिछले सालों से प़देश की राजनीति में सक़िय हैं.
चाहे मंदसौर में किसानों पर गोलीबारी का मामला हो, चाहे व्यापम का घोटाला सिंधिया हमेशा से इनकी आवाज बनते रहे हैं.
भोपाल में अनशन कर किसानों की आवाज बुलंद करने वाले सिंधिया आज मध्यप़देश की जनता के मन में पैठ बना चुके हैं.
मध्यप़देश में हुये विधानसभा उपचुनावों में सिंधिया ने जिस कौशल से चुनाव में शिवराज सिंह को मात दी, इससे प़देश की जनता में उनकी छवि निखर कर सामने आई है.
दूसरा चेहरा युवा नेता अरुण यादव का है, उनकी संगठन क्षमता किसी से छिपी नहीं है. सहकारिता में अरुण यादव की खासी भूमिका रही है.
मध्यप़देश में विपक्ष में रहते जिस तालमेल के साथ संगठन में भूमिका निभाई और कोई भी आंदोलन हो अपने वरिष्ठ नेताओं के साथ कंधा से कंधा मिलाकर खड़े रहे.
पूर्वी मध्यप़देश में अच्छी पकड़ रखने के साथ साथ अन्य अंचलों में भी जनता उनको पसंद करने लगी है.
दिग्विजय सिंह और कमलनाथ भी चेहरे की दौड़ में है, पर उनकी उर्जा चुक गई है, मध्यप़देश की जनता और नौजवान किसी नवयुवक नेतृत्व की तरफ निहार रहे है.
जनता में बदलाव की सुगबुगाहट है, लोहा गरम है, लेकिन देर है तो केंद़ीय नेतृत्व के एक निर्णिय की जो गरम लोहे पर घन के रुप में चोट कर सके.
राहुल गांधी को निर्णय तो लेना पड़ेगा. स्वयं निर्णय लेने की क्षमता को साबित करना पड़ेगा, अन्यथा कांग़ेस इसी तरह दस हाथों में लुड़ककर हारती रहेगी.

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