कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी को ईडी ने गिरफ्तार किया

नई दिल्ली. बैंक फर्जीवाड़े के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी को मंगलवार को गिरफ्तार किया। उन पर सेंट्र्ल बैंक ऑफ इंडिया से 354 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप है। जांच एजेंसी के अधिकारी के मुताबिक, एमबीआईएल के प्रबंध निदेशक दीपक पुरी, कंपनी में पूर्णकालिक निदेशक उनकी पत्नी नीता पुरी, एमबीआईएल के पूर्व कार्यकारी निदेशक और उनके बेटे रतुल पुरी के खिलाफ शनिवार को धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया था।

अधिकारी ने बताया था कि कंपनी के निदेशक संजय जैन, विनीत शर्मा और अन्य अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भी आपराधिक साजिश रचने का मामला दर्ज किया गया। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के उप महाप्रबंधक मुरली छेत्री की शिकायत पर इन सभी के खिलाफ शनिवार को मामला दर्ज किया गया। छेत्री ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि आरोपियों ने बैंक के साथ 354.51 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की थी।

रतुल पुरी अगस्तावेस्टलैंड मामले में भी जांच के घेरे में हैं। रतुल पुरी पर उनकी कंपनी के जरिए कथित तौर पर रिश्वत लेने का आरोप है। ईडी का आरोप है कि रतुल के स्वामित्व वाली कंपनी से जुड़े खातों का उपयोग रिश्वत लेने के लिए किया गया। अगस्तावेस्टलैंड हेलिकॉप्टर डील 3,600 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है।

अयोध्या केस LIVE: SC में वकील का दावा- बाबरी मस्जिद के स्लैब पर थे संस्कृत शिलालेख

रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई हो रही है. सोमवार को इस मामले की सुनवाई नहीं हो पाई थी, इसलिए अब मंगलवार को मामला आगे बढ़ रहा है. 6 अगस्त से इस मामले को सर्वोच्च अदालत में रोजाना यानी हफ्ते में पांच दिन सुना जा रहा है. सोमवार को जस्टिस बोबड़े अदालत में अनुपस्थित रहे, इसी वजह से मामला सुना नहीं गया. आज रामलला विराजमान के वकील सीएस. वैद्यनाथन एक बार फिर अदालत में अपनी दलील पेश कर रहे हैं.

20.8.2019 सुनवाई के लाइव अपडेट…

12.22 PM: रामलला के वकील के इस दावे पर जस्टिस बोबडे ने पूछा कि वो स्लैब कहां मिले थे? उन्होंने कहां से पता लगा कि स्लैब वहां से आ रही है? इसके बाद जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा कि क्या इस शिलालेख को भी लेकर चैलेंज किया गया है?

इस पर सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि स्लैब पर उत्कीर्ण कंटेंट के अनुवाद या इस शिलालेख की प्रमाणिकता को चैलेंज नहीं किया गया है बल्कि सवाल इस पर उठाया गया है कि ये स्लैब विवादित जमीन से मिला है या नहीं. इस दौरान उन्होंने 1950 में ली गई कुछ तस्वीरों को कोर्ट के सामने पेश किया गया.

12.10 PM: रामलला के वकील सीएस वैद्यनाथन ने अदालत में पाञ्चजन्य के एक रिपोर्टर की रिपोर्ट को पढ़ा और बताया कि जब 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराया गया तो जो स्लैब वहां से गिर रही थीं, उनमें संस्कृत भाषा में कुछ लिखा हुआ था. रिपोर्टर ने इसकी तस्वीर भी खींची थी, बाद में पुलिस ने उन स्लैब को जब्त कर लिया था.

11.55 AM: सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि क्या से सब ASI के द्वारा इकट्ठा किया गया था? इस पर वैद्यनाथन ने कहा कि ये ASI रिपोर्ट में नहीं था, ASI काफी बाद में आई थी. रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि मस्जिद को बनाने के लिए मंदिर तोड़ा गया था. उन्होंने ASI रिपोर्ट का हवाला देते हुए मगरमच्छ, कछुओं का भी जिक्र किया और कहा कि इनका मुस्लिम कल्चर से मतलब नहीं था.

11.43 AM: रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि 1114 AD से 1155 AD तक 12वीं शताब्दी में साकेत मंडल का राजा गोविंदचंद्र था, तब अयोध्या ही उसकी राजधानी हुआ करती थी. उन्होंने बताया कि यहां विष्णु हरि का बहुत भव्य मंदिर था, पुरातत्वविदों ने इसकी पुष्टि भी की है.

11.15 AM: रामलला के वकील सीएस. वैद्यनाथन ने अदालत में बताया कि मुस्लिम पक्ष ने पहले कहा था कि जमीन के नीचे कुछ नहीं था, लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि जो ढांचा मिला है वह इस्लामिक ढांचा है. उन्होंने कहा कि पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, भूमि के नीचे मंदिर था. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी इस रिपोर्ट पर भरोसा किया है.

रामलला के वकील की तरफ से उदाहरण देते हुए कहा गया कि आज के दौर में लोग फ्लाइट ले कर सुबह सबरीमाला के दर्शन के लिए जाते हैं और शाम को लौट आते हैं. लेकिन राम जन्मभूमि को लेकर श्रद्धालु कई सदियों से यानी तब से दर्शन के लिए आते-जाते हैं, जब कि सरयू और अन्य नदियों पर कोई पुल नहीं था.

10.50 AM: अयोध्या विवाद पर अदालत में सुनवाई शुरू हो गई है. रामलला विराजमान के वकील सी.एस. वैद्यनाथन अपनी दलीलें रख रहे हैं. उन्होंने अदालत में पुरातत्व विभाग की खुदाई में मिले सबूत पेश किए.

अभी तक की दलीलों में रामलला के वकील की तरफ से पौराणिक, ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला दिया गया, कुछ रिपोर्ट, पुरातत्व विभाग की तस्वीरें भी साझा की. सीएस. वैद्यनाथन ने अदालत में कहा कि जन्मभूमि स्थान पर बाबरी मस्जिद से पहले मंदिर था और उसके कई साक्ष्य भी थे. सुप्रीम कोर्ट में उन्होंने इस दौरान कुछ स्तंभों जिनपर भगवान के चित्र थे, उनका जिक्र किया. कुछ नक्शे भी दिखाए.

मामले की सुनवाई कर रहे जजों ने भी कई सवाल पूछे और रामलला के वकीलों से जवाब मांगे. फिर चाहे रामजन्मभूमि पर दावा करने का सबूत हो या फिर मंदिर गिराने का आदेश बाबर ने ही दिया था ऐसा कोई सबूत हो.

आपको बता दें कि मंगलवार को रोजाना सुनवाई का आठवां दिन है. 6 अगस्त तक रोजाना सुनवाई हुई, शुरुआत में निर्मोही अखाड़ा की तरफ से अदालत में अपनी दलीलों को पेश किया गया, उसके बाद से ही रामलला विराजमान के वकील अपनी बात रख रहे हैं.

SC की तरफ से आदेश दिया गया है कि कोई भी वकील जितना समय लेना चाहे वो ले सकता है, समय की कोई सीमा नहीं है. रोजाना सुनवाई से पहले अदालत ने मध्यस्थता का रास्ता भी दिया था, लेकिन उससे काम नहीं हो सका.

इस विवाद की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ कर रही है. इसमें जस्टिस एस. ए. बोबडे, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. ए. नजीर भी शामिल हैं.

आर्मी ड्यूटी से लौटे महेंद्र सिंह धौनी, गले से लिपट गई बेटी जिवा

टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और मौजूदा समय में विकेटकीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धौनी आर्मी ड्यूटी से लौट आए हैं। अपनी टेरिटोरियल आर्मी यूनिट के साथ 15 दिन की ट्रेनिंग के बाद धौनी लौटे और नई दिल्ली में अपनी पत्नी साक्षी धौनी और बेटी जिवा से मिले। आईसीसी विश्व कप खत्म होने के बाद धौनी ने क्रिकेट से ब्रेक लिया था और आर्मी ट्रेनिंग लेने का फैसला लिया था।

धौनी को लेफ्टिनेंट कर्नल की उपाधि दी जा चुकी है। धौनी ने जम्मू में 106 TA Battalion (Para) ज्वॉइन किया था। उन्होंने 31 जुलाई से 15 अगस्त तक आर्मी ड्यूटी निभाई। कश्मीर वैली में धौनी विक्टर फोर्स का हिस्सा रहे और इस दौरान पेट्रोलिंग, गार्ड और पोस्ट ड्यूटी का कार्यभार संभाला। 73वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर धौनी लद्दाख में थे। जहां वो बच्चों के साथ क्रिकेट खेलते नजर आए थे और सोशल मीडिया पर फोटो काफी वायरल भी हुई।

इसके अलावा धौनी ने लद्दाख में क्रिकेट अकैडमी खोलने का भी वादा किया है। विश्व कप के बाद से ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि धौनी इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह देंगे। विश्व कप में धौनी का प्रदर्शन मिलाजुला रहा था। धौनी टेस्ट क्रिकेट से पहले ही संन्यास ले चुके हैं और वो भारत के लिए वनडे और टी20 फॉरमैट में ही खेलते हैं। 

अचानक कैरवा डैम में आया पानी, देखें तेज बहाव में बैठे लोगों का Live रेस्क्यू ऑपरेशन

भोपाल। प्रदेशभर में झमाझम बारिश का दौर है। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों के नदी-नाले उफान पर हैं। ऐसे में कई स्थानों पर लोगों के फंसने की जानकारियां सामने आ जाती हैं, तो कहीं सोशल मीडिया पर, तेज बहाव में फंसने वाले लोगों और नदी में डूबते लोगों के वीडियो वायरल हो रहे हैं, लेकिन ताजा मामले में एक ऐसा वीडियो वायरल हुआ है जिसने इंसानियत का मिसाल पेश की है। इस घटनाक्रम से के बाद वीडियो देखने वाले यह कहते रहे कि, नगर निगम के रेस्क्यू दल में भी जान है।

मिली जानकारी के अनुसार उक्त घटनाक्रम कैरवा डैम के गेट खुलने का है। कुछ बारिश के बाद मछली पकड़ने के लिए निकले जीजा साले क्षेत्र में अचानक पानी बढ़ जाने से आई बाढ़ में फंस गए। बांध में क्षमता से अधिक पानी आने पर, गेट खोले गए, विधिवत तौर पर गेट खोले जाने के बाद भी ये दोनों लोग बहाव क्षेत्र में मौजूद रहे।

जब इन लोगों ने पानी के तेज बहाव को अपने आसपास महसूस किया तो ये घबरा उठे। इसी दौरान नगर निगम के अमले को जीजा-साले के क्षेत्र में फंसे होने की जानकारी मिली। आनन-फानन में नगर निगम के अमले ने सीढि़यां लगाकर रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया। इन युवाओं को बचा लिया गया।

डोनाल्ड ट्रंप से पीएम मोदी की फोन पर 30 मिनट तक बातचीत, नाम लिए बगैर पाक पर ऐसे साधा निशाना

जम्मू-कश्मीपर बीते कुछ समय से पाकिस्तान के साथ तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच सोमवार को टेलिफोनिक बातचीत हुई। पाक के साथ तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप से बातचीत में एक बार फिर से आतंकवाद का मुद्दा उठाया और कहा कि सीमापार से आतंकवाद रोकना जरूरी है। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी और ट्रंप के बीच करीब आधे घंटे तक फोन पर बातचीत हुई।समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मामलों पर लंबी बातचीत हुई। 

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, पीएम मोदी ने ट्रंप से पाकिस्तान से संबंध पर भी बातचीत की और कहा कि पाकिस्तान की एंटी इंडिया ऐक्टिविटी से इलाके में शांति को खतरा है, भारत ऐसी गतिविधियां बर्दाश्त नहीं करेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप से बातचीत में कहा कि उम्मीद करते हैं जल्द भारत के वाणिज्य मंत्री और अमेरिकी प्रशासन के बीच बातचीत होगी और द्विपक्षीय व्यापार को आगे बढ़ाएंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत में कहा कि क्षेत्र में कुछ नेताओं द्वारा भारत के विरूद्ध हिंसा के लिए भड़काना और बयानबाजी करना शांति के अनुकूल नहीं है। साथ ही पीएम मोदी ने आतंकवाद एवं हिंसा मुक्त माहौल बनाने और सीमापार से आतंकवाद पर रोक लगाने के महत्व को रेखांकित किया। 

वहीं, सरकारी अधिकारी ने कहा कि पीएम मोदी और ट्रंप के बीच 30 मिनट तक बातचीत ”गर्मजोशी भरी और सौहार्दपूर्ण तरीके से हुई और इसमें द्विपक्षीय, क्षेत्रीय मामले शामिल थे। 

योगगुरू रामदेव छात्रों को देंगे वेदों की शिक्षा, अगले सत्र से शुरू हो रहा है देश का पहला वैदिक शिक्षा बोर्ड

देश के पहले वैदिक शिक्षा बोर्ड पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय का विचार पूरा हो चुका है और अब अगले सत्र से ही यह शिक्षा बोर्ड देश भर के स्‍कूल कॉलेजों में काम शुरू करेगा। बोर्ड के निदेशन मंडल का चयन भी पूरा हो चुका है तथा योग गुरू रामदेव इस बोर्ड के आजीवन अध्‍यक्ष रहेंगे। वैदिक शिक्षा बोर्ड, आगामी सत्र से ही लागू होने जा रहा है। बोर्ड अब अन्‍य शिक्षा बोर्डों की तरह ही स्‍कूल कॉलेजों से जुड़कर पढ़ाई कराएगा। बोर्ड का सिलेबस भी तैयार कर लिया गया है।

ज्ञात हो कि रामदेव पहले ही देश में प्राचीन और अर्वाचीन शिक्षा पद्यति के प्रचार प्रसार के लिए 8वीं कक्षा तक के लिए आचार्यकुलम की स्‍थापना कर चुके हैं। योजना थी कि इसी कार्यकुलम को आगे की कक्षाओं के लिए भी आगे बढ़ाया जाए मगर बाद में 8वीं से आगे की कक्षाओं के लिए अलग से शिक्षा बोर्ड का ढांचा तैयार कर मानव संसाधन मंत्रालय के सामने सौंपा गया। इस बोर्ड से सम्‍बद्ध स्‍कूल/कॉलेजों में वैदिक और आधुनिक शिक्षा एक साथ दी जाएगी।

बोर्ड का मुख्‍यालय फिलहाल पतंजलि योगपीठ में है जिसे जल्‍द ही देश की राजधानी दिल्‍ली में शिफ्ट किया जाएगा। संबद्ध विद्यालयों में वेदों की शिक्षा भी दी जाएगी जो देश में इस प्रकार का पहला प्रयास है। CBSE बोर्ड द्वारा जितने भी पाठ्यक्रम वर्तमान में मान्य हैं, उन सभी को वैदिक शिक्षा बोर्ड में शामिल किया जाएगा।

J&K: बैन के बावजूद चल रहा था अली शाह गिलानी का इंटरनेट? दो BSNL कर्मी सस्पेंड

श्रीनगर 
जम्मू-कश्मीर में धारा 370 के ज्यादातर प्रावधानों को हटाए जाने के बाद मोबाइल और इंटरनेट सेवा पर बैन लगा हुआ है। कश्मीर घाटी में अभी सिर्फ लैंडलाइन फोन ही चालू किए गए हैं। इस बीच कम्यूनिकेशन पर बैन के बावजूद अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी का कथित रूप से इंटरनेट चलने के मामले में बीएसएनएल ने अपने दो कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है। आरोप है कि दोनों ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के नाता अली शाह गिलानी को प्रतिबंध को ताक पर रखकर इंटरनेट लिंक मुहैया कराया हुआ था। इस दौरान गिलानी ने अपने कथित अकाउंट से कई ट्वीट भी किए थे। हालांकि यह अकाउंट वेरिफाइड नहीं है। गिलानी के इस कथित अकाउंट से ट्वीट होने के बाद सवाल उठे कि जब पूरे प्रदेश में इंटरनेट पर बैन लगा हुआ था तो गिलानी के पास कैसे यह सुविधा पहुंची। 4 अगस्त के बाद से इस अकाउंट से कई आपत्तिजनक ट्वीट किए गए।

 14 दिन बाद श्रीनगर में खुले स्कूल 

बता दें कि अनुच्छेद 370 पर केंद्र सरकार के ऐक्शन के बाद शनिवार को 96 में से 17 टेलिफोन एक्सचेंज चालू करते हुए कश्मीर में लैंडलाइन फोन सेवा शुरू हुई थी। इस बीच सोमवार को श्रीनगर के 190 से ज्‍यादा प्राइमरी स्‍कूल करीब 14 दिनों बाद फिर से खोल दिए गए हैं। बीते कई दिनों से पढ़ाई का काम बाधित होने के बाद तमाम छात्र स्कूलों की क्लासेज में जाते नजर आए हैं। 

अधिकारियों का कहना है कि सीनियर क्लासेज के स्कूल कुछ वक्त बाद खोले जाएंगे। जितने दिनों तक स्‍कूल बंद रहे हैं, उनके बदले इस महीने के बाद में पूरक कक्षाएं लगाई जाएंगी। हालात सामान्‍य होते ही अन्‍य जिलों के स्‍कूल भी खोल दिए जाएंगे। दूसरी ओर, किसी भी अव्‍यवस्‍था से निपटने के लिए सेना समेत अन्‍य सुरक्षा बल 24 घंटे मोर्चे पर तैनात हैं। 

10 और टेलिफोन एक्सचेंज चालू 
इससे पहले घाटी में रविवार को 10 और टेलिफोन एक्सचेंजों ने काम करना फिर से शुरू कर दिया। हालांकि, पहले बहाल 17 एक्सचेंज में से एक पर सेवाएं रोक दी गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन को लैंडलाइन फोन का इस्तेमाल दुष्प्रचार अभियान में करने की जानकारी मिलने के बाद एक एक्सचेंज पर सेवाएं फिर से रोकी गई हैं। घाटी में मौजूद 50,000 टेलिफोन फिक्स्ड लाइन में 28,000 को चालू कर दिया गया है। 

रविवार को जिन टेलिफोन एक्सचेंज का परिचालन शुरू किया है, वे हैं श्रीनगर जिले मेंडल झील, सचिवालय और निशात, उत्तरी कश्मीर में पट्टन, बोनियार और बारामुला, बडगाम जिले के चाबुरा और चरार-ए-शरीफ और दक्षिण कश्मीर की ऐशमुकाम। पांच अगस्त को केंद्र की ओर से अनुच्छेद-370 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष दर्जे को खत्म करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेश में विभाजित करने की घोषणा से पहले राज्य में लैंडलाइन फोन और इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई थीं। 

सिर्फ इनकमिंग कॉल की मिलेगी सुविधा 
कश्मीर में मोबाइल सर्विस की बहाली इस हफ्ते के आखिर तक होने की उम्मीद है। सूत्रों ने कहा कि शुरुआत में केवल इनकमिंग कॉल की सुविधा दी जाएगी। इससे यहां के स्थानीय लोग जम्मू-कश्मीर से बाहर अन्य राज्यों से कॉल अटेंड कर सकेंगे और आईएसडी कॉल की सुविधा भी प्राप्त कर सकेंगे, जबकि मोबाइल इंटरनेट अभी कुछ समय तक बंद ही रहेगा। 

दिल्ली में सबसे बड़ी बाढ़ का खतरा, हेल्पलाइन नंबर्स जारी, अब तक के सभी अपडेट्स यहां

राजधानी में 40 साल बाद बड़ी बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। विभिन्न इलाकों को बाढ़ और संभावित तबाही से बचाने के लिए दिल्ली सरकार अलर्ट मोड में है। दिल्ली के सीएम ने अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि उनकी सरकार 24 घंटे स्थिति पर नजर बनाए हुई है। उन्होंने लोगों से राज्य सरकार द्वारा बनाए गए टेंट में पहुंच जाने का आग्रह किया है। राज्य सरकार ने लोगों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी कर दिया है।

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राज्य सरकार निचले इलाकों से लोगों को निकाल रही है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की पहली प्राथमिकता है कि किसी प्रकार के जान का नुकसान नहीं हो। उन्होंने कहा कि आज मध्य रात्रि से लेकर अगले दो दिन में यमुना में हथिनीकुंड बैराज का पानी पहुंच जाएगा। राज्य सरकार 24 घंटे स्थिति पर नजर बनाए हुई है। केजरीवाल ने लोगों से अपने बच्चों पर ध्यान देने को कहा है। उन्होंने कहा कि लोगों को हटाने के लिए लगातार मुनादी कराई जा रही है। 

हेल्पलाइन नंबर जारी 

दिल्ली सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी कर दिए हैं। सरकार ने कहा कि आने वाले दो दिन काफी गंभीर हैं। किसी प्रकार की मदद के लिए 011-22421656 और 011- 21210849 पर कॉल की जा सकती है। 

बना नया खतरे का निशान 
यमुना नदी का जलस्तर सोमवार सुबह 9 बजे 204.70 मीटर पर पहुंच चुका था। यह चेतावनी के निशान 204.50 मीटर के पार है। हालांकि अब खतरे का नया निशान 205.33 मीटर घोषित किया गया है, जिसे यमुना शाम तक पार कर लेगी। 

सरकार ने बुलाई आपातकाल बैठक 
दिल्ली सरकार ने बाढ़ के खतरे को देखते हुए आपतकालीन बैठक भी बुलाई थी। इसकी अध्यक्षता दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल ने की थी। यह बैठक एक बजे हुई थी। सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण विभाग के अलावा अन्य विभाग भी ऐक्टिव। 

लोहे का पुल बंद 
बढ़ते जलस्तर की वजह से लोहे के पुल का ट्रैफिक बंद कर दिया गया है। हालांकि, उसपर से ट्रेनों की आवाजाही फिलहाल जारी है। 12 बजे के बाद यमुना का जल स्तर 204.88 मीटर पर पहुंच गया था। 

पार कर सकता है 207 मीटरकेंद्रीय जल आयोग का कहना है कि बैराज से जितना पानी छोड़ा गया है, उससे आशंका है कि यमुना का जलस्तर 207 मीटर को पार कर जाएगा। लेकिन उससे ऊपर कितना बढ़ेगा, उसके बारे में कन्फर्म नहीं कहा जा सकता। 2013 में यह 207.32 मीटर पार हुआ था। अब यह पानी 208 मीटर पहुंचेगा या नहीं, इसको लेकर कुछ कहना जल्दबाजी होगी। 

हमारी हालात पर 24 घंटे नजरें बनी हुई हैं। इसपर मीटिंग भी हुई है। जान का नुकसान नहीं हो इसके उपाय किए जा रहे हैं। लोग आज शाम 6-7 बजे तक टेंट्स में आ जाएं। आज आधी रात से परसों तक यमुना में पानी पूरे वेग के साथ आ सकता है। तटीय इलाकों के लोग घर खाली कर दें। आने वाले दो दिन काफी मुश्किल हैं।

हजारों लोगों को तटीय इलाके से हटायामुनादी करवाकर यमुना की तलहटी में बसे लोगों से जगह खाली करवाई जा रही है। सुबह तक करीब 5 हजार लोगों को यमुना किनारे पुश्तों पर लगाए टेंट में शिफ्ट करने का काम चल रहा था। 

नाव और गोताखोर तैयार 
44 बोट्स के साथ 27 गोताखोरों की टीमों भी अलग-अलग स्थानों पर तैनात है। सोमवार सुबह से अधिकारियों ने खुद बोट में बैठकर यमुना के किनारों का इंस्पेक्शन शुरू कर दिया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वहां चेतावनी के बाद भी कोई रह तो नहीं रहा है। 

मिट्टी के बोरे से बना रहे दीवार 
दिल्ली में बाढ़ के संभावित खतरे को देखते हुए प्रसाशन अलर्ट है। आईएसबीटी के कुदसिया घाट पर बाढ़ के पानी को सड़कों पर पहुंचने से रोकने के लिए सुबह वह हरकत में दिखा। मिट्टी बोरों में भरकर दीवार बनाने का काम चल रहा था। 

पिछले 40 साल में इतना पानी 
हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से रविवार को 8.72 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, यह आज शाम तक दिल्ली पहुंच जाएगा। दिल्ली की तरफ 40 साल बाद इतना पानी छोड़ा गया है। यमुना में इतना पानी अबतक नहीं छोड़ा गया था। 1978 में यमुना में सबसे बड़ी बाढ़ आई थी और तब हरियाणा से 7 लाख क्यूसेक ही पानी छोड़ा गया था। 

UNSC में कश्मीर पर जीता भारत, लेकिन इन 3 चुनौतियों से पाना होगा पार

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पिछले सप्ताह कश्मीर के मुद्दे पर भारत की कूटनीति ने चीन की कोशिशों को नाकाम कर दिया हालांकि अभी भारत की चुनौतियां कम नहीं हुई हैं. मोदी सरकार के जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने के बाद से ही पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने में जुटा हुआ है जिसमें उसे चीन का भरपूर साथ मिल रहा है.

हालांकि, यूएस और फ्रांस ने भारत का साथ देते हुए कश्मीर को आंतरिक मुद्दा करार दिया जिससे ना संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में औपचारिक चर्चा का प्रस्ताव पेश हो सका और ना ही भारत के विरोध में कोई बयान आया. शीतयुद्ध के वक्त से यूएनएससी में कश्मीर मुद्दे पर भारत का साथ देते आए रूस ने साफ कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच सारे विवाद द्विपक्षीय स्तर पर ही सुलझाने जाने चाहिए. वहीं, ब्रिटेन चीनी रुख की तरफ झुकते हुए यूएनएससी की तरफ से कश्मीर पर बयान जारी करने की मांग कर रहा था.

हालांकि, यूएनएससी में सामूहिक राय भारत के ही पक्ष में ही रही लेकिन भारत के सामने कूटनीतिक चुनौतियां मुंह बाएं खड़ी हैं. नई दिल्ली इस्लामाबाद के यूएनएससी में राजनीतिक  दावे को तो बड़ी आसानी से खारिज कर सकता है लेकिन इस्लामाबाद के चीन की मदद से यूएनएससी में बार-बार कश्मीर मुद्दा उठाने के इरादे को भारत किसी भी सूरत में नजरअंदाज नहीं कर सकता है. अगली बार यूएनएससी में कश्मीर मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देता है, यह वहां के जमीनी हालात पर भी काफी कुछ निर्भर कर सकता है.
विश्लेषकों का कहना है कि पोखरण परमाणु परीक्षण-2 के बाद से किसी घरेलू घटनाक्रम से पहली बार इतनी बड़ी कूटनीतिक चुनौती पेश हुई है. पोखरण परमाणु परीक्षण के वक्त जिन देशों की भूमिका थी, इस बार भी वही खिलाड़ी हैं हालांकि भारत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में 1998 में ज्यादा मजबूत स्थिति में आ चुका है.

भारत के सामने पहली चुनौती नागरिक स्वतंत्रता की बहस को लेकर भारत की स्थिति को मजबूत करना है. न्यू यॉर्क/लंदन के पत्रकार, ऐक्टिविस्ट, पाकिस्तानी स्टेट एजेंट लगातार कश्मीर में मानवाधिकार को लेकर मोदी सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं और तमाम आरोप लगा रहे हैं.

कश्मीर में कानून व्यवस्था खराब होने या किसी भी सूरत में नागरिकों के खिलाफ अगर सैन्य ताकत का इस्तेमाल करना पड़ता है तो इससे भारत का अंतरराष्ट्रीय समुदाय का समर्थन कमजोर पड़ सकता है. पाकिस्तान के साथ लगी सीमा (LoC) पर किसी भी तरह का सैन्य संघर्ष भी अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा माना जा सकता है और यूएनएससी के राजनीतिक हस्तक्षेप का रास्ता खोल सकता है. पाकिस्तान घाटी में हिंसा फैलाने की भी कोशिश कर सकता है.

पाकिस्तान के अलावा, कश्मीर मुद्दे पर दो देश खुद ही थर्ड अंपायर बन गए हैं- चीन और यूके. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन और यूके का विरोध फ्रांस, यूएस और कुछ अन्य छोटे देशों के समर्थन की वजह से दब गया. जब चीन ने सामूहिक बयान जारी करने की मांग की तो रूस ने मध्यम मार्ग अपनाते हुए ना समर्थन किया और ना ही विरोध.

यूके के इस रवैये के पीछे दो वजहें हैं. ब्रिटेन की राजनीति में पाकिस्तानी मूल के लोगों की अच्छी-खासी भूमिका और प्रभाव है जिसकी वजह से लंदन को भारत-विरोधी रुख अपनाना पड़ रहा है. ब्रिटिश राजनयिक जब मीरपुर (PoK-पाक अधिकृत कश्मीर) के मूल नागरिकों के बारे में बात करते हैं तो उसे ‘हमारे कश्मीरी समुदाय’ कहकर बुलाते हैं. ये आबादी यूके में अपनी पहचान पाकिस्तानी समुदाय के तौर पर करती है.

इसके अलावा, ब्रिटेन का एक धड़ा मानता है कि कश्मीर विवाद को “सुलझाने” में उनकी भी कोई भूमिका है. भारत के स्वतंत्रता दिवस पर लंदन में भारतीय उच्चायोग के सामने हिंसा की घटनाओं पर स्थानीय अधिकारियों ने कड़ी प्रतिक्रिया तक नहीं दी.

भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती चीन है जिसने यूएनएससी में भारत के खिलाफ अपना पूरा जोर लगाने का सिग्नल दे दिया है. बीजिंग ने दिल्ली पर कश्मीर में राजनीतिक यथास्थिति बदलने को लेकर चीन की संप्रभुता को चुनौती देने का आरोप लगाया है. यही नहीं, कूटनीतिक इतिहास में वह पहली बार मानवाधिकारों के उल्लंघन की बात कर रहा है. वह भी तब, जब वह हॉन्ग कॉन्ग में प्रदर्शनकारियों का सामना कर रहा है और शिनजियांग में मुस्लिमों को हिरासत केंद्र में रखे जाने को लेकर दुनिया भर में आलोचना झेल रहा है. हालांकि, कश्मीर मुद्दे पर अब भारत बहुत मजबूत स्थिति में आ चुका है और अरब देश भी भारत के साथ खड़े हैं. अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए अब कश्मीर मुद्दा अतीत बनता जा रहा है.

वैसे भी, चीन की मुख्य चिंता कश्मीर नहीं बल्कि लद्दाख है. लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने के बाद अब लद्दाख पर केंद्र सरकार का सीधा नियंत्रण होगा जिसकी वजह से चीन परेशान है. चीन ने सक्षगाम घाटी और अक्साई चिन पर कब्जा जमा रखा है. चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के तहत ऐसा इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया गया है जिसका दोहरा इस्तेमाल हो सकता है, यानी गिलगिट-बाल्टिस्तान में चीन इसी बहाने अपनी सैन्य ताकत को भी मजबूत कर रहा है. तिब्बत और शिनजियांग में कब्जे और सैन्यकरण के जरिए चीन ने ऐतिहासिक बफर जोन को सशस्त्र सेना से लैस कर दिया है.

कश्मीर पर भारत को घरेलू, सीमा पार और अंतरराष्ट्रीय तीनों मोर्चों पर बहुत ही सावधानी से आगे बढ़ने की चुनौती है क्योंकि एक भी मोर्चे पर असफलता भारत के लिए मुश्किल पैदा कर सकती है.