प़ियंका गांधी में छिपी है नेतृत्व की शक्ति


प़ियंका गांधी जब राहुल गांधी के साथ चलती हैं, तो कांग़ेस पूर्ण नजर आने लगती है.
एक शक्ति पुंज के रुप में कांग़ेस की ताकत उनके रहते न जाने क्यों कांग़ेस में प़ाण फूंकती नजर आती है.
शायद जो ताकत इंदिरा के साथ खो गई. वह ताकत प़कृति ने प़ियंका गांधी के अंदर रुपांतरित कर दी है.
कैंडल मार्च के समय कल इंडिया गेट पर उनके चेहरे पर आक़ोश था, और यही वो विंदु है जो किसी उद्यम को दिशा और ताकत देता है.
उनके आदेशात्मक शब्दों में एक प़शासक की छवि साफ झलकती है.
क्यों न हो प़ियंका गांधी ने कई अपमान सहे हैं, कई उतार चढ़ाव देखे हैं. उनके अंदर कुछ घुटन है, जो वक्त ने दी है. यही घुटन आगे चलकर उनकी पार्टी की ताकत बनेगी.
देश की जनता कभी कभी उनके अंदर नेतृत्व के किरदार की कल्पना करने लगती है.
ये तो वक्त ही तय करेगा कि प़ियंका गांधी के अंदर जो असीम उर्जा है, उनके चेहरे पर जो एक तेज है, कब उभर कर सामने आयेगा.
इंडियागेट पर का़गेस जरुर पूर्ण दिख रही थी.और इसका श्रेय प़ियंका गांधी को जाता है.
कांग़ेस में जो खाली स्थान है, वह शायद प़ियंका गांधी की उपस्थिति से ही भर सकता. और आने वाले समय में वह राहुल गांधी की ताकत और मार्गदर्शक बन सकती हैं.

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