उपवास नहीं प़ायश्चित करें मोदी


मोदी आज उपवास पर बैठ रहे, उपवास महात्मा गांधी का अस्त्र था, जिसका उद्देश्य सत्य और अहिंसा था.
मोदी जी का सत्य केवल चुनाव जीतना है. सत्य से चाहे फिर असत्य से. वैसे एक प़धानमंत्रीी को उपवास छोड़ काम करना चाहिये
मोदी जी आज भी यही समझ रहे कि उनका दल विपक्ष में है, जनता उनसे काम चाहती है, नाटकबाजी तो वह बहुत कर चुके.
चार साल केवल चुनावी सभायों के मंच पर गुजार दिये, उनका लक्ष्य छल, बल से केवल चुनाव जीतना दिख रहा.
यू पी में क्या हो रहा सब जानते हैं, बेटियां न्याय मांग रहीं. इसके बदले में बाप की हत्या. तो सबसे पहले मोदी जी को कानून व्यवस्था सुधारने का काम करना चाहिये.
नोटबंदी से अर्थव्यवस्था जर्जर हो चुकी है, बचाखुचा काम जीएसटी ने कर दिया.
नौजवान सड़कों पर रोजगार की लड़ाई लड़ रहा. चाहे सवर्ण हो चाहे पिछड़ा दोनों बेरोजगार हैं, और रोजगार चाहते.
विदेश नीति में हम हर तरफ असफल हैं, पाकिस्तान और चीन इसका उदाहरण हैं.
बैंक खाली कर पूंजीपतिि देश से भाग चुके हैंं, उनको वापिस लाने का काम सरकार का है. पैसा बसूलना बाद में.
देहली की जनता कुछ समय बाद ही मोदी जी को नकार चुकी है, इससे सबक सीखना था, लेकिन नहीं.
सवाल केवल इतना सा है उपवास कर जनता का पैसा बरबाद न करें. स्वयं और उनकी टीम को काम करने के मार्ग पर चलायें.
जनता काम चाहती है उपवास नहीं..मोदी जी सत्ता में हैं विपक्ष में नहीं.

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