पीएम किसान: एक ही जोत पर 1 से ज्यादा लोग पा सकते हैं 6000 रु सालाना? योजना से जुड़ी खास बातें


PM Kisan Samman Nidhi: पीएम किसान सम्मान निधि योजना को देश के करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों को ध्यान में रखकर शुरू किया गया है.

PM Kisan Samman Nidhi: पीएम किसान सम्मान निधि योजना को देश के करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों को ध्यान में रखकर शुरू किया गया है.

PM Kisan Samman Nidhi: पीएम किसान सम्मान निधि योजना को देश के करोड़ों छोटे और सीमांत किसानों को ध्यान में रखकर शुरू किया गया है. इस योजना के तहत किसानों को एक साल में 3 किस्त के जरिए 6000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है. हालांकि इसके लिए सरकार ने कुछ शर्तें तय की हैं कि कौन इस योजना का लाभ उठा सकता है और किसे लाभ नहीं मिलेगा. इसके लिए किसानों को आवेदन के समय कुछ बातों की जानकारी देना अनिवार्य होता है. फिलहाल इस योजना से अबतक करीब 11 करोड़ किसान जुड़ चुके हैं. वहीं, पिछले दिनों कुछ लोगों द्वारा इसमें गलत तरीके से भी लाभ लेने की खबर आई है. ऐसे में यहां कुछ बातों का जानना जरूरी है.

एक ही जोत पर 1 से ज्यादा को मिलेगा लाभ?

यदि सिंगल जोत वाली जमीन पर कई किसान के परिवारों के नाम हैं, तो क्या उनको इस स्कीम का लाभ मिलेगा? अगर ऐसा है तो स्कीम के अंतर्गत प्रत्येक परिवार को न्यूनतम कितना आर्थिक लाभ मिलेगा? यह सवाल अभी भी बहुत से लोगों के मन में होगा. स्कीम की गाइडलाइन के तहत पात्र ऐसे प्रत्येक किसान परिवार को अलग-अलग 6000 रुपये तक का लाभ उपलब्ध होगा.

पिता के नाम पर मौजूद खेत जोतने पर मिलेगा लाभ?

अगर कोई व्यक्ति जिसके नाम पर खुद का खेत नहीं है लेकिन वह अपने पिता के नाम पर मौजूद खेत को जोतता है तो उसे पीएम किसान का लाभ नहीं मिलेगा. उसे वह जमीन अपने नाम से कराने के बाद ही इसका लाभ मिलेगा.

किराए पर खेती करने वालों को मिलेगा लाभ?

अगर कोई किसान खेती करता है लेकिन उसके नाम पर खेती नहीं है. यानी वह किराए पर खेत लेकर किसरनी करता है तो वह इसका लाभ नहीं ले सकेगा. खेती योग्य जमीन उसके नाम पर होना ही अंतिम क्राइटेरिया है.

पीएम किसान: फैमिली का क्या मतलब है

लैंडहोल्डर फार्मर्स फैमिली का यहां मतलब हस्बैंड, वाइफ और उनके बच्चे से है. जो लैंड रिकॉर्ड के हिसाब से किसी खेती योग्य जमीन पर खेती करते हैं.

पहले जान लें किसे नहीं मिलेगा लाभ

अगर कोई किसान खेती करता है लेकिन वह खेत उसके नाम न होकर उसके पिता या दादा के नाम हो तो उसे 6000 रुपये सालाना का लाभ नहीं मिलेगा. वह जमीन किसान के नाम होनी चाहिए.
अगर कोई किसान किसी दूसरे किसान से जमीन लेकर किराए पर खेती करता है, तो भी उसे भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा. पीएम किसान में लैंड की ओनरशिप जरूरी है.
सभी संस्थागत भूमि धारक भी इस योजना के दायरे में नहीं आएंगे.
अगर कोई किसान या परिवार में कोई संवैधानिक पद पर है तो उसे लाभ नहीं मिलेगा.
राज्य/केंद्र सरकार के साथ-साथ पीएसयू और सरकारी स्वायत्त निकायों के सेवारत या सेवानिवृत्त अधिकारी और कर्मचारी होने पर भी योजना के लाभ के दायरे में नहीं आएंगे.
डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, आर्किटेक्ट्स और वकील जैसे प्रोफेशनल्स को भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा, भले ही वह किसानी भी करते हों.
10,000 रुपये से अधिक की मासिक पेंशन पाने वाले सेवानिवृत्त पेंशनभोगियों को इसका लाभ नहीं मिलेगा.
अंतिम मूल्यांकन वर्ष में इनकम टैक्स का भुगतान करने वाले पेशेवरों को भी योजना के दायरे से बाहर रखा गया है.
किसान परिवार में कोई म्यूनिसिपल कॉरपोरेशंस, जिला पंचायत में हो तो भी इसके दायरे से बाहर होगा

मां पीतांबरा के दर्शन के बहाने प्रियंका गांधी के रोड शो की तैयारी

भोपाल, । मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा उपचुनाव के जरिये सत्ता में वापसी का गणित भले ही कांग्रेस के लिए मुश्किलभरा हो, लेकिन पार्टी जीत के लिए पुरानी परिपाटी को छोड़ने में भी गुरेज नहीं कर रही है। कांग्रेस की नैया पार लगाने के लिए उपचुनाव में गांधी परिवार का चेहरा मोर्चा संभाल रहा है। मप्र कांग्रेस ने पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को उपचुनाव में बुलाया है। प्रियंका यहां दतिया स्थित मां पीतांबरा देवी के दर्शन के बहाने आ रही हैं।

इसी बहाने वे उपचुनाव की छह सीटों से गुजरते हुए रोड शो भी करेंगी। उनका कार्यक्रम राजस्थान से सड़क मार्ग से प्रवेश कर मुरैना, ग्वालियर और डबरा होते हुए दतिया तक पहुंचने का बनाया जा रहा है।

मकसद है सिंधिया से हिसाब चुकता करना

दरअसल, कमल नाथ सरकार गिराने के लिए कांग्रेस ज्योतिरादित्य सिंधिया को दोषी ठहराती रही है, इसलिए वह कांग्रेस और गांधी परिवार के निशाने पर हैं। सिंधिया से हिसाब चुकता करने के लिए ही कांग्रेस उनके गढ़ में प्रियंका गांधी वाड्रा का रोड शो कराने की तैयारी में है। कांग्रेस को उम्मीद है कि प्रियंका के आने से इन क्षेत्रों में कार्यकर्ता सक्रिय होंगे, क्योंकि अभी मुश्किल यह है कि सिंधिया के प्रभाव वाला क्षेत्र होने के कारण यहां पार्टी कार्यकर्ताओं की कमी के साथ ही भरोसे के संकट से भी जूझ रही है। वह कड़ी टक्कर देने वाले प्रत्याशी के लिए भी दूसरे दलों के बागियों पर आश्रित है।

पीढ़ियों से हाजिरी लगाता आया गांधी परिवार

कांग्रेस प्रियंका के इस प्रस्तावित दौरे को सियासी करार देने से बच रही है। उसका तर्क है कि मां पीतांबरा के दर्शन के लिए गांधी परिवार पीढ़ियों से हाजिरी लगाता आया है। पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी यहां आकर दर्शन कर चुके हैं। 2018 में राहुल गांधी ने यहां दर्शन पूजन कर चुनावी अभियान शुरू किया था।

एक तीर से कई निशाने

कांग्रेस प्रियंका का रोड शो कर एक तीर से कई निशाने लगाना चाहती है। 2018 में राहुल गांधी की मंदसौर रैली ने मप्र विस चुनाव-2018 की तस्वीर ही बदल दी थी। उपचुनाव में प्रियंका भी संदेश देना चाहेंगी कि कांग्रेस में युवा नेताओं को भरपूर मौका दिया जा रहा है। प्रियंका उत्तर प्रदेश में लगातार सक्रिय हैं। रोड शो से सफलता मिलने की स्थिति में उत्तर प्रदेश में प्रियंका की पैठ और गहरी होगी। वहां भी कार्यकर्ताओं का नया कैडर मजबूत हो सकता है। (सौजन्य से एजेंसी)

भारत के आगे झुका नेपाल, विवादित नक्शे वाली किताब पर लगाई रोक

काठमांडू: नेपाल (Nepal) ने उन नई किताबों का वितरण रोक दिया है, जिसमें तीन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण भारतीय क्षेत्रों को अपने भूभाग के रूप में दर्शाने वाले देश के संशोधित राजनीतिक मानचित्र को शामिल किया गया है. मीडिया में मंगलवार को आई खबरों में कहा गया कि उनमें कई तथ्यात्मक त्रुटियां हैं.

नेपाल की संसद द्वारा सर्वसम्मति से लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा इलाकों को अपने भूभाग में दर्शाने वाले नए राजनीतिक मानचित्र को मंजूरी दिए जाने के बाद भारत पहले ही नेपाल द्वारा भूभागीय दावों को ‘कृत्रिम रूप से बढ़ाकर’ पेश किए जाने को अस्वीकार्य करार दे चुका है. भारत इन तीनों इलाकों के अपने क्षेत्र में होने का दावा करता है.

काठमांडू पोस्ट की खबर के मुताबिक, मंत्रिमंडल की एक बैठक में मंगलवार को शिक्षा मंत्रालय से कहा गया कि वह कक्षा 9वीं से 12वीं तक की इन किताबों की और प्रतियों का मुद्रण और वितरण न करे, क्योंकि भूमि प्रबंधन व सहकारी मंत्रालय तथा विदेश मंत्रालय की तरफ से कुछ आपत्तियां व्यक्त की गई हैं. 

भूमि सुधार एवं सहकारी मंत्रालय के प्रवक्ता जनक राज जोशी ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय के पास नेपाल के भौगोलिक इलाकों को बदलने का अधिकार नहीं है और किताब में त्रुटियां हैं. उन्होंने कहा कि बिना विशेषज्ञता वाले विषय पर शिक्षा मंत्रालय द्वारा तैयार किताब में गड़बड़ियां हैं और उच्चाधिकारियों को इन्हें ठीक करने के लिए कदम उठाने को कहा गया है.

नेपाल सरकार के संबंधित निकाय ने अभी देश के संशोधित भौगोलिक क्षेत्र की घोषणा औपचारिक रूप से नहीं की है. जोशी ने कहा, ‘देश के कुल क्षेत्रफल की घोषणा करने वाली आधिकारिक एजेंसी सर्वेक्षण विभाग ने क्षेत्रफल को लेकर कोई फैसला नहीं किया है.’ नेपाल के शिक्षा मंत्री गिरिराज मणि पोखरेल ने 15 सितंबर को ‘नेपाली भूभाग और संपूर्ण सीमा स्वाध्याय सामग्री’ शीर्षक वाली 110 पन्नों की किताब का विमोचन किया गया था. 

यह किताब देश के भूभाग से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों और उसके सीमा विवादों खासकर भारत के साथ का जिक्र करती है. इस किताब में नेपाल का नया क्षेत्रफल 147,641.28 वर्ग किलोमीटर दर्शाया गया है, जिसमें 460.28 वर्ग किलोमीटर वाला कालापानी का इलाका भी है. जिसे मंत्रिमंडल द्वारा 20 मई को नेपाल के नए राजनीतिक मानचित्र में शामिल किया गया था. पोखरेल ने कहा कि उन्होंने कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा समेत नेपाली क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए एक अभियान शुरू किया था. उन्होंने ‘काठमांडू पोस्ट’ को बताया कि किताब का वितरण फिलहाल रोक दिया गया है.

एक हेल्दी और पौष्टिक फल है केला, लेकिन रोजाना इसको खाने के 5 फायदे आप नहीं जानते होंगे

केला आसानी से प्राप्त एक बहुत सेहतमंद फल होता है. इसको बाकी फलों की तरह पानी से दोने की आवश्यकता भी नहीं होती है क्योंकि ये एक मोटी परत वाले छिलके से ढका होता है. केला ढेर सारे पोषक तत्वों से भरा होता है, जो आपके शरीर को तुरंत एनर्जी प्रदान करता है. इसके सेवन से आपका पेट आसानी से भर जाता है, जिससे आपको जल्दी भूख भी नहीं लगती है. इसके इसी गुण की वजह से दुनियाभर में इसे खूब खाया और उगाया जाता है, तो आइए आज हम आपको रोज केला खाने के फायदों के बारे में बताने जा रहे हैं.

आपकी त्वचा को बूढ़ा होने से रोके केला

केला में कई सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसलिए अगर आप केले का रोजाना सेवन करते हैं, तो इससे आपकी त्वचा पर बुढ़ापे के साइन की गति धीमी हो जाती है. इसका एक कारण यह है कि केला विटामिन सी और मैंग्नीज का एक अच्छा माध्यम होता है, जो आपकी त्वचा के लिए बहुत लाभकारी होता है. इसके साथ ही मैंग्नीज आपके शरीर में विटामिन सी को एब्जॉर्ब करने में सहायक होता है. विटामिन सी त्वचा के लिए एक एंटीऑक्सीडेंट का काम करता है, जो आपकी सेल्स और टिशूज को फ्री रेडिकल्स से होने वाली हानि से बचाने का काम करता है. इसके अलावा विटामिन सी और मैंग्नीज दोनों ही कोलाजन के उप्तादन में वृद्धि करने में सहायक होते हैं. जिससे आपकी त्वचा की चमक बनी रहती है और झुर्रियों या एजिंग के अन्य लक्षण की गति धीमी पड़ जाती है.

वजन बढ़ाने और घटाने में सहायक है केला

आमतौर पर वजन बढ़ाने के लिए लोग केला खाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि वजन घटाने के लिए भी लोग केले का सेवन कर सकते हैं. दरअसल जब आप फुल फैट दूध के साथ इसका सेवन करते हैं, तो यह आपके वजन को बढ़ाता है. लेकिन जब आप अकेले इसका सेवन करते हैं, तो यह आपके वजन को घटाता है. इसकी वजह यह है कि एक औसत लंबाई के केले में लगभग 100 कैलोरीज पाई जाती हैं. इसके अलावा अगर आप मीडियम साइज के 2-3 केलों का सेवन कर लेते हैं, तो इससे आपका पेट भर जाता है. इससे आपको कम भूख लगती है साथ ही यह आपको तुरंत एनर्जी प्रदान करता है. अगर आप अपना वजन कम करना चाहते हैं, तो बहुत पके हुए केले का सेवन न करें, बल्कि थोड़ा कच्चा या कम पका हुआ केला ही खाएं क्योंकि इसमें रेसिस्टेंट स्टार्च अधिक मात्रा में पाया जाता है.

नैचुरल शुगर यानी एनर्जी से भरपूर होता है केला

अगर आप खुद को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए एनर्जी ड्रिंक्स का सेवन करते हैं, तो बेहतर होगा कि आप केला खाएं. केला नैचुरल है इससे आपके शरीर को तुरंत एनर्जी प्राप्त होती है. केले में फैट नहीं पाया जाता है और साथ ही ये 3 प्रकार की नैचुरल शुगर से भरपूर होता है- शुक्रोज, फ्रक्टोज और ग्लूकोज. इसीलिए एक्सरसाइज या रनिंग करने वाले लोगों के लिए केला एक बेस्ट एनर्जी फूड साबित होता है.

ब्लड प्रेशर को घटाने में सहायक है केला

ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिए केला बेहद फायदेमंद माना जाता है क्योंकि इसमें पोटैशियम की अधिक मात्रा पाई जाती है और साथ ही सोडियम की बहुत कम मात्रा होती है. एक बड़े केले के सेवन से आपको आपकी दैनिक आवश्यकता का 10% पोटैशियम प्राप्त हो जाता है. इसलिए यह आपके ब्लड प्रेशर को कम करने में मददगार साबित होता है. इसके अलावा आपके दिल और किडनियों के लिए भी केले का सेवन बहुत उपयोगी होता है.

प्रेग्नेंसी में सुरक्षित होता है केला

वैसे तो प्रेग्नेंसी के दौरान क्या खाएं और क्या न खाएं, ये एक बहुत ही महत्वपूर्ण सवाल होता है क्योंकि प्रेग्नेंसी में कई हेल्दी चीजें भी अनहेल्दी साबित हो सकती हैं. लेकिन प्रेग्नेंसी में केले का सेवन सुरक्षित होता है. प्रेग्नेंसी में अक्सर कुछ समस्याएं बहुत कॉमन होती हैं, जैसे- हाई ब्लड प्रेशर, मॉर्निंग सिकनेस, वीक इम्यूनिटी, उल्टी या जी मिचलाना और कब्ज आदि. केला इन सभी समस्याओं में बेहद फायदेमंद होता है.

दिल्ली दंगा: साजिशकर्ताओं ने शाहीन बाग की महिला प्रदर्शनकारियों को दी दिहाड़ी- चार्जशीट में दावा

दिल्ली पुलिस ने कड़कड़डूमा कोर्ट में दायर की गई चार्जशीट में दावा किया है कि दिल्ली दंगों के साजिशकर्ता शहीद बाग़ और जामिया मिलिया इस्लामिया (जेएमआई) के पास सीएए के खिलाफ प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को ‘दिहाड़ी’ देते थे। चार्जशीट में यह भी दावा किया गया है कि आरोपी महिलाओं को “मीडिया कवर, लिंग कवर और धर्मनिरपेक्ष कवर” के रूप में इस्तेमाल करते थे।
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चार्जशीट में कहा गया है कि जामिया समन्वय समिति के सदस्य और जेएमआई के पूर्व छात्र संघ के अध्यक्ष शिफा-उर-रहमान और अन्य लोगों ने नकद और बैंक खातों में धन इकट्ठा किया और धरने पर बैठने वाली महिलाओं को ‘दिहाड़ी’ और जरूरत का समान देना शुरू किया। एएजेएमआई ने जामिया मिलिया प्रोटेस्ट साइट के गेट नंबर 7 पर माइक, पोस्टर, बैनर, रस्सियों की व्यवस्था भी कराई। चार्जशीट में कहा गया है कि एएजेएमआई का दैनिक खर्च 5,000- 10,000 रुपये तक था।

पुलिस ने बताया कि चार्जशीट गवाहों के बयानों और व्हाट्सएप चैट के आधार पर बनाई गई है। पुलिस के मुताबिक फरवरी 2019 में हुए दंगों और जामिया मिलिया इस्लामिया के पास हुए विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के बीच अंतर है। पुलिस का कहना है कि उत्तर पूर्व दिल्ली में हुई हिंसा “पूर्ववर्ती दंगा” था जिसमें 53 की मौत हो गई।

दुनिया के 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में पीएम मोदी, टाइम मैगजीन ने कई तल्‍ख टिप्‍पणियां कीं

वॉशिंगटन
अमेरिका की मशहूर पत्रिका टाइम ने दुनिया के 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी शामिल किया है। इस सूची में शामिल अन्‍य भारतीय लोगों में गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई, अभिनेता आयुष्‍मान खुराना, एचआईवी पर शोध करने वाले रविंदर गुप्‍ता और शाहीन बाग धरने में शामिल बिल्किस भी शामिल हैं। टाइम मैगजीन ने प्रधानमंत्री मोदी के बारे में लिखे अपने लेख में कई तल्‍ख टिप्‍पण‍ियां की हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के अलावा इस लिस्‍ट में शी जिनपिंग, ताइवान की राष्‍ट्रपति त्‍साई इंग वेन, डोनाल्‍ड ट्रंप, कमला हैरिस, जो बाइडन, जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल समेत दुनियाभर के कई नेता शामिल हैं। टाइम मैगजीन ने पीएम मोदी के बारे में लिखा, ‘लोकतंत्र के लिए सबसे जरूरी स्‍वतंत्र चुनाव नहीं है। इसमें केवल यह पता चलता है कि किसे सबसे अधिक वोट मिला है। इससे ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण उन लोगों का अधिकार है जिन्‍होंने विजेता के लिए वोट नहीं दिया। भारत 7 दशकों से अधिक समय से दुनिया का सबसे बड़ा लोक‍तंत्र रहा है। भारत की 1.3 अरब की आबादी में ईसाई, मुस्लिम, सिख, बौद्ध, जैन और अन्‍य धर्मों के लोग शामिल हैं।’

‘BJP ने भारत के मुसलमानों को खारिज कर दिया’

टाइम मैगजीन के एडिटर कार्ल विक ने लिखा, ‘यह सब भारत में है जिसे अपने जीवन का ज्‍यादातर समय शरणार्थी के रूप में गुजारने वाले दलाई लामा ने सद्भाव और स्थिरता का उदाहरण बताया है। नरेंद्र मोदी ने इन सभी को संदेह में ला दिया है। भारत के ज्‍यादातर प्रधानमंत्री करीब 80 फीसदी आबादी वाले हिंदू समुदाय से आए हैं लेकिन केवल मोदी ही ऐसे हैं जिन्‍होंने ऐसे शासन किया जैसे उनके लिए कोई और मायने नहीं रखता है।’

कार्ल विक ने लिखा, ‘नरेंद्र मोदी सशक्तिकरण के लोकप्रिय वादे के साथ सत्‍ता में आए लेकिन उनकी हिंदू राष्‍ट्रवादी पार्टी बीजेपी ने न केवल उत्कृष्टता को बल्कि बहुलवाद खासतौर पर भारत के मुसलमानों को खारिज कर दिया। बीजेपी के लिए अत्‍यंत गंभीर महामारी असंतोष को दबाने का जरिया बन गया। और दुनिया का सबसे जीवंत लोकतंत्र अंधेरे में घिर गया है।’ बता दें कि लोकसभा चुनाव के दौरान टाइम मैगजीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘भारत का डिवाइडर इन चीफ’ यानी ‘प्रमुख विभाजनकारी’ बताया था।

पीएम मोदी की तारीफ भी कर चुकी है टाइम मैगजीन
हालांकि टाइम ने नतीजों के बाद उन पर एक और आर्टिकल छापा था। दूसरे आर्टिकल का शीर्षक था- ‘मोदी हैज यूनाइटेड इंडिया लाइक नो प्राइम मिनिस्टर इन डेकेड्स’ यानी ‘मोदी ने भारत को इस तरह एकजुट किया है जितना दशकों में किसी प्रधानमंत्री ने नहीं किया’। इस आर्टिकल को मनोज लडवा ने लिखा है जिन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान ‘नरेंद्र मोदी फॉर पीएम’ अभियान चलाया था। आर्टिकल में लिखा गया है, ‘उनकी (मोदी) सामाजिक रूप से प्रगतिशील नीतियों ने तमाम भारतीयों को जिनमें हिंदू और धार्मिक अल्पसंख्यक भी शामिल हैं, को गरीबी से बाहर निकाला है। यह किसी भी पिछली पीढ़ी के मुकाबले तेज गति से हुआ है।’

कंगना के ऑफिस में तोड़फोड़ के केस में संजय राउत को झटका, बॉम्बे हाई कोर्ट ने शिवसेना नेता को भी पार्टी बनाया

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कंगना रौनत के ऑफिस में तोड़फोड़ के मामले में सुनवाई करते हुए शिवसेना के मुख्य प्रवक्ता संजय राउत और बीएमसी के एच-वेस्ट वॉर्ड के अधिकारी भाग्यवंत लाते को अभियोजित करने यानी पार्टी बनाने की इजाजत अभिनेत्री को दे दी है। संजय राउत ने कथित तौर पर ‘उखाड़ के रख दूंगा’ और ‘उखाड़ दिया’ जैसे वाक्य बोले थे और कंगना ने कहा था कि इन वाक्यों के जरिए उन्हें धमकाने की कोशिश की गई।
 
9 सितंबर को बीएमसी ने कंगना के बांद्रा स्थित ऑफिस के कुछ हिस्सों को अवैध बताकर तोड़ दिया था। हाई कोर्ट में कंगना ने बीएमसी की कार्रवाई को रोकने की मांग की थी, लेकिन यथास्थिति बनाए रखने का फैसला आने से पहले ही उनके ऑफिस में तोड़फोड़ की कार्रवाई कर दी गई। इसलिए कंगना ने अपनी याचिका में संशोधन करके बीएमसी से 2 करोड़ रुपये के मुआवजा की मांग की। इसके बाद बीएमसी ने अपने जवाब में दावा किया कि कंगना की याचिका कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है, इसीलिए अभिनेत्री की याचिका ख़ारिज करके उन पर जुर्माना लगाना चाहिए।

हाई कोर्ट की डिविजन बेंच में सुनवाई के दौरान मंगलवार को बीएमसी के वकीलों ने कहा कि अभिनेत्री ने बीएमसी के हलफनामे के जवाब में जो प्रत्यत्तर (रिजॉइन्डर) दिया है, उसका जवाब देने की हमें मोहलत दी जाए। बीएमसी की वकीलों की अपील को जस्टिस एस जे कथावाला और जस्टिस आर आई चागला की बेंच ने स्वीकार कर लिया। कंगना के वकील रिज़वान सिद्दीकी और बीरेंद्र सराफ ने हालांकि बीएमसी के वकीलों द्वारा अतिरिक्त समय मांगे जाने का विरोध किया। सराफ ने कहा कि तोड़फोड़ में शामिल अधिकारियों ने कथित अवैध निर्माण की कुछ और फोटो मंगलवार को कोर्ट में जमा किए हैं, यह केस को लटकाने की रणनीति है।

अपने रिजॉइन्डर में कंगना ने कहा कि नोटिस में बीएमसी ने उनके बंगले में चल रहे हुए कथित अवैध निर्माण की एक ही तस्वीर दी थी, जिससे साफ है कि बीएमसी का आरोप झूठा है। संजय राउत द्वारा मौखिक रूप से ‘धमकाने’ के सबूत जो कंगना ने कोर्ट में जमा किए थे, उसकी ओर इशारा करते हुए जस्टिस कथावाला ने पूछा कि क्या वह शिवसेना के मुख्य प्रवक्ता को भी अभियोजित करना चाहती हैं? 

शुरू में सराफ, संजय राउत को अभियोजित करने को लेकर इच्छुक नहीं दिखे और कहा कि वह चाहते हैं कि शिवसेना प्रवक्ता को आरोपों पर खुद को डिफेंड करने का मौका मिलना चाहिए, पर बाद में उन्होंने सहमति दे दी। इसके बाद कोर्ट ने बीएमसी अधिकारी भाग्यनवंत लाते को भी पार्टी बनाने की इजाजत दे दी, जिन्होंने बीएमसी की तरफ से हलफनामा दाखिल किया था। कोर्ट ने बीएमसी से यह भी पूछा कि तोड़फोड़ के लिए वर्ष 2012 का सर्कुलर लागू करने की जरूरत क्यों पड़ी। इस सर्कुलर के मुताबिक, 24 घंटे में किसी अवैध निर्माण में तोड़फोड़ तभी की जा सकती है, जब इसमें रहने वाले या किसी अन्य की जिंदगी खतरे में हो।

हाई कोर्ट ने पूछा कि इस मामले में किसकी जिंदगी खतरे में थी, जो 8 सितंबर को नोटिस भेजने के बाद बीएमसी के अधिकारियों ने 9 सितबंर को तोड़फोड़ की कार्रवाई कर दी। कोर्ट ने बीएमसी से पूछा कि डिजायनर मनीष मल्होत्रा को भी उसी दिन मुंबई नगरपालिका कानून के 354(ए) के तहत नोटिस भेजा गया था, उस मामले की क्या स्थिति है। दरअसल, कंगना ने अपने रिजॉइन्डर में कहा था कि मनीष मल्होत्रा को जवाब देने के लिए सात दिनों की मोहलत दी गई, जबकि उनके साथ ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि बीएमसी की कार्रवाई दुर्भावना से ग्रसित थी।

GWALIOR में दंपति के साथ वहशीपन के 5 आरोपियों में से एक रईसजादा गिरफ्तार –

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में गोविंदपुरी में दंपती के साथ हैवानियत करने वाले कार सवार सिरफिरे बदमाशों में से पुलिस ने एक को थाटीपुर से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित ने पुलिस पूछताछ में कबूल किया है वही कार चला रहा था और उसी ने महिला के पति के सिर पर बोतल फोड़ी थी। अब पुलिस बदमाश के साथ रदात में शामिल अन्य आरोपितों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

 

20 सितंबर को जब सोशल मीडिया पर महिला के साथ सड़क पर बदसलूकी का वीडियो वायरल हुआ तब इस मामले ने तूल पकड़ा। इसके बाद पुलिस हरकत में आई और 24 घंटे में एक आरोपित को हिरासत में ले लिया गया है। मंगलवार की सुबह पुलिस ने आरोपित विक्की सिंह उम्र 21 साल निवासी थाटीपुर को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही वारदात में प्रयुक्त स्विफ्ट कार भी आरोपित के घर से बरामद हो गई है। आरोपित ने पुलिस पूछताछ में बताया कि कार में 5 लोग सवार थे और वह खुद गाड़ी चला रहा था।

दंपती पर कमेंट किया तो पति ने उसका जवाब दिया, जिससे वह और उसके दोस्त भड़क गए। आरोपित ने यह भी कबूल किया कि उसी ने बीयर की बोतल महिला के पति के सिर पर फोड़ी थी और आंख को सिगरेट से जलाया था। पुलिस अन्य आरोपितों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने अब तक अधिकारिक रूप से इसका खुलासा नहीं किया है।

पति के सिर पर बोतल फोड़ी, सिगरेट से आंख जलायी, महिला को घसीटकर बेरहमी से पीटा

गोविंदपुरी रोड पर बाल सम्प्रेक्षण गृह के सामने पति के साथ खाना खाकर लौट रही 24 वर्षीय महिला व उसके पति से सफेद रंग की स्विफ्ट कार सवार बदमाशों ने हैवानियत दिखाई थी। घटना 16 सितंबर की रात 11 बजे की थी। आरोपितों ने महिला के पति के सिर पर बीयर की बोतल फोड़ी, आंख में जलती सिगरेट घुसेड़ दी। इसके बाद महिला को घसीटकर सड़क किनारे ले गए। एक बदमाश ने उस पर बीयर की बोतल उड़ेल दी। महिला को सड़क पर छेड़ा फिर कार में डालकर ले जाने की कोशिश की। दंपती के साथ उनका एक दोस्त अमित भी था। उसको भी बेरहमी से पीटा गया। पीड़ित दंपती थाना पहुंचे तो वहां प्रधान आरक्षक रामकिशन मिले। उन्होंने बिना सुने समझे मारपीट का मामला दर्ज कर खानापूर्ति करके लौटा दिया। इससे पुलिस की संवेदनहीनता और लापरवाही का उजागर हुई।

आरोपित ने स्विफ्ट कार के बीमा के कागज पुलिस को दिखाए हैं। उसने कहा कि कार उसकी खुद की है, लेकिन उसने अब तक रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है। कार पर फर्जी नंबर डालकर गाड़ी चला रहा था। गौरतलब है कि आरोपित की स्विफ्ट कार पर एमपी 07 टीई 0055 नंबर दर्ज है। परिवहन विभाग की साइट पर यह नंबर किसी अन्य कंपनी के चार पहिया वाहन का दिखाई दे रहा है।

उपचुनाव: कमलनाथ और दिग्गविजय सिंह के चक्रब्यूह से बचना मुशिकल दिख रहा शिवराज और सिंधिया की जोड़ी को

मध्य प्रदेश विधानसभा उपचुनाव (MP Assembly by-Elections) के लिए कांग्रेस में बीजेपी के बागी उम्मीदवारों को साधने में लगी है। कांग्रेस अपनी दूसरी लिस्ट में बीजेपी के कई बागी नेताओं को टिकट दे सकती है। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ सहित कांग्रेस के कई दिग्गज नेता मंथन कर रहे हैं। 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस की दूसरी लिस्ट में उन बीजेपी नेताओं के नाम हो सकते हैं जहां से बीजेपी ने कांग्रेस के बागी विधायकों को टिकट दिया है।

कांग्रेस पहले ही 15 सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर चुकी है। जबकी 13 उम्मीदवारों के नामों को लेकर मंथन जारी है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले एक हफ्ते में कांग्रेस इन सीटों पर अपने उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट जारी कर सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उपचुनाव वाले सभी विधानसभा क्षेत्रों के लिए प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ (Kamal Nath) ने तीन सर्वे कराए हैं और उसी के आधार पर उम्मीदवारों के नाम तय किए जाएंगे।

बीते दिनों कमलनाथ की मौजूदगी में भारतीय जनता पार्टी की पूर्व विधायक पारुल साहू कांग्रेस में शामिल हो गईं। साहू सागर जिले के सुरखी विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुकी हैं। उम्मीद जताई जा रही है पारुल साहू सुरखी विधानसभा उपचुनाव में शिवराज सरकार में राज्य परिवहन मंत्री और कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए गोविंद सिंह राजपूत के खिलाफ कांग्रेस के टिकट से दावेदारी कर सकती हैं। वहीं कमलनाथ कई अन्य बीजेपी के बागी नेताओं को साधने में लगे हैं।

कांग्रेस की पहली लिस्ट में 15 में से पांच उम्मीदवार ऐसे हैं जो दूसरे दलों से कांग्रेस में शामिल हुए हैं। कांग्रेस ने सर्वे में पाया कि इनका रिकॉर्ड और क्षेत्र में बेहतर जनाधार और जनता पर मजबूत पकड़ है जिसके बाद इन्हें टिकट दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, BJP और कई अन्य दल के नेता बगावत कर सकते हैं। कांग्रेस ऐसे ही बागियों को साधने में लगी है।

बहरहाल, देखना होगा कि इस उपचुनाव में शिवराज-सिंधिया फैक्टर कितना सार्थक साबित होता है और कमलनाथ की रणनीति क्या रंग लाती है। चुनाव आयोग पहले ही साफ कर चुका है कि मध्य प्रदेश में उपचुनाव बिहार चुनाव के साथ ही होंगे। चुनाव आयोग ने कहा है कि नवंबर से पहले-पहले चुनाव होंगे हांलाकि तारीख की घोषणा अभी नहीं की गई है लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि मध्य प्रदेश में 15 नवंबर तक उपचुनाव हो सकते हैं।